रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीजीएमएससी घोटाला मामले में ईओडब्लू ने गिरफ्तार 6 आरोपियों के विरुध्द स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दिया है। ईओडब्लू ने कोर्ट को सूचित किया है कि, मामले में अग्रिम विवेचना जारी है।
इनके खिलाफ चार्जशीट
ईओडब्लू ने मोक्षित मेडिकेयर लिमिटेड के संचालक शशांक चोपड़ा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन के अधिकारी बसंत कौशिक, क्षिरौद्र रौतिया, डॉ अनिल परसाई, कमलाकांत पाटनवार और दीपक बँधे के विरुध्द चार्जशीट पेश की है।
क्या है सीजीएमएससी घोटाला
ईओडब्लू का आरोप है कि, राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जाँच उपलब्ध कराने के लिए सभी जिला अस्पतालों, एफआरयू सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में हमर लैब योजना के तहत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरणों और रीएजेंटस की निविदा में पुल टेंडरिंग और आवश्यक मात्रा से कहीं अधिक रीएजेंटस अनावश्यक खरीदी कर करोड़ों रुपये की शासकीय राशि का गबन कर राज्य सरकार को करीब 550 करोड़ रुपए का नुक़सान पहुंचाया गया। यही मसला सीजीएमएससी घोटाला कहा जाता है।
18 हज़ार पन्नों की चार्जशीट
ईओडब्लू ने जो चार्जशीट जमा की है वह 18 हज़ार पन्नों की है। इन 18 हजार पन्नों को लेकर एसीबी ईओडब्लू के वरीय अधिकारी ने बताया है कि, इनमें चार्जशीट और अपराध को प्रमाणित करने वाले संबंधित अभिलेखों शामिल है।
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सीजीएमएससी मामले में EOW ने रायपुर कोर्ट में 6 आरोपियों के विरुध्द 18 हजार पन्नों का चालान पेश कर दिया है…
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भारतमाला प्रोजेक्ट में भू अर्जन घोटाला मामले को लेकर EOW ने प्रदेश में 20 परिसरों पर छापे डाले हैं इनमें पटवारी से लेकर डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल है…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट में भू अर्जन घोटाले को लेकर ईओडब्लू ने गुरुवार याने 24 अप्रैल को एफआईआर दर्ज कर शुक्रवार को राज्य में 20 जगहों पर छापा मार कर कार्यवाही की है। राज्य के चार शहरों के बीस परिसरों में ईओडब्लू की टीम ने दबिश दी है। जिन जगहों पर यह टीम गई उनमें पटवारी से लेकर डिप्टी कलेक्टर तथा कुछ निजी व्यक्ति शामिल हैं।
विधानसभा में CLP डॉ महंत ने उठाया था मुद्दा
यह मसला प्रदेश में तब गूंजा जबकि विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने इस घोटाले को सदन में उठाया और CBI जांच की मांग कर दी। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने तब सदन में कहा था-“मसला भ्रष्टाचार का है, यह एक ऐसा भ्रष्टाचार है जिसकी व्यापकता पूरे प्रदेश में है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि, आप ही के कार्यकाल में यह भ्रष्टाचार हुआ। जिसके भी कार्यकाल में यह भ्रष्टाचार हुआ, जांच होनी चाहिए। प्रदेश में सीबीआई की जांच कई मामलों में आप करा रहे हैं, इस मामले की जांच भी सीबीआई से करा लीजिए। भले दोषी कोई निकले पर जाँच सीबीआई से कराइए वर्ना मैं कोर्ट जाउंगा।”
अज्ञात कारणों से सीबीआई जांच नहीं
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत के इस तेवर के बाद अज्ञात कारणों से सत्ता पक्ष यह नहीं कह पाया कि, मामले की सीबीआई जांच होगी। सरकार की ओर से राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में एक लिखित बयान पढा जिसमें यह बताया गया कि, मामले की जांच ईओडब्लू को सौंपी जा रही है। नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत सरकार के इस बयान से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह से कहा “यदि सीबीआई जांच नहीं हुई तो मैं कोर्ट जाउंगा। क्या आप इसकी अनुमति देते हैं।” इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा – “आपको कौन रोक सकता है।” हालिया दिनों नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने पीएमओ पत्र भेज कर पूरे घोटाले की जानकारी देते हुए सीबीआई जांच की मांग की, जिस पर पीएमओ की ओर से जवाबी पत्र भी आया। विश्वसनीय सूचना है कि, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत जल्द ही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।
क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट में गड़बड़ी का मामला
भारतमाला प्रोजेक्ट एन एच याने राष्ट्रीय राजमार्ग की ही एक परियोजना है। यह प्रदेश के कई हिस्सों से होकर गुजरती है। इस परियोजना के तहत जबकि सड़क बनाई जानी थी तो प्रस्तावित सड़क परियोजना के लिए ज़मीनों का अधिग्रहण हुआ था। इस अधिग्रहण में ही भ्रष्टाचार का खेल हो गया। अभिलेखों से यह प्रारंभिक स्तर पर स्थापित प्रमाण मिलते हैं कि, पटवारी, आर आई, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के प्रभाव में गलत मुआवजा बनाया और शासन को करोड़ों की चपत लगी। आरोप हैं कि, भू अर्जन में वास्तविक व्यक्ति की जगह अन्य को मुआवजा देने, गैर प्रभावित को प्रभावित बताकर मुआवजा देने, एक खसरे और रकबा को कई खंडों में विभाजित कर अधिक मुआवजा देने जैसे भ्रष्टाचार इस परियोजना में किए गए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने पूरे प्रदेश में हुई गड़बड़ी का जिक्र करते हुए इसमें हजार करोड़ से अधिक की गड़बड़ी होने की आशंका जताई थी।
ईओडब्लू की कार्यवाही का आधार
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो याने ईओडब्लू ने भारतमाला परियोजना के अभनपुर इलाके में हुई गड़बड़ी का मसला जांच के दायरे में लिया है। ईओडब्लू की एफआईआर 30/2025 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 7 सी के साथ आईपीसी की धारा 467,468,471,420 और 120 बी प्रभावी है। यह एफआईआर रायपुर कलेक्टर के द्वारा इस परियोजना के भी अर्जन में गड़बड़ी की पांच शिकायतों की तीन जांच रिपोर्ट का हवाला देती है। पहला जांच प्रतिवेदन 30 जनवरी 2023 का है, जबकि दूसरा जांच प्रतिवेदन 19 जुलाई 2023 का है, और तीसरा जांच प्रतिवेदन 11 सितंबर 2023 का है। ईओडब्लू की एफआईआर में प्रथम दृष्टया यह घोटाला पांच गांव में 48 करोड़ का है।
ये हैं नामजद आरोपी
ईओडब्लू की एफआईआर में आठ आरोपी नामजद हैं। ये वही आरोपी हैं जिनका जिक्र राज्य सरकार के तीनों जांच प्रतिवेदन में दोषियों के रूप में हुआ है। इनमें निर्भय साहू तत्कालीन एसडीएम अभनपुर, दिनेश पटेल हल्का पटवारी, रोशन वर्मा राजस्व निरीक्षक, शशिकांत वर्मा, जितेंद्र साहू तत्कालीन हल्का पटवारी नायक बाँधा, बसंती धृतलहरे, लखेश्वर प्रसाद किरण तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा, लेखराम देवांगन पटवारी ग्राम क्रमांक 24। इन नामजद के साथ साथ आरोपियों के संदर्भ में लिखा गया है-“एवं अन्य तथा मुआवजा राशि प्राप्त करने वाले अन्य प्रायवेट व्यक्ति।”
ईओडब्लू की जांच का दायरा बढ़ेगा
ईओडब्लू/एसीबी के सूत्र ने यह संकेत दिए हैं कि, भारतमाला परियोजना में हुई गड़बड़ी को लेकर यह प्रारंभिक कार्यवाही है। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत राज्य के अन्य हिस्सों से जांच प्रतिवेदन प्रतीक्षित है। जैसे ही अन्य जांच प्रतिवेदन आएगें कार्यवाही का दायरा बढ़ जायेगा। वरीय अधिकारी ने कहा ” जांच की शुरुआत हो चुकी है। दायरा बढ़ेगा तो एफआईआर की संख्या भी बढ़ सकती है।”
महंत बोले- “इस जांच से सहमत नहीं”
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य सरकार की एजेंसी द्वारा की जा रही जांच को लेकर कहा है कि वे इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं। डॉ महंत ने सवालिया लहजे में कहा “योजना केंद्र की, पैसा केंद्र का, गड़बड़ी करने वाले प्रभावशाली लोग, जांच केंद्रीय एजेंसी को ही करना चाहिए -

रेलवे के मुख्य अभियंता समेत चार लोग रिश्वतकांड में गिरफ्तार,सीबीआई की बड़ी कार्यवाही….
रायपुर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के मुख्य अभियंता (आईआरएसई: 2000) सहित चार लोगों को 32 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में अधिकारी के एक पारिवारिक सदस्य, एक निजी कंपनी के प्रबंध निदेशक और उक्त कंपनी का एक कर्मचारी शामिल हैं. यह कार्रवाई रेलवे ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार के नेटवर्क को तोड़ने के बाद की गई. सीबीआई ने मुख्य अभियंता,निजी कंपनी,इसके प्रबंध निदेशक और कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप है कि मुख्य अभियंता ने निजी कंपनी के पक्ष में रेलवे के ठेके और कार्य आदेशों में अनुचित लाभ देने के लिए रिश्वत ली. यह राशि उनके निर्देश पर उनके पारिवारिक सदस्य ने रांची में प्राप्त की. जांच में पता चला कि निजी कंपनी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए विभिन्न निर्माण कार्य कर रही थी, जिसमें छोटे-बड़े पुल, रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी), और ट्रैक लाइनिंग जैसे कार्य शामिल थे. प्रबंध निदेशक ने अपने बेटे को बताया था कि मुख्य अभियंता के साथ मुलाकात के बाद 32 लाख रुपये की रिश्वत तय की गई थी, ताकि कंपनी के लंबित मामलों को उनके पक्ष में निपटाया जा सके.सीबीआई ने 25 अप्रैल 2025 को जाल बिछाकर मुख्य अभियंता को तब पकड़ा, जब उनके पारिवारिक सदस्य ने निजी कंपनी के प्रतिनिधि से रांची में 32 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की.रिश्वत की राशि सीबीआई ने पारिवारिक सदस्य के कब्जे से बरामद की. वर्तमान में बिलासपुर और रांची सहित कई स्थानों पर तलाशी अभियान चल रहा है. तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और नकदी बरामद की गई है. जांच अभी जारी है. -

भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाली चिनाब नदी का पानी रोका…
नई दिल्ली। 24 अप्रैल 2025 को भारत ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इस फैसले के तहत, भारत ने चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान की ओर जाने से पूरी तरह रोक दिया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पाकिस्तान को भारत से पानी की एक भी बूंद नहीं मिलेगी।” यह निर्णय जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दिल दहलाने वाले आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसमें 26 लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, अपनी जान गंवा बैठे।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा रुख
पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से जोड़ा गया, जिसके बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कड़ा कदम उठाया। सरकार का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देने और सीमा पार से घुसपैठ के कारण सिंधु जल संधि अब भारत के हितों के खिलाफ है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। मंत्री पाटिल ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मोदी सरकार का यह निर्णय राष्ट्रहित में है। हम सुनिश्चित करेंगे कि सिंधु नदी का एक बूंद पानी भी पाकिस्तान न पहुंचे।”
चिनाब का पानी रोका, पाकिस्तान में असर
चिनाब नदी पर बने बगलिहार जलविद्युत परियोजना के जरिए भारत ने नदी के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना शुरू कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सियालकोट के मारला हेडवर्क्स में चिनाब नदी का जलस्तर तेजी से गिर गया। चिनाब नदी पाकिस्तान की कृषि और पेयजल आपूर्ति की रीढ़ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की कमी से उनकी रोजी-रोटी और जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।
हालांकि, भारत का कहना है कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। सरकार ने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सिंधु जल संधि: एक नजर में
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का एक महत्वपूर्ण समझौता है। इसके तहत:
– पूर्वी नदियाँ (सतलुज, ब्यास, रावी) मुख्य रूप से भारत के उपयोग के लिए हैं।
– पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) मुख्य रूप से पाकिस्तान के लिए हैं, लेकिन भारत को जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सीमित अधिकार है।
पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने चिनाब और झेलम नदियों पर कई जलविद्युत परियोजनाएँ शुरू कीं, जिन पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी। भारत ने हमेशा कहा कि ये परियोजनाएँ संधि के नियमों के अनुरूप हैं। लेकिन अब, संधि को निलंबित करने का फैसला भारत की आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत की योजना: पानी का उपयोग अपने लोगों के लिए
भारत सरकार ने संकेत दिया है कि चिनाब और अन्य नदियों का पानी अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, और अन्य राज्यों में सिंचाई, बिजली उत्पादन, और पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाएगा। -

कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी, सजा मिलकर रहेगी” पीएम मोदी का पहलगाम आतंकी हमले पर पहला बयान…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम के आतंकी हमले पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस पर बिहार के मधुबनी में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन से पहले पहलगाम में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा. प्रधानमंत्री मोदी ने वहां पहली बार पहलगाम आतंकी हमले पर सार्वजनिक संबोधन में कहा कि इस हमले के ज़िम्मेदार आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देनेवालों को ‘कल्पना से भी बड़ी सज़ा’ मिलेगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद पूरा देश व्यथित है. उन्होंने कहा,” 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने मासूम देशवासियों को जिस बेरहमी से मारा है, उससे पूरा देश व्यथित है. कोटि-कोटि देशवासी दुखी हैं. पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है.इन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है. वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है. इस आतंकी हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने अपना जीवनसाथी खोया. इनमें से कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ बोलता था, कोई मराठी, कोई गुजराती था, कोई यहां बिहार का लाल था. आज उन सभी की मृत्यु पर करगिल से कन्याकुमारी तक हमारा दुख और आक्रोश एक जैसा है.”
मिट्टी में मिला देने का समय आ गया है”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,” ये हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है. देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है. मैं बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं, जिन्होंने ये हमला किया है उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचनेवालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी. सजा मिलकर के रहेगी. बची-खुची ज़मीन को भी मिट्टी में मिला देने का समय आ गया है. 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति अब आतंक के आकाओं की कमर तोड़कर रहेगी.”प्रधानमंत्री मोदी ने सारी दुनिया को दिया संदेश
पहलगाम के आतंकी हमले के बाद से पूरे देश में आक्रोश और शोक का माहौल है और ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के आज के संबोधन पर सारे देश और दुनिया का ध्यान था. प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की जनसभा में अंग्रेज़ी में भी अपनी बात रखी. इसका संकेत स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री अपनी बात सारी दुनिया तक पहुंचाना चाहते थे.
“जिन्होंने ये हमला किया है उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचनेवालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी. सजा मिलकर के रहेगी. बची-खुची ज़मीन को भी मिट्टी में मिला देने का समय आ गया है.”
प्रधानमंत्री ने अंग्रेज़ी में कहा,”आज बिहार की मिट्टी से मैं पूरी दुनिया से ये कहना चाहता हूं कि भारत एक-एक आतंकवादी की पहचान करेगा और उसे ट्रैक करेगा और उन्हें तथा उनको शह देनेवालों को सज़ा देगा. हम दुनिया के आखिरी कोने तक उनका पीछा करेंगे. भारत का हौसला किसी भी आतंकवाद से कभी भी नहीं टूटेगा. आतंकवाद को सज़ा मिल कर रहेगी.”
“न्याय सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा. पूरा देश इसके लिए संकल्पबद्ध है. मानवता में विश्वास करनेवाला हर व्यक्ति हमारे साथ है. मैं दुनिया के विभिन्न देशों के लोगों और उनके नेताओं का इस घड़ी में हमारे साथ रहने के लिए आभार प्रकट करता हूं.” -

30 अप्रैल तक लगवाना होगा एचएसआरपी नंबर प्लेट, नहीं तो होगी कार्रवाई
रायगढ़ जिले में 2019 से पहले पंजीकृत सभी पुराने वाहनों के लिए हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगवाना अब अनिवार्य कर दिया गया है। परिवहन विभाग द्वारा इसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2025 निर्धारित की गई है। तय समय-सीमा के भीतर यदि वाहन में एचएसआरपी प्लेट नहीं लगाई जाती है, तो वाहन मालिकों पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। वाहन मालिक https://cgtransport.gov.in वेबसाइट पर जाकर एचएसआरपी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर जाकर वाहन का विवरण दर्ज कर संबंधित विकल्प का चयन किया जा सकता है। यदि किसी को ऑनलाइन आवेदन में कठिनाई हो, तो वह समीपस्थ परिवहन सुविधा केंद्र जाकर भी सहायता प्राप्त कर सकते है।
जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि जिन वाहन मालिकों का मोबाइल नंबर परिवहन पोर्टल में अपडेट नहीं है वे https://vahan.parivahan.gov.in/vahanservice/vahan/ui/eapplication/from_eApplicatonHome.xhtml इस लिंक के माध्यम से मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं। मोबाइल अपडेट न होने की स्थिति में जिला परिवहन कार्यालय रायगढ़ में एचएसआरपी काउंटर में संबंधित डिटैल्स देकर मोबाइल नंबर अपडेट करा सकते है। एचएसआरपी तकनीकी समस्या के संबंध में 9818188721, 7987449021 एवं मोबाइल नंबर अपडेट संबंधी सहायता हेतु 8770785575 पर संपर्क कर सकते है। -

CG – IPS हैं या धनकुबेर : कोई करोड़पति तो कोई लखपति, किसी के पास एक मकान नहीं, जानिए कौन IPS कितना धनवान
रायपुर। प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया है। अधिकांश अधिकारियों की संपत्ति में बीते पांच सालों के दौरान इजाफा हुआ है, लेकिन कुछ अधिकारियों की संपत्ति जस की तस है, वहीं कुछ अधिकारियों की संपत्ति में कमी आई है! इन अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा आपके साथ साझा कर रहे है।
छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस अफसरों की संपत्ति में सबसे अधिक वृद्धि डीजी पवनदेव की हुई है, जिनके पास सर्वाधिक 3 करोड़ 88 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। 2020 से तुलना करें तो इनकी घोषित संपत्ति में 525% का इजाफा हुआ है। जबकि प्रदेश के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) अरुण देव गौतम के पास सिर्फ एक मकान है। उसकी वर्तमान कीमत 50 लाख रुपए है। वहीं दूसरी ओर आईपीएस दीपांशु काबरा की संपत्ति में 60.41 लाख रुपए की गिरावट आई है।
ये आंकड़े डीजी रैंक के 4 और एडीजी रैंक के 5 अधिकारियों द्वारा गृह मंत्रालय (केंद्र) को 2020 और 2025 में दी गई ऑनलाइन जानकारी पर आधारित हैं। 2025 में छत्तीसगढ़ कैडर के कुल आईपीएस अधिकारियों में 110 अफसरों की जानकारी वेबसाइट पर है। इनमें से जहां अशोक जुनेजा सेवामुक्त हो चुके हैं, वहीं पांच अफसरों का आईपीआर स्टेटस नहीं दिख रहा है। इसमें एससी द्विवेदी, एम लोग, अंकिता शर्मा, मयंक श्रीवास्तव और जे ठाकुर और डीजी रैंक के अधिकारी जीपी सिंह का नाम शामिल है।
अरुण देव गौतम
छत्तीसगढ़ में एक में प्रापर्टी, नया रायपुर में मकान, 44 लाख में खरीदी जिसकी वर्तमान वैल्यू 50 लाख बताई है। जिससे सलाना आय 1 लाख 20 हजार रुपए है।
हिमांशु गुप्ता
रायपुर में तीन प्रॉपटी है. जिसमें संग बोर्ड कॉलोनी बोरियाकला में 38 लाख 20 हजार का मकान और सेजबहार में 19 लाख 14 हजार रुपए और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी धर्मपुरा में 6 लाख की प्रॉपर्टी है।
पवनदेव
स्मृति नगर भिलाई में 90 लाख का मकान, स्मृति नगर भिलाई में 4 लाख की प्रॉपर्टी, दुर्ग के समोदा गांव में 6 लाख 52 हजार और 50 लाख की जमीन नवा रायपुर में 10 लाख का प्लॉट, दुर्ग के दौर में 10 लाख का प्लॉट, धमधा में 13 लाख की जमीन, धमधा के मेडेसरा में 1 करोड़ 40 लाख की जमीन, दुर्ग के कचांदुर में 30 लाख की जमीन, दुर्ग के कुरुद में 35 लाख की जमीन, नवा रायपुर में मकान जिससे 54 हजार सालाना आय बताई गई है।
केएसपी कल्लूरी
छत्तीसगढ़ में 47 लाख का मकान और 20 लाख की जमीन है।
प्रदीप गुप्ता
उत्तर प्रदेश में 25 लाख का फ्लैट, छत्तीसगढ़ में 4 लाख 28 हजार की जमीन, महाराष्ट्र में 15.7 लाख की जमीन है।
विवेकानंद
झारखंड के देवघर में 46 लाख का फ्लैट, यूपी के गौतम बुद्ध नगर में 59 लाख का फ्लैट, रायपुर में 35 लाख 37 हजार का मकान, रायपुर के धरमपुरा में 4 लाख 27 हजार का प्लॉट और बिहार में लगभग 2 एकड़ जमीन है।
दीपांशु काबरा
रायपुर अमलीडीह में 89 लाख 50 हजार का मकान, 86.69 लाख का आवासीय प्लॉट, कचना में 62.59 लाख का आवास, नवा रायपुर में 54 लाख 24 हजार का मकान, धरमपुरा में 6 लाख 67 हजार की जमीन, प्रमिला कॉलोनी में 40 लाख का मकान, महाराष्ट्र में 2.8 एकड़ जमीन है। विभिन्न संपत्तियों से लगभग 18 लाख रुपए की सालाना आय होती है। अमित कुमारः छग में 6 लाख 91 हजार की जमीन, यूपी मेरठ में 8 लाख, उत्तराखंड में 8 लाख 70 हजार की जमीन है।
चार एसपी करोड़पति
प्रदेश में 33 जिलों में तैनात एसपी में से 4 करोड़पति हैं। दुर्ग जिले में तैनात जितेंद्र शुक्ला के पास सबसे अधिक 2 करोड़ 10 लाख की संपत्ति है। वहीं, राजनांदगांव एसपी मोहित गर्ग के पास 1 करोड़ 95 लाख, रायपुर पुलिस प्रमुख लाल उम्मेद सिंह के पास 1 करोड़ 68 लाख और कवर्धा एसपी धर्मेंद्र छवई के पास 1 करोड़ 41 लाख की संपत्ति है. 33 में से 18 जिला पुलिस प्रमुखों ने दी गई जानकारी में NIL लिखा है।
अफसर का नाम 2020 की संपत्ति (लाख ₹) 2025 की संपत्ति (लाख ₹) वृद्धि / कमी (लाख ₹)
अरुणदेव गौतम (डीजीपी) 58.3 50 -8.3
पवनदेव (डीजी) 74 388.52 314.52
हिमांशु गुप्ता (डीजी) 42.2 61.34 19.14
एसपी कस्तूरी (एडीजी) 47 67 20
प्रदीप गुप्ता (एडीजी) 44.98 44.98 0
विवेकानंद (एडीजी) 98.64 144.64 46
दीपांशु काबरा (एडीजी) 400 339.59 -60.41
अमित कुमार (एडीजी) 23.61 23.61 0 -

रास्ते से वापस लौट गए अनिरुद्धाचार्य महाराज, छत्तीसगढ़ में होने वाली कथा हुई स्थगित, सामने आई ये बड़ी वजह….
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात आचार्य अनिरुद्धाचार्य की सभा शुरू होने से एक दिन पहले ही आंधी– तूफान में कथा स्थल का पंडाल उखड़ गया। अनिरुद्धाचार्य बिलासपुर के सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम दर्राभाठा में भगवत कथा कहने वाले थे। भागवत कथा शुरू होने के 1 दिन पहले ही शाम को जिले में हुई आंधी-बारिश से सभा स्थल के लिए बनाया गया पूरा पंडाल ढह गया। सभा से एक दिन पहले ही तैयारियों की पोल खुल गई इसके साथ ही लोगों के जान माल का नुकसान होते होते बचा। वहीं आज से शुरू हो रही कथा के लिए बिलासपुर आने निकले अनिरुद्धाचार्य पंडाल उखाड़ने की जानकारी लगते ही रास्ते से ही वापस लौट गए।
बिलासपुर के सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम दर्राभाठा में राष्ट्रीय स्तर पर भागवत कथा करने और गौ सेवा के लिए विख्यात स्वामी अनिरुद्धाचार्य की भागवत कथा 19 अप्रैल से शुरू होकर 25 अप्रैल तक होनी थी। सभी विभागीय अनुमति के बाद हजारों लोगों के बैठने के लिए पंडाल बनाया गया था। पंडाल के अंदर पंखे,कुलर, साउंड सिस्टम जनरेटर आदि की भी व्यवस्था की गई थी। पर कथा शुरू होने के 1 दिन पहले आंधी– तूफान के साथ हुई बारिश में पंडाल पूरी तरह ध्वस्त हो गया।। तेज बारिश और पंडाल गिरने के चलते अंदर लगे कुलर,पंखे खराब हो गए और गद्दे भींग गए।
वही इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि कथा शुरू होने से एक दिन पहले पंडाल गिरने के चलते जान माल की बड़ी हानी होने से बचत हो गई। वरना यदि आज शनिवार को भागवत कथा के दौरान यह हादसा हुआ होता तो पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की जान जा सकती थीं। देश में कई ऐसे हादसे हुए हैं जिसमें पंडाल गिरने से श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
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प्रदेश में घर बैठे सस्ती और सरकारी दर पर रेत मिलेगी, ठेकेदारों की लगेगी क्लास
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अब लोगों को घर बैठे सस्ती और सरकारी दर पर रेत (बालू) मिलने वाली है। मकान बनाना हो या कोई और निर्माण काम, अब रेत के लिए ठेकेदारों की मेहरबानी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खनिज विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है, जिससे ना सिर्फ आम जनता को राहत मिलेगी बल्कि शासन को भी ज़्यादा राजस्व मिलेगा।
एप और पोर्टल तैयार, अब रेत भी होगी डिजिटल
खनिज विभाग एक ऐसा मोबाइल एप और वेब पोर्टल ला रहा है, जिसके ज़रिए आम लोग सीधे रेत ऑर्डर कर सकेंगे। उपभोक्ता पोर्टल पर जाकर रेत की मात्रा, लोकेशन और डिलीवरी का समय चुन सकेंगे। रेत सीधे तय सरकारी दर पर घर तक पहुंचेगी और भुगतान भी ऑनलाइन होगा।पहले चरण में खदानों का ऑनलाइन आवंटन
फिलहाल पहले फेज़ में रेत खदानों के आवंटन को ऑनलाइन किया जाएगा। अभी तक खनन पट्टों की मैनुअल नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) से होती रही है, जिसमें गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। नए सिस्टम में सब कुछ डिजिटल होगा – आवेदन से लेकर आवंटन तक।दूसरे चरण में शुरू होगी घर-घर रेत सप्लाई
यदि सब कुछ प्लान के अनुसार चला, तो इस साल के अंत तक दूसरा चरण भी लागू कर दिया जाएगा। इसमें आम नागरिकों को निर्माण कार्यों के लिए सस्ती दर पर रेत की सप्लाई घर तक की जाएगी। यानी अब “रेत माफिया” का राज खत्म होने जा रहा है।रेत की कीमतों पर भी सरकारी नियंत्रण
खनिज विभाग ने हर खदान के लिए एक एक्स माइन प्राइस तय कर दिया है, जो लगभग 100 से 120 रुपये प्रति घनमीटर होगा। इसमें से 60% ठेकेदार को और 40% सरकार को जाएगा। ट्रांसपोर्ट चार्ज दूरी के हिसाब से तय होंगे। विभाग इस पर भी मंथन कर रहा है कि प्रति किलोमीटर कितना रेट रखा जाए।स्टार रेटिंग और एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की भी तैयारी
प्रदेश में गौण खनिजों के लिए स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट बनाया जा रहा है। साथ ही स्टार रेटिंग सिस्टम भी लागू किया जा रहा है, जिससे माइनिंग में पारदर्शिता और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। डोलोमाइट, क्वार्टज, ग्रेनाइट जैसी बड़ी खदानों में यह व्यवस्था पहले लागू होगी।पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर चोट
नई व्यवस्था से न सिर्फ जनता को राहत मिलेगी, बल्कि रेत खदानों के आवंटन में पारदर्शिता आएगी और अवैध वसूली पर भी लगाम लगेगी। ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टरों की मनमानी अब बीते दिनों की बात हो जाएगी।जल्द होगा लागू – खनिज विभाग
संयुक्त संचालक अनुराग दीवान ने कहा, “प्रदेश में आम लोगों को सस्ती दर पर रेत देने के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। जल्द ही यह व्यवस्था पूरे राज्य में लागू की जाएगी।” -

ये हैं छत्तीसगढ़ के 10 करोड़पति कलेक्टर, अफसरों में सबसे अमीर हैं ये IAS, जानिए किसकी कितनी है संपत्ति…..
रायपुर। IPS के बाद अब छत्तीसगढ़ के IAS अफसरों की भी संपत्ति की जानकारी सामने आ गई है। छत्तीसगढ़ के आईएएस अफसरों के ऑनलाइन ब्यौरे से पता चला कि 2004 बैच के सीनियर अफसर अमित कटारिया और टोपेश्वर वर्मा को सबसे अमीर आईएएस अधिकारी है। वहीं राज्य के 10 कलेक्टर करोड़पति हैं। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की संपत्ति 1.6 करोड़ रुपये की है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2004 बैच के IAS अमित कटारिया की कुल संपत्ति 46 करोड़ रुपए की संपत्ति है। अमित कटारिया की अधिकतर संपत्ति गुड़गांव में है, जहां कीमतें ऊंची हैं। इसी तरह 2005 बैच के IAS टोपेश्वर वर्मा के पास 12.4 करोड़ की सिंगल प्रॉपर्टी है। यह भी देखा गया कि 2004 और उसके बाद के बैच के कई अफसर करोड़पति हैं, और उनकी स्वघोषित संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
प्रदेश के 33 जिलों में तैनात कलेक्टरों में 10 करोड़पति हैं। बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के पास सबसे ज्यादा 2.68 करोड़ की संपत्ति है। करोड़पति कलेक्टरों में राजेंद्र कटारा, जन्मेजय महोबे, अभिजीत सिंह, दिव्या उमेश मिश्रा, गोपाल वर्मा, सर्वेश्वर भूरे, दीपक सोनी, लीना मंडावी और हरीश एस शामिल हैं।
1989 से 2005 तक के अधिकारी
अर्पित जैन (1989 बैच) के पास 1.6 करोड़ की संपत्ति , जबकि रेणु पिल्लै (1991 बैच) ने 4.15 करोड़ की संपत्ति जमा की, जो सूचीबद्ध अधिकारियों में सबसे अधिक । सुबोध सिंह (1992 बैच) के पास 1.47 करोड़ और अमित अग्रवाल (1993 बैच) के पास 0.63 करोड़ की संपत्ति । 1994 बैच से, मनीष रिचारिया, प्रियंका शुक्ला और विकास शील के पास क्रमशः 1.91 करोड़, 2.5 करोड़ और 2.0 करोड़ की संपत्ति । आर्यन त्रिपाठी (1995 बैच) के पास 1.8 करोड़, जबकि नीरज मांडवीकर और वल्लीश्वरी वासुकि (दोनों 1997 बैच) के पास क्रमशः 2.75 करोड़ और 1.5 करोड़ की संपत्ति । 2001 और 2002 बैच से, गुलशन सिंह के पास 2.04 करोड़, मयंक श्रीवास्तव के पास 1.55 करोड़ और कमलप्रीत सिंह के पास 2.65 करोड़ की संपत्ति ।
9 अधिकारियों के पास सिर्फ एक ही प्रॉपर्टी
इनमें अमित अग्रवाल, निखिल चंद्र श्रीवास्तव, प्रियंका शुक्ला, गोपाल वर्मा, दिव्या उईके, जितेंद्र शुक्ला, टोपेश्वर वर्मा, नीरज बंसोड़ और विपिन श्रीवास्तव जैसे नाम शामिल हैं।