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  • बैंको में  चाहे कितना भी जमा हो पैसा…बैंक डूबा तो मिलेंगे केवल एक लाख ही…

    बैंको में चाहे कितना भी जमा हो पैसा…बैंक डूबा तो मिलेंगे केवल एक लाख ही…

    कोई बैंक कारोबार में विफलता की वजह से यदि बंद होता है तो उसमें धन जमा रखने वाले जमाकर्ताओं को बीमा सुरक्षा के तहत केवल एक लाख रुपये ही मिलेगा। भले ही उसने उससे ज्यादा पैसे जमा करा रखे हों। भारतीय रिजर्व बैंक की कंपनी डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) ने यह जानकारी दी है।सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गये सवाल के जवाब में रिजर्व बैंक की पूर्ण अनुषंगी डीआईसीजीसी ने कहा कि यह सीमा बचत, मियादी, चालू और आवर्ती हर प्रकार की जमा के लिए है।

    डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन के अनुसार, डीआईसीजीसी कानून की धारा 16 (1) के तहत अगर बैंक विफल होता है या उसे बंद करना पड़ता है, डीआईसीजीसी प्रत्येक जमाकर्ता को परिसमापक के जरिये बीमा कवर के रूप में एक लाख रुपये तक देने के लिये जवाबदेह है।इसमें विभिन्न शाखाओं में जमा मूल राशि और ब्याज दोनों शामिल हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या पीएमसी बैंक धोखाधड़ी को देखते हुए एक लाख रुपये की सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव है, डीआईसीजीसी ने कहा, कॉरपोरेशन के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

    डीआईसीजीसी कानून के तहत सभी पात्र सहकारी बैंक भी आते हैं। आरटीआई के जवाब में उसने कहा, बैंक में जो भी पैसा जमा करता है, उसे अधिकतम एक लाख रुपये तक बीमा कवर मिलता है. इसका मतलब है कि अगर किसी कारण से बैंक विफल होता है या उसे बंद किया जाता है अथवा बैंक का लाइसेंस रद्द होता है, उस स्थिति में उसे एक लाख रुपये हर हाल में मिलेगा।भले ही बैंक में आपने कितनी भी ज्यादा राशि क्यों न जमा कर रखी हो। बैंकों में धोखाधड़ी के विभिन्न मामले तथा लोगों की बचत राशि को जोखित को देखते हुए यह जवाब महत्वपूर्ण है. उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने पीएमसी बैंक मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए परिचालन में कुछ पाबंदियां लगायी और प्रशासक नियुक्त किया।मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार बैंक प्रबंधन ने उद्योग घराने से मिलकर एचडीआईएल समूह की कंपनियों द्वारा कर्ज में चूक को छिपाया। बैंक ने कुल कर्ज का 70 प्रतिशत एचडीआईएल समूह को दिया और जब रीयल्टी कंपनी ने भुगतान में चूक किया तब बैंक में संकट उत्पन्न हो गया।

  • पदोन्नति में आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का नहीं हुआ पालन,

    पदोन्नति में आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का नहीं हुआ पालन,

    बिलासपुर। हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सरकार ने अपनी गलती मान ली है. सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि आदेश जारी करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया. मामले में शासन ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा है. अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

    बता दें कि राज्य शासन ने नोटिफिकेशन जारी कर प्रथम श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण लागू किया है.  एस.संतोष कुमार ने राज्य के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच द्वारा मामले की सुनवाई.की गई. महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में बताया कि शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में जो भी निर्देश हैं, उनका पालन करने की बात कही गई है।

    वहीं याचिकाकर्ता की ओर कोर्ट में पक्ष रखने वाले अधिवक्ता योगेश्वर शर्मा ने बताया कि इस मामले के साथ अन्य याचिका भी लगी है, सब की सुनवाई चीफ जस्टिस ने सोमवार को एक साथ रखने का निर्देश दिए हैं. मामले में शासन सोमवार को जवाब पेश करने के लिए समय लिया है।

  • शख्स ने मोबाइल पर 100 से ज्यादा महिलाओं का किया उत्पीड़न, गिरफ्तार

    शख्स ने मोबाइल पर 100 से ज्यादा महिलाओं का किया उत्पीड़न, गिरफ्तार

    मुंबई। यह शख्स महिलाओं या लड़कियों को अक्सर VIDEO CALL किया करता था। वीडियो कॉल कर वो महिलाओं से गंदी बातें करता और अपना प्राइवेट पार्ट दिखाता था। पुलिस के मुताबिक 26 साल का सांभाजी हुसैनकर मुंबई के वर्ली इलाके का रहने वाला है और उसने अब तक 100 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों के साथ VIDEO CALL पर गंदी हरकत की है। यह भी जानकारी सामने आई है कि सांभाजी हुसैनकर एक ऐप का इस्तेमाल कर व्हाट्सऐप पर लड़कियों का प्रोफाइल चेक करता था और फिर उनके साथ यह बेहद ही गंदी हरकत करता था। जानकारी के मुताबिक हुसैनकर मुख्य रूप से कोल्हापुर का रहने वाला था और ग्रैंड रोड पर स्थित एक गैराज में मकैनिक के तौर पर काम करता था।

    हुसैनकर पिछले कई दिनों से यह गंदी हरकत कर रहा था। लेकिन इस बार 17 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ गंदी हरकत करने के बाद इस युवक को पुलिस ने धर दबोचा है। वडाला के एक कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली इस छात्रा को बीते शनिवार से हुसैनकर लगातार फोन कर रहा था। कई बार इस लड़की ने इस अनजान नंबर पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन फिर उसने सोचा कि शायद यह उसके किसी रिश्तेदार का फोन हो लिहाजा उसने एक दिन हुसैनकर का फोन रिसीव कर लिया।

    डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रश्मि करणदिकर ने बताया कि ‘फोन पर हुसैनकर ने पहले थोड़ी देर तक लड़की से इधर-उधर की बातें कि और फिर अचानक वो उससे गंदी बातें करने लगा। इससे पहले यह लड़की फोन को काट पाती वो लड़की को VIDEO CALL पर अपना प्राइवेट पार्ट दिखाने लगा।’

    लड़की ने तुरंत फोन काट दिया लेकिन यह युवक लगातार उसे फोन कर रहा था। इसके बाद पीड़िता ने अपना मोबाइल डाटा बंद कर दिया और परिवार वालों को इस बात की जानकारी दी। परिजनों की मदद से लड़की ने तुरंत थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया।

    पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ‘फोन नंबर के बारे में तकनीकि जानकारियां हासिल कर पुलिस हुसैनकर तक पहुंच गई।’ पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि इससे पहले भी यह शख्स छेड़खानी के एक केस में गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस के मुताबिक लड़कियों का फोन नंबर हासिल करने के लिए यह शख्स एक ऐप इस्तेमाल करता था और वो सिर्फ लड़कियों को ही फोन किया करता था।

    पुलिस ने बताया कि हुसैनकर शादीशुदा है और उसे ऐसे गंदे कॉल करने की आदत पड़ चुकी है। वो ज्यादातर रात के समय ऐसे कॉल किया करता था। अब पुलिस इस मामले में आरोपी हुसैनकर पर कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है। साथ ही साथ हुसैनकर के द्वारा VIDEO CALL पर प्रताड़ित की गई अन्य महिलाओं के बारे में भी पता लगाने में जुटी हुई है। 

  • उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना,

    उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना,

    दुर्ग। बैंक ने मशीन से रकम जमा करने का ट्रांजैक्शन फेल होने पर रकम नहीं लौटाई तो परिवादी ने इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम से की. बैंक के इस आचरण को सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने बैंक पर 5198 रूपये का हर्जाना लगाया है।

    वैशाली नगर भिलाई निवासी अरुण कुमार मिश्रा ने अपने एक्सिस बैंक के खाते में रकम जमा करने के लिए बैंक के एटीएम मशीन के द्वारा दिनांक 21.11.2017 को रु.500 के 30 नोट कुल रु.15000 जमा करने का प्रयास किया लेकिन रकम मशीन में डालने पर ट्रांजैक्शन फेल हो गया, ट्रांजैक्शन फेल होने की रसीद भी परिवादी को मशीन से प्राप्त हुई, जिसके बाद परिवादी ने बैंक शाखा में संपर्क किया तो बैंक द्वारा दो-तीन दिन में पैसा मिलने की बात कही गई लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसके बाद परिवादी लगातार कई महीनों तक बैंक के चक्कर लगाता रहा इसके बावजूद उसे उसकी राशि रु. 15000 रूपये वापस नहीं मिली।

    बैंक ने प्रकरण में उपस्थित होकर जवाब दिया कि परिवादी के शिकायत की जांच पश्चात उसे आश्वासन दिया गया था एवं बैंक ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए परिवादी की राशि उसके खाते में दिनांक 11.10.2018 को जमा कर उसकी सूचना परिवादी को दे दी थी।

    फोरम का फैसला

    दोनों पक्षों के तर्को और दस्तावेजों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह पाया कि परिवादी ने अपने खाते में दिनांक 21.11.2017 को मशीन द्वारा रकम जमा करने का प्रयास किया जिसका ट्रांजैक्शन फेल होने पर उसने बैंक से संपर्क किया और जब परिवादी ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत कर दिया तत्पश्चात प्रकरण के लंबन के दौरान दिनांक 11.10.2018 को बैंक ने परिवादी की रकम लौटाई गई जो कि ट्रांजैक्शन फेल होने के बाद 324 दिन विलंब से लौटाई गई। यदि परिवादी उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्तुत नहीं करता तो संभवतः बैंक द्वारा परिवादी को उसकी राशि लौटाई ही नहीं जाती. प्रकरण में यह प्रमाणित हुआ कि बैंक ने परिवादी की समस्या के समाधान हेतु तत्परतापूर्वक कार्यवाही नहीं की और 324 दिनों तक परिवादी को भटकाने के बाद उसे उसकी राशि लौटाई जो कि सेवा में निम्नता की पराकाष्ठा है।जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बैंक के किसी कर्मचारी की कोई मानवीय भूल नहीं थी अपितु तकनीकी त्रुटि से परिवादी के खाते में रकम जमा नहीं हुई थी. जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने माना कि बैंक की शाखा पूर्णतः कंप्यूटराइज्ड है और  तकनीकी त्रुटि होने के बाद जब ग्राहक द्वारा बार-बार बैंक का ध्यानाकर्षण उसकी गलती के लिए कराया गया, तब बैंक की ये जिम्मेदारी बनती थी कि वह गलती संज्ञान में लाने के बाद तत्परतापूर्वक कार्यवाही करें जो कि उसने नहीं किया और 324 दिन का लंबा समय व्यतीत करने के बाद परिवादी को उसकी राशि तब वापस की जब वह फोरम में शिकायत प्रस्तुत कर चुका था.बैंक को सेवा में निम्नता का जिम्मेदार मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर रु. 5198 हर्जाना लगाया, जिसमें विवादित रकम पर 324 दिनों का ब्याज रु. 1198, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप रु. 3000 तथा वाद व्यय रु. 1000 परिवादी को भुगतान करने का आदेश दिया गया।

  • देखिये पूरी सूची कौन कौन गए दुबई थाईलैंड, और आखिर दुबई और थाईलैंड में ऐसा क्या है कि वहाँ बार-बार जाते हैं छत्तीसगढ़ के IAS ? ऋचा शर्मा तो अकेले 19 बार दुबई गईं, 63 अधिकारियों ने किया 129 बार कई देशों की यात्राएँ…

    देखिये पूरी सूची कौन कौन गए दुबई थाईलैंड, और आखिर दुबई और थाईलैंड में ऐसा क्या है कि वहाँ बार-बार जाते हैं छत्तीसगढ़ के IAS ? ऋचा शर्मा तो अकेले 19 बार दुबई गईं, 63 अधिकारियों ने किया 129 बार कई देशों की यात्राएँ…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के विधानसभा में सत्र के अंतिम दिन विदेश जाने वाले अधिकारियों के आँकड़ों का खुलासा हुआ तो सबकों चौंक गए. यह आँकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि छत्तीसगढ़ के 63 आईएएस अधिकारियों ने 4 साल में 129 विदेश यात्राएँ पूरी कर ली. चौंकाने वाली बात तो ये है कि दुबई और थाईलैंड जाने वाले आईएएस अधिकारियों की कमी नहीं है. सर्वाधिक यात्रा तो अकेले ऋचा शर्मा ने की. उसमें उन्होंने 19 बार तो दुबई की यात्रा की. अब समझ परे हैं कि आईएएस अफसर दुबई और थाईलैंड क्यों-क्यों बार जाते रहे है ? आखिर दुबई और थाईलैंड में ऐसा क्या है जो वहाँ पर उनका आना-जाना लगा रहा है ? आईएएस ऋर्चा शर्मा ने एक बार साल में 8 बार दुबई की यात्रा कर ली. ऐसा नहीं कि अधिकारी कभी भी विदेश जा सकते हैं ? उन्हें विदेश यात्रा जाने से पहले विधिवत अनुमति लेनी होती है।

    विधानसभा में जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं. उसमें अधिकारियों ने दुबई और थाईलैंड के अलावा फ्रांस, नीदरलैंड, यूएई, अमेरिका, जापान, कोरिया की भरपूर यात्राएँ की है. ऋचा शर्मा ने 19 बार दुबई तो 5 बार यूएई की यात्रा की है. इस तरह से उन्होंने चार साल में 24 बार विदेश दौरा पूरा किया. ऋचा शर्मा के दुबई दौरे के आंकड़े को देखें तो 2015 में दो बार दुबई, 2016 में आठ बार दुबई, 2017 में 7 बार दुबई एक बार नींदरलैंड, 2018 में 2 बार दुबई, तीन बार यूएई, 2019 में एक बार दुबई और दो बार यूएई।

    मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में बताया है कि 2015-19 के बीच अलग-अलग सालों में 63 आईएएस अफसरों ने 129 बार विदेश दौरा किया। उनमें कई अफसर ने बार-बार विदेश जाने का परमिशन लिया है. 2015 में 19 आईएएस ने 21 बार, 2016 में 14 आईएएस अफसरों ने 23 बार, 2017 में 24 अफसरों ने 31 बार, 2018 में 23 अफसरों ने 29 बार और 2019 में 20 आईएएस ने 25 बार विदेश दौरा किया।

    ऋचा शर्मा के अलावा जिन अधिकारियों ने विदेश दौरे पर जाते रहे हैं उनके नाम इस सूची में देख सकते हैं-

  • IAS सुबोध कुमार सिंह को मिला राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार

    IAS सुबोध कुमार सिंह को मिला राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार

    रायपुर। राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुबोध कुमार सिंह को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. अभी सुबोध सिंह के पास श्रम विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग की जिम्मेदारी है. यह आदेश मुख्य सचिव आरपी मंडल ने जारी किया है।
  • राज्य सरकार ने स्कूली छात्रों को पिकनिक ले जाने पर लगाई रोक….

    राज्य सरकार ने स्कूली छात्रों को पिकनिक ले जाने पर लगाई रोक….

    रायपुर। राज्य सरकार स्कूली छात्रों को पिकनिक ले जाने पर रोक लगा दी है. विधानसभा में आज मामला उठने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है. दरअसल आज कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने सिरपुर घटित घटना को सदन के समक्ष रखते हुए सरकार से यह मांग की थी, बिना सुरक्षा और अनुमति स्कूलों छात्रों को पिकनिक पर भेजने दिया जाए. विधायक फिलहाल इस पर रोक लगाने की मांग की थी. सरकार हाल ही घटना के मद्देनज़र और जनप्रतिधि की मांग को देखते हुए पिकनिक पर रोक लगा दी है।

    आपको बता दे कि राजधानी रायपुर के भारत माता स्कूल के दो छात्रों की मौत सिरपुर में पिकनिक मनाने के दौरान हो गई थी. दोनो छात्रों की मौत नदी में डूबने से हुई थी. स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सुरक्षा में लापरवाही बरती है. ऐसी घटनाएँ भविष्य में न घटे इसी के मद्देनजर सरकार यह फैसला लिया है।

  • रामचरण खिला सकते है वार्ड नं. 16 में कमल

    रामचरण खिला सकते है वार्ड नं. 16 में कमल

    खरसिया। जैसे जैसे नगरीय निकाय चुनाव की तिथि नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे पार्षद चुनाव लडने की चाह रखने वालों द्वारा अपने चिन्हित वार्डो में अपनी सक्रियता बढ़ाना प्रारंभ कर चुके है, इस बार के चुनाव में पार्षदो के द्वारा ही अध्यक्ष चुना जाना है जिससे इस बार का चुनाव रोचक हो गया है और अध्यक्ष पद के दावेदार भी पार्षद के लिये अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे है।गौरतलब है कि 21 दिसंबर 2019 को होने वाले नगर पालिका चुनाव के लिये 6 दिसंबर तक चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वालों द्वारा नामांकन भरा जावेगा और इसी के साथ पार्षद पद के प्रत्याशियों द्वारा अब वार्डो में अपनी सक्रियता बढाते हुए लोगों से मेल जोल करना प्रारंभ कर दिये है। ऐसे में वार्ड नं. 16 से इस बार भाजपा नेता नगर मंडल महामंत्री एवं प्रदेश महामंत्री गिरधर गुप्ता के करीबी माने जाने वाले रामचरण अग्रवाल का नाम लगभग तय माना जा रहा है।

    यहां यह बताना लाजिमी है कि रामचरण अग्रवाल पूर्व मे भी भारतीय जनता पार्टी से पार्षद रह चुके हैं, अपने कार्यकाल में उन्होंने वार्ड हित में अनेक कार्य करायें। सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहने वाले रामचरण अग्रवाल की मजबूत जमीनी पकड एवं मतदाताओं के बीच इनका मेल जोल इनकी जीत सुनिश्चित करती है, यदि भाजपा रामचरण पर विश्वास करके इन्हें अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारती है तो निश्चित तौर पर वार्ड नं. 16 में कमल खिलेगा।

  • एसबीआई अपने ग्राहकों के साथ कर रहा धोखाधड़ी … स्टेट बैंक काट रहा ग्राहकों की जेब

    एसबीआई अपने ग्राहकों के साथ कर रहा धोखाधड़ी … स्टेट बैंक काट रहा ग्राहकों की जेब

    खरसिया। एसबीआई मतलब भारतीय स्टेट बैंक अर्थात भारत का बैंक, सरकार का बैंक। ग्राहक भी सरकारी बैंक होने के भरोसे में प्राइवेट बैंकों के लुभावने आफर तथा अनेक सुविधाओं को छोड़कर सरकारी बैंक होने की वजह से स्टेट बैंक से लेनदेन करना सुरक्षित समझते हैं, लेकिन खरसिया के स्टेट बैंक के कर्मचारी ग्राहकों से धोखेबाजी कर बैंक की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं। ब्रांच के स्टाफ द्वारा ग्राहक के साथ धोखाघड़ी का ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जब अपने खाते में पैसा जमा करने बैंक पहुंचे ग्राहक को काउंटर से पैसा जमा करने से मना करते हुए काउंटर में उसे बाहर मशीने से पैसा जमा करने की बात कही गई ग्राहक ने कहा कि उसे काउंटर से ही पैसे जमा करना है तो काउंटर पर मौजूद युवती ने कहा कि मशीन सुरक्षित और आसान तरीका है, और उसमें से जमा करने पर कोई चार्ज भी नहीं है, उसकी बात मानकर ग्राहक ने बैंक के बाहर की मशीन का इस्तेमाल कर अपने खाते में पैसे जमा कर दिए लेकिन पैसा जमा करने के कुछ मिनटों के बाद ग्राहक के खाते से 25 रुपये काट लिए गए। प्राइवेट बैंक मिनिमम बैलंस, एटीएम चार्ज, एक्स्ट्रा ट्रांसेक्शन जैसे अनेको सर्विस के नाम पर ग्राहकों से मनमानी वसूली करते हैं लेकिन सरकारी बैंकों ने भी अब ग्राहकों को अंधेरे में रख उनके साथ धोखाधड़ी शुरू कर दी है। बैंकों के इस प्रकार के कृत्य से जहां बैंकों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह उठते हैं वहीं ग्राहकों का भरोसा भी ऐसे बैंकों से खत्म हो जाता हैं।

    शाखा प्रबंधक का नहीं उठा फोन

    इस संबंध में भारतीय स्टेटे बैंक खरसिया के शाखा प्रबंधक आर. के. अग्रवाल से संपर्क करने पर पहले तो उनके द्वारा ब्रांच में न होने की बात कही गई, बाद में उनके द्वारा फोन ही नहीं उठाया गया, जिससे सिद्ध होता है कि अधिकारी अपने ग्राहकों के लिये कितने समर्पित है।

    जानकारी देना अनिवार्य

    बैंक द्वारा लगाये जाने वाले शुल्क के संबंध में जानकारों का कहना है कि अलग-अलग बैंकों द्वारा अलग -अलग सेवा के लिये अलग-अलग शुल्क चार्ज किया जाता है, और बैंकों के लिये अपने ग्राहकों को इन सभी शुल्कों की जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन स्टेट बैंक द्वारा ग्राहकों को जानकारी देना तो दूर उल्टे अपने ग्राहकों को धोखे में रखकर उनकी जेब पर डाका डाला जा रहा है।

  • सरकार बनाने जा रही कानून, अब न्यूज पोर्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य…

    सरकार बनाने जा रही कानून, अब न्यूज पोर्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य…

    दिल्ली। देश में इस समय कोई भी व्यक्ति कहीं से भी, किसी भी पोर्टल पर खबरें छापना औऱ वायरल करना शुरु कर देता है. अब ऐसा नहीं चलने वाला है. अब आपको न्यूज पोर्टल चलाना है तो बकायदा रजिस्ट्रार आफ न्यूजपेपर आफ इंडिया के आफिस में अपने न्यूज पोर्टल का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने इसके लिए सैकड़ों साल पुराने ब्रिटिश कानून को बदलकर नया कानून बनाने औऱ उसे लागू करने की तैयारी कर ली है. इस कानून के बनने के बाद न्यूज वेबसाइटों को रजिस्ट्रार (न्यूजपेपर ऑफ इंडिया) के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा.प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (पीआरबी) एक्ट, 1867 की जगह अब रजिस्ट्रेशन ऑफ प्रेस एंड पीरियॉडिकल्स (आरपीपी) बिल, 2019 के मसौदे को सरकार ने अंतिम रुप दे दिया है. नए बिल में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रेस रजिस्ट्रार जनरल के एक नए पद के सृजन का भी प्रावधान किया गया है.नए बिल में डिजिटल प्लेटफार्म पर दिए जाने वाले समाचार के दायरे में इंटरनेट, मोबाइल या कंप्यूटर पर डिजिटाइज्ड फार्मेट में ट्रांसमिट होने में सक्षम हर समाचार को रखा गया है. इसमें लिखित, ऑडियो, वीडियो और ग्राफिक्स, सभी तरह के समाचार शामिल हैं. मंत्रालय ने इस बिल का प्रारुप अपनी वेबसाइट पर जारी किया है और लोगों से अगले 30 दिन के अंदर अपने सुझाव देने के लिए कहा गया है।