दिल्ली। आज से देश में किसी भी लैंडलाइन फोन से मोबाइल नंबर पर फोन करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है. नए नियमों के मुताबिक, अब लैंडलाइन फोन से मोबाइल नंबर पर बात करने के लिए शून्य लगाना होगा. इससे टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को अधिक नंबर बनाने की सुविधा मिलेगी. इस बारे में टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने 20 नवंबर को एक सर्कुलर भी जारी कर दिया था. इस सर्कुलर में कहा गया था कि लैंडलाइन से मोबाइल पर नंबर डायल करने के तरीके में बदलाव की ट्राई (TRAI) की सिफारिशों को मान लिया गया है. यह सुविधा अभी अपने क्षेत्र से बाहर के कॉल करने के लिए उपलब्ध है. डायल करने के तरीके में इस बदलाव से दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर तैयार करने की सुविधा मिलेगी. यह भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी. इससे आगे चलकर नए नंबर भी कंपनियां जारी कर सकेंगी. 11 अंकों का हो सकता है मोबाइल नंबर भविष्य में टेलीकॉम कंपनियां 11 अंकों का मोबाइल नंबर भी जारी कर सकती हैं. फिलहाल देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते 10 अंकों का मोबाइल नंबर भी कम पड़ रहा है. ऐसे में केवल जीरो के प्रयोग से आगे के लिए राह काफी आसान हो जाएगी. इस बारे में दूरसंचार कंपनियों ने ग्राहकों को गुरुवार को याद दिलाया कि उन्हें शुक्रवार 15 जनवरी से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल लगाते समय पहले शून्य डायल करना पड़ेगा. एयरटेल ने अपने फिक्स्ड लाइन उपयोक्ताओं को बताया, ”15 जनवरी 2021 से अमल में आ रहे दूरसंचार विभाग के एक निर्देश के तहत आपको अपने लैंडलाइन से किसी मोबाइल पर फोन मिलाते समय नंबर से पहले शून्य डायल करना होगा.” सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पीके पुरवर ने इस बारे में संपर्क किये जाने पर कहा कि ग्राहकों को इससे अवगत कराने की शुरुआत की जा चुकी है.
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कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र ने राज्यों को भेजे निर्देश, बताया- किसे लगेगी वैक्सीन और किसे नहीं…
कोरोना वायरस से लड़ाई में अब वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू होने जा रहा है. इसके लिए सारी तैयारियां कर ली गई हैं. पूरे देश में 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू होने वाली है. इस टीकाकरण अभियान से पहले, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों को दोनों टीकों (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) के लिए एक व्यापक फैक्ट शीट भेजी हैं- जिसमें वैक्सीन रोलआउट, फिजिकल स्पेसिफिकेशन, खुराक, कोल्ड चेन स्टोरेज की आवश्यकताओं, मतभेद और हल्की AEFIs (टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटना) के बारे में जानकारी शामिल है.
DOs और Don’ts वाले दस्तावेज को सभी प्रोग्राम मैनेजर, कोल्ड चेन हैंडलर और वैक्सीनेटर के बीच भी प्रसारित किया गया है. केंद्र सरकार ने कहा कि डूज़ और डोंट के दस्तावेज के अनुसार, टीकाकरण की अनुमति केवल 18 साल से अधिक आयु के लोगों को दी जाती है. जो महिलाएं गर्भवती हैं और जो अपनी गर्भावस्था को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं और स्तनपान कराने वाली माताओं को यह वैक्सीन नहीं लगाई जानी चाहिए।
ये हैं केंद्र द्वारा भेजे गए निर्देश:
1. कोविड-19 वैक्सीन केवल 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र वाले लोगों के लिए है. 2. वैक्सीन की जिम्मेदारी संभाल रहे लोगों को 14 दिनों के अंतराल से अलग किया जाना चाहिए. 3. दूसरी खुराक उसी वैक्सीन की होनी चाहिए जिसमें पहली डोज ली गई थी. वैक्सीन के इंटरचेंजिंग की अनुमति नहीं है।
मनाही
1. ऐसी हिस्ट्री वाले व्यक्ति: – कोविड-19 वैक्सीन की पिछली खुराक की वजह से ऑनफ्लेक्टिक या एलर्जी रिएक्शन – वैक्सीन या इंजेक्टेबल थैरेपी, फार्मास्युटिकल उत्पाद, खाद्य-पदार्थ आदि से तुरंत या देरी से शुरू होने वाली एनाफिलेक्सिस या एलर्जी रिएक्शन2. गर्भावस्था और स्तनपान: – प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाएं अब तक किसी भी कोविड-19 वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण का हिस्सा नहीं रही हैं. इसलिए, जो महिलाएं गर्भवती हैं या अपनी गर्भावस्था के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं; और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस समय कोविड-19 वैक्सीन नहीं देनी चाहिए.अस्थायी मनाही: इन स्थितियों में, रिकवरी के बाद 4-8 सप्ताह के लिए कोविड वैक्सीनेशन स्थगित किया जाना है
1. SARS-CoV-2 संक्रमण के एक्टिव लक्षण वाले व्यक्ति.
2. SARS-CoV-2 के मरीज जिन्हें SARS-CoV-2 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या प्लाज्मा दिया गया है.
3. किसी भी बीमारी के कारण अस्वस्थ और अस्पताल में भर्ती (गहन देखभाल के साथ या बिना) मरीज.
विशेष सावधानियां वैक्सीन को ब्लीडिंग या कोगुलेशन डिसऑर्डर (जैसे, क्लॉटिंग फैक्टर डिफिसिएंसी, कोगुलोपैथी या प्लेटलेट डिसॉर्डर) के इतिहास वाले व्यक्ति में सावधानी के साथ लगाया जाना चाहिए.
इन स्थितियों में कोरोना वैक्सीन के लिए रोक नहीं है SARS-CoV-2 संक्रमण (सीरो-पॉजिटिवटी) या आरटी-पीसीआर पॉजिटिव बीमारी के पिछले हिस्ट्री के लोग – पुरानी बीमारियों और मॉर्बिडिटीज (कार्डिएक, न्यूरोलॉजिकल, पल्मोनरी, मेटाबॉलिक, गुर्दे, मालिगनेंसीज) – इम्यूनो-डिफिसिएंसी, एचआईवी, किसी भी स्थिति के कारण इम्यून-सप्रेशन के मरीज (इन व्यक्तियों में कोविड-19 वैक्सीन की प्रतिक्रिया कम हो सकती है)
विचार योग्य अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे- वैक्सीन से संबंधित अन्य सावधानियां जैसे-जैसे नई जानकारियां उपलब्ध होती जाएंगी लागू हो सकती हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा फैक्टशीट दोनों वैक्सीन कोविशील्ड के साथ-साथ कोवैक्सीन के लिए भी बनाया गया है।
कोविशील्ड- 10 डोज की शीशी – डोज: 0.5 मिली – शेड्यूल: 4 सप्ताह बाद – स्टोरेज: 2-8 डिग्री – वैक्सीन फ्रीज संवेदनशील है – जमे हुए या पिघले हुए पाए जाने पर इस्तेमाल में न लाएं – फिजिकल अपियरेंस: थोड़ा अपारदर्शी, हल्के भूरे रंग के साथ रंगहीन – सूचीबद्ध प्रतिकूल घटनाएं: इंजेक्शन साइट टेंडरनेस, इंजेक्शन साइट पेन, सिरदर्द, थकान, बुखार, म्याल्जिया, पयरेक्सिया, ठंड लगना, मतली, डिमाइलेटिंग डिसॉर्डर के बहुत कम उदाहरण बताए गए हैं.
कोवैक्सीन- 20 डोज की शीशी – डोज: 0.5 मिली – शेड्यूल: 4 सप्ताह बाद – स्टोरेज: 2-8 डिग्री – वैक्सीन फ्रीज संवेदनशील है – जमे हुए या पिघले हुए पाए जाने पर इस्तेमाल न करें – फिजिकल अपियरेंस: सफेद पारदर्शी – सूचीबद्ध प्रतिकूल घटनाएं: इंजेक्शन साइट टेंडरनेस, इंजेक्शन साइट पेन, सिरदर्द, थकान, बुखार, शरीर में दर्द, पेट में दर्द, मतली, उल्टी, चक्कर आना, पसीना, ठंड, खांसी, इंजेक्शन साइट सूजन.
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बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ में अलग से बजट, ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य होगा…
प्रदेश सरकार पहली बार चाइल्ड बजट लाने जा रही है। नई सरकार का यह तीसरा बजट है, जिसमें बच्चों के लिए अलग अलग काम कर रहे तकरीबन 4-5 विभाग के कामों के एक ही जगह लाने की योजना है। इसकी प्लानिंग के लिए सीएम भूपेश बघेल 15 जनवरी से अपने मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। चाइल्ड बजट का यह कांसेप्ट देश के कुछ राज्यों में लागू किया जा चुका है। दरअसल यह चाइल्ड बजट यूनीसेफ की उस योजना का हिस्सा है, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य और शैक्षिक विकास को सतत विकास लक्ष्य (संस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- एसडीजी) में शामिल किया हुआ है। इस योजना को छत्तीसगढ़ ने भी 2030 तक के लिए अपने सीजी एसडीजी विजन में समाहित किया है।
प्रदेश में हर साल करीब 8 लाख बच्चे पैदा होते हैं और राज्य में इस समय नवजात से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की तादाद 80 लाख के करीब है। इनके विकास के लिए सरकार के आधा दर्जन विभाग कई योजनाएं चलाते हैं। इनमें महिला बाल विकास और स्वास्थ्य मुख्य विभाग है। अकेले महिला बाल विकास विभाग इस साल अपने 2200 करोड़ के बजट में से बच्चों पर 14 सौ करोड़ खर्च कर रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग 85 से 90 करोड़ खर्च करता है। यह राशि केवल टीकाकरण, बाल ह्रदय योजना, कांक्लियर इंप्लांट, मातृ-शिशु योजना पर खर्च की जाती है। स्कूल शिक्षा विभाग, प्रायमरी से हायरसेकंडरी स्कूलों में अध्ययनरत 56 हजार बच्चों पर 14 हजार करोड़ खर्च कर रहा है। इतना ही नहीं हर साल दोनों विभागों में इसमें 10 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ योजनाएं लागू की जाती है। इनके अलावा स्कूल शिक्षा, अजा-जजा कल्याण, श्रम और समाज कल्याण विभाग भी बड़ी राशि खर्च करते हैं। अब इन सबको को एक छत के नीचे लाकर पूरे समन्वय और तालमेल के साथ योजनाएं लागू की जाएंगी। इसकी रुपरेखा बनाने सीएम बघेल ने 15 जनवरी को इन विभागों के मंत्रियों की बैठक बुलाई है। वहीं राज्य योजना आयोग भी सचिवों के साथ प्लान बनाएगा।
इससे पहले 4 राज्य ला चुके हैं
सूत्रों के अनुसार इससे पहले देश के 4 राज्यों में चाइल्ड बजट लागू किया जा चुका है। इनमें केरल, असम, बिहार और कर्नाटक शामिल हैं। असम ने तो पिछले साल ही लागू किया है। जबकि शेष राज्य 2013-14 से लागू कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली भाजपा सरकार इसे नजरअंदाज किए हुए थी।चौथा कांसेप्चुअल बजट
जानकारों के मुताबिक चाइल्ड बजट, 2013 के बाद से यह चौथा कांसेप्चुअल बजट होगा। इससे पहले बीजेपी सरकार आउटकम बजट, जेंडर बजट, यूथ बजट और कृषि बजट पेश कर चुकी है।“प्रस्ताव बना रहे हैं। इसमें महिला-बाल विकास के साथ पंचायत, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा के साथ बच्चों पर काम कर रहे विभागों की योजनाएं शामिल की जाएंगी।”
-अनिला भेंडिया, महिला बाल विकास मंत्री“राज्य योजना आयोग और वित्त विभाग इस पर काम कर रहे हैं। इस पर जल्द ही सीएम के साथ बैठक कर प्रारूप तैयार कर लिया जाएगा।”
-अजय सिंह, उपाध्यक्ष योजना आयोग छत्तीसगढ़ -

अब अपने आप ठीक होगा घाव, जानिए क्या लगा हाथ?
वैज्ञानिक बहुत जल्द ऐसे स्टेम सेल का उपयोग करेंगे जिसकी बदौलत कटे-पिटे अंग खुद से जुड़ सकते हैं या नए पैदा हो सकते हैं. चोट या घाव जल्दी भर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट इस टेक्नोलॉजी के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं. उन्होंने एक ऐसा स्टेम सेल खोजा है जिसमें रीजेनेरेटिव एबिलिटी है. यानी किसी भी चीज को फिर से जीवित करना या उसे वापस उसकी पुरानी अवस्था में लाकर ठीक कर देना. यह भविष्य का स्मार्ट स्टेम सेल होगा।
साइंटिस्ट इसे अभी से स्मार्ट स्टेम सेल (Smart Stem Cell) कह रहे हैं. विज्ञान की भाषा में इसे मल्टीपोटेंट स्टेम सेल (Multipotent Stem Cell) कहा जा रहा है. या फिर iMS भी बुलाया जाता है. यह स्टेम सेल इंसानों के शरीर से आसानी से निकाला जा सकता है. यह इंसान के शरीर में मौजूद वसा यानी फैट को रीप्रोग्राम्ड वर्जन है. फैट का रीप्रोग्राम्ड वर्जन ही स्टेम सेल कहलाएगा. इस स्टेम सेल की चूहों पर स्टडी की गई है, वहां पर इसकी सफलता ने साइंटिस्ट्स को रीजेनेरेटिव एबिलिटी वाले स्टेम सेल को लेकर उम्मीद जगाई है. यह स्टडी ऑनलाइन साइंस जर्नल साइंस एडवांस में प्रकाशित हुई है. इंसानों में प्रयोग करने से पहले साइंटिस्ट इस स्टेम सेल के कई और टेस्ट और रिसर्च करना चाहते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) में हीमैटोलॉजी के प्रोफेसर जॉन पिमांडा का कहना है कि आजतक किसी भी व्यक्ति ने ऐसे स्टेम सेल को विकसित नहीं किया है. यह अपने आसपास के वातावरण में मिल जाता है. साथ घायल या चोट खाए टिश्यू यानी ऊतकों को खुद जोड़ने में मदद करता है. ये ठीक वैसा ही है जैसे गिरगिट अपना रंग बदलता है और पूंछ कटने पर वापस नई पूंछ निकल आती है. जॉन पिमांडा ने बताया कि अभी तक स्टेम सेल विज्ञान में किसी ने इस तरह का एडॉप्टिव स्टेम सेल विकसित नहीं किया है. जॉन ने बताया कि उन्होंने लैब में जो iMS सेल बनाया है वो ह्यूमन फैट सेल को एक कंपाउड मिक्स सो जोड़ा गया है. ताकि वह अपनी असली पहचान खो सके. इसके लिए साइलेंसिंग मार्क्स को खत्म किया गया है. साइलेंसिंग मार्क्स किसी भी सेल को अपनी पहचान खोने से रोकते हैं।
जॉन और उनकी टीम ने इंसानों के फैट सेल से बनाए गए iMS स्टेम सेल्स को चूहों में डाला. शुरुआत में ये चूहों पर कोई असर नहीं दिखा रहे थे. लेकिन जैसे ही चूहे को चोट लगी ये स्टेम सेल्स एक्टिव हो गए. अपने आसपास की कोशिकाओं और ऊतकों के हिसाब से ये विकसित होकर चोट वाली जगह को भरने लगे. भविष्य में ये स्टेम सेल्स मांसपेशियों, हड्डियों, कार्टिलेज या नसों में लगी चोट को ठीक करके वापस पुराने रूप में ले आएंगे. इस स्टडी को करने वाले प्रमुख रिसर्चर अवनी येओला ने बताया कि इन स्टेम सेल्स से गिरगिट की तरह काम किया. अवनी येओला ने यह प्रोजेक्ट अपने पोस्ट डॉक्टोरल थीसिस के तौर पर UNSW में पूरा किया है. अवनी ने बताया कि कोशिकाओं को स्टेम सेल्स में बदलने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है लेकिन उनमें कुछ सीमाएं हैं. जैसे- जिस तरह का ऊतक बदलना है, उसी जगह का स्टेम सेल खोजना होगा. तब नए ऊतक तैयार हो पाएंगे. लेकिन ये किसी भी ऊतक के हिसाब से बदल जाता है।
वैज्ञानिक बहुत जल्द ऐसे स्टेम सेल का उपयोग करेंगे जिसकी बदौलत कटे-पिटे अंग खुद से जुड़ सकते हैं या नए पैदा हो सकते हैं. चोट या घाव जल्दी भर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट इस टेक्नोलॉजी के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं. उन्होंने एक ऐसा स्टेम सेल खोजा है जिसमें रीजेनेरेटिव एबिलिटी है. यानी किसी भी चीज को फिर से जीवित करना या उसे वापस उसकी पुरानी अवस्था में लाकर ठीक कर देना. यह भविष्य का स्मार्ट स्टेम सेल होगा. साइंटिस्ट इसे अभी से स्मार्ट स्टेम सेल (Smart Stem Cell) कह रहे हैं. विज्ञान की भाषा में इसे मल्टीपोटेंट स्टेम सेल (Multipotent Stem Cell) कहा जा रहा है. या फिर iMS भी बुलाया जाता है. यह स्टेम सेल इंसानों के शरीर से आसानी से निकाला जा सकता है. यह इंसान के शरीर में मौजूद वसा यानी फैट को रीप्रोग्राम्ड वर्जन है. फैट का रीप्रोग्राम्ड वर्जन ही स्टेम सेल कहलाएगा. इस स्टेम सेल की चूहों पर स्टडी की गई है, वहां पर इसकी सफलता ने साइंटिस्ट्स को रीजेनेरेटिव एबिलिटी वाले स्टेम सेल को लेकर उम्मीद जगाई है. यह स्टडी ऑनलाइन साइंस जर्नल साइंस एडवांस में प्रकाशित हुई है. इंसानों में प्रयोग करने से पहले साइंटिस्ट इस स्टेम सेल के कई और टेस्ट और रिसर्च करना चाहते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) में हीमैटोलॉजी के प्रोफेसर जॉन पिमांडा का कहना है कि आजतक किसी भी व्यक्ति ने ऐसे स्टेम सेल को विकसित नहीं किया है. यह अपने आसपास के वातावरण में मिल जाता है. साथ घायल या चोट खाए टिश्यू यानी ऊतकों को खुद जोड़ने में मदद करता है. ये ठीक वैसा ही है जैसे गिरगिट अपना रंग बदलता है और पूंछ कटने पर वापस नई पूंछ निकल आती है. जॉन पिमांडा ने बताया कि अभी तक स्टेम सेल विज्ञान में किसी ने इस तरह का एडॉप्टिव स्टेम सेल विकसित नहीं किया है. जॉन ने बताया कि उन्होंने लैब में जो iMS सेल बनाया है वो ह्यूमन फैट सेल को एक कंपाउड मिक्स सो जोड़ा गया है. ताकि वह अपनी असली पहचान खो सके. इसके लिए साइलेंसिंग मार्क्स को खत्म किया गया है. साइलेंसिंग मार्क्स किसी भी सेल को अपनी पहचान खोने से रोकते हैं. जड़ी जॉन और उनकी टीम ने इंसानों के फैट सेल से बनाए गए iMS स्टेम सेल्स को चूहों में डाला. शुरुआत में ये चूहों पर कोई असर नहीं दिखा रहे थे. लेकिन जैसे ही चूहे को चोट लगी ये स्टेम सेल्स एक्टिव हो गए. अपने आसपास की कोशिकाओं और ऊतकों के हिसाब से ये विकसित होकर चोट वाली जगह को भरने लगे. भविष्य में ये स्टेम सेल्स मांसपेशियों, हड्डियों, कार्टिलेज या नसों में लगी चोट को ठीक करके वापस पुराने रूप में ले आएंगे. इस स्टडी को करने वाले प्रमुख रिसर्चर अवनी येओला ने बताया कि इन स्टेम सेल्स से गिरगिट की तरह काम किया. अवनी येओला ने यह प्रोजेक्ट अपने पोस्ट डॉक्टोरल थीसिस के तौर पर UNSW में पूरा किया है. अवनी ने बताया कि कोशिकाओं को स्टेम सेल्स में बदलने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है लेकिन उनमें कुछ सीमाएं हैं. जैसे- जिस तरह का ऊतक बदलना है, उसी जगह का स्टेम सेल खोजना होगा. तब नए ऊतक तैयार हो पाएंगे. लेकिन ये किसी भी ऊतक के हिसाब से बदल जाता है. अवनी ने बताया कि iMS स्टेम सेल्स ने किसी तरह का साइड इफेक्ट या अतिरिक्त टिश्यू ग्रोथ को नहीं दिखाया है. ये चूहों में मौजूद विभिन्न प्रकार के ऊतकों के हिसाब से खुद को परिवर्तित करने में सक्षम है. भविष्य में जिन इंसान को किसी चोट, घाव या अंग को विकसित करने की जरूरत होगी, हम उसके शरीर से फैट सेल निकाल iMS स्टेम सेल बनाएंगे फिर उसे इंसान के अंदर डाल देंगे. इससे उसका चोट भर जाएगा या नया अंग बन जाएगा. एकदम पुराने की तरह. हर इंसान के अंदर मौजूद कोशिकाएं यानी सेल्स चाहे वह दिल का हो या दिमाग का, सबका एक ही DNA होता है. अलग-अलग कोशिकाओं का काम शरीर के अलग-अलग हिस्सों के अनुसार होता है. इसके लिए DNA के अलग-अलग हिस्से काम करते हैं. अगर शरीर में कोई बदलाव प्राकृतिक तरीके से होता है तो DNA के अलग-अलग हिस्से उसका विरोध नहीं करते, बल्कि उसे आसानी से स्वीकार्य कर लेते हैं. प्रोफेसर जॉन पिमांडा ने बताया कि ये भविष्य की टेक्नोलॉजी है. हम इसे इंसानों के उपयोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित करना चाहते हैं. जैसे ही हम इसकी सुरक्षा को लेकर पुख्ता होंगे हम इंसानों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेंगे. UNSW के सीनियर प्रोफेसर और इस स्टडी में शामिल डॉ. चंद्रकांथन ने कहा कि ये बेहतरीन तकनीक है भविष्य में इंसानों के अंगों को सुधारने और उन्हें नया करने की लेकिन इसे पूरी तरह से विकसित और उपयोग लायक होने में करीब 15 साल और लगेंगे.
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छत्तीसगढ़ में बर्ड-फ्लू की पुष्टि, राज्य में हाई अलर्ट जारी….
रायपुर। राज्य के बालोद जिले से जांच के लिए भेजे गए कुक्कुट (चिकन) सेम्पल की रिपोर्ट पाॅजिटिव आई है। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल से आज शाम प्राप्त रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान ने इसकी सूचना छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य सचिव सहित संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को दी है। राज्य में बर्ड-फ्लू का यह पहला मामला है जो बालोद जिले में मिला है।
बालोद जिला स्थित जी.एस. पोल्ट्री फार्म गिधाली में कुक्कुट (चिकन) के 5 सेम्पल बीते 11 जनवरी को जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल भेजे गए थे। जांच में पांचों सेम्पल एच-5 एन-8 एविएन इनफ्लुएंजा वायरस से ग्रसित पाए गए। सेम्पल की ट्रेकियल स्वाब एवं क्लोकल स्वाब की रिपोर्ट भी पाॅजिटिव पायी गई है। इसको लेकर राज्य के सभी जिलों को हाई अलर्ट कर दिया गया है । -

प्रधानमंत्री के पसंदीदा IAS रहे ये अफसर BJP में हुए शामिल, बनाये जा सकते हैं डिप्टी CM…..
गुजरात कैडर के IAS अफसर रहे अरविंद कुमार शर्मा गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे। ऐसी अटकलें हैं कि 12 MLC सीट (विधान परिषद) पर हो रहे चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। उन्हें यूपी सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है। शर्मा ने सोमवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लिया था। उनका 2 साल का कार्यकाल बाकी था।
भाजपा की सदस्यता लेने के बाद शर्मा ने कहा कि कल रात में ही मुझे पार्टी ज्वॉइन करने के लिए कहा गया। खुशी है कि मुझे मौका मिला। मैं मऊ के एक पिछड़े गांव से निकला हूं, आईएएस बना और आज बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड के होने के बावजूद भाजपा में शामिल होना बड़ी बात है। पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे पूरा करूंगा।
टाटा नैनो को गुजरात लाने में अहम भूमिका
शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में 11 अप्रैल 1962 को हुआ। 1988 बैच के गुजरात कैडर के IAS शर्मा ने पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर्स किया। टाटा नैनो को गुजरात लाने, राज्य में निवेश और वाइब्रेंट गुजरात समिट के आयोजनों में इनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से मास्टर ऑफ पब्लिक पॉलिसी और अमेरिका से स्ट्रक्चरिंग टैरिफ की ट्रेनिंग भी ली है।
18 साल से मोदी के भरोसेमंद
‘एके’ के नाम से जाने जाने वाले शर्मा के बारे में मशहूर है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त ब्यूरोक्रेट्स में एक हैं। बीते 18 साल से मोदी के भरोसेमंद हैं। जून 2014 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आने वाले शर्मा PMO में ज्वॉइट सेक्रेटरी बनाए गए थे। 2017 में उन्हें एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया। -

रूपा दिवाकर मौदगिल, एक ऐसी महिला IPS जिसने CM तक को गिरफ्तार किया था, 20 साल में 40 बार तबादला हुआ…
ऐसे तो बहुत से लोग होते हैं जिन्हें पद और मौका दोनों मिलता हैं परंतु उनमें से कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो पद का सही इस्तेमाल कर गलत के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत रखते हैं। अक्सर हमारे देश में ईमानदार अधिकारी को उनके काम के तरीकों के कारण विभागीय ऐक्शन का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक कहानी हम पहले भी सुन चुके हैं, हरियाणा के IAS अफसर अशोक खेमका (Ashok Khemka) की जिन्हें अपने काम करने के तरीको को लेकर बहुत से दिक्कतो का सामना करना पड़ा। आज हम एक ऐसे ही IPS अफसर की बात करेंगे जिसे हर 6 महीने पर ट्रांसफर और पोस्टिंग के ऑर्डर मिल जाते हैं।

रूपा दिवाकर मौदगिल (D.Roopa Moudgil)
रूपा कर्नाटक (Karnataka) कैडर के 2000 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वह प्रदेश की पहली महिला होम सेक्रेटरी हैं। रूपा का कुछ ही दिन पहले राज्य के गृह विभाग से हैंडलूप एम्पोरियम में ट्रांसफर किया गया है, क्योंकि उन्होंने एक बड़े अफसर के कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रूपा बताती हैं कि यह उनके लिए नया नहीं है, इससे पहले भी उनके साथ ऐसा हो चुका है। वह जब भी किसी के खिलाफ आवाज उठाती हैं, तो उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। जैसे जेल में बंद AIDMK की नेता शशिकला के खिलाफ हो, या साल 2003-2004 के दौरान एमपी की तत्कालीन सीएम उमा भारती को गिरफ्तार करने का हो, बहुत बार उनके काम के खिलाफ सवाल भी उठाए गए हैं।
20 साल के सर्विस में हो चुका हैं 40 बार ट्रांसफर
रूपा बेंगलुरु के सेफ सिटी प्रॉजेक्ट का काम देख रही थी जिसमें उन्होंने एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर हेमंत निंबालकर ( Hemant Nimbalkar) पर टेंडर प्रोसेस में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था जिसकी वजह से उनका वहां से भी ट्रांसफर हो गया। अब वे राज्य के हैंडलूम एम्पोरियम का कामकाज देखें रही हैं। रूपा का यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 43वीं रैंक आया था जिसके बाद उन्हें आईएएस पद पर नियुक्ति मिली पर वह आईपीएस बनना चाहती थी, इसलिए उन्होंने आईएएस छोड़ आईपीएस चुना। जिसमें रूपा का 20 साल के सर्विस में 40 बार ट्रांसफर हो चुका है।

भरतनाट्यम डांसर, प्लेबैक सिंगर और एक बेहतरीन शार्प शूटर हैं रुपा
रूपा पुलिस सर्विसेज के अलावा एक बेहतरीन ट्रेंड भरतनाट्यम डांसर भी हैं तथा भारतीय संगीत की ट्रेनिंग भी ली हैं। सिर्फ़ इतना ही नहीं बयालाताड़ा भीमअन्ना नामक कन्नड फिल्म में रूपा ने एक प्लेबैक सिंगर के रूप में गीत भी गाया है। साथ ही रूपा एक बेहतरीन शार्प शूटर भी हैं, जिसमें वह बहुत से पुरस्कार से सम्मानित भी हो चुकी हैं। रूपा की शादी आईएएस अफसर मुनीश मुद्गील (Munish Mudgal) से साल 2003 में हुई। रूपा की छोटी बहन रोहिणी दिवाकर (Rohini Diwakar) भी 2008 बैच की आईआरएस ऑफिसर हैं।
रूपा को नहीं पड़ता ट्रांसफर से फ़र्क
रूपा एक इंटरव्यू में कहती हैं कि तबादला होना हर सरकारी नौकरी का हिस्सा है। रूपा ने जितने साल नौकरी की है उसके दुगुने बार उनका ट्रांसफर हुआ है। रूपा जनती हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना विवाद और जोखिम का काम है। इसके चलते हीं उनका ट्रांसफर भी होता हैं, परंतु वह इससे हिम्मत नहीं हारती और ना ही अपने काम करने के तरीके को बदलती हैं। रूपा के तबादले पर राज्य के अलग-अलग वर्ग में मिलीजुली प्रतिक्रिया हुई थी तथा सोशल मीडिया पर भी बहुत से लोग उनके ट्रांसफर के फैसले के खिलाफ थे।
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डीजीपी अवस्थी ने पुलिस अफसरों से की चर्चा, बोले- अधिकारी नैतिक मूल्यों को रखें बरकरार
रायपुर। पुलिस अधिकारी अपने नैतिक मूल्यों को बनाकर रखें। जीवन में ईमानदारी आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। आपको असेट बनना है या लायबिलिटी, ये आपको तय करना है। आपकी ईमानदारी समाज में मिसाल बननी चाहिये। उक्त बातें डीजीपी डीएम अवस्थी ने आज 2013 बैच के उप पुलिस अधीक्षकों से मुलाकात के दौरान कही।
अवस्थी ने कहा कि आपके कार्य ऐसे होने चाहिये कि विभाग के साथ आपके परिवार को भी आप पर गर्व हो। पुलिस का चरित्र गंगा जल की तरह पवित्र होना चाहिये। गंगा जल की तरह आपमें बुराईयों को ना आने दें।
अपराधों की रोकथाम के साथ पुलिस अपना मानवीय चेहरा भी बनाकर रखें। आप जैसे युवा अधिकारी समाज में पुलिस की नकारात्मक छवि बदल सकते हैं।
नागरिकों के बीच पुलिस के प्रति परसेप्शन बदलने की आवश्यकता है। कई अधिकारी बहुत ही ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं। आपके अच्छे कार्यों की जानकारी भी लोगों को होनी चाहिये।
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रीत पर महामारी भारी, 73 साल में पहली बार बजट दस्तावेज नहीं छपेगा, वित्त मंत्री सॉफ्ट कॉपी से भाषण पढ़ेंगी…
आजादी के बाद (1947) से हर साल छपते आ रहे बजट दस्तावेज पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। संक्रमण के डर से इस बार बजट 2021-22 के दस्तावेज नहीं छापे जा रहे हैं। सरकार को इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति की मंजूरी मिल गई है। सभी संसद सदस्यों को इस बार बजट के दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाएगी।
ऐसे में इस बार बजट के दिन संसद के बाहर दस्तावेज पहुंचाने वाले ट्रक नजर नहीं आएंगे। केंद्रीय बजट की छपाई हर साल वित्त मंत्रालय की प्रिंटिंग प्रेस में होती रही है। वित्त मंत्रालय का कहना था कि बजट के दस्तावेजों की छपाई के लिए 100 से ज्यादा लोगों को दो हफ्ते तक एक ही जगह रखना होता है। कोरोना को देखते हुए सरकार इतने लोगों को इतने लंबे समय तक प्रिंटिंग प्रेस में नहीं रख सकती।
सॉफ्ट कॉपी पर सांसदों को मनाने के लिए हुई बड़ी मशक्कत
सूत्रों के मुताबिक, सॉफ्ट कॉपी के लिए सांसदों को मनाने में लोकसभा अध्यक्ष और उपसभापति को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बजट के डॉक्यूमेंट्स को लेकर दो विकल्प रखे गए थे। सभी सांसदों को सॉफ्ट कॉपी दी जाए या किसी को नहीं। वहीं, जो सांसद टेक सैवी नहीं हैं, उनके लिए सीमित संख्या में कॉपी छापना मुमकिन नहीं था। दलील दी गई कि दस्तावेज छापे गए तो उन्हें लाने-ले जाने में कोरोना संक्रमण का जोखिम हो सकता है।एक पखवाड़े पहले हलवा सेरेमनी से छपाई प्रक्रिया की शुरुआत
स्वतंत्र भारत में केंद्रीय बजट पहली बार 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसके दस्तावेज तब से हर साल छापे जाते रहे हैं। वित्त मंत्रालय बजट दस्तावेजों की छपाई प्रक्रिया की शुरुआत के मौके पर हर साल हलवा सेरेमनी करता है। सेरेमनी का आयोजन संसद में बजट पेश किए जाने से एक पखवाड़ा पहले नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है। अब सवाल यह है कि जब बजट छप नहीं रहा, तो हलवा सेरेमनी होगी या नहीं।बजट प्रक्रिया में 3 अहम बदलाव
1. चमड़े के ब्रीफकेस से बही-खाता
वित्त मंत्री बजट दस्तावेज आमतौर पर चमड़े के ब्रीफकेस में ले जाते थे। इस परंपरा की शुरुआत देश के पहले वित्त मंत्री (1947-1949) आरके शणमुखम चेट्टी ने की थी। 2019 और 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट दस्तावेज लाल रंग के पारंपरिक बही खाते में ले गई थीं।2. शाम 5 बजे के बजाय सुबह 11 बजे पेश होने लगा
बजट पेश किए जाने के समय में भी समय के साथ बदलाव हुआ। 1999 तक बजट फरवरी के अंतिम कामकाजी दिन को शाम पांच बजे पेश किया जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदल दिया और बजट सुबह 11 बजे पेश करना शुरू किया।3. रेल बजट भी आम बजट का हिस्सा बना
2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया कि अब से केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होगा। इसके अलावा 92 साल से अलग पेश होते आ रहे रेल बजट को केंद्रीय बजट में समाहित कर दिया गया।160 साल पहले पेश हुआ था देश का पहला बजट
देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्तमंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था। भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया था।
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ऑनलाइन मंगाया 60 हजार का पिज्जा, लेकिन खा नहीं पाया…
रायपुर। ऑनलाइन पिज़्ज़ा का आर्डर करना एक व्यक्ति को बड़ा महंगा पड़ गया। पिज्जा खाने तो मिला नहीं उल्टे शातिर ठगों ने खाते से 60 हजार रुपये ही उड़ा लिये। मामले में पुरानी बस्ती पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ ठगी का अपराध दर्ज कर लिया है।
पुरानी बस्ती पुलिस के मुताबिक प्रोफेसर कालोनी में रहने वाले 38 वर्षीय आलोक वर्मा ने 11 जनवरी को शाम 6:45 बजे पिज्जा ऑर्डर करने के लिए गूगल की मदद ली और पचपेड़ी नाका स्थित डोमिनोज पिज्जा का नंबर सर्च किया। लेकिन गूगल सर्च से मिला नंबर पिज्जा कंपनी का ना होकर शातिर ठगों का निकला। गूगल द्वारा मिले नम्बर पर प्रार्थी ने फोनकर पिज्जा ऑर्डर किया।
इसके बाद शातिर ठग ने पार्थी को दो लिंक भेज कर अपना डिटेल भर कर ऑर्डर करने के लिए कहा। पीड़ित आलोक वर्मा ने पहली लिंक को खोलकर उसमें अपनी सारी डिटेल डाल दी। जिसके बाद उसके मोबाइल पर एक ओटीपी आया, जिसको उसने आरोपी से शेयर कर दिया। ओटीपी शेयर करते ही उसके पीएनबी के अकाउंट से 59970 रुपये कट गए। जिसके बाद पीड़ित ने पुरानी बस्ती थाना में अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई।
