दिल्ली। हैकर्स ने वॉट्सऐप सुरक्षा में सेंधमारी के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है।
हैकर्स इन्फेक्टेड एमपी4 फाइल के जरिए यूजर्स के वॉट्सऐप अकाउंट हैकिंग कर रहे हैं। इस फाइल पर क्लिक करते ही हैकर वॉट्सऐप अकाउंट के डेटा चंद सकेंड में ही खंगाल लेते हैं।
खासतौर से बनाई गई यह एमपी 4 फाइल, यूजर के फोन में पहुंचते ही कोड एक्सीक्यूट करती है और हैकर तक फोन का डेटा पहुंचा देती है। भारत की कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (Cert-in) के सेंधमारी के इस तरीके को बेहद खतरनाक बताते हुए यूजर्स को ऐप अपडेट करने की सलाह दी है।
टीम ने इस बग की पहचान सीवीई-2019-11931 के रूप में की। यह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों तरह के डिवाइस में नुकसान पहुंचा सकता है। वॉट्सऐप ने इससे निपटने के लिए एक सिक्योरिटी अपडेट जारी कर दिया है।
रविवार को वॉट्सऐप ने कहा कि हम लगातार अपनी सर्विस की सिक्योरिटी को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हमने गंभीर मुद्दों को देखते हुए एक पब्लिक रिपोर्ट तैयार की है, जिसे ठीक करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया कि जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस बग के कारण किसी को नुकसान हुआ है।
भारत में वॉट्सऐप के लगभग 40 करोड़ यूजर्स है। कुछ दिन पहले इजराइल के एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाए गए पेगासस स्पाईवेयर के कारण वॉट्सऐप सुर्खियों में था।
आरोप था कि कंपनी ने पेगासस स्पाईवेयर के जरिए दुनियाभर के 1400 वॉट्सऐप यूजर्स के स्मार्टफोन में सेंधमारी की गई। इसमें लगभग 120 भारतीय यूजर्स शामिल थे।
Author: Sunil Agrawal
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सावधान! MP4 फाइल के जरिए हो रहा वॉट्सऐप अकाउंट हैक
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वकील साहब ! अब दो साल तक करिये प्रैक्टिस तभी मिलेगा हाईकोर्ट में वकालत का मौका, अगले साल से नया नियम लागू
दिल्ली। वकालत के पेशे में ज्यादातर वकील ऐसे हैं जिन्हें कानून और वकालत की गंभीर समझ नहीं है. इसे दुरुस्त करने के लिए बार काउंसिल आफ इंडिया कड़े कदम उठाने जा रही है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कई कड़े और बड़े फैसले लिये हैं ताकि वकालत के पेशे का स्तर सुधारा जा सके. अब वकीलों को निचली अदालतों में दो साल तक वकालत करनी होगी तबी वे हाईकोर्ट में वकालत कर सकेंगे।इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के लिए दो साल तक हाईकोर्ट में वकालत का अनुभव लेना जरूरी होगा. बीसीआई ने फैसला लिया है कि नियमित वकालत नहीं करने वाले वकील बार एसोसिएशन या बार काउंसिल का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने इस बारे में निर्देश जारी करते हुए कहा कि मार्च 2020 से ये नियम लागू हो जाएंगे. जनवरी 2020 में सभी बार काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सुधारों पर अंतिम मुहर लगेगी।
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राज्य सरकार के सचिव निरंजन दास सहित दो अधिकारियों ने की हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना, न्यायालय ने भेजा अवमानना नोटिस
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने आबकारी सचिव निरंजन दास सहित एक जिला आबकारी अधिकारी को अवमानना की नोटिस जारी किया है. न्यायालय ने दोनों अधिकारियों से नोटिस पर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के मुताबिक 13 सितंबर 2019 को बलौदाबाजार में पदस्थ आबकारी आरक्षक नंदकुमार डहरिया के तबादले का आबकारी सचिव ने आदेश जारी किया था. अपने तबादला आदेश को डहरिया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अपनी रिट याचिका में डहरिया ने कहा था कि वे आबकारी आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं. जिसका नियुक्तिकर्ता अधिकारी जिला आबकारी अधिकारी है एवं यह जिला स्तर का पद है, अन्य जिले में स्थानांतरण किये जाने से याचिकाकर्ता की सीनियरिटी एवं प्रमोशन प्रभावित होगा. इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के स्थानांतरण पर स्थगन (स्टे) आदेश जारी किया था।
हाईकोर्ट द्वारा स्थगन (स्टे) आदेश जारी किये जाने के बावजूद भी आबकारी सचिव, निरंजन दास एवं जिला आबकारी अधिकारी, जिला-बलौदाबाजार, नवीन प्रताप कंवर द्वारा आदेश की अवहेलना कर याचिकाकर्ता को ज्वाइनिंग प्रदान नहीं की गई. जिससे क्षुब्ध होकर नंदकुमार डहरिया द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से पुनः अवमानना याचिका दायर की. न्यायालय ने उक्त अवमानना याचिका को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए आबकारी सचिव, निरंजन दास एवं जिला आबकारी अधिकारी, बलौदाबाजार – नवीन प्रताप कंवर को अवमानना नोटिस जारी कर तत्काल उच्च न्यायालय, बिलासपुर के समक्ष जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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सिक्योरिटी गार्ड के सामने अचानक जींस उतारने लगी ये लड़की, जानिए फिर क्या हुआ…
दिल्ली। दुनिया भर में आए दिन कहीं न कहीं चोरियां होती ही रहती हैं. इसी बीच कुछ चोरों की चोरियां अनोखी होती है और वायरल भी हो जाती है. कुछ ऐसा ही वीडियो एक बार फिर हमारे हाथ लगा है. इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक महिला चोर को शॉपिंग स्टोर से चोरी करते रंगे हाथों पकड़ लिया गया है. इस घटना की पूरी रिकॉर्डिंग वहां मौजूद किसी शख्स ने की और इसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस चोरी में अनोखा क्या है।यह पूरी घटना वेनेजुएला की है. वीडियो में सुरक्षाकर्मियों ने एक महिला को कपड़ों की दुकान से कई जीन्स चोरी करने के आरोप में पकड़ा है. महिला को दुकान से कुल 8 जोड़ी जींस चुराते हुए पकड़ा गया हैं. वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि महिला ने सभी 8 जोड़ी जींस को एक के उपर एक पहना हुआ है. सुरक्षाकर्मियों के कहने पर महिला एक-एक करके सभी जींस को उतारती है. इस वीडियो को देखकर लोगों के होश उड़ गए।
इस वीडियो को वॉशरूम के अंदर फिल्माया गया है. वीडियो में एक व्यक्ति को जींस की संख्या गिनते हुए सुना जा सकता है. हालांकि बाद में महिला को छोड़ दिया जाता है. अभी तक महिला की पहचान नहीं हो सकी है और ये भी पता नहीं चल सका है कि आखिर यह घटना कहा की है।
इंटरनेट पर अपलोड होने के बाद से इस वीडियों को लगभग 4.2 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है. यह पहली बार नहीं है कि एक असफल डकैती ने सोशल मीडिया पर लोगों को एंटरटेन किया है. अगस्त महीने में कुछ ऐसा ही तीन महिलाओं के साथ भी हुआ था. इस दौरान वो अपनी चोरी की योजना में असफल हो गईं थी. महिलाओं की यह चोरी इसलिए पकड़ी गई थी क्योंकि उनमें से एक महिला अपने बच्चे को दुकान के अंदर भूल गई और जब वह उसे वापस लेने गई तो उनकी चोरी पकड़ी गई।
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उपराज्यपाल किरण बेदी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस करेंगे मुख्यमंत्री नारायणसामी
पुडुचेरी। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी उपराज्यपाल किरण बेदी के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस करेंगे। नारायणसामी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किरण बेदी अधिकारियों को डरा-धमका कर उन मामलों में हस्तक्षेप कर रही हैं, जिन में उन्हें दखल का अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बेदी मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर रही हैं, जबकि मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल के फैसले में उन्हें सरकार के कामकाज में दखल न देने के लिए कहा था। अफसरों के साथ स्थिति का जायजा ले रहीं उपराज्यपाल
पुडुचेरी में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश के चलते ज्यादातर इलाकों में हालात खराब हुए हैं। ऐसे में उपराज्यपाल किरण बेदी खुद ही प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। वे अब तक अफसरों के साथ राजनिवास से रेनबो नगर, कृष्णा नगर, इंदिरा गांधी स्क्वेर और नतेसन नगर का पैदल दौरा कर चुकी हैं। नारायणसामी ने कहा कि बेदी अधिकारियों को खुलकर काम नहीं करने दे रहीं। इसलिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका लगाई जाएगी। क्या था मद्रास हाईकोर्ट का उपराज्यपाल बेदी को आदेश
इसी साल फरवरी में नारायणसामी और बेदी का विवाद शुरू हुआ था। बेदी ने प्रशासन से अपील की थी कि दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। इस पर सरकार ने कहा कि पहले जागरूकता फैलाएंगे, फिर इसे अलग-अलग चरणों में लागू करेंगे। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया। नारायणसामी का आरोप है कि उपराज्यपाल सरकार के रोज के कामकाज में भी दखल दे रही हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने दोनों के बीच विवाद में दखल देते हुए साफ किया था कि पुडुचेरी की उपराज्यपाल के पास केंद्रशासित प्रदेश की रोजाना की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। प्रशासनिक कामों को लेकर मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल में विवाद
नारायणसामी ने कुछ ही दिन पहले केंद्र सरकार पर अपने प्रति दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र जब चाहता है तब अपनी सुविधा के अनुसार हमें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे देता है। पुडुचेरी की हालत दिल्ली जैसी हो गई है। यह उन केंद्र शासित प्रदेशों की परेशानी है, जिनमें विधानसभा है। इससे अच्छा तो वह (केंद्र) पुडुचेरी को ट्रांसजेंडर घोषित कर दें। इस पर उपराज्यपाल किरण बेदी ने नारायणसामी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पुडुचेरी की जरूरतों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। यह केंद्र की साफ, गौर करने वाली, असंशोधित और निगरानी वाला मार्गदर्शन है, जिसकी वजह से पुडुचेरी प्रशासन अपने लोगों को जरूरी सेवाएं मुहैया करा पा रहा है। -

पत्नी ने कहा स्विटजरलैंड में श्रीदेवी की तरह साड़ी लहराने की फोटो शूट नहीं करा सके तो तुम्हारे संग क्या रहना?
दिल्ली. गाजियाबाद के एक युवा कारोबारी ने पत्नी की कई अनचाही मांग से परेशान होकर तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. तलाक की अर्जी में पति ने कहा कि पत्नी कहती है कि जब ‘चांदनी’ फिल्म की तरह स्विटजरलैंड में स्नो फॉल में साड़ी लहराने की फोटो शूट नहीं करा सके तो तुम्हारे संग क्या रहना?शादी से पहले से ही मेरी यह इच्छा थी. पति ने अपनी पत्नी पर हर छोटी-छोटी बातों पर लड़ने और मतलब निकालने का आरोप लगाया है. नेहरू नगर में रहने वाले एक युवा लोहा कारोबारी की शादी नवंबर 2016 में एटा में हुई थी. युवती शिक्षित और ब्यूटीशियन है. पहले वह हैदराबाद में रहती थी. अदालत में पति द्वारा दिए तलाक की अर्जी में कहा गया कि वह शादी के बाद हनीमून के लिए दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्र का पैकेज लिया था. पत्नी के संग टूर करके लौटा।
आरोप है कि पत्नी इसके बाद से तरह-तरह के ताने देकर क्लेश करने लगी. पत्नी हनीमून के लिए स्विटजरलैंड जाकर स्नो फॉल के बीच श्रीदेवी की तरह साड़ी में फोटो खिंचवाना चाहती थी. उसका कहना है कि पत्नी ने शादी से पहले से इसका सपना संजोया था. पति का आरोप है कि इस सपने के पूरा नहीं होने पर वह घर में क्लेश रखने लगी. जरा सी बातों पर ताना सुनाकर लड़ने-झगड़ने लगी. पति का आरोप है कि साथ रहने पर वह हमेशा छोटी बातों पर क्लेश रखती थी।
कई बार समझाने के बाद भी नहीं सुनती और न ही पारिवारिक स्थिति समझने की कोशिश करती है. कई बार उसे एटा की जेल में भिजवाने की धमकी तक देती है. इसी बीच पत्नी करीब साल भर से मायके चली गई. कई बार लाने की कोशिश बेकार होने पर उत्पीड़न से परेशान होकर पति ने तलाक दिलाए जाने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई है. अदालत ने अर्जी पर सुनवाई के लिए 18 दिसंबर तारीख लगाई है. उधर, पत्नी की ओर से भी एटा की अदालत में पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया है।
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डीजीपी डीएम अवस्थी भी होंगे शामिल,पुणे में तीन दिवसीय डीजीपी कॉंफ्रेंस का आयोजन…
रायपुर। पुणे में तीन दिन के लिए डीजीपी कॉफ्रेंस का आयोजन किया गया है. जिसमें छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी भी शामिल होंगे. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शिरकत करेंगे। इस सम्मेलन का आयोजन शहर के पाषण इलाके में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में किया जाएगा. 6 से 8 दिसंबर के बीच होने वाले तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर के शीर्ष पुलिस अधिकारी, केन्द्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी शरीक होंगे. अमित शाह कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को और प्रधानमंत्री मोदी समापन सत्र को संबोधित कर सकते हैं। -

बस्तर के दो डिप्टी कलेक्टरों को जान से मारने की धमकी देने वाला शख्स मुंबई से गिरफ्तार
जगदलपुर। बस्तर जिले में महिला अफसर समेत दो डिप्टी कलेक्टरों के मोबाइल पर कॉल कर अश्लील गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में बोधघाट पुलिस ने एक आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि उसने दोनों डिप्टी कलेक्टर को जान से मारने की धमकी किस वजह से दी, इस बारे में आरोपी युवक से पुलिस पूछताछ कर रही है। बोधघाट थाना प्रभारी सुरेंद्र बघेल ने बताया कि आरोपी का नाम मनीष तिवारी है, जो कि उत्तर प्रदेश के अजयपुर भदोही का रहने वाला है. बीते 21 नवंबर को जिला प्रशासन के दो डिप्टी कलेक्टर माधुरी सोम और गोकुलराम रावटे के फोन पर इसने अश्लील गाली गलौज करते जान से मारने की धमकी दी थी और टेक्स्ट मैसेज किया था. दोनों अधिकारियों की शिकायत पर थाना बोधघाट में साइबर एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया था.मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आरोपी का लोकेशन ट्रेस किया. जिसके बाद बोधघाट पुलिस की एक टीम ने आरोपी मनीष तिवारी को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी सिरफिरा होने की वजह से नंबरों को इंटरनेट के माध्यम से निकाल कर उन्हें फोन करके गाली गलौज और धमकी देता था. फिलहाल बस्तर के इन दो अधिकारियों को इस तरह की गाली गलौज कर धमकी देने की वजह पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है. इधर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ साइबर एक्ट के तहत और जान से मारने की धमकी के मामले में कार्रवाई कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है। -

हर साल 17 करोड़ रुपये की होगी बचत,सांसदों को लजीज खाने पर मिलने वाली सब्सिडी होगी खत्म….
दिल्ली। संसद में सांसद अब औने-पौने दाम पर लजीज-जायकेदार खाने का लुत्फ नहीं उठा पाएंगे. संसद की कैंटीन में खाने पर मिलने वाली सब्सिडी अब खत्म होने जा रही है. अब सांसदों को खाना का पूरा दाम देना होगा याने कि बगैर सब्सिडी के उन्हें दाम चुकाना होगा. ऐसा करने से हर साल सरकारी खजाने में 17 करोड़ रुपये की बचत होगी। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सांसदों के सामने यह सुझाव रखा था, जिसे सभी सांसदों ने एकमत में स्वीकार कर लिया. स्पीकर ने बताया कि सांसदों को संसद की कैंटीन से जो खाना दिया जाता है, सरकार की तरफ से हर साल उस पर 17 करोड़ की सब्सिडी दी जाती है.
आपको बता दे सांसदों को अभी संसद की कैंटीन में 2 रुपये में रोटी, 35 रुपये में वेज थाली, 5 रुपये में कॉफी, 40 रुपये में मछली, 50 रुपये में चिकन डिश, 60 रुपये में चिकन तंदूरी और 65 रुपये में बिरयानी मिलता है।
गौरतलब है कि हाल ही में जेएनयू समेत देश के कई बड़े शिक्षण संस्थानों में सरकार द्वारा बेतहाशा फीस वृद्धि किये जाने के बाद हर जगह से विरोध के तेज स्वर उभरे थे. शिक्षा के बजट में कटौती और सांसदों के खाने पर सब्सिडी को लेकर छात्रों ने सवाल खड़े किये थे. जिसके बाद एक बार फिर से सांसदों को खाने में मिलने वाली सब्सिडी सुर्खियों में आ गई थी. जिसकी सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच जमकर आलोचना की गई थी। -

उठ रहे दो सवाल- पहला क्या क़ानून से भरोसा हट गया, और दूसरा सवाल -हैदराबाद एनकाउंटर से ठीक दस बरस पहले भी हुआ था कुछ ऐसा.. क्या केवल संयोग है कि तब SP वही थे.. जो आज हैदराबाद कमिश्नर है
रायपुर,6। हैदराबाद में एनकाउंटर की खबर के बाद भीड़ तंत्र इस एनकाउंटर का स्वागत कर रहा है,इस भीड़ में हर वर्ग का प्रतिनिधि चेहरा शामिल है। फिर वो साहित्यकार हों या रोज़ ऑफिस में काम करती कोई युवती हो..चौक पर ट्रेफ़िक सम्हालती महिला कर्मी हो या कॉलेज जाता युवा समुह। जैसा ज़बर्दस्त समर्थन और ज़िंदाबाद मिल रहा है वो गजब ही है।भीड़ नारा लगा रही है कि “पुलिस ज़िंदाबाद न्याय हो गया”
।और यहीं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह बिलकुल फ़िल्मी डायलॉग है कि, आप पुलिस को कहें कि इंसाफ हो गया।CRPC और IPC से चलने वाली पुलिस का काम इंसाफ करना नहीं है, विवेचना करते हुए वास्तविक दोषी को अदालत पहुँचाना है। न्याय देने का काम अदालत का है। संविधान से चलने वाले इस देश में संस्थाएँ यदि अतिक्रमण कर जाएँगी तो आख़िरकार होगा कैसे। यह घटनाएं क्या वह ख़तरनाक तस्वीर नही तय कर रही हैं कि आप यह मानने को सार्वजनिक रुप से स्वीकार कर लें कि न्यायिक प्रणाली में न्याय पाना त्रुटियों से भरपुर है।यह बिलाशक ख़तरनाक तस्वीर है। एक बारगी मान लें कि न्यायिक प्रणाली में कुछ ख़ामियाँ हैं तो क्या करें कि, उस बहाने बाक़ी संस्थानों को कुछ भी तय करने की इजाज़त दे दें।या कि ख़ामियाँ दूर करें। न्यायिक प्रणाली पर उंगली उठाने के पहले उन कई हज़ार मामलों को याद रखना होगा जहां नक्सली आतंकवादी बता कर पकड़ा गया और बारहों साल बाद वे निर्दोष रिहा हुए।यदि आप यह व्यवस्था स्वीकारते हैं तो फिर सलवा जूडुम के दौरान हुई हर हत्या हर बलात्कार और बस्तियों की बस्ती राख कर देने को भी क्या सही मान लिया जाना चाहिए।
फ़िल्में अच्छी लगती हैं, ऐसे सीन बेहतर लगते हैं लेकिन वो फ़िल्में हैं। किसी सूरत महिला हो या पुरुष किसी नागरिक को नागरिक कर्तव्यों की अवहेलना की इजाज़त नहीं है। बलात्कार यौन हमले अस्वीकार हैं, लेकिन यह अंदाज कैसे स्वीकार हो।भावनाओं से चलने वाले इस देश में पाषाण प्रतिमा करोड़ लीटर दूध पी जाती है।कई पीर फ़क़ीर के नाम पर ज़मीनें क़ब्ज़ा ली जाती हैं।और उस पर कहना खुद की “हाराकीरि” कराना है, लेकिन कहना तो पड़ेगा न।क्या पुलिस की बताई एनकाउंटर की स्टोरी सच्ची है ? तो जरा ठहरिए कुछ जान लीजिए और बेहतर शायद समझ बन पाएगी। हैदराबाद के कमिश्नर का नाम है सी वी सज्जनगर। वर्ष 2008 में वारंगल में पुलिस ने इंजीनियरिंग कॉलेज की दो छात्राओं पर तेज़ाब फेंकने के आरोप में तीन लोगों को एनकाउंटर में मारा था,मरने वालो के नाम थे -एस श्रीनिवास राव,पी हरिकृष्ण और डी संजय। उस वक्त इस घटना की मीडिया रिपोर्ट बताती है कि हज़ारों लोगों ने जिनमें ज़्यादातर छात्राएँ थीं वारंगल के तत्कालीन कप्तान के घर के बाहर जाकर उन्हें माला देने मिठाई खिलाने के लिए क़तार पर लगी थी, उस दौरान कई युवाओं ने उस कप्तान को कंधे पर उठा लिया था। इस एसपी को इस एनकाउंटर का प्रणेता माना गया था, और यह एसपी वही सी वी सज्जनगर थे, जो आज हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर हैं।
वारंगल पुलिस के रिकॉर्ड में ऐसी दो घटनाएं और दर्ज हैं जिनमें चार दिसंबर 2007 को बच्ची के अपहरण और हत्या केआरोपियों का एनकाउंटर हुआ था और उसी बरस ठीक एक महिने पहले एक हिस्ट्रीशीटर और उसका सहयोगी एनकाउंटर में मारा गया।सुबह साढ़े तीन बजे आरोपियों को “सीन ऑफ़ क्राइम” ले ज़ाया गया जहां एक आरोपी ने कथित तौर पर बंदूक़ छिनी और शेष ने हमला कर भागने की क़वायद की, यदि वे भागते तो पुलिस के लिए बेहद अप्रिय स्थिति होती, रोकने के दौरान कथित रुप से हमला हुआ और आत्मरक्षा में गोली चली जिसमें चारों मारे गए।“पोलिस ज़िंदाबाद न्यायम दोरिकिंदी”और तमाम तारीफ़ों के शब्द जिससे सोशल मीडिया लहालोट है क्या इन तारीफ़ों को हम अपने न्यायिक व्यवस्था की समाप्ति या विश्वास का दरकना समझें .. और क्या यह समझना डरावना नहीं है।और आख़िर में जिस नृशंसता से महिला चिकित्सक को मारा गया, वह सहमाता है और शर्मिंदा भी करता है।यह ध्यान भी रखना होगा आरोपियों में कोई रईस नहीं था.. किसी का जबर पॉलिटिकल प्रोफ़ाइल नहीं था.. इनके ख़िलाफ़ साक्ष्य जुटा कर पेश करने और न्यायालय से सजा दिलाने में कोई दिक़्क़त भी नहीं थी। जाने मुझे क्यों गोपाल कांडा और उत्तर प्रदेश के कुलदीप सेंगर समेत कई नाम याद आ रहे हैं। जो नाम मैंने लिखे हैं ऐसी दिलेरी ऐसी बहादुरी जो हैदराबाद में कथित तौर पर दिखाई गई, क्या उन नामों पर अजमाई जा सकती थी ?पूरी दृढ़ता से बलात्कार करने वालों को कठोरतम दंड दिया जाना ही चाहिए.. दंड का काम न्यायालय का है.. पुलिस का काम अभियुक्त को तलाशना और उसके विरुद्ध वास्तविक साक्ष्य प्रस्तुत करना है.. क्योंकि नागरिक और देश की हर संस्था को केवल और केवल संविधान से ही चलना होगा।