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  • मूरे का अनोखा नियम जो बताता है कंप्युटर प्रोसेसिंग की अंतिम सीमा….

    मूरे का अनोखा नियम जो बताता है कंप्युटर प्रोसेसिंग की अंतिम सीमा….

    साल 1965 इंटेल (Intel) के को फाउंडर  Gordon E. Moore ने अपने एक नई थ्योरी दुनिया के सामने रखी जिसमें उन्होंने भविष्य में बनने वाले कंप्यूटर मशीन, स्मार्टफोन्स और हाईटेक गैजेट्स के लिए एक ऐसी बात कही थी जो 56 साल बाद यानि 2021 में भी सही मानी जाती है, जितने भी कंप्यूटर और स्मार्टफोन आजतक बने हैं वो सभी मूरे के इस नियम पर काम करते हैं। मूरे (Moore’s law In Hindi) के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स यानि कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाले ट्रांजिस्टर (Transistors) जो फास्ट प्रोसेसिंग (Processing)  के लिए जिम्मेदार होते हैं हर दो सालों में अपनी तय सीमा से दुगने हो जाते हैं जिससे आने वाले नये कंप्यूटर जो पहले से दो गुना ट्रांजिस्टर इस्तेमाल कर रहे हैं पिछली कंप्यूटर मशीन से बहुत ज्यादा फास्ट स्पीड से प्रोसेसिंग करते हैं, स्पीड के साथ-साथ इन कंप्यूटर की कीमत भी पहले से कम हो जाती है। मूरे के इस नियम को मूरे लाॅ (Moore’s law In Hindi) कहा जाता है जो कंप्यूटर और आज के स्मार्टफोन वर्ल्ड में भी एकदम सही बैठता है।

    अगर आपने पिछले 10 सालों में यूज किये गये कंप्यूटर्स और स्मार्टफोन को देखा होगा तो फिर आपने मूरे ला को जरूर काम करते देखा है, साल 2010 में आया iPhone 4 केवल 512 MB RAM और सिंगल कोर प्रोसेसर (Single-core processor) पर चलने वाला स्मार्टफोन था, पर आज के समय में आने वाला iPhone 12 4 GB RAM और Hexa-core यानि 6 कोर के प्रोसेसर के साथ आता है, 10 सालो में ही आईफोन स्मार्टफोन 8 गुना ज्यादा रैम और हेक्स कोर की सूपरफास्ट प्रोसेसिंग के साथ बहुत बदल चुका है।

    Computers की बात करें तो 10 साल पहले आने वाला Intel Core 2 Duo प्रोसेसर और 4 GB RAM को बेहतरीन डेस्कटोप माना जाता था, पर आज के समय में 10 Core Processor Intel Core i9-10900K के और 32 GB RAM के combination के कंप्यूटर को बेहतरीन कंप्यूटर माना जाता है। आईफोन स्मार्टफोन की तरह ही कंप्यूटर की दुनिया में भी 10 सालों में 8 गुना ज्यादा रैम और 10 कोर तक के बेसिक हाई एंड प्रोसेसर बन चुके हैं जो आज बहुत से घरो में देखने को मिलते हैं। मूरे लाॅ (Moore’s law In Hindi) इन दोनों ही गैजेट्स पर सटीक काम करता है, प्रोसेसिंग के साथ-साथ इन गैजेट्स की कीमत भी लगभग काफी कम हो चूकी है, 10 साल पहले आज के समय के हाई ऐंड कंप्युटर को खरीदना बहुत ज्यादा खर्चीला होता था पर आज इन्हीं गैजेट्स को काफी कम दाम में आसानी से खरीद सकते हो। 

    पर अबतक इन गैजेट्स पर सटीक बैठता ये मूरे लाॅ (Moore’s law In Hindi) क्या आगे भी इसी तरह काम करता रहेगा, क्या हम आगे भी इसी तरह इन स्मार्टफोन और कंप्युट्रस में हर 1 या दो सालों में जबरदस्त तरक्की को देखते रहेंगे, दूसरे शब्दों में कहें तो क्या कोई ऐसी लिमिट इस पृथ्वी और ब्रह्मांड में मौजूद है जिससे आगे हम ना तो कोई हार्डवेयर बना सकते हैं और ना ही कोई सुपर कंप्यूटर डिजाइन कर सकते हैं जो पहले बने सुपर कंप्यूटर से ज्यादा फास्ट और ताकतवर हो, तो आइये इन्हीं सभी सवालों को जानने के लिए मैं आज आपको कंप्यूटर और स्मार्टफोन की एक ऐसी दुनिया में ले के जाऊँगा जो आपने इससे पहले कभी सोची भी नहीं होगी।

    हर साल कंप्युटर्स और स्मार्टफोन लगातार अपग्रेड होते रहते हैं, बेहतर Integrated Circuits और उनमें लगें लाखों Transistor (ट्रांजिस्टर) उन्हें बहुत ज्यादा तेज और ताकतवर बनाते हैं, पर क्या आपको पता है इन इंटीग्रेटिड सर्किट और ट्रांजिस्टर की भी एक लिमिट है जिससे ज्यादा छोटा इन्हें कभी भी नहीं बनाया जा सकता है।.

    इस समय इंटेल द्वारा बनाये गये प्रोसेसर में 14 नैनोमीटर के सिलिकॉन ट्रांजिस्टर (silicon transistors) का यूज होता है, जो कि आपके डीएनए से 14 गुना चौड़ा है, अगर इस आकार की तुलना 1 सेमी से की जाये तो आप 1 सेंमी लाइन में ही 14 नैनोमीटर के 7 लाख ट्रांजिस्टर फिट कर सकते हो, इससे ही आप अंदाजा लगा सकते हो कि एक ट्रांजिस्टर कितना छोटा होता है पर फिलहाल वैज्ञानिकों का मानना है कि हम जल्द ही इस लिमिट पर पहुँचने वाले हैं जब ट्रांजिस्टर का आकार Atomic Level पर आ जाएगा और हम फिर उनसे छोटा ट्रांजिस्टर चाह कर भी नहीं बना पाएं.

    इस समय इस्तेमाल होने वाले ट्रांजिस्टर फिलहाल 70 सिलिकॉन एटम के बराबर साइज रखते हैं, वही सिलिकॉन एटम का साइज खुद 0.2 नैनोमीटर है तो इसी से आप समझ सकते हो कि हम 14 नैनोमीटर के ट्रांजिस्टर को अगर ज्यादा से ज्यादा छोटा करें तो उसे 0.2 नैनोमीटर से छोटा कभी नहीं कर सकते हैं.  ये ट्रांजिस्टर की फंडामेंटल लिमिट (Fundamental Limit) है जिसे हम आने वाले 10 से 20 सालों में छू लेंगे, इस लिमिट को छूते ही हम और ज्यादा छोटे और फास्ट स्मार्टफोन और कंप्युटर्स नहीं बना पाएंगे जिससे हमारी टेक्नोलॉजी की रेस को एक लगाम भी लग सकती है

    हमारे गैजेट्स भले ही इस फंडामेंटल लिमिट पर पहुँच जायें पर टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में वैज्ञानिक बिलकुल भी पीछे नहीं रहते हैं, ट्रांजिस्टर को और छोटा तो नहीं किया जा सकता है पर अगर उनमें मौजूद इलेक्ट्रॉन पार्टिकल्स जो करंट के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें फोटोन पार्टिकल से बदल दिया जाये तो आप इन्हीं छोटे ट्रांजिस्टर से बनी चिप के गैजेट्स में 20 परसेंट तक फास्ट प्रोसेसिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

    इलेक्ट्रॉन्स से तेज फोटोन्स मूव करते हैं ऐसे में अगर वैज्ञानिक Photonic Chip बनायें तो आने वाले समय में हमें ट्रांजिस्टर के साइज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। हालांकि इस समय इस तरह की चिप्स को बनाना बहुत मुश्किल है पर अगर ये बन जाते हैं तो आने वाले समय में आप लाइट वेस्ड लैपटॉप, स्मार्टफोन देख सकते हो जो आज के स्मार्टफोन से भी हजारों गुना फास्ट और पावरफुल होंगे। 

  • Google Play Store ने बैन किए 136 खतरनाक एप्लीकेशन…

    Google Play Store ने बैन किए 136 खतरनाक एप्लीकेशन…

    सावधान, आपके फोन के जरिए चोरी हो रहा है आपका पैसा! अब, हैकर्स को रोकना आपके ऊपर है. Zimperium के सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक और मैलवेयर के बारे में विस्तार से बताया है, जिससे दुनिया भर के Android स्मार्टफोन यूजर्स को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ है. खतरनाक बात यह है कि ये ऐप्स शायद आपके फोन में हों और आपके पैसे चुरा लें. यही वजह है कि Google Play Store ने इस मैलवेयर से जुड़े कुछ ऐप्स को बैन कर दिया है. आइए आपको बताते हैं इन खतरनाक ऐप्स के बारे में जिससे आप इन्हें तुरंत डिलीट कर सकें.

    इस बारे में शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई की गई और Google ने सभी 136 एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया. हालांकि उपयोगकर्ताओं को भी तेजी से ये काम करना चाहिए, क्योंकि ग्रिफ्थोर्स एंड्रॉयड ट्रोजन यूनिक है. Google ने जिन एप्स को बैन किया है. उनकी लिस्ट में हैंडी ट्रांसलेटर प्रो, हार्ट रेट और पल्स ट्रैकर, जियोस्पॉट: जीपीएस लोकेशन ट्रैकर, आईकेयर – फाइंड लोकेशन, माई चैट ट्रांसलेटर शामिल हैं.

    ग्रिफ्थोर्स एंड्रॉयड ट्रोजन को क्या विशिष्ट बनाता है?

    Zimperium zLabs के सुरक्षा शोधकर्ताओं ने हाल ही में ग्रिफ्थोर्स एंड्रॉयड ट्रोजन नामक एक आक्रामक मोबाइल प्रीमियम सेवा अभियान की खोज की, जिसने वैश्विक स्तर पर 10 मिलियन से अधिक Google Android उपयोगकर्ताओं को लक्षित किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जहां सामान्य ऑनलाइन घोटाले फ़िशिंग तकनीकों का लाभ उठाते हैं. वहीं ग्रिफ्थोर्स एंड्रॉयड ट्रोजन इस मायने में यूनिक है कि यह ट्रोजन के रूप में कार्य करने वाले malicious एंड्रॉयड एप्लिकेशन के पीछे छिपा हुआ है, जो इसे उपयोगकर्ता के इंटरैक्शन का लाभ उठाने की अनुमति देता है.

    Google Play Store पर बैन हुए ऐप्स की पूरी लिस्ट 

    1. Handy Translator Pro
    2. Heart Rate and Pulse Tracker
    3. Geospot: GPS Location Tracker
    4. iCare – Find Location
    5. My Chat Translator
    6. Bus – Metrolis 2021
    7. Free Translator Photo
    8. Locker Tool
    9. Fingerprint Changer
    10. Call Recoder Pro
    11. Instant Speech Translation
    12. Racers Car Driver
    13. Slime Simulator
    14. Keyboard Themes
    15. What’s Me Sticker
    16. Amazing Video Editor
    17. Safe Lock
    18. Heart Rhythm
    19. Smart Spot Locator
    20. CutCut Pro
    21. OFFRoaders – Survive
    22. Phone Finder by Clapping
    23. Bus Driving Simulator
    24. Fingerprint Defender
    25. Lifeel – scan and test
    26. Launcher iOS 15
    27. Idle Gun Tycoo\u202an\u202c
    28. Scanner App Scan Docs & Notes
    29. Chat Translator All Messengers
    30. Hunt Contact
    31. Icony
    32. Horoscope : Fortune
    33. Fitness Point
    34. Qibla AR Pro
    35. Heart Rate and Meal Tracker
    36. Mine Easy Translator
    37. PhoneControl Block Spam Calls
    38. Parallax paper 3D
    39. SnapLens – Photo Translator
    40. Qibla Pass Direction
    41. Caller-x
    42. Clap
    43. Photo Effect Pro
    44. iConnected Tracker
    45. Smart Call Recorder
    46. Daily Horoscope & Life Palmestry
    47. Qibla Compass (Kaaba Locator)
    48. Prookie-Cartoon Photo Editor
    49. Qibla Ultimate
    50. Truck – RoudDrive Offroad
    51. GPS Phone Tracker – Family Locator
    52. Call Recorder iCall
    53. PikCho Editor app
    54. Street Cars: pro Racing
    55. Cinema Hall: Free HD Movies
    56. Live Wallpaper & Background
    57. Intelligent Translator Pro
    58. Face Analyzer
    59. TrueCaller & TrueRecoder
    60. iTranslator_ Text & Voice & Photo
    61. Pulse App – Heart Rate Monitor
    62. Video & Photo Recovery Manager 2
    63. Быстрые кредиты 24\7
    64. Fitness Trainer
    65. ClipBuddy
    66. Vector arts
    67. Ludo Speak v2.0
    68. Battery Live Wallpaper 4K
    69. Heart Rate Pro Health Monitor
    70. Locatoria – Find Location
    71. GetContacter
    72. Photo Lab
    73. AR Phone Booster – Battery Saver
    74. English Arabic Translator direct
    75. VPN Zone – Fast & Easy Proxy
    76. 100% Projector for Mobile Phone
    77. Forza H Mobile 4 Ultimate Edition
    78. Amazing Sticky Slime Simulator ASMR
    79. Clap To Find My Phone
    80. Screen Mirroring TV Cast
    81. Free Calls WorldWide
    82. My Locator Plus
    83. iSalam Qibla Compass
    84. Language Translator-Easy&Fast
    85. WiFi Unlock Password Pro X
    86. Pony Video Chat-Live Stream
    87. Zodiac : Hand
    88. Ludo Game Classic
    89. Loca – Find Location
    90. Easy TV Show
    91. Qibla correct Quran Coran Koran
    92. Dating App – Sweet Meet
    93. R Circle – Location Finder
    94. TagsContact
    95. Ela-Salaty: Muslim Prayer Times & Qibla Direction
    96. Qibla Compass
    97. Soul Scanner – Check Your
    98. CIAO – Live Video Chat
    99. Plant Camera Identifier
    100. Color Call Changer
    101. Squishy and Pop it
    102. Keyboard: Virtual Projector App
    103. Scanner Pro App: PDF Document
    104. QR Reader Pro
    105. FX Keyboard
    106. You Frame
    107. Call Record Pro
    108. Free Islamic Stickers 2021
    109. QR Code Reader – Barcode Scanner
    110. Bag X-Ray 100% Scanner
    111. Phone Caller Screen 2021
    112. Translate It – Online App
    113. Mobile Things Finder
    114. Proof-Caller
    115. Phone Search by Clap
    116. Second Translate PRO
    117. CallerID
    118. 3D Camera To Plan
    119. Qibla Finder – Qibla Direction
    120. Stickers Maker for WhatsApp
    121. Qibla direction watch (compass)
    122. Piano Bot Easy Lessons
    123. CallHelp: Second Phone Number
    124. FastPulse – Heart Rate Monitor
    125. Caller ID & Spam Blocker
    126. Free Coupons 2021
    127. KFC Saudi – Get free delivery and 50% off coupons
    128. Skycoach
    129. HOO Live – Meet and Chat
    130. Easy Bass Booster
    131. Coupons & Gifts: InstaShop
    132. FindContact
    133. Launcher iOS for Android
    134. Call Blocker-Spam Call Blocker
    135. Call Blocker-Spam Call Blocker
    136. Live Mobile Number Tracker
  • अब इन लोगों को नहीं मिलेगा सिम,सिम कार्ड लेने के नियम में बड़ा बदलाव…

    अब इन लोगों को नहीं मिलेगा सिम,सिम कार्ड लेने के नियम में बड़ा बदलाव…

    दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने कहा है कि भारत में नाबालिगों को सिम कार्ड जारी नहीं किए जाने चाहिए। इसका सीधा मतलब यह है कि अब 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर से सिम कार्ड नहीं खरीद सकता है। दूरसंचार विभाग ने कहा है कि किसी नाबालिग को सिम कार्ड बेचना दूरसंचार ऑपरेटर द्वारा एक अवैध गतिविधि होगी।

    नया सिम खरीदने के लिए ग्राहकों को एक कस्टमर एक्विजिशन फॉर्म भरना होता है। यह आमतौर पर टेलीकॉम कंपनी और ग्राहक के बीच एक समझौता होता है। इस फॉर्म में अब संशोधन किया गया है जिसके मुताबिक सिम कार्ड खरीदने की उम्र 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो उसे भी सिम कार्ड नहीं बेचा जा सकता।

    यह एक बेहद ही आम सवाल है जिसे हर बार पूछा जाता है लेकिन सटीक जवाब नहीं मिलता है। आमतौर पर कहा जाता है कि एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड खरीद सकता है, जबकि ऐसा नहीं है। एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 18 सिम कार्ड खरीद सकता है। इनमें से 9 का इस्तेमाल मोबाइल कॉल्स के लिए और अन्य 9  का इस्तेमाल मशीन-टू-मशीन कम्युनिकेशन के लिए होगा।

  • Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google अपने Android सॉफ्टवेयर की बदौलत भारत के स्मार्टफोन बाजार में ‘दादागिरी’ करती है. ये हम नहीं बल्कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक जांच रिपोर्ट कहती है. इस जांच रिपोर्ट के हिसाब से भारत के 98% स्मार्टफोन मार्केट पर Google के Android ऑपरेटिंग सिस्टम का कब्ज़ा है. CCI ने Google के खिलाफ स्मार्टफोन बनाने वाली कई कंपनियों से मिली शिकायत के बाद अप्रैल 2019 में ये जांच शुरू की थी. लगभग दो साल चली जांच के बाद तैयार 750 पेज की एक रिपोर्ट में Google को ना सिर्फ अपनी हैसियत का गलत फायदा उठाने (दादागिरी करने) का दोषी पाया गया. बल्कि ये भी देखा गया कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और इससे जुड़े बाजार में वो गैर-प्रतिस्पर्धी, अनुचित और प्रतिबंधित व्यापार गतिविधियों को अपनाती है. इस जांच में CCI ने Apple, Microsoft, Amazon, Paytm, PhonePe, Mozila, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo और Karbonn जैसी कंपनियों से भी सवाल किए.

    CCI के जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Google, सर्च (Google Search), म्यूजिक (YouTube), ब्राउंजिंग (Chrome) और ऐप लाइब्रेरी (Play Store) के बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करती है. टीओआई की खबर के मुताबिक वह मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों से एकतरफा अनुबंध करती है और ऐप डेवलपरों पर अपनी शर्तें लगाती है ताकि उसकी खुद की ऐप का दबदबा कायम रहे.

    जांच रिपोर्ट में Google को प्रतिस्पर्धा कानून की धारा-4(2)(a)(i),धारा-4(2)(b),धारा-4(2)(c),धारा-4(2)(d) और धारा-4(2)(e) के तहत दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि Google अधिकतर मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को Android लाइसेंस के साथ अपनी कुछ विशेष शर्तें भी लगाती है और उन्हें Google Mobile Services (GMS) सुइट देती है, जिसमें गूगल प्ले स्टोर, क्रोम और यूट्यूब जैसी ऐप को बंडल बनाकर दिया जाता है.

    देश में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली अधिकतर कंपनियों की मांग रही है कि Google उन्हें ‘bare Android version’ उपलब्ध कराए और इसकी जरूरत Mobile Application Distribution Agreement को साइन करने के लिए पड़े. अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगर CCI गूगल को इन सबके लिए जिम्मेदार पाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं उसे इस तरह की गतिविधियों को रोकने का आदेश भी दिया जा सकता है. CCI बाजार में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने और एकाधिकार को रोकने के लिए काम करने वाली नियामक संस्था है।

  • Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google अपने Android सॉफ्टवेयर की बदौलत भारत के स्मार्टफोन बाजार में ‘दादागिरी’ करती है. ये हम नहीं बल्कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक जांच रिपोर्ट कहती है. इस जांच रिपोर्ट के हिसाब से भारत के 98% स्मार्टफोन मार्केट पर Google के Android ऑपरेटिंग सिस्टम का कब्ज़ा है. CCI ने Google के खिलाफ स्मार्टफोन बनाने वाली कई कंपनियों से मिली शिकायत के बाद अप्रैल 2019 में ये जांच शुरू की थी. लगभग दो साल चली जांच के बाद तैयार 750 पेज की एक रिपोर्ट में Google को ना सिर्फ अपनी हैसियत का गलत फायदा उठाने (दादागिरी करने) का दोषी पाया गया. बल्कि ये भी देखा गया कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और इससे जुड़े बाजार में वो गैर-प्रतिस्पर्धी, अनुचित और प्रतिबंधित व्यापार गतिविधियों को अपनाती है. इस जांच में CCI ने Apple, Microsoft, Amazon, Paytm, PhonePe, Mozila, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo और Karbonn जैसी कंपनियों से भी सवाल किए.

    CCI के जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Google, सर्च (Google Search), म्यूजिक (YouTube), ब्राउंजिंग (Chrome) और ऐप लाइब्रेरी (Play Store) के बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करती है. टीओआई की खबर के मुताबिक वह मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों से एकतरफा अनुबंध करती है और ऐप डेवलपरों पर अपनी शर्तें लगाती है ताकि उसकी खुद की ऐप का दबदबा कायम रहे.

    जांच रिपोर्ट में Google को प्रतिस्पर्धा कानून की धारा-4(2)(a)(i),धारा-4(2)(b),धारा-4(2)(c),धारा-4(2)(d) और धारा-4(2)(e) के तहत दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि Google अधिकतर मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को Android लाइसेंस के साथ अपनी कुछ विशेष शर्तें भी लगाती है और उन्हें Google Mobile Services (GMS) सुइट देती है, जिसमें गूगल प्ले स्टोर, क्रोम और यूट्यूब जैसी ऐप को बंडल बनाकर दिया जाता है.

    देश में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली अधिकतर कंपनियों की मांग रही है कि Google उन्हें ‘bare Android version’ उपलब्ध कराए और इसकी जरूरत Mobile Application Distribution Agreement को साइन करने के लिए पड़े. अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगर CCI गूगल को इन सबके लिए जिम्मेदार पाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं उसे इस तरह की गतिविधियों को रोकने का आदेश भी दिया जा सकता है. CCI बाजार में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने और एकाधिकार को रोकने के लिए काम करने वाली नियामक संस्था है।

  • अपने बच्चों पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे…

    अपने बच्चों पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे…

    यदि अपने बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे हैं। एक समय वह भी था जब बच्चों को घर से बाहर खेलने जाने के लिए मना किया जाता था। दिनभर घर से बाहर रहकर खेलने के लिए उन्हें डांट भी पड़ती थी पर अब समय बदल गया है।

    अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे खेलने के लिए घर से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ऑनलाइन वीडियो गेम और स्मार्टफोन हैं। वीडियो गेम खेलने वाले स्मार्टफोन 7-8 हजार रुपए तक आसानी से मिल रहे हैं। वहीं गूगल प्ले-स्टोर पर मुफ्त मोबाइल गेम भी मिल जाते हैं। दरअसल, ऑनलाइन वीडियो गेमिंग का बाजार बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। इसी के साथ इसके दुष्परिणाम भी बढ़ रहे हैं। कई वीडियो गेम्स बच्चों के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो रहे हैं। आइए जानते हैं गेम्स के बारे में जो बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं, उन्हें हिंसक बना रहे हैं और यहां तक की जान देने के लिए भी उकसा रहे हैं।

    खतरनाक है ये ऑनलाइन गेम्स
    फ्री फायर-फ्री फायर ने मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना सागर रोड निवासी डॉ. बुंदेला के पास दीपक पैथोलॉजी के संचालक विवेक पांडेय के 13 वर्षीय पुत्र ने 40 हजार की रकम हारने से घर मे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कृष्णा उर्फ राजा ने हिंदी और इंग्लिश में सुसाइड नोट लिखा था। बताया था वह डिप्रेशन में था। यह घटना लोगों के लिए एक सबक है। ऐसी ही कई घटनाएं छत्तीसगढ़ में हुई जिसमें बच्चे गेम में फंसकर ठगी के शिकार भी हुए।

    ब्लू व्हेल : ब्लू व्हेल गेम में टास्क पूरा करने के लिए कई बच्चों ने आत्महत्या की। देश में 2017 में इसकी वजह से 100 बच्चों ने मौत को गले लगा लिया। यह गेम गूगल प्ले-स्टोर या एपल के एप स्टोर पर नहीं था, बल्कि इसे इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिंक के जरिए डाउनलोड कराया जा रहा।

    पब्जी मोबाइल : प्लेयर्स अननोन बैटल ग्राउंड के नाम से मशहूर इस गेम के बारे में डॉक्टर राजीव क्षेत्रपाल का कहना है कि यह गेम युवाओं को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। गेम को खेलने के बाद बच्चों में हिंसक प्रवृति भी पनप रही है। मई में मध्यप्रदेश में पबजी गेम में हार जाने के बाद एक 16 साल के बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हो गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वह पिछले 6 घंटे से पबजी खेल रहा था।

    ऐसे पहचानें बच्चों की लत

    • यदि बच्चे की दिनचर्या में बदलाव नजर आए। उसका पूरा कामकाज पबजी के इर्द-गिर्द ही दिखाई देने लगे तो समझिए वह इस खेल की गिरफ्त में जा रहा है।
    • उसका स्वभाव आक्रामक और गुस्सैल हो सकता है। पबजी खेलने से रोकने पर वह हिंसक हो उठता है या गाली-गलौज भी कर सकता है।
    • इस खेल की लत में आया बच्चा आमतौर पर गुमसुम दिखाई देता है। उसकी याददाश्त में कमी आना, बात बिगड़ने के संकेत हैं।

    पैरेंट्स सामान्य मान रहे हैं, ताे उनकी भूल है
    मनोचिकित्सक डॉ राजेश शुक्ला के अनुसार बच्चों के मां-बाप इस आदत पर लगाम लगाने में खुद को असहाय पा रहे हैं। यह सिर्फ खर्च की बात नहीं है, बल्कि बच्चों के दिमाग पर जो इस खेल का असर हो रहा है, वह आगे जाकर जानलेवा हो सकता है। यदि पैरेंट्स इसे सामान्य मान रहे हैं, तो ये उनकी भूल है।

  • सरकार नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में 1 साल फ्री रिचार्ज दे रही है? जानें सच

    सरकार नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में 1 साल फ्री रिचार्ज दे रही है? जानें सच

    हाल ही में टोक्यो में संपन्न हुए ओलंपिक खेलों में भारत ने शानदार प्रर्दशन किया है। इन खेलों में भारत ने एक गोल्ड मेडल समेत सात पदक जीते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई भ्रामक खबरें शेयर की जा रही है। इन दिनों व्हाट्सऐप पर एक ऐसा ही मैसेज वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि, नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में भारत सरकार हर बच्चे को एक साल का मोबाइल रिचार्ज फ्री में दे रही है।

    दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे मैसेज में कहा गया है कि, नीरज चोपड़ा ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में भारत सरकार सभी भारतीय बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए 2399 रुपए का 12 महीने वाला फ्री रिचार्ज फ्री में देने का वादा किया है। तो अभी नीचे नीले रंग की लिंक पर क्लिक करके अपने पर रिचार्ज करें। इसे मैजेस के साथ एक लिंक https://free-rec.site दिया है। अब इस पर सरकार की ओऱ संचार एजेंसी पीआईबी की ओऱ फैक्ट चैक किया गया है।

    पीआईबी ने आज ट्वीट कर लिखा कि, दावा: #Olympics2021 में स्वर्ण पदक मिलने की खुशी में भारत सरकार सभी को 12 महीने फ्री रिचार्ज का अवसर दे रही है। #PIBFactCheck यह दावा फर्जी है। भारत सरकार ने फ्री रिचार्ज के बारे में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। कृपया ऐसे किसी भी फर्जी लिंक पर अपनी निजी जानकारी साझा न करे। इसके साथ ही पीआईबी ने ऐसे लिंक पर बचने के लिए आगाह किया है।


    फर्जी खबर यानी फेक न्यूज से निपटने के लिए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और योजनाओं के बारे में खबरों का सत्यापन करने के लिए एक ‘तथ्य जांच इकाई’ गठित की है जिसे पीआईबी फैक्ट चेक टीम कहा जाता है। पीआईबी फैक्ट चेक टीम द्वारा आप भी किसी भी संदेश की सत्यता की जांच करा सकते हैं। इसके तहत मीडिया में सरकार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबरों की सच्चाई का पता लगाया जाता है। अगर आपके पास भी कोई डाउटफुल खबर है तो आप उसे factcheck.pib.gov.in या फिर वॉट्सऐप नंबर +918799711259 या ईमेलः pibfactcheck@gmail.com पर भेज सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी पीआईबी की वेबसाइट pib.gov.in पर भी उपलब्ध है।

  • केंद्र सरकार ने जारी किया स्मार्टफोन यूजर्स के लिए अलर्ट…सुरक्षा में खामियों को लेकर दी चेतावनी…

    केंद्र सरकार ने जारी किया स्मार्टफोन यूजर्स के लिए अलर्ट…सुरक्षा में खामियों को लेकर दी चेतावनी…

    भारत सरकार ने सभी एप्पल आईफोन, एंड्रॉइड मोबाइल फोन और विंडोज डिवाइस यूजर्स के लिए अलर्ट जारी किया है। नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी, CERT-In ने एप्पल के सॉफ्टवेयर ईकोसिस्टम, विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम और गूगल एंड्रॉइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में खामियों को लेकर चेतावनी दी है। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे इसे किसी भी कीमत पर इग्नोर न करें। दरअसल, इन कंपनियों के ऑपरेटिंग सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर साइबर क्रिमिनल्स इन डिवाइसेस को हैक कर सकते हैं। इसलिए एप्पल, एंड्रॉइड और विंडोज यूजर्स को इससे बचने के लिए अपने ऑपरेटिंग सिस्टम का लेटेस्ट वर्जन डाउनलोड करने की सलाह दी जाती है।

    CERT-In की मानें तो एंड्रॉइड डिवाइसेस के Signal एप्लिकेशन में एक खामी पाई गई है, जिसके चलते कुछ तस्वीरें अपने आप सेंड हो जाती हैं। इस तरह यूजर्स को प्राइवेसी भी लीक हो सकती है। एजेंसी सलाह देती है कि यूजर्स जल्द से जल्द गूगल प्ले स्टोर से Signal ऐप का वर्जन 5.17.3 डाउनलोड कर लें। साइबर सिक्यॉरिटी एजेंसी ने iOS और iPadOS में खामी पाई है, जिसके चलते हैकर्स आपके डिवाइस को कंट्रोल कर सकते हैं। इस बग ने 11.5.1 से पहले के वर्जन पर चलने वाले Apple macOS Big Sur डिवाइसेस, 14.7.1 से पहले वर्जन पर चलने वाले Apple iOS और iPadOS डिवाइसेस, iPhone 6s और बाद के डिवाइस, iPad Pro (सभी मॉडल), iPad Air 2 और बाद के डिवाइस, 5वीं और उससे बाद की जेनरेशन के iPad, iPad mini 4 और बाद के डिवाइस, और iPod touch (7वीं जेनरेशन) को प्रभावित किया है। एप्पल ने हाल ही में इससे जुड़ा सिक्यॉरिटी अपडेट जारी किया है। विंडोज डिवाइसेस की बात करें तो CERT-In ने विंडोज ओएस में खामी पाई है, जो एक जालसाज को सिस्टम से अकाउंट पासवर्ड निकालकर इस्तेमाल करने और ओरिजनल इंस्टॉलेशन पासवर्ड खोजने की छूट दे देता है। बड़ी संख्या में विंडोज 10 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले डिवाइस इससे प्रभावित हैं। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि फिलहाल इसका दुरुपयोग नहीं हुआ है।

  • सावधान… ये है Pegasus spyware जानिए कैसे करता है ये आपके मोबाइल की जासूसी….

    सावधान… ये है Pegasus spyware जानिए कैसे करता है ये आपके मोबाइल की जासूसी….

    कंपनी का दावा है कि इस फर्म का काम इसी तरह के जासूसी सॉफ्टवेयर बनाना है और इन्हें अपराध और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने और लोगों के जीवन बचाने के एकमात्र उद्देश्य के लिए सरकारों की खुफिया एजेंसियों को बेचा जाता है. Pegasus spyware एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो बिना सहमति के आपके फोन तक पहुंच हासिल करने और व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर जासूसी करने वाले यूज़र को देने के लिए बनाया गया है।

    क्या कर सकता है पेगासस स्पाइवेयर?

    Kaspersky के अनुसार, Pegasus spyware यूज़र के एसएमएस मैसेज और ईमेल को पढ़ने, कॉल सुनने, स्क्रीनशॉट लेने, कीस्ट्रोक्स रिकॉर्ड करने और कॉन्टेक्ट्स व ब्राउज़र हिस्ट्री तक पहुंचने में सक्षम है। एक अन्य रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि एक हैकर फोन के माइक्रोफोन और कैमरे को हाईजैक कर सकता है, इसे रीयल-टाइम सर्विलांस डिवाइस में बदल सकता है।

    पेगासस स्पाइवेयर को पहली बार कब खोजा गया था?

    पेगासस स्पाइवेयर को पहली बार 2016 में iOS डिवाइस में खोजा गया था और फिर Android पर थोड़ा अलग वर्ज़न पाया गया. Kaspersky का कहना है कि शुरुआती दिनों में, इसका अटैक एक एसएमएस के जरिए होता था। पीड़ित को एक लिंक के साथ एक SMS मिलता था। यदि वह उस लिंक पर क्लिक करता है, तो उसका डिवाइस स्पाइवेयर से संक्रमित हो जाता था।

  • बेकार के इमेल भर देते हैं आपका इनबॉक्स, ऐसे मिनटों में पाएं इनसे छुटकारा

    बेकार के इमेल भर देते हैं आपका इनबॉक्स, ऐसे मिनटों में पाएं इनसे छुटकारा

    आपका Gmail भी प्रमोशनल या फिर स्पैम मेल्स की वजह से जल्दी-जल्दी भर जाता है. कई बार हम गलती से किसी सर्विस को सब्सक्राइब कर लेते हैं और फिर उसके मेल्स आने शुरू होते हैं. आज हम आपको ऐसे ही मेल्स से छुटकारा पाने का तरीका बताते हैं।

    • किसी सेंडर को ब्लॉक करने पर उसका मैसेज स्पैम में चला जाता है.
    • अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर Gmail ओपन करें.
    • आपको जिसे ब्लॉक करना है उसके मैसेज पर जाएं.
    • मेल के ऊपर राइट कॉर्नर में More पर क्लिक करना होगा.
    • इसके बाद Block (Sender Name) ऑप्शन पर क्लिक कर दें.
    • आपने गलती से किसी को ब्लॉक कर दिया है तो इसी प्रोसेस से उसे अनब्लॉक किया जा सकता है.

    किसी ऐसी साइट को अगर आपने साइन अप कर दिया है जो बहुत से ई-मेल्स आपको भेजती है तो आप इसे अनसब्सक्राइब भी कर सकते हैं.  

    • Gmail ओपन करने के बाद इस तरह के मेल भेजने वाले सेंडर के मेल को ओपन करें.
    • सेंडर के नाम के बराबर में Unsubscribe or Change preferences दिया गया होगा. इस पर क्लिक करें.
    • अगर आप को यह विक्लप नहीं दिखे तो आप ऊपर दिए गए तरीके से सेंडर को ब्लॉक कर सकते हैं.
    • इस बात का ध्यान रखें कि मेल्स को अनसब्सक्राइब करने पर इसे पूरी तरह से अनसब्सक्राइब होने में कुछ दिन का समय लग सकता है.

    वैसे तो Gmail  इनबॉक्स से स्पैम को दूर रखने की कोशिश करता है. लेकिन स्पैम मेल्स आ ही जाते हैं. इनसे निपटने के लिए ये करें.

    • स्पैम मेल को खोलकर मैसेज ओपन करें.
    • पेज के टॉप पर दिए गए Report Spam पर टैप कर दें.

    किसी मेल को स्पैम रिपोर्ट करने पर या मैनुअली किसी मेल को स्पैम फोल्डर में मूव करने पर Google को एक कॉपी मिलती है. इस कॉपी को कंपनी एनेलाइज करती है और यूजर्स को इस तरह से मेल्स से सुरक्षा प्रदान की जाती है.

    आपको अगर इनबॉक्स में कोई संदेहास्पद ईमेल दिखे जिसमें आपकी पर्सनल जानकारी मांगी जा रही है तो ऐसे मेल को फिशिंग के तौर पर रिपोर्ट कर सकते हैं. यह है तरीका

    • Gmail ओपन करने के बाद जिस मेल पर शक है उस पर जाएं.
    • मेल के टॉप राइट कॉर्नर में More पर क्लिक करें.
    • इसके बाद Report phishing पर टैप कर दें.