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  • ड्रॉप होंगे तीन मंत्री?

    ड्रॉप होंगे तीन मंत्री?

    देवती कर्मा के विधायक निर्वाचित होने के बाद सियासी गलियारों में उन्हें मंत्री बनाने की अटकलें बड़़ी तेज हैं। इसके पीछे ठोस तर्क भी दिए जा रहे….बस्तर का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बेहद कम है। सिर्फ एक। कवासी लकमा उद्योग और आबकारी विभाग संभाल रहे हैं। वहीं, सरगुजा से तीन मंत्री हैं। सबसे सीनियर टीएस सिंहदेव। फिर प्रेमसाय सिंह और नए मंत्री अमरजीत भगत। जाहिर है, सरकार मंत्रिमंडल में बस्तर का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहेगी। और, सियासी दृष्टि से देवती से अच्छा कोई नाम नहीं हो सकता। बस्तर शेर कहे जाने वाले दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी हैं। ट्राईबल भी और महिला भी। कहने के लिए हो जाएगा, भूपेश सरकार ने राज्य बनने के बाद पहली बार दो महिलाओं को मंत्रिमंडल में जगह दी। लेकिन, इसके लिए सरकार को मंत्रिमंडल में एक सर्जरी करनी होगी। क्योंकि, कोटा फुल है। 12 ही मंत्री बन सकते हैं। एक सीट खाली थी, उस पर अमरजीत को मौका मिल गया। वैसे, नगरीय निकाय चुनाव के बाद माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में एक सर्जरी होगी। इसमें दो-से-तीन मंत्री ड्रॉप हो सकते हैं। तीनों के परफारमेंस पुअर है। एक विकेट सरगुजा से गिरेगा। दो और नामों की चर्चा है।

    ट्रेंगुलर मुकाबला

    चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर को छह महीने का एक्सटेंशन देने के लिए सरकार ने केंद्र को रिमाइंडर भेजा है। उसमें बताया गया है कि वर्तमान सीएस को एक्सटेंशन देना क्यों जरूरी है। लिहाजा, अब सीके खेतान और आरपी मंडल के साथ ही सुनील कुजूर का नाम भी सीएस की दौड़ में शामिल हो गया है। हालांकि, पहले यह माना जा रहा था कि भारत सरकार आसानी से एक्सटेंशन देती नहीं। लेकिन, सरकार के रिमाइंडर से यह जाहिर हुआ है कि कुजूर को लेकर सरकार गंभीर है। बहरहाल, रिमाइंडर पर भारत सरकार क्या रुख अपनाती है यह आखिरी समय में ही तय होगा। जानकारों का कहना है, ऐसे केस में भारत सरकार लास्ट वीक या लास्ट दिन भी कई बार फैसले करती है। याने 31 अक्टूबर को कुजूर रिटायर होने वाले हैं तो उससे एक-दो दिन पहले सरकार का फैसला आएगा। यदि एक्सटेंशन मिलेगा तो लेटर आ जाएगा। और, नहीं तो 30 अक्टूबर तक वेट कर राज्य सरकार नए सीएस का ऐलान कर देगी। उससे पहिले सूबे में अटकलों का दौर जारी है। खासकर, ब्यूरोक्रेसी में इसको लेकर खूब गुणा-भाग किए जा रहे हैं। हालांकि, कैलकुलेशन का कोई मतलब नहीं। चीफ सिकरेट्री और डीजीपी वही बनता है, जिसके माथे पर लिखा होता है। वरना, कई आईएएस, आईपीएस बिना इस पद को इनज्वॉय किए बिदा नहीं हो गए होते। सुनील कुजूर भी भला कभी सोचे होंगे कि वे चीफ सिकरेट्री बन सकते हैं। और, एक्सटेंशन देने के लिए सरकार प्रयास करेगी। वे तो बेचारे अदद एक बढ़ियां विभाग के मोहताज थे। इसी तरह रिटायर डीजीपी एएन उपध्याय भी हैं। उनके जैसा दुनियादारी से दूर रहने वाले अफसर को सरकार डीजीपी बनाएगी, उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन, उपध्याय ने पोस्टिंग का रिकार्ड ही बना दिया। पूरे पौने पांच साल डीजीपी रहे।

    मंत्री के लेटरहेड पर वसूली

    स्कूल शिक्षा विभाग के ट्रांसफर में गोलमाल को लेकर सरकार ने मंत्री के ओएसडी और विशेष सहायक की छुट्टी कर दी। लेकिन, इसके बाद भी विभाग में नित नए कारनामे सामने आ रहे हैं। बताते हैं, स्कूल शिक्षा डायरेक्ट्रेट के स्थापना शाखा के एक अधिकारी ने डीईओ, बीईओ के ट्रांसफर के लिए दूसरे विभाग के एक मंत्री का लेटरहेड जुगाड़ लिया। और, जिसने पैसा दिया, उसके लिए उसी लेटरहेड पर मंत्री की तरफ से खुद ही ट्रांसफर की अनुशंसा कर आर्डर निकाल दिया। ताकि, कोई पूछ तो बता दें कि फलां मंत्रीजी ने रिकमांड किया था। स्कूल शिक्षा इससे बेखबर रहे। अफसर के खेल का भंडाफोड़ तब हुआ, जब लिस्ट में एक ही समुदाय के 70 परसेंट से अधिक लोग डीईओ, बीईओ बन गए। सरकार को इसकी जानकारी मिल गई है। जल्द ही स्कूल शिक्षा में तीसरा विकेट गिर जाए, तो आश्चर्य नहीं।

    विवेकानंद का रिकार्ड

    लांग कुमेर के बाद विवेकानंद बस्तर के पहिले आईजी होंगे, जिन्होंने वहां ढाई साल का लंबा कार्यकाल पूरा कर लिया है और अभी भी पिच पर जमे हुए हैं। वे ऐसे समय में बिलासपुर से बस्तर गए थे, जब बिलासपुर में आईजी बने उनका तीन महीना भी नहीं हुआ था। एसआरपी कल्लूरी को बस्तर से हटाने के बाद सरकार किसी उपयुक्त चेहरे की तलाश कर रही थी। उस समय तत्कालीन डीजीपी एएन उपध्याय ने सरकार को सुझाया कि विवेकानंद बस्तर के लिए बेहतर होंगे। इस बेहतर के फेर में विवेकानंद फंस गए। वरना, बस्तर गए अधिकांश आईजी साल, डेढ़ साल में जोर-जुगाड़ लगाकर रायपुर लौट आए। सिर्फ लांग कुमेर ही ऐसे आईपीएस थे, जो लंबे समय तक बस्तर में रहे। लेकिन, वे वैसा खुद चाह रहे थे। उन्हें हिन्दी का प्राब्लम था फिर वहां उन्होंने ऐसा कुछ जमा लिया था कि डीआईजी, आईजी और एडीजी बनने तक कुछ दिन वे बस्तर रेंज में रहे।

    अमिताभ और सोनमणि

    अमिताभ जैन जब दिल्ली डेपुटेशन से लौटे थे तो उस समय शेखर दत्त सूबे के गवर्नर थे। राज्य में भाजपा की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस की। शेखर दत्त ने मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह से अमिताभ जैन को सिकरेट्री के रूप में मांगा था। और, यह दूसरी बार हुआ कि राज्यपाल अनसुईया उईके ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फोन कर सोनमणि बोरा सचिव के रूप में मांगा। और, मुख्यमंत्री ने इसमें तनिक भी देरी नहीं लगाई। सोनमणि का आदेश राजभवन के लिए जारी हो गया।

    22 दिन का कार्यकाल

    सोनमणि बोरा के लिए अखरने वाली बात यह रही कि सबसे कम दिन तक किसी विभाग में सिकरेट्री रहने का रिकार्ड उनके नाम दर्ज हो गया। सिर्फ 22 दिन। इस 22 दिन में एक बहुत बड़ा काम उन्होंने यह किया कि हाईकोर्ट में रिट दायर कर सहायक प्राध्यापकों की भरती पर लगी रोक उन्होंने हटवा दी। संस्कृति सचिव के रूप में ट्राईबल डांस को लेकर भी वे बड़ा तेजी से काम कर रहे थे। ये दोनों उनके हाथ से निकल गए। हालांकि, पहले भी राजभवन के साथ ही हायर एजुकेशन या किसी और विभाग का चार्ज अफसरों के पास हमेशा रहा है। वैसे, छत्तीसगढ़ राजभवन में सुनील कुजूर, आईसीपी केसरी, शैलेष पाठक, अमिताभ जैन सिकरेट्री रहे हैं। आरआर के रूप में सोनमणि का नाम भी इसमें जुड़ गया।

    दुआ कीजिए!

    हायर एजुकेशन में चार महीने में चार सिकरेट्री चेंज हो गए। 31 मई को सुरेंद्र जायसवाल रिटायर हुए थे। रेणु पिल्ले को उनकी जगह सिकरेट्री बनाया गया था। 9 सितंबर को उन्हें हटाकर सोनमणि बोरा को हायर एजुकेशन का दायित्व सौंपा गया। एक अक्टूबर को वे भी बिदा हो गए। अलरमेल मंगई डी अब उच्च शिक्षा की नई सिकरेट्री बनी हैं। इस विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को कुछ अनुष्ठान वगैरह करना चाहिए। ताकि, मंगई कुछ दिन हायर एजुकेशन में बनी रहें।

  • सेक्स स्कैंडल में फंसा पूर्व ओलंपिक चैंपियन, इंटरनेट पर वीडियो लीक

    सेक्स स्कैंडल में फंसा पूर्व ओलंपिक चैंपियन, इंटरनेट पर वीडियो लीक

    ओलंपिक में हंगरी के लिए गोल्ड मेडल जीत चुके पूर्व जिम्नास्ट जोल्ट बोर्काई सेक्स स्कैंडल में फंस गए हैं, उनका एक वीडियो इंटरनेट पर लीक हुआ है, इसमें वे दो लड़कियों के साथ ड्रग्स लेते दिख रहे हैं। यह वीडियो कई वेबसाइट्स पर अपलोड किया गया है, इस वीडियो में वे लड़कियों के साथ सेक्स भी करते दिख रहे हैं। बोर्काई ने 1988 सियोल ओलंपिक में पॉमेल हॉर्स इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था।



    जोल्ट बोर्काई 2006 से ग्योर शहर के मेयर भी हैं, वे इस बार भी मेयर चुने गए हैं। वे प्रधानमंत्री विक्टर ओरबन के काफी करीबी भी माने जाते हैं. वीडियो लीक होने के बावजूद बोर्काई ने शुरुआत में खुद के इस मामले में शामिल होने से इनकार कर दिया था. हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    बोर्काई का कहना है यह सब चुनाव में उनकी छवि खराब करने के लिए किया गया था. हंगरी में इसी रविवार मेयर पद के लिए चुनाव हुए हैं. बोर्काई ने अपनी इस हरकत के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी. बोर्काई ने एक वीडियो संदेश के जरिए कहा, ‘मेरे सेक्स स्कैंडल के वीडियो से छेड़छाड़ हुई है. हालांकि, मैं लड़कियों के साथ सेक्स करने की बात से इनकार नहीं करूंगा.’बोर्काई का यह वीडियो पहले एक ब्लॉग में लीक किया गया. इस ब्लॉग में उन पर भ्रष्टाचार, ड्रग्स लेने और सेक्स वर्कर्स की सेवाएं लेने के आरोप भी लगाए गए हैं. ब्लॉग में बताया गया है कि बोर्काई का यह वीडियो क्रोएशिया के डबरोविंक में एड्रियाटिक सागर तट पर एक नाव पर ट्रिप के दौरान का है. बोर्काई एक बेटे और एक बेटी के पिता हैं. वीडियो लीक होने की खबर आने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट की. इसमें वे पत्नी और दोनों बच्चों के साथ हैं. तस्वीर का उन्होंने कैप्शन दिया, ‘हम साथ-साथ हैं, फिर चाहे वह अच्छा समय हो या बुरा.’

  • CM के खिलाफ ACB में दर्ज प्रकरण का प्रतिवेदन कोर्ट ने स्वीकारा, केस किया खत्म…

    CM के खिलाफ ACB में दर्ज प्रकरण का प्रतिवेदन कोर्ट ने स्वीकारा, केस किया खत्म…

    रायपुर। सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ एसीबी में दर्ज प्रकरण को खात्मा करने के लिए दुर्ग कोर्ट में आवेदन दिया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर दर्ज केस को खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ ACB ने तत्कालीन कलेक्टर दुर्ग आर. संगीता के द्वारा गठित समिति की सिफ़ारिश के आधार पर आरोपी बनाते हुए अपराध दर्ज किया था।

    ये है पूरा मामला
    विजय बघेल ने एसीबी के समक्ष शिकायत करते हुए जानकारी दी थी कि तत्कालीन पाटन विधायक भूपेश बघेल विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य थे। उन्होंने अपनी पत्नी मुक्तेश्वरी, माता बिन्देश्वरी बघेल दोनों के नाम से वसुंधरा नगर (उत्तर) में 15 बाई 24 मीटर आकार का भूखण्ड आवंटन के लिए आवेदन दिया था। उक्त आकार का प्लाट नहीं होने पर अधिकारियों ने दोनों आवेदिका को विभिन्न आय वर्ग के लिए आरक्षित मानसरोवर आवासीय योजना में उनके मन चाहे आकार के भूखण्ड दिलाने 6-6 आरक्षित प्लाट को एक बनाकर अवैध रुप से आवंटित कर दिया, इस शिकायत पर एसीबी ने 2017 में धारा 120 बी 13(1)डी , 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया था।

  • वार्ड़ क्रमांक 16 के लिए विकास ज्योति के नाम की चर्चा जोरों पर…

    वार्ड़ क्रमांक 16 के लिए विकास ज्योति के नाम की चर्चा जोरों पर…

    खरसिया। नगरीय निकायों के वार्ड़ो के आरक्षण में वार्ड़ क्रमांक 16 सामान्य सीट घोषित होने के बाद प्रत्याशी के रूप में युवा तुर्क विकास अग्रवाल उर्फ ज्योति का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

    बता दें विकास “ज्योति” ने वार्ड़ सहित समूचे नगर में अपनी पैनी पत्रकारिता एवं कुशल व्यवहार के माध्यम से लोगों के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है। अगर ये पार्षद पद के लये अपना नामांकन दाखिल करते हैं, तो इनकी मिलनसारिता और दमदार व्यक्तित्व का लाभ निश्चित तौर पर इन्हे मिलेगा। वहीं वार्ड वासियों के द्वारा भी विकास के नामांकन को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्ड की मांग पर विकास अग्रवाल पार्षद पद के लिये नांमांकन दाखिल करते हैं अथवा नहीं।

  • टीआई 2 साल से करता रहा बलात्कार, 3 बार करवाया गर्भपात

    टीआई 2 साल से करता रहा बलात्कार, 3 बार करवाया गर्भपात

    जशपुर जिले के पत्थलगांव थाने का मामला

    अपने ड्राइवर और होटल कर्मचारी को कई बार गाड़ी लेकर बेचता था रायगढ़ बुलवाने

    जशपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव थाने के टीआई ओमप्रकाश ध्रुव पर एक महिला ने यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने डीजीपी डीएम अवस्थी को दो पेज की लिखित शिकायत में सिलसिलेवार बताया है कि ध्रुव ने दो बरसों तक किस तरह उसका दैहिक शोषण किया। इस दौरान उसने तीन बार गर्भवती हुई और तीनों बार टीआई ने गर्भपात करवा दिया। डीजीपी ने महिला की शिकायत को एसपी जशपुर को भेज दिया है।

    वहीं, जशपुर के एसपी शंकरलाल बघेल ने  बताया कि महिला की शिकायत डीजीपी साहब ने मेरे पास भेजा था। उन्होंने एडिशनल एसपी उनेजा खातून को जांच के लिए कहा है।

    डीजीपी ने क्या कहा

    डीजीपी डीएम अवस्थी ने दो टूक कहा, इस मामले में किसी को बख्शने का सवाल ही पैदा नहीं होता। महिला की शिकायत पर कार्रवाई कल ही हो जाएगी। महिला ने डीजीपी को भेजे अपनी शिकायत में कहा है कि दो साल पहले वह टीआई ध्रुव के संपर्क में आई। उसने फरेब पूर्वक उससे दैहिक संबंध बनाए। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा।

    टीआई के नाम पर होटल का कमरा परमानेंट बुक

    टीआई के नाम पर पत्थलगांव के एक होटल में हमेशा कमरा बुक रहता है। उसी होटल में वह हमेशा मुझे बुलाता था। इस बीच वह तीन बार गर्भवती हुई। लेकिन, ध्रुव ने दबाव डालकर गर्भपात करवा दिया। पीड़िता का कहना है, टीआई हमेशा कहता था, वे पति-पत्नी की तरह रहेंगे, कभी वह छोडे़गा नहीं। पीड़िता का आरोप है कि कई बार रात में अपने ड्राईवर और होटल के कर्मचारी को वह स्कार्पियो गाड़ी में उसे लेने रायगढ़ भेज देता था।

    शिकायत के अनुसार पीड़िता को एक दिन पता चला कि वह शादी शुदा है तो उसने संबंध विच्छेद करते हुए मिलने से मना कर दिया। लेकिन, धु्रव नहीं माने। अलबत्ता, उसने होटल में ही आत्महत्या की कोशिश की। पीड़ित महिला का कहना है कि धु्रव उसे साईक्लोजिक ब्लैकमेल करता था, इसलिए वह उसके साथ जुड़ी रही। लेकिन, इस साल 26 जुलाई को मुझे लेने धुव्र खुद रायगढ़ आए। वह तीन दिन पत्थलगांव के होटल में रही। फिर, 29 जुलाई को वह रायगढ़ छोड़ गए। इसके बाद उन्होंने मेरा फोन पिक करना बंद कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि टीआई अब उसे धमका भी रहा है। साथ ही समझौता करने के लिए प्रेशर डाला जा रहा है। महिला ने कपटपूर्ण तरीके से उसका जीवन खराब करने वाले टीआई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    इस मामले में टीआई ध्रुव का पक्ष लेने के लिए उनके सरकारी और निजी नम्बर पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

  • अब लगेगा 4000 का जुर्माना, सीएम को भी नहीं छोड़ेंगे…

    अब लगेगा 4000 का जुर्माना, सीएम को भी नहीं छोड़ेंगे…

    दिल्ली की केजरीवाल सरकार विधानसभा चुनाव के पहले पूरी तरह से एक्शन में नजर आ रही है। दरअसल प्रदूषण कम करने की जुगत में लगी ‘आप’ एक बार फिर से दिल्ली में 4 से 15 नवंबर के बीच ऑड-इवन लागू करने जा रही है। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब ऑड-इवन रूल तोड़ने पर 4000₹ का जुर्माना देना होगा।

    इस दायरे मे सीएम और मंत्री भी आएंगे

    साल 2016 में ऑड-इवन नियम तोड़ने पर जुर्माना राशि 2000 थी।

  • पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    ऐसी व्यवस्था करने वाला राजस्थान पहला राज्य

    राजस्थान सरकार ने निकाय चुनाव को लेकर ऐसी व्यवस्था की है जो देश में पहली बार किसी राज्य में लागू हुई है. इसके तहत पार्षद का चुनाव नहीं लड़ने वाला व्यक्ति और हारा हुआ प्रत्याशी भी मेयर-सभापति बन सकता है। यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा विधायक या सांसद का चुनाव लड़े बिना ही या जीते बिना ही मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुन लिए जाते हैं। यह हाईब्रिड मॉडल उतारने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है।

  • डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा – ‘अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दूंगा,मूर्ख मत बनो’

    डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा – ‘अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दूंगा,मूर्ख मत बनो’

    डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की के राष्ट्रपति एडोरगन को पत्र लिखा है,जिसमें उन्होंने कुर्दो पर हमला नहीं रोकने की स्थिती में तुर्की की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की धमकी दी है। उन्होंने एडोरगन को लिखा ‘सख्त आदमी मत बनो, मूर्ख मत बनो।’ उन्होंने आगे लिखा आप हजारों लोगों की मौत का कारण नहीं बनना चाहेंगे, और मै भी तुर्की की अर्थव्यवस्था की बर्बादी का जिम्मेदार नही बनना चाहता।

  • ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    द‍िल्‍ली। अगर आप भी है र‍िलायंस ज‍ियो के ग्राहक है तो यह खबर जरूर पढ़ लें। बता दें कि जियो ने अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान में मिलने वाले फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म कर दिया है। शुरूआत‍ के समय में जियो को कम कीमत में ज्यादा बेनिफिट देने वाली कंपनी के तौर पर जाना जाता रहा है। ऐसे में अचानक फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किया जाना सब्सक्राइबर्स के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। हाल ही में जियो ने घोषणा की थी कि अब वह दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल के बदले सब्सक्राइबर्स से 6 पैसे प्रति मिनट का इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज लेगा। इसके बाद से ही जियो सब्सक्राइबर्स के साथ ही टेलिकॉम इंडस्ट्री में काफी हलचल देखी जा रही है।

    ज‍ियो के इन प्लान्स पर होगा असर

    बता दें कि जियो के पास 10 रुपये से लेकर 1,000 रुपये के बीच के टॉक टाइम प्लान मौजूद हैं। ये प्लान्स पहले फुल टॉक टाइम के साथ आते थे, लेकिन अब इनमें फुल टॉक टाइम मिलना बंद हो गया है। अब जियो के 10 रुपये वाले टॉक टाइम रिचार्ज में यूजर्स को 7.47 रुपये का टॉक टाइम ऑफर किया जा रहा है। इसी प्रकार 20 रुपये में 14.95 रुपये, 50 रुपये में 39.37 रुपये, 100 रुपये में 81.75 रुपये, 500 रुपये में 420.73 रुपये और 1000 रुपये वाले प्लान में 844.46 रुपये का टॉक टाइम दिया जा रहा है। हालांकि लोगों कि माने तो इसे जियो द्वारा लगाए गए आईयूसी के असर मान रहे हैं।

    सब्सक्राइबर्स को कंपनी के फैसले से लगा झटका

    जियो सब्सक्राइबर्स को कंपनी द्वारा ल‍िया गया फैसला, यानि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने से झटका लगा है। जियो शुरुआत से अपने प्रीपेड पोर्टफोलियो में कई सारे प्लान ऑफर करता रहा है। इनमें उन प्लान्स की भी कमी नहीं थी जिनमें सब्सक्राइबर्स को रिचार्ज पर फुल टॉक टाइम ऑफर किया जाता था। फुल टॉक टाइम वाले प्रीपेड प्लान उन यूजर्स को काफी पसंद थे जिन्हें ज्यादा वॉइस कॉलिंग की जरूरत पड़ती थी। इन प्रीपेड टॉक टाइम प्लान्स में किसी किसी प्रकार का डेटा नहीं ऑफर किया जाता था। वहीं जियो के प्लान्स में मजेदार यह है कि अब अलग-अलग डेली डेटा लिमिट वाले पॉप्युलर डेटा प्लान आईयूसी टॉक टाइम वाउचर के साथ आ रहे हैं। इससे यूजर्स को प्रीपेड डेटा रिचार्ज के साथ आईयूसी रिचार्ज के कई ऑप्शन मिल गए है।

    इन कारणों से जियो ने क‍िया बदलाव

    जानकारी दें कि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने की वजह जियो और दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर्स के बीच चल रहे टैरिफ वॉर को माना जा सकता है। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब एयरटेल ने जियो पर आरोप लगाया कि उसने अपनी रिंग टाइम को घटाकर 25 सेकंड कर दिया है। इस कारण जियो सब्सक्राइबर्स द्वारा दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल अक्सर मिस हो जाते थे। इसके बदले जियो के नेटवर्क पर कॉल बैक आने की संख्या बढ़ गई थी। वहीं जियो पर दूसरे नेटवर्क ऑपरेटर द्वारा कॉल आने की स्थिति में जियो को उस ऑपरेटर से आईयूसी का फायदा होता था। दूसरी ओर इसके बाद एयरटेल ने भी अपने रिंग टाइम को 25 सेकंड करने का फैसला किया। इसके बाद जियो को आईयूसी इंट्रोड्यूस करना पड़ा। कंपनी को इससे दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाली कॉल के लिए खुद पैसे नहीं देने पड़ेंगे क्योंकि वह अब इसे सब्सक्राइबर्स से वसूल रही है। आईयूसी चार्ज को लेकर कहा जा रहा है कि ट्राई इसे इस साल के अंत तक खतम कर देगा।

  • निर्मला सीतारमण के पति ने अखबार में लिखकर कहा, ‘देश बचाना है तो मनमोहन मॉडल यूज़ करना होगा’

    वित्तमंत्री कौन हैं? निर्मला सीतारमण,और दूसरी तरफ उनके पति परकाला प्रभाकर

    एक तरफ भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री कह रहे हैं कि देश में मंदी नहीं है, और दूसरी तरफ परकाला प्रभाकर ने 14 अक्टूबर को अंग्रेजी के अखबार ‘द हिन्दू’ में लेख लिखा. इस लेख में परकाला प्रभाकर ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के पास अर्थव्यवस्था को लेकर कोई रोडमैप नहीं है.

    लेख का शीर्षक : A lodestar to steer the economy. इस लेख में वित्तमंत्री के पति परकाला प्रभाकर ने लिखा है कि भाजपा सरकार को नेहरू की आलोचना करने के बजाय, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के आर्थिक मॉडल से सीख लेनी चाहिए.

    दी हिन्दू में छपा परकला प्रभाकर का लेख.
    दी हिन्दू में छपा परकाला प्रभाकर का लेख.

    हम इस लेख के कुछ महत्त्वपूर्ण हिस्सों को आपसे साझा करना चाहते हैं. परकाला प्रभाकर ने लिखा है,

    “एक तरफ तो सरकार आर्थिक मंदी से लगातार मना कर रही है, लेकिन लगातार आ रहे आंकड़े बता रहे हैं कि सेक्टर दर सेक्टर बेहद गंभीर रूप से प्रभावित होते जा रहे हैं.”

    इसके बाद प्रभाकर ने जीडीपी के गिरते आंकड़ों और बेरोज़गारी के आंकड़े साझा किये हैं, और कहा है,

    “अभी भी इस बात का इंतज़ार हो रहा है कि सरकार के वे प्रयास दिखाई दें, जिनसे अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता हो. सरकार के पास कोई रणनीति भी है कि अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का सामना किया जा सके, इसके भी साक्ष्य बेहद कम हैं.”

    प्रभाकर ने कहा है कि मौजूदा भाजपा सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है कि गिरती अर्थव्यवस्था का कैसे सामना किया जाए? उन्होंने कहा है कि प्रमुख समस्या ये है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने के विचार को भाजपा ने वर्षों से नज़रंदाज़ किया है. जनसंघ के दिनों से ही भाजपा ने नेहरू की समाजवादी राजनीति की आलोचना की. पार्टी की आर्थिक विचारधारा केवल नेहरू मॉडल के विरोध तक ही सीमित रही. उन्होंने आगे लिखा है कि अर्थव्यवस्था पर आएं तो भाजपा की आर्थिक नीति “नेति-नेति” यानी “ये नहीं-ये नहीं” तक सीमित रही, जबकि किसी भी मौके पर भाजपा ने अपनी “नीति” का ज़िक्र नहीं किया.

    भाजपा की जिस नीति ने पार्टी को सरकार दी, पार्टी को भारत के राजनीतिक संवाद में केन्द्रीय भूमिका दी, उस नीति का अर्थव्यवस्था से कोई मतलब नहीं रहा है. प्रभाकर ने देश अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार पर भी सवाल उठाए हैं. कहा है कि 1998 से 2004 तक देश में नॉन-कांग्रेसी सरकार रही, लेकिन इस दौरान देश की आर्थिक नीति की दिशा में बड़े कदम नहीं उठाए गए.

    “पार्टी का इंडिया शाइनिंग कैम्पेन वोटरों को लुभा पाने में असफल रहा. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोगों को लगने लगा कि सरकार के पास आर्थिक दर्शन और कोई फ्रेमवर्क नहीं है.”

    इसी वजह से पार्टी की 2004 लोकसभा चुनाव में हार हुई. लेकिन प्रभाकर ने ये भी बताया है कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्त्व को इन बातों के बारे में अच्छे से पता है. मौजूदा नेतृत्त्व ने बेहद चालाक तरीके से सरकार के अर्थव्यवस्था के एजेंडे को मौजूदा लोकसभा चुनाव के कैम्पेन के समय सामने नहीं रखा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रवाद और खांटी राजनीति को कैंपेन के केंद्र में रखा.

    इसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकाला प्रभाकर ने 1991 की नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों का उल्लेख किया. कहा कि इन नीतियों की उसके बाद की सभी सरकारों – चाहे वो किसी के भी सहयोग से बनी हों – ने तारीफ की है. लिखा है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो नेहरू की आर्थिक चेतना को जिलाने का प्रयास किया, लेकिन नरसिम्हा राव के साथ के बिना. यहीं पर इसका ज़िक्र भी ज़रूरी है कि कांग्रेस ने मनमोहन सिंह का सहारा लिया. उन्हें 2004 में भारत के प्रधानमंत्री का पद दिया.

    प्रभाकर ने कहा है कि भाजपा नेहरू की आर्थिक नीतियों की आलोचना करती है, नेहरू के आर्थिक ढाँचे का विरोध करना भाजपा ने रोका नहीं है. वक़्त रहते अगर भाजपा राव-सिंह के आर्थिक एजेंडे की सहायता ले लेती या उसे अपना ही लेती, तो भाजपा को इस मोर्चे पर सफलता मिल सकती थी. लेकिन भाजपा ने अभी तक उस आर्थिक ढाँचे को न तो चुनौती दी है, न तो उसे नकारा है. अगर भाजपा अभी भी आक्रामक तरीके से इस आर्थिक नीति को अपना लेती है तो ये नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धि ही होगी कि देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाएगी.

    परकला प्रभाकर आंध्र प्रदेश सरकार के संचार सलाहकार रह चुके हैं. लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के फेलो रह चुके हैं. इंटरनेट पर मिल रही जानकारी के मुताबिक़, परकला प्रभाकर का पूरा परिवार नरसिम्हा राव का करीबी रह चुका है. परकला प्रभाकर की मुलाकात निर्मला सीतारमण से जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई. दोनों की शादी 1986 में हुई. निर्मला का झुकाव भाजपा की तरफ और परकला प्रभाकर का झुकाव कांग्रेस की पॉलिटिक्स की तरफ रहा. प्रभाकर आर्थिक मुद्दों पर लम्बे समय से लिखते रहे हैं.