Category: राष्ट्रीय

  • कंडोम बनाने वाली कंपनी को मिला टेस्ट किट बनाने का ठेका… हर दिन बनाएगी 20 हजार यूनिट…

    कंडोम बनाने वाली कंपनी को मिला टेस्ट किट बनाने का ठेका… हर दिन बनाएगी 20 हजार यूनिट…

    दिल्ली। कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा ब्लड टेस्ट कराने पर ज़ोर दे रही है. हर दिन टेस्ट की संख्या को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. देश में फिलहाल पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग किट नहीं हैं. ऐसे में कंडोम (Condom) बनाने वाली एक सरकारी कंपनी हिंदुस्तान लैटेक्स लिमिटेड (HLL) को किट बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार से किट बनाने का काम शुरू हो जाएगा।

    कंडोम से मिली लोकप्रियता

    1970 के दशक में इस कंपनी ने परिवार नियोजन में बेहद अहम भूमिका निभाई थी. उस दौरान ये कंपनी निरोध के नाम से कंडोम बनाती थी. लेकिन वक्त के साथ कंपनी का मार्केट शेयर घटता गया. तीन साल पहले HLL को निजीकरण करने का भी मुद्दा उठा था. इसके अलावा पिछले महीने भी ये कंपनी विवादों में थी. आरोप लगा था कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट बनाने में इसने देरी कर दी।

    15-20 मिनट में आएगा रिजल्ट
    कंपनी के मुताबिक, कोरोना वायरस के मरीजों के लिए वो ऐसा टेस्टटिंग किट बना रही है, जिससे सिर्फ 15-20 मिनट में नतीजे आ जाएंगे. कंपनी के टेकनिकल ऑपरेशन के डायरेक्टर इए सुब्रमनियम के मुताबिक HLL ने ये किट सिर्फ एक महीने में तैयार किया है. इससे पहले कंपनी टीबी, डेंगू और मलेरिया के लिए टेस्टटिंग किट तैयार कर चुकी है।

    क्या है किट की कीमत
    HLL को सरकार की तरफ से फिलहाल 2 लाख किट बनाने का ऑर्डर मिला है. हरियाणा के मानेसर के प्लांट में हर दिन 20 हज़ार किट तैयार करने का लक्ष्य है और अगले 10 दिनों में ये सारे ऑर्डर पूरे कर लिए जाएंगे. आमतौर पर COVID-19 टेस्ट के लिए किट की कीमत बाजार में 700-800 रुपये है, लेकिन HLL इसकी कीमत सिर्फ 350-400 के बीच रखेगी. ऐसे में कई सालों से घाटे में रहने वाली इस सरकारी कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कंपनी के लिए हालात बेहत होंगे।

    चीन को भी दिया ऑर्डर
    बता दें कि टेस्टटिंग किट के लिए भारत पहले ही चीन की कई कंपनियों को ऑर्डर दे चुका है. किट आने भी शुरू हो गए है. सरकार को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में बड़े पैमाने पर कोरोना के टेस्ट किए जाएंगे।

  • राजधानी में दो व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में शराब व नशीली दवाई की तस्करी करते पकड़ाए….

    राजधानी में दो व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में शराब व नशीली दवाई की तस्करी करते पकड़ाए….

    लाखों रूपये की शराब और पिस्टल, रिवाल्वर कारतूस जप्त

    साथ ही नशीली दवाई और टेबलेट की सैंकडों की संख्या में मिले

    रायपुर। प्रदेश की राजधानी में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने उक्त मामले में एक कथित पत्रकार को गिरफ्तार किया है।

    आरोपी पत्रकारिता की आड़ में शराब की तस्करी किया करता था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान उस कथित पत्रकार के पास महंगी शराब का ही नहीं हथियारों का भी जखीरा बरामद किया है। खुद को पत्रकार साबित करने के लिए युवक ने एक कथित प्रेस आईडी कार्ड भी बनवा रखा था और खुद को पत्रकार बताकर रसूख दिखाया करता था। पुलिस ने उसके एक साथी को भी गिरफ्तार किया है।

    दरअसल राजधानी पुलिस को सूचना मिली थी कि लाॅकडाउन का फायदा उठाकर दो आरोपी शंकर नगर के राजीव नगर में शराब बेच रहे है। शिकायत के बाद एसएसपी आरिफ शेख के निर्देश पर क्राइम ASP पंकज चंद्रा, सीएसपी आभिषेक माहेश्वरी सीएसपी सिविल लाईन नासिर सिद्दीकी के नेतृत्व में थाना प्रभारी खम्हारडीह ममता शर्मा ने राजीव नगर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी का नाम जतिंद्र आकाश सिंह हैं जो खुद को एक मासिक पत्रिका का पत्रकार बता रहा है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने शराब बेचने की बात कबूल कर ली है।

    आरोपी जतिंद्र के घर से 2 नग पिस्टल, एक रिवाल्वर, आठ नग जिंदा कारतूस, चार नग धारदार हाथियार एवं टेबलेट, 42 नग कोडिन सिरप और एक कार बरामद किया गया है। पुलिस ने आरोपी के एक और अन्य साथी मयंक अग्रवाल को भी गिरफतार किया है, आरोपी के घर से महंगी दारू के बोतल और बीयर भारी मात्रा में बरामद किया गया है।

    एक पेटी के आसपास शराब और कुछ हथियार जब्त किए गए है और कार्रवाई अभी भी जारी है, राजीव नगर स्थित इसके घर से एक कार भी बरामद कि गई है, आरोपी ने अपने आप को किसी मैग्जीन का पत्रकार बताया है।

  • कोरोना से लड़ने, मुख्यमंत्री ने की समाज के सक्षम वर्ग से दान करने की अपील….

    कोरोना से लड़ने, मुख्यमंत्री ने की समाज के सक्षम वर्ग से दान करने की अपील….

    रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट के बीच समाज के सक्षम वर्ग के लोगों से दान करने की अपील की है. सीएम बघेल ने कहा की यह संकट का समय है। सरकार जो कुछ कर सकती है, कर रही है। लेकिन बहुत कुछ और है जो किया जा सकता है। प्रदेश के बहुत से सुधिजनों ने ग़रीब और ज़रुरतमंदों की सहायता करने की इच्छा जताई है। मैं समाज के सक्षम वर्ग से इस संकट के समय में दान की अपील करता हूं।

    प्रदेश में कोरोना की स्थिति- 
    प्रारंभिक 10 कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों में से 9 पहले ही डिस्चार्ज हो चुके थे जबकि शेष भर्ती 16 वर्षीय युवक पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद आज डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इस प्रकार सभी प्रारंभिक 10 मरीज सही हो चुके हैं।

    2 दिन पहले आए 8 मरीजों का इलाज भी जारी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्‍ट की धारा 66-ए को रद्द किया, आपत्तिजनक पोस्‍ट से जुड़ा था कानून

    सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्‍ट की धारा 66-ए को रद्द किया, आपत्तिजनक पोस्‍ट से जुड़ा था कानून

    सुप्रीम कोर्ट ने दी सोशल मीडिया में खुल कर लिखने की आजादी…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साइबर कानून की विवादित धारा 66ए को रद्द कर दिया है। सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के मामले पुलिस अब आननफानन गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा 66ए संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अनुरूप नहीं है।


    इस फैसले के बाद फेसबुक, ट्विटर सहित सोशल मीडिया पर की जाने वाली किसी भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए पुलिस आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े इस विवादास्पद कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को लेकर इसके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

    यह धारा वेब पर अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देती थी। कोर्ट ने कहा कि आईटी एक्‍ट की धारा 66 ए से लोगों की जानकारी का अधिकार सीधा प्रभावित होता है। कोर्ट ने कहा कि धारा 66 ए संविधान के तहत उल्लिखित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को साफ तौर पर प्रभावित करती है।

    न्यायालय ने प्रावधान को अस्पष्ट बताते हुए कहा, ‘किसी एक व्यक्ति के लिए जो बात अपमानजनक हो सकती है, वो दूसरे के लिए नहीं भी हो सकती है।’ कोर्ट ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती रहती हैं लेकिन धारा 66 ए हमेशा के लिए बनी रहेगी। न्यायालय ने यह बात केंद्र के उस आश्वासन पर विचार करने से इनकार करते हुए कही जिसमें कहा गया था कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। न्यायालय ने हालांकि सूचना आईटी एक्‍ट के दो अन्य प्रावधानों को निरस्त करने से इनकार कर दिया जो वेबसाइटों को ब्लॉक करने की शक्ति देता है।

    इस मसले पर लंबी सुनवाई के बाद 27 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी कई बार इस धारा पर सवाल उठाए थे। वहीं केंद्र सरकार ने एक्ट को बनाए रखने की वकालत की थी। केंद्र ने कोर्ट में कहा था कि इस एक्ट का इस्तेमाल गंभीर मामलों में ही किया जाएगा। 2014 में केंद्र ने राज्यों को एडवाइज़री जारी कर कहा था कि ऐसे मामलों में बड़े पुलिस अफ़सरों की इजाज़त के बग़ैर कार्रवाई न की जाए।

    2013 में महाराष्ट्र में दो लड़कियों को शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे पर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में श्रेया सिंघल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में कुछ NGO ने भी इस एक्ट को ग़ैरक़ानूनी बताते हुए इसे ख़त्म करने की मांग की थी।

    कुछ दिन पहले यूपी में मंत्री आजम खान पर पोस्ट करने वाले छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

  • 1 मार्च के बाद बहर से आये लोगो द्वारा जानकारी छुपाने पर उनके खिलाफ हत्या या हत्या के प्रयास का मामला होगा दर्ज….

    1 मार्च के बाद बहर से आये लोगो द्वारा जानकारी छुपाने पर उनके खिलाफ हत्या या हत्या के प्रयास का मामला होगा दर्ज….

    रायपुर। राजधानी से क़रीब सत्तर किलोमीटर दूर स्थित ज़िले में एक सरकारी फ़रमान जारी हुआ है, जिसमें बताया गया है कि, कोरोना संक्रमण के इस दौर में यदि किसी ने बाहरी के अपने यहाँ होने या कि प्रभावित जगह से पहुँचने वाले की जानकारी छुपाई तो उस व्यक्ति और संदिग्ध दोनों के विरुद्ध राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत धारा 307 और जरुरत पड़ी तो धारा 302 के तहत भी अपराध दर्ज किया जाएगा।

    यह ज़िला है राजनांदगाँव,जिसकी क़रीब दो सौ किलोमीटर लंबी सीमा कोविड 19 से सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र से सीधे सटी हुई है। इस ज़िले में सरहद पर 1450 के आसपास दिगर राज्यों के श्रमिकों को रोक दिया गया है, इनके लिए आठ कैंप बनाए गए हैं।उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं है, ग्रामीण इलाक़ों में क़रीब दस हज़ार ऐसे लोग हैं जो दिगर राज्यों से अपने गाँव पहुँचे हैं, हालाँकि उन्हें ग्रामीणों ने गाँव के बाहर ही रोक दिया है, और उन्हें नियत समय पर भोजन पानी दिया जा रहा है।इसके अलावा क़रीब 175 लोग शासकीय क्वारनटाईन में है।

    “हम लगातार आग्रह कर रहे हैं कि यदि कोई बाहर से आया हुआ है तो हमें सुचित कर दे.. महाराष्ट्र से सटी हुई दो सौ किलोमीटर लंबी सीमा है.. जिसके कई ग्रामीण रास्ते हैं..हमें लगातार सूचनाएँ आ रही हैं कि लोग आ रहे हैं… जहां तक तबलीग का मसला है.. बड़ी संख्या में इस के अनुयायी हैं.. हम उनकी जानकारी भी माँग रहे हैं..”

    कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने कहा
    “हम लगातार आग्रह कर रहे हैं, इसके साथ साथ सूचनाओं पर जा भी रहे हैं.. यदि ऐसा हुआ कि हमने पकड़ लिया तो हाँ बिलकुल हम आपदा प्रबंधन अधिनियम के साथ साथ, धारा 144 के उल्लंघन और धारा 307 याने हत्या के प्रयास और जरुरी लगा तो धारा 302 की धाराएँ भी लगाएँगें”

  • कटघोरा में अब इमरजेंसी सेवाएं भी बंद …प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, इमरजेंसी सेवा भी की गई बंद

    कटघोरा में अब इमरजेंसी सेवाएं भी बंद …प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, इमरजेंसी सेवा भी की गई बंद

    कोरोना वायरस को लेकर देशभर में 21 दिन का लॉक डाउन किया गया है जिले के कटघोरा मैं कोरोना का दूसरा केस पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया है एहतियात के तौर पर प्रशासन ने पूरे कटघोरा क्षेत्र में पूर्ण रूप से कर्फ्यू लगा दिया है साथ ही पूरी इमरजेंसी सेवा भी पूर्ण रूप से बंद कर दी गई है मेडिकल राशन दुकान पेट्रोल पंप सहित अन्य संसाधनों को भी बंद कर दिया गया है। आगामी आदेश तक यहां पूर्ण रूप से कर्फ्यू लगाया गया है चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स के जवानों को तैनात किया गया है और प्रशासन ने क्षेत्र के आम लोगों को साफ चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर घर से बाहर ना निकले आम लोगों के इमरजेंसी सेवा आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्था की जा रही है कटघोरा में दूसरा केस सामने आने के बाद पूरे महक में हड़कंप मच गया है और एहतियात के तौर पर प्रशासन और पुलिस द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों से बार-बार अपील की जा रही है कि किसी भी कीमत पर लोग घरों से बाहर ना निकले यदि प्रशासन की चेतावनी के बाद भी यदि कोई घर से बाहर निकलता है तो उसके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

    कटघोरा के प्रभावित क्षेत्र के हर व्यक्ति का टेस्ट होगा, प्रभावित क्षेत्र में 20 दिन में कोरबा आने वाले सभी को भेजा जाएगा क्वारेंटाइन

    राज्य के कोरबा जिले के कटघोरा में एक साथ  7 पॉजिटिव कोरोना वायरस पीड़ित मिलने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर को कटघोरा के प्रभावित क्षेत्र को सीलबंद करने और वहां के हर व्यक्ति का टेस्ट कराने का निर्देश दिया है. कटघोरा के लिए उन्होंने एक विशेष टीम बनाने के भी निर्देश दिए जो पूर्णतः कटघोरा के लिए ही समर्पित रहेगी।
    उन्होंने कहा कि कटघोरा के प्रभावित क्षेत्र में पिछले 20 दिनों में आनेजाने वाले और उनसे संपर्क रखने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें क्वारंटाइन किया जाये।

  • छत्तीसगढ़ में 31 सौ 59 सैंपल में कुल 18 केस पॉजिटिव मिले, इलाज के बाद 9 लोग हुए स्वस्थ…

    छत्तीसगढ़ में 31 सौ 59 सैंपल में कुल 18 केस पॉजिटिव मिले, इलाज के बाद 9 लोग हुए स्वस्थ…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब तक कोरोना वायरस के कुल 3159 संभावित व्यक्तियों की पहचान कर सैंपल जांच किया गया है, अभी तक के 3054 परिणाम निगेटिव प्राप्त हुए हैं तथा 88 की जांच जारी है. बुधवार रात को कटघोरा से 1 पॉजिटिव मरीज भर्ती किया गया. वहीं गुरुवार को कटघोरा से ही नये 7 पॉजिटिव मरीज पाये गए. इस प्रकार वर्तमान में एम्स रायपुर में कटघोरा के कुल 9 मरीज इलाज चल रहा है. वहीं इलाज के बाद स्वस्थ हुए 9 मरीज को मिलाकर राज्य में कुल 18 केस पाये गए।

    गौरतलब है कि स्वास्थ्य सचिव ने आज अधिकारियों की बैठक ली. इसमें निजामुद्दीन क्षेत्र से कटघोरा में आये हुए व्यक्तियों के संपर्क में आये संकमित व्यक्तियों के पाये जाने पर समुचे क्षेत्र में सघन निगरानी एवं जांच के निर्देश दिये गए. प्राथमिकता के आधार पर कटघोरा के वार्ड 11 में 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों, कोरोना लक्षण के पाए जाने वाले व्यक्तियों और बार-बार घर से बाहर जाने वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके सैंपल लिये जाने के निर्देश दिए।

    पूरे प्रदेश में जहां भी हजरत निजामुद्दीन क्षेत्र से आये हुए व्यक्तियों की जानकारी मिली है एवं चिन्हित किये है, उन क्षेत्रों में वर्तमान निवास के क्षेत्र में सघन जांच के निर्देश दिये है. राज्य से अधिकारियों के दल को तत्काल कटघोरा, जिला कोरबा भेजा गया है।

    मंत्री सिंहदेव ने की समीक्षा

    स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बिन्दुवार समीक्षा किया. वहीं आवश्यक सामग्री के लिए सीजीएमएससी को तत्काल आपूर्ति के निर्देश दिये गए. मेडिकल कॉलेज रायपुर में शीघ्र कोरोना की जांच कराए जाने संचालक, चिकित्सा शिक्षा को निर्देश दिए है. राज्य के सभी लोगों से अपील की है कि कटघोरा में पिछले 3 सप्ताह में आने-जाने वाले व्यक्तियों की जानकारी टोल फ्री नंबर 104 पर दें. और कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में सरकार का सहयोग करें और अफवाहों से दूर रहें।

    भारत में 169 व्यक्ति की मौत

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक विश्व में कुल 1353361 व्यक्ति संक्रमित हैं और अभी तक कुल 79235 व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है.  भारत में वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण से 32 राज्य प्रभावित हैं, जिनमें कुल 5865 प्रकरणों की पुष्टि हो चुकी है और कुल 169 व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है।

  • सरकार की अकर्मण्यता के कारण एम्स चिकित्सकों की मेहनत पर फिरा पानी, प्रदेश में जमातियों को रोक नहीं पाना शासन की विफलता,  : डा. रमन सिंह

    सरकार की अकर्मण्यता के कारण एम्स चिकित्सकों की मेहनत पर फिरा पानी, प्रदेश में जमातियों को रोक नहीं पाना शासन की विफलता, : डा. रमन सिंह

    रायपुर। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष औ पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राज्य सरकार पर जमातियों को प्रदेश में नहीं रोक पाने का आरोप लगाते हुए उसे सरकार की विफलता बताया है। रमन सिंह ने कहा कि सरकार की अकर्मण्यता, प्रशासनिक विफलता और स्तरहीन राजनीति के कारण एम्स के डॉक्टरों की सारी मेहनतों पर पानी फिर गया है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए सीएम भूपेश बघेल के बयान को उथला, हल्का, बेतुका और महज़ डींगें हाँकने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि बघेल न तो रत्ती भर राजनीतिक मर्यादा का पालन कर रहे और न ही परिस्थियों के अनुरूप परिपक्वता का परिचय दे रहे हैं। डा. सिंह ने कहा कि सच तो यह है कि पीएम मोदी को इस असाधारण परिस्थिति से निपटने में उनके विजन के लिए सारी दुनिया से तारीफ़ मिल रही है, वहां प्रदेश में इससे निपटने के मामले में सीएम बघेल पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन्होंने प्रदेश में सात नए मरीजों का पता चलने का जिक्र करते हुए कहा कि काफी पीड़ा की बात है कि एम्स के कुशल और निष्ठावान चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों की दिन-रात की मेहनत से हम छत्तीसगढ़ में इस महामारी के खिलाफ जीत के करीब पहुँच गए थे. लेकिन प्रदेश शासन जमातियों को रोक पाने में नाकाम रहे हैं जिसके चलते एक बार फिर स्थिति वही हो गई है।

    इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी बयान देती हैं कि लॉकडाउन जल्दबाज़ी में किया गया, राहुल गांधी कहते हैं कि काफ़ी पहले यह किया जाना चाहिये था। ऐसे में अपना मूल कार्य छोड़कर सीएम अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के विरोधाभासी बयानों में संतुलन क़ायम करने में ही जुटे रहते हैं। एक तरफ़ राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी अजीब सलाह देते हुए इस महामारी के लिए मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विज्ञापन रोकने की सलाह देती हैं, तो दूसरी तरफ़ प्रदेश का ख़ज़ाना एक संदिग्ध राष्ट्रीय समाचार चैनल के लिए लुटा कर बघेल अपने मूंह मियां मिट्ठु बन रहे हैं।

    वहीं उन्होंने कहा कि इस संकट के समय सबसे ज्यादा अभाव पीपीई किट का दुनिया भर में है, जबकि छत्तीसगढ़ को कल ही दो हज़ार किट्स उपलब्ध कराये गए हैं। और ज़रूरत का हर साजो-सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम के मांगने पर मनरेगा का सात सौ करोड़ तुरत जारी करने की बात हो या फिर जीएसटी में राज्य के हिस्से का पैसा। इससे पहले अन्य तमाम फंड एवं सहायता देने में कभी भी केंद्र ने कोताही या भेदभाव नहीं किया। बावजूद इसके सीएम द्वारा अपने राष्ट्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए उटपटांग बयान देना निंदनीय है।

    डा. सिंह ने कहा कि कोरोना के खिलाफ शुरू से ही कांग्रेस सरकार लापरवाह दिख रही है. अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें तब्लीगियों के प्रदेश में पहुँचने पर नज़र रखनी थी। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार की गंभीरता का अभाव तो उस दिन दिखा था जब स्वयं स्वास्थ्य मंत्री यह शिकायत करते हुए दिखे थे कि विभागीय बैठक में ही उन्हें नहीं बुलाया जा रहा है। उसके बाद स्वास्थ्य मंत्री मुंबई चले गए और विभागीय मंत्री के बिना ही ऐसी विषम परिस्थियों में काम चल रहा था।

    डा. सिंह ने कहा कि इस विषम परिस्थिति में सबको एकजुट होकर काम करना चाहिए। प्रदेश के अनगिनित सामाजिक संगठन और भाजपा के सभी नेतागण आपदा राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। यह समय ऐसे सभी योद्धाओं, चिकित्साकर्मियों, पत्रकारों, आरक्षी बलों, बैंक-डाकघरकर्मियों समेत सभी कोरोना वारियर्स का मनोबल बढाने का है, इसके उलट कांग्रेस का राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व अपने ऊल-जुलूल बयानों से योद्धाओं के मनोबल को गिरा रही है। डा. सिंह ने इससे बचते हुए कांग्रेस को सलाह दी है कि वह इस असाधारण संकट के समय परिपक्वता और मानवता का परिचय दे।

  • खांसी, बुखार और नाक बहने पर भी होगा कोरोना वायरस टेस्ट….

    खांसी, बुखार और नाक बहने पर भी होगा कोरोना वायरस टेस्ट….

    भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन जारी है। बावजूद इसके लगातार नए केस सामने आ रहे हैं। आशंका है कि कहीं देश का कुछ हिस्सा कोरोना वायरस फैलने के तीसरे चरण तो प्रवेश नहीं कर गया है। इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। आईसीएमआर के अनुसार, देश में जहां-जहां कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट नजर आ रहे हैं, वहां हर उस शख्स की जांच होगी जिसे बुखार, खासी, गले में दर्द है या नाक बह रही है। किसी भी शख्स में ये संकेत नजर आने के 7 दिन के अंदर कोरोना वायरस की जांच अनिवार्य होगी।

    अभी तक श्वसन की गंभीर बीमारी से ग्रसित, सांस लेने में तकलीफ और बुखारी-खांसी वाले अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की कोरोना जांच की जा रही थी। संक्रमित व्यक्ति के प्रत्यक्ष संपर्क में आने वाले बिना लक्षण वाले और हाई रिस्क वाले व्यक्तियों का भी संपर्क में आने के पांचवें और 14वें दिन टेस्ट किया जा रहा है।

    इसके अलावा गाइडलाइंस के मुताबिक, ऐसे व्यक्तियों की भी जांच की जा रही थी जिन्होंने पिछले 14 दिनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की और जिनमें पहले लक्षण नहीं थे और बाद में दिखने लगे, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले ऐसे सभी व्यक्ति जिनमें लक्षण दिखाई दिए और ऐसे सभी स्वास्थ्यकर्मी जिनमें लक्षण दिखाई दिए हैं। दरअसल, आइसीएमआर की इस नई रणनीति का मकसद प्रभावी रूप से कोरोना संक्रमण की रोकथाम करना और ऐसे सभी व्यक्तियों की विश्वसनीय जांच करना है जो कोराना जांच के मानदंडों के दायरे में आ रहे हैं।

    पीपीई की उपलब्धता को लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं

    इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संकट से निपटने के लिए चिकित्सा कर्मियों के निजी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) सहित अन्य संसाधन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने का भरोसा जताया है। मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि पीपीई की उपलब्धता को लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि भारत में 20 घरेलू कंपनियां इसका निर्माण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 1.7 करोड़ रुपये के पीपीई की खरीद के आर्डर दिए जा चुके हैं। साथ ही 49 हजार वेंटिलेटर भी खरीदे जा रहे हैं।

    इस दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज मुरहेकर ने संक्रमण के मामले सामने आने की गति स्थिर होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में अब तक कोरोना संक्रमण की जांच के लिए 1.30 लाख परीक्षण किए जा चुके हैं। मुरहेकर ने कहा कि इनमें पिछले 24 घंटों में किए गए 13,143 परीक्षण भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षण में संक्रमित मामले सामने आने की दर तीन से पांच फीसद के स्तर पर बरकरार है। इसमें कोई इजाफा नहीं हुआ है।

  • कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में सीएम भूपेश बघेल की अपील पर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिये 52,44,689 रुपये दान

    कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में सीएम भूपेश बघेल की अपील पर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिये 52,44,689 रुपये दान

    रायपुर। कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में सीएम भूपेश बघेल की अपील पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, अधिकारी और कर्मचारियों ने भी अपने एक दिन का वेतन 52,44,689 मुख्मंत्री राहत कोष में दान दिया है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अपने एक दिन का वेतन दान करने पर आभार जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि कोविड 19 के खिलाफ चल रही लड़ाई इससे मजबूत होगी।

    सीएम ने ट्वीट कर कहा, “सीसीएम राहत कोष में एक दिन का वेतन दान करने के लिए सभी माननीय न्यायाधीशों, सीजी उच्च न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों और अधीनस्थ न्यायपालिका के कर्मचारियों / कर्मचारियों के प्रति आभार। 52,44,689 रुपये की यह राशि COVID-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूत करेगी।”