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  • नौ साल में निवेशकों के 129 करोड़ ही लौटाए जा सके, सामने नहीं आ रहे दावेदार, सेबी के खाते में है 23 हजार करोड़ रुपये…

    नौ साल में निवेशकों के 129 करोड़ ही लौटाए जा सके, सामने नहीं आ रहे दावेदार, सेबी के खाते में है 23 हजार करोड़ रुपये…

    सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों को नौ साल में मात्र 129 करोड़ रुपये ही लौटाए जा सके हैं। पिछले साल पूंजी बाजार नियामक ‘सेबी’ मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर खोले गए विशेष खाते में सेबी के पास निवेशकों के लौटाने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये का भंडार है। 

    बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूमि व विनिमय बोर्ड (सेबी) को सहारा समूह की इन कंपनियों के निवेशकों को पैसा लौटाने का जिम्मा सौंपा हैै। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा समूह ने निवेशकों को लौटाने के लिए विशेष एस्क्रो अकाउंट में 23,000 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। सेबी द्वारा गुरुवार को  दी ताजा जानकारी में यह बात कही गई है। 


    सहारा समूह की दो कंपनियों के बांडधारकों में से अधिकांश दावे के लिए सामने नहीं आए हैं। कोर्ट ने इन कंपनियों को अगस्त 2012 में करीब तीन करोड़ निवेशकों को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश दिया था।

    पिछले साल लौटाए जा सके मात्र 14 करोड़ रुपये
    पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में सेबी मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका है, जबकि सेबी-सहारा के रिफंड खातों में इस दौरान 1400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में सेबी ने कहा कि उसे 31 मार्च, 2021 तक 19,616 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें लगभग 81.6 करोड़ रुपये के रिफंड के दावे शामिल थे। इनमें से 16,909 मामलों में 129 करोड़ रुपये, जिसमें 66.35 करोड़ रुपये मूलधन और 62.34 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है, का रिफंड जारी किया है। 2.3 करोड़ रुपये से अधिक के 483 आवेदनों में त्रुटियों को दूर करने के लिए निवेशकों को वापस भेजा गया है।

    इससे पहले सेबी ने 31 मार्च, 2020 को बताया था कि उसके द्वारा रिफंड की गई कुल राशि को 115.2 करोड़ रुपये है। सेबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों और नियामक द्वारा पारित कुर्की आदेशों के अनुसार, 31 मार्च, 2021 तक कुल 15,473 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। 

    सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के फैसले के अनुसार बांडधारकों को रिफंड करने के बाद उन पर अर्जित ब्याज के साथ इन राशियों को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया गया है। 31 मार्च, 2021 तक, जमा की गई कुल राशि इन बैंकों में 23,191 करोड़ रुपये हैं।जबकि 31 मार्च, 2020 को यह राशि 21,770.70 करोड़ रुपये थी।

    सहारा समूह ने यह कहा
    सेबी के नवीनतम बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, सहारा समूह ने कहा कि उसके अपने अनुमान के अनुसार सहारा-सेबी खाते में ब्याज सहित जमा राशि लगभग 25,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। समूह ने आरोप लगाया कि सेबी के पास सहारा और उसके निवेशक का पैसा अनुचित ढंग से रोक कर बैठा है। रिफंड के दावों को आमंत्रित करने के लिए सेबी द्वारा वर्षों से दिए गए अखबारों के विज्ञापनों के विभिन्न दौरों का उल्लेख करते हुए, सहारा ने कहा कि नियामक ने पिछले विज्ञापन में स्पष्ट कर दिया था कि वह जुलाई 2018 के बाद प्राप्त किसी भी दावे पर विचार नहीं करेगा। इसका मतलब है कि सेबी के लिए और अधिक दावेदारों का भुगतान नहीं किया जाना है और सहारा के द्वारा जमा किए गए पूरे 25,000 करोड़ रुपये अनुचित रूप से सेबी के पास हैं। उन्हें सहारा को वापस कर दिया जाना चाहिए। सहारा ने अपने तीन करोड़ निवेशकों से संबंधित सभी मूल दस्तावेज सेबी को नौ साल पहले दे दिए थे। वर्षों पहले सत्यापन के लिए और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, 25,000 करोड़ रुपये की यह राशि अंततः सहारा को वापस आ जाएगी। 

  • ICMR ने कहा, Covishield और Covaxin को मिलाने पर स्टडी में दिखे अच्छे रिजल्ट…

    ICMR ने कहा, Covishield और Covaxin को मिलाने पर स्टडी में दिखे अच्छे रिजल्ट…

    दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत को एक और अच्छी खबर मिलती दिख रही है. कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीकों की मिश्रित खुराकों पर अध्ययन के परिणाम सुकून देने वाले हैं. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कहा है कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड की मिक्सिंग और मैचिंग स्टडी में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं. अध्ययन में इन दोनों वैक्सीन के मिलाने से यह न सिर्फ वायरस के खिलाफ सुरक्षित पाया गया, बल्कि इससे  बेहतर इम्युनोजेनेसिटी भी प्राप्त हुई।

    माना जा रहा है कि अगर स्टडी की फाइनल रिपोर्ट में परिणाम बेहतर मिलते हैं और सरकार अगर कोवैक्सीन और कोविशील्ड मिश्रित खुराकों को मंजूरी देती है, तो कोरोना वायरसे खिलाफ टीकाकरण अभियान में इसका सकारात्मक असर दिखेगा. दरअसल, बीते दिनों भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने इस बात की सिफारिश की थी कि वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) को कोविड-19 के दो टीकों कोवैक्सीन और कोविशील्ड के मिश्रण के क्लिनिकल परीक्षण की इजाजत दी जाए, जिसके बाद इसकी मंजूरी मिली थी।

    समिति ने भारत बायोटेक को उसके कोवैक्सिन और प्रशिक्षण स्तर के संभावित एडेनोवायरल इंट्रानैसल टीके बीबीवी154 के परस्पर परिवर्तन पर अध्ययन करने के लिए मंजूरी देने की भी सिफारिश की थी, लेकिन हैदराबाद स्थित कंपनी को अपने अध्ययन से ‘परस्पर परिवर्तन’ शब्द हटाने को कहा है और मंजूरी के लिए संशोधित प्रोटोकॉल जमा कराने को कहा था।

    300 स्वयंसेवकों पर परीक्षण
    एक सूत्र ने बताया था कि विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने विस्तृत विचार विमर्श के बाद वेल्लोर के सीएमसी को चौथे चरण का क्लिनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की, जिसमें कोविड-19 टीकों, कोवैक्सिन और कोविशील्ड के मिश्रण पर अध्ययन करने के लिए 300 स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया गया।

  • कांग्रेस पार्षद और CMO में जमकर विवाद… गाली-गलौच के बाद मामला पहुंचा थाने…

    कांग्रेस पार्षद और CMO में जमकर विवाद… गाली-गलौच के बाद मामला पहुंचा थाने…

    बिलासपुर। रतनपुर नगर पालिका में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और कार्यपालिका के बीच टकराव की स्थिति नजर आने लगी है. नगर पालिका सीएमओ और पार्षद रमेश सूर्या व उनके साथ गए वार्ड की महिलाओं के बीच आज जमकर बहस हुई, दोनों पक्षों ने गाली-गलौच, अपशब्दों का प्रयोग जैसी अपनी शिकायत थाने में दर्ज कराई है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    सीएमओ मधुलिका सिंह नगरपालिका कर्मचारियों के साथ पैदल ही थाने पहुंच गई और पार्षद एवं कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या और उनके साथियों जितेंद्र दुबे, कमल सोनी, विनय कश्यप सहित 50 लोगों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई. मधुलिका सिंह ने शिकायत की है, कि ये सभी लोग जबरदस्ती उनके चेंबर में घुस गए थे और गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाया. इस दौरान उनके दफ्तर में ताला लगाने की भी धमकी दी गई और कर्मचारियों से धक्का-मुक्की भी की गई. बिना अनुमति के वीडियो बनाने का आरोप भी सीएमओ ने लगाया है. उन्होंने सभी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने और कोविड गाइडलाइन का उल्लंघन करने की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

    इधर वार्ड 14 के पार्षद व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या भी अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए और उन्होंने सीएमओ पर ही आरोपों की झड़ी लगा दी. उन्होंने दावा किया कि वे वार्ड में नाली, बिजली पानी जैसी जन शिकायतों को लेकर सीएमओ से मिलने पहुंचे थे, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जातिगत गालियां दी गई, और उसके बाद सीएमओ थाने में शिकायत करने पहुंच गई।

  • हाईकोर्ट का फ़ैसला, विद्युत दुर्घटना में बिजली विभाग ही होगा जिम्मेदार…

    हाईकोर्ट का फ़ैसला, विद्युत दुर्घटना में बिजली विभाग ही होगा जिम्मेदार…

    विद्युत दुर्घटना में बेटे की मौत को लेकर दायर पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि विद्युत दुर्घटना से मौत का जिम्मेदार विभाग ही होगा. हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को मृतक के पिता को 45 दिनों के भीतर 4 लाख 50 हजार रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है.

    बतादें कि, याचिकाकार्ता ओमप्रकाश का पुत्र विद्युत विभाग के अधीन अक्षय ऊर्जा एजेंसी महासमुंद में क्रेडा द्वारा स्थापित सौर संयत्र में कार्यरत था. 16 दिसंबर 2019 को कार्य संचालान के दौरान विद्युत दुर्घटना की वजह से उसकी मृत्यु हो गई. मृत्यु जांच में भी पाया गया कि, याचिकाकर्ता के पुत्र की मृत्यु विद्युत प्रवाह से हुई है. इसके बाद भी याचिकाकर्ता को कोई मुआवजा नहीं दिया गया.

    इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की. याचिका मे बताया गया की यदि कोई भी संस्था, विभाग या कंपनी खतरनाक प्रकृति का कार्य संचालित करती है. तो उस कार्य संचालन के दौरान यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो ऐसी संस्था कठोर दायित्व सिद्धांत के तहत सदैव उत्तरदायी होगी‌. ऐसे प्रकरणों में लापरवाही सिद्ध करना आवश्यक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी मध्यप्रदेश विद्युत मंडल VS शैल कुमारी के केस में भी यही सिद्धांत प्रतिपादित किया है.

    हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर विभाग को 45 दिनों के भीतर 4 लाख 50 हजार मुआवजा वो भी ब्याज समेत प्रदान करने का आदेश दिया है।

  • एटीएम में पर्याप्त नगदी नहीं रखना अब बैंकों को पड़ेगा भारी…

    एटीएम में पर्याप्त नगदी नहीं रखना अब बैंकों को पड़ेगा भारी…

    केंद्रीय बैंक RBI ने एटीएम मशीन से कैश न निकलने पर बैंकों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है. एटीएम में कैश की उपलब्धता न होने पर आम लोगों की दिक्कतों को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह फैसला किया है।

    एटीएम की सुविधा होने से नगदी को लेकर काफी सहूलियत हो गई है. हालांकि जब एटीएम मशीन से कैश नहीं मिलता है तो बहुत दिक्कत होती है. अब यह समस्या जल्द हल होने वाली है क्योंकि केंद्रीय बैंक RBI ने एटीएम मशीन से कैश न निकलने पर बैंकों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है. एटीएम में कैश की उपलब्धता न होने पर आम लोगों की दिक्कतों को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह फैसला किया है. आरबीआई का यह फैसला 1 अक्टूबर से लागू होगा. आरबीआई के निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर 2021 से अगर किसी बैंक के एटीएम में किसी महीने 10 घंटे भी कैश उपलब्ध नहीं रहता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है. आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि यह फैसला (Scheme of Penalty for non-replenishment of ATMs ) इसलिए लिया गया है ताकि एटीएम के जरिए लोगों को पर्याप्त नगदी सुनिश्चित की जा सके.

    ATM में कैश अवेलिबिटी जानने के लिए बनेगा सिस्टम

    आरबीआई के पास बैंकनोट्स जारी करने का मैंडेट है जबकि बैंक अपने ब्रांचेज और एटीएम के नेटवर्क के जरिए पब्लिक को जरूरत के मुताबिक नोट देकर इस मैंडेट को पूरा करती है. इस संबंध में एक रिव्यू में पाया गया कि एटीएम मशीन में कैश की अनुपलब्धता के चलते आम लोगों को असुविधा होती है. ऐसे में यह फैसला लिया गया है कि बैंक/व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर्स (WLAOs) अपने सिस्टम्स/मैकेनिज्म को मजबूत करेंगे ताकि एटीएम में नगदी की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सके. इस मैकेनिज्म के तहत अगर पता चलता है कि एटीएम में नगदी खत्म हो गई है तो उसे भरा जा सके. RBI के निर्देशों के मुताबिक इसके उल्लंघन पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

    प्रति एटीएम 10 हजार रुपये का लगेगा जुर्माना

    आरबीआई के फैसले के मुताबिक अगर किसी महीने में 10 घंटे से अधिक कैश उपलब्ध नहीं रहता है तो प्रति एटीएम 10 हजार रुपये का फ्लैट जुर्माना लगाया जाएगा. व्हाइट लेबल एटीएम (WLA)के मामले में जुर्माना बैंक लगाएंगे. एटीएम में कैश न होने पर बैंकों पर जो जुर्माना लगेगा, उसकी रिकवरी डब्ल्यूएलए ऑपरेटर से होगी जिस पर एटीएम में कैश उपलब्धता की जिम्मेदारी होगी. जून 2021 के अंत तक देश भर में 2,13,766 एटीएम थे.

  • बिना हाई कोर्ट की इजाजत MP/MLAs के खिलाफ मुकदमे वापस नहीं ले सकेंगी राज्य सरकारें…

    बिना हाई कोर्ट की इजाजत MP/MLAs के खिलाफ मुकदमे वापस नहीं ले सकेंगी राज्य सरकारें…

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने संसदों और विधायकों (MP/MLA) के खिलाफ मुकदमों को लेकर एक अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि बिना हाई कोर्ट की इजाजत के बिना राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं ले सकेंगी।

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने संसदों और विधायकों (MP/MLA) के खिलाफ मुकदमों को लेकर एक अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट की इजाजत के बिना राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं ले सकेंगी.
    दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का स्पेशल कोर्ट में स्पीडी ट्रायल होना चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी हाई कोर्ट के रजिस्टार जनरल अपने चीफ जस्टिस को सांसद और विधायकों के खिलाफ लंबित, निपटारे की जानकारी दें।
    इसके अलावा सीबीआई कोर्ट और अन्य कोर्ट सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई जारी रखें. सांसदों/ विधायकों के खिलाफ आपराधिक ट्रायल के जल्द निपटारे की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल बेंच का गठन करने का फैसला किया है।

    नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे का मामला के मामले में CJI ने ED की स्टेटस रिपोर्ट अखबारों में छपने पर नाराजगी जताई. नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि आज हमने पेपर में रिपोर्ट पढ़ी. सब मीडिया को पहले ही मिल जाता है. CBI की तरफ से SG तुषार मेहता ने कहा कि CBI ने इस मामले में अभी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की हैय कुछ समय चाहिए रिपोर्ट दाखिल करने के किये. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है।

     ED की स्टेटस रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतुष्टि जताते हुए कहा कि ये तो केवल कागज़ का दस्ता है. कोई प्रॉपर फॉर्मेंट में नहीं है. इसमें पूरी जानकारी नहीं दी गई है. SG तुषार मेहता ने कोर्ट से समय मांगा और फॉर्मेंट के हिसाब से स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने की इजाजत देने को कहा है. सीजेआई ने दो हफ्ते का समय दिया है।

  • महिला जिला उपाध्यक्ष से अश्लील बातें और गाली गलौज, प्रदेश कांग्रेस महासचिव के खिलाफ दर्ज हुई FIR…

    महिला जिला उपाध्यक्ष से अश्लील बातें और गाली गलौज, प्रदेश कांग्रेस महासचिव के खिलाफ दर्ज हुई FIR…

    दिल्ली से सटे गौतमबुद्धनगर में कांग्रेस की महिला जिला उपाध्यक्ष ने पार्टी के दो पदाधिकारियों पर अश्लील बातचीत, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है. महिला नेता ने इस मामले में पार्टी के रवि भाटी और प्रदेश महासचिव विदित चौधरी के खिलाफ ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाने में केस दर्ज करवाया है. पुलिस ने आईपीसी की धारा 504, 506 और 509 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की जांच में जुट गई है.

    ग्रेटर नोएडा के कोतवाली बीटा-2 में शिकायत दर्ज कराने पहुंची महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि दादरी के रहने वाले पार्टी पदाधिकारी रवि भाटी ने 24 जनवरी की शाम उन्हें फेसबुक मैसेंजर पर अश्लील सामग्री भेजी थी. इसकी शिकायत उन्होंने जिले के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों से की थी. पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि रवि भाटी को पार्टी से निष्कासित किया जाएगा, लेकिन महीनों बीत गए और कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक रवि भाटी के खिलाफ कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है. इस वजह से उसका हौसला बढ़ता जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि रवि भाटी को प्रदेश महासचिव का संरक्षण हासिल है. प्रदेश महासचिव विदित चौधरी पर भी अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है. इसके अलावा तीन अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा कराया गया है.

  • राजस्व विभाग ने की बड़ी कार्रवाई…. तहसीलदार और पटवारी को किया निलंबित….

    राजस्व विभाग ने की बड़ी कार्रवाई…. तहसीलदार और पटवारी को किया निलंबित….

    शासकीय कार्य में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरतने पर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील के पटवारी कोमल चंद कोसले और प्रभारी नायब तहसीलदार ममता ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील सिमगा के अंतर्गत पटवारी हल्का नंबर 31 आमाकोनी के हल्का पटवारी कोमल चंद कोसले जो पटवारी हल्का नंबर 27 जांगड़ा के अतिरिक्त प्रभार में हैं। 
     
     
    उनके द्वारा एक नामंतरण प्रकरण को निराकृत करने के लिए 8 हजार रूपए की मांग की गई, जिसमें से 5 हजार रूपए प्रभारी तहसीलदार सिमगा ममता ठाकुर को देने के संबंधी एक वीडियो वायरल होने के कारण प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों के विरूद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 

    नायब तहसीलदार ममता ठाकुर को संभागायुक्त रायपुर ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय बलौदाबाजार निर्धारित किया है। इसी तरह से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिमगा द्वारा निलंबन आदेश जारी कर पटवारी कोमल चंद कोसले को निलंबन अवधि में मुख्यालय तहसील कार्यालय सिमगा नियत किया है। निलंबन अवधि में नायब तहसीलदार ममता ठाकुर और पटवारी कोमल चंद कोसले को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते देय होंगे।

  • अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन खरसिया ने धूमधाम से मनाया तीज उत्सव

    अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन खरसिया ने धूमधाम से मनाया तीज उत्सव

    खरसिया। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन शाखा खरसिया ने बड़े ही धूमधाम से तीज उत्सव मनाया गया। समिति की अध्यक्ष राखी अग्रवाल ने बताया कि तीज के कार्यक्रम में कोरोना के दौरान जिन्होंने भी अपनों को खोया है उनको श्रद्धांजलि देने 1 मिनट का मौन धारण किया गया। समिति के सदस्यों के द्वारा डांस कंपीटीशन रखा गया था जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे प्रोग्राम बहुत ही मनोरंजक हो गया। संगीता नूतन का मंच संचालन बहुत ही आकर्षक था। तीज के लिए सभी सदस्यों द्वारा किया गया आकर्षक परिधान, खूबसूरत सिंगार प्रोग्राम में चार चांद लगा रहा था। खानपान का भी पूरा प्रबंध था। सभी सदस्यों को सिंधारा रूपी उपहार भी दिया गया।

  •  इन पंचायत सचिवों के विरुद्ध शुरू हुई सरकारी मुहिम,जारी हुआ ऐसा आदेश ,पढिये पूरी खबर

     इन पंचायत सचिवों के विरुद्ध शुरू हुई सरकारी मुहिम,जारी हुआ ऐसा आदेश ,पढिये पूरी खबर

    कई सालों से एक ही पंचायत में अंगद की पांव की तरह पैर जमाये बैठे पंचायत सचिवों के लिए बुरी खबर है।खबर है कि अब इन्हें दूसरे जगह तबादला करने के आदेश जारी हो गए है।

    उपसंचालक पंचायत के द्वारा जिले भर के जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को शसकीय पत्र जारी कर उनके जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के ऐसे सचिवों की सूची तैयार करने को कहा गया है जो या तो अपने गृह ग्राम में पदस्थ हैं या एक ही पंचायत में 10 वर्षो से जमे है।

    उपसंचालक पंचायत द्वारा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अदिकारियों से 7 दिवस के भीतर सूची तैयार करने को कहा है।पत्र में लिखा गया है कि एक ही पंचायत मे जमे होने के कारण पंचायत सचिव मनमानी करते है और पंचायत का कार्य शुचारु ढंग से नही हो पाता ।