Author: Sunil Agrawal

  • उरला टीआई द्वारा मारपीट करने वाले वायरल हुए वीडियो के कारण, देशभर में छग पुलिस की किरकिरी’ डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश…

    रायपुर। आज डीजीपी डी.एम. अवस्थी ने प्रदेश के सभी आईजी-एसपी को सख्त निर्देश जारी करते हुए दो टूक कहा है कि आम नागरिकों से दुर्व्यवहार एवं मारपीट करने वाले पुलिस कर्मियों पर कठोर नियंत्रण किया जाए. यदि कोई पुलिस कर्मी दुर्व्यवहार करता है, तो उसे सीधे निलंबित करते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। अवस्थी ने यह निर्देश राजधानी रायपुर के उरला थाना के टीआई द्वारा एक आम आदमी की पिटाई करने के उस वीडियो के बाद दिए हैं, जिसकी वजह से देशभर में छत्तीसगढ़ पुलिस की जमकर किरकिरी हुई थी। वही खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर इस घटना को अमानवीय करार दिया था।डी एम अवस्थी ने आईजी-एसपी को कड़ा पत्र जारी करते हुए लिखा है कि पूर्व में भी कई बार यह निर्देश जारी किए गए हैं कि आम नागरिकों से पुलिस का व्यवहार सम्मानपूर्वक एवं सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए. हाल ही में कुछ घटनाएं प्रकाश में आई है, जिनमें पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के द्वारा आम जनता से दुर्व्यवहार एवं जबरन मारपीट की गई है। उन्होंने कहा है कि इस तरह के मामलों की वजह से विभाग में लंबे समय से मेहनत कर रहे ईमानदार और अनुशासित पुलिसकर्मियों की सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है और पुलिस की नकारात्मक छवि जनमानस के सामने आती है।

    वही अवस्थी ने सख्त लहजे में कहा है कि हाल ही में घटित इस प्रकार के प्रकरणों पर विभागीय जांच कर तत्काल कड़ी कार्यवाही कराना सुनिश्चित किया जाए।

  • आपबीती: नितिन उपाध्याय को निलंबित करने की मांग,TI की लाठी का शिकार हुआ युवक मां के साथ पहुंचा CSP दफ्तर…

    आपबीती: नितिन उपाध्याय को निलंबित करने की मांग,TI की लाठी का शिकार हुआ युवक मां के साथ पहुंचा CSP दफ्तर…

    रायपुर। राजधानी के बिरगांव में बीच सड़क राहगीरों की पिटाई मामले में टीआई नितिन उपाध्याय को पुलिस विभाग ने सिर्फ लाइन अटैच किया है, लेकिन पीड़ित मां-बेटे ने उसे निलंबित करने की मांग की है. शिकायत लेकर मंगलवार को दोनों सीएसपी दफ्तर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात सीएसपी से नहीं हो सकी, दोनों ने कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ है, थानेदार को कड़ी से कड़ी सजा देते हुए निलंबित करना चाहिए।

    दरअसल रविवार 7 जून को बिरगांव टीआई नितिन उपाध्याय ने कई लोगों पर लाठी से जमकर पिटाई की थी. पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ, जो कि पुलिस विभाग से लेकर सूबे के मुखिया तक पहुंच गया. टीआई की लाठी का शिकार हुए पीड़ित मितेश गुप्ता और माँ मीरा गुप्ता पहली बार मीडिया के सामने आए और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. पिटाई के कारण शरीर पर उपजे चोट के निशान को भी दिखाया।

    माँ मीरा गुप्ता ने बताया कि बेटे के साथ सब्जी लेने गई थी. इसी बीच रास्ते में टीआई खड़ा हुआ था. उसने हमसे पूछा कहा कि कहा गए थे. तब मेरे बेटे ने थैला दिखाते हुए सब्जी खरीदने जाने की बात कही. इतने में बिना किसी वजह के टीआई ने बेटे पर लाठी बरसाना शुरू कर दिया. मैंने छुड़ाने की कोशिश की, तो मुझे भी उसने धक्का दिया. हमारे साथ जो अन्याय किया है, उसकी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने टीआई नितिन उपाध्याय को सस्पेंड करने की मांग की है।

    पीड़ित मितेश गुप्ता ने बताया कि वो मूलत: बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले लंबे समय से बिरगांव में ही रह रहे हैं. पिता दिव्यांग है, वो अकेला घर में कमाने वाला शख्स है. निजी फैक्ट्री में काम करता है, लेकिन चोटिल होने की वजह से काम भी नहीं कर पा रहा. जिससे उसके घर में कमाई का जरिया खत्म हो गया है।

  • थाना प्रभारी को महंगी पड़ी जनता पर दादागिरी, CM ने एक्शन लेते हुए छुट्टी पर भेजा

    थाना प्रभारी को महंगी पड़ी जनता पर दादागिरी, CM ने एक्शन लेते हुए छुट्टी पर भेजा

    रायपुर। रायपुर में एक पुलिस अधिकारी को जनता के साथ दुर्व्यवहार करना महंगा पड़ा। उरला थाना प्रभारी के दुर्व्यवहार का यह वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो गया था। दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत जांच के आदेश दिए।

    दरअसल, बीरगांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसे कोरोना संदिग्ध माना जा रहा है. उसके अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन की ओर से तैयारी की जा रही थी, इस बीच लोग जमा होने लगे थे, जिसे हटाने के लिए पुलिस कर्मी को लाठी भांजनी पड़ी थी. लेकिन लाठी भांजने के चक्कर में मर्यादा भूल गए और इस पर बना थाना प्रभारी का जनता के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस पर लोगों ने गुस्सा जताया।

    जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक यह मामला पहुंचा तो उन्होंने थाना प्रभारी के इस कृत्य को अमानवीय कहा। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा कि इस मामले पर विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, साथ ही थाना प्रभारी को छुट्टी पर भेज दिया गया है।

  • कोरोना काल मे बचाव के लिए जरूरी है आयुर्वेद औषधि – ड़ाॅ आकाश अग्रवाल

    कोरोना काल मे बचाव के लिए जरूरी है आयुर्वेद औषधि – ड़ाॅ आकाश अग्रवाल



    खरसिया। दुनिया भर में फैली कोरोना वायरस की महामारी भारत व दुनिया के लिए किसी भी चुनौती से कम नहीं है, देश व दुनिया में हर एक व्यक्ति कोरोना महामारी से परेशान है। एक ओर शासन-प्रशासन हरेक सरकार चाहे राज्य हो या केन्द्र, जनता की सेवा में कोई कोर कसर नही रहने दे रहे हैं, वहीं दुसरी ओर चिकित्सक, नर्स कम्पाउंडर, सफाई कर्मचारी, समाज सेवी संस्था भी दिन रात एक कर इस मुश्किल समय में आम जनता के साथ खडा नजर आ रहा है। अधिकांश घरों में कोरोना से बचाव के लिए अनेक घरेलु उपाय व नुस्खें भी आजमाए जा रहें है जो कि बहुत कुछ कारगर भी साबित होते दिख रहे है। इसके साथ ही आयुर्वेद औषधी भी लोगो की प्रतिरोधक क्षमता बढाने व कोरोना से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। डाक्टरों के द्वारा भी आयुर्वेद औशधियों के प्रयोंग की सलाह दी जा रही है जिससे की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत की जा सकती है।
    कोरोना के संबंध में चर्चा करते हुये नगर के आयुर्वेंद चिकित्सक डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की जहा एक ओर भारत आयुर्वेद के जनक के रूप मे जाना जाता है वही इस भीषण कोरोना काल में कोरोना से बचाव व प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आयुर्वेद का लोहा माना है। आयुर्वेदिक औषधियाॅ कोरोना वायरस से बचाव करने काफी हद तक कारगर साबित हो रही है। डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की पूरे विश्व में वर्तमान में कोरोना वायरस की कोई प्रभावी दवा अभी तक तैयार नहीं की जा सकी है परन्तु आयुश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अनुसंधान कर आयुर्वेद औषधियों के उपयोग को बढावा देने की बात कही है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी माना है।
    कोरोना वायरस के लक्षणों के संबंध में चर्चा करते हुये डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की इस वायरस के मरीजों के प्रमुख लक्षणो में बुखार व शरीर में दर्द, सुखी खांसी, थकान, गले में खरास, दस्त लगना, सर दर्द, सुंघने एवं स्वाद की प्रतीती ना होना, शरीर की त्वचा का बदरंग होना, सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में दर्द एवं बोलने और चलने फिरने में तकलीफ होना आदि के अलावा वर्तमान में भारत में बिना लक्षणों वाले भी रोगी बहुत मात्रा में मिल रहे है, जिसके लिए सावधानी बहुत ही आवश्यक है। यह रोग एक संक्रामक रोग है, अर्थात एक व्यक्ति से दुसरे में फैलने वाला रोग है। इस रोग से बचाव के संबंध में डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की अनवश्यक घर से ना निकले, उचित दुरी बना कर रखे, हाथों को समय समय पर साबुन एवं पानी या एल्कोहल युक्त सेनेटाइजर से धोते रहे, मास्क का उपयोग करे, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा का उपयोग ना करे, साथ ही कोरोना से संबंधित कोई भी लक्षण होने पर तत्काल नजदीकी चिकित्सालय जावें या हेल्पलाइन न. 1075 पर संपर्क करे।
    डाॅ. आकाश अग्रवाल ने आगे बताया की अभी तक इस रोग का कोई प्रमाणिक इलाज खोजा नहीं जा सका है ना ही इसकी कोई वैक्सीन ही बन पाई है फिर भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाकर काफी हद तक रोग से बचा जा सकता है। प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिये नियमित रूप से दिनभर गर्म पानी का सेवन करे, नित्य व्यायाम एवं योग करे, पर्याप्त नींद ले, आयुवेद के गिलोय का काढा, त्रिकटु चूर्ण, तालीसादि चूर्ण, अष्वगंधा चूर्ण, आंवला चूर्ण का सेवन किया जा सकता है, साथ ही विटामिन सी एवं ज़िक सेवन करें एवं खान-पान का विषेश ध्यान रखें इन उपायों से कोरोना महामारी से काफी हद तक बचाव हो सकता है।

  • आईडिया नेटवर्क कर रहा ग्राहकों को परेशान

    आईडिया नेटवर्क कर रहा ग्राहकों को परेशान


    खरसिया। नगर में इन दिनों आईडिया के उपभोक्ता काफी परेशान हो रहे है, ग्राहकों द्वारा डीएनडी की सुविधा लेने के बाद भी आईडिया कंपनी से हर दिन मैसेज भेजे जा रहे है। जिससे ग्राहकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। कस्टमर केयर में बात करने के बाद भी ग्राहकों की कोई सुनवाई नही होने से ग्राहक लगातार परेशान हो रहे। इस विषय मे हमने नगर के कुछ लोगों से बात की और जानना चाहा तो बहुत से लोगों ने कहाँ हाँ हम परेशान है, आइडिया मोबाइल नेटवर्क की सीम उपयोग कर रहे है, और साथ ही हमारे द्वारा डीएनडी की सुविधा लेने के बाद भी आईडिया कंपनी वाले हमको तंग कर रहे बार बार मैसेज भेजकर। और साथ ही खरसिया में 4जी का नेटवर्क भी बहुत खराब है ठीक से काम नही करता। छत्तीसगढ़ में आइडिया की सिम चलाने वाले उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होने से छत्तीसगढ़ के अधिकारियों का अपने ग्राहकों के प्रति संवेदनशील ना होना समझ से परे है। इस तरह आइडिया का ग्राहक अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगा हैं। एक तरफ देश में 5 जी नेटवर्क की तैयारी चल रही है तो वही आइडिया कंपनी वाले खरसिया में 4जी की सुविधा पूरा भुगतान लेने के बाद भी ठीक से नहीं दे पा रहे हैं।

  • राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, ज्यादा देर बिजली कटी तो मिलेगा हर्जाना…. प्रति घंटे 5 रुपये से लेकर 50 रुपये मासिक तक मिलेगी क्षतिपूर्ति…आदेश लागू करने वाला देश का इकलौता राज्य

    राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, ज्यादा देर बिजली कटी तो मिलेगा हर्जाना…. प्रति घंटे 5 रुपये से लेकर 50 रुपये मासिक तक मिलेगी क्षतिपूर्ति…आदेश लागू करने वाला देश का इकलौता राज्य

    विद्युत अधिनियम, 2003 में उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त तथा बिना कटौती के विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी पूर्ति हेतु राज्य विद्युत नियामक आयोग को गुणवत्ता का मापदण्ड निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है।इसी अनुक्रम में छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2006 में नियम लागू किया गया था लेकिन उसमें कटौती रहित विद्युत प्रदाय के लिए मापदण्ड तथा उसका पालन नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति का प्रावधान शामिल नहीं था। इसे ध्यान में रखते हुए पुराने नियम के स्थान पर आयोग द्वारा मई 2020 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (विद्युत वितरण निष्पादन हेतु मानक) विनियम, 2020 अधिसूचित किया गया है। नये नियमों के अधीन विद्युत प्रदाय कम्पनियों द्वारा विद्युत आपूर्ति बंद होने की मासिक अधिकतम समयावधि तथा प्रत्येक बार विद्युत प्रदाय बंद होने की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित किय गया है। इसके साथ-साथ इन मापदण्डों के उल्लंघन की स्थिति में उपभोक्ताओं को दी जाने वाली आर्थिक क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान रखा गया है। आयोग द्वारा पहली बार उपरोक्त नियम के अनुसार प्रत्येक विद्युत वितरण लाइसेंसी को गुणवत्तायुक्त विद्युत प्रदाय हेतु निर्धारित सूचकांक का पालन सुनिश्चित करना होगा।
    इन मापदण्डों के अनुसार 10 लाख तथा उससे अधिक जनसंख्या वाले शहरों के लिए अप्रैल से जून की अवधि में किसी भी माह में 10 घंटे से अधिक विद्युत प्रदाय बंद होने की स्थिति में वितरण कम्पनी द्वारा उपभोक्ताओं को आर्थिक क्षतिपूर्ति देना होगा। इन्हीं माहों में अन्य नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 20 घंटे रखा गया है।


    जुलाई से मार्च की अवधि में 10 लाख तथा उससे अधिक जनसंख्या वाले शहरों के लिए किसी भी माह में 6 घंटे, अन्य नगरीय क्षेत्रों में 15 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे से अधिक विद्युत प्रदाय बंद होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति देना होगा।
    इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के विद्युत सेवाओं के लिए भी गुणवत्ता के मापदण्डों तथा इन मापदण्डों के पालन न होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को दी जाने वाली आर्थिक क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। विद्युत प्रदाय बंद होने पर उसे चालू करने के लिए षहरी क्षेत्रों में अधिकतम 4 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे की समय-सीमा निर्धारित किया गया है। इसके पालन न होने की स्थिति में वितरण कम्पनी को प्रति घंटा रू.5/- की दर से क्षतिपूर्ति देना होगा। इसी प्रकार लाइन में सामान्य खराबी के लिए क्रमश: 6 घंटे तथा 12 घंटे, ट्रांसफार्मर में खराबी के लिए 24 घंटे तथा 5 दिन, मीटर जलने की स्थिति में नये मीटर लगाने के लिए क्रमश: 8 घंटा एवं 2 दिन एवं इसका पालन न होने पर वितरण कम्पनी को उपभोक्ताओं को रू.50/- प्रति दिन के हिसाब से भुगतान करना होगा। नये घरेलू कनेक्शन के लिए समय-सीमा का पालन न करने की स्थिति में वितरण कम्पनी को उपभोक्ताओं को रू.50/- प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति राशि देना होगा।


    उपरोक्त व्यवस्था से विद्युत वितरण कम्पनी के कार्यप्रणाली में सुधार होगा तथा उपभोक्ता के प्रति जबावदेही बढ़ेगी। विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार के नियम लागू करने वाला छत्तीसगढ़ भारतवर्ष का एकमात्र राज्य है।

  • छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक के कोरोना पॉजीटिव मिलने के बाद थाना को किया गया सील, सभी पुलिस कर्मी थाना के भीतर किये गए क्वारंटाइन….

    छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक के कोरोना पॉजीटिव मिलने के बाद थाना को किया गया सील, सभी पुलिस कर्मी थाना के भीतर किये गए क्वारंटाइन….

    मुंगेली। मुंगेली जिला में एक पुलिस आरक्षक के कोरोना संक्रमित होने के बाद अब पूरे थाना को सील कर क्वारंटाइन सेंटर बना दिया गया है. वहीं थाना में कार्यरत तमाम पुलिस कर्मियों को थाना के भीतर ही क्वारंटीन कर दिया गया है।

    बताया जा रहा है कि जिले के फास्टरपुर थाना में पदस्थ एक आरक्षक के संक्रमित पाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है. जिसके बाद थाना को ही क्वारंटाइन सेंटर बना दिया गया और तमाम स्टाफ को उसके अंदर क्वारंटाइन कर दिया गया. इसके साथ ही सभी 37 पुलिस कर्मियों का सेंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया।
    उधर इस मामले में एडिश्नल एसपी कमलेश्वर चंदेल का कहना है कि पुलिस कर्मी के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद बड़े पैमाने पर पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारियों का सैम्पल जांच के लिए भेजा गया है. इसके अलावा ड्यूटी में तैनात पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सुरक्षा के संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था के साथ ही सोशल डिस्टेंसिग के साथ काम करने निर्देशित किया गया है।

    आपको बता दें मुंगली जिले में कोरोना संक्रमित 86 मरीजों की अब तक पहचान हुई है. जिसमें कि 39 मरीज कोविड हास्पिटल से डिस्चार्ज हो कर अपने घर जा चुके हैं. फिलहाल जिले में अभी एक्टिव मामलों की संख्या 47 है।

  • छत्तीसगढ़ में फेक वीडियो और खबरों से सावधान रहने की अपील, कोविड-19 पीड़ित हर व्यक्ति का निःशुल्क इलाज….. 

    छत्तीसगढ़ में फेक वीडियो और खबरों से सावधान रहने की अपील, कोविड-19 पीड़ित हर व्यक्ति का निःशुल्क इलाज….. 

    रायपुर। सोशल मीडिया में इन दिनों रायपुर के देवेन्द्र नगर का बताकर वायरल किया जा रहा स्वास्थ्य कर्मी युवती का वीडियो फेक है। यह वीडियो छत्तीसगढ़ का नहीं है। विभिन्न सोशल मीडिया में वायरल इस फेक वीडियो में एक युवती स्वयं को कोविड-19 पीड़ित बताती हुई मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से इस तरह के फेक वीडियो और समाचारों से सावधान रहने की अपील की है। इस तरह के वीडियो और खबरों से भ्रम, डर और आपाधापी की स्थिति निर्मित होती है।

    प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा रहे हर व्यक्ति का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। इसके संभावित मरीजों के सैंपल संकलित कर तत्काल जांच के लिए भेजा जा रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा प्रदेश में कोविड-19 पीड़ितों और उनके परिवार को प्राथमिकता से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही उन्हें हर तरह का सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

  • एफआईआर के चौबीस घण्टे बाद ही,आईएएस पाठक हुए निलंबित…

    एफआईआर के चौबीस घण्टे बाद ही,आईएएस पाठक हुए निलंबित…

    जांजगीर। जांजगीर के पूर्व कलेक्टर जेपी पाठक को एफआईआर दर्ज होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए,प्रमुख सचिव को उच्चस्तरीय जांच कराने के आदेश भी दे दिए हैं।
    बता दें की कल ही एक महिला ने पूर्व कलेक्टर पाठक के ख़िलाफ़ रेप का मुक़दमा जांजगीर सिटी कोतवाली में दर्ज करवाया था। मामले के चौबीस घण्टे के भीतर ही राज्य सरकार ने एक्शन लेते हुए,पाठक को निलंबित कर दिया है।

    कल ही इस प्रकरण में महिला ने एसपी पारूल माथुर से मिलकर पूरे प्रकरण की शिकायत की थी। महिला का आरोप था कि कलेक्टर ने 15 मई को उसके साथ चैबर में ही रेप किया था।

    इस मामले में महिला ने ये आरोप भी लगाया था कि जब वो कलेक्टर से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, तो उसके शिक्षाकर्मी पति को बर्खास्त करने की धमकी दी गयी।

  • छत्तीसगढ़ में कलेक्टर द्वारा रेप की दूसरी घटना पाठक से पहले एमआर सारथी को रेप केस में हुई थी जेल….

    छत्तीसगढ़ में कलेक्टर द्वारा रेप की दूसरी घटना पाठक से पहले एमआर सारथी को रेप केस में हुई थी जेल….

    जशपुर कलेक्टर एमआर सारथी को रेप के मामले में 7 बरस की सजा हुई थी,जेल में ही उनकी मौत हो गई।

    बिलासपुर के एडिशनल कलेक्टर विनोद का काटेला पर भी नौकरानी ने लगाया था रेप का आरोप


    रायपुर। ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी आज एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जांजगीर के पूर्व कलेक्टर जनक राम पाठक पर एक एनजीओ संचालिका ने अपने चेंबर में रेप करने का आरोप लगाया है। पाठक को हफ्ते भर पहले 27 मई को सरकार ने कलेक्टर से हटाकर राजधानी बुला लिया था। एनजीओ संचालिका पूर्व जनपद सदस्य रह चुकी है, उनका पति शिक्षाकर्मी है। एनजीओ के काम के सिलसिले में जांजगीर कलेक्टर से अक्सर उनकी मुलाकात होती थी, इस दौरान कलेक्टर से उसके ताल्लुकात बढ़ते गए।

    महिला का आरोप है कि कलेक्टर ने एनजीओ का काम दिलाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाया, उसके पति को भी ट्रांसफर कर जांजगीर में पोस्टिंग देने का आश्वासन दिया था। महिला का आरोप है कि कलेक्टर ने धोखा दिया न ही एनजीओ का काम दिलाया और ना ही उसके पति की पोस्टिंग कराई, ऊपर से उसे वे प्रताड़ित करने लगे। महिला ने पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर के पास पहुंचकर अपनी फरियाद की। आईएएस पर रेप के आरोप से ब्यूरोक्रेसी स्तब्ध हो गई। कलेक्टर न केवल जिले का मुखिया होता है, बल्कि जिला दंडाधिकारी भी होता है। ब्यूरोक्रेट्स भी मानते हैं कि यह एक शर्मनाक घटना है इसकी जल्द से जल्द जांच होनी चाहिए। उधर एसपी ने उच्च अधिकारियों से परामर्श लेकर जांच के निर्देश दिए हैं।

    छत्तीसगढ़ में कलेक्टर पर रेप का यह दूसरा मामला है, जसपुर के तत्कालीन कलेक्टर एमआर सारथी पर 2002 में वहां की आदिवासी होस्टल की अधीक्षिका ने रेप का आरोप लगाया था। तब छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी, सरकार ने इस घटना की जांच के लिए उस समय के डीआईजी डब्ल्यू एम अंसारी को जसपुर भेजा था। अंसारी ने 1 हफ्ते कैंप कर जांच की और अपनी रिपोर्ट में रेप की घटना को सही ठहराते हुए सारथी को दोषी ठहराया था। लेकिन सरकार को यह रिपोर्ट नागवार गुजरी किन्हीं कारणों से सरकार सारथी को बचाना चाहती थी। आईएएस लॉबी भी उस समय काफी स्ट्रांग थी। सरकार और आईएएस लॉबी के चलते सारथी पर निलंबन की भी कार्यवाही नहीं हुई, जबकि आदिवासी महिला न्याय की गुहार लगाती रही। सारथी के खिलाफ कड़ाई से जांच करने की कीमत डीआईजी अंसारी को चुकानी पड़ी, सरकार उन्हें उस नए जिले में दंतेवाड़ा का डीआईजी बनाकर भेज दिया जहां डीआईजी की कोई पोस्ट ही नहीं थी। उधर सारथी के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला जसपुर की निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा सुनाई थी। सारथी ने इसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दोनों अदालतों ने निचली अदालत की सजा बरकरार रखी। आखिरकार सारथी को रायपुर जेल जाना पड़ा जेल के दौरान ही बीमारी से उनकी मौत हो गई।

    इससे पहले अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान 1998 में बिलासपुर के अपर कलेक्टर विनोद काटेला पर उनकी नौकरानी ने रेप करने का आरोप लगाया था नौकरानी ने पुलिस में शिकायत की थी आईएएस ने शादी का झांसा देकर डेढ़ साल में अनेक बार दैहिक संबंध कायम किया। काटेला का बाद में जबलपुर ट्रांसफर हो गया था।