Category: राष्ट्रीय

  • छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किया आदेश इस बार 10वीं और 12वीं की मेरिट लिस्ट में नहीं जुड़ेंगे बोनस अंक…

    छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किया आदेश इस बार 10वीं और 12वीं की मेरिट लिस्ट में नहीं जुड़ेंगे बोनस अंक…

    छत्तीसगढ़ के 10वीं और 12वीं के बच्चों की मेरिट लिस्ट अब उनके विषयों के नंबरों के आधार पर ही बनेगी। इसमें स्कूल में होने वाली अन्य एक्टिविटी के बोनस अंक नहीं जोड़े जाएंगे। ऐसा पहली बार किया जा रहा है। सोमवार की शाम इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आदेश जारी कर दिया। आदेश में साफ कहा गया है कि इस बार बोनस अंक जोड़कर मेरिट लिस्ट नहीं बनेगी। बच्चों को एनएसएस, एनसीसी, स्पोर्ट्स एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करने पर बोनस अंक दिए जाते रहे हैं।


    बोनस का गणित
    यदि किसी छात्र ने सभी विषयों में 470 नंबर हासिल किए बोनस के रूप में उसे 10 नंबर मिले, तो कुल प्राप्तांक 480 नंबर होता है। लेकिन मेरिट में 470 नंबर ही मान्य होगा। दसवीं-बारहवीं के छात्रों को एनसीसी, एनएसएस, खेलकूद समेत अन्य कैटेगरी में छात्रों को बोनस के रूप में 10 से 20 नंबर तक देने का प्रावधान है। अब विषयों में मिले नंबरों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनेगी।

  • छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है। पीठ ने एक अक्टूबर को याचिकाओं में सुनवाई पूरी कर निर्णय को सुरक्षित रखा था। कोर्ट के इस आदेश से सरकार को झटका लगा है।

    राज्य में आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90 प्रतीशत कर दिया गया था, जिसे संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य की आबादी के अनुपात को देखते हुए पिछड़ा वर्ग के लिए हमने आरक्षण की सीमा बढ़ाई थी, जिस पर न्यायालय ने रोक लगा दी, लेकिन इसके लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम न्यायालय के सामने उचित साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे।

    चार सितंबर को जारी किया था अध्यादेशnull

    राज्य शासन ने चार सितंबर 2019 को अध्यादेश जारी कर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को 27 प्रतिशत कर दिया था। इससे एसटी, एससी व ओबीसी को मिलाकर कुल आरक्षण 82 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके अलावा महिला, दिव्यांग व अन्य वर्ग के लिए प्रावधान जोड़ने पर आरक्षण 90 प्रतिशत हो रहा है। चीफ जस्टिस की पीठ ने एक अक्टूबर को सभी याचिकाओं में एक साथ सुनवाई पूरी कर निर्णय के लिए सुरक्षित रखा था। सरकार की ओर से जो डाटा पेश किया गया वह केन्द्र सरकार का है। यहां लागू नहीं होता है।

    अध्यादेश पर तत्काल प्रभाव से रोकnull

    पीठ ने मामले को शुक्रवार को निर्णय के लिए सुरक्षित रखा गया था। याचिकाकर्ताओं व शासन के अधिवक्ताओं की उपस्थिति में कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य शासन के 4 सितंबर के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के इस आदेश से सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सरकार के अन्य पिछड़ा वर्गो की आबादी प्रदेश में 45 प्रतिशत से अधिक होने, तमिलनाडू और मराठा आरक्षण के तर्क को अमान्य कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, पलास तिवारी, रोहित शर्मा, शैलेन्द्र शुक्ला, वैभव शुक्ला, शक्तिराज सिन्हा समेत अन्य पैरवी कर रहे हैं।

    आरक्षण के पीछे सरकार का तर्क

    इसके खिलाफ आदित्य तिवारी, कुणाल शुक्ला, पुनेश्वरनाथ मिश्रा, पुष्पा पांडेय, स्नेहिल दुबे, अखिल मिश्रा, गरिमा तिवारी समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन ने बिना आंकड़े के आरक्षण को बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के खिलाफ कुल आरक्षण 82 प्रतिशत किया गया है। राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 45.5 प्रतिशत से अधिक होने के कारण आरक्षण बढ़ाया गया है। इसके अलावा सरकार को आरक्षण बढ़ाने का अधिकार है।

    शासन के इस तर्क पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य शासन ने सिर्फ एक सर्वे के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाया है। याचिका में वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक राज्य सेवा परीक्षा में ओबीसी वर्ग के अनारक्षित सीट से चयन के आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसमें उनका प्रतिनिधित्व हमेशा अधिक रहा है। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उनका प्रतिनिधित्व कम है।

    संविधान में ऐसा प्रावधान

    50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संविधान की मूल भावना के अनुसार अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है। इसे समानता का अधिकार समाप्त हो रहा है, राज्यों में जनसंख्या और जाति समुदायों के अलग-अलग अनुपात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आरक्षण संबंधि महाजन कमेटी की स्थापना की थी। महाजन कमेटी की रिपोर्ट में भी आवश्यकता अनुसार आरक्षण घटाने व बढ़ाने का अधिकार है। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण व तमिलनाडु में भी राज्य शासन ने आरक्षण बढ़ाया है। इस आधार पर याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई। हालांकि महाजन कमेटी की रिपोर्ट तय समय के लिए है।

    हमारा फैसला गलत नहीं

    आरक्षण पर लगी अंतरिम रोक पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है उसमें पहले ही छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण था। अब जा के आरक्षण 69 प्रतिशत को उन्होंने स्वीकार किया है इसका अर्थ यह हुआ कि 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति को जो दिया गया था उसे उन्होंने स्वीकार किया है। 10 प्रतिशत जो आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है, उसे भी कोर्ट ने स्वीकार किया है। 13 प्रतिशत जो ओबीसी के लिए है उसके लिए हम लोगों को लड़ाई लड़नी पड़ेगी, हमारा फैसला गलत नही है हम माननीय न्यायालय के सामने सभी साक्ष्य पेश करेंगे।

    आरक्षण विरोधी रही है कांग्रेस

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा स्थगनादेश जारी करने के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है। कौशिक ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपने ओछे राजनीतिक पाखंड से बाज नहीं आई और अब कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही बेनकाब हो गया है। कौशिक ने कहा कि कांग्रेस तो शुरू से आरक्षण के खिलाफ रही है, हालांकि जाहिराना तौर पर वह आरक्षण को अपने राजनीतिक हितों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही है।

  • अब हर साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाएगा- केंद्र सरकार

    अब हर साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाएगा- केंद्र सरकार

    दिल्ली। महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती से पहले भारत सरकार ने बड़ा एलान किया है। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है। संस्कृति मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। गौरतलब है कि नेताजी की 125वीं जयंती को केंद्र सरकार ने अब और भी ज्यादा भव्य तरीके से मनाने का फैसला किया है। इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इसे लेकर गठित उच्च स्तरीय कमेटी की अगुआई खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।

    85 सदस्यों वाली इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों के साथ पक्ष-विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं और नेताजी के परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया गया है। नेताजी से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 23 जनवरी को उनकी जयंती से होगी। कार्यक्रमों का आयोजन सालभर किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125वें जयंती समारोहों की शुरुआत 23 जनवरी को कोलकाता के ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल हॉल से करेंगे।

    संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में नेताजी की 125वीं जयंती के आयोजन को लेकर उच्च स्तरीय कमेटी के गठन की अधिसूचना जारी की थी। इसमें राजनेताओं के अलावा लेखक, इतिहासकार सहित आजाद हिंद फौज से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों को भी शामिल किया गया है। इनमें जो प्रमुख नाम हें, उनमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस आइएनए ट्रस्ट के अध्यक्ष बिग्रेडियर आरएस चिकारा, इतिहासकार और लेखिका पूरबी राय, भारतीय किक्रेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, संगीतकार एआर रहमान, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती, अभिनेत्री काजोल आदि शामिल हैं।

    नेताजी के परिवार के सदस्यों में उनकी बेटी अनिता बोस, भतीजे अर्धेंदु बोस, प्रपौत्र चंद कुमार बोस आदि को शामिल किया गया है। नेताजी की यादों से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कोलकाता, दिल्ली सहित नेताजी और आजाद हिंस फौज से जुड़े देश-विदेश के अन्य स्थलों पर किया जाएगा। नेताजी के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का केंद्र सरकार का यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले वह आजाद हिंस फौज के 75वें स्थापना दिवस को भी भव्य तरीके से मना चुकी है, जिसमें खुद प्रधानमंत्री शामिल हुए थे। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों को भी सार्वजनिक किया था, जिसकी मांग उनके प्रशंसकों और परिजनों की ओर से काफी समय से की जा रही थी। हालांकि बंगाल में इस साल मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से इसकी अहमियत ज्यादा है, जहां भाजपा पूरा जोर लगाए हुए है।

  • बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ में अलग से बजट, ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य होगा…

    बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ में अलग से बजट, ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य होगा…

    प्रदेश सरकार पहली बार चाइल्ड बजट लाने जा रही है। नई सरकार का यह तीसरा बजट है, जिसमें बच्चों के लिए अलग अलग काम कर रहे तकरीबन 4-5 विभाग के कामों के एक ही जगह लाने की योजना है। इसकी प्लानिंग के लिए सीएम भूपेश बघेल 15 जनवरी से अपने मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। चाइल्ड बजट का यह कांसेप्ट देश के कुछ राज्यों में लागू किया जा चुका है। दरअसल यह चाइल्ड बजट यूनीसेफ की उस योजना का हिस्सा है, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य और शैक्षिक विकास को सतत विकास लक्ष्य (संस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- एसडीजी) में शामिल किया हुआ है। इस योजना को छत्तीसगढ़ ने भी 2030 तक के लिए अपने सीजी एसडीजी विजन में समाहित किया है।

    प्रदेश में हर साल करीब 8 लाख बच्चे पैदा होते हैं और राज्य में इस समय नवजात से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की तादाद 80 लाख के करीब है। इनके विकास के लिए सरकार के आधा दर्जन विभाग कई योजनाएं चलाते हैं। इनमें महिला बाल विकास और स्वास्थ्य मुख्य विभाग है। अकेले महिला बाल विकास विभाग इस साल अपने 2200 करोड़ के बजट में से बच्चों पर 14 सौ करोड़ खर्च कर रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग 85 से 90 करोड़ खर्च करता है। यह राशि केवल टीकाकरण, बाल ह्रदय योजना, कांक्लियर इंप्लांट, मातृ-शिशु योजना पर खर्च की जाती है। स्कूल शिक्षा विभाग, प्रायमरी से हायरसेकंडरी स्कूलों में अध्ययनरत 56 हजार बच्चों पर 14 हजार करोड़ खर्च कर रहा है। इतना ही नहीं हर साल दोनों विभागों में इसमें 10 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ योजनाएं लागू की जाती है। इनके अलावा स्कूल शिक्षा, अजा-जजा कल्याण, श्रम और समाज कल्याण विभाग भी बड़ी राशि खर्च करते हैं। अब इन सबको को एक छत के नीचे लाकर पूरे समन्वय और तालमेल के साथ योजनाएं लागू की जाएंगी। इसकी रुपरेखा बनाने सीएम बघेल ने 15 जनवरी को इन विभागों के मंत्रियों की बैठक बुलाई है। वहीं राज्य योजना आयोग भी सचिवों के साथ प्लान बनाएगा।

    इससे पहले 4 राज्य ला चुके हैं
    सूत्रों के अनुसार इससे पहले देश के 4 राज्यों में चाइल्ड बजट लागू किया जा चुका है। इनमें केरल, असम, बिहार और कर्नाटक शामिल हैं। असम ने तो पिछले साल ही लागू किया है। जबकि शेष राज्य 2013-14 से लागू कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली भाजपा सरकार इसे नजरअंदाज किए हुए थी।

    चौथा कांसेप्चुअल बजट
    जानकारों के मुताबिक चाइल्ड बजट, 2013 के बाद से यह चौथा कांसेप्चुअल बजट होगा। इससे पहले बीजेपी सरकार आउटकम बजट, जेंडर बजट, यूथ बजट और कृषि बजट पेश कर चुकी है।

    “प्रस्ताव बना रहे हैं। इसमें महिला-बाल विकास के साथ पंचायत, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा के साथ बच्चों पर काम कर रहे विभागों की योजनाएं शामिल की जाएंगी।”
    -अनिला भेंडिया, महिला बाल विकास मंत्री

    “राज्य योजना आयोग और वित्त विभाग इस पर काम कर रहे हैं। इस पर जल्द ही सीएम के साथ बैठक कर प्रारूप तैयार कर लिया जाएगा।”
    -अजय सिंह, उपाध्यक्ष योजना आयोग छत्तीसगढ़

  • रीत पर महामारी भारी, 73 साल में पहली बार बजट दस्तावेज नहीं छपेगा, वित्त मंत्री सॉफ्ट कॉपी से भाषण पढ़ेंगी…

    रीत पर महामारी भारी, 73 साल में पहली बार बजट दस्तावेज नहीं छपेगा, वित्त मंत्री सॉफ्ट कॉपी से भाषण पढ़ेंगी…

    आजादी के बाद (1947) से हर साल छपते आ रहे बजट दस्तावेज पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। संक्रमण के डर से इस बार बजट 2021-22 के दस्तावेज नहीं छापे जा रहे हैं। सरकार को इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति की मंजूरी मिल गई है। सभी संसद सदस्यों को इस बार बजट के दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाएगी।

    ऐसे में इस बार बजट के दिन संसद के बाहर दस्तावेज पहुंचाने वाले ट्रक नजर नहीं आएंगे। केंद्रीय बजट की छपाई हर साल वित्त मंत्रालय की प्रिंटिंग प्रेस में होती रही है। वित्त मंत्रालय का कहना था कि बजट के दस्तावेजों की छपाई के लिए 100 से ज्यादा लोगों को दो हफ्ते तक एक ही जगह रखना होता है। कोरोना को देखते हुए सरकार इतने लोगों को इतने लंबे समय तक प्रिंटिंग प्रेस में नहीं रख सकती।

    सॉफ्ट कॉपी पर सांसदों को मनाने के लिए हुई बड़ी मशक्कत
    सूत्रों के मुताबिक, सॉफ्ट कॉपी के लिए सांसदों को मनाने में लोकसभा अध्यक्ष और उपसभापति को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बजट के डॉक्यूमेंट्स को लेकर दो विकल्प रखे गए थे। सभी सांसदों को सॉफ्ट कॉपी दी जाए या किसी को नहीं। वहीं, जो सांसद टेक सैवी नहीं हैं, उनके लिए सीमित संख्या में कॉपी छापना मुमकिन नहीं था। दलील दी गई कि दस्तावेज छापे गए तो उन्हें लाने-ले जाने में कोरोना संक्रमण का जोखिम हो सकता है।

    एक पखवाड़े पहले हलवा सेरेमनी से छपाई प्रक्रिया की शुरुआत
    स्वतंत्र भारत में केंद्रीय बजट पहली बार 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसके दस्तावेज तब से हर साल छापे जाते रहे हैं। वित्त मंत्रालय बजट दस्तावेजों की छपाई प्रक्रिया की शुरुआत के मौके पर हर साल हलवा सेरेमनी करता है। सेरेमनी का आयोजन संसद में बजट पेश किए जाने से एक पखवाड़ा पहले नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है। अब सवाल यह है कि जब बजट छप नहीं रहा, तो हलवा सेरेमनी होगी या नहीं।

    बजट प्रक्रिया में 3 अहम बदलाव

    1. चमड़े के ब्रीफकेस से बही-खाता
    वित्त मंत्री बजट दस्तावेज आमतौर पर चमड़े के ब्रीफकेस में ले जाते थे। इस परंपरा की शुरुआत देश के पहले वित्त मंत्री (1947-1949) आरके शणमुखम चेट्टी ने की थी। 2019 और 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट दस्तावेज लाल रंग के पारंपरिक बही खाते में ले गई थीं।

    2. शाम 5 बजे के बजाय सुबह 11 बजे पेश होने लगा
    बजट पेश किए जाने के समय में भी समय के साथ बदलाव हुआ। 1999 तक बजट फरवरी के अंतिम कामकाजी दिन को शाम पांच बजे पेश किया जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदल दिया और बजट सुबह 11 बजे पेश करना शुरू किया।

    3. रेल बजट भी आम बजट का हिस्सा बना
    2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया कि अब से केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होगा। इसके अलावा 92 साल से अलग पेश होते आ रहे रेल बजट को केंद्रीय बजट में समाहित कर दिया गया।

    160 साल पहले पेश हुआ था देश का पहला बजट

    देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्तमंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था। भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया था।

  • 26 जनवरी को लेकर राज्य सरकार ने जारी कि गाइडलाइन…गणतंत्र दिवस पर नहीं होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम…

    26 जनवरी को लेकर राज्य सरकार ने जारी कि गाइडलाइन…गणतंत्र दिवस पर नहीं होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम…

    रायपुर। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर राज्य सरकार ने 26 जनवरी के कार्यक्रम को लेकर राज्य, जिला व जनपद स्तर पर कार्यक्रम के लिए अलग-अलग गाइडलाइन जारी किये हैं। जीएडी की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक कोरोना के निर्देशों का पालन करते हुए कार्यक्रम किये जायेंगे। हालांकि इस बार कार्यक्रम में स्कूली छात्र व छात्राओं को एकत्रित नहीं किया जायेगा।

    इस बार गणतंत्र दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन नहीं होगा। कुछ लोगों को ही अतिथि के तौर पर बुलाया जायेगा। कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जायेगा। राज्य स्तर पर राज्यपाल 9 बजे ध्वजारोहण करेंगे, लिहाजा जिला व शासकीय कार्यालयों में ध्वजारोहण कार्यक्रम 8 बजे के पहले खत्म कर लियाजायेगा।राज्य स्तरीय आयोजन रायपुर में होंगे, जिसमें राज्यपाल ध्वजारोहण करेंगी। जवानों के परेड का प्रदर्शन होगा। वहीं प्रदेश की जनता के नाम संबोधन होगा। कार्यक्रम में कोरोना वारियर्स डाक्टर, पुलिसकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों व स्वच्छताकर्मियों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जायेगा।

  • छत्तीसगढ़ में इन जिलों के डीलर नही बेच पायेंगे हीरो और होंडा के वाहन….

    छत्तीसगढ़ में इन जिलों के डीलर नही बेच पायेंगे हीरो और होंडा के वाहन….

    रायपुर। परिवहन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर और गरियाबंद जिले में हीरो मोटरकार्प और होंडा मोटरसायकल एंड स्कूटर इंडिया लिमिटेड के सभी शो रूम से गाड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. अब इन कंपनियों के डीलर्स किसी भी तरह की टू व्हीलर गाड़ियां नहीं बेच सकेंगे.

    दरअसल हीरो मोटरकार्प और होंडा कंपनी की टू व्हीलर बेचने वाले डीलरों ने छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 184 (क) के प्रावधानों के तहत राज्य में गाड़ियों की बिक्री की अनुमति नहीं ली थी. लंबे समय से डीलर बगैर अनुमति गाड़ियां बेधड़क बेच रहे थे. मामला संज्ञान में आने के बाद 23 दिसंबर 2020 को रायपुर आरटीओ ने सभी हीरो मोटरकार्प और होंडा के सभी डीलरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था. होंडा कंपनी के डीलरों की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं दिया गया, जबकि हीरो मोटरकार्प के कुछ डीलरों ने अलग-अलग वजह बताते हुए जवाब भेजा था. कुछ ने अपने जवाब में यह कहा कि सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट 1979 की धारा 126 के तहत गाड़ियों की बिक्री की अनुमति ली गई है. परिवहन विभाग जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ, लिहाजा रायपुर और गरियाबंद जिले में आरटीओ की ओर से आगामी आदेश तक गाडियों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. विभाग ने डीलरों को निलंबित करते हुए कहा है कि निलंबन अवधि में गाड़ियां बेचे जाने की स्थिति में डीलरशिप निरस्त कर दी जाएगी.

    इन डीलरों पर हुई कार्रवाई

    हीरो मोटरकार्प की गाड़ियां बेचने वाले आरसन मोटर्स, अग्रवाल मोटर्स, एमजी आटो केयर, मेसर्स गुरूदेव आटोमोबाइल, राजधानी आटो केयर, श्रीराम आटोमोबाइल आरंग और द छत्तीसगढ़ आटो केयर्स शामिल हैं, वहीं होंडा की टू व्हीलर गाड़ियां बेचने वाले डीलरों में जी के होंडा, सिटी मोटर्स, ग्रांड मोटर्स, एमएल एंड संस आटोमोबाइल और वायकान मोटर्स सायकल एंड स्कूटर प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल हैं.

    अन्य जिलों में भी जल्द आदेश जारी कर सकते हैं आरटीओ

    रायपुर और गरियाबंद आरटीओ की इस कार्रवाई के बाद अन्य जिलों में भी हीरो और होंडा कंपनियों की गाड़ियों की बिक्री करने वाले डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य के बाकी जिलों में भी छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 184 (क) के तहत वाहनों की बिक्री की अनुमति नहीं ली गई है. ऐसे में यह मुमकिन है कि उन डीलरों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए.

    अब क्या करेंगे डीलर्स?

    रायपुर और गरियाबंद में हीरो और होंडा कंपनी की टू व्हीलर गाड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगने के बाद आऱटीओ द्वारा डीलरों के वाहन पोर्टल बंद कर दिए जाएंगे. इस साफ्टवेयर के बंद होने से नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा. जाहिर है बिक्री पर लगे प्रतिबंध को बायपास करना डीलरों के लिए आसान नहीं होगा. इधर प्रतिबंध हटाये जाने के लिए अब डीलरों के पास एक ही रास्ता बाकी है कि डीलर परिवहन विभाग से माॅडल एप्रुवल लें.  माॅडल एप्रुवल नहीं लेने के हालात में विभाग डीलरशिप निरस्त कर सकता है. ऐसी स्थिति में कंपनी के सामने बड़ी दिक्कतें खड़ी होंगी.

  • प्रदेश मे 4 नये जिलों का हो सकता है पुनर्गठन, सारंगढ़, पत्थलगांव, शक्ति, बसना-सराईपाली का नाम शामिल….

    प्रदेश मे 4 नये जिलों का हो सकता है पुनर्गठन, सारंगढ़, पत्थलगांव, शक्ति, बसना-सराईपाली का नाम शामिल….

    रायपुर। आने वाले गणतंत्र दिवस पर राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करने वाला है। प्रदेश के वर्तमान भूपेश बघेल सरकार को 2 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण अभी पूर्ण हुआ है। सूत्र के अनुसार मुख्यमंत्री के सलाहकारो द्वारा इस दो वर्षों के किये गये कार्यों एवं आगामी योजनाओं पर समिक्षा कर जानकारी जुटा रहे है।

    इस बीच यह खबर आ रही है की विधायकों द्वारा डवलपमेंट के लिए किये गये मांगों पर विशेष मंथन किया जा रहा है, इस दृष्टीकोण से यह स्पष्ट है की राज्य सरकार प्रदेश के विकाश के लिए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ काम कर रही है।

    राजधानी के वरिष्ठ सम्पादक के मतानुसार राज्य सरकार जिला निर्माण, ब्लाक निर्माण, तहसील निर्माण तथा नगरिय निकाय बनाने जैसे विकास कार्यों पर फोकस कर रही है, जिससे इन उपेक्षित क्षेत्रों का चहुमुखी विकाश हो सके, इसके लिए कार्ययोजना बनाया जा रहा है जिसमे क्षेत्रीय विधायकों के प्रस्ताव को तवज्जों दिया जा रहा है।

    बता दे की सारंगढ़ जिला निर्माण का मांग दशको पुराना है, चाहे सरकार कोई भी हो विधायकों द्वारा सारंगढ़ को जिला निर्माण का मांग हमेशा किया गया है। इसीतरह यह कयास लगाया रहा है की राज्य सरकार सारंगढ़ विधायक के प्रपोजल को दृष्टिगत रखते हुए सारंगढ़ को जिला घोषित कर सकती है।

    सारंगढ़ विधायक के घोषणापत्र का किया गया जिक्र

    मुख्यमंत्री के सलाहकारों के मध्य प्रस्तुत जानकारी में विधानसभा चुनाव में सारंगढ़ विधायक द्वारा घोषणा पत्र में सारंगढ़ जिला निर्माण का उल्लेख किया गया था, इसकी जानकारी दी गयी है। जिससे इस 26 जनवरी मे सारंगढ़वासीयों को जिला का सौगात मिलने की संभावना अधिक हो गयी है। हाल ही में सारंगढ़ विधायक के मांग पर केबिनेट मंत्री ने कोसीर को उप-तहसील बनाये जाने पर सहमती दी थी, जिसमे वर्ष 2021 मे काम काज स्टार्ट करने का पूर्ण आश्वासन मिला है।

    गौरतलब हो की सारंगढ़ को जिला बनाये जाने की मांग क्षेत्र के सबसे बहुप्रतिक्षीत मांग है, आम शहरवासीयो से जुडा सीधा मामला है, राज्य मे कांग्रेस सरकार आने के बाद जिला बनाने की उम्मीद सबसे ज्यादा है क्योंकि विधायक के साथ कांग्रेस पार्टी लगातार मंचो पर जिला की मांग रखते आये है।साथ ही वकीलों का समूह भी मुख्यमंत्री से मुलाकत कर जिला बनाने की मांग रख चुके है।

    भुगोलिक बड़े जिला का पुनर्गठन कर बनेंगे नये जिला

    इसी तरह जांजगीर चांपा का पुनर्गठन कर शक्ति को जिला बनाया जा रहा है, विधानसभा अध्यक्ष लगातार इस विषय मे प्रयासरत है, कुछ विभागों का संचालन शक्ति जिला के रूप मे भी किया जा रहा है। रायगढ़ जिला का पुनर्गठन कर सारंगढ़ को नया जिला बनाया जा रहा है,विगत विधानसभा चुनाव में 52 हजार से अधिक मतों के साथ जीत दर्ज कर सबसे बड़े जीत का रिकार्ड बनाया गया था। महासमुंद जिला का पुनर्गठन कर बसना को नया जिला बनाने का प्रस्ताव है जिसमे सराईपाली को भी सामिल किया गया है। इसी तरह जशपुर जिला का पुनर्गठन पत्थलगांव को नया जिला बनाया जा सकता है, इस क्षेत्र मे वर्षो से जुदेव परिवार का वर्चस्व रहा है जिसे कम करने के लिए जशपुर जिला का 2 हिस्सा कर किस्सा ही खत्म किया जा सक्ता है।

    प्रदेश में बनाये जाएंगे 4 और जिला

    राज्य सरकार प्रदेश के विकास हेतू कई बड़े जिला का पुनर्गठन कर 4 नये जिला का घोषणा कर सकती है जिसमे रायगढ़ जिला से सारंगढ़, जशपुर जिला से पत्थलगांव, जांजगिर-चांपा जिला से शक्ति, महासमुंद जिला से बसना-सराईपाली सामिल है। विदित हो की प्रदेश मे कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के पश्चात कई अन्य जगहो से भी जिला निर्माण की मांग ने जोर पकडा है किन्तु ये सभी चार क्षेत्र कई दशकों से जिला के लिए संघर्ष करते आ रहे है।

    नये ब्लाक बनने के बाद जिला परिसीमन आयोग सक्रिय हो सकता है

    विगत कई वर्षो से पेडिंग विकाश खण्ड निर्माण का भी फाईल अब मुमेंट करने लगी है, सम्भावना यह जताया जा रहा है की वित्त विभाग से अनुमती मिलने के पश्चात औपचारिक घोषणा किया जायेगा। नये विकासखण्ड बनाने के बाद ही कई जिला का भूगोल बदल जायेगा, राज्य सरकार दिल्ली से जिला परिसीमन आयोग की मांग कर सकता है, जिससे जिला मुख्यालय और ब्लाक की दुरी के हिसाब से आवागमन के मद्देनजर प्रशासनिक कार्य मे आसानी हो सके। इसके लिए जिला कलेक्टर के माध्यम से दावा-आपत्ति का अवसर दिया जायेगा।

  • अमिताभ जैन बनाए गए छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव,राज्य सरकार ने जारी किया आदेश,लेंगे आरपी मण्डल की जगह….

    अमिताभ जैन बनाए गए छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव,राज्य सरकार ने जारी किया आदेश,लेंगे आरपी मण्डल की जगह….

    रायपुर।छत्तीसगढ़ मूल के वरिष्ठ आईएएस अफसर अमिताभ जैन राज्य के नए मुख्य सचिव बनाए गए है।श्री जैन ने नवंबर में रिटायर हुए आरपी मंडल की जगह ली।अमिताभ जैन फिलहाल अपर मुख्य सचिव वित्त और जल संसाधन के पद पर पदस्थ हैं। वे छत्तीसगढ़ मूल के चौथे IAS हैं, जो मुख्य सचिव बने।इससे पहले विवेक ढांढ, अजय सिंह और मंडल मुख्य सचिव बने हैं।अमिताभ जून 2025 में रिटायर होंगे।बताते चले कि राज्य सरकार ने वर्तमान मुख्य सचिव आरपी मंडल को 6 माह की सेवावृद्धि देने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था।लेकिन केंद्र सरकार की ओर से जवाब नहीं मिला।

    बीते कुछ महीनो से अमिताभ अपर मुख्य सचिव फ़ाइनेंस के तौर पर काम करते हुए उनका मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ तालमेल अच्छा है।इसी वजह से शासन की महत्वपूर्ण बैठकों में अमिताभ जैन की मौजूदगी को नए मुखिया के तौर पर देखा जा रहा था।अमिताभ जैन ने छत्तीसगढ़ के दल्लीराजहरा से स्कूली शिक्षा पूरी की है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले जैन एमटेक हैं। जैन 11वीं बोर्ड में अविभाजित मध्यप्रदेश के टॉपर थे।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार ने आरपी मंडल को 6 माह की सेवावृद्धि देने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था।पर केंद्र सरकार की ओर से जवाब नहीं आया।मीडिया रेपोर्ट्स के अनुसार केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकार होने और पूर्व के अनुभव के आधार पर यह माना जाने लगा कि आरपी मंडल की सेवावृद्धि के प्रस्ताव को मोदी सरकार से मंजूरी मिलने की संभावना कम ही है। इस कारण राज्य सरकार ने मंडल के बाद के नए विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है।लिहाजा कुछ माह पहले ही अमिताभ जैन को सरकार की महत्वपूर्ण बैठकों में अभी से शामिल किया जाने लगा।जैन भूपेश सरकार की पहली पसंद के तौर पर इसलिए भी सामने आए क्योंकि उनमें काम के प्रति लगन काफी अच्छी है। इसके अलावा सौम्य स्वभाव होने के कारण वे सभी को स्वीकार्य हैं। अपर मुख्य सचिव वित्त के तौर पर काम करते हुए उनका मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ तालमेल अच्छा बना। इसी वजह से शासन की महत्वपूर्ण बैठकों में अमिताभ जैन की मौजूदगी को नए मुखिया के तौर पर देखा जाने लगा

  • कलेक्टरों को निर्देश जारी….वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से भी होगी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी…

    कलेक्टरों को निर्देश जारी….वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से भी होगी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से भी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन हेतु साफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान किया जा रहा हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा ऐसे वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन करने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को जारी किया गया है जिन्होंने अपने पट्टे की भूमि पर धान की फसल बोई है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2599739909253663&output=html&h=343&adk=1941931504&adf=3349391759&pi=t.aa~a.2269643242~i.5~rp.4&w=412&lmt=1603253909&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=5138987475&tp=site_kit&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=412×343&url=https%3A%2F%2Fnayabharat.live%2F%3Fp%3D96465&flash=0&fwr=1&pra=3&rh=306&rw=367&rpe=1&resp_fmts=3&sfro=1&wgl=1&fa=27&adsid=ChEI8JW6_AUQgZGtgbe1mqCNARI5AE7Y-wlDVJ1qLr5-_pVKq-AtMMpIbO2FUOXTnCsJXOdbC3-LgmI_r-OddaOQafrsIffDDh6e6Y3q&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1603253909748&bpp=28&bdt=4797&idt=28&shv=r20201019&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3Df056b25bb8a26d8c-229a87151bc4002d%3AT%3D1602824991%3ART%3D1602824991%3AS%3DALNI_MaIREIt-zrhEkEa5CZ4CI_govZtdA&prev_fmts=0x0&nras=2&correlator=7390086643609&frm=20&pv=1&ga_vid=1449218088.1591264382&ga_sid=1603253909&ga_hid=1028236174&ga_fc=0&iag=0&icsg=571917845135360&dssz=39&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=1&u_java=0&u_h=846&u_w=412&u_ah=846&u_aw=412&u_cd=24&u_nplug=0&u_nmime=0&adx=0&ady=1261&biw=412&bih=718&scr_x=0&scr_y=210&eid=42530671%2C21067466%2C21066819%2C21066973&oid=3&pvsid=2891022501600267&pem=511&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C412%2C0%2C412%2C718%2C412%2C718&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=9344&bc=31&ifi=1&uci=a!1&btvi=1&fsb=1&xpc=KrQQYv9Qrz&p=https%3A//nayabharat.live&dtd=86

    जिला कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए किसान पंजीयन का कार्य प्रचलित है। किसान पंजीयन के संबंध में अब ऐसे किसान जिनके पास वन अधिकार पट्टा है और उन्होंने इस भूमि पर धान की फसल बोई है उनका भी धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन किया जाए। जिले में ऐसे कुल किसानों की संख्या और धान का कुल रकबा की जानकारी से एनआईसी और विभाग को ई-मेल और पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाए।

    निर्देश में बताया गया है कि साफ्टवेयर में वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन के लिए आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। विभागीय साफ्टवेयर के अनुसार 1288 समितियों में से अभी भी 20 समितियों में किसान पंजीयन का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

    इनमें बलरामपुर में 10, सरगुजा और सूरजपुर में 3-3, कवर्धा में 2, रायगढ़ और नारायणपुर में एक-एक समितियां है। इन समितियों में भी किसान पंजीयन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किए जाने और पिछले साल के कैरी फारवर्ड किसानों के खसरा प्रविष्टी के कार्य में तेजी लाने के निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तक निर्धारित है।