Author: Sunil Agrawal

  • इस भाजपा नेत्री ने दिए प्रदेश में रेप के ये आंकड़े और कहा-अन्य प्रदेशों की तरह छग भी ….

    इस भाजपा नेत्री ने दिए प्रदेश में रेप के ये आंकड़े और कहा-अन्य प्रदेशों की तरह छग भी ….

    राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य अल्पसंख्यक मोर्चा और उर्दु अकादमी की पुर्व उपाध्यक्ष श्रीमती नज़मा अज़ीम खान ने गंभीर अपराधों के मद्देनजर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर उन्हे घेरते हुए लगातार हो रहे महिलाओं के साथ हिंसक अपराधों पर रोकथाम में प्रदेश सरकार की विफलता को निंदनीय कहा है।

    श्रीमती खान ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह अब छत्तीसगढ़ में भी महिलाएं असुरक्षित हो चली हैं और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और जलाकर मार देने जैसी हिंसक व वीभत्स वारदातों में इजाफा होता जा रहा है। यह प्रदेश में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा जैसे संजीदा मोर्चे पर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की घोर विफलता है। शनिवार को बिलासपुर के सरकंडा थाना इलाके में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ और अगले दिन रविवार को सरगुजा के बलरामपुर में एक महिला की जली हुई लाश मिली। सोमवार को राजधानी से लगे माना में एक महिला व मासूम बच्चे की जली हुईं लाशें मिलीं। पुलिस प्रशासन इन मामलों की तह तक पूरी तरह पहुंचा ही नहीं कि बुधवार को बिलासपुर के मरवाही थाना क्षेत्र में फिर एक युवती से चार युवकों ने दुष्कर्म करने का प्रयास किया। बुधवार को एक और घटना में युवती सकुशल इसलिए बच पाई क्योंकि एक 63 वर्षीय बुजुर्ग सज्जन उदल दास ने आरोपियों के चंगुल से युवती को छुड़ाया । इस दौरान विवाद के चलते जब युवती वहां से भाग निकली तो आरोपियों ने बुजुर्ग दास से जमकर मारपीट की। इस घटना का सर्वाधिक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि बुजुर्ग की नामजद रिपोर्ट के बाद भी एक तो पुलिस ने मामूली धाराओं में अपराध दर्ज नही किया और दूसरे अब तक इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।

    उन्होंने कहा कि एक तरफ महिला सुरक्षा को लेकर पूरा देश उबल रहा है और दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में महिलाओं के साथ इस तरह की हिंसक व यौन वारदातों की कड़ी के बावजूद न तो प्रदेश सरकार के कानों पर जूं रेंग रही है और न ही पुलिस प्रशासन महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर आ रहा है। युवती की इज्जत बचाने वाले बुजुर्ग की नामजद रिपोर्ट के बावजूद रास्ता रोककर धमकी देने व मामूली मारपीट की धाराएं लगाकर पुलिस ने यह बता दिया है कि वह और सरकार महिला सुरक्षा के प्रति कितने संवेदनशील हैं? उन्होंने आज की घटना पर बहुत ही दुखद होते कहा की दो लड़कियों की हत्या अब पानी सर से ऊपर हो गया है अगर सरकार जल्दी कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है इस मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, लापरवाही बरतने वाले पुलिस स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई और महिला सुरक्षा के विषय पर सख्ती से पेश आने की मांग की।

  • सरकार ने माना- फर्जी हैं देश के 57% ‘डॉक्टर’, 31 फीसदी 12वीं से आगे पढ़े भी नहीं

    सरकार ने माना- फर्जी हैं देश के 57% ‘डॉक्टर’, 31 फीसदी 12वीं से आगे पढ़े भी नहीं

    2018 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में कहा था कि देश में 57 फीसदी से अधिक झोलाछाप डॉक्टरों की रिपोर्ट गलत है। लेकिन, अब वही स्वास्थ्य मंत्रालय WHO की रिपोर्ट की पुष्टि कर रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 57.3 फीसदी डॉक्टरों के पास मेडिकल से संबंधित को भी शैक्षणिक योग्यता नहीं है।

    WHO ने 2001 की जनगणना के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण इलाकों में 20 फीसदी बिना डिग्री वाले डॉक्टर लोगों का इलाज कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी बताया कि करीब 31% झोलाछाप डॉक्टर ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है।अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में डॉक्टरों को लेकर काफी असामांजस्य वाली स्थिति है।

    टाइम्स ऑफ इंडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया है कि ग्रामीण इलाकों और गरीब आबादी के बीच बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। ऐसे में झोलाझाप डॉक्टरों की भरमार है।

  •  इस चैलेंज को पुरुष नहीं कर पाते, Hot मॉडल ने आसानी से किया

     इस चैलेंज को पुरुष नहीं कर पाते, Hot मॉडल ने आसानी से किया

    अमरीका की 22 साल की फिटनेस मॉडल ने अपने इंस्टाग्राम अकाऊंट पर एक वीडियो शेयर की है जिसमें वह चेयर चैलेंज आसानी से पूरा कर सबको चौका दिया. चैलेंज में जेलीन आसानी से कुर्सी उठाती हुई दिख रही है जबकि उनके पुरुष साथी इस कार्य में असफल हो जाते हैं.
    चेयर चैलेंज के लिए दीवार से दो कदम नांपकर खड़ा होना होता है. इसके बाद चेयर उठानी होती है. शर्त यह है कि व्यक्ति के पिछले पैर ऊपर उठने नहीं चाहिए साथ ही साथ सिर भी दीवार पर लगे रहना चाहिए. दीवार से चेयर लगाने के चक्कर में कई पुरुष अपनी एड़ी ऊपर उठा लेते हैं जिसके कि वह चैलेंज हार जाते हैं.
  • डीजीपी ने राजधानी पुलिस की ली क्लास, कहा- ‘मेरे पास पीड़ित के आने का अर्थ है कि शिकायतकर्ता की ठीक से सुनवाई नहीं हुई’

    डीजीपी ने राजधानी पुलिस की ली क्लास, कहा- ‘मेरे पास पीड़ित के आने का अर्थ है कि शिकायतकर्ता की ठीक से सुनवाई नहीं हुई’

    रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक दुर्गेश माधव अवस्थी ने आज राजधानी पुलिस की क्लास ली.  डीजीपी की क्लास में पुलिस महानिरीक्षक आनंद छाबड़ा, पुलिस अधीक्षक आरिफ़ शेख़ रायपुर जिले की पुलिस टीम के साथ मौजूद रहें. डीजीपी ने कुछ मामलों में पुलिस की पीठ थपथापते हुए स्पष्ट रूप से अधिकारियों से कहा- ” मेरे पास पीड़ित के आने का अर्थ है कि शिकायतकर्ता की ठीक से सुनवाई नहीं हुई है. अवस्थी ने सीधे और साफ शब्दों में कहा कि किसी भी मामले को लंबा खींचने की आदत छोड़ दीजिए. लोगों का भरोसा टूटने से पहले कार्रवाई हो जानी चाहिए. बड़े मामलो में तो 15 दिनों से अधिक वक्त़ लगना ही नहीं चाहिए. महिला डेस्क को तत्काल अमल में लाकर महिलाओं के मामले में पूरी संवेदनशीलता के काम करे।

    उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी की पुलिस प्रदेश भर के लिए आईना की तरह है. ऐसे में आईना साफ-सुथरा होना चाहिए, जिससे सबकुछ साफ-साफ दिख सके. आपको आईना की तरह बनकर काम करना है. समाज में जो हमारी जिम्मेदारी है उस जिम्मेदारी में किसी भी तरह से कोई कोताही नहीं होनी चाहिए. राजधानी के ट्रैफिक व्यवस्था को तत्काल ठीक करने के भी निर्देश भी उन्होंने दिए  कहा कि शास्त्री चौक और अन्य चौराहों में ऑटो बेतरतीब तरीके से खड़े रहते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है. वहीं देर रात तक खुले रहने वाले बीयर बार, पब पर सख्त कार्रवाई करने को भी कहा. विशेषकर नशाखोरी करने वालों पर, नशे की हालत में गाड़ी चलानों पर सख्ती बरतने के भी निर्देश दिए. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पेट्रोलिंग को तेज कर तेज रफ्तार और ओवरलोड गाड़ियों पर लगाम लगाए।

    उन्होने कहा कि बेसिक पुलिसिंग में सुधार की आवश्यकता है. मुझे आपसे इम्पैक्ट पुलिसिंग की उम्मीद है. थाना प्रभारी लोगों से संवाद करें और ऐसी कार्रवाई करें कि अपराधियों के मन में भय उत्पन्न हो. राजधानी की पुलिस की अलग पहचान होनी चाहिए. वहीं उन्होंने रायपुर पुलिस की तारीफ़ करते हुए कहा कि 2019 का वर्ष बड़ी चुनौतियाँ रही है. इन चुनौतियाँ से निपटने आप सबने बेहतर काम किया है. फिलहाल अब आपके सामने नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव के साथ नए वर्ष का जश्न को निर्विवाद ढंग से निपाटने की चुनौती है. उम्मीद इसे आप सब मिलकर बेहतर तरीके से कर पाएंगे।

  • “पत्र वाहक को पाँच पेटी गोवा देने का कष्ट करें”, अजय चंद्राकार का आरोप- निष्पक्ष चुनाव असंभव है, शराब के जरिए कांग्रेस जीतना चाहती है

    “पत्र वाहक को पाँच पेटी गोवा देने का कष्ट करें”, अजय चंद्राकार का आरोप- निष्पक्ष चुनाव असंभव है, शराब के जरिए कांग्रेस जीतना चाहती है

    धमतरी। नगरीय निकाय चुनाव के लिए मतदान को कुछ दिन ही बचे हैं. लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर एक पत्र जमकर वायरल हो रहा है. जिसमें लिखा है- “पत्र वाहक को पाँच पेटी गोवा देने का कष्ट करें”. इस पत्र में सुमित नाम के प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का सील लगा हुआ है. साथ ही इसमें एक मोबाइल नंबर 9424213858 दर्ज है. इस वायरल पत्र ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. सभी जानने चाहते हैं कि यह पत्र वायलर कहाँ से हुआ है ? हालांकि यह पत्र धमतरी और उसमें कुरुद में खूब वायलर हो रहा है. इस पत्र को लेकर अब विपक्ष की ओर कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार पर कई आरोप लगा दिए हैं।

    अजय चंद्राकर ने कहा कि कुरुद के शराब दुकानों में यह पर्ची चल रही है. चंद्राकर ने इसे ट्वीट करते हुए लिखा है कि –

    “पूरे प्रदेश में यही आलम चल रहा है.. यह पर्ची धमतरी क्षेत्र में चल रही है। मैं जानना चाहता हूँ कि शराब बंदी वाली सरकार क्या शराब पर्ची पर चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है”

    वहीं उन्होंने बातचीत में कहा कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस ने जो व्यवस्था लागू की. निष्पक्ष चुनाव असंभव है. सरकार असहाय है. शराब के आधार पर चुनाव जीतने का सपना देख रही. निर्वाचन आयोग को उच्च स्तरीय जाँच करनी चाहिए. पार्टी की ओर से शिकायत की जाएगी।

  • निर्भया कांड में इंसाफ के लिए 7 साल लंबा इंतजार क्यों?…

    निर्भया कांड में इंसाफ के लिए 7 साल लंबा इंतजार क्यों?…

    पूरे सात साल हो गए निर्भया केस को। वो 16 दिसंबर 2012 था। आज 17 दिसंबर 2019 है। इन सात लंबे सालों में निर्भया के गुनहगार तो अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाए। अलबत्ता सोमवार को उन्नाव रेप मामले में विधायक कुलदीप सेंगर को दिल्ली की एक अदालत ने रेप और अपहरण का दोषी जरूर करार दे दिया।

    अब सजा का एलान मंगलवार को होगा। पर निर्भया केस का क्या होगा? आखिर निर्भया के गुनहगारों की फांसी कहां लटकी है। तो आइए निर्भया केस के सात साल पूरे होने के मौके पर इन सात सालों का हिसाब-किताब देखते हैं।

    16 दिसंबर 2012 से 17 दिसंबर 2019कहां तो तब ऐसा लग रहा था कि बस अब इंसाफ हुआ कि तब इंसाफ हुआ। बातें हो रही थीं कि देख लेना साल भर के अंदर लटका दिए जाएंगे सारे। मगर साल दर साल बीतता गया। सातवां साल आ गया। शायद ये साल भी बीत जाता। क्या पता बीत भी जाए।

    वो तो हैदराबाद की डाक्टर और उन्नाव की उस लड़की ने एक बार फिर देश को गुस्सा दिलाया तब जाकर हमें याद आया कि अरे निर्भया के गुनहगारों की तो अब तक फांसी नहीं हुई है। बस फिर क्या था याद आते ही अब फांसी, फांसी के तरीके, पांसी के कानून, फांसी की तारीख फांसी की रस्सी, पांसी का फंदा सब पर बातें होने लगीं।

    क्यों लगा इतना वक्तनिर्भया केस किस रफ्तार से आगे बढ़ा, पिछले सात सालों में कब क्या हुआ। साल-दर साल इसकी पड़ताल करें उससे पहले जरूरी है। जरूरी है कि इस वक्त केस किस मोड़ पर खड़ा है। आगे क्या होगा। कब तक फांसी होगी।

    किस तारीख तक फांसी हो सकती है। किस दिन ब्लैक वॉरंट जारी होगा। इन कानूनी पहलुओं को जान और समझ लें। फिलहाल निर्भया के चारों गुनहगार यानी मुकेश, पवन, अक्षय और विनय की फांसी के बीच पांच कानूनी अड़चनें हैं।

    पहली क़ानूनी अड़चन

    निर्भया की मां ने फांसी में हो रही देरी को लेकर इसी साल अक्तूबर में पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस अदालत ने तिहाड़ जेल के डीजी को नोटिस जारी कर चारों कैदियों के केस की ताजा रिपोर्ट मांगी। 13 दिसंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए चारों दोषियों से बातचीत करने के बाद अदालत ने 18 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख रखी है।

    दूसरी क़ानूनी अड़चन

    दूसरी अड़चन ये है कि 10 दिसंबर को एक और गुनहगार अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा को लेकर रिव्यू पिटिशन दाखिल कर दिया था। उस याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर दोपहर दो बजे का वक्त दिया है।

    तीसरी क़ानूनी अड़चन

    तीसरी अड़चन ये है कि 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी 18 दिसंबर को पटियाला कोर्ट में सुनवाई होगी। फिर पटियाला हाउस कोर्ट कैदियों के आगे की हक के बारे में कोई फैसला दे सकता है।

    चौथी क़ानूनी अड़चन

    चौथी अड़चन ये है कि मुकेश और पवन कहीं अदालत के सामने कह दें कि वो भी राष्ट्रपति से रहम की अपील करेंगे तो बहुत मुमकिन है कि उन्हें भी ये मौका मिल जाए। इससे फांसी कुछ और दिन टल सकती है। हालांकि ये भी हो सकता है कि 18 दिसंबर को अदालत ये साफ कर दे कि इतने वक्त तक आप लोगों ने राष्ट्रपति से रहम की अपील क्यों नहीं की?और इस बिनाह पर उसकी अर्जी नामंजूर कर दे। या ये भी हो सकता है कि बाकी दोनों दया के लिए राष्ट्रपति के पास जाएं ही नहीं। ऐसी सूरत में बहुत मुमकिन है कि चारों को जल्दी फांसी दे दी जाए। पर ये जल्दी भी एक-दो हफ्ते का वक्त तो ले ही लेगी।

    पांचवीं क़ानूनी अड़चन

    2014 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के तहत दया याचिका खारिज होने और ब्लैक वारंट जारी होने पर भी फौरन फांसी नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि ब्लैक वारंट जारी होने के बाद फांसी पर चढ़ाए जाने वाले शख्स को कम से कम 14 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए।

    ताकि इस दौरान वो अपने सारे अधूरे काम जिनमें वसीयत करने से लेकर रिश्तेदारों से मिलना शामिल है, वो सब पूरी कर सके। इस हिसाब से भी फांसी में कम से एक-दो हफ्ते का वक्त लग जाएगा।वैसे ये सारी कानूनी अड़चनें तो अभी के लिए और अभी की हैं। अब सवाल उठता है कि निर्भया जैसे केस में जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सिर्फ नौ महीने के अंदर अपना फैसला सुना दिया था। उसके बाद भी फांसी देने में सात साल क्यों लग गए?

    इस केस का एक और अजीब पहलू है। अब ये इत्तेफाकन है या इसके पीछे फांसी की तारीख टालने की साजिश तो नहीं। निर्भया के चारों गुनहगरों ने अभी तक अपने आखिरी कानूनी अधिकार या रहम की अपील के मानवीय अधिकार का इस्तेमाल ही नहीं किया है।

    अगर एक ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की तो दूसरे ने रहम की अपील ही नहीं की। एक ने तो दोनों में से अब तक कुछ भी नहीं किया। निर्भया केस का पहला फैसला फास्ट्र ट्रैक कोर्ट ने सिर्फ 9 महीने में यानी 2013 में ही सुना दिया था।

    इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बहुत ज्यादा वक्त नहीं लिया। साल भर में हाई कोर्ट से भी फैसला आ गया। अलबत्ता सुप्रीम कोर्ट ने जरूर करीब सवा तीन साल लिए फैसला सुनाने में। मगर उसके बाद आखिरी के दो साल में इस केस में कुछ हुआ नहीं था।

  • अमित शाह की दो-टूक- जितना भी विरोध कर लें…नागरिकता कानून पर नहीं झुकेगी सरकार…

    अमित शाह की दो-टूक- जितना भी विरोध कर लें…नागरिकता कानून पर नहीं झुकेगी सरकार…

    नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बयान दिया है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बाहर से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को हमारी सरकार नागरिता जरूर देगी।विपक्ष को जो राजनीतिक विरोध करना है वो करें। बीजेपी और मोदी सरकार अडिग है। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी। वे भारत के नागरिक बनेंगे और सम्मान के साथ दुनिया में रहेंगे।

    गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष देश के लोगों को गुमराह कर रहा है। मैं दोहराता हूं कि किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी व्यक्ति की नागरिकता छीनने का कोई सवाल ही नहीं है। विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी से कहना चाहता हूं कि यह नेहरू-लियाकत समझौते का हिस्सा था, लेकिन 70 साल से लागू नहीं हुआ, क्योंकि आप वोट बैंक बनाना चाहते थे। हमारी सरकार ने संधि को लागू किया है और लाखों-करोड़ों लोगों को नागरिकता दी है।

    राष्ट्रपति से मिले विपक्षी दल के नेताएक ओर जहां अमित शाह नागरिकता कानून पर अडिग रहने की बात कर रहे हैं तो वहीं विपक्षी दल के नेता इसे वापस लेने के लिए मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों और दिल्ली में हालात तनावपूर्ण हैं। हमने राष्ट्रपति से मामले में दखल देने को कहा है।कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस जामिया यूनिवर्सिटी में छात्राओं के हॉस्टल में घुसी। प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक हक है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जनता की आवाज दबा रही है। वहीं टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वह सरकार को तुरंत नागरिकता संशोधित कानून को वापस लेने की सलाह दें।

    कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह कानून बांटने वाला है। सरकार को देश और नागरिकों की चिंता नहीं है। विपक्ष को पता था कि देश इस कानून को खारिज कर देगा। यही हो रहा है।

    आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि असम में 5 लोगों की मौत हो गई। 21 लोग घायल हो गए। पहले कश्मीर, फिर नॉर्थ ईस्ट और अब पूरा देश।

  • आइये जानते हैं, क्या है नागरिकता कानून, क्यों है विवाद, किसे मिलेगा लाभ

    आइये जानते हैं, क्या है नागरिकता कानून, क्यों है विवाद, किसे मिलेगा लाभ

    नागरिकता संशोधन कानून पर देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार इस पर कदम पीछे हटने को तैयार नहीं है। लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास होने के बार राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून की शक्ल ले ली। इस कानून ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुल गया है। मगर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसके बावजूद देशवासियों के मन में इस कानून को लेकर कई सारे सवाल हैं। यहां हम आपको इससे जुड़े हर सवाल का जवाब दे रहे हैं…


    क्या कहता है कानून


    31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत आने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धर्मों के अल्पसंख्यकों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा
    नागरिकता अधिनियम, 1955 अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता है


    इसके तहत अवैध प्रवासी वह है:


    जिसने वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश किया हो
    जो अपने निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक भारत में रहता है।
    इस लाभ को देने के लिए विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम, 1920 के तहत भी छूट देनी होगी
    वर्ष 1920 का अधिनियम विदेशियों को अपने साथ पासपोर्ट रखने के लिये बाध्य करता है
    1946 का अधिनियम भारत में विदेशियों के आने-जाने को नियंत्रित करता है
    कानून में इन देशों और धर्मों का जिक्र
    अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को मिलेगा लाभ
    इन देशों के छह धर्म के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुला
    ये छह धर्म हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी और ईसाई शामिल हैं


    इन शर्तों को पूरा करना होगा


    जिस तारीख से आवेदन करना है, उससे पहले 12 महीनों से भारत में रहना होगा
    कम से कम पांच साल भारत में बिताना जरूरी
    इन राज्यों में कानून लागू नहीं
    संविधान की छठी अनुसूची में शामिल राज्य व आदिवासी क्षेत्रों में संविधान संशोधन कानून लागू नहीं होगा। ये प्रावधान बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत अधिसूचित ‘इनर लाइन’ क्षेत्रों पर भी लागू नहीं होंगे।
    असम : कारबी आंगलोंग जिला, बोडोलैंड, नार्थ चाछर हिल्स जिला
    मेघालय : खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स जिले
    मेघालय में सिर्फ शिलॉन्ग को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा
    त्रिपुरा के आदिवासी जिले
    मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड


    पिछले विधेयक से कैसे अलग नया कानून


    2016 के विधेयक में 11 वर्ष की शर्त को घटाकर 6 वर्ष किया गया था
    नए कानून में इसे घटाकर पांच वर्ष कर दिया गया है
    छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों को छूट देने का बिंदु भी पिछले विधेयक में नहीं था
    अवैध प्रवास के संबंध में सभी कानूनी कार्यवाही बंद करने का प्रावधान भी नया है


    कानून को लेकर दो तरह के विवाद


    1. जामिया-एएमयू और विपक्ष में इसलिए विरोध
    विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह एक धर्म विशेष के खिलाफ है
    यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है
    अनुच्छेद 14 सभी को समानता की गारंटी देता है
    आलोचकों का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता
    यह कानून अवैध प्रवासियों को मुस्लिम और गैर-मुस्लिम में विभाजित करता है
    अफगानिस्तान, बांग्लादेश व पाकिस्तान के अलावा अन्य पड़ोसी देशों का जिक्र क्यों नहीं
    31 दिसंबर, 2014 की तारीख का चुनाव करने के पीछे का उद्देश्य भी स्पष्ट नहीं
    2. असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध का कारण
    बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी अवैध प्रवासियों को बाहर किया जाए
    राज्य में इस कानून को 1985 के असम समझौते से पीछे हटने के रूप में देखा जा रहा है
    समझौते के तहत सभी बांग्लादेशियों को यहां से जाना होगा, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम
    असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों को डर है कि इससे जनांकिकीय परिवर्तन होगा


    सरकार का पक्ष


    इन विदेशियों ने अपने-अपने देशों में भेदभाव व धार्मिक उत्पीड़न झेला
    कानून से गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में आए लोगों को राहत मिलेगी
    भारतीय मूल के कई लोग नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता पाने में असफल रहे
    वे अपने समर्थन में साक्ष्य देने में भी विफल रहे
    एनआरसी और नागरिकता कानून का संबंध
    राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानि NRC में सभी भारतीयों का विवरण शामिल है।
    1951 के बाद सिर्फ असम में ही इसे अपडेट किया गया है
    असम में एनआरसी की अंतिम सूची में 19,06,657 लोगों का नाम शामिल नहीं था
    इनमें सिर्फ सात लाख मुस्लिम बांग्लादेशी थे, अन्य 12 लाख हिंदू-सिख समेत दूसरे धर्मों के
    एक विवाद यह भी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक से गैर मुस्लिमों के पास नागरिकता का अवसर होगा, लेकिन मुस्लिमों के लिए नहीं


    रद्द भी हो सकती है आपकी नागरिकता


    नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार किसी भी OCI कार्डधारक की नागरिकता इन वजहों से रद्द हो सकती है
    अगर OCI पंजीकरण में कोई धोखाधड़ी सामने आती है
    यदि ऐसा करना भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिये आवश्यक हो
    केंद्र द्वारा अधिसूचित कोई अन्य कानून का उल्लंघन होता है
    उल्लंघन में हत्या जैसे गंभीर अपराध के साथ यातायात नियमों का मामूली उल्लंघन भी शामिल है

  • 1976 में एक साथ ली थी डिफेंस अकैडमी में एंट्री, 44 साल बाद 3 बैचमेट तीनों सेनाओं के चीफ

    1976 में एक साथ ली थी डिफेंस अकैडमी में एंट्री, 44 साल बाद 3 बैचमेट तीनों सेनाओं के चीफ

    दिल्ली। जब केबी, छोटू और मनोज ने 17-17 साल की उम्र में 1976 में नैशनल डिफेंस अकैडमी को जॉइन किया था तो शायद ही उन्हें अंदाजा रहा होगा कि एक दिन ये बैचमेट एक साथ तीनों सेनाओं के चीफ रहेंगे। तब उनमें यही समानता थी कि तीनों के ही पिता इंडियन एयर फोर्स में सेवा दे चुके थे। आज 44 साल बाद तीनों अपनी-अपनी सर्विस में शीर्ष पर हैं।31 दिसंबर को आर्मी चीफ बनेंगे लेफ्टिनेंट जनरल नरवणेजब लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 31 दिसंबर को अगले आर्मी चीफ के तौर पर जनरल बिपिन रावत की जगह लेंगे तो वह एनडीए के अपने कोर्समेट- ऐडमिरल करमबीर सिंह और एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया के साथ मिलकर देश की सेनाओं के शीर्ष पर होंगे।ऐडमिरल, एयर चीफ मार्शल और नेक्स्ट जनरल तीनों ही बैचमेटऐडमिरल सिंह 31 मई को देश के 24वें नेवी चीफ बने थे और उनके वाइट यूनिफॉर्म पर हेलिकॉप्टर पायलट का विंग शोभा बढ़ाता है। एयर चीफ मार्शल भदौरिया 30 सितंबर को एयर फोर्स के चीफ बने थे और उनके भी ब्लू यूनिफॉर्म पर फाइटर पायलट का विंग शान से दिखता है।

    NDA के 56वें कोर्स का हिस्सा थे तीनों लेफ्टिनेंट

    जनरल नरवणे इस महीने के आखिर में 28वें आर्मी चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके ओलाइव-ग्रीन यूनिफॉर्म पर पैराट्रूपर विंग है। तीनों एनडीए के 56वें कोर्स का हिस्सा थे। एनडीए कैडेट के तौर पर 3 साल का कोर्स पूरा करने के बाद तीनों अपने-अपने सर्विस अकैडमी में पहुंचे जहां जून-जुलाई 1980 में ऑफिसर्स के तौर पर कमिशंड हुए।जन्मतिथि, करियर रेकॉर्ड, मेरिट, वरिष्ठता….सबका रखा जाता है ध्यानएक सीनियर ऑफिसर ने बताया, ‘यह बहुत ही दुर्लभ है कि एनडीए के 3 कोर्समेट अपनी-अपनी सेनाओं के प्रमुख हैं क्योंकि इसके लिए जन्मतिथि, करियर का रेकॉर्ड, मेरिट, वरिष्ठता जैसी तमाम बातें देखी जाती हैं और इन सबके साथ लक भी।’इसलिए भी दुर्लभ होता है बैचमेट्स का तीनों सेनाओं का प्रमुख बननासर्विस चीफ 62 साल की उम्र तक या 3 सालों तक (जो भी पहले हो) सेवा दे सकता है और दूसरी तरफ थ्री-स्टार जनरल (लेफ्टिनेंट जनरल, एयर मार्शल और वाइस ऐडमिरल) 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। इसी से जाहिर है कि तीनों बैचमेट का अपनी-अपनी सर्विस में चीफ बनना कितना दुर्लभ है।

    3 दशक पहले भी बना था ऐसा ही संयोग


    हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने अफसरों और कई वेटरंस से बात की लेकिन उन्हें इस तरह का सिर्फ एक ही उदाहरण याद आ रहा है। दिसंबर 1991 में एनडीए के 81वें कोर्स के पासिंग आउट परेड में तीनों सेनाओं के तत्कालीन प्रमुख- जनरल एस. एफ. रो़ड्रिक्स, ऐडमिरल एल. रामदास और एयर चीफ मार्शल एन. सी. सूरी मौजूद थे। यह भी दुर्लभ दृश्य था क्योंकि तीनों ही एनडीए के बैचमेट थे।

    नरवणे और सिंह तो स्कूली दिनों के भी दोस्त


    लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे और एयर चीफ मार्शल भदौरिया जहां एनडीए में ‘लीमा’ स्क्वॉड्रन का हिस्सा थे, ऐडमिरल सिंह ‘हंटर’ स्क्वॉड्रन में थे। एक ऑफिसर ने बताया, ‘पहले दोनों तो स्क्वॉड्रन मेट भी थे। इसके अलावा, ऐडमिरल सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे तो एनडीए जॉइन करने से पहले के दोस्त थे क्योंकि दोनों ने कुछ साल एक ही स्कूल में पढ़ाई की थी।’

  • अनाचार का फरार आरोपी फरीदाबाद में पकड़ाया

    अनाचार का फरार आरोपी फरीदाबाद में पकड़ाया

    खरसिया। नाबालिग से बलात्कार के मामले में 9 माह से फरार आरोपी को पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार युवक को पुलिस ने न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल दाखिल कर दिया गया है।

    पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार संजय राठौर पिता राम राज राठौर उम्र 38 वर्ष निवासी घाघरा थाना खरसिया जो कि धारा 376 454 506 बी 34 ता.हि. एवं 4-6 पास्को एक्ट का आरोपी है, विगत 9 माह से फरार चल रहा था। पुलिस को मुखबीर के माध्यम से सूचना मिली कि वह हरियाणा के फरीदाबाद में है तो खरसिया से पुलिस टीम हरियाणा रवाना हुई। पुलिस टीम ने संजय राठौर को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

    रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह के मार्गदर्शन में खरसिया पुलिस नगर निरीक्षक सुमत राम साहू के दिशा-निर्देश पर प्रधान आरक्षक शंकर सिंह क्षत्री एवं आरक्षक किशोर राठौर की टीम उसे फरीदाबाद से गिरफ्तार कर खरसिया लेकर आई और बाद में न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल दाखिल कर दिया गया है।