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  • महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में ED की बड़ी कार्रवाई: 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर विकास गर्ग, अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त…

    महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में ED की बड़ी कार्रवाई: 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर विकास गर्ग, अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त…

     रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल ऑफिस ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। ED ने इस मामले के प्रमुख आरोपियों में से एक EbixCash के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार कर 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल कर लिया है। साथ ही अब तक मामले में 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है।

    दिल्ली से गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड

    ED के मुताबिक, विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नई दिल्ली की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से ED ने उसकी ट्रांजिट रिमांड हासिल की।

    10 दिनों की ED कस्टडी में आरोपी

    ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद विकास गर्ग को 15 जुलाई 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया। ED की दलीलों को सुनने के बाद, रायपुर की विशेष अदालत ने आरोपी विकास गर्ग को 24 जुलाई तक कुल 10 दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है। अब पूछताछ के दौरान इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े चेहरों और वित्तीय लेन-देन का खुलासा होने की उम्मीद है।

    अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त

    महादेव ऑनलाइन बुक और अन्य अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ ED की यह कार्रवाई देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बन चुकी है। जांच एजेंसी इस मामले में अब तक देश और विदेश में फैले एक विशाल नेटवर्क का भंडाफोड़ कर चुकी है। मामले में अब तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है।

    जानिए पूरा मामला

    ED ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने ‘महादेव ऑनलाइन बुक’, ‘स्काईएक्सचेंज’ और अन्य के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से जुड़े मामले में विकास गर्ग को ‘प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। विकास गर्ग को 14.07.2026 को नई दिल्ली में PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के सामने पेश किया गया, जिसने ट्रांजिट रिमांड दी और उसके बाद उन्हें 15.07.2026 को रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के सामने पेश किया गया। रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) ने विकास गर्ग को 24.07.2026 तक, यानी 10 दिनों के लिए ED की कस्टडी में भेज दिया है।

    भौगोलिकसंदर्भ

    ED ने छत्तीसगढ़ पुलिस (दुर्ग) द्वारा दर्ज FIR और छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि की पुलिस द्वारा दर्ज कई अन्य FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। इन FIR में गैर-कानूनी ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और सहयोगियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। ED की जांच से पता चला कि सट्टेबाजी का सिंडिकेट विदेश से चलाए जा रहे फ्रैंचाइज़ी-आधारित ‘पैनल’ नेटवर्क के ज़रिए काम करता था और गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हर महीने 450 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) करता था।

    ED की जांच से पता चला कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ और ‘स्काईएक्सचेंज’ के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हुई अवैध कमाई को कई स्तरों वाले स्ट्रक्चर के ज़रिए लॉन्डर किया गया। इसमें शेल कंपनियों के जाल के ज़रिए कैश के बदले ‘अकोमोडेशन एंट्री’ की व्यवस्था करना और दुबई, मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम में मौजूद विदेशी कंपनियों के ज़रिए QIP, FPI, FDI और FCCB रूट से निवेश करना शामिल था। इस पैसे को विकास गर्ग के मालिकाना हक और कंट्रोल वाली लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों में लगाया गया, ताकि अवैध पैसे को वैध दिखाया जा सके। अवैध कमाई को उनके ग्रुप की कंपनियों के ज़रिए और भी कई स्तरों पर घुमाया गया और उसका इस्तेमाल कई कामों में किया गया, जैसे कि यूनाइटेड स्टेट्स बैंकरप्सी कोर्ट के ज़रिए अमेरिका की कंपनी EBIX Inc. में 97.58% हिस्सेदारी खरीदना, और भारत व विदेश में शेयर, सिक्योरिटीज़ और अन्य एसेट्स बनाना।

    इस मामले में पहले, 05.06.2026 को एक प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था। इसके तहत विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनियों की चल और अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया गया था। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 940.77 करोड़ रुपये थी, जिनमें रिहायशी संपत्तियां, ज़मीन के टुकड़े, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज़ शामिल थीं। जांच से यह पता चला है कि विकास गर्ग ने अपने खिलाफ चल रही जांच के दौरान भी अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) को छिपाने और इधर-उधर करने की कोशिशें जारी रखीं।

    इस मामले में पहले सात प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए गए थे और रायपुर की माननीय स्पेशल कोर्ट (PMLA) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की गई हैं। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया है। इस मामले में अब तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच/ज़ब्त/फ़्रीज़ किया गया है। आगे की जांच जारी है।

  • ड्राइविंग के दौरान आया हार्ट अटैक, बेकाबू कार नाले में गिरी; 55 वर्षीय चालक की मौत…

    ड्राइविंग के दौरान आया हार्ट अटैक, बेकाबू कार नाले में गिरी; 55 वर्षीय चालक की मौत…

    जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक दर्दनाक हादसे में ड्राइविंग के दौरान हार्ट अटैक आने से 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना गोहलपुर थाना क्षेत्र के अमखेड़ा रोड की है, जहां अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क से उतरकर नाले में जा गिरा। गनीमत रही कि उस समय सड़क पर ज्यादा यातायात नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    अचानक हार्ट अटैक आने की आशंका
    मृतक की पहचान हनुमानताल क्षेत्र के कसाई मंडी निवासी बाबुआ हाजी (55) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार वह बुधवार को अपनी कार से अमखेड़ा रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक आने की आशंका है, जिसके कारण कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाले में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों ने तुरंत कार तक पहुंचकर चालक को बाहर निकाला और इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    क्रेन की मदद से कार को नाले से निकाला
    घटना की सूचना मिलते ही गोहलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। बाद में क्रेन की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया। हादसे के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में चालक की मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। हालांकि मौत के सटीक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    अधिकारियों के अनुसार यदि उस समय सड़क पर अधिक ट्रैफिक होता तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था। समय रहते वाहन सड़क से हट जाने के कारण अन्य किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

  • लैलूंगा थप्पड़कांड में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर को थप्पड़ मारने वाली युवती पर FIR दर्ज…

    लैलूंगा थप्पड़कांड में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर को थप्पड़ मारने वाली युवती पर FIR दर्ज…

    रायगढ़। लैलूंगा के चर्चित थप्पड़कांड में नया कानूनी मोड़ आ गया है। सरकारी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक रेमन भार्गव की शिकायत पर पुलिस ने उस युवती के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसने कुछ दिन पहले उन्हें सरेआम थप्पड़ मारने का आरोपित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया था। प्रोफेसर का आरोप है कि युवती ने उनसे रुपए मांगे, मना करने पर गाली-गलौज की, कॉलर पकड़कर मारपीट की और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 296 और 351(3) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ सहायक प्राध्यापक रेमन भार्गव ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि भागीरथी पटेल कॉलोनी में रहने वाली युवती का उनके घर आना-जाना था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवती कई बार उधार में रुपए मांग चुकी थी। प्रोफेसर का कहना है कि हाल में फिर पैसे मांगने पर उन्होंने इंकार किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि युवती ने उनके साथ अभद्रता की, कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारे और झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी दी। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि घटना के बाद भय के कारण वे कुछ समय के लिए लैलूंगा छोड़कर रायगढ़ चले गए थे और बाद में पत्नी के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई।

    यहीं से शुरू हुआ था पूरा विवाद

    यह वही मामला है, जिसने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वीडियो में एक युवती सहायक प्राध्यापक का कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारते और तीखी नोकझोंक करते दिखाई दे रही थी। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सहायक प्राध्यापक पिछले करीब डेढ़ साल से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से अश्लील संदेश भेज रहे थे तथा उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाल रहे थे। युवती ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया था। पुलिस ने उस शिकायत के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 और 79 के तहत मामला दर्ज किया था।

    अब जांच के केंद्र में दोनों पक्षों के आरोप

    ताजा एफआईआर के बाद यह मामला अब एकतरफा शिकायत का नहीं रहा। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज हैं और दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी अब दोनों मामलों के तथ्यों, गवाहों के बयान, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों का परीक्षण करेगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एम.एल. पटेल ने कहा कि घटना कॉलेज परिसर की नहीं है और कॉलेज को इस संबंध में युवती की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च शिक्षा विभाग को अवगत कराया जाता।

    जांच में जुटी पुलिस

    लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती की शिकायत पर पहले सहायक प्राध्यापक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था। अब प्रोफेसर की शिकायत पर युवती के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • मालगाड़ी डिरेल मामला : JCB बकेट को रेल लाइन पर छोड़ भागे थे मजदूर, डब्बे डिरेल होने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार…

    मालगाड़ी डिरेल मामला : JCB बकेट को रेल लाइन पर छोड़ भागे थे मजदूर, डब्बे डिरेल होने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार…

    बिलासपुर मंडल के करगी रोड रेलवे स्टेशन पर 13 जुलाई को हुई मालगाड़ी डिरेलमेंट मामले में RPF ने बड़ी कार्रवाई की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बिलासपुर से इंदौर तक छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि इस साजिश का मुख्य आरोपी निजी ठेकेदार पवन नायक अब भी फरार है।

    क्या हुआ था 13 जुलाई को ?

    Train Derailment Case : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर रेल मंडल में 48 घंटे के भीतर दूसरा रेल हादसा हो गया। सोमवार दोपहर करगी रोड रेलवे स्टेशन पर डाउन मेन लाइन से गुजर रही एक मालगाड़ी ट्रैक पर पड़ी जेसीबी मशीन की बकेट से टकरा गई। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे तीन वैगन पटरी से उतर गए। हादसे से प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर रेल संचालन प्रभावित रहा। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इससे पहले शनिवार को बिलासपुर स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर मालगाड़ी डिरेल हो गई थी।

    Train Derailment Case : रेलवे के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 2.20 बजे मालगाड़ी पीसीएमसी से आकर करगी रोड स्टेशन की डाउन मेन लाइन नंबर-3 से गुजर रही थी। इसी दौरान लोको पायलट ने ट्रैक पर जेसीबी की बकेट पड़ी देख तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन ट्रेन और बाधा के बीच दूरी कम होने से मालगाड़ी समय पर नहीं रुक सकी। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे पहला, तीसरा और छठवां वैगन पटरी से उतर गए।

  • बिलासपुर नगर निगम के सब इंजीनियर ने की आत्महत्या, सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला शव; हाल ही में हुआ था तबादला, मौत से पहले छोड़ा ऐसा नोट जिसने बढ़ा दी जांच, कलाई काटने की भी आशंका….

    बिलासपुर नगर निगम के सब इंजीनियर ने की आत्महत्या, सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला शव; हाल ही में हुआ था तबादला, मौत से पहले छोड़ा ऐसा नोट जिसने बढ़ा दी जांच, कलाई काटने की भी आशंका….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नगर निगम के एक सब इंजीनियर की संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या का मामला सामने आया है। नगर निगम कॉलोनी स्थित सरकारी आवास में उनका शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने मानसिक तनाव में होने का जिक्र किया है, हालांकि आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं लिखी गई है।

    पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान अमर सिंह चौहान के रूप में हुई है, जो नगर निगम के जोन-4 में सब इंजीनियर के पद पर पदस्थ थे। बुधवार सुबह जब काफी देर तक उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों और आसपास के लोगों को संदेह हुआ। दरवाजा खोलने पर उनका शव कमरे के अंदर फंदे से लटका मिला। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

    जांच के दौरान पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। प्रारंभिक जांच में नोट में केवल मानसिक परेशानी का उल्लेख मिला है, लेकिन आत्महत्या के कारण का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस ने नोट को जब्त कर उसकी लिखावट और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि फांसी लगाने से पहले अमर सिंह चौहान ने अपनी कलाई काटने की कोशिश की थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

    जानकारी के मुताबिक, अमर सिंह चौहान का हाल ही में जगदलपुर तबादला हुआ था। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि स्थानांतरण, पारिवारिक परिस्थितियां या अन्य व्यक्तिगत कारण उनकी मानसिक परेशानी की वजह तो नहीं बने। फिलहाल किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच और परिजनों व परिचितों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार: 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य होगा ‘प्री-पेड मीटर’ सिस्टम…

    छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार: 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य होगा ‘प्री-पेड मीटर’ सिस्टम…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय  सरकार ने शासकीय खर्चों में मितव्ययिता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, प्रदेश के सभी  सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और विभागों में अब बिजली खपत और बिल भुगतान की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। आगामी 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में ‘प्री-पेड बिजली बिलिंग व्यवस्था’ को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी विभागों में होने वाले बिजली के अनावश्यक खर्च को रोकना, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सालों से लंबित बिजली बिलों के भुगतान की लेत-लतीफी को हमेशा के लिए समाप्त करना है।

    मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करेगी नई व्यवस्था

    सरकार द्वारा लागू की जा रही यह प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था ठीक वैसे ही काम करेगी जैसे मोबाइल का प्री-पेड रिचार्ज काम करता है।

    • पहले भुगतान, फिर इस्तेमाल: इस व्यवस्था के तहत सभी विभागों को अपने अनुमानित बजट और आवश्यकता के अनुसार बिजली उपयोग करने से पहले एक निश्चित राशि एडवांस में जमा करानी होगी (रिचार्ज करना होगा)। राशि जमा होने के बाद ही संबंधित कार्यालय की बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चालू रहेगी।
    • अलर्ट और री-रिचार्ज: यदि किसी विभाग का रिचार्ज बैलेंस खत्म होने की स्थिति में पहुंचेगा, तो सिस्टम द्वारा समय रहते इसकी सूचना (अलर्ट) दी जाएगी। विभाग को ब्लैकआउट से बचने के लिए समय सीमा के भीतर दोबारा राशि जमा करनी होगी।
        • सटीक मॉनिटरिंग: इस डिजिटल व्यवस्था से हर विभाग अपनी दैनिक और मासिक बिजली खपत पर सीधे और लगातार नजर रख सकेगा, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार बिजली खर्च का सटीक बजट और योजना बना सकेंगे।

      करोड़ों रुपये के बकाया बिलों से मिलेगी मुक्ति

    • अक्सर देखा जाता है कि बजट की कमी, प्रशासनिक लेत-लतीफी या लापरवाही के कारण सरकारी विभागों में बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं हो पाता। इसके चलते बिजली कंपनियों (Discoms) का करोड़ों रुपये का राजस्व विभागों पर बकाया हो जाता है, जिससे पूरी  विद्युत वितरण प्रणाली प्रभावित होती है।नई प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद ‘बकाया बिल’ जैसी समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इससे जहां एक तरफ बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में बिजली के उपयोग को लेकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।
        • इंस्टॉलेशन प्रक्रिया: सभी सरकारी भवनों, कार्यालयों और संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्री-पेड मीटर और संबंधित बिलिंग सॉफ्टवेयर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
        • समय सीमा: उच्चाधिकारियों ने तकनीकी अमले और डिस्कॉम को सख्त हिदायत दी है कि 1 अगस्त की तय समय सीमा से पहले सभी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।चरणबद्ध तरीके से लागू होगा सिस्टम, तैयारियां तेजराज्य सरकार ने ऊर्जा विभाग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

      विशेषज्ञों की राय: भविष्य में आम जनता के लिए भी खुलेंगे रास्तेऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि प्री-पेड बिजली व्यवस्था उपभोक्ताओं को अपने खर्च पर बेहतर नियंत्रण रखने की आजादी देती है। देश के कई अन्य राज्यों में इस तरह के प्रयोग पहले ही सफल हो चुके हैं।छत्तीसगढ़ में सरकार ने इसकी शुरुआत स्वयं के विभागों से की है, जो कि एक सकारात्मक संदेश है। जानकारों का कहना है कि सरकारी विभागों में इस व्यवस्था के परिणामों और सफलता की समीक्षा करने के बाद, आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से वाणिज्यिक (Commercial) और घरेलू (Domestic) उपभोक्ताओं के लिए भी विस्तारित करने पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल, 1 अगस्त से लागू होने वाले इस क्रांतिकारी नियम को लेकर मंत्रालय से लेकर जिला स्तर के दफ्तरों में हलचल तेज है और सरकार को उम्मीद है कि यह कदम राज्य के बिजली प्रबंधन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा।

  • गरीब रथ एक्सप्रेस के AC कोच में महिला को सांप ने डसा! रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

    गरीब रथ एक्सप्रेस के AC कोच में महिला को सांप ने डसा! रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

    देश में सुरक्षित और आरामदायक रेल यात्रा के दावों के बीच गरीब रथ एक्सप्रेस के एसी कोच में एक महिला को कथित सर्पदंश की आशंका का मामला सामने आने के बाद रेलवे की  सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद यात्रियों में दहशत का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि एसी कोच तक विषैले जीव पहुंच सकते हैं, तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

    ट्रेन खुलने के कुछ ही मिनट बाद बिगड़ी तबीयत

    जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर शहर थाना क्षेत्र के बैरिया निवासी रिमझिम सिंह 3 जुलाई की रात डालटनगंज से नई दिल्ली जाने के लिए गरीब रथ एक्सप्रेस की जी-12 बोगी में सवार हुई थीं। ट्रेन खुलने के करीब 15 मिनट बाद उन्हें अचानक तेज पसीना आने लगा, घबराहट महसूस हुई और पैर में असहनीय दर्द शुरू हो गया।

    लंबीदूरी के लिए बस और रेल की सेवाएं

    ट्रेन में मौजूद चिकित्सक ने प्राथमिक जांच के दौरान सर्पदंश की आशंका जताई। इसके बाद गढ़वा रोड जंक्शन पर महिला और उनके बच्चों को ट्रेन से उतार दिया गया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

    रेलवे की मेंटेनेंस और पेस्ट कंट्रोल पर सवाल

    घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे की कोच मेंटेनेंस, साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि रेलवे नियमित निरीक्षण, सफाई और फ्यूमिगेशन का दावा करता है, तो एसी कोच में विषैले जीव पहुंचने की आशंका चिंताजनक है।

    यात्रियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, संबंधित कोच की तकनीकी एवं सुरक्षा जांच, साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था की समीक्षा तथा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला: युवक को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने की दी धमकी, फिर दो युवतियों ने ऐंठे रुपए, जांच में जुटी पुलिस….

    हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला: युवक को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने की दी धमकी, फिर दो युवतियों ने ऐंठे रुपए, जांच में जुटी पुलिस….

    रायपुर। राजधानी रायपुर में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। पुलिस ने युवक की शिकायत पर दो युवतियों के खिलाफ ब्लैकमेल कर 25 हजार रुपये की उगाही करने और लगातार झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप में  अपराध दर्ज किया है।

    पढ़िए पूरी खबर

    सिविल लाइन थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, शंकर नगर निवासी जयंत चौधरी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी मुलाकात मई 2026 में गुढ़ियारी में नित्या सिंह और पायल उर्फ आंचल तिवारी से हुई थी। दोनों ने पहले नौकरी दिलाने और पार्लर खोलने के नाम पर आर्थिक मदद मांगी। इसके बाद लगातार फोन-मैसेज के जरिए संपर्क बनाए रखा और मिलने का दबाव बनाती रहीं।

    इस तरह बनाया शिकार

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 14 जून को मुलाकात के दौरान दोनों युवतियों ने सिगरेट ऑफर की, जिसके बाद युवक और उसके साथी को चक्कर आने लगे। इसी दौरान कथित रूप से उनकी फोटो और वीडियो बना लिए गए। अगले दिन दोनों युवतियों ने फोन कर आरोप लगाया कि उनके साथ गलत हरकत हुई है और मामला दबाने के लिए पैसे की मांग की। साथ ही पैसा नहीं देने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने और परिवार के साथ कार्यालय में बदनाम करने की धमकी भी दी।

    25 हजार देने के बाद और पैसे की मांग

    पीड़ित का आरोप है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह डर गया और 25 जून को तरुण नगर हाट बाजार के पास अपने मित्र के साथ पहुंचकर दोनों युवतियों को 25 हजार रुपये नगद दे दिए। इसके बावजूद आरोपित लगातार और रुपये मांगती रहीं। एक जुलाई को दोनों युवतियों ने उसकी कार में रखे नगदी से भरे बैग पर हाथ साफ करने की कोशिश की। वहीं 10 जुलाई को वे उसके कार्यालय पहुंचीं और स्टाफ के सामने गाली-गलौज करते हुए कहा कि यदि पैसे नहीं दिए तो झूठे दुष्कर्म के केस में फंसा देंगी।

    मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

    फिलहाल पुलिस ने शिकायत के बाद मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, चैट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

  • चिरमिरी नगर निगम में 9 एल्डरमैन की एंट्री, स्वास्थ्य मंत्री बोले : अब विकास कार्यों में आएगी और तेजी….

    चिरमिरी नगर निगम में 9 एल्डरमैन की एंट्री, स्वास्थ्य मंत्री बोले : अब विकास कार्यों में आएगी और तेजी….

    चिरमिरी नगर निगम में शनिवार को 9 मनोनीत पार्षद (एल्डरमैन) ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि नगर निगम में 9 एल्डरमैन के जुड़ने से विकास कार्यों में नई गति आएगी और पूरे 40 वार्डों के विकास को मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि एल्डरमैन का दायित्व पूरे नगर निगम क्षेत्र के विकास में सहयोग देना है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समन्वय से जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा।

    कार्यक्रम में एमसीबी कलेक्टर संतन जांगड़े, महापौर राम नरेश राय, सभापति संतोष सिंह, निगम आयुक्त बिजेंद्र सारथी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

  • पूर्व मंत्री मो. अकबर का बड़ा आरोप, कहा- नकटी सहित 6 गांवों की 1076 एकड़ जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी….

    पूर्व मंत्री मो. अकबर का बड़ा आरोप, कहा- नकटी सहित 6 गांवों की 1076 एकड़ जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी….

    रायपुर। नकटी विवाद को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की भाजपा  सरकार अब नकटी गांव के विवाद को सुलझाने के बजाय वहां की जमीनों को लेकर एक अन्य विवाद की तैयारी में है। शासकीय दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि नकटी सहित सेरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रमचंडी, बरौंदा और रीको की कुल 436.01 हेक्टेयर (करीब 1076 एकड़) भूमि को नगर विकास योजना के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

    शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका

    मोहम्मद अबकर का कहना है कि इस प्रस्तावित योजना में नकटी गांव की भी कुछ जमीनों को शामिल किया गया है। सरकार स्पष्ट करें कि इस योजना में वह विवादित जमीन तो शामिल नहीं है जहां विध्वंश हुआ है। उन्होंने कहा, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी निविदा के दस्तावेज बताते हैं कि चयनित एजेंसी को सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत जैसी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने के बदले मिश्रित उपयोग (मिक्स यूज) भूमि के विकास और उसके विक्रय का अधिकार दिया जाएगा। इसका मतलब ये है कि उक्त जमीनों को सीधे न बेचकर डेवलपर के माध्यम से बेचा जा रहा है।

    पूर्व मंत्री अकबर ने कहा, निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 है। नकटी गांव की जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है, प्रभावित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधार अभी तक नहीं हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में ग्राम नकटी में विध्वंश के बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति है इसलिए जब तक पीड़ित परिवारों को न्यायपूर्ण और सर्वसम्मत हक नहीं मिल जाता, तब तक सरकार की प्राथमिकता मान्य व्यवस्थापन ही होना चाहिए।