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  • बड़े पैमाने में कई जिलों के निरीक्षकों के तबादले,DGP ने जारी किया आदेश,देखें लिस्ट…

    बड़े पैमाने में कई जिलों के निरीक्षकों के तबादले,DGP ने जारी किया आदेश,देखें लिस्ट…

    छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 64 निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) के तबादले के आदेश जारी किए हैं। पुलिस स्थापना बोर्ड की अनुशंसा पर जारी इस आदेश के तहत अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर भेजा गया है।

  • वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

    वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

    बिलासपुर। सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है।

    याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत पात्र भू-विस्थापितों को भत्ता या अन्य लाभ उपलब्ध नहीं कराए गए। याचिका में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के अलावा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो तथा डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। मामला सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़ा है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की तकरीबन 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस प्रक्रिया में 800 से अधिक परिवारों ने अपनी जमीन दी थी।भू-विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत प्रभावित परिवारों को नौकरी अथवा नियमानुसार भत्ता दिया जाना था, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। 2013 में प्लांट शुरू हुआ और तीन साल के भीतर वर्ष 2016 में बंद हो गया। याचिका के अनुसार, एथेना पावर प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन वित्तीय संकट के चलते वर्ष 2016 में इसे बंद करना पड़ा। बाद में वर्ष 2022 में वेदांता ग्रुप ने इस प्लांट का अधिग्रहण किया और वर्ष 2025 में इसका संचालन दोबारा शुरू किया*न तो रोजगार मिला न नियमानुसार भत्ताभू-विस्थापितों का आरोप है कि प्लांट दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही नियमानुसार भत्ता उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि वे बीते 13 वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित हैं। भू-विस्थापित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों की ओर से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। तकरीबन दो वर्ष बाद हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य शासन को मामले के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थेहाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने प्लांट प्रबंधन को पत्र जारी कर पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद आगे का पालन नहीं किया गया

  • सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना काफ़ी नहीं, जब तक लोगों को ठोस नतीजे न मिलें 00 बारिश में बिजली आपूर्ति ठप होने पर जनहित याचिका पर सुनवाई

    सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना काफ़ी नहीं, जब तक लोगों को ठोस नतीजे न मिलें 00 बारिश में बिजली आपूर्ति ठप होने पर जनहित याचिका पर सुनवाई

    बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने जरा सी बरसात में बिलासपुर शहर की बिजली सप्लाई ध्वस्त होने के मामले में स्वयं संज्ञान लिया है।सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बिजली सप्लाई में किसी तरह की रुकावट या पानी भरने की शिकायत होने पर, तुरंत सुधार के उपाय किए जाएंगे ताकि बिना किसी देर के शिकायत का समाधान हो सके। मॉनिटरिग के लिए अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

    कोर्ट ने कहा कि, इस मामले में बिजली विभाग एवं नगर निगम की ओर से जवाब पेश किए जाने के बाद अब अधिकारियों को यह पक्का करना होगा कि मौजूदा मानसून सीजन के दौरान, म्युनिसिपल लिमिट के अंदर पब्लिक सड़कों, गलियों और दूसरे इलाकों में ऐसा पानी जमा न हो, बारिश के पानी के फ्री फ्लो के लिए ड्रेनेज सिस्टम की ठीक से सफाई और मेंटेनेंस हो, और जहां तक हो सके बिना रुकावट बिजली सप्लाई बनी रहे।गौरतलब है कि पिछले दिनों बारिश होने से आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी* घंटों बाद सुधार किया जा सका ।कई इलाकों में रात भर बिजली सप्लाई बाधित रही। हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए बिजली विभाग एवं नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था*शिकायतें जल्दी दूर करने बन रहा सिस्टमइस नोटिस पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने बिजली डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को मजबूत करने और खराब मौसम में बिजली सप्लाई को तुरंत बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी* बताया गया कि, खराब सीमेंट के खंभों को लोहे के खंभों से बदलने, इमरजेंसी इक्विपमेंट और मैनपावर बढ़ाने, दो नए सप्लाई ज़ोन बनाने, कमजोर कंडक्टरों को बदलने के लिए फंड मंजूर करने, और सबस्टेशन बनाने, और मेंटेनेंस के लिए और लोगों को रखने, और कंज्यूमर की शिकायतों को जल्दी दूर करने के लिए एक सिस्टम बनाने के अलावा, बिना रुकावट बिजली सप्लाई के लिए बेहतर इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन पक्का करने के लिए कदम उठाए गए हैं*बहुत कुछ किया जाना बाकीविभाग के जवाब पर हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्बारा प्रस्तावित और शुरू किए गए उपायों को बताते हुए एफिडेविट फाइल किए जाने के बावजूद, इस कोर्ट का मानना है कि, प्रस्तावित उपायों को ज़मीनी स्तर पर असरदार तरीके से लागू करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है* सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना तब तक काफ़ी नहीं होगा जब तक कि, वे बिलासपुर के निवासियों के फ़ायदे के लिए ठोस नतीजे न दें* इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार के एनर्जी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, सीएसपीडीसीएल के मैनेजिग डायरेक्टर और बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने-अपने एफिडेविट में बताए गए फैसलों को लागू करने पर खुद नज़र रखें और इस कोर्ट के पहले के निर्देशों के मुताबिक हुई प्रोग्रेस और उठाए गए ठोस कदमों को बताते हुए नए एफिडेविट फाइल करें* बिजली सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट या पानी भरने की शिकायत होने पर, तुरंत सुधार के उपाय किए जाएंगे ताकि बिना किसी देरी के शिकायत का समाधान हो सके।

  • खरसिया के श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के विरुद्ध मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, जिला शिक्षा अधिकारी की बड़ी कार्रवाई…

    खरसिया के श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के विरुद्ध मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, जिला शिक्षा अधिकारी की बड़ी कार्रवाई…

    बीईओ के औचक निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं, शोकाज नोटिस का स्कूल प्रबंधन ने जवाब भी नहीं दिया 

    किताब, कॉपी और गणवेश की बिक्री से लेकर छात्रवृत्ति, यू-डाईस प्लस और अपार आईडी में अनियमितताओं सहित कई मामलों में मिली खामियां

    रायगढ़। जिले के एक निजी स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी बीईओ के औचक निरीक्षण से खरसिया के बाम्हनपाली स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) के संचालन में अनियमितताएं सामने आई थी, जिस पर स्कूल प्रबंधन को शोकाज नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया था। परंतु निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में निजी विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी), विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) एवं बीआरसी को निजी विद्यालयों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जाता है कि इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी खरसिया द्वारा ग्राम बाम्हनपाली स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत किया गया। इधर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच प्रतिवेदन के आधार जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित शैक्षणिक संस्थान को शोकाज नोटिश जारी किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया है। जिसके आधार पर विद्यालय के विरुद्ध बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उसकी मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की कार्यवाही के लिए आगे प्रेषित की गई है।

    छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति योजना का लाभ उपलब्ध नहीं कराया

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्वयं के प्रकाशन की पाठ्यपुस्तकों और कॉपियों का सीधे विद्यार्थियों एवं पालकों को विक्रय किया जा रहा था। पुस्तकों और कॉपियों पर विद्यालय का नाम मुद्रित पाया गया। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में ही विद्यार्थियों को गणवेश भी बेचा जा रहा था, जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम एवं शासन के निर्देशों के अनुसार इस प्रकार की व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।

    जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 230 विद्यार्थियों में से किसी भी छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति योजना का लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। विद्यालय द्वारा एक भी पात्र विद्यार्थी की छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं कराई गई, जिससे शासन की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह प्रभावित पाया गया।

    यू-डाईस प्लस पोर्टल में दर्ज आंकड़ों में भी गंभीर विसंगतियां

    निरीक्षण के दौरान यू-डाईस प्लस पोर्टल में दर्ज विद्यार्थियों के आंकड़ों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। विद्यालय में कक्षा 9वीं और 10वीं में वास्तविक रूप से मात्र 10-10 विद्यार्थी अध्ययनरत पाए गए, जबकि पोर्टल पर कक्षा 9वीं में 66 तथा कक्षा 10वीं में 33 विद्यार्थियों की ऑनलाइन प्रविष्टि दर्ज थी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अन्य विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर उनके पेन (परमानेंट एजुकेशन नंबर) एवं अपार आईडी तैयार किए गए। इस संबंध में पूर्व में जारी स्पष्टीकरण नोटिस का भी विद्यालय द्वारा निर्धारित अवधि में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
    जिला प्रशासन को यह शिकायत भी प्राप्त हुई कि पालकों द्वारा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) मांगे जाने पर विद्यालय प्रबंधन अनावश्यक रूप से टालमटोल करता है और समय पर टीसी जारी नहीं करता। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों से ‘इनफिनिटी मोबाइल एप्लीकेशन’ के नाम पर पाठ्यपुस्तकों के साथ 1300 से 2000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि वसूले जाने की भी पुष्टि जांच में हुई।

    यूथ एवं ईको क्लब सहित अन्य गतिविधियों का विद्यालय में प्रभावी संचालन नहीं

    जांच में यह भी पाया कि शासन के निर्देशानुसार संचालित किए जाने वाले यूथ एवं ईको क्लब सहित अन्य गतिविधियों का विद्यालय में प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा था। समग्र जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा शासन की विभिन्न गाइडलाइन एवं निर्देशों की लगातार अवहेलना की जा रही है।

    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के विपरीत पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का विक्रय

    जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर अभिमत व्यक्त किया है कि विद्यालय द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का विक्रय किया जा रहा है। विद्यालय की पुस्तकें एवं गणवेश स्थानीय बाजार अथवा ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पालकों को विवश होकर विद्यालय से ही सामग्री खरीदनी पड़ती है। साथ ही छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजना का क्रियान्वयन नहीं करना, यू-डाईस प्लस पोर्टल में कथित फर्जी प्रविष्टियां करना तथा शासन के निर्देशों की लगातार अनदेखी करना अत्यंत गंभीर अनियमितताएं हैं।

    जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जिले में निजी विद्यालयों द्वारा शासन के नियमों एवं विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार सभी निजी विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी में जुटी एजेंसी…

    महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी में जुटी एजेंसी…

    महादेव सट्टा ऐप से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. जहां महादेव सट्टा ऐप संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है. उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है. चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था.

    महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार
    फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ को भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है. भारत सरकार ने गिरफ्तारी के बाद उसे वापस लाने के लिए ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण की तैयारियों में जुटी है. चंद्राकर को ओमान की राजधानी मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

    कौन है सौरभ चंद्राकर?

    सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है.
    सौरभ की एक जूस की दुकान भी थी. इससे पहले वह कपड़े की दुकान में काम करता था.
    2019 में वो दुबई गया और अपने एक दोस्त रवि उत्पल को भी बुलाया. इसके बाद उसने महादेव एप लांच किया और फिर धीरे-धीरे ऑनलाइन सट्टा बाजार का बड़ा नाम बन गया.
    महादेव सट्टा ऐप के नाम पर करीब 6000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया.

    क्या है महादेव सट्टा ऐप घोटाला?
    बता दें कि साल 2016 में छत्तीसगढ़ के रहने वाले सौरभ चंद्राकर, रवि उप्‍पल और अतुल अग्रवाल ने साल महादेव बुक ऐप लॉन्‍च किया था. जब यह ऐप लॉन्च हुआ तो शुरुआत में इसके जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी होती थी, जिस पर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ पोकर, तीन पत्‍ती, वर्चुअल गेम यहां तक की चुनाव को लेकर भी भविष्‍यवाणी पर दांव लगाया जाता था.

    इसके बाद साल 2020 में सौरभ चंद्राकर, रवि उप्‍पल और अतुल अग्रवाल ने हैदराबाद स्थित रेड्डी अन्ना नामक एक और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म को 1 हजार करोड़ रुपए में खरीदा. इसके बाद यूजर्स की संख्या में बंपर इजाफा हुआ और हजारों करोड़ का कारोबार होने लगा. साल 2022 में आयकर विभाग और ED ने जब इस पर शिकंजा कसा तो करीब 6000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे, जिसकी जांच की जा रही है.

  • छत्तीसगढ़ स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: एनईपी-2020 के तहत अब 5वीं, 7वीं और 8वीं का बदलेगा सिलेबस, स्थानीय संस्कृति को मिलेगी प्रमुखता…

    छत्तीसगढ़ स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: एनईपी-2020 के तहत अब 5वीं, 7वीं और 8वीं का बदलेगा सिलेबस, स्थानीय संस्कृति को मिलेगी प्रमुखता…

    रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत छत्तीसगढ़ में अब कक्षा 5वीं, 7वीं और 8वीं की किताबें और पाठ्यक्रम बदले जाएंगे। पहली से तीसरी और 6वीं की नई किताबों के बाद अब इस चरण का काम शुरू हो गया है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने 7 जुलाई से 30 सितंबर तक तीन महीने का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है।
    नई किताबें एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी, लेकिन इनमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भूगोल, लोकजीवन, जनजातीय इतिहास और स्थानीय महापुरुषों से जुड़ी सामग्री भी शामिल की जाएगी। पूरे काम के लिए सेवानिवृत्त प्राचार्यों और विषय विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी गई है। मालूम हो कि इस संबंध में पूर्व में छत्तीसगढ़ से संबंधित पाठ हटाने पर काफी विरोध हुआ था। बाद में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने एससीईआरटी उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सकारात्मक पहल करने को कहा। छत्तीसगढ़ी, संस्कृति, रिती-रिवाज, पर्यटन, तीज त्योहारों, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी कोर्स में शामिल करने के निर्देश दिए थे। अब उस पर काम शुरू हो रहा है।
    एससीईआरटी संचालक रितुराज रघुवंशी ने 7 जुलाई से 30 सितंबर तक विषयवार कार्यशालाएं लगाने का टाइम-टेबल बनवाया है। इस दौरान पाठ्यक्रम की समीक्षा, विषय सामग्री का चयन, अध्याय लेखन, अभ्यास प्रश्न तैयार करना, ग्राफिक डिजाइन, प्रूफ रीडिंग, ले-आउट और अंतिम संशोधन जैसे सभी काम पूरे किए जाएंगे। सितंबर के अंत में किताबों का अंतिम मसौदा शिक्षा स्थायी समिति के सामने रखा जाएगा। पहले पहली से तीसरी और 6वीं की किताबें हो चुकीं हैं तैयार एससीईआरटी इससे पहले कक्षा 1, 2, 3 और 6 की 23 पाठ्यपुस्तकें (हिंदी और अंग्रेजी माध्यम) तैयार कर चुका है। इन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू करने की मंजूरी मिल चुकी है। इसी के तहत राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एससीएफ) भी तैयार की गई थी।
    इस चरण में कक्षा 5वीं और 8वीं के सभी विषयों की किताबें तैयार की जाएंगी। वहीं कक्षा 7वीं में गणित और योग शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उद्देश्य है कि बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और स्थानीय परिवेश से जुड़ी शिक्षा मिल सके। एससीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार नई किताबों में छत्तीसगढ़ के भूगोल, लोक संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्थानीय महापुरुषों की जानकारी को प्रमुखता दी जाएगी। किताबों की भाषा सरल और बच्चों के लिए सहज बनाने के लिए सेवानिवृत्त प्राचार्यों और विषय विशेषज्ञों का अनुभव लिया जा रहा है।

  • कोयले की धरती पर विकास का धुआं, विधायक पर उठते सवाल…

    कोयले की धरती पर विकास का धुआं, विधायक पर उठते सवाल…

    रायगढ़ लैलूंगा में सत्ता विरोध की आहट, सोशल मीडिया बना नया विपक्ष लैलूंगा विधानसभा… प्रदेश का शायद सबसे विचित्र राजनीतिक और भौगोलिक इलाका। रायगढ़ शहर के पांच वार्ड इसकी सीमा में आते हैं, लेकिन विकास की रफ्तार कई गांवों तक पहुंचते-पहुंचते जैसे थक जाती है। विडंबना यह है कि जिस धरती के नीचे कोयले का अकूत खजाना है, उसी धरती पर सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे सवाल आज भी खदानों की धूल में दबे पड़े हैं। सवाल यह नहीं कि संसाधन नहीं हैं, सवाल यह है कि उनका लाभ आखिर पहुंचा किस तक?
    ढाई साल पहले कांग्रेस ने निष्क्रियता के आरोपों के बीच तत्कालीन विधायक चक्रधर सिदार का टिकट काटकर नया चेहरा विद्यावती सिदार सामने रखा। उम्मीद थी कि नया नेतृत्व नई ऊर्जा लाएगा। लेकिन आज क्षेत्र में उल्टी तुलना सुनाई देने लगी है। कांग्रेस के कई पुराने कार्यकर्ता और आम लोग यह कहते मिल जाते हैं कि “चक्रधर कम बोलते थे, लेकिन लोगों के बीच दिखते तो थे।”
    राजनीति में कभी-कभी सबसे कठोर विपक्ष सामने वाली पार्टी नहीं, बल्कि मोबाइल का कमेंट बॉक्स बन जाता है। रायपुर के कांग्रेस शिविर से नेताओं को मीडिया और सोशल मीडिया में सक्रिय रहने का संदेश मिला। लैलूंगा की विधायक ने भी सक्रियता बढ़ाई, लेकिन हर नई पोस्ट के नीचे विकास का रिपोर्ट कार्ड खुलने लगा।

    मुड़ागांव में जंगल कटाई, प्रगति नगर की कार्रवाई, धौराभांटा की जनसुनवाई… सोशल मीडिया पर लोग एक-एक मुद्दा गिनाकर पूछ रहे हैं कि विरोध सिर्फ फोटो तक सीमित था या उसका कोई असर भी हुआ? राजनीति में धारणा कई बार वास्तविकता से बड़ी हो जाती है, और फिलहाल यही धारणा विधायक के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती दिख रही है।
    दूसरा मोर्चा संगठन का है। कांग्रेस के भीतर दबे स्वर अब फुसफुसाहट से आगे बढ़कर चर्चा बनने लगे हैं। चुनाव में मेहनत करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें अब महत्व नहीं मिल रहा। वहीं कई स्थानीय नेताओं का मानना है कि विधायक के पति कुंज बिहारी की बढ़ती सक्रियता ने संगठन में समानांतर शक्ति केंद्र की चर्चा को जन्म दिया है। इन आरोपों पर विधायक की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीति में कई बार चर्चाएं भी माहौल बना देती हैं।

    कमजोर नेतृत्व क्षेत्र का नुकसान
    लैलूंगा की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां खदानें बढ़ीं, उद्योग बढ़े, उत्पादन बढ़ा… लेकिन क्या उसी अनुपात में गांव भी बढ़े? यह सवाल लगातार उठ रहा है। कोल ब्लॉक और बड़े उद्योगों से घिरे इस इलाके में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसे मुद्दे चुनावी भाषणों से बाहर नहीं निकल पाए। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि उद्योगों की सीएसआर राशि का असर गांवों में उतना दिखाई नहीं देता, जितना कागजों में दिखाई देता है।
    अदाणी समूह समेत बड़े औद्योगिक घरानों की मौजूदगी वाले इस क्षेत्र में विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि उद्योगों और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और अधिक प्रभावी क्यों नहीं रही। यह राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी दलीलें हैं, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा चुनाव तक जीवित रहने वाला है।

    कांग्रेस की निष्क्रियता और भाजपा के अंतर्कलह का फायदा किसे

    लैलूंगा की राजनीति की एक और खासियत है कि यहां मतदाता किसी दल के स्थायी नहीं, अपने फैसले के स्थायी हैं। पिछले चुनाव में भाजपा बेहद कम अंतर से हार गई थी। उस हार में विपक्ष से ज्यादा चर्चा भाजपा की अंदरूनी राजनीति की हुई थी। अब यदि वही स्थिति दोबारा बनी और कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल भी मजबूत हुआ, तो मुकाबला पहले से कहीं अधिक दिलचस्प हो सकता है।
    यही कारण है कि युवा नेता रवि भगत की सक्रियता पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। टिकट न मिलने की पीड़ा, पत्नी की जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी ठुकराए जाने का अनुभव और अब संगठन से दूरी, इन सबने उन्हें एक अलग राजनीतिक पहचान दी है। यदि भाजपा फिर अंतर्कलह में उलझी तो रवि भगत समीकरण बदल सकते हैं, और यदि भाजपा एकजुट रही तो भी वे स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बने रहेंगे।

    फिलहाल लैलूंगा की राजनीति में सबसे बड़ी अदालत जनता का मोबाइल बन चुका है। वहां लाइक से ज्यादा कमेंट पढ़े जा रहे हैं और पोस्टर से ज्यादा प्रदर्शन का हिसाब मांगा जा रहा है। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन जनता ने संकेत दे दिया है कि इस बार सिर्फ चेहरे नहीं, काम भी तौले जाएंगे। लैलूंगा अब केवल सत्ता बदलने वाली सीट नहीं, बल्कि नेताओं का रिपोर्ट कार्ड जांचने वाली विधानसभा बनती जा रही है।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला : राजस्व मंडल का आवेदन खारिज, निरक्षर ग्रामीणों को देरी से दायर याचिका पर भी मिलेगा न्याय का अवसर…

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला : राजस्व मंडल का आवेदन खारिज, निरक्षर ग्रामीणों को देरी से दायर याचिका पर भी मिलेगा न्याय का अवसर…

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समय-सीमा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, कम पढ़े-लिखे और आदिवासी वर्ग के लोग अपने मामलों में पूरी तरह वकीलों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल इस आधार पर न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने समय पर अपील या पुनरीक्षण याचिका दायर नहीं की।

    राजस्व मंडल का आदेश किया निरस्त
    जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, बिलासपुर के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सात ग्रामीणों की विलंब से दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए राजस्व मंडल को वापस भेजते हुए सभी पक्षों को सुनकर गुण-दोष के आधार पर नया निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

    बेदखली की कार्रवाई से जुड़ा है मामला
    मामला मरियमपारा निवासी 68 वर्षीय कोदिया उरांव और अन्य ग्रामीणों से जुड़ा है। ग्रामीण लंबे समय से जिस भूमि पर मकान बनाकर रह रहे थे, वहां से बेदखली की कार्रवाई तहसीलदार द्वारा शुरू की गई थी। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने सरगुजा संभाग आयुक्त न्यायालय में अपील दायर की थी। हालांकि 21 जुलाई 2025 को आयुक्त न्यायालय ने तहसीलदार के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी।

    जनवरी 2026 में मिली आदेश की जानकारी
    ग्रामीणों का कहना था कि वे दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के निवासी और निरक्षर हैं, इसलिए उन्हें आयुक्त न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं मिल सकी। जनवरी 2026 में जब प्रशासन उनके मकानों को हटाने पहुंचा, तब उन्हें मामले की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दायर की और देरी माफ करने का आवेदन भी प्रस्तुत किया।

    राजस्व मंडल ने बताया था लापरवाही
    राजस्व मंडल ने 9 मार्च 2026 को आवेदन खारिज करते हुए कहा था कि ग्रामीणों ने अपने अधिवक्ता से मामले की जानकारी लेने का प्रयास नहीं किया, जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए ग्रामीण हाईकोर्ट पहुंचे थे।

    न्याय का उद्देश्य अधिकारों की रक्षा- हाईकोर्ट
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे आदिवासी समाज के गरीब और निरक्षर लोग हैं तथा पूरी तरह अपने वकील पर निर्भर थे। जैसे ही उन्हें बेदखली की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं राज्य शासन की ओर से कहा गया कि सात महीने की देरी के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं और राजस्व मंडल का आदेश वैधानिक है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि समय-सीमा में छूट देने संबंधी कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि तकनीकी आधार पर किसी के अधिकारों का हनन करना। अदालत ने माना कि राजस्व मंडल ने ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

    दोबारा होगी सुनवाई
    हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। अब राजस्व मंडल सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में नए सिरे से निर्णय करेगा।

  • बिजली विभाग के अधिकारी को जान से मारने की धमकी, FIR दर्ज…

    बिजली विभाग के अधिकारी को जान से मारने की धमकी, FIR दर्ज…

    रायपुर। सिविल लाईन पुलिस ने अरूण भद्रा पर सहायक अभियंता (एई) से गाली गलौज और जान से मारने की धमकी के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया है। टाउन हॉल के पास स्थित बिजली आफिस में यह घटना बुधवार रात हुई।रात करीब 8 अरूण भद्रा बिजली आफिस पहुंचा और वहां मौजूद एई मुकेश त्रिपाठी 53 से बिजली बिल में गलत मीटर रीडिंग डालने का कारण पूछा। इसी सवाल जबाव के दौरान अरूण भद्रा ने आपा खोया और गाली गलौज करते हुए जान से मारने की भी धमकी दी। मुकेश ने रात 9.30 बजे सिविल लाइन थाने में अरूण के खिलाफ लिखित रिपोर्ट दी । इस पर पुलिस ने धारा 221,224,296,351-2 के तहत शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का अपराध दर्ज किया है।

  • निकाह व्यवस्था में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ में गैर-मुस्लिम से निकाह से पहले लेनी होगी अनुमति, मौलानाओं का भी होगा रजिस्ट्रेशन…

    निकाह व्यवस्था में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ में गैर-मुस्लिम से निकाह से पहले लेनी होगी अनुमति, मौलानाओं का भी होगा रजिस्ट्रेशन…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में निकाह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाने की दिशा में वक्फ बोर्ड बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं का पंजीयन भी किया जाएगा। बोर्ड की योजना है कि यह व्यवस्था अगस्त 2026 से लागू कर दी जाए। वक्फ बोर्ड के मुताबिक, अंतरधार्मिक निकाह के मामलों में दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं की जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी। बोर्ड का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य निकाह व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को कम करना है।

    केवल पंजीकृत मौलाना ही करा सकेंगे निकाह

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। केवल पंजीकृत मौलाना ही वैध रूप से निकाह संपन्न करा सकेंगे। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना निकाह कराने की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

    दस्तावेजों की होगी विस्तृत जांच

    वक्फ बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक निकाह के हर मामले में दोनों पक्षों की पहचान, आवश्यक दस्तावेज और लागू कानूनी प्रक्रियाओं का सत्यापन किया जाएगा। जहां कानून के तहत धर्म परिवर्तन की आवश्यकता होगी, वहां उससे जुड़ी औपचारिकताओं का पालन भी सुनिश्चित कराया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निकाह की अनुमति दी जाएगी।

    हर निकाह का रिकॉर्ड रहेगा वक्फ बोर्ड के पास

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रदेश में संपन्न होने वाले सभी निकाह का डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा। निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा पूरे प्रदेश में निकाहनामा का एक समान प्रारूप लागू करने की तैयारी है, ताकि भविष्य में दस्तावेजों से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।

    वक्फ बोर्ड ने बताई नई व्यवस्था की वजह

    छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज का कहना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं। इसके कारण बाद में वैवाहिक स्थिति, पहचान और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी आसान होगी और प्रत्येक निकाह का प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

    आदिवासी क्षेत्रों की शिकायतों के बाद लिया फैसला

    वक्फ बोर्ड के अनुसार, आदिवासी इलाकों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने तथा संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में जांच करना आसान होगा।