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  • प्रदेश में माननीय एवं ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक प्रकरण लंबित हाईकोर्ट ने विशेष एमपी, एमएलए कोर्ट में लंबित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट जारी किया….

    प्रदेश में माननीय एवं ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक प्रकरण लंबित हाईकोर्ट ने विशेष एमपी, एमएलए कोर्ट में लंबित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट जारी किया….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमपी, एमएलए विश्ोष कोर्ट में प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक पूर्व व वर्तमान विधायकों व उनके ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ चल रहे आपराधिक प्रकरणों की स्थिति की रिपोर्ट जारी किया है। इसमें अधिकांश विधायकों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन के दौरान हंगामा, तोड़फोड़ का मामला दर्ज किया है।

    जारी रिपोर्ट में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ अपराध क्रमांक 541/2026 में धारा 190, 191 (2) 192, 126 (2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर सीजेएम बिलासपुर की अदालत में प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान में प्रकरण 1 जुलाई को चार्ज के लिए लगा है।

    बलौदाबाजार तृतीय एडीजे व सीजेएम की अदालत में किशोर नवरंग, विधायक देवेंद्र यादव व प्रमोद शर्मा पूर्व विधायक सहित 11 अन्य के खिलाफ अपराध क्रमांक 2818/2024 और 39/2024, 1354/2024 आपराधिक प्रकरण दर्ज है।

    जांजगीर-चाम्पा जिला अदालत में दो आपराधिक प्रकरण दर्ज है। अपराध क्रमांक 116/125 में वेदप्रकाश साहू व 7 अन्य तथा बालेश्वर साहू के खिलाफ धारा 147, 294, 452, 323, 149, 427 आईपीसी के तहत प्रकरण चल रहा। मामला अभियोजन साक्ष्य के लिए रखा गया है। इसी प्रकार अपराध क्रमांक 34/2026 में गौतम राठौर और बालेश्वर साहू के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत प्रकरण लंबित है।

    कवर्धा सीजेएम कोर्ट में अपराध क्रमांक 135/2022 में छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ब अशोक साहू व अन्य के खिलाफ 147,148, 149, 109, 353, 332, 153 (ए), 186, 188, 295, 427, 120 (बी) व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रकरण विचाराधीन है।

    इसके साथ रायपुर के अलग अलग विश्ोष कोर्ट में एसीबी द्बारा दर्ज अपराध क्रमांक 01/ 2024 में विधायक कवासी लखमा, पूर्व आबकारी अधिकारी अरूण पति त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्ट्राचर निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण लंबित है।

    ईडी के प्रकरण क्रमांक ०3/2023 में देवेंद्र सिंह यादव व चंद्रदेव प्रसाद राय के खिलाफ मनीलॉड्रिंग का मामला चल रहा।

    ईडी के प्रकरण क्रमांक ०5/2024 में विधायक कवासी लखमा के खिलाफ मनीलॉड्रिंग एक्ट का प्रकरण लंबित है। आपराधिक प्रकरण क्रमांक 22283/2013 में संजीव शुक्ला व देवेंद्र यादव के खिलाफ 147, 188, 353, 332, 186 आईपीसी के तहत प्रकरण लंबित है। अपराध क्रमांक 4819 /2018 में डेमाल प्रसाद व श्रीमती उद्बेश्वरी पैकरा के खिलाफ 147, 341 के तहत मुकदमा चल रहा है। अपराध क्रमांक 4884/2018 में आकाश शर्मा व अन्य के खिलाफ 353, 186, 332, 427, 147 आईपीसी के तहत प्रकरण चल रहा है।

    सीबीआई के विश्ोष प्रकरण क्रमांक 5465/2018 में कैलाश मुरारका, भूपेश बघ्ोल, विजय भाठिया के खिलाफ 120 बी, 469, 471 आईपीसी एवं 67 ए आईटी एक्ट का प्रकरण चल रहा।

    अपराध क्रमांक 666/ 2025 में पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी व अन्य के खिलाफ 341,147 आईपीसी के तहत प्रकरण लंबित है। अपराध क्रमांक 667/2025 में गोवर्धन मांझी व अन्य के खिलाफ 341, 147 के तहत मामला लंबित है। अपराध क्रमांक 391/2024 में रोहित साहू व अन्य के खिलाफ दो अलग अलग प्रकरण धारा 341, 147, 186 का लंबित है। सर्वाधिक प्रकरण रायपुर न्यायालय में चल रहा है।

    इसी प्रकार राजनांदगांव जिला न्यायालय के विश्ोष कोर्ट में सीजीपीडीआई एक्ट के तहत मोहम्मद खालिद व पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के खिलाफ 6 प्रकरण पेश किया गया है। सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फिलहाल सुनवाई पर रोक लगाई है।

  • हीरा ग्रुप घोटाले में बड़ा एक्शन, ईडी ने 159 करोड़ की संपत्तियां नीलाम कीं…

    हीरा ग्रुप घोटाले में बड़ा एक्शन, ईडी ने 159 करोड़ की संपत्तियां नीलाम कीं…

    हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उनसे जुड़ी संस्थाओं की लगभग 159 करोड़ रुपए की कीमत वाली 23 अटैच्ड अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी की है। ईडी, हैदराबाद ने नीलामी से पहले नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने भोले-भाले लोगों से सालाना 36 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देने का वादा करके 5,978 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश इकट्ठा किया, लेकिन वे लोगों को मूल रकम भी वापस नहीं कर पाए, जिससे देश भर में बड़ी संख्या में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई।

    इसी के संबंध में ईडी, हैदराबाद जोनल ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट के रिट पिटीशन में मिसलेनियस एप्लीकेशन के निर्देशों का पालन करते हुए शुक्रवार को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के जरिए आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य संबंधित संस्थाओं की अटैच्ड अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक आयोजित की। ईडी द्वारा नीलाम की गई संपत्तियों में वे एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अटैच किया गया था। इन एसेट्स की पहचान ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (निर्धारित अपराधों) से हुई ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध से हुई कमाई) से हासिल या अर्जित संपत्ति के तौर पर की गई थी और पीएमएलए की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इसकी पुष्टि की थी।

    नीलामी की प्रक्रिया एमएसटीसी लिमिटेड के जरिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित की गई थी। वहीं, नीलामी से मिली रकम का इस्तेमाल असली निवेशकों/पीड़ितों को पैसे वापस करने और मुआवजा देने के लिए किया जाएगा। यह काम पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट की देखरेख और निर्देशों के तहत होगा, जिससे उन हजारों निवेशकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिनके साथ आरोपियों ने धोखाधड़ी की थी। ईडी जांच के दौरान, नोहेरा शेख सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहीं। उनके व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद हैदराबाद में पीएमएलए के तहत स्पेशल कोर्ट ने 7 मई को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसी संबंध में खास जानकारी मिलने पर ईडी ने उन्हें 21 मई को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया और संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जहां वे अभी भी हैं। वहीं, उनकी पर्सनल असिस्टेंट नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा, अपराध से हुई कमाई को रखने, इस्तेमाल करने और उसे और बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थीं।

  • रायपुर में डॉक्टरों का कैंडल मार्च : बाहरी राज्यों से आउटसोर्सिंग का विरोध, स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर किया प्रदर्शन…

    रायपुर में डॉक्टरों का कैंडल मार्च : बाहरी राज्यों से आउटसोर्सिंग का विरोध, स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर किया प्रदर्शन…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों ने भाग लिया।

    डॉक्टरों ने राज्य  सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बगैर पंजीयन दूसरे राज्य से आउटसोर्सिंग का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

    डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

    प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—

    • इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि।
    • राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।
    • छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकार और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
    • मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में बाहरी राज्यों से बिना पंजीयन प्रवेश का विरोध।

    लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप

    कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के रोजगार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का भी सवाल है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेश के युवा चिकित्सकों में असंतोष और चिंता को और बढ़ा दिया है।

    डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी

    प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। यह संघर्ष पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

    JDA और CGDF का संयुक्त बयान

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और स्थानीय युवाओं के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

  • EOW-ACB की बड़ी कार्रवाई : नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप…

    EOW-ACB की बड़ी कार्रवाई : नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप…

     रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा को गिरफ्तार किया है। वर्मा पर निविदा (टेंडर) आवंटन के बदले रिश्वत मांगने और आय से अधिक अकूत संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं।

    EOW-ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए रायपुर, बिलासपुर और मध्यप्रदेश के उज्जैन कुल 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।

    जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े अहम सुराग सामने आए हैं। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी भागीरथ वर्मा को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। इस दौरान EOW-ACB उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी।

    अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में टेंडर प्रक्रिया, कथित रिश्वतखोरी और अन्य संभावित आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। EOW-ACB का कहना है कि जांच अभी जारी है। बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • पुलिस परिवारों ने कहा: 8-10 साल से नक्सल क्षेत्र में ड्यूटी, फिर भी ट्रांसफर नहीं…

    पुलिस परिवारों ने कहा: 8-10 साल से नक्सल क्षेत्र में ड्यूटी, फिर भी ट्रांसफर नहीं…

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के स्थानांतरण की मांग को लेकर मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के परिजन पुलिस महानिदेशक … (डीजीपी) से मुलाकात करने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि चार दिन पहले ही मुलाकात के लिए आवेदन देने के बावजूद उन्हें डीजीपी से मिलने का अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी देखी गई।

    जानकारी के अनुसार, लगभग 200 निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के माता-पिता, पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन अपने परिवार के सदस्यों के वर्षों से लंबित स्थानांतरण की मांग लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे डीजीपी से यह जानना चाहते थे कि आखिर उनके परिजनों का स्थानांतरण कब होगा, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप है कि डीजीपी ने अन्य लोगों से मुलाकात की, जबकि वे उनसे नही मिले ।
    परिजनों का कहना है कि उनके परिवार के सदस्य पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार नक्सल प्रभावित और अनुसूचित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कई बार विभाग को स्थानांतरण के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि इस लंबे कार्यकाल का असर पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पारिवारिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
    परिजनों ने यह भी दावा किया कि स्थानांतरण को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों का सामान्यतः तीन वर्ष बाद मैदानी क्षेत्रों में स्थानांतरण किया जाता है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यही नीति लागू है तो बड़ी संख्या में निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8 से 10 वर्षों से नक्सल क्षेत्रों में ही क्यों पदस्थ है।

    पुलिस परिवारों की बात सुनने के बजाय उन्हें मिलने से रोक दिया

    संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने आरोप लगाया कि पुलिस परिवारों की बात सुनने के बजाय उन्हें मिलने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया किसी कारणवश प्रभावित है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और परिवार के सदस्यों को डीजीपी तक पहुंचने नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से लंबित स्थानांतरण की मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

  • छत्तीसगढ़ के इन इन 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी; अगले 24 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी की किया Alert!

    छत्तीसगढ़ के इन इन 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी; अगले 24 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी की किया Alert!

    छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है, जिसके चलते प्रदेश भर में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने एक बड़ा अपडेट जारी करते हुए राज्य के 8 प्रमुख जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया है। इन इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

    8 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी

    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की भारी सक्रियता के कारण प्रदेश के मध्य और मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। जिन 8 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, उनमें राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर, बलौदा बाजार, बेमेतरा और बालोद शामिल हैं। इन जिलों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने और आकाशीय बिजली गिरने की तीव्र संभावना है।

    येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के बाकी बचे हिस्सों को भी राहत नहीं दी है। अन्य सभी संभागों और जिलों के लिए स्थिति के अनुसार येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि पूरे प्रदेश में मानसून का जोर रहने वाला है।

  • छत्तीसगढ़ में फ्रेश क्राफ्ट बीयर की बिक्री को मंजूरी, जानिए कैसे मिलेगा लायसेंस…

    छत्तीसगढ़ में फ्रेश क्राफ्ट बीयर की बिक्री को मंजूरी, जानिए कैसे मिलेगा लायसेंस…

    छत्तीसगढ़ में बीयर पीने वालों के लिए अच्छी खबर है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा की तरह अब सीजी में भी अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश यानी क्राफ्ट बीयर मिलेगी। आपको बता दें राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इससे अब लोगों को नया विकल्प मिलेगा।

    आबकारी विभाग जारी करेगा लाइसेंस

    आपको बता दें सरकार का ऐसा मानना है कि इस नए फैसले से लोगों को नया विकल्प मिलेगा। साथ ही इससे होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे सरकार की आय भी बढ़ेगी। गौरतलब है माइक्रो ब्रुअरी में लिमिटेड मात्रा में फ्रेश बीयर तैयार की जाती है। इसके बाद इसे उसी मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को सर्व किया जाता है।

     

    अभी तक कहां कहां बिकी है माइक्रो ब्रुअरी

    आपको बता दें बेंगलुरु को देश की ‘क्राफ्ट बीयर कैपिटल’ माना जाता है। इसके अलावा ये कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे प्रदेश में माइक्रो ब्रुअरी का चलन पहले से ही है। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ भी इसकी लिस्ट में शामिल होने जा रहा है।

    लाइसेंस पाने के क्या हैं नियम

    आपकेा बता दें माइक्रो ब्रुअरी का लाइसेंस पाने के लिए कारोबारियों को 10 लाख रुपए की फीस देनी होगी। पहले ये सालाना 25 लाख रुपए थी। हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा सुरक्षा राशि के रूप में पहले से जमा करना होगा।

     

    साथ ही इसे स्टार्ट करने के लिए 4 हजार वर्गफीट का एरिया होना जरूरी होगा। इसमें एक माइक्रो ब्रुअरी को रोजाना ज्यादा से ज्यादा 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की परमिशन होती है।

     

  • बिलासपुर: महापौर पर लगा 1 करोड़ 15 लाख की घूस का आरोप, टेंडर दिलाने के एवज ली गई रकम, जनिए पूरा मामला

    बिलासपुर: महापौर पर लगा 1 करोड़ 15 लाख की घूस का आरोप, टेंडर दिलाने के एवज ली गई रकम, जनिए पूरा मामला

    नगर निगम में भ्रष्टाचार का खेल किस तरह चला है, इसका अंदाजा इस गड़बड़ी को देख लगाया जा सकता है. नगर निगम के तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने तत्कालीन महापौर रामशरण यादव पर एक करोड़ 15 लाख रुपये की घूस लेने का सीधा आरोप मढ़ दिया है. आरोप है कि यह भारी-भरकम रकम ‘गणेश ट्रेडर्स’ को नियम ताक पर रखकर टेंडर दिलाने के एवज में दी गई थी.

    दिलचस्प और उलझा हुआ है मामला
    दरअसल, यह पूरा मामला बेहद दिलचस्प और उलझा हुआ है. भ्रष्टाचार की इस स्क्रिप्ट में संपदा अधिकारी राजेश देवांगन खुद ‘डीलिंग’ का हिस्सा थे. राजेश देवांगन ने खुद टेंडर की सेटिंग कराने के लिए महापौर के बेहद करीबी माने जाने वाले मुकेश पाठक का सहारा लिया. देवांगन का कहना है कि इसी मुकेश पाठक के माध्यम से पूरी रकम तत्कालीन महापौर रामशरण यादव तक पहुंचाई गई थी.

    घूस की रकम वापस मांगना की शुरू
    सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था, लेकिन तभी इस खेल में कलेक्टर की एंट्री हो गई. तत्कालीन कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने जैसे ही इस संदिग्ध टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई, वैसे ही भ्रष्टाचार की इस इमारत की नींव हिल गई. टेंडर रद्द होने के बाद ‘गणेश ट्रेडर्स’ के संचालकों ने अपने एक करोड़ 15 लाख रुपये वापस मांगना शुरू कर दिए. जब पैसे वापस करने का पूरा दबाव संपदा अधिकारी राजेश देवांगन पर आया, तो लेन-देन के इस नेटवर्क की कलई खुल गई.

    थाने तक पहुंच गया मामला
    पैसे को लेकर आपस में ऐसी भिड़ंत हुई कि मामला थाने तक पहुंच गया. इस पूरे मामले में अब राजेश देवांगन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद पैसे के इस अवैध लेनदेन की बात कबूल करते नजर आ रहे हैं. खुद को घिरता देख तत्कालीन संपदा अधिकारी ने अब इस पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक से की है और मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल घूसकांड पर क्या एक्शन लेती है.

  • ऐतिहासिक पहल : मेघदूत मेघमार्ग पर निकली अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा-2026 पहुंची अमरकंटक….

    ऐतिहासिक पहल : मेघदूत मेघमार्ग पर निकली अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा-2026 पहुंची अमरकंटक….

    अमरकंटक। मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में मंगलवार को मेघदूत मेघमार्ग पर संचालित अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा-2026 का आगमन हुआ । यात्रा के प्रमुख आयोजक डॉ. राम विजय शर्मा (रायपुर) जो एक इतिहासकार , पुरातत्ववेत्ता एवं अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता हैं , ने बताया कि यह यात्रा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुगाडाइ से प्रारंभ हुई है और आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है ।

    उन्होंने बताया कि यात्रा मूगाडाई से रतनपुर , अमरकंटक सहित आगे विदिशा , उज्जैन , देवगढ़ , मंदसौर , कुरुक्षेत्र , हरिद्वार तथा काठमांडू (नेपाल) होते हुए मानसरोवर (तिब्बत) तक पहुंचेगी । इस ऐतिहासिक यात्रा का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति , परंपराओं , भाषा , साहित्य , इतिहास तथा विश्व बंधुत्व के संदेश का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है ।

    डॉ. राम विजय शर्मा ने कहा कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो द्वारा रचित साहित्य ‘मेघदूत’ का विभिन्न भाषाओं में अध्ययन एवं वाचन किया जाएगा । साथ ही आदिवासी समाज के बीच साहित्यिक संवाद आयोजित कर उनके इतिहास , संस्कृति , पारंपरिक चिकित्सा पद्धति तथा ज्ञान परंपरा पर व्यापक चर्चा की जाएगी । इससे आदिवासी समाज में जागरूकता बढ़ेगी तथा उनकी सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायता मिलेगी ।

  • WhatsApp ने लॉन्च किया बड़ा प्राइवेसी फीचर, अब बिना नंबर बताए कर पाएंगे मैसेज और कॉल

    WhatsApp ने लॉन्च किया बड़ा प्राइवेसी फीचर, अब बिना नंबर बताए कर पाएंगे मैसेज और कॉल

    WhatsApp यूजर्स अब बिना  मोबाइल नंबर रिवील किए चैटिंग और कॉलिंग का आनंद ले सकेंगे। मेटा के इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए यह नया प्राइवेसी फीचर रोल आउट किया जा रहा है। इस यूजरनेम फीचर में यूजर्स अपने मोबाइल नंबर को हाइड कर सकेंगे और अपनी पहचान के लिए यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकेंगे, जैसा कि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में होता है। मोबाइल नंबर रिवील नहीं होने की वजह से साइबर क्राइम की घटनाओं में कमी आ सकती है।

    वॉट्सऐप ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इस फीचर के रोल आउट करने की घोषणा की है। इस फीचर को जल्द ही ऑफिशियली लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल यूजर्स अपने यूजरनेम को रिजर्व कर सकेंगे। यूजरनेम रिजर्व होने के बाद यूजर का मोबाइल नंबर छिप जाएगा और वो केवल यूजरनेम से ही पहचाने जाएंगे।

    वॉट्सऐप ने अपने पोस्ट में बताया कि “आपका फोन नंबर निजी है और कभी-कभी आप बिना इसे बताए लोगों के साथ कनेक्ट होना चाहते हैं। यही कारण है कि हम वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर ला रहे हैं।”