Author: Sunil Agrawal

  • हॉस्पिटल में ड्यूटी से नदारद 8 डॉक्टर्स को नोटिस, कलेक्टर ने कहा- “तुरंत हाजिर हों, वरना पंजीयन होगा रद्द”….

    हॉस्पिटल में ड्यूटी से नदारद 8 डॉक्टर्स को नोटिस, कलेक्टर ने कहा- “तुरंत हाजिर हों, वरना पंजीयन होगा रद्द”….

    दुर्ग। प्रदेश में कोविड संकट को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यक स्थिति के चलते एस्मा एक्ट लागू है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मरीजों के इलाज एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं हेतु विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारियों की ड्यूटी 21 अप्रैल से चंदूलाल चंद्राकर हास्पिटल में लगाई गई थी।

    इनमें 8 चिकित्सा अधिकारिया को अब तक उपस्थिति नहीं देने के कारण कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने शो काज नोटिस जारी किया है। कलेक्टर ने इन्हें प्रदेश में प्रभावी एस्मा एक्ट के अंतर्गत ड्यूटी में तत्काल उपस्थित होने के निर्देश दिये हैं।

    अन्यथा की स्थिति में महामारी एक्ट के अंतर्गत इनका पंजीयन रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में 15 अप्रैल से एस्मा एक्ट लागू है जिसके तहत समस्त स्वास्थ्य सुविधाएं तथा डाक्टर, नर्स एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक सेवाओं में शामिल किया गया है।

  • कोरोना के लक्षण के साथ निगेटिव रिपोर्ट लिए आ रहे मरीजों के इलाज के लिए क्या है व्यवस्था जानिए…

    कोरोना के लक्षण के साथ निगेटिव रिपोर्ट लिए आ रहे मरीजों के इलाज के लिए क्या है व्यवस्था जानिए…

    रायपुर। राज्य के शासकीय डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों, कोविड केयर सेंटर और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में ऐसे मरीजों के लिए भी बेड की व्यवस्था की गई है. जिनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है या जिनके पास कोरोना जांच की रिपोर्ट नहीं है. फिर भी उनमें कोविड के लक्षण नजर आ रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए राज्य के सभी जिलों में कुल 1322 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गई है. आवश्यकतानुसार मरीज़ों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक और कोविड प्रबंधन के ट्रीटमेंट वर्टिकल की प्रभारी डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में कुल 1322 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गई है. जिनकी निगेटिव रिपोर्ट है और उनमें कोरोना के लक्षण है, उनका इलाज किया जाएगा।

    • दुर्ग जिले में 263 बेड
    • बेमेतरा में 200 बेड
    • रायपुर में 158 बेड
    • बस्तर में 141 बेड
    • कोरिया में 75 बेड
    • राजनांदगांव में 66 बेड
    • धमतरी में 55 बेड
    • रायगढ़ में 46 बेड
    • नारायणपुर में 30 बेड
    • जांजगीर चांपा में 30 बेड
    • मुंगेली में 28 बेड
    • कबीरधाम में 25 बेड
    • कोंडागांव में 20 बेड
    • बिलासपुर में 20 बेड
    • कोरबा में 18 बेड
    • बलोदाबाजार में 16 बेड
    • बलरामपुर में 15 बेड
    • जशपुर में 14 बेड
    • दंतेवाड़ा में 12 आइसोलेशन बेड रखे गए हैं.
    • बालोद, बीजापुर, गरियाबंद, गौरेला पेंड्रा मरवाही, कांकेर, महासमुंद, सुकमा सूरजपुर और सरगुजा जैसे प्रत्येक ज़िले में 10-10 आइसोलेशन बेड रखे गए हैं।
  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश, राज्य में किसी की भी न हो ऑक्सीजन की कमी से मौत…

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश, राज्य में किसी की भी न हो ऑक्सीजन की कमी से मौत…

    बिलासपुर। कोरोना प्रबंधन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ऑक्सीजन की कमी से राज्य के किसी व्यक्ति की जान न जाए इसके लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है. इसके लिए वर्तमान और भविष्य में ऑक्सीजन की जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार से सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने को कहा है. न्यायालय ने इस संबंध में राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट जमा करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

    हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जज पार्थ प्रीतम साहू की बेंच ने प्रदेश में कोरोना प्रबंधन को लेकर जनहित याचिका की सुनवाई करने के बाद शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. इसमें निजी अस्पतालों में कोविड की जांच और उपचार की ऊंची दर को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से निजी अस्पतालों में उपचार के लिए दर निर्धारित करने को कहा, जिससे किसी भी मरीज का शोषण न हो।

    इसके अलावा कोविड से जूझने के लिए रायपुर में एक केंद्रीयकृत व्यवस्था तैयार करने को कहा, जिससे प्रदेश के तमाम जिलों के सीएमएचओ जुड़े रहेंगे. इसके साथ तमाम जिलों में सरकारी और निजी अस्पतालों में खाली बिस्तरों की जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे किसी जिले में कोरोना मरीज को बिस्तर नहीं मिलने पर दूसरे जिले में बिस्तर की व्यवस्था की जा सके. इसके अलावा जिला अस्पतालों में हेल्प डेस्क बनाने का निर्देश दिया गया, जहां एक माउस क्लिक पर खाली बिस्तरों की जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिससे मरीज को भटकना नहीं पड़े।

  • बाइक सवार युवक को मारी टक्कर , एएसआई के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर…

    बाइक सवार युवक को मारी टक्कर , एएसआई के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर…

    रविवार की सुबह विष्णुपाली चौक के पास डोंगरीपाली पुलिस की गाड़ी ने बाइक सवार को जोरदार ठोकर मार दी थी। मामले में पीड़ित पक्ष सोमवार को रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंची थी। पीड़ित और गवाहों का बयान लेने के बाद पुलिस ने एएसआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।
    पेट्रोलिंग के लिए स्कॉर्पियो क्रमांक सीजी 13 यूडी 9118 में सवार होकर चार पुलिसकर्मी निकले थे। वाहन एएसआई रामकुमार मानिकपुरी चला रहा था। एएसआई 120 की रफ्तार से वाहन को दौड़ा रहा था। तेज एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने की वजह से नियंत्रण खो दिया और स्कार्पियो बाइक क्रमांक सीजी 13 जेड 5477 को रोड किनारे खड़ी कर बाबनो पिता सेवकराम भोई फोन में बात कर रहा था। आरोपी चालक उसे अपनी चपेट में ले लिया था। इससे युवक 5 फीट ऊपर उछल कर दूर में गिरा। स्कॉर्पियो 50 मीटर घसीटते हुए दूर जाकर खड़ी हुई। फिर पुलिसकर्मी वाहन से उतरे और 112 की मदद से युवक को सीएचसी बरमकेला भेजा था। अभी भी युवक के सीने में दर्द हो रहा है। लोगों की आवाजाही कम होने के बाद वहां से भागे। (जैसा घटना में घायल हुए युवक ने बताया)। फिलहाल पुलिस ने आरोपी चालक एएसआई रामकुमार मानिकपुरी के खिलाफ धारा 279, 337 के तहत अपराध दर्ज किया है।

    नुकसान की भरपाई करे एएसआई

    घटना से युवक की बाइक क्षतिग्रस्त हो गई है। अगला चक्का, हेड लाइट टूट गया है। बाइक को ढाई तीन महीने पहले खरीदा था। बाइक का पूरा पैसा भी नहीं पटा है। कुछ इंस्टॉलमेंट बचा हुआ है। इससे बीमा का लाभ भी नहीं मिलेगा। क्षतिग्रस्त बाइक की नुकसानी की भरपाई पुलिस को करनी होगी, ऐसा युवक का कहना है। सूत्रों के मुताबिक यदि कोई वाहन हादसे का शिकार होता है तब क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है। कानून के जानकार बताते हैं कि घटनाकारित वाहन का चालक या फिर वाहन मालिक को हर्जाना भरना पड़ता है।

    छह महीने की कैद जप्त होगा वाहन

    एक्सीडेंट केस में घटना को अंजाम देने वाले आरोपी को छह महीने की कैद और जुर्माना का प्रावधान है। हालांकि यह धारा जमानती है। इसलिए आरोपी एएसआई को जेल तो नहीं हो सकता है, लेकिन जुर्माना जरूर भरना होगा। यही नहीं घटनाकारित स्कार्पियो की भी जप्ती का प्रावधान है। लिहाजा अब पुलिस वाहन का इस्तेमाल नहीं कर सकती है। कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई के दौरान वाहन मालिक को उपस्थित होना पड़ेगा। यह लंबी प्रक्रिया होती है। कोर्ट में वाहन का सही इस्तेमाल साबित होने के बाद ही मालिक को सौंपा जाएगा, ऐसा विधि के जानकारों का कहना है।

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुचेगा अधजली लाशों के मामला,अफसरों पर महामारी एक्ट के तहत FIR दर्ज की मांग…

    रायपुर। रायपुर के सड्‌डू इलाके के श्मशान घाट में अधजली लाशों को कुत्ते खा रहे थे। ये मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचेगा। जनता कांग्रेस नेता प्रदीप साहू ने बताया कि कोविड के इस संकट काल में प्रदेश में जिंदा इंसानों को सही इलाज नहीं मिल रहा और मौत के प्रशासन सही ढंग से अंतिम संस्कार नहीं कर रहा। इसी वजह से सड्‌डू इलाके में ये हालात बने। अब इस मामले में हम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सुधार की मांग कर रहे हैं। हम ये भी मांग कर रहे हैं, इस तरह से कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर श्मशान में अधजली लाशें छोड़ने वाले अफसरों पर भी महामारी एक्ट के तहत FIR दर्ज की जाए।

    कोविड संक्रमण से होने वाली मौत के बाद भी शव यहां लाए जा रहे हैं।

    कोविड संक्रमण से होने वाली मौत के बाद भी शव यहां लाए जा रहे हैं।

    यह है पूरा मामला
    करीब 4 से 5 दिन पहले रायपुर के सड्‌डू स्थित कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड से श्मशान में अधजली लाशों के टुकड़े कुत्ते खा रहे थे। इसका वीडियो भी सामने आया था। मामले में इलाके के लोगों ने कलेक्टर के नाम शिकायती खत लिखा। आवाज उठाने पर क्षेत्र के दो युवकों अजय देवांगन और इसके साथी पर झूठी जानकारी फैलाने का केस दर्ज कर दिया गया। ये FIR विधानसभा थाने में अब भी दर्ज है। नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ये दावा किया कि वीडियो कहीं और का है, जबकि सड्‌डू के श्मशान के पास रहने वाले लोग भी वीडियो में साफ कहते दिख रहे हैं कि यहां लाशों के टुकड़े कुत्ते लेकर भाग जाते हैं, क्योंकि अंतिम संस्कार सही ढंग से नहीं हो रहा।

    तस्वीर में कुत्ते इंसानी मांस के टुकड़ों के साथ हैं और पीछे दीवार लिखा है सड्डू। नगर निगम के अफसर इस बात का दावा कर रहे हैं ये किसी और जगह का है मामला है।

    तस्वीर में कुत्ते इंसानी मांस के टुकड़ों के साथ हैं और पीछे दीवार लिखा है सड्डू। नगर निगम के अफसर इस बात का दावा कर रहे हैं ये किसी और जगह का है मामला है।

    पूरे इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा
    सड्‌डू के जिस श्मशान घाट में ये घटना हुई। इसके आस-पास की बस्ती में दर्जनों परिवार रहते हैं। क्षेत्र की महिलाओं ने बताया कि नगर निगम के लोग शवों को लेकर आते हैं, आधी-अधूरी लकड़ी से ही शव जला देते हैं। इसके बाद चूंकि शव ठीक तरह से जल नहीं पाते, इसलिए उनके टुकडे लेकर कुत्ते इधर-उधर भागते हैं। कभी हमारे घर के पास किसी का हाथ मिलता है कभी किसी का पैर। हमारे भी छोटे बच्चे हैं पूरे इलाके में संक्रमण फैलेगा हमारा जीना मुश्किल हो गया है।

  • इस वक्त वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है, वैक्सीन के दाम पर क्या कर रहा केंद्र, ये नेशनल इमरजेंसी नहीं तो कब?

    इस वक्त वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है, वैक्सीन के दाम पर क्या कर रहा केंद्र, ये नेशनल इमरजेंसी नहीं तो कब?

    सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?

    कोरोना संकट को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. केंद्र सरकार की ओर से सर्वोच्च अदालत में अपना जवाब दे दिया गया है. केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई पर लेटर भेजा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस सुनवाई का मतलब हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई को रोकना नहीं है, हाईकोर्ट स्थानीय हालात को बेहतर समझ सकते हैं. राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना जरूरी था. हम राज्यों के बीच समन्वय बैठाने का काम करेंगे.

    अदालत में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोरोना की पहली लहर 2019-20 में आई, लेकिन दूसरी लहर का किसी ने अंदाजा नहीं लगाया था. हमने इसको लेकर भी कई अहम कदम उठाए हैं. केंद्र सरकार राष्ट्रीय लेवल पर हालात को मॉनिटर कर रही है, खुद पीएम भी मीटिंग कर रहे हैं.

    वैक्सीन के दाम पर अदालत का सवाल

    सुनवाई के दौरान जस्टिस एसआर भट्ट ने कहा कि सेना, रेलवे के डॉक्टर्स केंद्र के अंतर्गत आते हैं. ऐसे में क्या इन्हें क्वारनटीन, वैक्सीनेशन और अन्य इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इसपर क्या नेशनल प्लान है? इस वक्त वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है, वैक्सीन के दाम पर केंद्र क्या कर रहा है. अगर ये नेशनल इमरजेंसी नहीं है, तो फिर क्या है? दरअसल, अदालत में सुनवाई के दौरान राजस्थान, बंगाल की ओर से वैक्सीन के अलग-अलग दाम पर आपत्ति जताई गई थी.

  • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक अधिकारी का कोरोना से निधन…

    छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक अधिकारी का कोरोना से निधन…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक डॉ. छेदीलाल तिवारी का कोरोना से निधन हो गया।
    छत्तीसगढ़ में संक्रमण के कारण रोज़ मौतों में इजाफा हो रहा है| आए दिन लोगों की मौत हो रही हैं। मंगलवार को फिर एक दुखद समाचार आया। जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक डॉ. छेदीलाल तिवारी का कोरोना से निधन हो गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर छेदीलाल तिवारी को सुयश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने आज अंतिम सांस ली।

    डॉ. छेदीलाल तिवारी ने विभाग में ऑटो चलाते हुए पीएचडी की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने तिवारी के शोक संतृप्त परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

  • आरक्षक ने किया इस्तीफे का ऐलान,जानिए क्यों…

    आरक्षक ने किया इस्तीफे का ऐलान,जानिए क्यों…

    धमतरी पुलिस लाइन में पदस्थ एक आरक्षक ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। ये कोई सामान्य इस्तीफा नंही है, बल्कि कई गंभीर आरोप पुलिस के आला अफसरों पर आरक्षक की तरफ से लगाए गए हैं। 
    आरक्षक क्रमांक 777 उज्ज्वल दीवान ने बताया कि सभी पुलिस कर्मियों को अपना एक दिन का वेतन स्वेच्छा से मुख्यमंत्री सहायता कोष में देने कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया, तो इस वजह से उसका तबादला नक्सल प्रभावित थाना मेचका में कर दिया गया। आम तौर पर आरक्षकों का तबादला समूह में होता है, लेकिन उज्ज्वल के मामले में सिर्फ एक आरक्षक का तबादला हुआ, जब आरक्षक ने अपना इस्तीफा सौंपने की कोशिश की तो अब इस्तीफा नहीं लिया जा रहा है। इन तमाम आरोपों के साथ आरक्षक ने मीडिया से अपनी बातें रखी।

  • सुप्रीम कोर्ट के जज का फेफड़ो में इंफेक्शन की वजह से निधन, कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं, गुरुग्राम के अस्पताल में ली आखिरी सांस…

    सुप्रीम कोर्ट के जज का फेफड़ो में इंफेक्शन की वजह से निधन, कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं, गुरुग्राम के अस्पताल में ली आखिरी सांस…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मोहन एम शांतनागोदर का शनिवार देर रात गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह 62 साल के थे. जानकारी के अनुसार, न्यायमूर्ति शांतनागोदर को फेफड़े में संक्रमण के चलते मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह आईसीयू में थे।

    न्यायालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘शनिवार देर रात तक उनकी हालत स्थिर बताई गई थी. हालांकि, देर रात करीब 12:30 बजे उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने परिवार को यह दुखद समाचार दिया.’ हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि न्यायाधीश कोरोना वायरस से संक्रमित थे या नहीं।

    न्यायमूर्ति शांतनागोदर को 17 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किया गया था. उनका जन्म पांच मई 1958 को कर्नाटक में हुआ था. उन्होंने पांच सितंबर 1980 को एक वकील के तौर पर पंजीकरण कराया था. सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने से पहले न्यायमूर्ति शांतनागोदर केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे।

  • अस्पताल से रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराती थी नर्स…बाहर ब्लैक में बेचता था बॉयफ्रेंड…

    अस्पताल से रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराती थी नर्स…बाहर ब्लैक में बेचता था बॉयफ्रेंड…

    मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की जबरदस्त मांग है. लेकिन विपदा के समय भी कुछ लोग रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर मुनाफा कमाने में लगे हैं. भोपाल पुलिस ने ऐसे ही एक शख्स को गिरफ्तार किया है जो एक निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ है और वहां से रेमडेसिविर इंजेक्शन बाहर लाकर ब्लैक में बेचता था. हैरानी की बात यह है कि आरोपी युवक को रेमडेसिविर इंजेक्शन अस्पताल में ही बतौर नर्स काम करने वाली उसकी गर्लफ्रेंड चुरा कर देती थी।

    दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि भोपाल के जेके अस्पताल के बाहर एक शख्स रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के लिए खड़ा है. पुलिस ने जाल बिछाकर जब इस शख्स को पकड़ा तो उसकी जेब से रेमडेसिविर इंजेक्शन का एक वायल मिला. जब उससे इससे जुड़े कागज मांगे गए तो उसने इस का बिल या कोई और कागज होने से मना कर दिया. इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की.पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका नाम झलकन सिंह मीणा है और वो जेके अस्पताल में बतौर नर्सिंग स्टाफ काम करता है. आरोपी ने बताया कि अस्पताल में ही उसके साथ काम करने वाली उसकी गर्लफ्रेंड शालिनी वर्मा कोरोना मरीज को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन को चुरा कर उसे देती थी और कोरोना मरीज को रेमडेसिविर की बजाय सामान्य इंजेक्शन लगा देती थी।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया उसने और उसकी गर्लफ्रेंड ने मिलकर पहले भी रेमडेसिविर इंजेक्शन को 20 हज़ार से लेकर 30 हज़ार रुपए तक में बेचा है. आरोपी ने बताया कि 16 अप्रैल को ही एक रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराकर अस्पताल के ही एक डॉक्टर को करीब 13 हज़ार रुपए में बेचा था. फिलहाल पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी झलकन सिंह मीणा को गिरफ्तार कर लिया है जबकि उसकी गर्लफ्रेंड शालिनी वर्मा की तलाश की जा रही है।