Author: Sunil Agrawal

  • गोवा के डिप्‍टी सीएम ने उनके फोन से अश्‍लील क्लिप भेजे जाने पर शिकायत दर्ज करवाकर दी ये सफाई…

    गोवा के डिप्‍टी सीएम ने उनके फोन से अश्‍लील क्लिप भेजे जाने पर शिकायत दर्ज करवाकर दी ये सफाई…

    पणजी। गोवा के उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत बाबू कावलेकर ने सोशल एक्टिविस्टों के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर उनके स्‍मूार्ट फोन सेअश्लील क्लिप भेजने पर सफाई दी है साथ ही उन्‍होंने पुलिस शिकायत करवाई है। उन्‍होंने बताया कि उसका फोन हैक कर लिया गया था।

    बता दें कथित तौर पर गोवा के उपमुख्‍यमंत्री कावलेकर के मोबाइल फोन से एक अश्‍लील संदेश रविवार आधी रात के बाद सोशल एक्टिविस्‍टों के एक समूह में भेजा गया था। चंद्रकांत कावलेकर ने साइबर पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा है कि क्लिप को उसके फोन से व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया था जब यह “फोन से यह मैसेज भेजा गया तब वो फोन ऑपरेट नहीं कर रहे थे वो गहरी नींद में सो रहे थे। उन्होंने कहा कि “कुछ बदमाशों” ने “व्हाट्सएप ऑफ गोवा” नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील सामग्री के साथ एक वीडियो भेजा था। वीडियो में “मेरे नाम के साथ कुछ आपराधिक इरादे से जानबूझकर कर ये मैसेज भेजा गया।

    उन्होंने ध्यान दिलाया कि वीडियो को उन कई समूहों में से केवल एक को भेजा गया था जिसका वह हिस्सा है। “इसके अलावा, जिस समय यह संदेश भेजा गया था, मैं फोन के पास नहीं था और मैं गहरी नींद में सो रहा था। उनके कहा कि मेरे नाम को बदनाम करने और जनता के सामने मेरी गलत छवि पेश करने के लिए ऐसे कई प्रयास किए गए हैं।null

    उपमुख्‍मंत्री ने पुलिस को लिखा कि “मैं उन सभी उपद्रवियों और बेईमान व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता हूं, जिन्होंने मेरे मोबाइल फोन के साथ आपराधिक हैकिंग / छेड़छाड़ की और अश्लील सामग्री अपलोड और उसे भेजा।

    बता दें विपक्षी दल भी उपमुख्‍यमंत्री के खिलाफ पुलिस के पास गए। गोवा कांग्रेस ने सोमवार को सुबह 1.20 बजे व्हाट्सएप ग्रुप में एक अश्लील वीडियो पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए गोवा डिप्‍टीसीएम कावलेकर के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। एक अन्य शिकायत, गोवा फॉरवर्ड पार्टी की महिला इकाई द्वारा, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही और कहा कि “यह अच्छी तरह से जानते हुए कि वीडियो प्रकृति में पूरी तरह से कामुक है और यौन स्पष्ट सामग्री है, वास्तव में अश्लील था, वह अभी भी आगे गया और इसे एक सार्वजनिक समूह पर साझा किया, जिससे इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रेषित किया गया। बता दें कावलेकर ने पिछले साल कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है और उन्हें गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजई सरदेसाई के स्थान पर सरकार में नंबर दो पद दिया गया और उपमुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया।

  • जानिए क्या है वायरल तस्वीर का सच..

    जानिए क्या है वायरल तस्वीर का सच..

    रायपुर। कुछ वक्त पहले नेटफ्लिक्स पर एक डॉक्यूमेंट्री आई थी जिसमें यह बताया गया था कि कैसे सोशल मीडिया ने जिंदगी को अपने इर्द-गिर्द ऐसा फंसा रखा है कि इसकी जाल से निकल पाना नामुमकिन है। आज के समय में सोशल मीडिया जो दिखाना चाहता है हम और आप वह देखते हैं मानते हैं और समझते हैं वास्तविकता में जो नहीं है उसका भी होने का भ्रम सोशल मीडिया के वजह से हो जाता है और उस भ्रम की वजह से कभी कभी नुकसान भी हो जाता है।

    सोशल मीडिया के द्वारा फैलाया गया ऐसा ही एक भ्रम इन दिनों खूब वायरल हो रहा है सोशल मीडिया में छतरी लिए खड़े हुए शख्स की तस्वीर को वायरल करते हुए यह बताया गया है कि इस तस्वीर में नजर आ रहे शख्स छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव आरपी मंडल है और उनके साथ जो महिला है वह मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ उप सचिव सौम्या चौरसिया है तस्वीर को देख कर पहली नजर में ही यह धारणा बन सकती है की तस्वीर सच कह रही है, इस तस्वीर में मुख्य सचिव अपनी जूनियर अधिकारी को बारिश से बचा रहे हैं। इस तस्वीर के सोशल मीडिया में वायरल होते ही इस तस्वीर पर टिप्पणी और कमेंट भी आने लगे कुछ लोगों ने इस तस्वीर को नेगेटिव इमेज बताकर उसे प्रचारित किया तो कुछ नहीं इस तस्वीर में मुख्य सचिव के नारी सम्मान की भावनाओं को व्यक्त करते हुए उनकी तारीफ की।

    क्या है हकीकत

    उक्त तस्वीर की पड़ताल करने पर यह तस्वीर भूखी साबित हुई है उक्त तस्वीर में न तो मुख्य सचिव आरपी मंडल है और ना ही मुख्यमंत्री सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया..

    हकीकत में यह तस्वीर बलौदा बाजार जिले की एडिशनल एसपी निवेदिता पॉल की है जो एक तेरहवीं में शोक श्रद्धांजलि व्यक्त करने पहुंची थी उनके साथ उनके अधीनस्थ डीएसपी संजय तिवारी है जो अपने अधिकारी को छाता लेकर बारिश से बचा रहे हैं इस तस्वीर को सोशल मीडिया में यह कह कर प्रचारित किया जाएगा की यह आरपी मंडल और सौम्या चौरसिया की तस्वीर है और लोगों ने बिना जांच किए इसे सच मान कर इस पर कमेंट करना शुरू कर दिया।

    एक अपील आप सभी से

    हम अपने सभी पाठकों से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी मैसेज को बिना जाने, जांचें, समझे उसे वायरल ना करें न ही कोई प्रतिक्रिया दें, जरूरी नहीं की सोशल मीडिया में डाली गई हर बात सच ही हो। कोरोना काल में भी सोशल मीडिया के द्वारा कोरोना से सम्बंधित ऐसी कई बातों को प्रचारित किया गया जो सच नहीं थी रायगढ़ जिले के पुलिस कप्तान को जिले वासियों से अपील तक करनी पड़ी थी कि वह सोशल मीडिया में भ्रामक कंटेंट पोस्ट ना करें अन्यथा कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है।

  • किसान बनकर बाइक से धान खरीद केंद्र पहुंचे डीएम, मुंह पर अंगोछा और पैरों में थी हवाई चप्पल….

    किसान बनकर बाइक से धान खरीद केंद्र पहुंचे डीएम, मुंह पर अंगोछा और पैरों में थी हवाई चप्पल….

    रामपुर। खबर उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से है। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह 10 अक्टूबर को शर्ट लटकाए, मुंह पर अंगोछा बांधकर और पैरों में हवाई चप्पल पहनकर धान खरीद केंद्र पहुंचे गए। किसान की वेशभूषा देखकर डीएम आन्जनेय सिंह को कोई पहचान नहीं सका। इस दौरान उन्होंने किसान बनकर ही अपना धान बेचने की बात की। यहां तक कि वहां पर मंडरा रहे बिचौलियों से भी उनका सामना हुआ। कुछ ही समय में सारा गड़बड़झाला उनके सामने आ गया।

    शिकायतों का सच जानने के लिए किसान बनकर पहुंचे खरीद केंद्र

    दरअसल, जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को पिछले काफी समय से किसानों की तरफ से शिकायतें मिल रही थी। इस बात का सच जानने के लिए डीएम सामान्य व्यक्ति की तरह धान खरीद केंद्र पहुंचे। बता दें कि बिलासपुर में मंडी परिसर से काफी पहले उनका काफिला रुक गया था। वह बाइक पर सवार होकर मंडी पहुंच गए। इस दौरान डीएम ने कई लोगों से किसान बनकर धान बेचने की बात की। जिसके बाद डीएम ने बिलासपुर स्थित एनसीसीएफ के क्रय केंद्र पर भारी अनियमितता पर केंद्र प्रभारी के खिलाफ धान खरीद में शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के प्रति लापरवाही बरतने के कारण एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।

    धान खरीद हो चुकी है शुरू

    डीएम आन्जनेय कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि धान खरीद शुरू हो चुकी है और हमारे सभी केंद्र ऑनलाइन हो चुके है। कुछ शिकायत मिल रही थी, जिन्में मिलक मंडी के बाहर जो खरीद हो रही थी उनके ऊपर जुर्माना लगाया और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। वहीं, अब शिकायत मिली थी कि 11 सौ से लेकर 14 सौ तक में खरीद की जा रही है। इस शिकायत को देखने मैं धान खरीद केंद्रों का औचक निरीक्षण करने निकला था।

    400 से 500 रुपए कम में खरीद लेते है धान: डीएम

    डीएम ने बताया कि खरीद केंद्र के अंदर तो प्राइवेट व्यापारियों के लोग किसानों को बहला-फुसलाकर विभिन्न दामों पर किसान के धान को खरीद लेते है और दाम करीब 400 से 500 रुपए कम होता है। डीएम ने बताया कि उन्होंने खुद घूमकर और लोगों से बातचीत करके, इतना ही नहीं जो प्राइवेट खरीददार थे उनसे भी बातचीत करके इस चीज को देखा। आज अपने सारे अधिकारियों को इसी संबंध में बुलाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान से कम दाम में धान की खरीददारी करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

    दो खरीद केंद्र पर की कार्रवाई

    डीएम आन्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि आज हमने दो खरीद केंद्रों पर कार्रवाई की है। मिलक में भी कार्रवाई की। साथ ही यह व्यवस्था भी की जा रही है कि किसानों को आसानी से खरीद केंद्र दिखे। साथ ही किसान वहां सीधे एंट्री पा सके और बीच में कोई प्राइवेट आदमी न हो। इसके लिए कमेटी भी बनाई जा रही है, जो हर जगह रोड पर निगरानी रखेगी। अगर सड़क पर किसान से कोई सौदा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • छेड़छाड़ और अनाचार मामलों की सुनवाई रोजाना करने CM ने लिखा मुख्य न्यायाधीश को पत्र, सभी जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का किया अनुरोध…

    छेड़छाड़ और अनाचार मामलों की सुनवाई रोजाना करने CM ने लिखा मुख्य न्यायाधीश को पत्र, सभी जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का किया अनुरोध…

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.आर. रामचंद्र मेनन को पत्र लिखकर सभी जिलों में यौन अपराधों से संबंधित प्रकरणों की शीघ्र सुनवाई हेतु सभी जिलों में आवश्यक संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट अधिसूचित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इसके लिए राज्य शासन की ओर से समस्त आवश्यक सहयोग देने की सहमति दी है।
    मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि देश में महिलाओं एवं बच्चों के विरूद्ध यौन अपराध गंभीर चिंता का विषय है। यद्यपि उक्त विषय पर पर्याप्त कानून बने हैं, परंतु उसके बावजूद उपरोक्त प्रकार के अपराधों में कमी होते नहीं दिख रही है तथा समय पर न्याय नहीं मिलना भी एक चिंता का विषय है। राज्य के न्यायालयों में महिलाओं एवं बच्चों के विरूद्ध हुए यौन अपराधों के मामलों में शीघ्र व तत्परतापूर्वक विचारण की आवश्यकता है तथा हमारा यह दायित्व है, कि यौन अपराधों के पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले और दोषी अतिशीघ्र कठोर दण्ड से दंडित हों।
    श्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि यह उचित होगा कि प्रदेश के सभी जिलों में यौन अपराधों से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई हेतु आवश्यक संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) अधिसूचित किए जाएं, जिसमें ऐसे प्रकरणों की सुनवाई समय सीमा (जो निर्धारित कि जाए) में तथा दिन-प्रतिदिन ( Day to Day Basis) हो। राज्य शासन इस हेतु समस्त आवश्यक सहयोग हेतु सहमत है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने न्यायमूर्ति श्री मेनन से इस विषय में आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है

  • अमित और ऋचा के अधिवक्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखा पत्र, जानिये क्या कहाँ…

    अमित और ऋचा के अधिवक्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखा पत्र, जानिये क्या कहाँ…

    रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट के अपने अधिवक्ता (AOR) पी॰एन॰ पुरी के माध्यम से भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिख कर बताया है कि उनके मुवक्किल ने 24 सितम्बर 2020 को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2013 में नियम विरुद्ध किए गए संशोधन को चुनौती देते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका लगाई है। उन्होंने ये भी बताया कि उपरोक्त संशोधन राज्य सरकार द्वारा केवल अमित जोगी के नामांकन पत्र को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से रद्द करने की दुर्भावना से किए गए हैं। पुरी ने यह भी जानकारी दी कि अमित जोगी के कँवर जनजाति होने की पुष्टि स्वयं उच्च न्यायालय उनके विरुद्ध दायर चुनाव याचिका में कर चुकी है और इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। अतः उच्च न्यायालय के इस फ़ैसले ने अंतिम रूप धारण कर लिया है। साथ ही, उच्च न्यायालय ने उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा उनके पिता स्वर्गीय अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के आदेश में स्टे (रोक) लगा दी है। पुरी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से सर्वोच्च न्यायालय के इस मामले में फ़ैसले न आ जाने तक मरवाही उप-चुनाव के निर्वाचन अधिकारी को सरकार के राजनीतिक दबाव में न आकर अमित जोगी का नामांकन पत्र को रद्द न करते हुए उसे स्वीकार करने के निर्देश देने का निवेदन किया है।
    अमित जोगी की धर्मपत्नी डॉक्टर ऋचा जोगी ने भी अपने अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय के माध्यम से भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिख कर बताया है कि उनके मुवक्किल ने भी मुंगेली ज़िला सत्यापन समिति के समक्ष चल रहे प्रकरण की वैधानिकता के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका लगाई है। उन्होंने कहा कि अगर 24 सितम्बर 2020 को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2013 में नियम विरुद्ध किए गए संशोधन को स्वीकार भी कर लें, तब भी उपरोक्त समिति को ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलम्बित करने का मात्र अधिकार प्राप्त है, और जब तक उनका प्रमाण पत्र पूर्ण रूप से निरस्त नहीं किया जाता है, उसको स्वीकार करने के अलावा निर्वाचन अधिकारी के पास कोई दूसरा वैधानिक विकल्प नहीं है। मुखोपाध्याय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से सर्वोच्च न्यायालय के इस मामले में फ़ैसले न आ जाने तक मरवाही उप-चुनाव के निर्वाचन अधिकारी को सरकार के राजनीतिक दबाव में न आकर अमित जोगी का नामांकन पत्र को रद्द न करते हुए उसे स्वीकार करने के निर्देश देने का निवेदन किया है।

  • आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख़ खान, अजय देवगन, अक्षय कुमार सहित कुल 34 प्रोडक्शन हाउसो ने दो खबरिया चैनलों के खिलाफ खटखटाया अदालत का दरवाज़ा….

    आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख़ खान, अजय देवगन, अक्षय कुमार सहित कुल 34 प्रोडक्शन हाउसो ने दो खबरिया चैनलों के खिलाफ खटखटाया अदालत का दरवाज़ा….

    दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत मौत के प्रकरण और उसके बाद मीडिया पर हो हल्ले के बीच जब सब कुछ शांत हो गया और ऐसा लगता है कि तूफ़ान गुज़र चूका है। थोडा सीन बदल रहा है। इसके बाद ही आज दिग्गज प्रोडक्शन हाउसो ने दो मीडिया संस्थान क्रमशः अर्नब गोस्वामी का रिपब्लिक टीवी और टाइम नाऊ के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। बॉलीवुड के दिग्गज प्रोडक्शन हाउसों ने उन मीडिया संस्थानों के खिलाफ एक प्रकार से अब हल्ला बोल दिया है जिन पर ‘बॉलीवुड को लेकर दुष्प्रचार अभियान’ चलाने के आरोप लगाए गए हैं।

    अदालत का दरवाज़ा खटखटाने वाले प्रोडक्शन हाउसेज में सलमान खान, आमिर खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, अनिल कपूर और शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस समेत 34 प्रोडक्शन हाउस हैं। जबकि चार प्रमुख एसोसिएशंस भी इसमें शामिल हैं। यह याचिका बॉलीवुड के खिलाफ गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने के लिए की गई है। याचिका में बॉलीवुड हस्तियों का मीडिया ट्रायल रोकने की मांग भी की गई है। इस तरह बॉलीवुड ने एकजुट होकर इन चैनलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    यह मुकदमा रिपब्लिक टीवी और इस चैनल के अर्नब गोस्वामी व प्रदीप भंडारी, टाइम्स नाउ और इसके शीर्ष चेहरे राहुल शिवशंकर और नविका कुमार के खिलाफ दायर किया गया है। याचिका में कहा गया है कि चैनलों और साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को “बॉलीवुड और इसके सदस्यों के खिलाफ गैर-जिम्मेदार और अपमानजनक टिप्पणी करने या प्रकाशित करने से बचना चाहिए।” याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें फिल्म हस्तियों का मीडिया ट्रायल चलाने और इंडस्ट्री के लोगों की गोपनीयता के अधिकार में हस्तक्षेप करने से रोका जाये।
    केस करने वालों में द प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, द सिने ऐंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, द फिल्म ऐंड टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल, स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन, आमिर खान प्रोडक्शंस, ऐड-लैब फिल्म्स, अजय देवगन फिल्म्स, आंदोलन फिल्म्स, अनिल कपूर फिल्म ऐंड कम्युनिकेशन नेटवर्क, अरबाज खान प्रोडक्शंस, आशुतोष गोवारिकर प्रोडक्शंस, बीएसके नेटवर्क ऐंड एंटरटेनमेंट, केप ऑफ गुड फिल्म्स, क्लीन स्लेट फिल्म्स, धर्मा प्रोडक्शंस, एमे एंटरटेनमेंट ऐंड मोशन पिक्चर्स, एक्सेल एंटरटेनमेंट, फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस, होम प्रोडक्शन, कबीर खान फिल्म्स, लव फिल्म्स, मैकगफिन पिक्चर्स, नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, वन इंडिया स्टोरीज, राकेश ओमप्रकाश मेहरा पिक्चर्स, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट, रील लाइफ प्रोडक्शंस, रोहित शेट्टी पिक्चर्स, रॉय कपूर प्रोडक्शंस, सलमान खान वेंचर्स, सोहेल खान प्रोडक्शंस, सिख्या एंटरटेनमेंट, टाइगर बेबी डिजिटल, विनोद चोपड़ा फिल्म्स, विशाल भारद्वाज फिल्म, आरएस एंटरटेनमेंट और यशराज फिल्म्स शामिल है।

  • टेंडर दस्तावेज में ओवर राइटिंग मामले में कमिश्नर ने बनाई जांच कमेटी…

    टेंडर दस्तावेज में ओवर राइटिंग मामले में कमिश्नर ने बनाई जांच कमेटी…

    फर्जीवाड़ा करने वाले के विरूद्ध सख्त कार्रवाई के संकेत

    नगर निगम में टेंडर दस्तावेजों में ओवर राइटिंग कर ठेका हथियाने को लेकर की गई शिकायत में निगम ने अब जांच शुरू कर दी है। नगर निगम आयुक्त ने कूट रचना करने वाले की पहचान के लिए जांच कमेटी का गठन किया है।
    यहां बता दें कि आशीष ट्रेडर्स एंड कंस्ट्रक्शन फर्म के प्रोपराइटर आशीष चौबे ने आरोप लगाया था कि नगर निगम में चहेते ठेकेदारों को ठेका दिलाने के लिए टेंडर के दौरान बिलो दर में ओवर राइटिंग कर टेंडर बांटा जा रहा है। ठेकेदार ने अपनी शिकायत में कहा कि पुराने मरीन ड्राइव स्थित निगम के कांप्लेक्स में मरम्मत कार्य के लिए 2 लाख की निविदा निकाली गई थी। जिसकी अंतिम तिथि 7 अक्टूबर शाम 4:30 बजे टेंडर पहुंचने का था इस टेंडर प्रक्रिया में तीन फर्मों द्वारा आवेदन किया गया था जिसमें तीनों फर्म के द्वारा बिलो दर डाली गई थी। शौर्य कंस्ट्रक्शन ने 3%, आयुष कन्सट्रक्शन फर्म ने 14% एवं आशीष ट्रेडर्स एंड कंस्ट्रक्शन ने 7% विलो दर भरा था। इस आधार पर आयुष कंस्ट्रक्शन को टेंडर दिया गया। इधर आशीष ट्रेडर्स के प्रोपराइटर ने शिकायत कर आरोप लगाया है कि आयुष कंस्ट्रक्शन को गलत तरीके से ठेका दिया गया है। आयुष कंस्ट्रक्शन ने महज 4% बिलो दर की राशि डाली थी लेकिन ओवर राइटिंग कर उसे 14 प्रतिशत बना दिया गया।

    ठेकेदार ने अपने लिखित शिकायत में कहा कि निगम के ही किसी कर्मचारी ने आयुष कंस्ट्रक्शन को ठेका दिलाने ओवर राइटिंग किया है। ठेकेदार ने कमिश्नर और महापौर से मामले की जांच की मांग की थी। पूरे मामले की गम्भीरता को देखते हुए कमिश्नर आशुतोष पाण्डेय ने निगम के तकनीय अधिकारियों की एक जांच कमेटी बनाई है। जो इसकी जांच करेंगे। कमिश्नर का कहना है कि जांच प्रतिवेदन के बाद वे खुद इसकी जांच करेंगे, फर्जीवाडा करने वाले के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • राजभवन और सरकार के बीच बढ़ रहा टकराव…? 

    राजभवन और सरकार के बीच बढ़ रहा टकराव…? 

    राजभवन के सचिव सोनमणि बोरा को सरकार ने हटा दिया। उनकी जगह बस्तर कमिश्नर अमृत खलको को नया सिकेट्री नियुक्त किया गया है। वहीं, केडी कुंजाम को राजभवन का संयुक्त सचिव।
    सामान्य प्रशासन के आदेश के अनुसार खलको की मूल पोस्टिंग सचिव कृषि रहेगी। राजभवन सिकेट्री का अतिरिक्त प्रभार रहेगा उनके पास। आमतौर पर ऐसा होता नहीं। राजभवन की मूल पोस्टिंग होती है और दूसरे विभाग एडिशनल रहते हैं। लेकिन, खलको की मूल पोस्टिंग कृषि रहेगी। इसी तरह केडी कुंजाम के पास नियंत्रक खाद्य और औषधि के साथ ज्वाइंट सिकेट्री राजस्व, आपदा और सामान्य प्रशासन पहले से था। राजभवन के संयुक्त सचिव का चार्ज अतिरिक्त रहेगा।
    हालांकि, सोनमणि को सेंट्रल डेपुटेशन पर जाना है। लेकिन, अभी तक पोस्टिंग आदेश जारी नहीं हुआ है। जब तक भारत सरकार से आदेश निकल नहीं जाता, तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता। लिहाजा, सोनमणि की राजभवन से विदाई से लोग चौंक गए। फिर, खलको की जगह बस्तर में किसी नए कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की गई है। ये ऐसे केस में होता है, जब सरकार कोई मैसेज देना चाहती हो। रुटीन पोस्टिंग में ऐसा नहीं होता।
    बताते हैं, सोनमणि बोरा के हटाए जाने की जानकारी राजभवन को भी नहीं थी। जीएडी का आदेश जब वायरल हुआ तो पता चला कि सचिव बदल गए हैं। जानकारों का कहना है, राजभवन और राज्य सरकार के बीच केमेस्ट्री जब ठीक रहती है तो सरकार राजभवन के अधिकारियों को बदलने से पहले राजभवन की पसंद पूछ लेता है या फिर राजभवन जिस अफसर को चाहता है, उसे पोस्ट कर दिया जाता है। लेकिन, ये तभी होता है जब रिश्ते ठीक हो।
    दूसरी घटना आज ये हुई कि राज्यपाल कानून-व्यवस्था को लेकर आज राजभवन में बैठक करने वाली थी। इसमें गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, डीजीपी समेत गृह और पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों को मौजूद रहना था। मगर ऐन वक्त पर जानकारी आई कि गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू क्वारंटाईन हो गए हैं, इसलिए बैठक स्थगित की जा रही है।
    राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव की नींव कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति की नियुक्ति के दौरान पड़ी थी। जब राजभवन ने संघ पृष्ठभूमि के बलदेव शर्मा को वीसी नियुक्त कर दिया। बलदेव शर्मा की नियुक्ति को कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई ने विरोध किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ विवि संशोधन विधेयक समेत कई विधेयक राजभवन में पेंडिंग पड़ी है। इसको लेकर सरकार के चार मंत्री राज्यपाल से मिलने राजभवन गए थे। लेकिन, अभी तक ये क्लियर नहीं हुआ है।
    कोई भी नया बिल या संशोधन के मामले में नियम यह है कि विधानसभा से बिल पास होने के बाद आखिरी दस्तखत करने के लिए उसे राज्यपाल के पास भेजा जाता है। राज्यपाल अगर किसी सुझाव के साथ एक बाद विधेयक लौटा देते हैं तो कैबिनेट दोबारा बिल राजभवन भेजता है। राज्यपाल की बाध्यता होती है दूसरी बार बिल पर दस्तखत करने की। मगर विवि संशोधन विधेयक को राजभवन आवश्यक कार्रवाइयो के लिए अपने पास रख लिया है। करीब चार महीने से विधेयक राजभवन में है। चारों मंत्रियों को राज्यपाल ने बताया था कि उन्होंने यूजीसी से मार्गदर्शन मांगा है, उसके बाद विधेयक पर निर्णय लेंगी। बताते हैं, राज्यपाल विवि अधिनियमों में किए गए संशोधनों से सहमत नहीं हैं। इस विधेयक के पास हो जाने से कुलपति नियुक्ति का अधिकार राजभवन की बजाए राज्य सरकार को मिल जाएगा।
    इसके बाद राज्य सरकार ने गौरेला को नगर पंचायत का दर्जा दिया तो राजभवन ने उसे पांचवी अनुसूची के तहत बिना राज्यपाल की अनुमति से ऐसा करने से रोक दिया। कांकेर के पत्रकार मारपीट मामले में भी राजभवन की सक्रियता सरकार को जाहिर है खटकी होगी। राजभवन और सरकार के बीच दुरियां बढ़ने के ऐसे कई कारण हैं।

  • समंदर किनारे तूफानी डांस सिखा रहीं नोरा फतेही, उनके हर स्टेप्स पर फिदा हो रहे फैन्स…

    समंदर किनारे तूफानी डांस सिखा रहीं नोरा फतेही, उनके हर स्टेप्स पर फिदा हो रहे फैन्स…

    नोरा ने अपने इंसटाग्राम पर यह नया डांस वीडियो शेयर किया है, जिसमें उनके कातिल मूव्स फैन्स का खूब दिल जीत रहे हैं। हालांकि, नोरा इस वीडियो में अपने दोस्त मार्स को डांस मूव्स सिखाने की कोशिश कर रही हैं।

    नोरा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि वह बीच पर कुछ डांस मूव्स सिखा रही हैं। नोरा के डांस को देखकर फैन्स दीवाने हुए जा रहे हैं। इस वीडियो में नोरा ने कई लाजवाब मूव्स दिखाए, जिसे डांस के दीवाने अपने स्टेप्स में कॉपी कर सकते हैं।



    इससे पहले भी उन्होंने बीच पर डांस वाला एक वीडियो शेयर किया था और इसमें भी वह मार्स के साथ ही डांस करती दिख रही थीं। इस डांस में उन्होंने अलग मूव्स दिए, जिसे सबने काफी पसंद किया।

    नोरा फतेही हाल ही ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ के उस वीडियो को लेकर सुर्खियों में आई थीं, जिसे लेकर कोरियोग्राफर और शो के जज टेरेंस लुईस पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ऐक्ट के दौरान नोरा को गलत तरीके से छूआ था। इस वायरल वीडियो को लेकर लोगों ने टेरेंस पर आपत्तिजनक कॉमेंट करने शुरू कर दिए थे। तब नोरा टेरेंस के बचाव में सामने आईं और ट्रोल करने वालों के आरोपों को गलत बताते हुए फटकार लगाई थी।

  • सुशांत मामले में बुरा फंसा बॉलीवुड गैंग, कोर्ट ने कहा-हाजिर हो नहीं तो सुना देंगे एकतरफा फैसला

    सुशांत मामले में बुरा फंसा बॉलीवुड गैंग, कोर्ट ने कहा-हाजिर हो नहीं तो सुना देंगे एकतरफा फैसला

    सुशांत सिहं राजपूत की मौत के बाद से ही नेपोटिज्म को बढ़ावा देने वाला बॉलीवुड गैंग लगातार निशाने पर है. इस गैंग पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. जिसकी जांच भी सीबीआई की टीम कर रही है. इस गैंग के मेंबरों की हालात ऐसी हो गई है ये अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद इनके खिलाफ देश की जनता का फूटा गुस्सा. जैसे ही ये लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं तो यूजर्स इनकी जमकर क्लास लगा देते हैं इसलिए अब ये सोशल मीडिया अकांउटों पर पोस्ट डालने से कतरा रहे हैं. ये सब देखकर इस गैंग के तिलमिलाए मेंबर भले ही 2 समाचार चैनलों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंच गए हों. और पत्रकारों पर आरोप लगाया हो कि वो हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं. मगर अब ऐसी खबर सामने आई है जिसने बॉलीवुड गैंग की मुसीबतों को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है।

    दरअसल सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मुजफ्फरपुर की अदालत ने करण जौहर और एकता कपूर समेत 7 फ़िल्मी हस्तियों को नोटिस जारी किया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश मालवीय की अदालत ने आदेश जारी किया है कि ये सभी 21 अक्टूबर तक हाजिर हों, या फिर अपने वकीलों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराएँ. इन दोनों के अलावा आदित्य चोपड़ा, संजय लीला भंसाली, साजिद नाडियावाला, एकता कपूर, भूषण कुमार और दिनेश विजया को भी नोटिस भेजा गया है. इन सभी आरोपियों पर सुशांत को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है. अदालत ने इस गैंग को चेताया है कि अगर ये समय पर हाजिरी नहीं दर्ज कराते हैं तो इस मामले में एकपक्षीय सुनवाई करके फैसला जारी किया जा सकता है. यानी कि कोर्ट फिर एक पक्ष की ही सुनकर इनके खिलाफ एक्शन ले सकता है।

    बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 3 दिनों बाद अधिवक्ता सुधीर ओझा ने 17 जून को ही इस मामले में मामला दायर किया था. उन्होंने सलमान खान सहित इन फ़िल्मी हस्तियों को सुशांत की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था. तब सीजेएम की अदालत ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए रद्द कर दिया था. इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के जिला अदालत में रिवीजन याचिका दायर की, जो स्वीकृत हो गई।

    7 अक्टूबर को अभिनेता सलमान खान ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई थी. लेकिन बाकी सातों हस्तियॉं गैर-हाजिर थीं, जिसके लिए उन्हें अब हाजिर होने के लिए कहा गया.है। सुधीर ओझा का आरोप है कि इन लोगों ने साजिश के तहत सुशांत की सारी फ़िल्में छीन लीं, जिसके बाद वो अवसादग्रसित हो गए और उन्होंने आत्महत्या कर ली. अधिवक्ता ओझा ने कहा कि सभी आरोपिय़ों को अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

    तो वहीं फ़िल्मी दुनिया से जुड़े 34 फिल्म निर्माताओं जिसमें अभिनेता और निर्देशक भी शामिल हैं, इन्होंने 4 पत्रकारों के विरुद्ध दिल्ली की उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज कराई है. याचिका मीडिया वालों की ओर से बॉलीवुड पर अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी करने के चलते दायर की गई थी. याचिका दर्ज कराने वालों में शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, करण जौहर, फरहान अख्तर, अजय देवगन, अक्षय कुमार, सोहेल खान, साजिद नाडियावाला समेत अन्य के बैनर शामिल हैं. यानी कि इनमें वो सितारे भी शामिल हैं जिनकी जुबान सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर नहीं खुली लेकिन जो इनकी हरकतों का खुलासा कर रहा है उसके खिलाफ गिद्ध की तरह टूट पड़े हैं. खैर अब देखना ये होगा कि 21 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर कोर्ट में जो सुनवाई होने वाली है. उसमें बॉलीवुड गैंग के मेंबर पहुंचते हैं या नहीं।