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  • छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने देश को दिया संदेश, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए देगा एक लाख रुपए

    छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने देश को दिया संदेश, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए देगा एक लाख रुपए

    रायपुर। सुप्रीम कोर्ट का शनिवार को राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने एक लाख रुपए राम मंदिर निर्माण के लिए देने का निर्णय लिया है. इस बात की जानकारी भाजपा नेता सलीम राज ने दी।

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद राजधानी रायपुर के साथ पूरे प्रदेश से देश को साप्रदायिक सौहार्द और सद्भाव का संदेश दिया गया है. फैसले के पहले सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन द्वारा उठाए गए तमाम एहतियाती कदमों के साथ ही प्रदेश के किसी कोने से किसी प्रकार की कोई घटना की खबर नहीं आई है।

    पुलिस-प्रशासन के कदम के अलावा धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस कोशिश को बल देने का काम किया. राजधानी रायपुर में मुस्लिम समाज के शहर काजी मोहम्मद अली फारुकी ने सभी समाज के सदस्यों को जोड़कर संदेश देने की कोशिश की।

  • संजय गुप्ता बने गूगल इंडिया के नए कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट, देश को लेकर है बड़ा लक्ष्य

    संजय गुप्ता बने गूगल इंडिया के नए कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट, देश को लेकर है बड़ा लक्ष्य

    दिल्ली। आर्थिक जगत से बड़ी खबर है। गूगल इंडिया ने संजय गुप्ता को अपना नया कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट) नियुक्त किया है। एक बायन में गूगल की ओर से कहा गया है कि संजय गुप्ता भारत में इंटरनेट के इकोसिस्टम को बढ़ाने में मदद करेंगे। साथ ही, बिजनेस को बढ़ाने और इंटरनेट को बढ़ावा देने के गूगल की ओर से हो रहे प्रयासों में योगदान करेंगे। बता दें कि संजय गुप्ता इससे पहले डिजनी और स्टार को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राजन आनंदन के इस्तीफे के बाद से गूगल इंडिया अपना नया कंट्री मैनेजर और वीपी ढ़ूढ़ रहा था। पिछले 8 महीने से ये पद खाली था। गूगल को छोडऩे के बाद राजन आनंदन ने वेंचर फंड कंपनी सिक्योइया कैपिटल को जॉइन किया है। संजय गुप्ता इससे पहले स्टार और डिज्नी कै मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं. भारत में हॉटस्टार के पॉपुलैरिटी के पीछे इनका अहम रोल बताया जाता है। गूगल के मुताबिक संजय मुंबई में रह कर गूगल की गुडग़ांव और हैदराबाद की टीम के साथ काम करेंगे। अगले साल की शुरुआत से वो अपने इस पद को संभालेंगे। गूगल ज्वाइन करने के पर संजय गुप्ता ने कहा है, ‘गूगल इंडिया को लीड करने को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। यह भारत की कुछ अनोखी चुनौतियों को हल करने और इंटरनेट को लोगों और समुदायों के लिए आर्थिक विकास का इंजन बनाने के लिए ये अच्छा मौका है।’
  • आर्थिक मोर्चे पर भारत को एक और झटका, मूडीज ने घटाई रेटिंग

    आर्थिक मोर्चे पर भारत को एक और झटका, मूडीज ने घटाई रेटिंग

    मुंबई। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग पर अपना परिदृश्य बदलते हुए इसे स्थिर से नकारात्मक कर दिया है। पहले के मुकाबले आर्थिक वृद्धि के बहुत कम रहने की आशंका है। एजेंसी ने भारत के लिए बीएए2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग की पुष्टि की है। रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, परिदृश्य को नकारात्मक करने का मूडीज का फैसला आर्थिक वृद्धि के पहले के मुकाबले काफी कम रहने के बढ़ते जोखिम को दिखाता है। मूडीज के पूर्व अनुमान के मुकाबले वर्तमान की रेटिंग लंबे समय से चली आ रही आर्थिक एवं संस्थागत कमजोरी से निपटने में सरकार एवं नीति के प्रभाव को कम होते हुए दिखाती है। जिस कारण पहले ही उच्च स्तर पर पहुंचा कर्ज का बोझ धीरे-धीरे और बढ़ सकता है। इसके पहले अक्टूबर में ही मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने 2019-20 में त्रष्ठक्क ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया था। मूडीज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पहले के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था में जोखिम बढ़ गया है, इसलिए आउटलुक को घटाने का फैसला किया है। आपको बता दें कि दुनिया की अन्य बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच और एसएंडपी ने भारत के आउटलुक को स्टेबल रखा है।

    अब क्या होगा

    कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर पशुपति सुब्रमण्यम ने बताया है कि रेटिंग एजेंसी के इस फैसले से खास असर नहीं होगा, क्योंकि अब दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे है। क्योंकि, ब्याज दरें घटाने के बाद निवेशकों का भरोसा भी लौटा है। इसीलिए शेयर बाजार में तेजी आई है। भारत में विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर महीने में करीब 8595.66 करोड़ रुपये लगाए हैं। वहीं, नवंबर में अभी तक  2,806.10 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं। वीएम पोर्टफोलियो के हेड विवेक मित्तल कहते हैं कि मौजूदा तिमाही में भी जीडीपी ग्रोथ पर दबाव रह सकता है। लेकिन अगले साल के शुरुआती महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सकती है। इसके संकेत कंपनियों के तिमाही नतीजों से मिले है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनियों का प्रदर्शन अनुमान से बेहतर रहा है। इसीलिए घरेलू शेयर बाजार पर रेटिंग घटाने का खास असर नहीं है। ऐसे माहौल में निवेशकों के पास अच्छे शेयरों में खरीदारी करने का मौका है। 

    भारत की रेटिंग

    रेटिंग के बारे में जानकारी देते हुए मूडीज ने कुछ चीजों को लेकर चिंताएं जाहिर की है। मूडीज का कहना है कि आर्थिक मंदी को लेकर चिंताएं लंबे समय तक रहेंगी और कर्ज बढ़ सकता है। 

    कौन है मूडीज

    आपको बता दें कि रेटिंग देने के इस सिस्टम देने की शुरुआत 1909 में जॉन मूडी ने की थी। इसका मकसद इन्वेस्टर्स को एक ग्रेड देना है, ताकि मार्केट में उसकी क्रेडिट बन सके। रूशशस्र4ज्ह्य कॉर्पोरेशन, रूशशस्र4ज्ह्य इन्वेस्टर्स सर्विस की पेरेंट कंपनी है, जो क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च का काम करती है। मूडीज की रेटिंग का मतलब मूडीज एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। ये एजेंसी 100 से भी अधिक आर्थिक विशेषज्ञों के साथ किसी देश की रेटिंग तय करते हैं। हालांकि, इसके लिए कोई भी फॉर्मूला नहीं है। इसमें किसी भी देश पर कर्ज और उसे चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। इसके अलावा रेटिंग एजेंसी देश में आर्थिक सुधारों और उसके भविष्य के प्रभाव को भी ध्यान में रखता है।

  • जानिए उन 5 जजों के बारे में जिन्होंने की अयोध्या केस पर सुनवाई

    जानिए उन 5 जजों के बारे में जिन्होंने की अयोध्या केस पर सुनवाई

    पहली बार पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने सुनवाई की है। इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं।

    जानिए इनके बारे में…

    जस्टिस रंजन गोगोई:

    अक्‍टूबर 2018 को देश के 46वें मुख्‍य न्‍यायधीश का पद संभालने वाले रंजन गोगोई असम के पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेसी नेता केसब चंद्र गोगोई के बेटे हैं। मुख्‍य न्‍यायधीश के तौर पर उनका कार्यकाल 17 नवंबर 2019 को खत्‍म होगा। गोगोई 1978 उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत गुवाहटी हाईकोर्ट में वकालत से की थी। यहीं पर वह पहली बार फरवरी 2001 में स्‍थायी जज नियुक्‍त किए गए। सितंबर 2010 में उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया था। अप्रेल 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने थे। बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्‍चन से जुड़े आय के मामले और जेएनयू छात्रा कन्‍हैया कुमार पर हमले को लेकर दायर याचिका को खारिज करने से सुर्खियों में आए थे। इस याचिका के तहत हमले की जांच को एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी। इसके अलावा एक और चर्चित मामले की वजह से भी वह सुर्खियों में आए थे। यह मामला केरल की महिला सौम्‍या के साथ दुष्‍कर्म के बाद हत्‍या से जुड़ा था। इसमें गठित तीन जजों की बैंच में रंजन गोगोई के अलावा न्‍यायधीश प्रफुल सी पंत और न्‍यायधीश उदय उमेश ललित शामिल थे। इस खड़े पीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया था जिसमें दोषी को फांसी की सजा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दोषी गोविंदास्‍वामी को मिली फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था। इस फैसले को पूर्व न्‍यायधीश मार्कंडे काटजू ने विरोध कर इसको गलत बताया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके विचार पर जवाब मांगे जाने के बाद वह इससे पीछे हट गए थे। इसके अलावा 2017 में असम के असल वासी कौन है के मुद्दे पर भी उनका फैसला काफी चर्चित हुआ था। इन सभी के अलावा रंजन गोगोई पर सभी का ध्‍यान जनवरी 2018 में उस वक्‍त गया था जब उनके साथ न्‍यायधीश चेलमेश्‍वर, एमबी लोकुर, कुरियन जोसफ ने सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार खुलेतौर पर मीडिया के समक्ष आकर मामलों का निस्‍तारण और मामले जिस तरह से जजों को दिए जाते हैं उस पर आपत्ति जताई थी। इस मामले ने उस वक्‍त काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा उन्‍होंने ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को हिंदी में जारी कर वेबसाइट पर डालने का भी आदेश दिया था।

    जस्टिस एसए बोबडे :

    वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने अपने नए फैसले में कहा है कि अगर तलाक की अर्जी लंबित है और दोनों पक्षों में केस को लेकर सहमति है तो दूसरी शादी मान्य होगी। हिंदू मेरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बैंच ने कहा, तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो।

    जस्टिस एनवी रमना :

    किसी आपराधिक मामले में अगर कोई एफआईआर रद्द की जा चुकी है तो उस मामले में फिर से दूसरी एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, बशर्ते केस में कुछ नए तथ्य सामने आ गए हों। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में यह व्यवस्था दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना और एम शंतनागौदार की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के एक फैसले को रद्द करते हुए कहा है कि एक ही केस में पहली शिकायत खारिज होने पर दोबारा एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

    जस्टिस यूयू ललित :

    एससी एसटी एक्‍ट पर अहम फैसला देने वाली खंडपीठ में जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस ललित भी थे। उनका कहना था कि इसकी आड़ में फर्जी मुकदमें दर्ज करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। इतना ही नहीं तकनीकी शिक्षा को लेकर भी उनका फैसला काफी अहम रहा है। उन्‍होंने दो जजों की बेंच के तहत इसको गलत करार दिया था। जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित ने अपने फैसले में कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन ने इंजीनियरिंग के लिए डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम्स को अनुमति नहीं दी है। डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल द्वारा चलाए गए ऐसे सभी कोर्स गैरकानूनी हैं।

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़:

    संविधान पीठ के दूसरे न्‍यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ हैं जो देश के पूर्व मुख्‍य न्‍यायधीश वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं। उनके पिता वर्तमान समय तक देश के सबसे लंबी अवधि तक रहने वाले मुख्‍य न्‍यायधीश हैं। न्‍यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नाम के साथ कई बड़े और अहम फैसले हैं। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायधीश भी रह चुके हैं। उन्‍हें परंपरा और धर्म के मामले में अलग हटकर सोच रखने वालों में गिना जाता है। कई मामलों में उनके फैसले काफी अहम रहे हैं। मार्च 2018 में उन्‍होंने चर्चित हादिया केस में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए हदिया और शाफीन जहां की शादी को सही करार दिया था। कोर्ट ने उनकी शादी को दोबारा बहाल किया था। इसी तरह से भीमा-कोरेगांव मामले में एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी केस में तीन जजों की खंडपीठ में शामिल चंद्रचूड़ ने अन्‍य दो जजों से अलग राय दी। सितंबर 2018 में इस पर फैसला सामने आया था। इसके अलावा इच्छामृत्यु के मामले या फिर लिविंग विल मामले में बनी संविधान पीठ का वह भी हिस्‍सा थे। मार्च 2018 में दिए फैसले में उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि लाइलाज बीमारी की गिरफ्त में आने के बाद किसी भी इंसान को अपनी मौत मांगने का अधिकार है। इस खंडपीठ ने लिविंग विल को मंजूरी देकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। फैसले में कोर्ट ने व्‍यवस्‍था दी कि ठीक न हो सकने वाली बीमारी की चपेट में आने के बाद पीड़ित अपनी वसीयत खुद लिख सकता है, जो डाक्टरों को लाइफ सपोर्ट हटाने की मंजूरी यानी इच्छा मृत्यु (यूथनेशिया) की इजाजत देता है। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाली खंडपीठ के चंद्रचूड़ भी सदस्‍य थे।

  • पुलिस विभाग ने 30 सब इंस्पेक्टरों का किया तबादला, पीएचक्यू से जारी हुआ आदेश

    पुलिस विभाग ने 30 सब इंस्पेक्टरों का किया तबादला, पीएचक्यू से जारी हुआ आदेश

    रायपुर। इंस्पेक्टरों के तबादले के बाद पुलिस विभाग ने सब इंस्पेक्टरों का तबादला किया है. पीएचक्यू से शनिवार को जारी किये गए आदेश में राज्य के अलग-अलग जिलों में पदस्थ 30 उप निरीक्षकों का तबादला किया है।
  • मायावती का बड़ा फैसला, मुलायम के खिलाफ वापस लिया मुकदमा

    मायावती का बड़ा फैसला, मुलायम के खिलाफ वापस लिया मुकदमा

    लखनऊ। लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी से सभी रिश्ते तोडऩे वाली बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ 1995 के गेस्ट हाउस केस को वापस ले लिया है।मायावती के इस कदम को उत्तर प्रदेश में पिछले महीने 11 विधानसभा सीटों पर हुये उपचुनाव में बसपा की खराब हालत के बाद उनके फिर से सपा के नजदीक जाने के रूप में देख जा रहा है। बसपा के महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र ने कहा कि लोकसभा चुनाव के वक्त जब दोनों दलों में समझौता हुआ था तब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गेस्ट हाउस केस से मुलायम सिंह यादव का नाम वापस लेने की अपील की थी। बसपा प्रमुख ने वायदा किया था कि वो केस को वापस ले लेंगी और उन्होंने अपना वायदा निभाया है।
    बसपा के सूत्रों ने कहा कि पार्टी प्रमुख ने इस मामले को महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र को देखने को कहा था। लोकसभा चुनाव के लिये सपा बसपा के बीच पिछले 12 जनवरी को गठबंधन हुआ था और इसकी भूमिका उसी दिन तैयार कर ली गई थी। सपा और बसपा के बीच 1993 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन हुआ था और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने थे। बाद में दोनों दलों के बीच तल्खी आ गई और बसपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। 2 जून 1995 को मायावती राजधाली लखनऊ के मीराबाई मार्ग के गेस्ट हाउस में पार्टी विधायकों के साथ बैठक कर रही थी कि सपा के सदस्यों ने उन्हें घेर लिया और बदसलूकी की। मायावती के अनुसार उन्हें जान से मार देने की योजना थी। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेता ब्रहम्दत्त द्विवेदी ने बचाया था। मायावती ने इसके लिये मुलायम सिंह यादव, उनके भाई शिवपाल यादव,बेनी प्रसाद वर्मा ,आजम खान समेत कई सपा नेताओं के खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मायावती ने सिर्फ मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मुकदमा वापस लिया है। अन्य नेताओं के खिलाफ नहीं।
  • अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला … विवादित जमीन राम लला की… भावना नहीं सबूत के आधार पर दिया फैसला….

    अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला … विवादित जमीन राम लला की… भावना नहीं सबूत के आधार पर दिया फैसला….

    रायपुर। देश के सबसे चर्चित केस राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला आना शुरू हो गाय है.  5 सदस्यीय संविधान पीठ ने सुबह साढ़े 10 बजे से अपना फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा 1856 से पहले हिन्दू भी अंदरूनी हिस्से में पूजा करते थे. रोकने पर बाहर चबूतरे की पूजा करने लगे. फिर भी मुख्य गुंबद के नीचे गर्भगृह मानते थे इसलिए रेलिंग के पास आकर पूजा करते थे।

    विवादित जमीन राम लला की.कोर्ट ने कहा मुस्लिमों को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाएकोर्ट ने कहा है कि हिंदुओं के वहां पर अधिकार की ब्रिटिश सरकार ने मान्यता दी. 1877 में उनके लिए एक और रास्ता खोला गया. अंदरूनी हिस्से में मुस्लिमों की नमाज बंद हो जाने का कोई सबूत नहीं मिला.सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में रामलला को कानूनी मान्यता दी, कहा- खुदाई के सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते।

    शिया वक्फ बोर्ड का दावा एकमत से खारिज

    सीजेआई गोगोई ने कहा, ‘हमने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं.गोगोई ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी.

    निर्मोही अखाड़ा के सेवा के अधिकार के दावे को सु्प्रीम कोर्ट ने किया खारिज।

    चीफ जस्टिस ने कहा, एएसआई ने मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं.कोर्ट ने कहा है कि निर्मोही अपना दावा साबित नहीं कर पाया है. निर्मोही सेवादार नहीं है. रामलला juristic person हैं. राम जन्मस्थान को यह दर्जा नहीं दे सकते. पुरातात्विक सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते. वह हाई कोर्ट के आदेश पर पूरी पारदर्शिता से हुआ. उसे खारिज करने की मांग गलत है.कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट हदीस की व्याख्या नहीं कर सकता.

    नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते. 1991 का प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट धर्मस्थानों को बचाने की बात कहता है. एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है.

    सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में अपने दावे को बदला. पहले कुछ कहा, बाद में नीचे मिली रचना को ईदगाह बताया.सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं. कसौटी का पत्थर, खंभा आदि देखा गया.

    ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं. 12वीं सदी से 16वीं सदी पर वहां क्या हो रहा था, ये साबित नहीं.सुप्रीम कोर्ट ने कहा- साफ है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी.

    नीचे विशाल रचना थी, वह रचना इस्लामिक नहीं थी. वहां मिली कलाकृतियां भी इस्लामिक नहीं थी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गवाहों के क्रॉस एक्जामिनेशन से हिन्दू दावा झूठा साबित नहीं हुआ.

    सूट 5 (रामलला) ने ऐतिहासिक ग्रंथों, यात्रियों के विवरण, गजेटियर के आधार पर दलीलें रखीं.

    चबूतरा,भंडार, सीता रसोई के भी दावे की पुष्टि होती है.

  • सख्ती : देखें कैसे अरबों के मालिक अब सलाखों के पीछे बिता रहे अपनी रात

    सख्ती : देखें कैसे अरबों के मालिक अब सलाखों के पीछे बिता रहे अपनी रात

    जिस सुरप्रीत सूरी की खाने की थाली लगाने के लिए चार-पांच नौकर लगते थे और वह आलीशान बंगले में मखमली बिस्तर पर चैन की नींद सोता था। उसके लिए सोमवार की रात काफी कष्टकारी रही, जमीन पर करवटें बदलते हुए उसकी पूरी रात गुजरी। खाना प्लास्टिक प्लेट में खाना पड़ा।सुरप्रीत अकेला नहीं और भी अरबपति ऐसे हैं जो जेल में बंदी की तरह जीवन काट रहे हैं और जिस ऐशो-आराम और शानो-शौकत के लिए वह जाने जाते थे वह अब उन्हें नसीब नहीं, बल्कि वह सामान्य बंदी की तरह ही सलाखों के पीछे जीवन काट रहे हैं।आईएएस अधिकारी और नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ रहते हुए पूरी शान-शौकत और रूतबे के साथ जीवन जीने वाले पीसी गुप्ता भी 23 जून 2018 से सलाखों के पीछे बंद हैं और जेल की बैरक में सामान्य बंदियों के साथ ही रहते हैं। उन पर आरोप है कि यमुना विकास प्राधिकरण में जमीन अधिग्रहण के दौरान 126 करोड़ का घोटाला किया।

    वहीं नोएडा प्राधिकरण के बॉस रहे यादव सिंह की तूती बोलती थी और वह तीनों ही प्राधिकरणों के चीफ इंजीनियर थे। जिनकी इजाजत के बिना प्राधिकरण में कोई फैसला नहीं होता था। यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई ने 954.38 करोड़ रुपये के घोटाले के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। 3 फरवरी 2016 को यादव सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वह तभी से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं और वहीं पर सामान्य बंदियों की तरह रह रहे हैं।

    बेचैनी में कटी रात

    एसडीएम दादरी राजीव राय ने बताया कि सौ करोड़ की बकाये की वसूली के लिए सुरप्रीत सूरी को गिरफ्तार कर राजस्व हवालात में डाला गया है। उसकी सोमवार की रात हवालात में बेचैनी में कटी है, वह पूरी रात करवटें ही बदलता रहा, उससने पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी, उसे सोने के लिए कंबल दिए गये और वह उन्हें ही फर्श पर बिछा कर सोया। एक बंदी की तरह ही उसे सामान्य खाना दिया जा रहा है।

    शिकंजे में सपनों के सौदागर

    अनिल शर्मा : आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा और अन्य दोनों निदेशक शिवप्रिया और अजय कुमार भी 1 मार्च 2019 से जेल में हैं और वह सलाखों के पीछे रहकर सामान्य बंदी की तरह ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जबकि कुछ समय पहले तक वह अपनी लग्जरी लाइफ और पार्टियों के लिए पहचान रखते थे। उन्हें जेल भेजने से पहले छह माह तक पुलिस ने एक होटल में भी नजर बंद रखा था।

    संजय भाटी :

     बाइक बोट के नाम से हुए घोटाले के मुख्य आरोपी संजय भाटी, जिन्होंने रेंज रोवर जैसी सैकड़ों गाड़ियां गिफ्ट में बांटी थीं और पुलिस की मानें तो नोएडा के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बाइक बोट है, जिसमें करीब आठ लाख से अधिक लोगों को ठगा गया है। इसका मुख्य आरोपी संजय भाटी भी जून 2019 से लुक्सर जेल में है और जेल में ही वह बंदियों की तरह खाना खाकर फर्श पर सो रहा है।

    अनुभव मितल : 

    लाइक के नाम पर साढ़े छह लाख लोगों से हजारों करोड़ की ठगी करने वाले अनुभव मितल फरवरी 2017 से और उनकी पत्नी आयुषी मितल दिसंबर 2017 से जेल में है। वह अपनी पार्टियों के लिए विशेष पहचान रखते थे, अनुभव की बर्थडे पार्टी में सनी लियोनी समेत अनेक बॉलीवुड के कलाकार बुलाये जाते थे। यह अनुभव मित्तल भी बंदियों के साथ बैरक में बंद है।

  • जब ‘जज साहब’ ही पिट गए तो जनता को न्याय कैसे मिलेगा ‘मी लार्ड’ वकीलों ने चैंबर में घुyसकर जज साहब को पीटा

    जब ‘जज साहब’ ही पिट गए तो जनता को न्याय कैसे मिलेगा ‘मी लार्ड’ वकीलों ने चैंबर में घुyसकर जज साहब को पीटा

    दिल्ली अभी तीस हजारी कोर्ट में हुआ पुलिस वकील विवाद खत्म भी नहीं हुआ है कि एक नया कारनामा वकीलों ने कर दिखाया है। यूपी के बाराबंकी में वकीलों ने हड़ताल कर रखी थी. जिस दौरान काम करते पाए गए एक जज के कार्यालय में घुसकर वकीलों ने जज साहब के साथ मारपीट की और उनके स्टाफ के साथ बदसलूकी की. जज ने वकीलों की बदसलूकी पर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया है.जज सन्दीप जैन मोटर दुर्घटना दावा अभिकरण के पीठासीन अधिकारी हैं. उनका कहना है कि वह अपने कार्यालय में बैठकर काम कर रहे थे कि 40-50 वकील उनके कार्यालय में घुस आए और उनसे कालर पकड़ कर अभद्रता कर कहने लगे कि हड़ताल के दिन काम क्यों करवा रहे हो. वकीलों ने उनके क्लर्क, गनर और स्टाफ के साथ भी गाली गलौज की. सन्दीप जैन ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर दोषी वकीलों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किये जाने की माँग की है।