Category: technology

  • सावधान! MP4 फाइल के जरिए हो रहा वॉट्सऐप अकाउंट हैक

    सावधान! MP4 फाइल के जरिए हो रहा वॉट्सऐप अकाउंट हैक

    दिल्ली। हैकर्स ने वॉट्सऐप सुरक्षा में सेंधमारी के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है।
    हैकर्स इन्फेक्टेड एमपी4 फाइल के जरिए यूजर्स के वॉट्सऐप अकाउंट हैकिंग कर रहे हैं। इस फाइल पर क्लिक करते ही हैकर वॉट्सऐप अकाउंट के डेटा चंद सकेंड में ही खंगाल लेते हैं।
    खासतौर से बनाई गई यह एमपी 4 फाइल, यूजर के फोन में पहुंचते ही कोड एक्सीक्यूट करती है और हैकर तक फोन का डेटा पहुंचा देती है। भारत की कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (Cert-in) के सेंधमारी के इस तरीके को बेहद खतरनाक बताते हुए यूजर्स को ऐप अपडेट करने की सलाह दी है।
    टीम ने इस बग की पहचान सीवीई-2019-11931 के रूप में की। यह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों तरह के डिवाइस में नुकसान पहुंचा सकता है। वॉट्सऐप ने इससे निपटने के लिए एक सिक्योरिटी अपडेट जारी कर दिया है।
    रविवार को वॉट्सऐप ने कहा कि हम लगातार अपनी सर्विस की सिक्योरिटी को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हमने गंभीर मुद्दों को देखते हुए एक पब्लिक रिपोर्ट तैयार की है, जिसे ठीक करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
    फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया कि जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस बग के कारण किसी को नुकसान हुआ है।
    भारत में वॉट्सऐप के लगभग 40 करोड़ यूजर्स है। कुछ दिन पहले इजराइल के एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाए गए पेगासस स्पाईवेयर के कारण वॉट्सऐप सुर्खियों में था।
    आरोप था कि कंपनी ने पेगासस स्पाईवेयर के जरिए दुनियाभर के 1400 वॉट्सऐप यूजर्स के स्मार्टफोन में सेंधमारी की गई। इसमें लगभग 120 भारतीय यूजर्स शामिल थे।

  • ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन जरूर पढ़ें ये खबर, कंपनी ने मोबाइल की जगह भेजे टाइल्स के टुकड़े, उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना …

    ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन जरूर पढ़ें ये खबर, कंपनी ने मोबाइल की जगह भेजे टाइल्स के टुकड़े, उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना …

    दुर्ग। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से मोबाइल मंगाए जाने पर पार्सल में मोबाइल की बजाय टाइल्स के टुकड़े मिले, इस पर जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी इबे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके सहयोगी व्यावसायिक संस्थान एरोमैक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड तथा कृष्णा सेल्स एजेंसी (जयपुर) पर रु.23900 हर्जाना लगाया है।

    आपापुरा दुर्ग स्थित कार्यालय में काम करने वाले परिवादी लोकेश कुमार सिंह ने ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी इबे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से शिओमी कंपनी का रेडमी मोबाइल रु. 12900 में बुक कराया जिसकी डिलीवरी उसे 7 जून 2017 को अपने कार्यालय में मिली. डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को रकम भुगतान करने के बाद जब उसने अपने कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के सामने पार्सल खोला तो उसमें से मोबाइल के स्थान पर टाइल्स के टुकड़े निकले, जिसकी पूरी तस्वीर कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी दर्ज हुई, इसके बाद परिवादी लगातार अनावेदक शॉपिंग कंपनी को ई-मेल से शिकायत दर्ज कराता रहा लेकिन उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया।

    अनावेदकगण का जवाब

    अनावेदक ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी इबे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके कोरियर पार्टनर की तरफ से प्रकरण में अधिवक्ता उपस्थित हुए परंतु उनके द्वारा प्रकरण में कोई जवाब पेश नहीं किया गया जबकि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के सहयोगी संस्थान कृष्णा सेल्स एजेंसीज ने यह दलील दी कि परिवादी और उसके बीच कोई संव्यवहार नहीं हुआ है, उसका परिवादी से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है इसलिए परिवादी उसका उपभोक्ता नहीं है।

    फोरम का फैसला

    प्रकरण में जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह माना कि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी सामान बेचने के लिए व्यवसायियों को प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है। ग्राहक के प्रति सबसे पहली जवाबदारी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी की बनती है क्योंकि ग्राहक को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि आर्डर किए गए सामान का सप्लायर विक्रेता कौन है। ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के प्लेटफार्म पर जाकर ही ऑर्डर करता है और उसे ही राशि का भुगतान करता है इसलिए ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी को किसी भी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं माना जा सकता है. ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी की यह जिम्मेदारी बनती थी कि ग्राहक को वास्तविक सामान प्राप्त हो रहा है या नहीं इसे देखे लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी मात्र ऑर्डर बुक करने तक ही सीमित रखी और जब परिवादी को दोषपूर्ण सामान की डिलीवरी हुई तो जिम्मेदारी स्वीकार करने की बजाय उससे विमुख होने का प्रयास किया।

  • जिओ-एयरटेल-वोडाफोन ने 50% तक बढ़ाए रेट,मोबाइल कस्टमर्स को झटका

    जिओ-एयरटेल-वोडाफोन ने 50% तक बढ़ाए रेट,मोबाइल कस्टमर्स को झटका

    सस्ती कॉल और इंटरनेट के दिन चले गए लगते हैं. जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया सभी ने अपने प्रीपेड उत्पादों और सेवाओं के लिए टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है.पांच साल के बाद टेलीकॉम कंपनियों ने प्रीपेड टैरिफ में की भारी बढ़ोतरीइससे ग्राहकों के मोबाइल बिल में 50 फीसदी तक की बढ़त हो सकती हैभारती एयरटेल, जियो और वोडाफोन-आइडिया ने की बढ़त की घोषणाघाटे से जूझ रही टेलीकॉम कंपनियों ने अपने प्रीपेड ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है. सस्ती कॉल और इंटरनेट के दिन चले गए लगते हैं. जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया सभी ने अपने प्रीपेड उत्पादों और सेवाओं के लिए टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है. इससे ग्राहकों के मोबाइल बिल में 50 फीसदी तक की बढ़त हो सकती है.भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने रविवार को अपने टैरिफ में 15 से 40 फीसदी की बढ़त की घोषणा की है. यह बढ़त 3 दिसंबर से लागू होगी. जियो ने भी रविवार को अपनी नई शुल्क दर योजना में 40 फीसदी तक की वृद्धि की घोषणा की. रिलायंस जियो ने एक बयान में कहा कि उसका नया प्लान ‘ऑल इन वन’ छह दिसंबर से लागू होगा।

    जियो ने एक बयान में कहा, ‘जियो अनलिमिटेड वॉयस व डाटा के साथ ऑल-इन-वन प्लान लाएगी. इस प्लान में अन्य मोबाइल नेटवर्क पर कॉल करने के लिए उचित उपयोग की नीति होगी.’ नया ऑल इन वन प्लान 40 फीसदी तक महंगा होगा. जियो के करीब 33 करोड़ ग्राहक हैं.वोडाफोन आइडिया के नेटवर्क पर फोन कॉल और डेटा के लिए प्री-पेड उपभोक्ताओं को अब 50 फीसदी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. उदाहरण के लिए आइडिया वोडाफोन का जो 12 जीबी डेटा प्लान पहले 999 रुपये का था वह अब 1499 रुपये का हो गया है.इसी तरह एयरटेल के नए प्लान में हर दिन का टैरिफ 50 पैसे से 2.85 रुपये तक बढ़ गया है. एयरटेल के नए प्लान से 169 रुपये के प्लान की बात करें तो ग्राहकों को 46 फीसदी से भी ज्यादा चार्ज देना पड़ सकता है. वोडाफोन के करीब 38 करोड़ ग्राहक हैं, जबकि एयरटेल के करीब 28 करोड़ ग्राहक हैं।

    पांच साल के बाद हुआ है इजाफागौरतलब है कि इसके पहले टेलीकॉम कंपनियों की गलाकाट प्रतिस्पर्धा की वजह से भारत में कॉल और डेटा चार्ज काफी सस्ते हो गए थे. अब जो इजाफा हो रहा है, वह पिछले 5 साल में पहली बार हो रहा है.कंपनियां क्यों बढ़ा रहीं टैरिफसमायोजित सकल आय (एजीआर) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को भारी राजस्व देना पड़ रहा है. इसकी वजह से इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में वोडाफोन को भारतीय कॉरपोरेट जगत का सबसे ज्यादा 50,922 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.इसके अलावा कंपनी के ऊपर 1.17 लाख करोड़ रुपये की भारी देनदारी है. एयरटेल को इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इसलिए कंपनियों के पास अपना टैरिफ बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं दिख रहा था।

    क्या होता है AGR

    एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है।

    दूरसंचार विभाग कहता है कि AGR की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को होने वाले संपूर्ण आय या रेवेन्यू के आधार पर होनी चाहिए, जिसमें डिपॉजिट इंट्रेस्ट और एसेट बिक्री जैसे गैर टेलीकॉम स्रोत से हुई आय भी शामिल हो. दूसरी तरफ, टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि AGR की गणना सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर होनी चाहिए।

    इसके बाद टेलीकॉम कंपनियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने भी 24 अक्टूबर, 2019 के अपने आदेश में दूरसंचार विभाग के रुख को सही ठहराया और सरकार को यह अधिकार दिया कि वह करीब 94,000 करोड़ रुपये की बकाया समायोजित ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) टेलीकॉम कंपनियों से वसूलें. ब्याज और जुर्माने के साथ यह करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये हो जाता है. कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों से तीन महीने के भीतर यह बकाया राशि जमा करने को कहा।

  • सरकार बनाने जा रही कानून, अब न्यूज पोर्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य…

    सरकार बनाने जा रही कानून, अब न्यूज पोर्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य…

    दिल्ली। देश में इस समय कोई भी व्यक्ति कहीं से भी, किसी भी पोर्टल पर खबरें छापना औऱ वायरल करना शुरु कर देता है. अब ऐसा नहीं चलने वाला है. अब आपको न्यूज पोर्टल चलाना है तो बकायदा रजिस्ट्रार आफ न्यूजपेपर आफ इंडिया के आफिस में अपने न्यूज पोर्टल का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने इसके लिए सैकड़ों साल पुराने ब्रिटिश कानून को बदलकर नया कानून बनाने औऱ उसे लागू करने की तैयारी कर ली है. इस कानून के बनने के बाद न्यूज वेबसाइटों को रजिस्ट्रार (न्यूजपेपर ऑफ इंडिया) के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा.प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (पीआरबी) एक्ट, 1867 की जगह अब रजिस्ट्रेशन ऑफ प्रेस एंड पीरियॉडिकल्स (आरपीपी) बिल, 2019 के मसौदे को सरकार ने अंतिम रुप दे दिया है. नए बिल में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रेस रजिस्ट्रार जनरल के एक नए पद के सृजन का भी प्रावधान किया गया है.नए बिल में डिजिटल प्लेटफार्म पर दिए जाने वाले समाचार के दायरे में इंटरनेट, मोबाइल या कंप्यूटर पर डिजिटाइज्ड फार्मेट में ट्रांसमिट होने में सक्षम हर समाचार को रखा गया है. इसमें लिखित, ऑडियो, वीडियो और ग्राफिक्स, सभी तरह के समाचार शामिल हैं. मंत्रालय ने इस बिल का प्रारुप अपनी वेबसाइट पर जारी किया है और लोगों से अगले 30 दिन के अंदर अपने सुझाव देने के लिए कहा गया है।
  • केन्द्र सरकार ने कहा आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं…सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुकी है खारिज…आईटी डिपार्टमेंट तलाशेंगे समस्या का हल…

    केन्द्र सरकार ने कहा आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं…सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुकी है खारिज…आईटी डिपार्टमेंट तलाशेंगे समस्या का हल…

    दिल्ली। लोकसभा में केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे पहले बीते अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट को आधार कार्ड से लिंक करने की याचिका को खारिज कर दिया था।दरअसल सोशल मीडिया से आधार को लिंक करने का मामला लंबे वक्त से चर्चा में हैं। इसके पीछे दावा किया जाता रहा है कि इससे फेक न्यूज और पेड न्यूज पर लगाम लगेगी।

    लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस संबंध में पड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया था।बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि आधार से सोशल मीडिया अकाउंट्स जोड़े जाने से डुप्लीकेट, फेक और घोस्ट अकाउंट पर लगाम कसा जा सकेगा।

    इससे पहले फेसबुक, ट्विटर समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आधार से लिंक मामले को लेकर हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हमने सुना है कि सरकार सोशल मीडिया लिंकिंग को लेकर गाइडलाइन लेकर आ रही है।यह बहुत जरूरी है, लेकिन निजता का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच मामले की सुनवाई की थी। जस्टिस गुप्ता ने कहा था कि कोर्ट के साथ सरकार और आईटी डिपार्टमेंट भी इसे देखे और समस्या का हल तलाशे।

  • फेसबुक को टक्कर देने आ गया ये सोशल मीडिया प्लेटफार्म नाम है WTSocial मेंबरशिप लेने के लिए 1 लाख लोग लाइन में लगे हैं…

    फेसबुक को टक्कर देने आ गया ये सोशल मीडिया प्लेटफार्म नाम है WTSocial मेंबरशिप लेने के लिए 1 लाख लोग लाइन में लगे हैं…

    दिल्ली। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक औऱ ट्विटर को टक्कर देने के लिए मार्केट में एक नये खिलाड़ी का आगाज हो गया है. जिसने आते ही हलचल मचा दी है।

    फ़ेसबुक और ट्विटर को टक्कर देने के लिए इंटरनेट पर नई सोशल मीडिया वेबसाइट WT:Social लॉन्च की गई है. खास बात ये है कि इसको विकीपीडिया ने लांच किया है औऱ नाम रखा है. WT:Social. इस सोशल मीडिया का माडल भी पूरी तरह से अलग है और इसे लोगों से मिलने वाले डोनेशन के जरिये चलाया जाएगा।WT:Social को ज्वाइन करने के लिए आपको या तो डोनेशन देना होगा या अपने किसी दोस्त को इनविटेशन भेजना होगा. इसकी सदस्यता लेने के लिए 1 लाख 34 हजार लोग वेटिंग लिस्ट में है. आपका नंबर इनके बाद ही आएगा. इसका एक महीने का सब्सक्रिप्शन शुल्क 12.99 USD यानि लगभग 900 रुपये और साल भर का चार्ज 100 USD यानि करीब 7 हजार रुपये होंगे।

  • मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में JIO का कमाल, एयरटेल, आइडिया, बीएसएनल को पछाड़ा…

    मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में JIO का कमाल, एयरटेल, आइडिया, बीएसएनल को पछाड़ा…

    रायपुर। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में सितंबर के महीने में कुल मोबाइल ग्राहक 7.54 करोड़ हो गए हैं. अगस्त में इनकी संख्या 7.52 करोड़ थी. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में कुल 1.68 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के महीने में सिर्फ जियो ही ग्राहक जोड़ने में कामयाब रही है, वहीं भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल के ग्राहकों में कमी आई है।टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई के आंकड़ों की बात कहें तो रिलायंस जियो के अगस्त में 2.62 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, जो सितंबर में बढ़कर 2.68 करोड़ हो गए. जियो ने सितंबर के महीने में 5.6 लाख ग्राहक जोड़े हैं. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भारती एयरटेल के अगस्त में 1.49 करोड़ सब्सक्राइबर थे, जो सितंबर में घटकर 1.48 करोड़ हो गए हैं. वोडाफोन-आइडिया के 2.76 करोड़ ग्राहक थे, जो सितंबर में घटकर 2.73 करोड़ हो गए हैं. बीएसएनएल के 63.8 लाख ग्राहक थे जो सितंबर में घटकर 63.7 लाख हो गए हैं। पूरे भारत की बात कहें तो कुल 117.37 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं. अगस्त में इनकी संख्या 117.1 करोड़ थी.  सितंबर में एक्टिव मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 96.08 करोड़ रही. सितंबर में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. वहीं शहरी इलाकों में ग्राहकों की संख्या घटी है. सितंबर में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 51.10 करोड़ से बढ़कर 51.72 करोड़ हो गई है. जियो फोन की अधिकतर बिक्री ग्रामीण इलाकों में ही होती है. पूरे भारत के लिहाज से वोडाफोन-आइडिया ने 25.7 लाख और भारती एयरटेल ने 23.8 लाख ग्राहक खोए हैं, वहीं रिलायंस जियो ने 69.83 लाख ग्राहक जोड़े हैं।
  • इंटरनेट इस्तेमाल में भारत दूसरे स्थान पर

    इंटरनेट इस्तेमाल में भारत दूसरे स्थान पर

    भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने की रफ्तार हमारी सोच से कहीं ज्यादा तेज है, इंटरनेट उपयोग के मामले में हमारा देश चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। नील्सन होल्डिंग के साथ इंटरनेट एवं मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट इंडिया इंटरनेट 2019 के अनुसार 31 मार्च 2019 तक भारत में 45.10 करोड मासिक सक्रिय इंटरनेट यूजर थे, जबकि चीन में 80 करोड़ से अधिक यूजर थे। सक्रिय इंटरनेट यूजर का अर्थ बीते 1 महीने में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से है भारत के सक्रिय की संख्या पर आईएएमएआई की यह पहली रिपोर्ट है इससे पहले आईएएमएआई भारत के कुल इंटरनेट यूजर की संख्या का अध्ययन करती रही है।

    इस रिपोर्ट की मानें तो कुल 45.1 करोड सक्रिय यूजर में 38.5 करोड यूजर 12 से अधिक उम्र के हैं, जबकि 6.6 करोड यूजर 5 से 11 वर्ष के हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि हमारे देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की अच्छी खासी संख्या स्कूल जाने वाले बच्चों की है। यह जानना दिलचस्प है कि इन बच्चों के पास अपने डिवाइस नहीं है, बल्कि यह अपने माता-पिता या परिवार के किसी दूसरे सदस्यों की डिवाइस के माध्यम से इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। हमारे देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले तीन में से एक से अधिक व्यक्ति 12 से अधिक उम्र के हैं। पूरे भारत में स्मार्ट फोन की पहुंच और कम कीमत पर 4जी सेवाओं की उपलब्धता के बावजूद इंटरनेट इस्तेमाल में काफी अंतर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आज भी पुरुषों के मुकाबले इंटरनेट इस्तेमाल में महिलाएं काफी पीछे हैं। हमारे देश में जहां 25.8 करोड़ पुरूष इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वहीं महिलाओं की संख्या इसके मुकाबले आधी है। देश भर के 67% पुरुषों के मुकाबले महज 33% महिलाएं इंटरनेट उपयोग करती हैं। वहीं शहरी इलाकों में 62% पुरुषों की तुलना में 38% महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं ग्रामीण इलाके में यह अंतर कहीं ज्यादा है यहां 72% पुरुषों की तुलना में महज 28% महिला इंटरनेट यूजर हैं।

    हमारे देश में 12 वर्ष से अधिक उम्र के इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों का प्रतिशत महज 36 है इनमें 51% यूजर शहरी और 27% ग्रामीण भारत से हैं। इंटरनेट पर समय बिताने की अगर बात करें तो 33% शहरी भारतीय 1 घंटे से ज्यादा रोजाना इंटरनेट पर बिताते हैं, वहीं ग्रामीण भारत में इंटरनेट पर बिताए जाने वाला समय महज 15 से 30 मिनट है राज्यों के स्तर पर अगर बात करें तो इंटरनेट इस्तेमाल के मामले में 69% के साथ दिल्ली सबसे आगे है 54% के साथ केरल दूसरे 49% के साथ जम्मू कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, और पंजाब तीसरे स्थान पर हैं। 47% के साथ तमिलनाडु चौथे तो 43% के साथ महाराष्ट्र व गोवा पांचवे स्थान पर मौजूद है। पूर्वोत्तर के राज्यों को छोड़कर पूर्वी भारत के राज्य पश्चिम बंगाल29, बिहार28, झारखंड26, उड़ीसा 25% काफी पीछे है।

    इंटरनेट स्पीड टेस्ट ऑर्गनाइजेशन उकला की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में औसत इंटरनेट की स्पीड में वृद्धि हुई है। अप्रैल और सितंबर 2019 के बीच 2.1 करोड़ परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2019 के अंत तक भारत की औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड 16.5% बढ़कर 34.07% एमबीपीएस पर पहुंच गई है। वही दूसरी ओर भारत कि मोबाइल इंटरनेट स्पीड 10.63 और 11.18 एमबीपीएस के बीच की औसत के साथ काफी स्थिर बनी हुई है। शहरों के बीच अगर बात करें तो 51.7 एमबीपीएस की स्पीड के साथ चेन्नई सबसे तेज, और 20.1 एमबीपीएस की स्पीड के साथ नागपुर सबसे धीमा है। हालांकि मोबाइल की स्पीड में शहरों के बीच ज्यादा अंतर नहीं है 11.87mbps की स्पीड के साथ मुंबई सबसे तेज तो 8.94 एमबीपीएस के सबसे लखनऊ सबसे धीमा है। 4G उपलब्धता को लेकर उकला का आंकड़ा कहता है कि भारत की 88% ऑपरेटर नेटवर्क 4G की सुविधा मुहैया कराने लगे हैं।

  • टाटा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये लिथियम अरबन के साथ गठजोड़ किया

    टाटा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये लिथियम अरबन के साथ गठजोड़ किया

    दिल्ली। टाटा मोटर्स ने सोमवार को कहा कि उसने इलेक्ट्रानिक वाहन उपलब्ध कराने वाली लिथियम अरबन टेक्नोलॉजीज के साथ समझौता किया है। यात्री, माल ढुलाई समेत विभिन्न खंडों में वाहनों के समाधान को लेकर यह समझौता किया गया है। टाटा मोटर्स ने एक बयान में कहा कि समझौते के तहत चालू वित्त वर्ष के अंत तक वह 400 टिगोर इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) लिथियम अरबन को आपूर्ति करेगी। समझौते के तहत कंपनी आने वाले नेक्सोन ईवी जैसे 100 और इलेक्ट्रिक वाहन भी उपलब्ध कराएगी।टाटा मोटर्स के अध्यक्ष (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बिजनेस एंड कॉरपोरेट स्ट्रैटजी) शैलेष चंद्रा ने कहा, ‘‘यह न केवल टाटा मोटर्स के लिये मील का पत्थर है बल्कि ईवी बाजार में एक बड़ा बदलाव है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी आएगी।
  • WhatsApp Group का ऐसा नाम रखने या ऐसे नाम वाले ग्रुप में शामिल होने पर बैन हो रहे हैं यूज़र्स -रिपोर्ट

    WhatsApp Group का ऐसा नाम रखने या ऐसे नाम वाले ग्रुप में शामिल होने पर बैन हो रहे हैं यूज़र्स -रिपोर्ट

    वॉट्सऐप (WhatsApp) को लेकर यूज़र्स को एक बड़ी समस्या आ रही है. WABetaInfo पर पिछले कई दिनों से यूज़र्स लगातार इस बात को रिपोर्ट कर रहे हैं कि उन्हें वॉट्सऐप ने बैन कर दिया है. WAबीटाइन्फो के जांच-पड़ताल करने के बाद सामने आया कि वॉट्सऐप उन यूज़र्स को बैन कर रहा है कि जो कि ऐसे ग्रुप में ऐड हों, जिसका नाम संदेहजनक हो.

    बताया गया कि सबसे पहले Mowe11 नाम के यूज़र ने रेडिट (Reddit) पर पोस्ट कर रिपोर्ट दी. बताया गया कि वह शख्स एक युनिवर्सिटी नाम के ग्रुप को ऐड था, उस ग्रुप के एक पार्टिसिपेंट (member) ने उसका नाम ‘child porn’ कर दिया था. इसकी वजह से ग्रुप के सारे मेंबर को वॉट्सऐप से बैन कर दिया गया.इसके अलावा रेडिट पर ही एक दूसरे यूज़र FranciscoAlfaro ने बताया कि वह अपने स्कूल के ग्रुप में ऐड है और हाल ही में जब वह सुबह उठा तो देखा कि ग्रुप के मेंबर्स (100 participant) बैन हो गए हैं.

    एक दूसरी रिपोर्ट PiTiXX पर सामने आई, जहां यूज़र ने बताया कि वह वॉट्सऐप ग्रुप से बैन हो गया है, क्योंकि उसके दोस्त ने ग्रुप का सब्जेक्ट बदलकर संदेहजनक रख दिया था. इतना ही नहीं Laurato नाम के एक यूज़र ने WABetaInfo को रिपोर्ट किया उसे भी ग्रुप के नाम के वजह से बैन कर दिया गया है.WABetaInfo ने बताया कि जब इन यूज़र्स ने वॉट्सऐप को संपर्क किया तो उन्हें ऑटोमेटेड रिप्लाई मिला. उसमें लिखा है, उन्हें वॉट्सऐप की Terms of Services का उल्लघंन करने की वजह से बैन किया गया है और उन्हें दुबारा रिप्लाई नहीं किया जाएगा.

    तोअगर ऐसे में कोई यूज़र गलती से भी बैन हो गया है तो वॉट्सऐप की तरफ से उसे कोई रिप्लाई नहीं आएगा. इसके बाद यूज़र को मजबूरन अपना फोन नंबर चेंज करना पड़ेगा. जानकारी के लिए बता दें कि बैन होने के बाद यूज़र की पूरी चैट हिस्ट्री डिलीट हो जाएगी