Author: Sunil Agrawal

  • ‘TI की छुट्टी’ पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए TI की छुट्टी कर SP ने SI को सौंपा थाना…

    ‘TI की छुट्टी’ पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए TI की छुट्टी कर SP ने SI को सौंपा थाना…

    पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए टीआई को लाइन भेज दिया गया है. डभरा थाने के थाना प्रभारी अमित सिंह को हटा कर उनकी जगह उसी थाने में पदस्थ एसआई को थाना प्रभारी का चार्ज सौंपा गया है. अमित सिंह डभरा थाने के थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ थे. उन्हें आज एसपी ने सिंगल आदेश जारी कर हटा दिया. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीआई अमित सिंह 5 दिन की छुट्टी में गए थे. जिसके बाद उन्होंने 15 दिन की छुट्टी बढ़ाने के लिए फिर से आवेदन भेज दिया. नवंबर व दिसंबर माह में पुलिस पर थानों में दर्ज अपराधों के पेंडेंसी खत्म करने का दबाव होता है. ऐसे समय मे टीआई की छुट्टी बढ़ाने के चलते उनकी थाने से छुट्टी होने की चर्चा विभाग में है।

  • जज को याचिकाकर्ता ने बताया ‘आतंकवादी’, इस टिप्पणी से अदालत नाराज….

    जज को याचिकाकर्ता ने बताया ‘आतंकवादी’, इस टिप्पणी से अदालत नाराज….

    सुप्रीम कोर्ट के जज को ‘आतंकवादी’ कहने वाला याचिकाकर्ता मुश्किल में फंस गया है. शीर्ष अदालत ने ना सिर्फ नाराजगी जताई, बल्कि रजिस्ट्री विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया है और सख्त टिप्पणी की है. SC ने कहा- क्यों ना उस पर जज का ‘अपमान’ करने के लिए आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलाया जाए. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने याचिका कर्ता के आरोपों की निंदा की और कहा- ‘आपको कुछ महीनों के लिए जेल के अंदर भेजना होगा, तब आपको एहसास होगा.’ बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा- ‘आप सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ यूं ही कोई आरोप नहीं लगा सकते.’ Also Read – शादी के दो साल बाद पति को लगा ज्यादा है पत्नी की उम्र, दूसरी शादी करते पकड़ाया बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक पेंडिंग केस की जल्द सुनवाई की मांग को लेकर याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने फाइल देखने के बाद बेंच को बताया कि उसने याचिकाकर्ता से इस तरह के बयान देने के लिए बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. वकील ने कहा कि वह उसका प्रतिनिधित्व तभी करेगा, जब वह व्यक्ति बिना शर्त माफी मांगेगा. वहीं, याचिका कर्ता ने कहा- ‘मैं माफी मांगता हूं.’ उसने कहा कि जब मैंने याचिका के लिए आवेदन किया था, तब ‘जबरदस्त मानसिक आघात’ से गुजर रहा था. इस पर बेंच ने नाराजगी जताई और कहा- ‘ये निंदनीय है.’ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा- ‘हम आपको कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे और पूछेंगे कि क्यों ना आप पर आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलाया जाए.’ जज का इस कार्यवाही से क्या लेना-देना है? आप उन्हें आतंकवादी और अन्य चीजें कह रहे हैं. क्या ये एक न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाने का तरीका है? बेंच ने पूछा- सिर्फ इसलिए कि वह आपके राज्य से ताल्लुक रखते हैं? चौंका देने वाला है।

    बेंच ने कहा- ‘हम जल्द सुनवाई के लिए आवेदन पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं. आवेदन खारिज कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कहा- रजिस्ट्री याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी कि इस अदालत के एक जज को बदनाम करने के लिए उस पर आपराधिक अवमानना ​​​​का मुकदमा क्यों ना चलाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तीन सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. बेंच ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता ने बिना शर्त माफी मांगी है. अदालत को यह आकलन करने में सक्षम बनाने के लिए कि माफी वास्तविक है या नहीं, वह याचिकार्ता को अपने आचरण को समझाने के लिए हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दे रही है.

  • लोहे का पुल चुराने के बाद, सुरंग खोदकर चोरों ने चुरा लिया रेल का पूरा इंजन, बेच भी दिया और फिर जानें क्या हुआ…

    लोहे का पुल चुराने के बाद, सुरंग खोदकर चोरों ने चुरा लिया रेल का पूरा इंजन, बेच भी दिया और फिर जानें क्या हुआ…

    बिहार में चोरी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ रोहतास में लोहे का 500 टन वजनी पुल चुराने के पश्चात् चोरों ने दूसरी बड़ी घटना को अंजाम दिया है। चोरों ने अब सुरंग बनाकर पूरा का पूरा रेल इंजन ही गायब कर दिया। पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरपुर में एक कबाड़ की दुकान से जब्त किए गए बैग में ट्रेन के इंजन के पुर्जे भरे हुए थे।
    पुलिस के अनुसार, बीते हफ्ते बरौनी (बेगूसराय जिला) के गरहारा यार्ड में मरम्मत के लिए लाए गए ट्रेन के पूरे डीजल इंजन को एक गैंग ने चुरा लिया था। गिरोह ने एक बार में कुछ पुर्जे चुराकर इसे हासिल किया। पहली खोज तब हुई जब पुलिस ने 3 व्यक्तियों को गिरफ्त में लिया तथा उनकी सूचना के आधार पर उन्होंने मुजफ्फरपुर की प्रभात कॉलोनी स्थित एक कबाड़ के गोदाम से इंजन के पुर्जों की 13 बोरियां जब्त कीं। एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि चौंकाने वाली बात यह थी कि हमने यार्ड के पास एक सुरंग का पता लगाया, जिसके जरिए चोर आते थे तथा इंजन के पुर्जों को चुरा लेते थे तथा उन्हें बोरियों में भरकर ले जाते थे। रेलवे अफसर इससे पूरी तरह अनभिज्ञ थे।

    आपको बता दें कि हाल ही में पूर्णिया जिले में जहां चोरों ने एक पूरे विंटेज मीटर गेज स्टीम इंजन को बेच दिया, जो सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए स्थानीय रेलवे स्टेशन पर तैनात था। तहकीकात के चलते पुलिस ने पाया कि एक रेलवे इंजीनियर ने समस्तीपुर डिवीजन के डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियर की ओर जारी एक जाली पत्र के आधार पर क्लासिक स्टीम इंजन को बेच दिया था। दूसरी तरफ, एक अन्य गैंग ने बिहार के उत्तर पूर्वी अररिया जिले में सीताधार नदी पर एक लोहे के पुल का ताला खोल दिया है। पुल के अन्य अहम भाग गायब पाकर पुलिस दंग है। पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने एवं उसकी सुरक्षा के लिए एक कांस्टेबल तैनात करने के लिए विवश होना पड़ा।

    ध्यान हो कि पलटनिया पुल, फारबिसगंज शहर को रानीगंज से जोड़ता है। दोनों ही नगर अररिया जिले में ही आते हैं। मामले को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए। फारबिसगंज थाना प्रभारी निर्मल कुमार यादवेंदु मीडिया को बताया कि हमने पुल की सुरक्षा के लिए एक कांस्टेबल तैनात किया है, जिससे यह सुरक्षित रहे। पुलिस अफसर ने कहा कि हमने लोहे के पुल के कुछ भागों को चुराने के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है तथा तहकीकात जारी है।

  • अधिकारियों ने रॉड से पीटा, मुर्गा बनाया, जबरन घर से उठाया, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया….

    अधिकारियों ने रॉड से पीटा, मुर्गा बनाया, जबरन घर से उठाया, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया….

    केंद्रीय एजेंसी ED और इनकम के अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बड़ा आरोप लगाया है, उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि इनकम टैक्स और ED के अधिकारी छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के साथ बुरा सलूक कर रहे हैं। उन्हें रॉड से पीटा जा रहा है।

    उन्होंने यह भी लिखा है कि इनकम टैक्स और ED के लोग बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए किसी भी अधिकारी के घर घुस जा रहे हैं और वहीं सम्मन काटकर दे रहे हैं और पूछताछ के लिए बुला रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि यह तरीका कानूनी नहीं है।

    पूरा ट्वीट यह है –

    केंद्रीय एजेंसियां देश के नागरिकों की ताकत होती हैं, यदि इन ताकतों से नागरिक डरने लगें तो निश्चित ही यह नकारात्मक शक्ति देश को कमजोर करती है।

    ED और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियां भ्रष्टाचार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करें, हम इसका स्वागत करते हैं।

    लेकिन जिस प्रकार से ED और इनकम टैक्स के अधिकारियों द्वारा लोगों से पूछताछ के दौरान गैर कानूनी कृत्य सामने आ रहे हैं, वो बिल्कुल भी स्वीकार करने योग्य नहीं हैं।

    लोगों को वहीं समन देकर जबरन घर से उठाना, उनको मुर्गा बनाना, मार-पीट कर दवाब डालकर मन चाह बयान दिलवाने को बाध्य करना, आजीवन जेल में सड़ने की धमकी देना, बिना खाना-पानी के देर रात तक रोक कर रखना जैसे गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

    स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना CRPF को साथ लेकर छापा मारी  कर रहे हैं। अधिकारियों से शिकायत प्राप्त हुई है कि कुछ लोगों को रॉड से पीट रहे हैं, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया है।

    इन घटनाओं से प्रदेश की जनता बहुत गुस्से में है। राजनीतिक षड्यंत्र की पूर्ति के उद्देश्य से झूठे प्रकरण बनाने का खेल प्रतीत हो रहा है।

    अधिकारियों को निर्देशित किया है कि भारत सरकार को इन सब घटनाओं की जानकारी दी जाए और अवैधानिक कृत्यों पर रोक लगायी जाए।

  • कौन किसका राजनीतिक टूल ? राज्य बनाम केंद्र की जंग में किसकी शह और किसकी मात ?

    कौन किसका राजनीतिक टूल ? राज्य बनाम केंद्र की जंग में किसकी शह और किसकी मात ? छापे की राजनीति या ............. पढ़िए पूरा विश्लेषण

    मुख्यमंत्री द्वारा ED और इनकम टैक्स के अधिकारियों के ऊपर ट्वीट के माध्यम से बड़े आरोप लगाते गए हैं जिनमें ED अधिकारियों द्वारा राज्य के अधिकारियों के साथ हिरासत में मारपीट, मुर्गा बनाकर पीटने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यहां तक लिखा है कि राज्य सरकार के अधिकारियों को तुरंत सम्मन काटकर बुला लिया जा रहा है। इस ट्वीट के बाद फिर से राज्य की सियासत ठंड में भी गरमा गई है।



    अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में  ED के छापे कुछ अधिकारियों के घर और कार्यालयों पर पड़े थे, ED ने करोड़ों नगद और कुछ सोना बरामद करने का दावा भी किया था। इसके बाद से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया था। भाजपा और कांग्रेस दोनों एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे। कांग्रेस के संचार प्रमुख ने आरोप लगाया था कि ED की प्रेस विज्ञप्ति सबसे पहले भाजपा नेता और पुर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के पास कैसे पहुंच गई थी। वैसे ED के कार्रवाई पर विपक्ष लगातार हमलावर है। जिस विपक्षी सरकार के राज्य में चुनाव होता है वहां भाजपा के साथ -साथ ED भी सक्रिय हो जाती है। ऐसे लगता है जैसे दोनों  संस्थाओं को चुनाव की तैयारी  करनी हो।


    यह भी सच है कि जिस विभाग की अपनी एक बड़ी गरिमा हुआ करती थी उसकी गरिमा तेजी से गिरी है। लगातार प्रवर्तन निदेशालय के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। 2014 से पहले शायद ही किसी ने कभी इस निदेशालय के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया हो। उसपर तुर्रा यह कि जहां भी इनकी कार्रवाई होनी है वहां पहले से इस बात का हल्ला रहता है कि अब ED की कार्रवाई होगी क्योंकि चुनाव आने वाले हैं। यह भी तय होता है कि ED की कार्रवाई वहीं होगी जहां गैर भाजपा दल शासन में होगा।

    छत्तीसगढ़ में ED छापे के मायने

    2018 के विधान सभा चुनाव में पहली बार भाजपा को भारी शिकस्त झेलनी पड़ी। उसे 90 में से मात्र 18 सीट ही मिल पाई। बाद में चार सीटें उपचुनाव में कम भी हो गए। जो पार्टी 15 सालों तक यहां सत्ता में रही वह 15 प्रतिशत सीट पर ही सिमट कर रह गई। राजनीतिक पंडित लगातार यह भविष्यवाणी कर रहे हैं की छत्तीसगढ़ एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी क्योंकि किसान, कर्मचारियों का एक वर्ग सहित ग्रामीणों का एक मुश्त वोट उन्हें मिलेगा। दरअसल छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने सत्ता संभालते ही वादे के अनुरूप धान खरीदी का दर 2500 ₹ प्रति क्विंटल कर दिया, किसानों के कर्ज माफ किए, कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम की घोषणा कर दी। ऐसे में कहा यह जा रहा है की भाजपा को ED का ही सहारा है और सत्ता वापसी के लिए ED की कार्रवाई एक कारगर हथियार साबित हो सकती है।

    तीन चरण की रणनीति

    कुछ भाजपा समर्थकों और राजनीतिक पंडितों की मानें तो ED का यह छापा इस रणनीति का पहला चरण है। छापेमारी का उद्देश्य सरकार को दवाब में लाना, उसे जनता में बदनाम करना, चुनावों के लिए मिलने वाली फंडिंग को रोकना है। कहा जाता है कि अगले चरण में उन सभी उद्योगपतियों को ED टारगेट कर सकती है जो कांग्रेस को अगले चुनाव में संभावित रूप से फंडिंग कर सकते हैं।  इसके अलावा यह भी संभावना है कि ED राज्य सरकार के कई अन्य विभागों में दबिश देकर कई नए खुलासे कर सकती है। नक्सल क्षेत्रों में भ्रष्टाचार को लेकर भी नई तरह से जांच शुरू की जा सकती है।इसके बाद का काम पार्टी का है। पार्टी इन सभी मुद्दों को जनता तक ले जाकर सरकार को भ्रष्ट बताएगी और उसे चुनाव में भुनाएगी। इन मुद्दों को परिणाम में परिवर्तित करना इनका लक्ष्य होगा।



    अधिकारियों से सहानुभूति नहीं

    लोग इस बात पर तो सहमत हैं कि ED की छापेमारी राजनीतिक है और यह भूपेश बघेल सरकार को बदनाम करने के लिए है लेकिन अधिकारियों पर पड़ने वाले छापे से लोग खुश दिखते हैं। उन्हें उन अधिकारियों से कोई सहानुभूति नहीं है जिन्हें ED पकड़ रही है या जिनके घरों में छापेमारी की गई है। दरअसल बेलगाम नौकरशाही से लोग त्रस्त तो हैं। राजस्व और पुलिस विभाग पर सरकार का लगाम नहीं दिखता। यहां भ्रष्टाचार होने और आम लोगों को परेशान किए जाने की बात कई बार सामने आती है। नौकरशाही, खासकर राजस्व और पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने पर लोग बिना तर्क के मान भी लेते हैं। यह देखा गया है कि इन विभागों के बिरले अधिकारियों को ही लोग सपोर्ट करते हैं। 


    आखिर क्या है ED का इतिहास

    प्रवर्तन निदेशालय या ईडी एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो आर्थिक अपराधों की जांच और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के लिए बनाया गया है। इस निदेशालय की स्थापना 1 मई, 1956 को हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA “47) के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से निपटने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग में एक “प्रवर्तन इकाई” का गठन किया गया था। मुख्यालय के रूप में दिल्ली के अलावा कोलकाता और मुंबई में स्थापित किया गया था।  इस इकाई का नेतृत्व एक कानूनी सेवा अधिकारी, प्रवर्तन निदेशक के रूप में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से प्रतिनियुक्ति पर लिए गए एक अधिकारी और विशेष पुलिस स्थापना के 03 निरीक्षकों द्वारा सहायता प्रदान की गई थी।

    वर्ष 1957 में, इस इकाई का नाम बदलकर “प्रवर्तन निदेशालय” कर दिया गया, और मद्रास में एक और शाखा खोली गई। 1960 में, निदेशालय का प्रशासनिक नियंत्रण आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया था। समय बीतने के साथ, FERA”47 को निरस्त कर दिया गया और FERA, 1973 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 04 वर्षों (1973 – 1977) की एक छोटी अवधि के लिए, निदेशालय कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रहा। वर्तमान में, निदेशालय राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

    आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, FERA, 1973, जो एक नियामक कानून था, को निरस्त कर दिया गया और इसके स्थान पर, एक नया कानून विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) 1 जून 2000 को लाया गया।  इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट को अधिनियमित कर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) अधिनियमित किया गया था ।  जिसके प्रतिपादन का जिम्मा ED को 1अप्रैल 2015 से सौंपा गया था।

    8 सालों में कितनी कार्रवाई

    26 जुलाई 2022 को केंद्र सरकार के वित्त राज्यमंत्री ने राज्यसभा में लिखित जानकारी देते हुए बताया था कि 2014 से 2022 यानी 8 साल के दौरान ED ने 3010 कार्रवाई की है जबकि 2004 से 2014 के बीच ED ने मात्र 112 कार्रवाई ही की थी। वित्त राज्यमंत्री ने यह भी बताया था कि 3010 मामलों में से 888 मामलों में चार्ज शीट फाइल की गई और 23 मामलों में कनविक्शन यानि दोष पाया गया। इस दौरान 869.31 करोड़ की अपराधिक आय की संपत्ति जब्त की गई। वहीं 2005 से 2014 के बीच ED द्वारा 112 कार्रवाई की गई, जिसमे 5,346.16 करोड़ रुपये की अपराध की आय कुर्क की गई और 104 शिकायतें दर्ज की गईं।

    कौन -कौन हुआ शिकार

    2014 के बाद ED के कार्रवाई का शिकार सिर्फ विपक्षी नेता हुए हैं ऐसा आरोप सरकार पर लगाया जाता है। दरअसल केंद्र सरकार के आलोचक दल तृणमूल कांग्रेस (बंगाल), आम आदमी पार्टी (दिल्ली), कांग्रेस (कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश), शिवसेना (महाराष्ट्र), बसपा सहित कई दल इस संस्था के शिकार हुए हैं। विपक्षी नेता एक स्वर में, चाहे ममता बनर्जी हों या अरविंद केजरीवाल या संजय राउत ED कार्रवाई के बाद इन नेताओं ने सीधे केंद्र सरकार पर हमला बोला और सरकार के इस तरीके को धमकाने वाली राजनीति कहा है।

    ED के कुछ चर्चित कार्रवाई

    2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान ED ने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से लगातार पूछताछ की, लोकसभा चुनाव के दौरान ही मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के पीए के घर कार्रवाई हुई, कर्नाटक के कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर तब ED ने दबिश दी जब वे वहां की सरकार बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों को अपने फार्म हाउस में रुकवाया था, ED ने वहीं दबिश दी थी। गुजरात चुनाव के ठीक पहले आम आदमी पार्टी के गुजरात के प्रभारी सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी, इसके बाद आम आदमी पार्टी ने मनीष सिसोदिया को वहां का प्रभारी बनाया और उनके ऊपर भी ED की कार्रवाई हुई। इसमें बड़ी बात यह है कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने इस रेड की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पिछले 6 माह से प्रदेश में ED की कार्रवाई की संभावना जता रहे थे और यहां भी ED ने दोबारा दबिश देकर उनकी आशंका को सही सिद्ध कर दिया। इसी तरह बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान वहां के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर भी ED ने कार्रवाई की जिसकी आलोचना हुई और सवाल खड़े किए गए।

  • आईपीएस धर्मेन्द्र सिंह छवई महासमुंद के नए एसपी..आईपीएस भोजराज पटेल भी स्थानांतरित..

    आईपीएस धर्मेन्द्र सिंह छवई महासमुंद के नए एसपी..आईपीएस भोजराज पटेल भी स्थानांतरित..

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के पुलिस विभाग में दो IPS अफसरों का तबादला किया गया है। इस ट्रांसफर में महासमुंद जिले के पुलिस अधीक्षक भोजराज पटेल को बीजापुर भेज दिया गया है।

    बीजापुर में वे सेनानी 15 वीं वाहिनी छ स बल का दायित्व सम्भालेंगे। इधर पुलिस अधीक्षक रेल धर्मेन्द्र सिंह छवई को महासमुंद का नया एस पी बनाया गया है।

  • अजय बंसल बनाये गए प्रेस क्लब अध्यक्ष…

    अजय बंसल बनाये गए प्रेस क्लब अध्यक्ष…

    खरसिया। खरसिया प्रेस क्लब की आवश्यक बैठक रविवार को स्थानीय विश्राम गृह में सम्पन्न हुयी, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये साथ ही नगर के वरिष्ठ पत्रकार अजय बंसल को प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गयी।
    प्रेस क्लब खरसिया की इस बैठक में नगर के पत्रकार उपस्थित रहे तथा सर्व सम्मति से अजय बंसल को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गयी। नवनियुक्त अध्यक्ष को पत्रकार साथयों ने बधाई दी, जिस पर अजय बंसल ने सभी पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि जो जिम्मदेारी आप लोगों ने मुझे दी है उसे आप सभी के सहयोग से पूरी तरह से निभाउंगा, साथ ही पत्रकार हित के लिये सदैव तत्पर रहूंगा। इस इवसर पर प्रेेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष रामनारायण सोनी ने पत्रकार साथियों से कहा कि प्रेस क्लब के सदस्यों और पदाधिकारियों का सहयोग हमेशा मुझे मिला है जिसके लिये मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं। बैठक में वरिष्ठ पत्रकार अमर अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, कैलाश गर्ग, रामनारायण सोनी, अजय बंसल, सचिव सुनील अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विकास ज्योति, उपाध्यक्ष प्रहलाद बंसल, अरूण चौधरी, नयनानंद वैष्णव, संतोष यादव, उपाध्यक्ष जगदीश मित्तल, नटवर मित्तल, संजय गुप्ता, कैलाश शर्मा, ड़िग्री लाल जगत, मनीष अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, सहित प्रेस क्लब खरसिया के सदस्य उपस्थित रहे।

  • आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्मोत्सव आदिवासी परंपरा के अनुसार मनाया गया…


    रायपुर। विगत दिनों रायपुर के बंजारी धाम मंदिर परिसर में आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्म उत्सव आदिवासी परंपरा के अनुसार मनाया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में इतिहासकार एवं पुरातत्वविद डॉ राम विजय शर्मा तथा रायपुर जिला गोंडा समाज के अध्यक्ष श्री मोहनलाल छेदी अध्यक्ष के रूप में मौजूद थे।
    इस अवसर पर अध्यक्ष श्री मोहनलाल छेदी ने बताया कि हमारे पूर्वज लोग बताते थे कि महाकवि कालिदास हमारे आदिवासी समाज के हैं वह सरगुजा के मृगाडाँड़ में पंडो आदिवासी परिवार में जन्म लिए थे उनका विवाह उज्जैन के राजा की पुत्री विद्यापति से हुई थी राजा की लड़की अपने को बहुत विद्वान समझती थी तथा नौकर चाकर तथा मंत्री लोगों से ठीक से बात तक नहीं करती थी। आदिवासी महाकवि कालिदास से उनका विवाह करा दिया गया। शादी होने के बाद राजकुमारी मृगडांड आई। प्रथम रात्रि को राजकुमारी ने कालिदास से कुछ प्रश्न किए जिसका वे उत्तर नहीं दे पाए इसलिए वह क्रोधित होकर अपने पलंग से धक्का देकर कालिदास को गिरा दी कालिदास महाकाली कंकालिन के ठाणा के पास गिरे और उनका सिर से खून गिरने लगा अपने खून को कालिदास जी मां काली को लगा दिए जिससे मां काली प्रसन्न हो गई और वरदान मांगने को कहा।

    आदिवासी समाज के प्रत्येक आदिवासी के घर में मां काली कंकाली का ठाणा रहता ही है। यही आदिवासी कालिदास आगे चलकर वाराणसी में 6 वर्षों तक संस्कृत का अध्ययन किया और विद्वान बन गए उसके बाद अपनी जन्मस्थली आकर संस्कृत में ऋतु संहार, मेघदूतम और अभिज्ञान शाकुंतलम सहित कुल 3 ग्रंथों की रचना किए जिससे उनकी ख्याति देश में फैल गई और उज्जैन के राजा चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार में के नवरत्नों में उनका स्थान मिला। जन्मोत्सव के इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ विजय शर्मा ने बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास का जन्म 15 नवंबर 350 ई. को सरगुजा जिले के उदयपुर तहसील के मृगडांड में हुआ था तथा हर वर्ष बड़े पैमाने पर आदिवासी समाज उनका जन्म उत्सव मनाता है इसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखंड से आदिवासी समाज के लोग सम्मिलित होते हैं । इस अवसर पर बनमालीराम ध्रुव, पवन ध्रुव, धनवार ध्रुव, पुरानी ध्रुव तथा सैकड़ों आदिवासी उपस्थित रहकर जन्मोत्सव के कार्यक्रम को सफल बनाएं।

  • सक्ती मे आईटी की नजरों से छुपाकर रखा काला धन: चोरी होने पर अनाधिकृत रूप से खंगाला सीसीटीवी फुटेज…दुकान संचालक ने की शिकायत…पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप…

    सक्ती मे आईटी की नजरों से छुपाकर रखा काला धन: चोरी होने पर अनाधिकृत रूप से खंगाला सीसीटीवी फुटेज…दुकान संचालक ने की शिकायत…पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप…

    सक्ती। जिले में हुई आईटी की रेड ने नगर सहित पूरे जिले के धन्ना सेठों की नींद हराम कर दी है। धन्ना सेठों की नींद उड़ा देने वाली एक और खबर निकल कर सामने आई है, जिसमें आईटी की नजरों से बचाकर काला धन ग्राम पंचायत हरेठी में नौकर के रिश्तेदारों के यहां छिपाए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। जिसे चोरी कर ले जाने की जानकारी मिलने पर सक्ती के धन्ना सेठों के द्वारा हरेठी स्थित रूई भंडार के संचालक के घर सीसीटीवी फुटेज खंगालने एवं रूई भंडार के संचालक को बलात्कार की धारा 376 एवं चोरी की धारा 379, 380 के झूठे मुकदमे में फसाये जाने की धमकी दिए जाने के संबंध में सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक से पुष्पेंद्र देवांगन के द्वारा लिखित शिकायत करते हुए इसकी जांच एवं सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत हरेठी निवासी पुष्पेन्द्र कुमार देवांगन पिता तुलसीराम देवांगन(28) ने सक्ती पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत की कॉपी देकर बताया की उसकी हरेठी मे मेन रोड मे श्रीनाथ रूई भंडार की दुकान है।

    पुष्पेंद्र देवांगन ने अपनी शिकायत मे बताया है कि 15 नवंबर की सुबह लगभग 10 बजे से शाम करीब 5:30 बजे तक उक्त रूई भंडार में सक्ती के धन्ना सेठ अरुण कुमार अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, कांग्रेस नेता एवं भूतपूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुन्दर अग्रवाल के द्वारा श्रीनाथ रूई भंडार के मकान में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालने लगे।

    बता दे कि विगत दिनों सक्ती मे अनेक जगहों पर आई.टी. की रेड हुई थी। जिसमे धन्ना सेठों के द्वारा आई.टी की नजरो से बचाकर काला धन घर में काम करने वाली बाई के रिश्तेदार सावित्री चौहान, टोबो चौहान पिता पूरन चौहान के मकान ग्राम पंचायत हरेठी में रख दिया था। जिस मकान मे काला धन रखा गया था, उस मकान का ताला तोड़कर अज्ञात चोर चोरी कर काला धन को ले गया। जिसे ढूढ़ने के लिए अरुण कुमार अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, आनंद अग्रवाल सावित्री ऑटो पार्ट्स एवं भूतपूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुन्दर अग्रवाल पुष्पेन्द्र देवांगन फर्म श्रीनाथ रुई भंडार के घर मे लगे 08 नग सीसीटीवी फुटेज खंगालने गए थे। धन्ना सेठों को किसी ने जानकारी उपलब्ध कराई थी कि हरेठी में रखा उनका काला धन उक्त रूई भंडार दुकान के सामने से चोरी कर ले गये है। इस बात की भनक लगते ही वे आव देखे ना ताव बिना किसी एफआईआर या ग्राम के मुखिया/सरपंच के अनुमति के बिना ही श्रीनाथ रूई भंडार की दुकान मे जबरन घुसकर सक्ती थाने मे पदस्थ आरक्षक भागवत श्रीवास्तव के साथ रूई भंडार संचालक एवं उसके परिवार वालों से पूछताछ करते हुए हाथापाई करने लगे।

    पुष्पेंद्र ने बताया कि उनके द्वारा सीसीटीवी फूटेज चेक करते हुए डाटा को डिलीट करने की भी कोशिश की गई। बाद मे सीसीटीवी कैमरे का हार्ड डिस्क को रूई भंडार संचालक पुष्पेन्द्र देवांगन एवं उनके भाई मुकेश देवांगन एवं पिता तुलसीराम देवांगन की अनुमति के बिना ही धन्ना सेठों के कहने पर कम्प्यूटर आपरेटर द्वारा ले जाने की कोशिश की गई। यह सब इसलिए किया गया कि कहीं उनके काले धन का भंडाफोड़ न हो जाए।

    पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

    पुष्पेंद्र के द्वारा हार्ड डिस्क को ले जाने से मना किये जाने पर पुष्पेन्द्र देवांगन को गिरफ्तार करके ले जाने की धमकी दी गई। उसके पश्चात बाराद्वार रोड हरेठी स्थित श्रीनाथ रुई भंडार के सामने एसडीओपी मो. तस्लीम आरीफ के द्वारा नागरिको के मध्य संचालक पुष्पेन्द्र देवांगन को बलात्कार की धारा 376 एवं चोरी धारा 379, 380 के झूठे केस में फंसा दिये जाने की धमकी दी गई है। जिस व्यक्ति के मकान मे यह काला धन छुपाकर रखा हुआ था, सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान वे सभी रूई भंडार में मौजूद थे, किंतु उसके बाद से वह सभी उसी दिन से ग्राम पंचायत हरेठी से गायब है। उन्हें ग्राम पंचायत हरेठी से भगा दिया गया है या वे स्वयं भाग गए है, यह एक बड़ा सवाल है जो अनेक संदेहो को जन्म देता है। यह जांच का विषय है।

    लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर आवेदक पुष्पेंद्र देवांगन ने सक्ती पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच कराए जाने एवं परिवार को सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है।

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