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  • कोई फेसबुक अकाउंट हैक कर आपके नाम पर मांग रहा है पैसा तो जानें क्‍या करें…

    कोई फेसबुक अकाउंट हैक कर आपके नाम पर मांग रहा है पैसा तो जानें क्‍या करें…

    फेसबुक ने इस तरह के अकाउंट हैक के मामलों के लिए हेल्प पेज बना रखा है. यदि आपको लगता है कि आपका अकाउंट हैक हो गया है तो आप वहां जाकर स्टेप-बाय-स्टेप निर्देशों को मानकर उसे दोबारा एक्टिवेट और सिक्योर कर सकते है

    दिल्ली। इन दिनों कई लोग फेसबुक पर अजीब दिक्कत का सामना कर रहे है. दरअसल, काफी लोगों का फेसबुक अकाउंट हैक हो रहा है और उनके नाम पर पैसा मांगा जा रहा है. सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि उन्हें इस बात का पता तब चल रहा है, जब जानकार व्यक्ति पैसों की जरूरत की बात उनसे करता है. बात करने पर पता चलता है कि किसी दूसरे व्‍यक्ति ने यह मैसेज भेजा है. साथ ही जो नंबर पैसा ट्रांसफर करने के लिए भेजा वो उनका है ही नहीं।

    कई लोगों ने ट्रांसफर किए पैसे
    दिल्ली में रहने वाले जीतेश श्रीवास पेशे से इंजीनियर हैं. उन्हें अपने फेसबुक अकाउंट का हैक होने का पता तब चला जब उनके दोस्त ने उन्हें फोन करके कहा पैसे मिल गए क्या? उन्हें कुछ समझ में नहीं आया. उन्होंने कहा कि मैंने तो कोई पैसे मांगे ही नहीं, तुमने कितने पैसे डाले और किसने कहा. सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि एक हजार क्योंकि फेबसुक मैसेंजर से उसे मैसेज आया था कि तुम कही फंस गए हो तो तुरंत एक हजार की जरूरत है. उन्होंने वो नंबर पूछा, जिसमें पैसा ट्रांसफर किया लेकिन जब कॉल लगाया तो वह नंबर अस्तित्व में नहीं था. जीतेश ऐसे अकेले शख्स नहीं हैं, जो इस झांसे में कई लोग आ रहे हैं. वहीं, अकाउंट हैक होने के बारे में समय से पता चल जाने पर लोग अपने फेसबुक वॉल पर इसकी सूचना दूसरों को भी दे रहे हैं.

    फेसबुक पेज पर रिपोर्ट करें
    फेसबुक ने इस तरह के अकाउंट हैक के मामलों के लिए हेल्प पेज बना रखा है. आपको लगता है कि आपका अकाउंट हैक हो गया है तो आप वहां जाकर स्टेप-बाय-स्टेप निर्देशों को मानकर उसे दोबारा एक्टिवेट और सिक्योर कर सकते हैं. आप इस लिंक को क्लिक करके सीधे फेसबुक के हेल्प पेज पर पहुंच सकते हैं – https://hi-in.facebook.com/help/

    हैकिंग का ऐसे लगाएं पता
    अगर आपको ये चीज़ें दिखाई देती हैं तो हो सकता है कि आपका अकाउंट हैक किया गया हो.


    आपका ईमेल और पासवर्ड बदल गया है.


    आपका नाम और जन्मदिन की तारीख बदल गई है.


    उन लोगों को फ़्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई है, जिन्हें आप नहीं जानते.


    ऐसे मैसेज भेजे गए हैं, जो आपने न भेजे हों.


    ऐसी पोस्ट होना, जो आपने न बनाई हों.

    कभी न करें ये काम
    अगर आप ऐसे हैकर्स का शिकार बनने से बचना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है…

    • आप अपना अकाउंट लॉगइन करते समय पासवर्ड ध्यान से डालें और उसको सिक्योर रखें. ओपन वाईफाई का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे हैकिंग आसानी से हो सकती है.
    • फेसबुक पर हमें जन्मदिवस की तारीख डालने से बचें. ऐसा करना आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है, क्योंकि हम में से कई यूज़र्स अपने डेट ऑफ बर्थ को पासवर्ड भी बनाकर रखते हैं. ऐसे में हैकर्स आसानी से यूज़र्स का अकाउंट हैक कर लेते हैं. इतना ही नहीं कई बार तो ये तारीख पाकर हैकर बैंक खाते तक भी पहुंच सकते हैं.
    • मोबाइल नंबर फेसबुक पर ना डालें. इससे यूज़र की सिक्योरिटी को खतरा हो सकता है. मान लें कि आप ऐसा करना भी चाहते हैं तो इसके लिए ‘Only Me’ सेटिंग्स का इस्तेमाल करें, जिससे किसी को पता नहीं चलेगा कि आपका मोबाइल नंबर क्या है
  • पति की हत्या कर Google से लाश को ठिकाने लगाने का आईडिया पूछना पड़ा महँगा….

    पति की हत्या कर Google से लाश को ठिकाने लगाने का आईडिया पूछना पड़ा महँगा….

    गूगल के सब पता है ? शायद नहीं लेकिन आप जो भी करते हैं गूगल सबको बात जरूर देता है। यही हुआ जब एक महिला ने अपनी पति की हत्या कर गूगल से लाश ठिकाने लगाने का तरीका पूछ लिया। गूगल ने यह तरीका तो नहीं बताया उल्टा पत्नी पुलिस के गिरफ्त में आ गई।

    मामला मध्य प्रदेश के हरदा जिले का है जहां एक महिला ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। पत्नी को पति की लाश ठीकाने लगाने का आइडिया नहीं आया तो उसने गूगल पर सर्च करके लाश ठिकाने लगाने की जानकारी ली। माना की गूगल हर सवाल का जवाब है लेकिन इस तरह क्राइम के लिए गूगल के पास भी जवाब नहीं होते हैं।

    इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी महिला तबस्सुम और उसके प्रेमी इरफान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि प्रेमी भी मृतक का दोस्त ही था। एसपी हरदा ने बताया कि हरदा में कल खेड़ीपुरा नई आबादी क्षेत्र में 18 जून को आमिर की हत्या हो गई थी। पुलिस ने 36 घण्टे के अंदर हत्या का खुलासा कर दिया। पुलिस की जांच में पता चला कि हत्या आमिर की पत्नी तबस्सुम और उसके प्रेमी इरफान ने की है।

  • 7 जून से शुरू हुई इनकम टैक्स की नई वेबसाइट, जाने इसकी खास बातें…

    7 जून से शुरू हुई इनकम टैक्स की नई वेबसाइट, जाने इसकी खास बातें…

    आयकर विभाग ने 7 जून को नया ई-फाइलिंग पोर्टल लॉन्च किया है. यानी 7 जून से इनकम टैक्स की ई-फाइलिंग वेबसाइट का पता बदल गया है. आयकर विभाग ने कहा है- ‘हम 7 जून से नई ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाने के लिए काफी उत्साहित हैं. नया पोर्टल अधिक यूजर फ्रेंडली है, जिसमें कई नए फीचर जोड़े गए हैं.’

    • नई वेबसाइट अधिक यूजर फ्रेंडली होगी, जिससे आईटीआर फाइल करने में आसानी होगी और रिफंड भी जल्दी मिलेगा.
    • सभी ट्रांजेक्शन, अपलोड और पेंडिंग एक्शन एक ही डैशबोर्ड पर दिखेंगे, ताकि यूजर उसे रिव्यू कर सकें और जरूरत के हिसाब से एक्शन ले सकें. यानी इससे आईटीआर फाइल करना, उसे रिव्यू करना और कोई एक्शन लेना आसान हो जाएगा.
    • ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही स्थितियों के लिए आईटीआर के लिए तैयारी करने का सॉफ्टवेयर मुफ्त में उपलब्ध है. इसमें करदाताओं को असिस्ट करने की सुविधा भी होगी और प्री-फाइलिंग का विकल्प भी मिलेगा, ताकि कम से कम डेटा एंट्री करनी पड़े.
    • डेस्कटॉप पोर्टल की सभी जरूरी सुविधाएं मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध होंगी. नए पोर्टल में एक नया टैक्स पेमेंट सिस्टम लाया जाएगा, जिसमें भुगतान के कई विकल्प होंगे, जैसे नेट बैंकिंग, यूपीआई, आरटीजीएस, एनईएफटी आदि।

    पोर्टल के बाद मोबाइल एप भी आएगा

    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सीबीडीटी एक नई कर भुगतान प्रणाली 18 जून का शुरू करने जा रहा है. वहीं ITR के नए पोर्टल के बाद में मोबाइल ऐप भी जारी किया जाएगा ताकि करदाता उसकी विभिन्न सुविधाओं से परिचित हो सकें।

    e-Filing पोर्टल पर फाइल होता है ITR

    टैक्सपेयर्स अपने इंडिविजुअल या बिजनेस कैटगरी के इनकम टैक्स रिटर्न ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए फाइल करते हैं. इस पोर्टल के जरिए रिफंड के लिए आवेदन किया जा सकता है और टैक्स से जुड़े अन्य कार्य किए जाते हैं. इसी पोर्टल के जरिए टैक्समैन नोटिस जारी करते हैं, उन्हें टैक्सपेयर से रिस्पांस मिलता है और वे सवालों का जवाब देते हैं. इसके अलावा इस पोर्टल के जरिए एसेसमेंट्स, अपील, एग्जेंप्शन और पेनाल्टी को लेकर बातचीत की जाती है।

  • WhatsApp पर 3 रेड टिक’ वाले मैसेज की क्या है पूरी सच्चाई, क्या सरकार पढ़ रही है आपके मैसेज?

    WhatsApp पर 3 रेड टिक’ वाले मैसेज की क्या है पूरी सच्चाई, क्या सरकार पढ़ रही है आपके मैसेज?

    व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैसेज फारवर्ड किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि नए आईटी नियम लागू होने के बाद सभी के व्हाट्सएप मैसेज व कॉल रिकॉर्ड किए जाएंगे। साथ ही उनकी सोशल मीडिया की एक्टीविटी पर नजर रखी जाएगी।

    इस मैसेज में दावा किया गया गया है कि इंस्टैंट मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने नए नियम लागू कर दिये हैं। इसमें दो ब्लू टिक- एक रेड टिक और तीन रेड का अर्थ समझाया है। ब्लू टिक व एक रेड टिक का मतलब है कि सरकार कार्रवाई कर सकती है, जबकि तीन रेड टिक का मतलब है कि कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आप इस तरह के मैसेज से घबराएं, उससे पहले बता देते हैं कि ये दावे फर्जी हैं।

    बताते चलें कि इस तरह का मैसेज बीते साल भी वायरल हुआ था। इस नए व फर्जी मैसेज में कहा कि कोई यूजर्स सरकार के खिलाफ या किसी धार्मिक मुद्दे पर नकारात्मक संदेश शेयर करता है, तो उसको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    व्हाट्सएप ने अभी तक नए आईटी नियम को लागू नहीं किया है। न ही नए निययों में तीन रेड टिक और ब्लूट टिक जैसा कोई नियम है। अभी तक व्हाट्सएप में सिर्फ दो टिक नजर आते हैं, जिनका मतलब भी आपको बता देते हैं। व्हाट्सएप पर सेंड किए गए मैसेज पर एक टिक बनता है, जिसका मतलब है कि मैसेज सेंड हो गया, जबकि दो टिक का मतलब कि मैसेज डिलिवर हो गया और दो ब्लू टिक का मतलब कि प्राप्तकर्ता ने मैसेज को पढ़ लिया है।

    क्या व्हाट्सएप के मैसेज कोई पढ़ सकता है?

    WhatsApp में end-to-end encrypted फीचर है, जिसकी वजह से सेंडर्स और रिसीवर ही मैसेज को एक्सेस कर सकते हैं और इसे बीच में डिकोड नहीं किया जा सकता है। आपकी चैट्स, फोटो, वीडियो, वॉयस मैसेज, डॉक्यूमेंट, स्टेट्स अपडेट और कॉल को व्हाट्सएप भी एक्सेस नहीं कर सकता है।

    नए आईटी नियमों की घोषणा 25 फरवरी की गई थी और इन्हें 26 मई से प्रभाव में आना था। लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों ने इसे लागू नहीं किया गया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर किसी पोस्ट के लिए शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

  • ई-कोर्ट मोबाइल ऐप ने 57 लाख डाउनलोड को पार किया, सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी ने 14 भाषाओं में ऐप मैनुअल जारी किया…

    ई-कोर्ट मोबाइल ऐप ने 57 लाख डाउनलोड को पार किया, सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी ने 14 भाषाओं में ऐप मैनुअल जारी किया…

    सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी ने अपनी मुफ्त ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप के लिए एक मैनुअल जारी किया है। एप्लिकेशन ने 57 लाख डाउनलोड को पार कर लिया है और बेहतर पहुंच के लिए मैनुअल को 14 भाषाओं- यानी अंग्रेजी, हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, खासी, मलयालम, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु में जारी किया गया है। मोबाइल ऐप और इसके मैनुअल को अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कमेटी, सुप्रीम कोर्ट आॅफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

    लिंक डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें https://ecommitteesci.gov.in/service/ecourts-services-mobile-application/

    एससी ई-कमेटी के अध्यक्ष डॉ न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ ने मैनुअल को फाॅर-वर्डिड किया। उन्होंने इस मुफ्त मोबाइल ऐप के महत्व पर बल दिया और इस नागरिक-केंद्रित मोबाइल ऐप की पहुंच पर निम्नलिखित शब्दों में प्रकाश डालाः ”पिछले एक साल में महामारी ने अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों और वादियों को लॉकडाउन और सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं के आलोक में कार्यालयों और अदालतों के बंद होने के कारण उच्च तकनीकी समाधान अपनाने के लिए प्रेरित किया है। कानूनी पेशे की प्रैक्टिस और संचालन के लिए दूरस्थ रूप से काम करना, वर्चुअल कोर्ट, डिजिटल कार्यस्थल और इलेक्ट्रॉनिक केस प्रबंधन अभिन्न अंग बन गए है। इसने हमें प्रौद्योगिकी को अपनाने का एक दुलर्भ अवसर दिया है जो केवल एक अंतरिम उपाय के रूप में नहीं बल्कि हमारी कानूनी प्रणाली को अधिक कुशल, समावेशी, सुलभ और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए भी है। ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल एप्लिकेशन इस दिशा में एक कदम है।”

    अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में जारी ई-कमेटी मैनुअल आम आदमी की आसान समझ के लिए स्क्रीनशॉट के साथ सभी विशेषताओं की व्याख्या करता है। उक्त क्षेत्रीय भाषा मैनुअल को संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके कोई भी व्यक्ति विभिन्न नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्राप्त कर सकता है जैसे विभिन्न केस को केस नंबर, सीएनआर नंबर, फाइलिंग नंबर, पार्टी के नाम, एफआईआर नंबर, अधिवक्ता विवरण, अधिनियम आदि के जरिए सर्च कर सकता है। सीएनआर सर्च, केस स्टेटस सर्च, कॉज लिस्ट सर्च जैसे सर्च के विभिन्न प्रकार भी उपलब्ध हैं। तिथिवार केस डायरी सहित फाइलिंग से लेकर निपटान तक मामले की पूरी केस हिस्ट्री प्राप्त की जा सकती है। कोई भी मोबाइल ऐप के जरिए आदेश/निर्णय, मामले के स्थानांतरण का विवरण, अंतरिम आवेदन की स्थिति के बारे में जान सकता है। ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से कोई भी हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों, दोनों के मामलों का स्टे्टस/मामले का विवरण प्राप्त कर सकता है। Also Read – सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें COVID के कारण मृत्यु की आशंका को अग्रिम जमानत का आधार माना गया था अधिवक्ता/वादी/संगठन ”माई केस” के तहत सभी मामलों की एक डिजिटल डायरी रख सकते हंै, जो अधिवक्ताओं और वादियों के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली और आकर्षक विशेषता है। वह सभी इसमें उपलब्ध माई केस विकल्प का उपयोग कर सकते हैं जो एक वकील/ वादी के लिए एक डिजिटल डायरी के समान है। ‘माई केस’ का उपयोग करके कोई भी व्यक्तिगत केस नंबर जोड़ सकता है और स्वचालित अपडेट प्राप्त कर सकता है। यह उन वादियों, फर्म, कंपनियों या संगठनों के लिए भी उपयोगी है जिनके विभिन्न स्थानों पर विभिन्न न्यायालयों में कई मामले लंबित हैं। ‘माई केस’ में, कोई व्यक्ति अपने मामलों की व्यक्तिगत सूची जोड़ सकता है और ई-कोर्ट मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सभी अपडेट प्राप्त कर सकता है। Also Read – नारदा घोटाला केस: सीबीआई ने टीएमसी नेताओं को हाउस अरेस्ट करने की अनुमति देने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस … सभी ई-कोर्ट सेवाएं भी ई-कोर्ट मोबाइल ऐप से जुड़ी हुई हैं। ई-कोर्ट मोबाइल ऐप भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है। ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप वादियों/आम नागरिक/अधिवक्ताओं/संगठन/सरकारी विभाग के लिए व्यक्तिगत डिजिटल केस डायरी है जिसमें सभी केस विवरण उनके हाथ(सेट)में 24 घंटे व सातों दिन मुफ्त में उपलब्ध हैं। न्याय विभाग के सचिव श्री बरुण मित्रा, जिन्होंने भी इस नियमावली को फाॅर-वर्डिड किया हैै, ने अधिवक्ताओं के लिए इस इलेक्ट्रॉनिक केस प्रबंधन उपकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। ”इस ईसीएमटी के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने और वकीलों के समुदाय के दरवाजे तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप पर इस मैनुअल का प्रकाशन एक और प्रशंसनीय कदम है।

  • मुफ्त के नाम पर भूलकर भी न करें ये काम, Jio ने यूजर्स को किया अलर्ट! वरना खाली हो जाएगा खाता….

    मुफ्त के नाम पर भूलकर भी न करें ये काम, Jio ने यूजर्स को किया अलर्ट! वरना खाली हो जाएगा खाता….

    जमाना तो डिजिटल का हो चला है. पहले ये शहरों तक सीमित था, लेकिन अब गांवों में भी डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं. चाय-पान-नाश्‍ता करने से लेकर शॉपिंग करने और कार खरीदने तक… पेमेंट करने के लिए हम डिजिटल तरीका अपनाते हैं. यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग या फिर मोबाइल बैंकिंग ऐप… कैश लेनदेन से ज्यादा पेमेंट के ये तरीके ही आजकल चलन में हैं. लेकिन आपको उतना ही अधिक सावधान रहने की जरूरत है. 41 करोड़ से ज्यादा यूजर्स वाली देशी की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी जियो (Jio) ने ऐसी ही सलाह दी है।

    दरअसल डिजिटल लेनदेन के इस युग में लोगों के साइबर फ्रॉड का शिकार होने की खबरें अक्सर आती रहती हैं. साइबर अपराधी कई तरह से लोगों को चूना लगाते हैं. फ्रॉड का एक तरीका यह भी है कि साइबर अपराधी मुफ्त मोबाइल डाटा ऑफर (Free Mobile Data Offer) करते हुए आपको मैसेज करते हैं या कॉल करते हैं और फिर शातिराना अंदाज में आपकी निजी जानकारी हासिल कर आपको चूना लगा देते हैं. ऐसी आशंका को देखते हुए जियो ने अपने करोड़ों ग्राहकों को टेक्स्ट मैसेज डालकर अलर्ट किया है।

    जियो की ओर से भेजे गए मैसेज में क्या है?

    Jio ने मोबाइल यूजर्स को अलर्ट मैसेज भेजा है. इसमें कहा है, “धोखाधड़ी के इरादे से भेजे गए ऐसे किसी भी संदेश से सावधान रहें, जिसमें आपसे आपकी व्यक्तिगत जानकारी/ केवाईसी (KYC) डिटेल्स को अपडेट करने को कहा जाए. ऐसे मैसेज से भी सावधान रहें, जिनमें मुफ्त मोबाइल डेटा देने का वादा किया गया हो. जियो ने अपने ग्राहकों से कहा है कि किसी भी अज्ञात या संदिग्ध नंबरों से कॉल करने वाले को अपनी व्यक्तिगत जानकारी कभी भी न दें. सुरक्षित रहें.”

    एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर आपने निजी जानकारी दी तो जालसाज आपके खाते से आपकी मेहनत की कमाई चुरा सकते हैं. जियो ने स्पष्ट तौर पर अपने ग्राहकों से अपनी पर्सनल डिटेल्स के बारे में गोपनीयता रखने को कहा है. कई बार हमें अज्ञात नंबरों से कॉल आते हैं और कहा जाता है कि हम आपके बैंक की ओर से बोल रहे हैं. कभी वे कहेंगे कि एटीएम वैलिडिटी खत्म हो गई तो कभी कहेंगे कि केवाईसी डिटेल्स कंफर्म करा दें. कई बार तो लोन ऑफर्स के नाम पर भी साइबर अपराधी धोखा करते हैं. केवाईसी संबंधित डिटेल्स हासिल कर वे बैंक खाते से सारे पैसे गायब कर देते हैं. इस संबंध में एसबीआई समेत कई बैंकों की ओर से ग्राहकों को समय-समय पर अलर्ट किया जाता रहा है।

    फ्रॉड से बचने के लिए आप भी इन बातों को ध्यान में रखें

    • समय-समय पर अपने बैंक अकाउंट के पासवर्ड बदलते रहें.
    • कभी भी अनजाने व्यक्ति को फोन, ईमेल या एसएमएस के जरिए इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स ने शेयर करें.
    • टेक्‍स्‍ट मैसेज या वॉट्सऐप मैसेज में आए किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें.
    • किसी भी दूसरे व्यक्ति को अपन व्यक्तिगत जानकारी नहीं साझा करें. खासतौर से किसी अनजाने व्यक्ति से बिल्कुल ही न शेयर करें.
    • बैंक संबंधी जानकारी जुटाने के लिए हमेशा बैंक के आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही जानकारी जुटाएं.
    • अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में जल्द से जल्द नजदीकी एसबीआई ब्रांच और पुलिस अधिकारियों को सूचित करें।
  • जाने कैसे हो रहा स्मार्टफोन पर वायरस का अटैक, चुरा रहा अकाउंट-पासवर्ड…

    जाने कैसे हो रहा स्मार्टफोन पर वायरस का अटैक, चुरा रहा अकाउंट-पासवर्ड…

    Google Play Store को एंड्रॉयड ऐप्स और गेम्स इंस्टॉल करने के लिए काफी सेफ माना गया है. Google दावा करता है कि इसमें एंटी-मैलवेयर प्रोटेक्शन दिया गया है. इस वजह से स्टोर पर अपलोड होने से पहेल ऐप को स्कैन किया जाता है. थर्ड पार्टी से किसी ऐप को इंस्टॉल करने में काफी रिस्क रहता है. अब एक मैलवेयर को लेकर अलर्ट किया गया है. Google की ओर से Play Store पर Google Play Protect टूल भी दिया जाता है।

    ये टूल प्ले स्टोर के बाहर से भी इंस्टॉल हुए ऐप्स पर मैलवेयर चेक करता है. इन सब के बावजूद मैलवेयर का अटैक हो जाता है. मैलवेयर यूजर के फोन में इंस्टॉल हो जाता है और डिवाइस को इन्फेक्ट कर देता है.अब एक नए मैलवेयर Flubot को लेकर रिपोर्ट आई है. ये मैलवेयर यूजर के पासवर्ड को चुरा लेता है. ये किसी पॉपुलर ऐप की तरह दिखता है. इस वजह से यूजर्स इसके झांसे में आ जाते हैं. इस वायरस को लेकर Vodafone UK, Three और EE के अलर्ट के बाद BBC ने इसे रिपोर्ट किया था. इस वायरस को इंस्टॉल करावने के लिए यूजर्स को एक स्पैम SMS भेजा जाता है. मैसेज में पैकेज डिलीवरी की बात कही जाती है. डिलीवरी को ट्रैक करने के लिए यूजर को एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है. ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है. इस वजह से इसे मैन्यूअली इंस्टॉल करने को कहा जाता है.ऐसे मैलवेयर अटैक से सुरक्षित रहने के लिए यूजर्स को किसी थर्ड पार्टी ऐप को कही और से डाउनलोड करने से बचना चाहिए. ये उनकी सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है. सिर्फ प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करने से यूजर्स काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।

    जो लोग Flubot मैलवेयर से प्रभावित हो चुके हैं उन्हें किसी नए अकाउंट में लॉगिन नहीं करना चाहिए. नए अकाउंट में लॉगिन करने से उनका और भी डेटा स्कैमर्स के पास जा सकता है. NCSC ने कहा है कि इससे इन्फेक्टेड यूजर्स को तुरंत अपना फोन रिसेट कर लेना चाहिए. Flubot इंस्टॉल करने के बाद अगर उन्होंने किसी नए अकाउंट को बनाया है तो उसका पासवर्ड उन्हें बदल देना चाहिए।

  • मोबाइल हैकिंग और डाटा लीक के बढ़ रहे हैं केस, डरें नहीं बचाव करें….

    मोबाइल हैकिंग और डाटा लीक के बढ़ रहे हैं केस, डरें नहीं बचाव करें….

    अगर आपसे पूछा जाए कि आपका सबसे बड़ा राज़दार कौन है तो आपका जवाब क्या होगा ? शायद आप अपने जीवनसाथी, बेस्ट फ्रेंड या भाई-बहन का नाम लेंगे। लेकिन हकिकत में जिसे आपके बारे में सबसे ज्यादा जानकारी है, वह है आपका मोबाइल फोन। आपकी पसर्नल चैटिंग, फोटोज़ व वीडियो, नौकरी व व्यवसाय, जीपीएस लोकेशन और सोशल मीडिया व ऐप पासवर्ड से लेकर बैंक डिटेल्स सबकुछ पता है आपके स्मार्टफोन को। आप भी नहीं चाहते कि आपकी ये प्राइवेट चीजें किसी और के सामने जाए इसीलिए फोन पर लॉक भी लगाकर रखते हैं। लेकिन क्या यह लॉक काफी है ? बीते दिनों में डाटा लीक के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने आम जनता को चौंका कर रख दिया है। लोगों में डर है कि कहीं उनका फोन भी तो हैक नहीं कर लिया गया है और कोई अन्य व्यक्ति उन्हीं के फोन से उनपर नज़र तो नहीं बनाए हुए हैं। सबसे पहले तो आपको बता दें कि यह डरने का नहीं बल्कि सावधानी बरतने का समय है। आपकी सूझबूझ और हमारे बताएं टिप्स मिलकर आपको इस तरह की Mobile Hacking और Data Leak जैसे खतरनाक चीजों से बचा सकते हैं।

    क्या है Mobile Hacking और Data चोरी

    क्या आप उन लोगों में से हैं जो यह सोचते हैं कि आपके पसर्नल डाटा को चुराकर विदेश में बैठा कोई व्यक्ति भला क्या फायदा उठाएगा ? सबसे पहले तो यही बता दें कि आपके बैंक में पड़ी धनराशि से भी ज्यादा महंगा है आपका डाटा। इंटरनेशनल मार्केट में आपके नाम, सरनेम और मोबाइल नंबर की वैल्यू लाखों की डील्स में शामिल होती है। हैकर्स आपके फोन का डाटा चुराकर बड़ी कंपनियों को बेचते हैं और खूब नोट छापते हैं। आपका डाटा किसी कंपनी के लिए बड़े मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है इसलिए बहुत से हैकर आपके फोन में सेंधमारी के लिए तैयार बैठे रहते हैं। वहीं ब्लैकमेलिंग और मनी फ्रॉड जैसे कांड भी आपका डाटा चुराकर ही किए जाते हैं।

    कैसे होता है Phone Hack

    चोरी करना कोई चोर से बेहतर नहीं जानता‘ यह लाईन मोबाइल हैकिंग पर बिल्कुल फिट बैठती है। किसी फोन को हैक करने के ढ़ेरों तरीके हैं और समय के साथ-साथ इस काम में सक्रिय लोग नए तरीके भी ईजाद करते रहते हैं। यहां एक बात साफ कर दें कि फोन हैक होने में सबसे बड़ा जिम्मेदार खुद मोबाइल यूजर ही होता है। यूजर ही कोई न कोई ऐसी गलती करता है जिसकी वजह से उसका फोन हैक होता है डाटा चोरी होता है। लालच, नासमझी और जल्दबाजी यूजर की प्राइवेसी और सिक्योरिटी से समझौता कर लेती है और फोन गलत हाथों में चला जाता है। आगे हमने मोबाइल हैकिंग के कुछ ऐसे प्रचलित तरीके बताए हैं जो हैकर्स द्वारा सबसे ज्यादा यूज़ किए जाते हैं :-

    1. Phishing 

    इंडियन यूजर्स सबसे ज्यादा जिस तरह के स्कैम में फंसते है वह है फिशिंग। यह फ्रॉड पूरी तरह से लालच पर ही चलता है। यूजर के पास मैसेज भेजा जाता है कि उनके नंबर पर ईनाम निकला है जिसमें फलां-फलां गिफ्ट, पैसा, सामान इत्यादि शामिल है। ऐसे मैसेज देखकर लोग झट से लिंक पर क्लिक कर देते हैं और मुफ्त का सामान पाने के चक्कर मछली की तरह जाल में फंस जाते हैं। यकिनन आपके पास भी ऐसे मैसेज जरूर आए होंगे। ज़रा कॉमन सेंस से सोचिए, बिना बच्चे के रोए तो मॉं भी दूध नहीं पिलाती, तो फिर आपको क्यों काई फ्री में ईनाम देकर जाएगा।

    2. Spam Links 

    फिशिंग की तरह ही काम करता है स्पैम लिंक। यूजर्स को WhatsApp इत्यादि पर वेबसाइट्स के लिंक भेजे जाते हैं और उन्हें पढ़ने के लिए कहा जाता है। जैसे ही लोग लिंक पर क्लिक करते हैं तो वायरस या इनफेक्टिव फाइल्स फोन में सेव हो जाती है तथा सिस्टम को हैक कर लेती है। ये लिंक काफी हद तक अरिजनल प्रोडक्ट व वेबसाइट जैसे ही दिखते हैं जिस वजह पहचानना मुश्किल हो जाता है। ये जो त्यौहारों पर अपने नाम की बधाई वाली GIF बनाकर भेजी जाती है, ये भी स्पैम ही होती है। इसके अलावा रिपोर्ट, न्यूज, आर्टिकल, ऑफर या लॉटरी के रूप में भी स्पैम लिंक मैसेज आते हैं।

    how-to-keep-your-phone-secure-from-data-leak-mobile-hacking-protection-tips-in-hindi

    3. Malicious App 

    ऐसी मोबाइल ऐप्लीकेशन्स जो इन्फेक्टिड होती है यानि जिनमें वायरस छिपा होता है। जब भी कोई ऐसी ऐप फोन में इंस्टाल की जाती है तो ऐप के साथ साथ वायरस भी फोन में घुस जाता है और फोन हैक कर डाटा चुरा लेता है। ये ऐप्स मोबाइल गेम, वीडियो प्लेयर या TikTok जैसी वीडियो मेकिंग और फोटो एडिटिंग के रूप में भी मिल सकती है। इस ऐप्स अधिकतर थर्ड पॉर्टी ही होती हैं और आईफोन व एंडरॉयड के ऑफिशियल ऐप स्टोर पर इन्हें जगह नहीं दी जाती है।

    4. Downloads 

    भाई.. वो नेटफ्लिक्स पर जो नई मूवी आई है वो है तेरे पास..?‘ इस तरह की बातें दोस्तों में अक्सर होती रहती है। और इन बातों की दूसरी या तीसरी लाईन यही है कि ‘सेंड कर दे’। इस तरह की मूवीज़, वीडियोज़ व गानें जब इंटरनेट से डाउनलोड किए जाते हैं तो साथ साथ हैकिंग का सामान भी साथ लेकर आते हैं। इंटरनेट पर अनेंको ऐसी वेबसाइट्स है जो वायरस इंफेक्टेड फाइल सर्व करती है। प्राइरेसी इस तरह के वायरस का सबसे बड़ा घर है।

    5. Pop-Ups 

    इंटरनेट की दुनिया में ब्राउजिंग करते-करते कहां तक पहुॅंच जाते हैं पता नहीं चल पाता है। इस बीच कई वेबसाइट्स व वेबपेज पर तरह-तरह के पॉप-अप भी सामने आते रहते हैं। ये पॉप-अप इरिटेट तो करते हैं ही तथा साथ में हैकर्स को आपके मोबाइल में घुसने का भी रास्ता दिखा देते हैं। गलती से अगर किसी पॉप-अप पर क्लिक हो जाए तो कहीं पीछे नई टैब खुल जाती है और तक उस टैब तक पहुॅंच कर उसे बंद किया जाता है तब तक वायरस आपके सिस्टम में प्रवेश कर चुका होता है।

    how-to-keep-your-phone-secure-from-data-leak-mobile-hacking-protection-tips-in-hindi

    ऐसे करें बचाव

    उपर बताए गए प्वाइंट्स पढ़कर ही आपको काफी हद तक समझ में आ गया होगा कि मोबाइल फोन को हैकिंग और डाटा चोरी से बचाने के लिए क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए। कुछ गलतियां वाकई में काफी भारी पड़ सकती है लिहाजा हमें कुछ नई आदतें बनानी चाहिए और आगे बताए गए टिप्स को अपनाना चाहिए :

    • प्राइस मिलने या लॉटरी लगने जैसे जाली मैसेज को कभी ओपन नहीं करना चाहिए। वहीं साथ ही यदि ऐसे मैसेज आपके पास आए हैं तो उन्हें डिलीट कर देना चाहिए और जिसने मैसेज भेजा है उन्हें भी सावधान करते हुए मैसेज न फैलाने के लिए समझाना चाहिए।
    • ईमेल हो या व्हाट्सऐप बिना सही से चैक करें किसी भी तरह के लिंक को ओपेन नहीं करना चाहिए। ऐसे लिंक भेजने वाले व्यक्ति को भी लिंक फैलाने से रोकना चाहिए। 
    • किसी भी तरह की कोई ऐप डाउनलोड करनी है तो हमेशा ऑफिशियल प्लेटफॉर्म का ही यूज़ करना चाहिए। थर्ड पार्टी ऐप्स व ऐपीके फाइल्स को फोन में डाउनलोड नहीं करना चाहिए।
    • कोई ऐप अगर फोन में इंस्टाल कर लेते हैं तो इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि वह ऐप किस किस चीज की परमिशन मांग रही है। अगर आपको लगता है कि ऐप को यूज़ करने के लिए किसी फीचर की कोई जरूरत ही नहीं है तो ऐप को उसकी परमिशन नहीं देनी चाहिए।

       
    • किसी ऐप, मोबाइल गेम तथा फिल्म इत्यादि की पायरेटेड फाइल अपने फोन में न रखें। पाइरेसी को ना करें और ऐसी फाईल डाउनलोड करने वाले आपके दोस्तों को भी इसका खतरा समझाएं।

    इनके अलावा अनजान व्यक्ति से मिले ईमेज, मैसेज को ओपन न करना। किसी व्यक्ति को फोन में फाईल ट्रांसफर न करने देना। बेवजह बीटा ऐप्स व फोन रूटिंग का यूज़ करना जैसी कुछ जरूरी बाते हैं जिनसे हमे बचना चाहिए और फोन को डाटा चोरी व हैकिंग से बचाकर रखना चाहिए।

  • क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    सुरक्षित उपयोग कैसे करें

    दोस्तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से wifi क्रडिट ,डेबिट कार्ड अथवा कॉन्टेक्टलेस कार्ड को मार्केट में लाया गया था ।इस कार्ड को स्वैप करने की जरूरत नही होती है ,बिना पिन के आप इस कार्ड से पेमेंट कर सकते है ।जैसे ही आप इस कार्ड को pos मशीन के 4 cm के दायरे में लाते है ।आपका पैसा ऑटोमैटिकली निकल जाता है।इसे है #कार्ड टेपिंग कहते है ।। कार्ड में wifi का निशान बना होता है। यह कार्ड नियर फील्ड कम्युनिकेशन रेडियो फ्रीक्वेंसी ऑथेंटिकेशन तकनीक पर काम करती है ।।इसमें एक छोटी सी चीप लग होती है एक छोटी सी एंटीना लगा होता है ।जिससे सिग्नल निकलता है ।

    दोस्तो इस कार्ड की लिमिट 2000 की होती है।उससे ज्यादा इस कार्ड से एक बार मे रुपये नही निकाल सकते । हालांकि अभी इसकी लिमिट 5000 कर दी गई है ।यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सही है ।लेकिन साइबर ठगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है।
    दिल्ली पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा था ,जो हाथ मे पॉश मशीन लेकर चलते थे ,भीड़ भाड़ वाले इलाके में ,लोगों के पॉकेट के किनारे 4 cm की दूरी पर मशीन लगाकर 2 हजार निकाल लिया करते थे।

    जाने कार्ड को सुरक्षित कैसे रख सकते है

    बील पेमेंट करना हो तो स्वयं कार्ड को pos मशीन के पास ले जाये ,टेप करे। जब रकम आपका निकल जायेगा ,वैसे ही आपके मोबाइल में अलर्ट मेसेज आएगा।

    pos मशीन के 4 cm के दायरे में आने के बाद ही इस कार्ड से पैसे निकल जाते है ।इसके लिए कार्ड को एलुमिनियम के फॉइल पेपर पर लपेट कर रख सकते है।

    RFID ब्लॉकिंग वालेट्स जो फ्रीक्वेंसी को रोकता है ।का उपयोग कर सकते है। यह वालेट्स मार्किट में उपलब्ध है।

  • घड़ी से करें बिल का भुगतान, Titan ने SBI के साथ लॉन्च किया कॉन्टैक्टलेस पेमेंट वॉच….

    घड़ी से करें बिल का भुगतान, Titan ने SBI के साथ लॉन्च किया कॉन्टैक्टलेस पेमेंट वॉच….

    दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बीच देश में और अधिक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए टाइटन कंपनी लिमिटेड (Titan Company Limited) ने देश के सबसे बड़े लेंडर्स भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ कॉन्टैक्टलेस पेमेंट वॉच को लॉन्च करने के लिए साझेदारी की है. बता दें कि टाइटन दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा घड़ी का ब्रांड है. इस साझेदारी के माध्यम से, Titan और SBI भारत में पहली बार कॉन्टैक्टलेस पेमेंट वॉच फंक्शन के साथ स्टाइलिश नई घड़ियों की एक सीरिज शुरू कर रहे हैं.
    एसबीआई खाताधारक अपने एसबीआई बैंक कार्ड को स्वाइप या डाले बिना टाइटन पे घड़ी पर टैप कर पीओएस मशीन पर कॉन्टैक्टलेस पेमेंट कर सकते हैं. बिना पिन दर्ज किए 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है. Tappy Technologies द्वारा वॉच स्ट्रैप में एम्बेडेड एक सुरक्षित प्रमाणित नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) चिप कॉन्टैक्टलेस SBI डेबिट कार्ट की तरह सभी कार्य करने में सक्षम है।

    इन घड़ियों पर भुगतान सुविधा देश में 20 लाख से अधिक कॉन्टैक्टलेस मास्टरकार्ड एनेबल्ड प्वाइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों पर उपलब्ध होगी. इन एक्सक्लूसिव घड़ियों के इस विशेष संग्रह में पुरुषों के लिए 3 और महिलाओं के लिए 2 स्टाइलों में बनाया गया है. इसकी कीमत 2,995 रुपये और 5,995 रुपये के बीच है. सभी एसबीआई और टाइटन ग्राहकों तक यह आसानी से उपलब्ध होगा।
    इस समझौते पर एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, हमें टाइटन द्वारा कॉन्टैक्टलेस पेमेंट स्पेस में इस अनूठी प्रस्ताव के लॉन्च का हिस्सा बनने की खुशी है. यह मुझे दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी घड़ी निर्माता कंपनी के साथ हाथ मिलाने में बहुत खुशी देता है, जो कि टाइटन पेमेंट वॉच के साथ हमारे YONO ग्राहकों के लिए एक स्मार्ट और इनोवेटिव खरीदारी समाधान प्रदान करता है. हमारा मानना है कि यह अभिनव पेशकश हमारे ग्राहकों के लिए टैप एंड पे तकनीक के साथ खरीदारी के अनुभव को फिर से परिभाषित करेगी. नवीनतम तकनीकी प्रगति के साथ, भारतीय स्टेट बैंक हमेशा अपने ग्राहकों के लिए इनोवेटिन बेस्ट-इन-क्लास बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने की दिशा में प्रयासरत है।

    इस अवसर पर टाइटन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सी के वेंकटरमन ने कहा, टाइटन हमेशा डिजाइन और इनोवेशन के शिखर पर रहा है. हमने हमेशा अपने उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पाद लॉन्च किए हैं. एसबीआई एक भुगतान समाधान पेश करने के लिए सही साझेदार है जो तेज, सुरक्षित और निर्बाध है. यह उत्पाद न केवल उपभोक्ता की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अपने क्लासिक और खास डिजाइनों के साथ आज के विकसित उपभोक्ताओं की सेवा भी करेगा।