Author: Sunil Agrawal

  • मिला कोरोना का नया वैरिएंट, सात दिन में ही कर देता है…

    मिला कोरोना का नया वैरिएंट, सात दिन में ही कर देता है…

    कोरोना की दूसरी लहर के धीमी होने के बाद अब देश में कोरोना का नया वैरिएंट मिला है. अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के बाद भारत में एक और नए कोरोना वैरिएंट का खुलासा हुआ है जो सात दिन में ही मरीज का वजन कम कर सकता है।

    कोरोना वायरस का यह नया वैरिएंट ब्राजील में सबसे पहले मिला था लेकिन वहां से एक ही वैरिएंट के भारत में आने की पुष्टि की गई थी. अब वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ब्राजील से एक नहीं बल्कि दो वैरिएंट भारत में आए हैं और ये दूसरा वैरिएंट बी .1.1.28.2 काफी तेज है।

    सीरियाई हैमस्टर (एक प्रजाति का चूहा) में परीक्षण से पता चला है कि संक्रमित होने के सात दिन में ही इस वैरिएंट की पहचान हो सकती है. यह वैरिएंट तेजी से शरीर का वजन कम कर सकता है और डेल्टा की तरह ये भी ज्यादा गंभीर और एंटीबॉडी क्षमता कम कर सकता है।


    पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों की मानें तो कोरोना का बी.1.1.28.2 वेरिएंट विदेश से आए दो लोगों में पाया गया था. कोरोना से रिकवरी होने तक दोनों में उसके लक्षण नहीं थे, मगर सैंपल की सीक्वेसिंग के बाद जब बी.1.1.28.2 वेरिएंट मिला तो उसका 9 सीरियाई हैमस्टर चूहों पर परीक्षण किया गया. इनमें से तीन की मौत शरीर के अंदरूनी भाग में संक्रमण बढ़ने से हुई. इस दौरान फेफड़े की विकृति के बारे में पता चला. साथ ही एंटीबॉडी का स्तर कम होने के बारे में जानकारी भी मिली।

  • कलेक्टर का तबादला होने पर लोगों ने पटाखे फोड़कर मनाई खुशियां…

    कलेक्टर का तबादला होने पर लोगों ने पटाखे फोड़कर मनाई खुशियां…

    कोरिया। कलेक्टर एसएन राठौर का मंत्रालय में तबादला होने पर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के घड़ी चौक पर लोगों ने देर रात को पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई. कोरोना गाइडलाइन को दरकिनार कर इस तरह से खुशिया मनाने वाले लोगों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है।

    शनिवार देर रात को सरकार की ओर से जारी तबादला सूची में कोरिया कलेक्टर एसएन राठौर का मंत्रालय में तबादला करते हुए उनके स्थान पर श्याम धावड़े को नया कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई थी. यह सूचना मिलते ही कुछ लोगों को इतनी खुशी हुई कि आनन-फानन में पटाखे जुगाड़कर घड़ी चौक में फोड़ने लग गए।

    लंबे समय तक फोड़े गए पटाखों की रोशनी दूर तक दिखाई दे रही थी. इसके पहले भी कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी के तबादले पर शिक्षकों ने पटाखे फोड़े थे।

  • 7 जून से शुरू हुई इनकम टैक्स की नई वेबसाइट, जाने इसकी खास बातें…

    7 जून से शुरू हुई इनकम टैक्स की नई वेबसाइट, जाने इसकी खास बातें…

    आयकर विभाग ने 7 जून को नया ई-फाइलिंग पोर्टल लॉन्च किया है. यानी 7 जून से इनकम टैक्स की ई-फाइलिंग वेबसाइट का पता बदल गया है. आयकर विभाग ने कहा है- ‘हम 7 जून से नई ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाने के लिए काफी उत्साहित हैं. नया पोर्टल अधिक यूजर फ्रेंडली है, जिसमें कई नए फीचर जोड़े गए हैं.’

    • नई वेबसाइट अधिक यूजर फ्रेंडली होगी, जिससे आईटीआर फाइल करने में आसानी होगी और रिफंड भी जल्दी मिलेगा.
    • सभी ट्रांजेक्शन, अपलोड और पेंडिंग एक्शन एक ही डैशबोर्ड पर दिखेंगे, ताकि यूजर उसे रिव्यू कर सकें और जरूरत के हिसाब से एक्शन ले सकें. यानी इससे आईटीआर फाइल करना, उसे रिव्यू करना और कोई एक्शन लेना आसान हो जाएगा.
    • ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही स्थितियों के लिए आईटीआर के लिए तैयारी करने का सॉफ्टवेयर मुफ्त में उपलब्ध है. इसमें करदाताओं को असिस्ट करने की सुविधा भी होगी और प्री-फाइलिंग का विकल्प भी मिलेगा, ताकि कम से कम डेटा एंट्री करनी पड़े.
    • डेस्कटॉप पोर्टल की सभी जरूरी सुविधाएं मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध होंगी. नए पोर्टल में एक नया टैक्स पेमेंट सिस्टम लाया जाएगा, जिसमें भुगतान के कई विकल्प होंगे, जैसे नेट बैंकिंग, यूपीआई, आरटीजीएस, एनईएफटी आदि।

    पोर्टल के बाद मोबाइल एप भी आएगा

    विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सीबीडीटी एक नई कर भुगतान प्रणाली 18 जून का शुरू करने जा रहा है. वहीं ITR के नए पोर्टल के बाद में मोबाइल ऐप भी जारी किया जाएगा ताकि करदाता उसकी विभिन्न सुविधाओं से परिचित हो सकें।

    e-Filing पोर्टल पर फाइल होता है ITR

    टैक्सपेयर्स अपने इंडिविजुअल या बिजनेस कैटगरी के इनकम टैक्स रिटर्न ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए फाइल करते हैं. इस पोर्टल के जरिए रिफंड के लिए आवेदन किया जा सकता है और टैक्स से जुड़े अन्य कार्य किए जाते हैं. इसी पोर्टल के जरिए टैक्समैन नोटिस जारी करते हैं, उन्हें टैक्सपेयर से रिस्पांस मिलता है और वे सवालों का जवाब देते हैं. इसके अलावा इस पोर्टल के जरिए एसेसमेंट्स, अपील, एग्जेंप्शन और पेनाल्टी को लेकर बातचीत की जाती है।

  • वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना वायरस, भारत के वैज्ञानिकों ने खोली चीन की पोल…

    वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना वायरस, भारत के वैज्ञानिकों ने खोली चीन की पोल…

    दिल्ली। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन दुनियाभर में निशाने पर है। अब भारतीय वैज्ञानिक दंपत्ति ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान लैब से लीक हुआ था। पुणे के रहने वाले वैज्ञानिक दंपत्ति डॉ. राहुल बाहुलिकर और डॉ. मोनाली राहलकर ने दुनिया के अलग-अलग देशों में बैठे अनजान लोगों के साथ मिलकर इंटरनेट से इस संबंध में सबूत जुटाए हैं। जिन लोगों ने इंटरनेट से सबूत एकत्रित किए हैं वे अनजान लोग हैं, जिनका मुख्य स्रोत ट्विटर और दूसरे ओपन सोर्स हैं। इन लोगों ने अपने समूह को ड्रैस्टिक (डीसेंट्रलाइज्ड रेडिकल ऑटोनॉमस सर्च टीम इनवेस्टिगेटिेंग कोविड-19) का नाम दिया है। इन लोगों का मानना है कि कोरोना चीन के मछली बाजार से नहीं बल्कि वुहान की लैब से निकला है। इनकी इस थ्योरी को पहले षड्यंत्र बताकर खारिज कर दिया गया था। लेकिन इसने अब दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। ये लोग चीनी दस्तावेज का अनुवाद कर अपने स्तर पर इसकी जांच कर रहे हैं। चाइनीज एकेडमिक पेपर और गुप्त दस्तावेजों के अनुसार इसकी शुरुआत साल 2012 से होती है। उस समय छह खदान श्रमिकों को यन्नान के मोजियांग में उस माइनशाफ्ट को साफ करने भेजा गया था जहां चमगादड़ों का आतंक था। उन श्रमिकों की वहां मौत हो गई। साल 2013 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. शी झेंगली और उनकी टीम माइनशाफ्ट से सैंपल को अपने लैब लेकर आ गई। शी का कहना है कि श्रमिकों की मौत गुफा में मौजूद फंगस की वजह से हो गई। इसके उलट ड्रैस्टिक का दावा है कि शी को एक अज्ञात कोरोना स्ट्रेन मिला जिसे उन लोगों ने आरएसबीटीकोव/4491 का नाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार वुहान वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के साल 2015-17 के पेपर में इस का विस्तार से जिक्र किया गया है। ये बहुत ही विवादित प्रयोग थे जिन्होंने वायरस को बहुत अधिक संक्रामक बना दिया। यह थ्योरी बताती है कि एक लैब की गलती कोविड-19 के विस्फोट का कारण बनी। एक चीनी वायरोलॉजिस्ट ने कहा है कि अमेरिका के शीर्ष कोरोनावायरस सलाहकार एंथनी फाउची के ई-मेल साबित करते हैं कि कोरोना की उत्पत्ति वुहान के लैब से ही हुई थी। डॉक्टर ली-मेंग यान जो उन लोगों में से थीं, जिन्होंने सबसे पहले कोरोना के वुहान की लैब से लीक हुए होने की बात कही थी। डॉक्टर ली-मेंग यान कोरोना पर शोध करने वाले पहले लोगों में से एक थीं और उन्होंने खुलासा किया था कि बीजिंग पर इस मामले को छुपाने का आरोप लगाने के बाद उन्हें छिपने के लिए मजबूर किया गया।

  • संजय दत्त ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से लिया आशीर्वाद, राजनीतिक अटकलें तेज…

    संजय दत्त ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से लिया आशीर्वाद, राजनीतिक अटकलें तेज…

    मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने शनिवार को नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उनके निवास पर मुलाकात की. इस मौके पर संजय दत्त ने नितिन गडकरी की पैर छूकर आशीर्वाद लिया. दोनों की इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलें भी तेज हो गई हैं. अभी तक इस गुप्त बैठक में दोनों के बीच क्या बात हुई यह जानकारी सामने नहीं आ सकी है।

    दरअसल, संजय दत्त शनिवार को नागपुर पहुंचे थे और इसके बाद वे वर्धा रोड स्थित नितिन गडकरी के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे. पहुंचते ही संजय दत्त ने गडकरी के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया. दोनों के बीच कुछ देर बातें भी हुई. इसके बाद संजय दत्त गडकरी के घर में बने भगवान गणपति के मंदिर में भी दर्शन करने के लिए पहुंचे. जहां उन्होंने बप्पा के सामने बैठकर प्रार्थना की. इस दौरान गडकरी उनके पीछे खड़े हुए थे।

    संजय दत्त महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत के घर भी पहुंचे. यहां उन्होंने उनके बेटे और बहू से भी मुलाकात की. नितिन राउत के बेटे की शादी फरवरी में ही हुई थी. लेकिन उन्होंने बढ़ते संक्रमण के चलते रिसेप्शन कैंसिल कर दिया था।
    बता दें कि 2019 में भी संजय अचानक इसी तरह गडकरी से नागपुर में उनके घर पर मुलाकात करने के लिए पहुंचे हुए थे. यह मुलाकात महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले की थी. उस समय भी राजनीतिक अटकलें तेज हो गई थीं।

  • 18+ नागरिकों को PM मोदी का तोहफा, मुफ्त मिलेगी कोरोना वैक्सीन… केन्द्र सरकार पूरे देश को लगाएगी टीका…

    18+ नागरिकों को PM मोदी का तोहफा, मुफ्त मिलेगी कोरोना वैक्सीन… केन्द्र सरकार पूरे देश को लगाएगी टीका…

    नईदिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट को लेकर देश को संबोधित करते हुए कहा कि आज भी देश इससे लड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हमने पिछले दिनों कोरोना की दूसरी लहर का पीक देखा, जिसमें हमने बड़ी संख्या में लोगों को खोया है। तेजी से मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बढ़ी थी, जिसकी आपूर्ति के लिए सेना तक को लगाया गया। विदेशों से भी ऑक्सीजन की सप्लाई की गई। इसके अलावा जरूरी दवाओं के उत्पादन से लेकर विदेश से लाने तक में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना जैसे अदृश्य दुश्मन से लड़ाई में सबसे कारगर हथियार कोविड प्रोटोकॉल है। मास्क और दो गज की दूरी ही सबसे अच्छा उपाय है।

    कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार की शाम को बड़ा ऐलान किया है. योग दिवस यानी 21 जून से देश में 18 साल से अधिक उम्र वाले सभी लोगों को भारत सरकार द्वारा मुफ्त वैक्सीन लगाई जाए. पीएम मोदी ने ऐलान किया कि राज्यों से वैक्सीनेशन का काम वापस लिया जाएगा और अब केंद्र सरकार ही ये काम करेगी।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से देश की लड़ाई जारी है, दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है. पीएम मोदी ने कहा कि कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, ऐसे सभी परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं.null

    पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी महामारी 100 साल में नहीं आई, देश ने कई मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ी है. पीएम मोदी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में हेल्थकेयर स्ट्रक्चर को बढ़ाया गया. मेडिकल ऑक्सीजन की इतनी कमी कभी नहीं हुई, सेना की तीनों टुकड़ियों को लगाया गया और दुनिया के हर कोने से जो कुछ लाया जा सकता था, वो किया गया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ सबसे कारगर हथियार कोविड के प्रोटोकॉल हैं और वैक्सीन सुरक्षा कवच हैं. पीएम मोदी ने दुनिया के कई देशों में वैक्सीन की मांग ज्यादा है और वैक्सीन बनाने की कंपनी कम हैं. भारत के पास अगर अपनी वैक्सीन ना होती तो हाल कुछ और होता, पिछले 50-60 साल का इतिहास यही कहता है कि हमारे यहां दुनिया में वैक्सीन आने के कई दिनों बाद टीका आता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने बच्चों के लिए कुछ चिंता जतायी थी, अत: उनके लिए भी वैक्सीन बनाने का काम जारी है और वैक्सीन का ट्रॉयल चल रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन सुरक्षा कवच है. हमारे देश की आबादी बहुत ज्यादा है ऐसे में अगर हम विदेशी वैक्सीन पर निर्भर रहते तो सभी नागरिकों का वैक्सीनेशन बहुत कठिन होता. लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने खुद ही वैक्सीन बनाया और हमारे विश्वास पर खरे उतरे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना से लड़ाई के लिए सबसे जरूरी है कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना।

  • आरोप सिद्ध हुआ..3 लाख वापिस भी किये…2 अधिकारी को सस्पेंड भी किये लेकिन..अवैध उगाही की धारा कब

    सारंगढ। हमारे देश के संवैधानिक व्यवस्था कहती है कि नियम और कानून की पन्ना में सबके लिए कानून की सजा बराबर है चाहे गुनाह करने वाला बड़े से बड़े नेता हो कलेक्टर हो या आम नागरिक आखिर कानून की नियम सब पर समान लागू होता है। क्यो न कानून बनाने वाला ही क्यो न गुनाहगार हो। छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले के सारंगढ क्षेत्र में जहाँ 3 बड़े-बड़े अधिकारी जिसमे तहसीलदार, बीएमओ,सब-इस्पेक्टर ने क्लिनिक संचालक को डरा धमकाकर आपदा को अवसर बनाते हुए 3 लाख रुपये ऐंठ लिए और इसकी उच्च स्तरीय जांच भी हुई जांच में सत्य भी पाया गया 3 लाख रुपये को संवेदनशील कलेक्टर साहब ने वापस भी करवा दिया जिसमें अंततः 2 अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया लेकिन इनके ऊपर अवैध उगाही की धारा 384ipc अब तक जुड़ नही सकी आखिर ऐसा क्यो?

    क्या कानून की किताब में सिर्फ और सिर्फ ऐसे अधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी के लिए देश के संवैधानिक व्यवस्था की पन्नो में लिखा कानून लागू होता है क्या ? क्या अधिकारी होने के कारण इनके ऊपर संवैधानिक विधि का उपयोग नही हो पा रहा? या सिर्फ विज्ञापन की राशि को लेने वाले पत्रकार के ऊपर झूठे शिकायत करने पर बिना जांच किये ये धारा जुड़ जाती है।

    अभी हाल ही में धर्मजयगढ़ में दो व्यक्तियो के ऊपर पीडीएस विक्रेता को शिकायत की धमकी दे कर 5 हजार पैसों की मांग किया गया था जिसकी लिखित शिकायत धरमजयगढ़ थाना में हुई जिसमें तत्काल एक्शन लेते हुए शिकायत पर हां का चिन्ह लग कर अवैध उगाही की धारा 384ipc लग कर जेल भेजा गया। लेकिन यहां क्लिनिक संचालक के ऊपर कारवाही की डर दिखाकर 3 लाख रुपये लूटने वाले 2 अधिकारियों को तो सस्पेंड किया गया और एक बीएमओ के ऊपर अभी प्रशासन की गाज गिरनी बाकी है, लेकिन जब जांच में सत्य पाया गया वसूली किये हुए राशि को भी कलेक्टर साहब ने वापस करवा दिया तो इनके ऊपर अवैध उगाही की धारा 384ipc जुड़ क्यो नही पा रही है? क्या इनको सरकार की तरफ से इन धाराओं से सरकारी पद पर होने की कारण छूट दिया गया है? क्या कानून की नियम इनके लिए लागू नही होती? इतने बड़े बहुचर्चित कांड सारंगढ के हिर्री ग्राम में उपस्थित वारे क्लिनिक पर तहसीलदार सुनील अग्रवाल, बीएमओ आर. एल. सिदार और सब- इस्पेक्टर कमल किशोर पटेल के द्वारा और इनके सरकारी अमला टीम ने लॉक डाउन के बीच मे 7 मई को दबिश देकर डरा धमकाकर 3 लाख रुपये लूट लिए थे जिसकी शिकायत वारे क्लिनिक संचालक डॉक्टर खगेश्वर प्रसाद वारे ने लिखित शिकायत कर जांच की मांग की थी जिसपर सब-इस्पेक्टर को पुलिस अधीक्षक महोदय ने पहले तो लाइन अटैच किया फिर जांच हो जाने के बाद सस्पेंड कर दिया वही कलेक्टर महोदय ने बिलासपुर संभागीय कमिश्नर को तहसीलदार के ऊपर कारवाही के लिए खत लिखा था जिसमे तहसीलदार को भी ससपेंड कर दिया गया वही अब बीएमओ के ऊपर प्रशासन की गाज गिरना बाकी रह गया जिसको कलेक्टर महोदय ने कहा कि जल्द कारवाही होगी जांच के लिए भेजा जा चुका है। यहां तक तो ठीक है कारवाही तो हो जा रहा है लेकिन अवैध वसूली ,डरा धमकाकर 3 लाख रुपये लूटने की धारा कब जुड़ेगी ये हम नही कह रहे है भाई जब रुपये लूट लिए उगाही करके जांच भी हुई जांच में भी सत्य पाया गया यहाँ तक की 3 लाख वारे क्लिनिक को वापस भी किया गया लेकिन जब सब सत्य की पुष्टि हो गया तो। आखिर धारा 384ipc जुड़ क्यो नही रही है? क्या इनको अपराध करने की छूट मिल गया? या इनको अभयदान दिया जा रहा है। जब बाकियों के ऊपर ऐसे स्थिति में कानून कारवाही करने से नही चूकते लेकिन यहां कैसे चूकते नजर आ रहे है। या कानून के रखवाले के लिए यह नियम लागू नही होता क्या ? आम नागरिक और विज्ञापन की राशि लेने पहुचे पत्रकारों पर बिना जांच के फर्जी शिकायत पे तत्काल कारवाही कर देते है तो इनको अभयदान क्यो मिल रहा है? ज़रा संज्ञान में लीजिए साहब ऐसे में कानून के सत्यता से भरोषा उठ जाएगा। और ऐसे भ्रष्टाचार और सरकारी पद में रहकर अवैध उगाही जैसे अपराध करने वालो के ऊपर विधिवत कारवाही नही होगा तो ऐसे लोगो का मनोबल बढ़ता ही जायेगा।

  • रायगढ़, महासमुंद, कोरबा समेत कई जिले के अधिकारी बदले, पढ़िये पूरी सूची…

    रायगढ़, महासमुंद, कोरबा समेत कई जिले के अधिकारी बदले, पढ़िये पूरी सूची…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को उद्योग विभाग में पदस्थ 15 अधिकारियों इधर से उधर किया है।

    सरकार द्वारा इस बाबत सूची जारी की गई है। रायगढ़ के उद्योग महाप्रबंधक सुखदेवे की जगह सुरेश कोशी लेंगे। सुखदेवे को महासमुंद उद्योग महाप्रबंधक बनाया गया है।

  • WhatsApp बदल रहा है अपने कई फीचर, नए अंदाज में होगी चैटिंग…

    WhatsApp बदल रहा है अपने कई फीचर, नए अंदाज में होगी चैटिंग…

    अब जल्द ही व्हाट्सएप अपना रंग बदलने जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सएप नोटिफिकेशन के यूजर इंटरफेस में नया रंग आने वाला है. इसे हरे रंग की जगह डार्क ब्लू कलर दे दिया जाएगा. तो आइए जानते हैं नए फीचर की ज्यादा डीटेल्स

    इन चीजों का बदल जाएगा रंग

    WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फीचर के तहत व्हाट्सअप मैसेज नोटिफिकेशन में कुछ UI एलीमेंट्स डार्क मोड में ओरिजनल ग्रीन से नीले रंग में बदल जाएंगे. कलर स्कीम में यह बदलाव लाइट मोड में भी दिखाई पड़ सकता है. लेकिन सभी बीटा यूजर्स के लिए यह दिखाई नहीं दे सकता है।

    इसके अलावा, नोटिफिकेशन में दिखने वाला व्हाट्सएप लोगो और बैज भी नए रंग में ही नजर आएगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल कंपनी इस फीचर की टेस्टिंग कर रही है. यह आम यूजर्स के लिए कब तक जारी होगा, इस बारे में नहीं कहा जा सकता. बता दें कि इससे पहले एंड्रॉइड वर्जन 2.21.11.5 के लिए व्हाट्सएप बीटा अपडेट में प्रोफाइल पिक्चर के रंग को भी बदला गया था।

    Flash Call फीचर पर चल रहा काम

    इसके अलावा कंपनी नए फ्लैश कॉल फीचर पर भी काम कर रही है. इसके तहत, व्हाट्सएप लॉगिन करते समय वेरिफिकेशन के लिए यूजर के फोन पर एक फ्लैश कॉल की जाएगी, जो तुरंत ही कट जाएगी. वर्तमान समय में 6-डिजिट का एक वेरिफिकेशन कोड भेजा जाता है. नए फीचर के जरिए यूजर्स एसएमएस वेरिफिकेशन प्रोसेस की तुलना में ज्यादा तेजी से लॉगिन कर पाएंगे।

  • कैसे रहती है दुनिया के सबसे महंगे शहर Hong Kong की बड़ी आबादी?

    कैसे रहती है दुनिया के सबसे महंगे शहर Hong Kong की बड़ी आबादी?

    हांगकांग में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमत ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. वहां हाल ही में एक सोसायटी में पार्किंग स्पेस बिका, जिसे दुनिया का सबसे महंगा पार्किंग स्पेस कहा जा रहा है. इसके प्रति वर्ग फुट के हिसाब से लगभग 134.5 वर्ग फुट की जगह साढ़े 9 करोड़ से भी ज्यादा में बिकी. ये जगह सोसायटी में रहने वाले अपनी गाड़ियों के लिए इस्तेमाल करेंगे. वैसे हांगकांग जमीन के लिहाज से दुनिया के सबसे महंगे शहरों में आता है।

    लगभग 75 लाख की आबादी वाले हांगकांग (Hong Kong) को लिविंग कॉस्ट के लिहाज से दुनिया का सबसे महंगा शहर (most expensive city in the world) मानते हैं. वहां लोगों के लिए जमीन का छोटा टुकड़ा भी बाकी नहीं. ऐसे में लोग कारों से लेकर ताबूतों तक में सो रहे हैं.

    इतनी होती है इन घरों की कीमत

    जगह की कमी को दूर करने के लिए यहां अजीबोगरीब तरीके निकल चुके. जैसे लोग कड़ी के ताबूतनुमा घरों में रहते हैं. 15 स्क्वैयर फीट के लकड़ी के ये बॉक्स ताबूत की शक्ल के होने के कारण कॉफिन क्यूबिकल भी कहलाने लगे हैं. ये वाकई में कब्र की शक्ल के ही होते हैं जिसमें एक या दो लोगों के साथ कुछेक सामान आ सकता है।

    कॉफिन क्यूबिकल बनवाने लोग रियल एस्टेट से ताल्लुक रखते हैं. केज या कॉफिन बनवाने के लिए ये लोग लगभग 400 स्क्वैयर फीट का घर किराए पर लेते या खरीदते हैं. फिर उसे 20 डबल डेकर बिस्तरों के साथ कॉफिन क्यूबिकल में बदल देते हैं. हर बिस्तर का किराया $250 USD यानी लगभग 17,781 रुपए महीने के आसपास होता है।

    2 लाख लोग ऐसे हाल में रहने को मजबूर 6 फुट वाले लोगों के लिए सीधा खड़ा होना नामुमकिन

    लगभग 7.5 मिलियन आबादी वाले हांगकांग का सेंसस बताता है कि एक बड़ी आबादी इन्हीं कॉफिन क्यूबिकल्स में गुजारा कर रही है क्योंकि देश के पास विस्तार के लिए जमीन का नया कोई टुकड़ा नहीं. एक NGO- द सोसाइटी फॉर कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन (एसओसीओ) के अनुसार लगभग 2 लाख लोग, जिनमें 40 हजार बच्चे भी शामिल हैं, इन घरों में रह रहे हैं।

    कॉफिन क्यूबिकल में रहने वाले अधिकतर लोग रेस्टोरेंट में वेटर, क्लीनर, मॉल्स में सिक्योरिटी गार्ड्स और डिलीवरी का काम करते हैं जो खुले घरों का किराया नहीं दे पाते हैं और ऐसे घरों में रहने लगते हैं. घर इतने छोटे होते हैं कि छह फुट की ऊंचाई वाले लोग तनकर खड़े नहीं हो सकते. सोने के लिए पैर सिकोड़कर सोना पड़ता है।

    शवों को दफनाने के लिए लगती है लॉटरी 

    बीच में आई एक और खबर ने तहलका मचा दिया था, जिसके मुताबिक जगह न होने के कारण वहां शवों को दफनाने के लिए पुराने शवों को खोदकर निकाला जा रहा है. वहां की सरकार के आदेशानुसार देश में नए कब्रिस्तान नहीं बनाए जाएंगे. साथ ही आदेश दिया गया कि बनी-बनाई कब्रों को खोदकर हर 6 साल में शव निकालकर उन्हें जला दिया जाए ताकि नए आने वाले शवों के लिए जगह बन सके. मृतक का नंबर 6 साल में आएगा, उसके बाद भी जगह मिलेगी या नहीं, ये लॉटरी से तय होता है।

    ये शहर हैं महंगाई में आगे 

    हांगकांग अपनी कॉस्ट ऑफ लिविंग यानी रहने-खाने के खर्च के लिहाज से दुनिया का सबसे महंगा शहर है. मर्सर ने साल 2020 में ये सर्वे किया था, जिसमें हांगकांग के बाद अश्गाबात (तुर्कमेनिस्तान) दूसरे स्थान पर रहा. इसके बाद टोक्यो, ज्यूरिख और सिंगापुर का नाम है. छठवें स्थान पर न्यूयॉर्क, सातवें स्थान पर शंघाई, आठवें स्थान पर बर्न और जिनेवा शहर रहे, जबकि बीजिंग दसवें स्थान पर रहा।