मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सिंचाई घोटाले में बड़ी राहत मिली है. अजित पवार के खिलाफ सिंचाई घोटाले के 9 मामलों को बंद कर दिया गया है. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई घोटाले से संबंधित 3000 प्रोजेक्ट्स जांच के घेरे में हैं और इनमें से 9 मामलों को सबूतों के अभाव में बंद कर दिया गया है. अभी तक जिन टेंडर की जांच की गई है, उनमें एसीबी को अजित पवार के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला है।
महाराष्ट्र ऐंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक परमबीर सिंह ने बताया कि जिन भी मामलों को आज बंद किया गया है उनमें से कोई भी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से संबंधित नहीं है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने अजित पवार के खिलाफ दर्ज 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले में 9 केस बंद कर दिए हैं. हालांकि सिंचाई घोटाले में अभी भी 11 केस दर्ज हैं. महाराष्ट्र में करीब 70 हज़ार करोड़ के सिंचाई घोटाले में अजित पवार आरोपी थे. उपमुख्यमंत्री बनने के 48 घंटों के भीतर ही अजित पवार से जुड़े कुछ मामले बंद हुए हैं।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले मामलों की सूची में कोई भी मामला महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार के खिलाफ कथित रूप से सिंचाई भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित नहीं है. ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि जो मामले बंद थे वे सशर्त थे. यदि मामले में अधिक जानकारी प्रकाश में आती है या अदालतें आगे की जांच का आदेश देती हैं. ब्यूरो के महानिदेशक, परमबीर सिंह ने कहा कि हम सिंचाई संबंधी शिकायतों में लगभग 3000 निविदाओं की जांच कर रहे हैं. ये नियमित पूछताछ हैं जो बंद हैं और सभी चल रही जांच जारी है।
दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एक संयुक्त याचिका पर आदेश दिया है कि कल (बुधवार) शाम 5 बजे से पहले विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हो। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का लाइव प्रसारण भी हो।जस्टिस रमना ने आज मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट और विधायिका के अधिकार पर लंबे समय से बहस चली आ रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए और लोगों को अच्छे शासन का अधिकार है। इस मामले ने राज्यपाल की शक्तियों को लेकर बहुत अहम संवैधानिक मुद्दे को उठाया है।कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक और उत्तराखंड के मामलों को भी जिक्र किया। कल सुबह 11 बजे विधायकों का शपथ ग्रहण हो, शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण हो। कोर्ट ने कहा कि विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर करवाएंगे।एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि आज संविधान दिवस के मौके पर संविधान की जीत हुई है। मैं मांग करता हूं कि देवेंद्र फडणवीस तुरंत अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपे।शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस द्वारा लगाई गई याचिका में राज्यपाल द्वारा अचानक से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और आनन फानन में देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिलवाने के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था।इसके साथ ही इन तीनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट करवाने की भी अपील की थी। रविवार और सोमवार को सभी पक्षों की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए आज का दिन निर्धारित किया था।
अजित पवार ने 54 विधायकों की चिट्ठी सौंपी थी
तुषार मेहता ने कहा कि क्या आर्टिकल 32 की याचिका में राज्यपाल के आदेश को इस तरह से चुनौती दी जा सकती है या नहीं? राज्यपाल को पता था कि चुनाव पूर्व का एक गठबंधन जीता है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अजित पवार की चिट्ठी सौंपी जिसमें 54 विधायकों के नाम थे।उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को चुनाव हुआ, 24 को नतीजा घोषित हुआ, BJP के 105 सदस्य है शिवशेना के 56 सदस्य NCP के 54 सदस्य है। शिवसेना और BJP का प्री पोल अलाइंस था। सबसे पहले BJP को बुलाया गया वह बहुमत नही साबित कर पाए उसके बाद शिवसेना को बुलाया गया वह भी बहुमत नही साबित कर पाए उसकके बाद NCP को बुलाया गया था।
अजित पवार की चिट्ठी के बाद ही राज्यपाल ने हटाया राष्ट्रपति शासन
तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के पत्र के आधार पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी। गवर्नर के वकील तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस की चिट्ठी में लिखा गया है कि उनके साथ NCP के 54 विधायकों के साथ 11 निर्दलीय का समर्थन है।अजित पवार विधायक दल के नेता हैं।उन्होंने चिट्ठी पढ़ी। जिसमें कहा है कि मुझे सभी एनसीपी विधायकों का समर्थन है। हमने तय किया है कि फडणवीस को समर्थन दें। चिट्ठी में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन ज्यादा नहीं चलने चाहिए, इसलिए उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया जाए।तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेक से सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया है, उसका पर्याप्त आधार है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने कहा कि मुझे दो से तीन दिन का वक्त दिया जाए, ताकि रिप्लाई फाइल किया जा सके।तुषार मेहता ने कहा कि इनको चिंता है कि विधायक भाग जाएंगे। अभी इन्होंने किसी तरह से उनको पकड़ा हुआ है। विधानसभा की कार्रवाई कैसे चले? इसमें दखल से भी कोर्ट को परहेज करना चाहिए।
मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता
देवेंद्र फडणवीस के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा कि अजित पवार ने कहा कि हमारा समर्थन आपके साथ है। वे लोग हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं, और हम पर आरोप लगा रहे हैं। हमारे चुनाव पूर्व साथी शिवसेना ने चुनाव के बाद हमारा साथ छोड़ दिया।फिर एनसीपी आई और हमारे सदस्य 170 हो गए। राज्यपाल ने हमें आमंत्रण दिया। अजित पवार हमारे साथ हैं। एक पवार दूसरी तरफ बैठे हैं। जिनके पारिवारिक झगड़े से हमे कोई लेना देना नहीं है। ये केस येदुरप्पा मामले से अलग है। मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता।रोहतगी ने कहा कि अब जो होगा विधानसभा के फ्लोर पर होगा। लेकिन राज्यपाल पर आरोप क्यों? उन्होंने भी तो फ्लोर टेस्ट के लिए ही बोला है। फ्लोर टेस्ट कब होगा ये तय करने का अधिकार राज्यपाल का है। इसे कोर्ट को तय नहीं करना चाहिए।राज्यपाल पर आरोप लगाना गलत है। फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को नहीं कहा जा सकता कि कितने दिन में कराना है। यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। राज्यपाल के कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकता।जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ के समक्ष शिवसेना की तरफ से वकील कपिल सिब्बल, एनसीपी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, देवेंद्र फडणवीस की तरफ से मुकुल रोहतगी पेश हुए थे और अजित पवार की तरफ से वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह पेश हुए थे।केंद्र यानि राज्यपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील रखी थी। कोर्ट ने रविवार और सोमवार को इस मामले में सभी पक्षों की दलीले सुनीं और अपना फैसला आज (मंगलवार) तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।सोमवार को कोर्ट में राज्यपाल की तरफ से पेश हुए वकील तुषार मेहता ने अजित पवार के समर्थन की वह चिट्ठी भी पेश की जिसमें 54 विधायकों के समर्थन की बात कही गई थी।कोर्ट को बताया कब-कब क्या क्या हुआसोमवार को केन्द्र के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता चुनाव परिणाम से अब तक का घटनाक्रम कोर्ट को बताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने कब-कब क्या किया। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। BJP ने मना कर दिया।10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उसने भी मना कर दिया। 11 को एनसीपी ने भी मना किया तो राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उसके बाद से किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। अजित पवार का समर्थन पत्र पेश हुए, NCP के विधायक दल के नेता के तौर पर जिसमें 54 विधायक का नाम है।
‘मैं ही एनसीपी हूं’
अजित पवार के वकील पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह ने कहा, ‘मैंने 22 नवंबर को एनसीपी विधायक दल के नेता के रूप में काम किया। उस दिन अन्यथा दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था। राज्यपाल ने अपने विवेक से कार्य किया।अजित पवार की ओर से मनिंदर सिंह ने कहा, ‘जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही। फिर विवाद क्यों?अजित पवार ने कहा था कि मैं एनसीपी हूं। विधायक दल का नेता हूं। यही सही है, कोर्ट को आर्टिकल 32 के तहत इस याचिका को नहीं सुनना चाहिए। इन्हें हाईकोर्ट जाने को कहना चाहिए। अगर बाद में कोई स्थिति बनी है इसे राज्यपाल देखेंगे। उनके ऊपर छोड़ा जाए। कोर्ट इसमें दखल क्यों दें?’
जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें
जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी को कहा कि अपनी दलीलों को याचिका कि मांगों तक सीमित रखिए। इस पर सिंघवी ने कहा, ‘Mylord आपका कहना सही है। मगर वे बातें अंतरात्मा को धक्का पहुंचती है, जब कोई कोर्ट में खड़ा होकर कहता है कि मैं एनसीपी हूं।’सिंघवी ने कहा कि अजित पवार को विधायक दल का नेता चुनने के लिए किए गए विधायकों के हस्ताक्षर राज्यपाल को दिए गए पत्र में लगा दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि मैं इन बातों पर जोर नहीं देना चाहता, मगर ये बातें अपने आप में आधार हैं। फ्लोर टेस्ट आज ही हो जाना चाहिए। सिंघवी और रोहतगी में बहस होने पर जस्टिस रमना ने दोनों को शांत होने के लिए कहा।रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए कोई महीनों का समय नहीं दिया है। उन्होंने 30 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश नहीं दे सकता।ये कह रहे हैं कि कोर्ट सत्र बुलाये और ये भी तय करे कि को कब नाश्ता करेगा और कब लंच करेगा। मुकुल रोहतगी ने कहा कि पूर्व में कोर्ट ने संसद की कार्रवाई में दखल देने से मना किया था। इनका केस यह है कि आज ही फ्लोर टेस्ट हो।एनसीपी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को सही कह रहे हैं तो फिर इसमें देर क्यों? इसी तर्क के केस में कोर्ट के पुराने आदेश हमारे सामने हैं, उनकी उपेक्षा नहीं कि जा सकती। अनकवरिंग लेटर और अनएड्रेस लेटर को राज्यपाल ने कैसे स्वीकार किया।
जब कोर्ट में सब हंसने लगे
तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा, ‘आपके आदेश का दूरगामी असर होगा। विस्तृत सुनवाई के बाद ही आदेश जारी करें। जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है। इस मामले में पूर्व के कुछ आदेशों के आधार पर अंतरिम आदेश न दें।इस मामले में हमें विस्तृत जवाब दायर करने दीजिए।’तुषार मेहता ने कहा कि ये लोग एक याचिका दायर कर यहां आए हैं और एक वकील पर तो सहमत नहीं हो पाए। गठबंधन में सहमत कैसे हो पाएंगे।कोर्ट में सब हंसने लगे।तुषार मेहता ने कहा कि जो नई चिट्ठी ये कोर्ट को दे रहे हैं, उसमें भी कई विधायकों के नाम पते नहीं है। आपके अनुसार हम फ्लोर टेस्ट हारने को तैयार हैं। तो फ्लोर टेस्ट तय समय पर होने दो। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें।
शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। ऐलान किया कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बना रही हैं। ये शाम को 7 बजे हुआ। सुबह 5 बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला क्यों लिया गया?ऐसा राष्ट्रीय आपातकाल क्या था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था।
देश मे ऐसी क्या राष्ट्रीय विपदा आ गई थी कि सुबह 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटा और 8 बजे मुख्यमंत्री की शपथ भी दिलवा दी गई। जिस तरह पीएम के कहने पर बिना कैबिनेट मीटिंग के फैसले हुआ, वह आपातकालीन प्रावधान है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें।
शिवसेना के वकील सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए। कोर्ट ने पहले भी किया है, आज भी करना चाहिए। सबसे सीनियर मेंबर प्रोटेम स्पीकर होता है, वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। कोर्ट को आदेश देना चाहिए।
बता दें कि इससे पहले रविवार को अहम सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल, सीएम और डिप्टी सीएम को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने इस मामले में गवर्नर (केंद्र), सीएम और डिप्टी सीएम को राज्यपाल को सौंपे गए दस्तावेज आज कोर्ट में पेश करने को कहा था।
करीमनगर। तेलंगाना के सरकारी दफ्तर में प्रवेश करते ही सामने लिखा मिलता है ‘आई एम अनकरप्टेड’ यानी ‘मैं ईमानदार हूं।’ आगे कुर्सी पर बैठे हैं एडिशनल डिवीजनल इंजीनियर (एडीई) पोदेती अशोक। दरअसल, दरअसल, बिजली विभाग में अपना काम करवाने के लिए आने वाले लोगों और ठेकेदारों के ऑफर से परेशान होकर करीमनगर में पदस्थ अशोक ने यह अनूठा तरीका अपनाया है।
उन्होंने कॉन्ट्रेक्टरों और आम लोगों को समझाया कि वे न घूस लेते हैं, न देते हैं। जब लोग उन्हें घूस देने में असफल रहे तो परेशान करने लगे। तंग होकर उन्हें दफ्तर में ही 40 दिन पहले दीवार पर यह लिखवाना पड़ा। इसके बाद से साथी अफसर भी उन्हें यह कहकर परेशान कर रहे हैं कि वे पूरे विभाग पर आरोप लगा रहे हैं।
‘बिजली विभाग में खूब भ्रष्टाचार है’
अशोक के इस कदम से विभाग के करप्ट अफसरों में हड़कंप है। उन्होंने कहा- “मैं बचपन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ रहा हूं। यदि मैं घूस लूंगा तो मुझे देनी भी पड़ेगी। यहां बिजली विभाग में खूब भ्रष्टाचार है। मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि अफसरों को घूस न दें। उन्हें उनके काम के लिए तनख्वाह दी जाती है। यदि आपका काम नहीं होता तो उच्चाधिकारियों से संपर्क करें या मीडिया में जाएं, लेकिन घूस न दें।’ अशोक ने 2005 में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। पिछले साढ़े तीन सालों में वे एडीई बने। इसके बाद से उनके पास फाइलें और अन्य बिलपास करने के लिए घूसखोरी के ऑफर आने लगे।
मध्यप्रदेश। पहले कर्नाटक में सत्ता गंवाई, फिर महाराष्ट्र में सरकार बनते-बनते रह गई और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की मुश्किल बढ़ने को लेकर फिर से कयासों का दौर शुरू हो गया। दरअसल विधानसभा चुनाव 2018 में काफी जद्दोजहद के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर अचानक अटकलों का बाजार गर्म हो गया।
काफी समय से सिंधिया के बीजेपी से संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में अचानक सिंधिया के ट्विटर प्रोफाइल से ‘कांग्रेस’ का गायब हो जाना भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप का कारण बन गया। आखिरकार सिंधिया ने खुद सफाई देकर कयासों पर लगाम लगा दी।
पहले शिवराज, फिर मोदी से मुलाकात
मध्य प्रदेश में कमल नाथ (Kamal Nath) और सिंधिया में से मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करने के लिए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अच्छी खासी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। तब जाकर कमल नाथ का नाम फाइनल हुआ तो सिंधिया खेमे ने विरोध भी किया था।
सरकार बनने के ठीक बाद शिवराज सिंह से सिंधिया की मुलाकात की खबर सामने आई थी। इसके बाद लगातार सिंधिया खेमे के माने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री दिग्विजय सिंह और कमल नाथ के खिलाफ बयान देते रहे।
कुछ दिनों पहले सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से भी मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात के बाद उनकी तरफ से कहा गया कि बाढ़ग्रस्त मध्य प्रदेश के संदर्भ में बातचीत करने गए थे।
यूं चला कयासों का दौर
तमाम घटनाक्रमों के चलते कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस से नाराज सिंधिया बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। चंद सीटों के फासले से सरकार बनाने से चूकी बीजेपी से सिंधिया के संपर्क में होने की खबरों ने कमल नाथ सरकार के लिए मुश्किल के संकेत दे दिए।
इसके चलते ट्विटर प्रोफाइल में बदलाव से मामला गर्मा गया, लेकिन सिंधिया ने खुद एएनआई से बातचीत में मामला स्पष्ट कर दिया।
बिलासपुर। याचिका में जस्टिस गौतम भादुड़ी ने आदेश दिया है कि एसआईटी ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे व्यक्तियों के हित प्रभावित हों। अंतागढ़ टेप कांड में अभियुक्त बनाए गए डॉ पुनीत गुप्ता मंतुराम पवार और अजित जोगी अमित जोगी की वॉयस सेंपल लिए जाने का एसआईटी का आवेदन रायपुर कोर्ट ने पूर्व में खारिज किया था। राज्य सरकार ने इस मसले को लेकर हाईकोर्ट में रिविजन पिटिशन दायर किया है, जिस पर हाईकोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस शरद गुप्ता की कोर्ट में पेश रिवीजन पिटिशन में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि, अभियुक्तों को आदेशित करें कि वह वॉयस सेंपल दें।विदित हो कि,इस मामले को लेकर पूर्व में दायर याचिका में 21 फरवरी 2019 में जस्टिस गौतम भादुड़ी ने आदेश दिया है कि एसआईटी ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे व्यक्तियों के हित प्रभावित हों। इसके अलावा एसआईटी के विधि सम्मत होने को लेकर प्रश्न उठाती याचिका भी हाईकोर्ट में अभी लंबित है।
जगदलपुर। बस्तर जिले के दो डिप्टी कलेक्टर गोकुल रावटे और माधुरी सोम को उनके मोबाइल फोन पर धमकी देने का मामला सामने आया है. जिले में इस तरह का यह पहला मामला है जब प्रशासनिक अधिकारियों को धमकी भरे फोन और मैसेजस आये है. दोनों ही डिप्टी कलेक्टर ने इसकी शिकायत बोधघाट थाने में दर्ज कराई है।
बोधघाट थाना प्रभारी सुरेन्द्र बघेल के मुताबिक दोनों के फोन पर एक ही मोबाइल नबंर से धमकी दी गई है. इसके अलावा मोबाइल पर धमकी भरा मैसेज भी अज्ञात व्यक्ति ने भेजा है. इधर शिकायतकर्ताओं से मिले मोबाईल नम्बर को पुलिस साइबर सेल की मदद से ट्रेस कर रही है. चूंकि यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ा है इसलिए पुलिस इसे गम्भीरता से ले रही है. प्रथम दृष्टय़ा दोनों ही अधिकारी धान तस्करी पर लगातार कर रहे कार्रवाई की वजह से बिचौलियों द्वारा धमकी देने का अंदेशा जता रहे हैं।दरअसल पिछले दिनों प्रशासन ने कई जगह छापेमारी की कार्रवाई कर कई हजार क्विंटल अवैध धान की बोरी जब्त किया था. ऐसे मे दोनो ही अधिकारी किसी धान तस्करी द्वारा इस तरह की धमकी देने की बात कह रहे है. फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश मे लगी हुई है, और साईबर सेल की मदद से नंबर को ट्रेस किया जा रहा है।
इधर इस मामले में जब दोनों ही अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने आधिकारिक तौर पर मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
दिल्ली। चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पूरे देश में लोगों के वोटर कार्ड बदलने का फैसला लिया है. अब कई सारे सिक्योरिटी फीचर से लैस मतदाता कार्ड लोगों को मिलेंगे।देश में नए वोटर कार्ड लाने का फैसला निर्वाचन आयोग ने किया है. इसकी शुरुआत कर्नाटक की राजधानी से की गई है. नए वोटर कार्ड में मतदाता की रंगीन फोटो होगी. अब पूरे देश में इसी तरह के वोटर कार्ड मतदाताओं को उपलब्ध करवाये जाएंगे।
नए वोटर कार्ड प्लास्टिक के होंगे. इन कार्डों पर आयोग का होलोग्राम होगा. इसके साथ ही हर कार्ड पर बार कोड होगा. हर मतदाता का अलग बारकोड होगा. इतना ही नहीं नए कार्ड की कीमत 30 रुपए तय की गई है. इसे जारी करने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।
रायपुर। पूर्व कलेक्टर व भाजपा नेता ओपी चौधारी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जय-वीरू को याद किया है. उन्हें याद करने की भी एक वजह है. वजह जानने से पहले ये जय वीरू है कौन ये जान लीजिए ? ओपी चौधरी ने सीएम भूपेश और मंत्री टीएस सिंहदेव को ये नाम दिया है. यदि आपने शोले फिल्म देखी होगी तो इस भूमिका को बखूबी जानते होंगे।
चालिए अब मुद्दे की बात पे आते हैं. दरअसल भाजपा नेता ओपी चौधरी ने कांग्रेस की सरकार बनने से पहले छत्तीसगढ़िया विद्यमितानों के लिए किए गए वादों को याद दिलाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही पता नहीं जय-वीरू को क्या हो गया है ? और उनकी दोस्ती को ?उन्होंने कहा कि जय-वीरू यानी सीएम भूपेश और मंत्री टीएस सिंहदेव कांग्रेस की सरकार बनते ही अपने वादे भूल गए हैं. ओपी ने वादा याद दिलाते हुए आग्रह किया है कि यदि छत्तीसगढ़िया विद्यमितानों की तत्काल शिक्षक के रूप में नियमित भर्ती की जाती है, तो वो स्वयं जय वीरू को गुलदस्ता देने जाएंगे. उन्होंने यह भी साफ किया है कि इस आग्रह को राजनीति से अलग समझे. इसमें कोई राजनीति नहीं की जा रही है.
ओपी चौधरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया है जिसमें कांग्रेस द्वारा वादा किए गए लेटर को भी अटैच करते हुए लिखा है कि…
जब कांग्रेस छत्तीसगढ़ में विपक्ष में थी, तो एक जोड़ी जय-वीरू कहलाती थी। तब जय ने छ्त्तीगढिया विद्यमितान भाई-बहनों को लिखित वादा किया था, कि कांग्रेस की सरकार बनते ही की जायेगी। सरकार बनते ही पता नहीं क्या हो गया है जय-वीरू को? और उनकी दोस्ती को?राजनीति से अलग जय-वीरू दोनों से गुजारिश है, कि छ्त्तीगढिया विद्यमितान भाई-बहनों का तत्काल नियमित भर्ती सुनिश्चित करें। मैं विद्यमितान साथियों के साथ धन्यवाद का गुलदस्ता,जय वीरू दोनों को देने आऊँगा।
सरकार बनने के पहले किए गए टीएस सिंहदेव के वादे का वो लेटर…
रायपुर। चिटफंड कम्पनियों के मालिकों के विरूद्ध कार्रवाई के साथ ही इन कम्पनियों से धोखाधडी के शिकार लोगों की धन वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है। राज्य में अनियमित वित्तीय (चिटफंड) कम्पनियों के विरूद्ध 403 प्रकरणों दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है बिलासपुर सिविल लाइन में दर्ज प्रकरण में 2 लाख 80 हजार रूपए की राशि वापस कर दी गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा चिटफंड कम्पनियों के प्रबंधकों और संचालकों के विरूद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई करने और इन कम्पनियों के एजेन्टों और अभिकर्ताओं के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित आज कैबिनेट की बैठक में अनियमित वित्तीय (चिटफंड) कम्पनियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा गई और अधिकारियों को दर्ज प्ररकणों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 से अक्टूबर 2019 तक दर्ज किए प्रकरणों में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 एवं नियम 2005 के तहत 248, ईनामी चिट और धन परिचालन स्कीम पाबंदी अधिनियम 1978 के तहत 65 और भारतीय दण्ड विधान की धारा के तहत 90 प्रकरण शामिल हैं। इन दर्ज किए गए प्रकरणों में डारेक्टर के विरूद्ध 379, पदाधिकारियों के विरूद्ध 148 प्रकरण शामिल हैं। धन वापसी की प्रक्रिया में कुल 154 प्रकरणों में सम्पत्ति का चिन्हांकन किया गया है तथा इन प्रकरणों में कुर्की की कार्रवाई की जा रही है।इनमें वर्ष 2015 से 2019 के माह अक्टूबर तक दर्ज कुल 403 प्रकरणों में 3 लाख 65 हजार 570 लोग ठगी के शिकार हुए हैं। जिनमें लोगों से 12 अरब 59 करोड़ 83 लाख 39 हजार 436 रूपए की राशि ठगी गई है। चिटफंड कंपनियों के विरूद्ध वर्ष 2015 में 74, वर्ष 2016 में 123, वर्ष 2017 में 98, वर्ष 2018 में 54 तथा वर्ष 2019 में माह अक्टूबर तक 54 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें वर्तमान में सरकार द्वारा लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए उनके ठगे हुए पैसे की वापसी के लिए तत्परता से कार्रवाई की जा रही है। इनमें संलिप्त एजेंट के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की वापसी की कार्रवाई भी जारी है। इसके अलावा चिटफंड कंपनियों के संचालकों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई जारी है।
अनियमित वित्तीय कंपनियों (चिटफंड) के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों में सबसे अधिक रायपुर जिले में 52 प्रकरण दर्ज की गई है। इसी तरह दुर्ग जिले में 39, राजनांदगांव जिले 30, सरगुजा जिले में 29, बिलासपुर जिले में 26 तथा रायगढ़ जिले में 25 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बेमेतरा तथा बालोद जिले में 20-20 प्रकरण, जांजगीर-चांपा जिले में 19 प्रकरण, कांकेर जिले में 18 प्रकरण, कोरबा तथा बलौदाबाजार जिले में 17-17 प्रकरण, महासमुंद जिले में 15 प्रकरण, धमतरी जिले में 14 प्रकरण, सूरजपुर जिले में 13 प्रकरण, कोरिया जिले में 12 प्रकरण, कबीरधाम जिले में 11 प्रकरण, जशपुर जिले में 6 प्रकरण, दंतेवाड़ा जिले में 5 प्रकरण, बस्तर तथा बलरामपुर जिले में 4-4 प्रकरण, गरियाबंद तथा मुंगेली जिले में 2-2 प्रकरण और बीजापुर, सुकमा तथा कोण्डागांव जिले में एक-एक प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने जीरो ईयर की खबर के बीच विभिन्न पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. आयोग ने अपनी वेबसाइट पर शनिवार को 199 पदों पर भर्ती विज्ञापन जारी किया है।
जिसमें डिप्टी कलेक्टर के लिए 15 और डीएसपी पद के लिए 25 पद और 5 पद बैकलाग के लिए निकाला है. वहीं अन्य पदों के लिए भी रिक्तियां जारी की गई है. आयोग ने परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि 6/12/2019 और अंतिम तिथि 04/01/2020 है. प्रारंभिक परीक्षा 9 फरवरी 2020 को दो पालियों में ली जाएगी. वहीं मुख्य परीक्षा 17, 18, 19, और 20 जून 2020 को ली जाएगी।
आपको बता दें पीएससी के जीरो ईयर को लेकर आई खबर ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया था. भाजपा ने सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर आरोप लगाए थे कि सरकार पीएससी की परीक्षा भी आयोजित नहीं कर पा रही है. विवाद के राजनीतिक रंग लेते देख सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि जीरो ईयर नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया और उसके बाद सभी विभागों में रिक्त पदों की जानकारियां मंगाई गई. जिसके बाद सीजी पीएससी ने जीरो ईयर होने का खंडन जारी किया था. अंततः पीएससी ने 199 पदों पर विज्ञापन जारी किया जिसके बाद जीरो ईयर को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लग गया है।