Author: Sunil Agrawal

  • सुप्रीम कोर्ट के जज को मांगनी पड़ी वकीलों से दंडवत होकर माफी…

    सुप्रीम कोर्ट के जज को मांगनी पड़ी वकीलों से दंडवत होकर माफी…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसे देखकर हरकोई हैरान रह गया. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जज को वकीलों के भारी विरोध के बाद उनसे दंडवत होकर माफी मांगनी पड़ी।

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरुण मिश्रा अपने बर्ताव के चलते वकीलों के निशाने पर थे. उनके बुरे बर्चाव की शिकायतें कई वकील बार में कर चुके थे. आखिरकार एक सीनियर वकील को उन्होंने बहस के दौरान अवमानना करने की धमकी दे दी जिसपर खफा होकर सीनियर एडवोकेट ने उनकी अदालत का बायकाट कर दिया. इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार ने कड़ा ऐतराज जताया. जिसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा को वकीलों से माफी मांगनी पड़ी।

    उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनकी बात से किसी वकील को बुरा लगा हो तो वह बार के हर सदस्य से ‘दंडवत’ होकर माफी मांगते हैं. वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई वकीलों ने जस्टिस मिश्रा से बार के सदस्यों के साथ विनम्र रवैया अपनाने की अपील की थी।

  • IAS एसोसिएशन ने दिवंगत IAS उइके के परिवार से एक सदस्य को नौकरी देने की मांग, विदेश दौरे पर कहा- निजी खर्च और छुट्टी पर जाने का पूरा अधिकार

    IAS एसोसिएशन ने दिवंगत IAS उइके के परिवार से एक सदस्य को नौकरी देने की मांग, विदेश दौरे पर कहा- निजी खर्च और छुट्टी पर जाने का पूरा अधिकार

    रायपुर। छत्तीसगढ़ आईएएस एसोसिएशन की सामान्य सभा की बैठक शनिवार को मंत्रालय में की गई. बैठक में सदस्यों ने कहा कि हाल ही में आईएएस अधिकारियों की निजी विदेश यात्राओं को लेकर प्रकाशित खबर के संबंध में तथ्यों को मीडिया ने सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे इस संबंध में आम जनता द्वारा यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि कुछ अधिकारी विदेश यात्राओं के शौकीन हैं, जबकि आज के युग में सभी को अपने निजी व्यय से अवकाश पर जाने या भ्रमण करने का पूरा अधिकार है।

    यह भी स्पष्ट है कि यदि आईएएस अधिकारी निजी विदेश यात्रा पर गये हैं. तो उन्होंने इसकी विधिवत अनुमति भी ली है. कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जिनके परिवार के सदस्य वर्तमान में विदेश में कार्यरत हैं तथा उनको निजी व्यय से परिवार के साथ मिलने जाने का पूरा अधिकार है. मीडिया से अपेक्षा है कि तथ्यों को इस तरह प्रस्तुत नहीं करना चाहिए जिससे आईएएस अधिकारियों के व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना माना जाये और इससे भारतीय प्रशासनिक सेवा की छवि धूमिल हो. एसोसिएशन ने यह निवेदन  किया कि किसी अधिकारी के बारे में तथ्यों की व्याख्या करने के पहले संबंधित अधिकारी का वक्तव्य भी ले लिया जाये, ताकि उक्त अधिकारी की बात जनता के बीच आ जाए।

    गौरतलब है कि सामान्य सभा की अध्यक्षता सीके खेतान ने की. वरिष्ठ अधिकारियों में आर पी. मण्डल, अमिताभ जैन, सुबत साह, निहारिका बारीक, सुबोध सिंह, डी.डी. सिंह, कमलप्रीत सिंह, अविनाश चम्पावत, रीता शांडिल्य उपस्थित थे. सबसे पहले एसोसिएशन ने उनके एक सदस्य चंद्रकांत उईके के असामयिक निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और यह प्रार्थना की गई कि ईश्वर उनके परिवार को इस संकट की घड़ी में संबल प्रदान करे।

    सहयोग राशि करेंगे जमा  

    एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से यह भी निवेदन किया जाए कि उनके परिवार के किसी एक सदस्य को उचित राजपत्रित अधिकारी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए. साथ ही एसोसिएशन ने निर्णय लिया कि स्व. चंद्रकांत उईके के पुत्र, जो अभी 12वीं कक्षा में अध्ययनरत् हैं, उनकी उच्च शिक्षा के लिए धनराशि की सहायता दी जाए. एसोसिएशन के सभी सदस्य इस उद्देश्य के लिए अपनी तरफ से सहयोग राशि इकट्ठा करें, जो उनके पुत्र के नाम से सावधि जमा के रूप में रख दिया जाए, ताकि उनका पुत्र आवश्यकता पड़ने पर राशि का उपयोग कर सके. इसके बाद सामान्य सभा में एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2018-19 के लेखा को अनुमोदित किया गया. उक्त लेखा चार्टर्ड एकाउंट द्वारा ऑडिट किया गया।

    किसी भी तरह की छानबीन के लिए हमेशा तैयार

    एसोसिएशन ने कहा कि आईएएस सेवा के अधिकारियों की सेवा में पूर्ण पारदर्शिता और अधिकारियों के जिम्मेदार व्यवहार का पक्षधर है. एसोसिएशन इस बात में भी विश्वास रखता है कि देश की सर्वोच्च सेवा होने के नाते छत्तीसगढ़ के सभी आई.ए.एस. अधिकारी किसी भी तरह की प्रशासनिक समीक्षा या छानबीन के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन मीडिया से इस बात का ख्याल रखने की अपेक्षा है कि किसी अधिकारी की निष्ठा, प्रतिष्ठा एवं छवि बेवजह धूमिल न हो.एसोसिएशन द्वारा प्रशासन अकादमी, छत्तीसगढ़ से यह भी अनुरोध करने का निर्णय लिया गया कि परिवीक्षाधीन आई.ए.एस. अधिकारियों को एक सप्ताह के मंत्रालय के परिचयात्मक मॉड्यूल प्रशिक्षण में आवश्यक रूप से शामिल किया जाए, ताकि उन्हें मंत्रालयीन कामकाज का ज्ञान हो सके

  • सोशल मीडिया यूज करना है तो सरकार से कराना पड़ेगा वैरिफकेशन, सरकार संसद में पेश करने जा रही है प्रस्ताव

    सोशल मीडिया यूज करना है तो सरकार से कराना पड़ेगा वैरिफकेशन, सरकार संसद में पेश करने जा रही है प्रस्ताव

    दिल्ली। अब आप अगर सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं तो खबरदार हो जाइए क्योंकि अब आपको सोशल मीडिया यूज करने से पहले उसका वैरिफिकेशन सरकार से कराना पड़ेगा. सरकार संसद के इसी सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश करने वाली है।

    अब देश के करोड़ों यूजर्स जो कि सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं उनको अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ेगा. सरकार ससंद के इसी सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश करने वाली है. बिल के पास होने पर व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे एप का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को पहले सरकारी एजेंसी से अपने अकाउंट का वेरिफिकेशन कराना होगा. उसके बाद ही उसका अकाउंट चालू हो पाएगा।

    सरकार के सूत्रों का कहना है कि वह इस बिल को इसलिए लेकर आ रही है ताकि फेक न्यूज पर रोक लगाई जा सके. अब सोशल मीडिया यूजर्स को अपनी केवाईसी करानी पड़ेगी.

  • उच्च न्यायालय ने महिला आयोग के सचिव को दिया नोटिस, कहा- क्यों न आपके विरुद्ध अवमानना की हो कार्यवाही, जानिए क्या है मामला…

    उच्च न्यायालय ने महिला आयोग के सचिव को दिया नोटिस, कहा- क्यों न आपके विरुद्ध अवमानना की हो कार्यवाही, जानिए क्या है मामला…

    बिलासपुर। महिला आयोग में कार्यकाल खत्म होने से पहले ही तीन सदस्यों को हटाए जाने के मामले में उच्च न्यायालय ने आयोग के सचिव को नोटिस जारी किया है. इसमें उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना व अवमानना की कार्यवाही की बात कही गई है।

    उच्च न्यायालय ने  2 मई 2019 को आयोग की तीन सदस्यों को कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व के बर्खास्त किए जाने के आदेश को दरकिनार करते हुए बर्खास्तगी दिनांक से समस्त बकाया देयकों को प्रदान कर पुनर्स्थापित करने का आदेश पारित किया था. एकल पीठ के इस आदेश पर शासन ने रिट अपील में भी चुनौती दी थी, जिसे युगल पीठ ने खारिज कर दिया था।

    युगल पीठ के याचिका खारिज किए जाने के बाद भी बकाया का भुगतान नहीं किए जाने से क्षुब्ध पदमा चंद्राकर ने उच्च न्यायालय के एकल पीठ में अवमानना याचिका दायर की. इस याचिका पर पीठ ने शुक्रवार को राज्य महिला आयोग के सचिव अभय देवांगन को नोटिस जारी किया है कि क्यों न उनके विरुद्ध उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं अवमानना की कार्यवाही की जाए।

  • हर ‘थाने’ में बनेगी ‘महिला डेस्क’ 100 करोड़ रुपये जारी,रेप की बढ़ती घटनाओं के बाद सरकार का बड़ा फैसला…

    हर ‘थाने’ में बनेगी ‘महिला डेस्क’ 100 करोड़ रुपये जारी,रेप की बढ़ती घटनाओं के बाद सरकार का बड़ा फैसला…

    दिल्ली। देश में महिलाओं के खिलाफ लगातार अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं. जिनको रोकने में सरकार और प्रशासन बुरी तरह से नाकाम रहा है. अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

    केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने कहा है कि देश के सभी थानों में महिला डेस्क बनाई जाएंगी. गृह मंत्रालय सभी थानों को निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपये देगा. यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगी।

    गृह मंत्रालय ने देशभर के सभी पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क बनाने की मंजूरी दे दी है. इसके बाद देश के हर थाने में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी. इससे महिलाओं से जुड़े अपराधों से निपटने में मदद मिलेगी और महिलाओं को तेजी से न्याय दिलाया जा सकेगा.

  • ये हैं देश के सबसे भ्रष्ट राज्य…

    ये हैं देश के सबसे भ्रष्ट राज्य…

    दिल्ली। देश में करप्शन सबसे बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है. सरकारें इसको रोकने में बुरी तरह से नाकाम रही हैं. ऐसे में एक निजी संस्था ने देश के करप्ट राज्यों की रैंकिंग जारी की है. जो कि हर साल की तरह इस साल भी बता रही है कि कौन से राज्य देश में सबसे करप्ट हैं।

    इंडियन करप्शन सर्वे 2019 की रिपोर्ट में देश के सबसे भ्रष्ट राज्यों की लिस्ट जारी की गई है. इस लिस्ट में बताया गया है कि देश का सबसे करप्ट राज्य कौन सा है. इंडियन करप्शन सर्वे 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान देश का सबसे करप्ट राज्य है।

    इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर लालू यादव के लंबे समय तक कुशासन का शिकार रहा बिहार है जबकि छोटा सा राज्य झारखंड नंबर तीन पर है. वहीं देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश नंबर चार पर है जबकि तेलंगाना का नाम पांचवें स्थान पर है. गुजरात, केरल, गोवा और हरियाणा देश के सबसे कम करप्ट राज्यों में से एक हैं।

  • एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने से मौत’ संचालक डॉ गोयल गिरफ्तार, भारी हंगामे के चलते भारी पुलिस बल तैनात और धारा 144 लागू

    एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने से मौत’ संचालक डॉ गोयल गिरफ्तार, भारी हंगामे के चलते भारी पुलिस बल तैनात और धारा 144 लागू

    रायपुर। राजधानी रायपुर के समता कॉलोनी स्थित गोयल अस्पताल में युवती को एक्सपायरी डेट वाला इंजेक्शन लगाने से युवती की मौत हो गयी है। जिसके चलते आक्रोश में सैकड़ों लोगों ने अस्पताल को घेर लिया। जिसके कारण पुलिस ने डॉक्टरों को सुरक्षित किया।  बढ़ईपारा निवासी 30 वर्षीय युवती को हल्का सर्दी बुखार की शिकायत के बाद परिजन गोयल अस्पताल लेकर गये थे। जहाँ पैडिकोर इंजेक्शन एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाते ही युवती का शरीर नीला पड़ गया और थोड़ी देर में युवती की मौत हो गयी।

    https://youtu.be/a5LQG3u5npE

    परिजनों ने अस्पताल प्रशाशन पर लापरवाही का आरोप लगे है साथ ही अस्पताल प्रबंधन के अड़ियल रवैये को लेकर भी लोग नाराज़ हो गए है। भीड़ के उग्र रवैये को लेकर नाराज़ डॉक्टर एकजुट हो रहे है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन का अड़ियल रवैये बना हुआ है तथा वह ऐसी किसी भी लापरवाही से इंकार कर रहा है। शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच कर रही है। भीड़ के उग्र रवैये को लेकर नाराज़ डॉक्टर एकजुट हो रहे हैं। डॉक्टर्स एसोशिएशन ने राजधानी के सभी निजी अस्पतालों में काम बंद करने की चेतावनी दी है। डॉक्टर राकेश गुप्ता ने अस्पताल को भारी पुलिस सुरक्षा देने और घटना की जांच करने की मांग की है।

    आचार संहिता लागू होने और माहौल तनावपूर्ण होने के चलते समता कॉलोनी में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है वहीं धारा 144 भी लागू कर दिया गया है। थाने के अंदर ही डॉक्टर्स बैठ गए हैं जबकि बाहर लोग मौजूद है।

  • एक्सपायरी डेट इंजेक्शन से युवती की मौत का मामला : प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज बंद करने का लिया फैसला, थाने में जमाया डेरा

    एक्सपायरी डेट इंजेक्शन से युवती की मौत का मामला : प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज बंद करने का लिया फैसला, थाने में जमाया डेरा

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्राइवेट अस्पताल में एक्सपायरी डेट की इंजेक्शन लगाने के बाद युवती की मौत हो गई थी. जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ और हंगामा किया था. इससे नाराज रायपुर के निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर मरीज़ों का इलाज बंद करने का फैसला लिया है।

    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तमाम सदस्य आज़ाद चौक थाना पहुंचे हुए है और हॉस्पिटल में हुए तोड़फोड़ का विरोध कर कार्रवाई करने की माँग की है. वहीं मृतक के परिजन भी थाना पहुंचे हुए है. डॉक्टर और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत की जा रही है।

    बता दें कि रायपुर के समता कॉलोनी स्थित गोयल अस्पताल में शुक्रवार दोपहर एक्सपाइरी डेट की इंजेक्शन लगाने से युवती की मौत हो गई थी. युवती की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में डॉक्टर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन करते हुए हंगामा किया था और तोड़फोड़ भी की थी.

  • दिशा’ को लेकर देश में उबाल के बीच राष्ट्रपति कोविंद का बड़ा बयान, पाक्सो एक्ट के दोषियों को नहीं हो क्षमा याचिका का अधिकार, संसद करे विचार…

    दिशा’ को लेकर देश में उबाल के बीच राष्ट्रपति कोविंद का बड़ा बयान, पाक्सो एक्ट के दोषियों को नहीं हो क्षमा याचिका का अधिकार, संसद करे विचार…

    रायपुर। महिलाओं के साथ बलात्कार और जलाकर मार दिए जाने की घटनाओं के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पाक्सो एक्ट में दोषी व्यक्तियों के लिए क्षमा याचिका का प्रावधान खत्म करने की बात कहकर नई बहस छेड़ दी है।

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को राजस्थान के सिरोही जिला स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत गंभीर मुद्दा है. इस बारे में बहुत काम किया गया है लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. लड़कियों पर आसुरी हमलों की घटनाएं देश की अंतरात्मा को झकझोर देती हैं. प्रत्‍येक माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह लड़कों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावनाओं का समावेश करे.राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि पाक्सो एक्ट के दोषियों को क्षया याचिका का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए. इस विषय पर संसद में विचार किए जाने की जरूरत है।

    राष्ट्रपति के इस बयान की पूरे देश में चर्चा हो रही है. ऐसे समय में जब घटना के 12 साल बाद भी निर्भया के दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है, राष्ट्रपति के इस बयान का महत्व काफी बढ़ गया है. बता दें कि जघन्य मामलों की तरह पाक्सो एक्ट में फांसी की सजा पाने वाले दोषी को क्षमा याचिका दाखिल करने का अधिकार है. लेकिन हैदराबाद में महिला वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुई घटना के बाद राष्ट्रपति के बयान से नए सिरे से विचार की उम्मीद जगी है।

  • हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक, एड्स पीड़ित बच्चियों के लिए संचालित संस्था को बंद करने का दिया था आदेश

    हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक, एड्स पीड़ित बच्चियों के लिए संचालित संस्था को बंद करने का दिया था आदेश

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में एकमात्र बिलासपुर स्थित एड्स पीड़ित नाबालिग बच्चियों की देखभाल करने वाली संस्था को बंद करने के सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले में आज हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए शासन के फैसले पर सोमवार तक रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी. जस्टिस पी. सैम कोशी की एकल पीठ में मामले की सुनवाई हुई। शासन ने ट्रस्ट पर जूएनाईल जस्टिस एक्ट के पालन ना करने का आरोप लगाया है. वहीं ट्रस्ट ने सरकार पर जवाब के लिए समय नहीं देने का आरोप लगाया है. इसी मामले को लेकर याचिकाकर्ता संजीव ठक्कर ने याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता संजीव ठक्कर की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के मुताबिक सरकार के फैसले से 15 नाबालिग बच्चियों पर प्रभाव पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार के फैसले से पीड़ित बच्चियां घबराई हुई हैं. क्योंकि छत्तीसगढ़ में एकमात्र बिलासपुर स्थित यह ट्रस्ट है, जहां इन बच्चों की देखभाल होती है।