Author: Sunil Agrawal

  • जीपी बंजारे बने खरसिया चौंकी प्रभारी…

    जीपी बंजारे बने खरसिया चौंकी प्रभारी…

    खरसिया। खरसिया पुलिस चौंकी में उप निरीक्षक गंगाप्रसाद बंजारे ने चौंकी प्रभारी के रूप में पदभार संभाल लिया है। जीपी बंजारे इससे पूर्व सहायक उप निरीक्षक के रूप में खरसिया पुलिस थाना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। चौंकी प्रभारी खरसिया में पदस्थापना के पूर्व जीपी बंजारे लैलूंगा थाने में पदस्थ थे।

    मीड़िया से चर्चा करते हुये नव पदस्थ चौंकी प्रभारी ने कहा की खरसिया मेरे लिये नयी जगह नहीं हैै, यहां आम जनता के सहयोग से उनके साथ मधुर संबंध बना कर कानून के प्रति व्याप्त भ्रम को दूर करना, पुराने लंबित प्रकरणों का निराकरण करने के साथ साथ वरिष्ठ अधिकारीयों के मार्गदर्शन पर कार्य करते हुये अपराध तथा अपराधियों पर अंकुश लगाकर पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पुलिस के प्रति विश्वास पैदा करना मेरी प्राथमिकता रहेगी साथ ही जुआ, सट्टा, शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराईयों को भी बहुत शिद्दत के साथ समाप्त किया जायेगा।

  • अपने बच्चों पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे…

    अपने बच्चों पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे…

    यदि अपने बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन पर नजर रखिए, कहीं वे ऑनलाइन गेम या जुआ तो नहीं खेल रहे हैं। एक समय वह भी था जब बच्चों को घर से बाहर खेलने जाने के लिए मना किया जाता था। दिनभर घर से बाहर रहकर खेलने के लिए उन्हें डांट भी पड़ती थी पर अब समय बदल गया है।

    अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे खेलने के लिए घर से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ऑनलाइन वीडियो गेम और स्मार्टफोन हैं। वीडियो गेम खेलने वाले स्मार्टफोन 7-8 हजार रुपए तक आसानी से मिल रहे हैं। वहीं गूगल प्ले-स्टोर पर मुफ्त मोबाइल गेम भी मिल जाते हैं। दरअसल, ऑनलाइन वीडियो गेमिंग का बाजार बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। इसी के साथ इसके दुष्परिणाम भी बढ़ रहे हैं। कई वीडियो गेम्स बच्चों के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो रहे हैं। आइए जानते हैं गेम्स के बारे में जो बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं, उन्हें हिंसक बना रहे हैं और यहां तक की जान देने के लिए भी उकसा रहे हैं।

    खतरनाक है ये ऑनलाइन गेम्स
    फ्री फायर-फ्री फायर ने मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना सागर रोड निवासी डॉ. बुंदेला के पास दीपक पैथोलॉजी के संचालक विवेक पांडेय के 13 वर्षीय पुत्र ने 40 हजार की रकम हारने से घर मे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कृष्णा उर्फ राजा ने हिंदी और इंग्लिश में सुसाइड नोट लिखा था। बताया था वह डिप्रेशन में था। यह घटना लोगों के लिए एक सबक है। ऐसी ही कई घटनाएं छत्तीसगढ़ में हुई जिसमें बच्चे गेम में फंसकर ठगी के शिकार भी हुए।

    ब्लू व्हेल : ब्लू व्हेल गेम में टास्क पूरा करने के लिए कई बच्चों ने आत्महत्या की। देश में 2017 में इसकी वजह से 100 बच्चों ने मौत को गले लगा लिया। यह गेम गूगल प्ले-स्टोर या एपल के एप स्टोर पर नहीं था, बल्कि इसे इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिंक के जरिए डाउनलोड कराया जा रहा।

    पब्जी मोबाइल : प्लेयर्स अननोन बैटल ग्राउंड के नाम से मशहूर इस गेम के बारे में डॉक्टर राजीव क्षेत्रपाल का कहना है कि यह गेम युवाओं को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। गेम को खेलने के बाद बच्चों में हिंसक प्रवृति भी पनप रही है। मई में मध्यप्रदेश में पबजी गेम में हार जाने के बाद एक 16 साल के बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हो गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वह पिछले 6 घंटे से पबजी खेल रहा था।

    ऐसे पहचानें बच्चों की लत

    • यदि बच्चे की दिनचर्या में बदलाव नजर आए। उसका पूरा कामकाज पबजी के इर्द-गिर्द ही दिखाई देने लगे तो समझिए वह इस खेल की गिरफ्त में जा रहा है।
    • उसका स्वभाव आक्रामक और गुस्सैल हो सकता है। पबजी खेलने से रोकने पर वह हिंसक हो उठता है या गाली-गलौज भी कर सकता है।
    • इस खेल की लत में आया बच्चा आमतौर पर गुमसुम दिखाई देता है। उसकी याददाश्त में कमी आना, बात बिगड़ने के संकेत हैं।

    पैरेंट्स सामान्य मान रहे हैं, ताे उनकी भूल है
    मनोचिकित्सक डॉ राजेश शुक्ला के अनुसार बच्चों के मां-बाप इस आदत पर लगाम लगाने में खुद को असहाय पा रहे हैं। यह सिर्फ खर्च की बात नहीं है, बल्कि बच्चों के दिमाग पर जो इस खेल का असर हो रहा है, वह आगे जाकर जानलेवा हो सकता है। यदि पैरेंट्स इसे सामान्य मान रहे हैं, तो ये उनकी भूल है।

  • Alien चाहें तो मूंगफली की तरह तोड़ सकते हैं पृथ्वी, UFO एक्सपर्ट का सनसनीखेज दावा !

    Alien चाहें तो मूंगफली की तरह तोड़ सकते हैं पृथ्वी, UFO एक्सपर्ट का सनसनीखेज दावा !

    हॉलीवुड की साइंस फिक्शंस (Science Fiction) को देखकर हम भी कई बार ये मान बैठते हैं कि Aliens धरती पर आएंगे और इंसानों से उनकी लड़ाई में हम जीत जाएंगे और एलियंस (Aliens and Human War) चुपचाप लौट जाएंगे. हालांकि UFO Expert की मानें तो ये ख्याल हमें अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए, क्योंकि दूसरे ग्रह से आने वाले ये प्राणी विज्ञान और तकनीक में हमसे सैकड़ों साल ( Aliens have advanced technology) आगे हो सकते हैं.




    Nick Pope ने दावा किया है कि इंसान और एलियंस के बीच की लड़ाई (Aliens and Human War) कभी भी हमारे हित में नहीं होगी क्योंकि एलियंस इंसानों को रौंद डालेंगे (Aliens can Crush Humans) और हमारे खूबसूरत ग्रह को वो चुटकियों में तबाह कर सकते हैं. उनकी ताकत इतनी है कि वो पृथ्वी को मूंगफली (Aliens could crack Earth) की तरह तोड़कर फेंक सकते हैं. आपको बता दें कि ये दावा करने वाले नाइक पोप अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की UFO Investigation Team का हिस्सा रह चुके हैं.





    Aliens से डरना ज़रूरी है
    नाइक पोप का कहना है कि दूसरे ग्रह पर रहने वाले प्राणियों से हमें खतरा इसलिए है, क्योंकि उनके हथियार और तकनीक हमसे करोड़ों साल आगे है. उनका दावा है कि इतनी आगे की टेक्नॉलजी इस्तेमाल करने वाले उनके हथियार हमारे लिए किसी जादू सरीखे होंगे, जिनका सामना करना बेहद मुश्किल होगा. उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि हम सभी जानते हैं कि ब्रह्मांड लगभग 14 अरब साल पुराना है. ऐसे में कुछ सभ्यताएं ऐसी भी होंगी, जो हमसे एक या दो अरब साल पहले शुरू हुई होंगी. अब सोचिए अगर हमने पिछले 2 या 3 सौ साल में बैलगाड़ी से अंतरिक्ष तक का सफर तय कर लिया है, तो जो सभ्यता हमसे अरबों साल पुरानी है, वो कहां पहुंच चुकी होगी?

    धरती को मूंगफल की तरह चिटका देंगे Alien
    UFO प्रोफेसर नाइक पोप ने आगे ये भी कहा है कि जो सभ्यता ब्रह्मांड में पहले मौजूद है, वहां लोग भी हमसे ज्यादा हो सकते हैं. ये कोई 20 या 30 साल आगे की तकनीक लेकर नहीं चल रहे होंगे, वो हमसे लाखों, करोड़ों साल आगे होंगे. पोप के इस डरावने खुलासे में ये भी कहा गया है कि जो उनकी तकनीक और विज्ञान होगा, वो हमारे लिए सिर्फ जादू लगेगा. उनका कहना है कि हमने जो आज ढूंढा है, उसे वो 75 हजार साल पहले ही खोज चुके होंगे. ऐसी तकनीक के लिए हमारे ग्रह पर आकर इसे किसी मूंगफली की तरह तोड़ देना कितना आसान होगा !

  • वैवाहिक बलात्कार तलाक का दावा करने का एक अच्छा आधार हो सकता है : केरल उच्च न्यायालय

    वैवाहिक बलात्कार तलाक का दावा करने का एक अच्छा आधार हो सकता है : केरल उच्च न्यायालय

    न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्तक़ और न्यायमूर्ति के. एडप्पागथ की खंडपीठ ने फैसला सुनाया क्योंकि इसने पति द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें एक पारिवारिक अदालत के फैसले को क्रूरता के आधार पर तलाक देने के फैसले को चुनौती दी गई थी और दाम्पत्य की बहाली के लिए एक याचिका को खारिज कर दिया गया था। अधिकार।

    जबकि फैमिली कोर्ट ने तलाक देते हुए कहा कि पति अक्सर अपनी पत्नी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा अपने ससुर से वित्तीय सहायता मांगता है, उच्च न्यायालय एक कदम आगे चला गया।

    इसने फैसला सुनाया कि “पत्नी की स्वायत्तता की अवहेलना करने वाला पति का अनैतिक स्वभाव वैवाहिक बलात्कार है, हालांकि इस तरह के आचरण को दंडित नहीं किया जा सकता है, यह शारीरिक और मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है … केवल इस कारण से कि कानून वैवाहिक बलात्कार को मान्यता नहीं देता है। दंडात्मक कानून, यह अदालत को तलाक देने के लिए क्रूरता के रूप में इसे पहचानने से नहीं रोकता है। इसलिए, हमारा विचार है कि वैवाहिक बलात्कार तलाक का दावा करने का एक अच्छा आधार है।”

    पीठ ने यह भी कहा कि वैवाहिक बलात्कार भारतीय कानून के तहत एक आपराधिक अपराध नहीं है, लेकिन यह क्रूरता की श्रेणी में आता है और इसलिए पत्नी को तलाक का अधिकार मिल सकता है।

    यह भी नोट किया गया कि पति के “धन और सेक्स के लिए अतृप्त इच्छा” ने प्रतिवादी को तलाक का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया था।

    “अपीलकर्ता के अनैतिक और दुराचारी आचरण को सामान्य वैवाहिक जीवन का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। इसलिए, हमें यह मानने में कोई कठिनाई नहीं है कि पति या पत्नी के धन और लिंग के लिए अतृप्त इच्छा भी क्रूरता होगी, ”अदालत ने फैसला सुनाया क्योंकि उसने पारिवारिक अदालत द्वारा दिए गए तलाक को बरकरार रखा था।

  • स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने दिया इस्तीफा? प्रदेश में मचा हड़कंप…. सिंहदेव कार्यालय से बयान जारी…जानिए सच

    स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने दिया इस्तीफा? प्रदेश में मचा हड़कंप…. सिंहदेव कार्यालय से बयान जारी…जानिए सच

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के इस्तीफे की खबर वायरल हो गयी है। सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही खबरों को लेकर हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के आफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में खंडन किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के अपने पद से इस्तीफा देने की खबर एक नेशनल न्यूज चैनल में प्रसारित होने के चंद मिनटों में ही प्रदेश में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मंत्री सिंहदेव की ओर से इस खबर खंडन जारी किया गया है। 

    टीएस सिंहदेव की कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के अपने पद से इस्तीफा देने की खबर केवल पूर्णतः असत्य और निराधार है। टीएस सिंहदेव के विरुद्ध यह अफवाह फैलाई जा रही है। सभी से निवेदन है कि ऐसी झूठी खबरों पर ध्यान न दें। एक नेशनल चैनल ने इस बाबत खबर प्रसारित की थी कि मुख्यमंत्री नहीं बनाने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने अपना इस्तीफा दे दिया है। मामले ने इसलिए ज्यादा सच्चाई लोगों को लगी क्योंकि अभी फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री सिंहेदव दिल्ली में ही है। 

    तेजी से वायरल हो रही खबरों में ये दावा किया जा रहा है कि ढ़ाई साल बाद मुख्यमंत्री नहीं बनाये जाने से टीएस सिंहदेव ने नाराज हैं और उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव की तरफ से बताया गया है कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री टीएस सिंहदेव द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने की खबर केवल पूर्णतः असत्य और निराधार है। श्री टीएस सिंहदेव जी के विरुद्ध यह अफवाह फैलाई जा रही है, अतः आप सभी से निवेदन है कि ऐसी खबरों पर ध्यान न दें।

  • राज्य में 29 नई तहसीलों और 4 नए अनुविभागों का गठन….शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति पर कही ये बड़ी बात…

    राज्य में 29 नई तहसीलों और 4 नए अनुविभागों का गठन….शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति पर कही ये बड़ी बात…

    29 नई तहसीलों और 04 अनुविभागों का गठन

    मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के सतीश उपाध्याय, बालोद जिले के युवा विनय कुमार मरकाम और बस्तर अंचल के दरभा के रहने वाले सोमनाथ से हुई बातचीत का उत्तर देते हुए कहा कि हमने ढाई वर्षों में 29 नई तहसीलें और 4 नए अनुविभाग गठित किए हैं, उनमें से अधिकतर आदिवासी अंचल में ही हैं। कोरिया जिले में पटना के साथ चिरमिरी और केल्हारी तहसीलें भी गठित की गई हैं। इसके अलावा कबीरधाम जिले में रेंगाखार-कला, सरगुजा जिले में दरिमा, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में रामचंद्रपुर, सामरी, सूरजपुर जिले में लटोरी, बिहारपुर, जशपुर जिले में सन्ना और सुकमा जिले में गादीरास आदि प्रमुख हैं। इसी तरह चार नवीन अनुविभागों में दंतेवाड़ा का बड़े बचेली और बस्तर का लोहंडीगुड़ा शामिल है। बरसों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए गौरेला – पेण्ड्रा – मरवाही को जिला ही नहीं बनाया गया बल्कि आदिवासी बहुल आबादी वाले इस क्षेत्र को उनका हक भी दिया गया। हमारा यह मानना है कि नई प्रशासनिक इकाईयों के गठन से लोगों को अपनी भूमि, खेती-किसानी से संबंधित काम, बच्चों की पढ़ाई, नौकरी या रोजगार से संबंधित कामों के लिए आसानी होगी। सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। इसे ही हमने प्रशासनिक संवेदनशीलता का मूलमंत्र बनाया है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरिया जिले के मेरीन फॉसिल्स पार्क – जैव विविधता पार्क का सवाल है, हम सिर्फ कोरिया ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जिले में अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को सहेजने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं। 

    52 वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी

    मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत चेरपाल की यशोदा पुजारी, सुकमा जिले के पोलमपल्ली निवासी अजय बघेल और कबीरधाम जिले के दयाल सिंह बैगा के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन से हमें लगा था कि आदिवासी अंचलों और शेष क्षेत्रों के बीच विकास का अंतर दूर कर लिया जाएगा, लेकिन हमने देखा कि विगत वर्षों में यह अंतर और भी अधिक बढ़ गया है। इसलिए हमने सबसे पहले विश्वास जीतने की बात की। इसके लिए निरस्त वन अधिकार पट्टों के दावों की समीक्षा, जेल में बंद आदिवासियों के प्रकरणों की समीक्षा कर अपराध मुक्ति, बड़े उद्योग समूह के कब्जे से आदिवासियों की जमीन वापस लौटाने का निर्णय, तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा करने का निर्णय लिया गया। इससे आदिवासी अंचलों में सरकार और व्यवस्था के प्रति विश्वास का नया दौर शुरू हुआ है। हमने 7 से बढ़ाकर 52 वनोपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की, पुरानी दरों को भी बदला जिसके कारण वनोपज संग्रह से ही 500 करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त सालाना आमदनी का रास्ता बन गया। अनुसूचित क्षेत्रों में कोदो, कुटकी, रागी जैसी फसलों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने के इंतजाम किए गए हैं तथा लाख को कृषि का दर्जा दिया गया है। वन अधिकार मान्यता पत्रधारी परिवारों के खेतों में उपजे धान को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की गई है। देवगुड़ी और घोटुल स्थलों का विकास कर आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

    नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में 1637 करोड़ रूपए की लागत से सड़कें

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 16 हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हमारे आदिवासी अंचलों को सैकड़ों ऐसी सड़कें मिलेंगी, जिनका इंतजार वे दशकों से कर रहे थे। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए हम 1 हजार 637 करोड़ रुपए की लागत से सड़कें बना रहे हैं। आदिवासी अंचलों में बिजली की सुविधा देने के लिए अति उच्च दाब के चार वृहद उपकेन्द्र का निर्माण पूरा कर लिया गया है। नारायणपुर, जगदलपुर, बीजापुर और सूरजपुर जिले के उदयपुर में ये उपकेन्द्र प्रारंभ हो जाने से बिजली आपूर्ति सुचारू हो गई है। इसके अलावा विगत ढाई वर्षों में आदिवासी अंचलों में सौर ऊर्जा से संचालित 74 हजार सिंचाई पम्प, 44 हजार से अधिक घरों में रोशनी और लगभग 4 हजार सोलर पेयजल पम्पों की स्थापना की गई है, जो अपने आप में कीर्तिमान है।

    छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार

    कबीरधाम जिले के किशन लाल द्वारा वनोपजों के प्रसंस्करण को आगे बढ़ाने को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा में एक बड़े उद्योग की स्थापना के नाम से ली गई आदिवासियों की जमीन वापसी की घोषणा के साथ आदिवासियों को न्याय दिलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 10 गांवों के 1 हजार 707 किसानों को 4 हजार 200 एकड़ जमीन के दस्तावेज प्रदान किए जा चुके हैं। कोण्डागांव में मक्का प्रोसेसिंग इकाई का शिलान्यास किया गया है। प्रदेश में 146 विकासखण्डों में से 110 विकासखण्डों में फूडपार्क स्थापित करने हेतु भूमि का चिन्हांकन तथा अनेक स्थानों पर भूमि हस्तांतरण भी किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ में 139 वनधन विकास केन्द्र स्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 50 केन्द्रों में वनोपजों का प्रसंस्करण भी हो रहा है। इस काम में लगभग 18 हजार लोगों को रोजगार मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा ‘छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से 121 उत्पादों की मार्केटिंग की जा रही है। भारत सरकार की संस्था ट्रायफेड द्वारा 6 अगस्त को छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी तथा इससे संबंधित अन्य व्यवस्थाओं के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।  यह हमारे आदिवासी अंचलों के साथ पूरे प्रदेश के लिए भी गौरव का विषय है। दुर्ग जिले में 78 करोड़ रुपए से अधिक लागत पर एक वृहद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। राज्य में वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए वनांचल उद्योग पैकेज लागू किया गया है। इसके अलावा दंतेवाड़ा में रेडिमेड कपड़ों का ‘ब्रांड डेनेक्स’ एक सफल प्रयोग साबित हुआ है। नवचेतना बेकरी भी काफी सफल हो रही है। ऐसे कामों से सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।

    ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ से बढ़ेंगे ग्रामीणों के आय के साधन

    ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को वे भविष्य में स्थानीय लोगों, आदिवासी और वन आश्रित परिवारों की आय के बहुत बड़े साधन के रूप में देखते हैं। खुद लगाए वृक्षों से इमारती लकड़ी की कटाई और फलों को बेचकर लोगों की आय बड़े पैमाने पर बढ़ेगी।  निजी लोगों को ही नहीं, बल्कि पंचायतों और वन प्रबंधन समितियों को भी पेड़ लगाने और काटने के अधिकार दिए गए हैं। 

    हाट-बाजारों तक पहुंची स्वास्थ्य सुविधा, एनीमिया और कुपोषण में आई कमी

    लोकवाणी के माध्यम से आदिवासी क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताएं अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार और स्कूल में शिक्षकों की कमी के प्रश्न पर जवाब देते हुए बघेल ने कहा कि निश्चित तौर पर आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ी जरूरत है। इस दिशा में प्राथमिकता से काम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरतोें को  डीएमएफ मद से पूरी करने के लिए आवश्यक नियम बनाए गए हैं। सीएसआर और अन्य मदों की राशि भी इन्हीं प्राथमिकताओं के लिए खर्च करने की रणनीति अपनाई है। इसके कारण बीजापुर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर में अब उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। सुकमा जिले में भी बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के सुदूर अंचल में ग्रामीणों को सहजता से स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने हमने मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना शुरू की है। इससे अब आदिवासी भाई-बहनों का उपचार हाट-बाजारों में होने लगा है। इसका लाभ 11 लाख से अधिक लोगों को मिल चुका है। 

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पांच वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार थे और 15 से 49 वर्ष तक की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया अर्थात खून की कमी से ग्रस्त थीं। आदिवासी जिलों में हालत और भी खराब थी। इसे देखते हुए हमने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया, जिसमें डीएमएफ और जनभागीदारी के योगदान को बढ़ावा दिया। योजना के माध्यम से बच्चों को दूध, अण्डा, स्थानीय प्रचलन के अनुसार पौष्टिक आहार दिया, जिसके कारण कुपोषण और एनीमिया की दर में तेजी से कमी आ रही है।

    मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की यूएनडीपी और नीति आयोग ने की सराहना

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान शुरू होने से एक साल में बस्तर संभाग में मलेरिया के प्रकरण 45 प्रतिशत और सरगुजा संभाग में 60 प्रतिशत कम हो जाना सुखद है। यूएनडीपी और नीति आयोग ने मलेरियामुक्त बस्तर अभियान की तारीफ करते हुए बीजापुर जिले में मलेरिया में 71 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा में 54 प्रतिशत तक कमी करने की सफलता को बेस्ट प्रेक्टिस के रूप में सराहा है और अन्य आकांक्षी जिलों को भी इस अभियान को अपनाने की सलाह दी है। 

    प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति

    सीएम बघेल ने बताया कि शिक्षा के लिए हमने संकटग्रस्त क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस किया। जिसके कारण सुकमा जिले के जगरगुंडा में 13 वर्षों से बंद स्कूल बीते साल खुल चुका है। कुन्ना में स्कूल भवन का पुनर्निर्माण तथा दंतेवाड़ा जिले के मासापारा-भांसी में भी 6 सालों से बंद स्कूल अब खुल गया है। कोरोना काल में पढ़ाई तुंहर पारा अभियान के तहत लाखों बच्चों को उनके गांव-घर-मोहल्लों में खुले स्थानों पर भी पढ़ाया गया। प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों को मातृभाषा में समझाना अधिक आसान होता है इसलिए हमने 20 स्थानीय बोली-भाषाओं में पुस्तकें छपवाईं, जिसका लाभ आदिवासी अंचलों में मिला। बीस साल बाद प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति आदेश दे दिए गए हैं। इससे आदिवासी अंचलों में भी शिक्षकों की कमी स्थायी रूप से दूर हो जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कोरोना की ‘तीसरी लहर’ को लेकर सभी से बहुत सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्व-त्यौहार मनाते समय फिजिकल डेस्टिेंसिंग का पालन करें, मास्क का उपयोग करें, हाथ को साबुन-पानी से धोते रहें तथा टीका जरूर लगवाएं। खुद को बचाए रखना ही सबसे जरूरी उपाय है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2599739909253663&output=html&h=343&adk=3778279294&adf=3088327681&pi=t.aa~a.1097654583~i.81~rp.4&w=412&lmt=1629007678&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=5138987475&psa=1&ad_type=text_image&format=412×343&url=https%3A%2F%2Fnayabharat.live%2Fformation-of-29-new-tehsils-and-4-new-sub-divisions-in-the-state&flash=0&fwr=1&pra=3&rh=319&rw=382&rpe=1&resp_fmts=3&sfro=1&wgl=1&fa=27&adsid=ChEI8NPdiAYQheWVyL2imr3YARI5ADvDsOkF8PeQe-pjXobRBdwuzkdJD-kT738hayURIg7fPrEwNLgIIHBbOuDqYqbSZISqZE3DLoq-&uach=WyJBbmRyb2lkIiwiMTAiLCIiLCJTTS1BNzUwRiIsIjkyLjAuNDUxNS4xMzEiLFtdLG51bGwsbnVsbCxudWxsXQ..&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hdHRlc3RhdGlvbi5hbmRyb2lkLmNvbSIsInN0YXRlIjo3fV0.&dt=1629007649524&bpp=16&bdt=2564&idt=17&shv=r20210809&mjsv=m202108100101&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D26e752b21af7e596-22645bb91aca001f%3AT%3D1625230241%3ART%3D1625230241%3AS%3DALNI_Ma6HP1xjvRXV4Kk_XyHILecd8D9nw&prev_fmts=0x0%2Cauto%2Cauto%2Cauto%2Cauto%2Cauto%2C412x343%2C412x343%2C412x343%2C412x343%2C412x343&nras=7&correlator=2001399239806&frm=20&pv=1&ga_vid=993718417.1625230239&ga_sid=1629007649&ga_hid=1081485266&ga_fc=0&ga_cid=993718417.1625230239&u_tz=330&u_his=1&u_java=0&u_h=846&u_w=412&u_ah=846&u_aw=412&u_cd=24&u_nplug=0&u_nmime=0&adx=0&ady=7447&biw=412&bih=718&scr_x=0&scr_y=2277&eid=20211866%2C21067496%2C31062297%2C31062164&oid=3&pvsid=1047165732579364&pem=100&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C412%2C0%2C412%2C774%2C412%2C774&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=128&bc=31&jar=2021-08-06-07&ifi=8&uci=a!8&btvi=5&fsb=1&xpc=PYLNfxEJqw&p=https%3A//nayabharat.live&dtd=28580

    मुख्यमंत्री बघेल ने राम-वन-गमन पथ पर बात करते हुए कहा कि यह बहुत गर्व का विषय है कि भगवान राम का अवतार जिस काम के लिए हुआ था, उन प्रसंगों की रचना छत्तीसगढ़ में हुई। वास्तव में भगवान राम छत्तीसगढ़ में कौशल्या के राम और ‘वनवासी राम’ के रूप में प्रकट होते हैं।  यह अद्भुत संयोग है कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ में प्रवेश, संचरण और प्रस्थान सघन आदिवासी अंचल में ही हुआ। कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका में प्रवेश और सुकमा जिले के अंतिम स्थान कोंटा तक उनकी पदयात्रा। एक बार फिर राम के रास्ते पर चलते हुए अगर हम 2 हजार 260 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करते हैं तो इससे पूरे रास्ते में विकास के दीये जल उठेंगे। आस्था के साथ जुड़ी सड़कें, सुविधाओं के साथ आजीविका के नए-नए साधन भी आएंगे। यह समरसता और सौहार्द्र के साथ वनवासी राम के प्रति आस्था का परिपथ बनेगा, जो नदियों, नालों, झरनों, जलप्रपातों, खूबसूरत जंगलों से गुजरते हुए सैकड़ों पर्यटन स्थलों का उद्धार करेगा।

  • राष्ट्रपति महिला एजेंट को देते हैं सेक्स वर्कर की ट्रेनिंग…. पूर्व जासूस का एकेडमी में हुआ था Rape…. हुस्न के जाल में फंसाने की ट्रेनिंग….

    राष्ट्रपति महिला एजेंट को देते हैं सेक्स वर्कर की ट्रेनिंग…. पूर्व जासूस का एकेडमी में हुआ था Rape…. हुस्न के जाल में फंसाने की ट्रेनिंग….

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए जासूसी करने वाली एक पूर्व सीक्रेट एजेंट ने कई खुलासे किए हैं। उसने बताया कि किस तरह रूस में महिला एजेंटों को प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है। उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है। लेकिन वह किसी से शिकायत नहीं कर सकतीं। यदि कोई ऐसा करने का साहस दिखता है तो उसकी पूरी जिंदगी जेल की चारदीवारी में गुजर जाती है। रूसी एजेंट के रूप में आलिया रोजा को जो जख्म मिले है उसे अब सार्वजनिक किया है। 
     
     
    आलिया रोजा देश की सेवा करने के लिए महिला एजेंट बनने के ऑफर को अपना लिया। वहीं ट्रेनिंग एकेडमी में ही उनका बलात्कार किया गया। मगर वह चाहकर भी इसकी शिकायत नहीं कर पाईं। वहीं ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपने पहले असाइनमेंट के तौर पर उन्हें सेक्स वर्कर की भूमिका निभानी पड़ी। आलिया सबकुछ बेचकर स्विट्जरलैंड और फिर लंदन गईं। आज वह अमेरिका की फैशन इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा बन गई हैं। आलिया ने बताया कि वह किसी से शिकायत नहीं कर सकतीं थी।

    यदि कोई ऐसा करने का साहस दिखता है तो उसकी पूरी जिंदगी जेल की चारदीवारी में गुजर जाती है। आलिया ने कहा कि ‘अगर मैं शिकायत करती भी तो किससे, पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ट्रेनिंग एकेडमी में महिला एजेंट को इस कला में पारंगत किया जाता है कि पुरुषों को कैसे रिझाना है, कैसे अपने हुस्न के जाल में फंसाकर उनसे जानकारी निकलवानी है। मेरे पहले टास्क में मुझसे खुद को सेक्स वर्कर की तरह पेश करने को कहा गया, ताकि में क्लब जाकर ड्रग्स गैंग के सरगना को फंसा सकूं’।

  • देश में अगले साल से बैन हो जाएगा सिंगल यूज प्लास्टिक….

    देश में अगले साल से बैन हो जाएगा सिंगल यूज प्लास्टिक….

    दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन संशोधन नियम-2021 को अधिसूचित कर दिया है जिसके तहत एक जुलाई 2022 से लॉलीपॉप की डंडी, प्लेट, कप और कटलरी सहित एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के तौर पर चिह्नित वस्तुओं के उत्पादन, आयात, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक होगी. बारह अगस्त को जारी अधिसूचना के मुताबिक, सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक बैग की मोटाई 30 सितंबर 2021 से 50 माइक्रॉन से बढ़ाकर 75 माइक्रॉन की जाएगी और 31 दिसंबर 2022 से यह मोटाई 120 माइक्रॉन होगी. इससे प्लास्टिक के बैग के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा.
    अधिसूचना के मुताबिक 30 सितंबर 2021 से गैर बुना प्लास्टिक बैग का वजन 60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम नहीं होगा।

    अधिसूचना में कहा गया, ‘एक जुलाई 2022 से पॉलिस्ट्रिन और लचीले पॉलिस्ट्रिन सहित एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के उत्पादन, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक होगी. प्लास्टिक की डंडी युक्त ईयर बड, गुब्बारे की प्लास्टिक से बनी डंडी, प्लास्टिक के झंडे, लॉलीपॉप और आईसक्रीम की डंडी, सजावट में इस्तेमाल होने वाले पॉलिस्ट्रिन (थर्मेाकोल), प्लेट, कप, ग्लास, कटलरी जैसे कांटे, छुरी, चम्मच, चाकू, मिठाई के डिब्बों में इस्तेमाल प्लास्टिक, 100 माइक्रॉन से कम मोटे प्लास्टिक या पीवीसी के बैनर आदि पर रोक होगी.’
    अधिसूचना में कहा गया कि ये प्रावधान नष्ट होने वाली प्लास्टिक से बनी वस्तुओं पर लागू नहीं होंगे. उल्लेखनीय है कि जून 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत में वर्ष 2022 से एकल इस्तेमाल प्लास्टिक का उपयोग नहीं होगा।

    वर्ष 2019 में हुई संयुक्त राष्ट्र पयार्वरण सभा में भारत ने उस प्रस्ताव का नेतृत्व किया था जिसमें एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के उत्पादों से होने वाले प्रदूषण से निपटने की बात थी. इसमें स्वीकार किया गया था कि विश्व समुदाय को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है.
    पर्यावरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चरणपद्ध तरीके से हटाए जाने वाले, चिह्नित एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के दायरे से बाहर के प्लास्टिक कचरे को, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत निर्माता, आयातक और ब्रांड मालिकों द्वारा विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी के चलते एकत्र कर उसका पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन किया जाना चाहिए. विस्तृत निर्माता जवाबदेही के प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिशानिर्देश बनाए गए थे और इन संशोधित नियमों में उन्हें कानूनी ताकत दी गई है. इसके अनुपयोगी प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी उत्पादक की होगी।

    केंद्र सरकार ने इससे पहले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुख्य सचिव या प्रशासक के नेतृत्व में एकल इस्तेमाल प्लास्टिक को खत्म करने के लिए कार्यबल बनाने और प्रभावी तरीके से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम को लागू करने को कहा था।

    संसद में दिए गए जवाब में पर्यावरण राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने बताया कि 23 जुलाई तक 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कार्यबल गठित कर दिया था. पर्यावरण मंत्रालय ने अपने निर्देशों में समन्वय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी कार्यबल का गठन किया है।

  • कमरे में मिले अफसर और महिला कर्मचारी, ड्यूटी के समय सरकारी कमरे में प्राइवेट काम! मचा हड़कंप….

    कमरे में मिले अफसर और महिला कर्मचारी, ड्यूटी के समय सरकारी कमरे में प्राइवेट काम! मचा हड़कंप….

    कोरबा। जिले में वन विभाग का एक अधिकारी ड्यूटी के समय महिला कर्मचारी के साथ बंद कमरे में प्राइवेट काम करते मिला है। जब ग्रामीणों ने इसकी पुलिस को दे दी। तो दोनों के होश उड़ गए। मामला कोरबा जिले के कोतवाली थाना इलाके का है। पुलिस दोनों को पकड़कर थाने ले गई। फिर औपचारिक कार्रवाई कर छोड़ दिया। कोतवाली थाना प्रभारी विवेक शर्मा ने बताया कि स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे।
     
     
    सरकारी अधिकारी और महिला कर्मचारी एक बंद कमरे में मिले। फिलहाल उनके खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई है। नयाभारत को मिली जानकारी के मुताबिक वन विकास निगम के अधिकारी को जिस बंद कमरे में महिला कर्मी के साथ पकड़ा गया। वो किसी फील्ड ऑफिसर आर।के खांडे के नाम पर आवंटित किया गया है। जबकि इसका उपयोग पकड़े गए जोड़ें के द्वारा अनैतिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।

    सीएसईबी कॉलोनी के लोग पिछले कुछ दिनों से यहां की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। गुरुवार को यहां पर यह जोड़ा पहुंचा और इसके बाद पुलिस को जानकारी दे दी गई। पुलिस की टीम ने घर में दबिश दी। तो दोनों एक ही रूम में मिले। पुलिस दोनों को पकड़कर रामपुर चौकी ले आई। यह मामला सार्वजनिक होने पर इसे आनन-फानन में निपटा दिया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ 151 के तहत कार्रवाई किया है।

  • निगम-मंडलों की लिस्ट में कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिलने से विधानसभा अध्यक्ष महंत नाराज…. बोले, ‘मैं नाराज हूं, ये सही बात है’…

    निगम-मंडलों की लिस्ट में कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिलने से विधानसभा अध्यक्ष महंत नाराज…. बोले, ‘मैं नाराज हूं, ये सही बात है’…

    कोरिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत अपने तीन दिवसीय दौरे पर कोरिया पहुंचे हैं। मनेन्द्रगढ़ में पत्रकारों ने डॉ चरणदास महंत से ढाई ढाई साल के सीएम पर सवाल किया। ढाई-ढाई साल के सीएम पद के फार्मूले पर कहा कि ये सीएम और बाबा के बीच का मामला है। इसके बारे में राहुल गांधी ही अच्छे से बता सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि वो निगम-मंडलों में कोरिया जिले से किसी को जगह नहीं मिलने से नाराज हैं।

    मैं नाराज हूं


    निगम मंडल में कोरिया से किसी को पद नहीं मिलने के सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत बोले की कोरिया जिले से किसी को निगम मंडल में कोई पद नही मिलने से मैं नाराज हूं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मनेन्द्रगढ़ को जिला बनाए जाने के सवाल पर कहा कि कुछ अच्छा हो सकता है जो इतिहास बन जाएगा। मीडिया से चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक डॉ. विनय जायसवाल सहित अन्य बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद थे। 

    ढाई ढाई साल के सीएम पर बोले ये

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत से ढाई ढाई साल के सीएम पर सवाल किया गया। तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के नाम का फाइनल हो रहा था तब हम चार लोग थे। सेमीफाइनल खेल रहे थे। दो लोगों का नाम फाइनल हुआ। मामला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और बाबा के बीच का है। इसके संबंध में राहुल गांधी अच्छे से बता सकते हैं।