Author: Sunil Agrawal

  • न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त….

    न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त….

    रायपुर। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा को 1 जून 2021 से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. इसकी अधिसूचना 24 मई को जारी की गई है. दरअसल, मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसलिए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले भी न्यायमूर्ति मिश्रा यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    बता दें कि पिछली बार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल समिति का सदस्य बनाया गया था. उस दौरान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हुआ था. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था।


    जस्टिस प्रशांत मिश्रा वर्ष 1964 में रायगढ़ में जन्मे थे. उन्होंने बीएससी और एलएलबी की उपाधि गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर से प्राप्त की. वे 1987 में अधिवक्ता बने. उन्होंने जिला न्यायालय रायगढ़, जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश और बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में वकालत की।

    उन्हें जनवरी 2005 को उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता मनोनित किया गया. वे 2 वर्षों तक छत्तीसगढ़ राज्य विधि परिषद के अध्यक्ष रहे. जस्टिस मिश्रा उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के नियमकारी समिति के सदस्य रहे. वे गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कार्यकारी परिषद के कुलाधिपति भी नामित किये गए।

    जस्टिस मिश्रा हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर के कार्यकारी परिषद में पदेन सदस्य के तौर पर सम्बद्ध रहे. उन्होंने 2004 से 2007 तक छत्तीसगढ़ राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया. 1 सितम्बर 2007 से अपने उन्न्यन तक उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया. 2009 को वे बिलासपुर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हुए।

  • योगगुरु रामदेव के डेयरी कारोबार के सीईओ सुनील बंसल का निधन, अस्पताल में थे भर्ती…

    योगगुरु रामदेव के डेयरी कारोबार के सीईओ सुनील बंसल का निधन, अस्पताल में थे भर्ती…

    कोरोना से मौत के लिए एलोपैथी दवाओं को जिम्मेदार मानने वाले बाबा रामदेव के कंपनी के सीईओ सुनील बंसल की कोरोना से मौत हो गई। वे 57 वर्ष के थे। बताया जाता है कि उनके फेफड़े बुरी तरह संक्रमित हो गए थे जिस कारण उन्हें नहीं बचाया जा सका। अब बाबा रामदेव के उस दावे पर फिर से सवाल उठ रहे हैं जिसमें उन्होंने कोरोनिल लांच करते समय की थी।

    बाबा रामदेव द्वारा कोरोनिल लांच करते समय जो कहा था, दावे किए थे उसमें से कई उसी समय झूठे साबित हो गए थे, लेकिन दवा के असर संबंधी दावे की भी हवा निकल गई है। बाबा रामदेव और उनकी टीम ने यह दावा किया था कि कोरोनिल के सेवन से फेफड़े में इन्फेक्शन नहीं होगा, यह दवा कोरोना को रोकने में काफी मददगार साबित होगा।

    साथ में उन्होंने उस समय WHO से प्रमाणित भी बताया था, जिसका खंडन तत्काल WHO ने कर दिया था।
    सुनील बंसल बाबा रामदेव के डेयरी प्रोडक्ट के विभाग को देखते थे। सुनील को डेयरी साइंस में एक महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ था। वे 2018 में बाबा रामदेव से जुड़े थे। पतंजलि से जुड़ने के बाद उन्होने इस क्षेत्र में बड़ा काम किया था यही कारण है कि पतंजलि का डेयरी प्रोडक्ट की मांग बढ़ गई थी। बताया जाता है कि बंसल को कुछ दिन पहले ECMO या एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन मशीन पर रखा गया था। क्योंकि उनके दिल और फेफड़े न के बराबर काम कर रहे थे।
    फिलहाल बाबा रामदेव लोगों के निशाने पर हैं। उनका कहना है कि कोरोनिल यदि संक्रमण रोकने में प्रभावी होता तो क्या सुनील बंसल की मौत कोरोना से होती ?

    अभी कुछ दिन पहले ही बाबा रामदेव ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि कोरोना से मौत एलोपैथी दवाओं की वजह से हो रही है। हालांकि बाद में उन्होंने माफी भी मांग ली थी।

  • पूर्व सी एम डॉ रमन सिंह टूल किट मामले में गिरफ्तारी देने पहुँचे सिविल लाइन थाना, पुलिस ने बाहर ही रोका…

    पूर्व सी एम डॉ रमन सिंह टूल किट मामले में गिरफ्तारी देने पहुँचे सिविल लाइन थाना, पुलिस ने बाहर ही रोका…

    रायपुर। टूलकिट मामले में एफआईआर दर्ज करने के विरोध में छत्‍तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर रमन सिंह के अपनी गिरफ्तारी देने के लिए सोमवार को सिविल लाइन थाने पहुंचे. यहां पुलिस ने उन्‍हें पुलिस स्‍टेशन के बाहर ही रोक दिया. इस पर रमन सिंह थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए हैं. वह अपनी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. उनके साथ विष्‍णुदेव साय, धरमलाल कौशिक, बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत जैसे वरिष्‍ठ नेता भी धरने पर बैठ गए हैं. वहीं, मौके पर भाजपा कार्यकर्ता लगातार नारे लगा रहे हैं।

    इस मामले में राजनीतिक सरगर्मियां अचानक बढ़ गई हैं. छत्तीसगढ़ बीजेपी ने प्रदेश व्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है. प्रदेश के सभी थानों में रमनसिंह के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता 05-05 की संख्या में सभी थानों पर आज 3 बजे से प्रदर्शन कर गिरफ्तारी देंगे. बता दें कि टूलकिट FIR के विरोध में सरकार के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन जारी है।

    टूलकिट विवाद का सबसे ज्यादा असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है. छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस पहले बीजेपी पर हमलावर हुई तो इससे एक कदम आगे बढ़कर पुलिस प्रशासन ने बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पूछताछ का नोटिस भेज दिया।

    सिविल लाइन पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस के अनुसार राजधानी रायपुर की सिविल लाइन पुलिस 24 मई को दोपहर 12:30 बजे रमन सिंह के निवास स्थान जाकर उनसे पूछताछ करने वाली थी. इस पर बड़ा दांव चलते हुए रमन सिंह सहित कुल 5 नेता आज सुबह 10:00 बजे सिविल लाइन थाने पहुंचकर अपनी गिरफ्तारी की मांग करने लगे।

    अब रायपुर के सिविल लाइन पुलिस ने जिस टूलकिट मामले में एफआईआर दर्ज कर सिंह को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए समय तय किया है, उससे पहले ही डॉ. सिंह द्वारा थाने पहुंचकर गिरफ्तारी देने की मांग के तहत पुलिस के सामने उलझन पैदा हो गई है. पुलिस ने जिन्हें आरोपी बनाया है, वही जब खुद गिरफ्तारी देने थाने पहुंचे तो पुलिस की परेशानी बढ़ गई।

  • रायगढ़ कलेक्टर ने लगाया जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर 50-50 हजार का जुर्माना, जानिए पूरा मामला…

    रायगढ़ कलेक्टर ने लगाया जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर 50-50 हजार का जुर्माना, जानिए पूरा मामला…

    रायगढ़। छत्तीगढ़ में कोरोना वायरस ने हर तबके पर अपना कहर बरपाया है. इस बीच मौके का फायदा उठाकर बचा-कुचा असर अस्पताल निकाल रहे हैं. कई अस्पताल ऐसे हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए कोरोना मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं देने रहे हैं. इनमें से जिंदल और संजीवनी अस्पताल का नाम शामिल है. ऐसे में रायगढ़ कलेक्टर ने कार्रवाई की है. कलेक्टर भीम सिंह ने जिंदल और संजीवनी अस्पताल पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

    जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर जुर्माना

    सरकार के निर्देशानुसार पंजीकृत निजी कोविड चिकित्सालयों में भर्ती होने वाले कोविड मरीजों को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजनांतर्गत नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ प्रदाय किया जाना है, लेकिन जिंदल हॉस्पिटल और संजीवनी नर्सिंग होम रायगढ़ ने शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया।

    अस्पतालों पर लगा 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

    कलेक्टर भीम सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया. दोनों अस्पतालों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कलेक्टर ने कोविड प्रबंधन के लिए आयोजित बैठकों में सभी निजी कोविड अस्पताल संचालकों को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को इसका लाभ देने के निर्देश दिए थे. लाभ नहीं देने की स्थिति में कार्रवाई की बात कही थी।

    इसलिए लगा जुर्माना

    बता दें कि बीते दिनों आयोजित बैठक में उन्होंने CMHO को अस्पतालों की जानकारी वेरीफाई करने और जिन अस्पतालों में शासन के निर्देशों के अनुरूप हितग्राहियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है, उन पर 50 हजार का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में योजना अंतर्गत लाभान्वित मरीजों की जानकारी तैयार की, जिसमें पाया गया कि जिंदल हॉस्पिटल और संजीवनी नर्सिंग होम में निर्देशानुसार पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं दिया गया, जिसके लिए उन पर यह जुर्माना लगाया गया है।

  • मुख्यमंत्री को धमकी, चार द‍िन में जो करना है कर लो, मचा हड़कंप,आलाधिकारियों ने जारी किया अलर्ट…

    मुख्यमंत्री को धमकी, चार द‍िन में जो करना है कर लो, मचा हड़कंप,आलाधिकारियों ने जारी किया अलर्ट…

    यूपी 112 कंट्रोल रूम के वाट्सएप नंबर पर मैसेज कर उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी गई। मैसेज मिलते ही आलाधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया। कंट्रोल रूम मुख्यालय 112 के ऑपरेशन कमांडर अंजुल कुमार की तहरीर पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। सर्विलांस समेत पुलिस की कई टीमें संदिग्ध नंबर की पड़ताल करने के साथ ही उसकी लोकेशन ट्रेस करने में लग गईं हैं। 

    जानकारी के मुताबिक बीते 29 अप्रैल को देर शाम 7ः58 बजे यूपी पुलिस कंट्रोल रूम 112 के वाट्सएप नंबर पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया था। मैसेज में सीएम योगी को पांचवे दिन जान से मार देने की धमकी दी गई थी। मैसेज में धमकी देने वाले ने कहा कि चार दिन के अंदर मेरा जो कुछ कर सकते हो कर लो। मैसेज की जानकारी पुलिस कर्मियों ने कंट्रोल रूम के आपरेशन कमांडर मुख्यालय अंजुल कुमार को दी। अंजुल कुमार ने आलाधिकारियों को बताया। इसके बाद एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने एडीसी सुरक्षा मुख्यालय समेत अन्य जानकारी दी।

    पुलिस अधिकारियों ने आनन फानन अलर्ट जारी किया। इसके बाद आपरेशन कमांडर कंट्रोल रूम अंजुल कुमार की तहरीर पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में धमकी देने वाले नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों ने नंबर की लोकेशन ट्रेस करने एवं धमकी देने वाले की गिरफ्तारी के लिए सर्विलांस समेत पुलिस की कई टीमें लगी हैं। टीमें आरोपित की तलाश में दबिश दे रही हैं।

    पहले भी मिल चुकी है धमकी
    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी दी गई हो। पिछले साल दिसंबर, सितंबर और मई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी का फोन डायल-112 पर क‍िया गया है।

  • चुनाव आयोग से बोला सुप्रीम कोर्ट, मद्रास HC की ‘हत्या के आरोप’ वाली टिप्पणी को दवा की कड़वी गोली समझें…

    चुनाव आयोग से बोला सुप्रीम कोर्ट, मद्रास HC की ‘हत्या के आरोप’ वाली टिप्पणी को दवा की कड़वी गोली समझें…

    दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ मद्रास होईकोर्ट की टिप्पणियों पर आयोग ने जो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, आज उसपर सुनवाई हुई है. हाईकोर्ट ने कहा था कि ‘कोरोना की दूसरी लहर के मौतों के लिए चुनाव आयोग पर शायद हत्या का मामला चलाना चाहिए.’ सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सलाह दी कि वो मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणियों को सही भावना में ले. वहीं, मीडिया की रिपोर्टिंग पर कोर्ट ने कहा कि मीडिया वही रिपोर्ट करता है, जो कोर्ट में होता है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
    शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘चुनाव आयोग मद्रास HC की ‘हत्या के आरोप’ की टिप्पणी को सही भावना में ले और उसे कड़वी गोली के रूप में निगल ले, जो एक डॉक्टर मरीज की बीमारी का इलाज करने के लिए देता है.’ सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव निकाय से कहा कि ‘हमें हाईकोर्ट को आजादी देनी होगी. आप भले ही संवैधानिक संस्था हैं लेकिन न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं हैं.’

    मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘अदालत में जो कुछ हुआ उसे मीडिया को पूरी तरह से रिपोर्ट करना चाहिए. हम आयोग की चिंताओं से निपटने के लिए एक छोटा आदेश जारी करेंगे. हमें न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता की रक्षा करनी होगी. HC जजों को लगता है कि वे असुविधाजनक सवाल पूछने के लिए स्वतंत्र हैं.’ जस्टिस ने कहा कि ‘हम इस तथ्य से अवगत हैं कि चुनाव आयोग लोकतंत्र के लिए जिम्मेदार है. हम चाहते हैं कि लोकतंत्र का प्रत्येक अंग स्वतंत्र हो. – हम चुनाव आयोग पर निशाना नहीं लगा रहे हैं. मुद्दा थोड़ा और जटिल है. हम अपने जजों को यह नहीं बता सकते कि मामले में केवल दलीलों पर सुनवाई हो. लोकतंत्र तभी जीवित रहता है जब संस्थाएं मजबूत होती हैं.’

    चुनाव आयोग ने क्या कहा?
    चुनाव आयोग ने कहा कि PM और CM द्वारा रैलियां की जाती हैं जो आपदा प्रबंधन के तहत प्रशासन का काम है. उसमें उल्लंघन हुआ है. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार हत्यारा वाली बात चल रही है. आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि ‘हाईकोर्ट की टिप्पणी से जनमानस में ये छवि बन रही है कि पूरे देश में कोरोना फैलाने का जिम्मेदार और मुलजिम आयोग ही है. हम कैसे इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि रैलियों में आने वाले सभी मास्क पहन कर आएं? आलोचना भी कठोर है और इसे कहीं न कहीं रोकना होगा.’ 

    कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी पर क्या कहा?
    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि जज सोच कर आते हैं कि यह बोलना है, किसी बात के क्रम में कई बात कही जाती है. इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि जो टिप्पणी हुई उसका केस से संबंध नहीं था, यह टिप्पणी भी नहीं थी, एक तरह से आयोग के खिलाफ फैसला था. जस्टिस शाह ने कहा कि हर जज का अलग स्वभाव होता है. कई बार टिप्पणी भी सार्वजनिक हित में की जाती है।

    फिर चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव आयोग पर लोगों की हत्या का आरोप लगाना सही नहीं है. जज अपने आदेश में यह भी लिखें कि टिप्पणी का अर्थ क्या था. इसपर जस्टिस शाह ने कहा कि ऐसी मांग सही नहीं है, जजों के बातचीत के क्रम में कोई टिप्पणी करना एक मानवीय प्रक्रिया है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट आयोग की बात समझता है लेकिन कोर्ट को HC को हतोत्साहित भी नहीं करना चाहिए. वे न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण आधार हैं. परिप्रेक्ष्य को समझें।

    जस्टिस शाह ने कहा कि ‘कभी-कभी जब कुछ कहा जाता है तो यह बड़े जनहित के लिए होता है. कभी-कभी जज निराश होते हैं, वे नाराज होते हैं. आपको इसे सही भावना में स्वीकार करना चाहिए. वे भी इंसान हैं.’ जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि ‘हम चुनाव आयोग का सम्मान करते हैं, अन्यथा नहीं लें. यह बेलगाम नहीं है क्योंकि अंततः लोकतंत्र संस्थानों में विश्वास पर जीवित रहता है. आप जजों को नियंत्रित नहीं कर सकते. जो मुझे सही लगेगा मैं आदेश में दर्ज करूंगा.’

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘हम अपनी न्यायिक प्रक्रिया की पहचान को कम नहीं कर सकते. आपकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपने उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए एक संतुलन बनाएंगे.’

  • बिना तामझाम के होगा समारोह, बतौर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दिन लेंगी शपथ…

    बिना तामझाम के होगा समारोह, बतौर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दिन लेंगी शपथ…

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद ममता बनर्जी 5 मई को सुबह 10.45 बजे बतौर मुख्यमंत्री तीसरी बार शपथ लेंगी. कोरोना काल में हो रहा शपथ ग्रहण समारोह बिना किसी तामझाम के सामान्य होगा।

    नंदीग्राम में पूर्व टीएमसी के नेता शुवेंदु अधिकारी के साथ कांटे की टक्कर में 956 मतों से हारने के बाद ममता बनर्जी के शपथ को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन राज्यपाल जगदीश धनकर से मुलाकात के बाद आ रही जानकारी में उनके 5 मई को सुबह 10.45 बजे शपथ लेने की बात कही जा रही है।

    बंगाल चुनाव में तमाम धारणाओं को धराशाई करते हुए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 292 सीटों में से 209 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं चार सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं भाजपा की बात कहें तो 76 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं. सरकार बनाने के लिए विधानसभा में 147 सीटों का सामान्य बहुमत होना जरूरी है।

  • बेड खाली होने पर भी मरीजों को बोला बेड नहीं, CMHO ने थमाया नोटिस…

    बेड खाली होने पर भी मरीजों को बोला बेड नहीं, CMHO ने थमाया नोटिस…

    रायपुर। कोरोना संक्रमण के बीच राजधानी रायपुर के दो बड़े अस्पतालों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि बेड खाली होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी। मामले में संज्ञान लेते हुए रायपुर सीएमएचओ ने दोनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    मिली जानकारी के बालाजी और हेरिटेज हॉस्पिटल ने मरीजों को बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी, जबकि अस्पताल में बेड खाली थे। गलत जानकारी देने के चलते रायपुर सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

  • शादियों पर लगी रोक, जारी अनुमति के आदेश भी हुए निरस्त…

    शादियों पर लगी रोक, जारी अनुमति के आदेश भी हुए निरस्त…

    कोरबा। छत्तीसगढ़ में कोरोना का संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है. कोरबा में कोरोना अपना कहर बरपा रहा है. इसलिए जिले में 5 मई तक लॉकडाउन लगाया गया है. कोरोना का असर अब शादियों पर पड़ने लगा है. अब शहनाइयां नहीं बजेंगी. बैंड और बाजा सुने पड़ जाएंगे. तय समय पर होने वाली शादियां टल जाएंगी. सात फेले लेने के लिए दूल्हे-दुल्हन को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

    कोरबा जिले के में कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने शादी के लिए दी गई सभी अनुमति को निरस्त कर दिया है. अनुविभागीय अधिकारी ने आदेश जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि पूरे जिले में 17 मई तक शादियों पर रोक लगी रहेगी. शादी के लिए जारी किए आदेश भी निरस्त कर दिए गए हैं।


    तहसीलदार सुरेश साहू ने बताया कि पूरे जिले में आगामी 15 दिनों के लिए शादी-ब्याह में रोक लगा दी गई है. इसके बावजूद भी यदि कोई बिना अनुमति के शादी आयोजित करते पाया गया, तो उस पर 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. जिले में बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या को देखते यह निर्णय लिया गया है।

    बता दें कि कोरबा जिले में रविवार को कोरोना के 900 संक्रमित मरीज मिले थे. 13 लोगों की कोरोना वायरस के चलते मौत भी हुई थी. इसलिए कोरोना संक्रमण से राहत मिलने के बाद ही अब अगले सीजन में शादी की शहनाइयां बजने के आसार है. कोरोना की चैन तो तोड़ने के लिए लॉकडाउन और पाबंदिया जरूरी है. प्रशासन के नियमों की वजह से वर-वधू को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. इसके साथ ही टेंट, डेकोरेशन, मैरेज हॉल, डीजे, कैटरिग, होटल, बैंड बाजे समेत व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं।

  • राजधानी अस्पताल के कोविड वार्ड में आग और धुएँ की वजह से 6 मरीज़ों की मौत के मामले में आया ये फैसला…

    राजधानी अस्पताल के कोविड वार्ड में आग और धुएँ की वजह से 6 मरीज़ों की मौत के मामले में आया ये फैसला…

    रायपुर। राजधानी के टिकरापारा इलाक़े में स्थित राजधानी अस्पताल में बीते 16 अप्रैल को आग लगने से कोविड वार्ड में भर्ती छ मरीज़ों की मौत मामले में पुलिस ने विवेचना के दौरान धारा 304(2) की धारा के तहत अपराध दर्ज करते हुए तड़के संचालक मंडल में शामिल दो चिकित्सकों को गिरफ़्तार कर लिया है। अभी प्रंबंधकों में दो की गिरफ़्तारी शेष बताई गई है।
    प्रारंभिक तौर पर इस प्रकरण की क़ायमी में धारा 304 A की धारा का उपयोग किया गया था। इस घटना में पाँच की मौत जलने से जबकि एक अन्य की दम घूंटने से हुई थी।प्रकरण में लापरवाही किस स्तर पर हुई थी इसके लिए पृथक से जाँच दल गठित किया गया था, जिसमें स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे।
    विवेचना के दौरान धारा में परिवर्तन तब हुआ जबकि कप्तान अजय यादव ने डायरी तलब कर उसका अवलोकन के लिए एडिशनल एसपी और डीएसपी पुरानी बस्ती को निर्देशित किया। डायरी में आए तथ्य और मामले की प्रशासनिक जाँच के मिले तथ्यों को देखते हुए जिस प्रकरण मेर धारा 304 A के तहत प्रारंभिक तौर पर मामला दर्ज किया गया लेकिन जब बाक़ी तथ्य ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त धारा आकर्षित होती है तो उसे प्रभावी कर दिया गया। डायरी में धारा संशोधित हुई और धारा 304 (2) की धारा प्रभावी की गई।
    आईपीसी के अनुसार धारा 304 (2) का अर्थ है वह कार्य इस ज्ञान के साथ कि इससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है लेकिन यह कार्य बिना किसी आशय के किया जाए। यदि आशय होता तो मानव वध माना जाता तब धारा 302 प्रभावी या कि आकर्षित होती लेकिन यदि आशय नहीं है तो 304(2) प्रभावी किया जाता है जो कि हत्या की कोटि में ना आने अपराधिक मानव वध है। इसमें दस वर्ष तक की सजा है।
    कप्तान अजय यादव ने कहा….
    “मैंने डायरी कॉल की थी और उसपर एडिशनल एसपी और डीएसपी पुरानी बस्ती को अवलोकन के लिए सौंपा गया था..उन्होने डायरी में आए तथ्यों को देखा.. प्रशासनिक जाँच रिपोर्ट के इनपुट भी देखे गए .. उसके बाद डायरी में धारा 304(2) प्रभावी की गई है”