छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित नेशनल मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की 6ठवीं गवर्निंग बॉडी मीटिंग में शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में खनिजों का दोहन और उनके उपयोग के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण पर चर्चा हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित कटघोरा क्षेत्र की भी चर्चा हुई। जिओलाजिकल सर्वे आफ इंडिया में कटघोरा के लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में लीथियम के बड़ा भंडार होने की पुष्टि हुई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में उपस्थित रहने वाले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा है कि कटघोरा में शीघ्र ही शुरू होने वाली लीथियम की खदान देश की पहली लीथियम खदान होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लीथियम एक अहम धातु है जिससे राज्य और देश विकास की नई दिशा की तरफ अग्रसर होंगे। उन्होंने कहा कि लीथियम खदान के शुरु हो जाने से छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के अग्रणी राज्यों में से एक होगा और विकसित भारत, 2047 के योगदान में छत्तीसगढ़ के लीथियम भंडार का बड़ा योगदान होगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ सहित बिहार, गुजरात, झारखण्ड, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर में स्थित 20 क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन हेतु एमएसटीसी पोर्टल में एनआईटी जारी किया गया है।
इन 20 ब्लॉक्स में से छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित कटघोरा क्षेत्र में लिथियम एंड आरईई ब्लॉक भी शामिल है। लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में जीएसआई द्वारा प्रारंभिक सर्वे में लगभग 10 पीपीएम से 2 हजार पीपीएम लिथियम कन्टेन्ट पाया गया है। ब्लॉक में रेयर अर्थ एलिमेंट की भी उपस्थिति पाई गई है। क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की आवश्यकता रिन्यूवेबल एनर्जी, रक्षा, कृषि, फार्मास्युटिकल, उच्च-तकनीकी इलेक्ट्रानिक्स, दूरसंचार, परिवहन आदि में होती है। इस खनिज के मामलों में वर्तमान में देश आयात पर निर्भर है।
Author: Sunil Agrawal
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छत्तीसगढ के कटघोरा में खुलेगी देश की पहली लीथियम खदान , लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में 10 से 2 हजार पीपीएम लीथियम कंटेन्ट की उपलब्धता…
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छाल खदान से कोयला परिवहन में लगे वाहनों के थमे पहिए….
खरसिया। छाल खदान में लोड करने वाली गाड़ियों के रास्ते अत्यंत जर्जर होने की वजह से मेन रोड धरमजयगढ़ खरसिया स्टेट हाइवे के खेदापाली से लेकर छाल घरघोड़ा चौक तक जाम लगता था जिस वजह से आज यूनियन द्वारा आम राहगीरों को होने वाली परेशानियों एम्बुलेंस एवं अन्य नागरिकों के जाम में फंसने से बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता था जिस वजह से आज रायगढ़ जिला ट्रेलर मालिक कल्याण संघ छाल इकाई द्वारा पूर्ण रूप से वाहनों को खड़ा कर दिया गया।
जारी विज्ञप्ति में कहां गया है कि जब तक रोड रास्ते नहीं बनेंगे तब तक गाड़ियों का संचालन नहीं किया जाएगा। मौक़े पर एस ई सी एल के डिटी एस ई सी एल के जी एम रायगढ़ क्षेत्र एस ई सी एल के छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक एस ई सी एल के एरिया सेल्स ऑफिसर रायगढ़ एरिया एवं अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में ट्रक यूनियन के साथ चर्चा हुई जिसमें यूनियन द्वारा एक ही शब्द का प्रयोग किया गया जिसमें की रोड बनाओ हम गाड़ियों का संचालन करेंगे।
जबतक रोड रास्ते नहीं बनाया जाएगा तब तक हम अपनी गाड़ियों का संचालन नहीं करेंगे एवं ना किसी की भी गाड़ियों का संचालन नहीं करने देंगे
डोलनारायण पटेल
अध्यक्ष छाल इकाई RJTMKS
रोड रास्ते ख़राब होने की वजह से हमारी गाड़ियों में अत्यंत छति हो रही है एवं खदान के रोड रास्ते सही नहीं होने की वजह से स्टेट हाइवे में जाम लग रही है जिससे आम राहगीरों एवं एम्बुलेंस में आने जाने वाले मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है
आकाश अग्रवाल
मिडिया प्रभारी
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मंत्री ओपी चौधरी ने राज्य जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर को किया निलंबित, अधिकारी पर कोचिंग सेंटर संचालक से रिश्वत मांगने का आरोप…
रायपुर। कोचिंग व्यवसायी को मानसिक प्रताडित करने और रिश्वत मांगने की शिकायत पर वित्त, वाणिज्यिक कर (जीएसटी) मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर राज्य जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर को निलंबित किया गया है.
बता दें कि बिलासपुर के एक कोचिंग व्यवसायी ने अधिकारी के विरूद्ध अभद्र व्यवहार, मानसिक प्रताडना व रिश्वत मांगने की शिकायत की थी. इस मामले में मंत्री चौधरी के निर्देश पर राज्य कर विभाग (राज्य जीएसटी) बिलासपुर संभाग क्रमांक-2 के संयुक्त आयुक्त दीपक गिरी को निलंबित किया गया है. मंत्री ओपी चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को राजस्व वृद्धि के लिए कार्य करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके लिए व्यवसायियों को प्रताडित या परेशान करने की शिकायत को गंभीरता से लेने की चेतावनी भी दी है. मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो आगे भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.
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छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी!,आम लोगों से मांगे गए सुझाव…
वन नेशन वन इलेक्शन…इसकी चर्चा देश भर में हो रही है,वहीं इस पर छत्तीसगढ़ सरकार भी विचार कर रही है।जिसके चलते छत्तीसगढ़ में होने वाले आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ होने की संभावना दिखाई दे रही है।
छत्तीसगढ़ की साय सरकार नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार ने आम लोगों से ई-मेल के माध्यम से सुझाव मांगा है। अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।समिति को तीन बिंदुओं पर सरकार को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
सुझाव के लिए निर्धारित प्रारूप सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। सरकार ने एक देश एक चुनाव को आधार मानते हुए इस दिशा में काम करना शुरू किया है। सरकार ने तर्क दिया है कि एक साथ चुनाव कराने से वित्तीय व मानव संसाधन की बचत होगी।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने भी कहा कि देश में वन नेशन-वन इलेक्शन की चर्चा हो रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी दिशा में सोच रही है। निकाय-पंचायती चुनाव एक साथ कराए जाने को लेकर सुझाव मांगे गए हैं। राज्य सरकार ने एक कमेटी का भी गठन किया है, जो सुझावों पर विचार करके तय करेगी। म्युनिसिपल व पंचायती नियमों का भी अध्ययन करेंगे, जिसके बाद समिति की रिपोर्ट पर सरकार निर्णय करेगी। -

छत्तीसगढ़ पीएससी घोटाला मामले में CBI ने टामन सिंह सोनवानी के घर समेत कई जगहों पर दबिश दी, कार्यवाही जारी…
छत्तीसगढ़ के कथित पीएससी घोटाला मामले में सीबीआई ने छत्तीसगढ़ पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कई जगहों पर दबिश दी है। अपुष्ट खबरें हैं कि सरबदा से सीबीआई की टीम किसी को अपने साथ ले गई है।छत्तीसगढ़ पीएससी घोटाला मामले में सीबीआई की टीम ने धमतरी के सरबदा गाँव में छापा मारा है। सीबीआई सरबदा में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के घर पर सर्च कार्यवाही कर रही है। सीबीआई के द्वारा पीएससी मामले में ही राज्य के अन्य ईलाकों में भी छापे मारे गए हैं। सीबीआई की टीम बिलासपुर के यदुनंदन नगर भी पहुँची है जहां कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के यहाँ सर्च कार्यवाही जारी है। सीबीआई की टीम पूर्व आईएएस अमृत खलखो के यहाँ भी सर्च कार्यवाही कर रही है। अपुष्ट खबरें हैं कि सरबदा गाँव याने जामन सिंह सोनवानी के गाँव से सीबीआई टीम किसी व्यक्ति को अपने साथ ले गई है, पर वह व्यक्ति कौन है उसकी पहचान नहीं है।
क्या है पीएससी घोटाला
2021 में छत्तीसगढ़ पीएससी ने परीक्षाएँ ली थीं। इस भर्ती में कथित रुप से व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप बीजेपी ने लगाए थे। बीजेपी ने आरोप लगाए कि, पीएससी की इस भर्ती में कांग्रेस से जुड़े लोगों, आईएएस आईपीएस के बच्चों और पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेहद नज़दीकी रिश्तेदारों का चयन ग़लत तरीक़े से हुआ। इस आरोप को बीजेपी ने युवाओं के साथ छल के रुप में आंदोलन में बदल दिया। यह मामला विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रमुख मुद्दों में शामिल था। चुनावी रैली में पीएम मोदी भी कांग्रेस के खिलाफ इस मामले का ज़िक्र करते थे। राज्य में सरकार बदली तो मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इसी मामले में सीबीआई सर्च कार्यवाही कर रही है। सीबीआई इसके पहले की तारीख़ों में भी कुछ जगहों पर सर्च कार्यवाही कर चुकी है। -

खुद के जवाब में उलझता जा रहा है एसईसीएल प्रबंधन, विवाद गहराया, पहले अवलोकन हेतु लिखा पत्र, अब कहा-दी जा चुकी है सूचना…
कुड़ेकेला। जिले में आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई एक जानकारी को लेकर एसईसीएल प्रबंधन द्वारा जिस तरह का रवैया अपनाया जा रहा है वह बिलकुल भी अप्रत्याशित नहीं है। क्योंकि इस मामले में एसईसीएल प्रबंधन द्वारा पहले भी भ्रामक जानकारी का सहारा लिया गया है। एसईसीएल ने आरटीआई एक्ट के तहत लिखित जानकारी उपलब्ध कराते हुए कहा है कि परियोजना में प्रभावित राजस्व भूमि होने के कारण ग्राम पंचायत की एनओसी जरुरी नहीं है।
अब प्रबंधन द्वारा एक अन्य मामले में जो सूचना दी गई है वह भी पूरी तरह से भ्रमित करने वाला है। आरटीआई के इस मामले में एसईसीएल प्रबंधन ने पहले पत्र लिखकर आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराई कि वृहद जानकारी होने के कारण प्रदान किया जाना संभव नहीं है। अतः आवेदक कार्यालय में उपस्थित हो कर अवलोकन कर सकते हैं। जिसके बाद इस सूचना के लिए आवेदक द्वारा दस्तावेजों के अवलोकन हेतु दिन, तिथि और समय निर्धारित करने के लिए प्रबंधन को पत्र लिखा गया। जिसके तारतम्य में अब एसईसीएल प्रबंधन द्वारा कहा गया है कि इस मामले में आवेदक को 2 पेज की सूचना उपलब्ध करा दी गई है। इस तरह एसईसीएल प्रबंधन द्वारा खुद के भेजे गए पत्र को नकारते हुए 2 पेज की सूचना उपलब्ध करा दिए जाने की बात कही जा रही है। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा यह सब कुछ जानबूझकर किया जा रहा है। हालांकि मैनेजमेंट ने लिखा है कि आवेदक के तिथि समय निर्धारित किए जाने संबंधी पत्र से संबंधित कोई भी जानकारी चाहते हैं तो इस कार्यालय को पूर्व सूचना देते हुए कार्यालयीन समय में आकर संबंधित दस्तावेजों का आवलोकन कर सकते हैं। बता दें कि आरटीआई एक्ट के प्रावधान के मुताबिक अवलोकन हेतु दिन समय और तिथि निर्धारित करने की जिम्मेदारी संबंधित पीआईओ की होती है।
मामला रायगढ़ जिले के छाल एसईसीएल सब एरिया में विस्तार परियोजना से जुड़ा हुआ है। उपयोग कर्ता एजेंसी द्वारा इस एरिया के लिए अलग से प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इस प्रोजेक्ट संबंधित कुछ जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई है। इस मामले में प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी, जिसमें कहा गया है कि ग्राम पंचायत की एनओसी जरुरी नहीं है, शुरू से ही विवादों में रही है। संभवतः प्रबंधन अपने ही जवाब में उलझ गया है। लेकिन इस बार एक बार फिर से प्रबंधन ने अपने द्वारा ही भेजे गए पत्र को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस मामले में 2 पेज की सूचना दी जा चुकी है। यह भी संभव है कि प्रबंधन अब इस पुरे मामले को ही उलझाना चाह रहा है। जिससे कि प्रोजेक्ट से संबंधित किसी भी तरह की अन्य जानकारी सार्वजानिक रूप से सामने न आ सके। हालांकि, मैनेजमेंट की ओर से भेजे गए पहले ही जवाब में यह संदेह गहराता जा रहा है कि इस मामले में अनिवार्य और विधिवत प्रक्रिया का पालन किए बिना ही प्रोजेक्ट के लिए वन मंजूरी ले ली गई है।
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UPI के जरिए भुगतान की सीमा एक लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये…
आरबीआई (RBI) ने यूपीआई (UPI) उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने यूपीआई के जरिए कर भुगतान करने की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है।
आरबीआई गवर्नर ने दास कहा कि चूंकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर भुगतान सामान्य, नियमित तथा उच्च मूल्य के हैं। इसलिए यूपीआई के जरिए कर भुगतान की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख प्रति लेनदेन करने का निर्णय एमपीसी की बैठक में लिया गया है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। रिजर्व बैंक गवर्नर ने बताया कि अनधिकृत कंपनियों की जांच के लिए डिजिटल ऋण देने वाले एप के सार्वजनिक तौर पर आंकड़े तैयार करने का भी प्रस्ताव है।
उल्लेखनीय है कि आरबीआई के अनुसार यूपीआई का उपयोगकर्ता आधार 42.4 करोड़ पर पहुंच गया है। यूपीआई में ‘डेलिगेटेड पेमेंट्स’ शुरू करने के प्रस्ताव से देशभर में डिजिटल भुगतान की पहुंच और उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद है। -

IAS-IPS या मंत्री बने दलितों के बेटे-बेटियों को क्या नहीं मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट जज ने क्यों कहा-एक पीढ़ी तक मिले कोटा….
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST Reservation) को मिलने वाले आरक्षण पर दिए एक बड़े फैसले में 20 साल पहले दिए अपने ही निर्णय को पलट दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राज्य एससी-एसटी में ज्यादा वंचित लोगों के उत्थान के लिए कोटे के अंदर कोटा बना सकते हैं। फैसले के दौरान जजों ने एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर को लागू करने की भी बात कही है। आइए- समझते हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले के क्या पेंच हैं और क्या एससी-एसटी आरक्षण में भी क्रीमीलेयर की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ ने दलितों के आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने 6:1 के बहुमत से अनुसूचित जाति के कोटे में सब कैटेगरी बनाने की राज्यों को मंजूरी दे दी है। ये सब कैटेगरी दलितों के आरक्षण के भीतर उन लोगों की होगी, जो आरक्षण के लाभ से अब तक वंचित रहे हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कोटे में यह कोटा यानी जो उप श्रेणी बनाई गई है, उसे पूरा का पूरा 100 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने यह फैसला देते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि सब क्लासीफिकेशन किसी भी हाल में संविधान के समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 और 341 का उल्लंघन नहीं है। इस पीठ में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल हैं।
जस्टिस गवई ने क्यों कहा-दलितों और आदिवासियों में कुछ ही लोगों को कोटे का फायदा
जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह ज्यादा पिछड़े लोगों को तवज्जो दे। अनुसूचित जाति और जनजाति में कुछ ही लोग हैं, जो अपने आरक्षण कोटे का फायदा उठा पाते हैं। जमीनी हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता है। एससी-एसटी के भीतर भी ऐसी कैटेगरी हैं, जिन्हें सदियों से दबाया गया।
दलित समुदाय में जो पढ़ेगा-लिखेगा, वही उठा पाएगा आरक्षण का फायदा
सुप्रीम कोर्ट में जज शिवाजी शुक्ला के अनुसार, दरअसल जस्टिस गवई का कहना था कि आरक्षण का लाभ एक खास वर्ग तक को ही मिल पा रहा है। चाहे वो दलित हों या अन्य पिछड़ा वर्ग। दलितों में भी बहुत सी ऐसी कैटेगरी है, जिन तक आरक्षण का लाभ पहुंच ही नहीं पाता। जैसे सरकारी नौकरी में आरक्षण किसी दलित समुदाय के व्यक्ति को तभी मिल सकता है, जब वो पढ़ाई करके प्रतियोगी परीक्षाओं को देने की स्थिति में पहुंचे। जब वह वहां तक पहुंचेगा ही नहीं तो वह आरक्षण का फायदा कैसे उठा सकेगा। यानी अगर किसी राज्य में 15 फीसदी आरक्षण अनुसूचित जातियों के लिए है तो उस 15% के तहत वो कुछ अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण तय कर सकते हैं।
एससी-एसटी में क्रीमीलेयर का सिद्धांत लागू करने पर बात
एडवोकेट शिवाजी शुक्ला के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों में से 4 जस्टिस गवई की इस टिप्पणी पर सहमति जताई कि एससी-एसटी कोटे में भी क्रीमीलेयर का सिद्धांत लागू होना चाहिए। राज्यों को एससी-एसटी कैटेगरी में भी क्रीमी लेयर की पहचान के लिए एक नीति लानी चाहिए। और ऐसे लोगों को कोटे से बाहर करना चाहिए। असली समानता हासिल करने का यही इकलौता रास्ता है। वहीं, जस्टिस विक्रम नाथ ने भी कहा कि ओबीसी में लागू क्रीमीलेयर को लेकर एससी में लागू करना चाहिए। जस्टिस पंकज मित्तल ने कहा अगर पहली पीढ़ी आरक्षण के जरिए हायर स्टेटस पर पहुंच चुकी है तो दूसरी पीढ़ी को यह आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने भी जस्टिस गवई के मत का समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी फैसले पर लागू नहीं
एडवोकेट शिवाजी शुक्ला के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला था कि क्या राज्य सरकार एससी-एसटी कोटे में सब कैटेगरी बना सकती है? कोर्ट ने राज्यों को सब कैटेगरी बनाने की सहमति दी है। अब राज्य बनाएं या न बनाएं, ये उन पर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट जजों ने यह फैसला देते हुए जो टिप्पणी दी है, वो बस राय भर है। वो बाध्यकारी नहीं है। यह राज्यों की इच्छा पर निर्भर करेगा। साथ ही सब कैटेगरी बनाने से पहले उन्हें इस बारे में पर्याप्त आंकड़े भी देने होंगे कि जिस समुदाय को वो सब कैटेगरी के तहत कोटा देने जा रहे हैं, उनकी आबादी कितनी है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है और क्या उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
जस्टिस त्रिवेदी ने इस फैसले से अलग क्या फैसला लिखा
जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा कि अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की प्रेसीडेंशियल लिस्ट में राज्य छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं। किसी जाति को प्रेसीडेंशियल लिस्ट से बाहर करना या अंदर केवल संसद ही कर सकती है। एससी-एसटी लिस्ट में उप कैटेगरी बनाने से अनुच्छेद 341 का मकसद ही खत्म हो जाएगा, जिसमें राजनीतिक पार्टियों के इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की आशंका बनी रहेगी।
जब जज ने कहा-आरक्षण नीति भी गुब्बारे जैसी हो गई
जस्टिस पंकज मित्तल ने कहा कि यह आम समझ है कि किसी वर्ग को खुश करने के लिए एक बार जो दिया जाता है, उसे वापस नहीं लिया जा सकता। संविधान के तहत आरक्षित वर्ग के लोगों को दिए गए लाभ भी वापस नहीं लिए जा सकते। एक बार दी गई हर रियायत किशमिश या गुब्बारे की तरह फूलती चली जाती है। आरक्षण की नीति के साथ भी यही हुआ। उन्होंने कहा कि आरक्षण लागू करने से जातिवाद फिर से पनपता है। आरक्षण दलितों के उत्थान के तरीकों में से एक है, लेकिन इसे लागू करने से जातिवाद फिर से पनपता है।
2004 के चिन्नैया फैसले में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से 2004 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य जजमेंट को पलट दिया, जिसमें यह कहा गया था कि राज्य प्रेसीडेंशियल लिस्ट में छेड़छाड़ नहीं कर सकते। इसमें यह कहा गया था कि अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों को नोटिफाई किया जा सकता है। इसकी सब कैटेगरी नहीं बनाई जा सकती है। उस वक्त आंध्र प्रदेश सरकार ने भी पंजाब जैसा एक कानून बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया था।
50 साल पहले का पंजाब का फैसला, जिसका अंजाम अब
करीब 50 साल पहले 1975 में पंजाब सरकार ने अनुसूचित जाति की नौकरी और कॉलेज के आरक्षण में वाल्मीकि और मज़हबी सिख जातियों के लिए 25 फीसदी कोटा तय किया था, जिसे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2006 में ख़ारिज कर दिया था। खारिज करने का आधार 2004 का एक सुप्रीम कोर्ट का फैसला था, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति की सब-कैटेगरी नहीं बनाई जी सकती। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि राज्यों के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची अनुच्छेद 341 के तहत राष्ट्रपति की ओर से बनाई जाती है। यानी इसे सिर्फ संसद ही बना सकती है, जिस पर राष्ट्रपति मुहर लगाता है। आखिरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ के पास पहुंचा। -

ईडी-सीबीआई की सारी दलीलें खारिज, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया को जमानत देते हुए क्या कहा….
आखिरकार दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जेल से बाहर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई की राह के सारे रोड़े हटा दिए। दो जजों की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई और ईडी, दोनों की तरफ से दर्ज मुकदमों में मनीष सिसोदिया को जमानत दी जाती है।
नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया 17 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में मनीष सिसोदिया को 10 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सिसोदिया की जमानत का पुरजोर विरोध किया, लेकिन जज जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया। बड़ी बात है कि सिसोदिया को सीबीआई और ईडी, दोनों की तरफ से दर्ज मामलों में जमानत मिल गई दी है। इसलिए अब सिसोदिया के जेल से बाहर आने में कोई अड़ंगा नहीं रह गया है। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की डिविजन बेंच ने मनीष सिसोदिया को जमानत देते हुए अपने फैसले में क्या कहा।
पासपोर्ट जमा, विदेश नहीं जा पाएंगे सिसोदिया
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि बेल नियम है, जेल अपवाद है। जजों ने अपने आदेश में कहा कि मनीष सिसोदिया की जमान की अर्जी स्वीकार की जाती है। पीठी ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश खारिज कर दिया जाता है। उन्हें ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में जमानत दी जाती है। सिसोदिया ने जमानत की शर्तों के रूप में अपना पासपोर्ट भी पुलिस स्टेशन में जमा कराया और रिपोर्ट की है। सिसोदिया अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया अनुच्छेद 21 का हवाला
अदालत ने यह देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली कि मुकदमे में लंबे समय तक देरी ने सिसोदिया के त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन किया है और त्वरित सुनवाई का अधिकार स्वतंत्रता के अधिकार का ही एक पहलू है। पीठ ने कहा, ‘सिसोदिया को त्वरित सुनवाई के अधिकार से वंचित किया गया है। त्वरित सुनवाई का अधिकार एक पवित्र अधिकार है। हाल ही में जावेद गुलाम नबी शेख मामले में हमने इस पहलू पर विचार किया और पाया कि जब अदालत, राज्य या एजेंसी त्वरित सुनवाई के अधिकार की रक्षा नहीं कर सकती है, तो यह कहकर जमानत का विरोध नहीं किया जा सकता है कि अपराध गंभीर है। संविधान का अनुच्छेद 21 अपराध की प्रकृति के बावजूद लागू होता है।’इसने कहा कि समय के भीतर सुनवाई पूरी होने की कोई संभावना नहीं है और सुनवाई पूरी करने के उद्देश्य से उसे सलाखों के पीछे रखना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा। पीठ ने कहा, ‘सिसोदिया की समाज में गहरी जड़ें हैं। वो भाग नहीं सकते। सबूतों से छेड़छाड़ के संबंध में मामला काफी हद तक दस्तावेजों पर निर्भर करता है और इसलिए सभी को जब्त कर लिया गया है और छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।’
पीएमएलए का मामला नहीं, मुकदमे में देरी का: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने आगे कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी को जमानत देने के लिए ट्रिपल टेक्स्ट वर्तमान जमानत याचिका पर लागू नहीं होगा क्योंकि याचिका मुकदमे में देरी पर आधारित है। कोर्ट ने कहा, ‘हमने ऐसे निर्णयों पर गौर किया है, जिनमें कहा गया है कि लंबी अवधि की कैद में जमानत दी जा सकती है। वर्तमान मामले में ट्रिपल टेस्ट लागू नहीं होता।’
न्यायालय ने ईडी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि ट्रायल में देरी इसलिए हुई क्योंकि सिसोदिया ने ट्रायल कोर्ट में कई आवेदन दायर किए थे। कोर्ट ने कहा, ‘ईडी के सहायक निदेशक की कंप्लायंस रिपोर्ट से पता चलता है कि अनर्सिटफाइड डेटा के क्लोन की एक प्रति तैयार करने में 70 से 80 दिन लगेंगे। हालांकि कई आरोपियों ने कई आवेदन दायर किए थे, लेकिन उन्होंने सीबीआई मामले में केवल 13 आवेदन और ईडी मामले में 14 आवेदन दायर किए। ट्रायल कोर्ट ने सभी आवेदनों को स्वीकार कर लिया।’
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि उसके पास दायर आवेदनों के कारण सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने में देरी हुई, गलत है। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘जब हमने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कोई ऐसा आवेदन दिखाने को कहा जिसे ट्रायल कोर्ट ने आधारहीन माना हो, तो वह नहीं दिखाया गया। इस तरह ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि सिसोदिया ने ही सुनवाई में देरी की वजह हैं, गलत है और इसे खारिज किया जाता है।’
न्याय का मजाक नहीं उड़ाया जा सकता: उच्चतम न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने कि वह सिसोदिया को ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट में नहीं भेजेगा क्योंकि उसने सिसोदिया की पिछली जमानत याचिका को खारिज करते हुए आरोपपत्र दाखिल करने के बाद जमानत के लिए उन्हें यहां आने की छूट दी थी। उसने कहा, ‘शुरू में 4 जून के आदेश पर विचार किया गया है। हमने पाया है कि जब सिसोदिया ने इस अदालत में याचिका दायर की थी, तब इस अदालत के पहले आदेश से 7 महीने की अवधि बीत चुकी थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और सुनवाई शुरू होगी। आरोपपत्र दाखिल करने के बाद याचिका को फिर से शुरू करने की स्वतंत्रता दी गई थी। अब सिसोदिया को ट्रायल कोर्ट और फिर उच्च न्यायालय में भेजना सांप-सीढ़ी का खेल खेलने जैसा होगा।’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह न्याय का उपहास होगा कि उन्हें फिर से ट्रायल कोर्ट में भेजा जाए। न्यायालय ने कहा, ‘प्रक्रियाओं को न्याय से ऊपर नहीं रखा जा सकता है। हमारे विचार में सुरक्षित स्वतंत्रता को आरोपपत्र दाखिल करने के बाद याचिका को पुनर्जीवित करने की स्वतंत्रता के रूप में समझा जाना चाहिए। इसलिए हम प्रारंभिक आपत्ति पर विचार नहीं करते और इसे खारिज किया जाता है। -

एसीबी ने पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार….
रायगढ़ में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। एसीबी ने पटवारी को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक छाल तहसील कार्यालय क्षेत्र के हल्का क्रमांक 49 का पटवारी हरिशंकर राठिया ने जमीन के एक मामले में ग्रामीण से 25 हजार रुपए की मांग की थी।
पटवारी ने ग्रामीण से गांव की सरकारी भूमि पर कब्जा मामले में पहले 25 हजार की डिमांड की और फिर 20 हजार में मामला सेटल किया। ग्रामीण ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की थी। ACB की टीम बुधवार को छाल तहसील मुख्यालय पहुंची और ट्रैप करते हुए पटवारी हरिशंकर को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। बताया जा रहा है कि करीब 3-4 माह पहले ग्रामीण ने मामले की शिकायत की थी। छाल तहसीदार एनके सिन्हा ने मीडिया को बताया कि ACB की टीम छाल पटवारी कार्यालय में कार्रवाई कर रही है। करीब 20-25 हजार रुपए रिश्वत लेने की शिकायत थी।
जानकारी के मुताबिक ग्रामीण ने गांव की सरकारी भूमि पर कब्जा किया था। जमीन का पट्टा दिलाने के लिए पटवारी ने ग्रामीण से 25 हजार रुपए की मांग की थी। ग्रामीण पटवारी को 20 हजार रुपए पहले दे चुका था। इसके बाद पटवारी ने 5 हजार रुपए की और मांग की। जिसके बाद ग्रामीण ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की थी।