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  • युवा डॉक्टरों से फुटबॉल जैसा व्यवहार न हो, नीट परीक्षा में अंतिम समय में बदलाव पर SC…

    युवा डॉक्टरों से फुटबॉल जैसा व्यवहार न हो, नीट परीक्षा में अंतिम समय में बदलाव पर SC…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को पोस्ट ग्रेजुएट नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (PG NEET-SS) को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन (NBE) और नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) को झिड़कते हुए कहा है कि PG NEET-SS परीक्षा में आखिरी वक्त पर बदलाव न किए जाएं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा- युवा डॉक्टरों को असंवेदशील ब्यूरोक्रेट्स की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता. इसके साथ फुटबॉल की तरह व्यवहार नहीं होना चाहिए।

    बेंच ने गौर किया है कि नया सिलेबस एंट्रेंस टेस्ट के बजाए फाइनल परीक्षा की तरह लग रहा है. दरअसल NEET-SS 2021 की एंट्रेंस परीक्षा में आखिरी वक्त बदलाव पर पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

    परीक्षा से दो महीने पहले कर दिया गया पैटर्न में बदलाव
    इस परीक्षा का नोटिफिकेशन 23 जुलाई को जारी किया गया था. बाद में 31 अगस्त को एक और नोटिफिकेशन जारी कर परीक्षा के पैटर्न में बदलाव की जानकारी दी गई. यानी 13-14 नवंबर को प्रस्तावित परीक्षा से महज दो महीने पहले पैटर्न बदल दिया गया. सरकार, NBE, NMC के वकीलों से कोर्ट ने कहा- कृप्या स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मामले में देखने को कहें. युवा डॉक्टरों के साथ फुटबॉल जैसा व्यवहार मत कीजिए।

    खेल की शुरुआत होने के बाद नियम नहीं बदले जाते’
    ये याचिका 41 पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों की तरफ से दायर की गई थी. इस याचिका में पैटर्न के बदलाव के निर्णय को चैलेंज किया गया था. डॉक्टरों के वकील श्याम दीवान ने कहा कि खेल की शुरुआत होने के बाद नियम नहीं बदले जाते, ये सर्वमान्य नियम है. पुराने पैटर्न को लेकर ही युवा डॉक्टर अब तक तैयारी कर रहे थे।

  • मीना बाजार का हुआ भव्य शुभारंभ

    मीना बाजार का हुआ भव्य शुभारंभ

    खरसिया। 7 अक्टूबर को नवरात्र पर्व के प्रारंभ होने के साथ ही नगर के टाउनहाल मैदान में मीना बाजार का भव्य शुभारंभ किया गया। इस दौरान नगर के गणमान्य नागरिक तथा पत्रकार गण मौजूद थे।
    विदित हो कि विगत दो वर्ष से कोरोना काल मे कोरोना की वजह से बंद रहे बाजारों में रौनक लौटनी शुरू हुई है, और प्रशासन ने भी गाईड़ लाईन का पालन करने की हिदायतों के साथ मीना बाजार तथा नवरात्र पर्व के लिये दुर्गाेत्सव समितियों को अनुमति देकर जनमानस के मन से कोरोना का भय निकालने का प्रयास किया है। विगत दो वर्षो से क्षेत्र की ख्यातिप्राप्त नवरात्र भी फीकी ही रही थी, इस बार नगरवासियों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

    इसी तारतम्य में नवरात्र तथा दशहरा पर्व के दौरान लगने वाला मीना बाजार भी आज से प्रारंभ हो चुका है, मीना बाजार के संचालक उमेश गुप्ता ने बताया कि इस बार बड़े झूलों के साथ ही बच्चों के लिये छ़ोटे झूले भी लगाये गये है, साथ ही विभिन्न प्रकार की दुकानें भी लगायी गयी है। मीना बाजार का शुभारंभ खरसिया प्रेस क्लब तथा चेंबर अध्यक्ष रामनारायण सोनी (संटी) के हाथों किया गया, इस दौरान नगर के पत्रकार गण सहित गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

  • नवगठित सक्ती जिले में 2 उपखंड, 5 तहसीलें शामिल होंगी, बम्हनीडीह तहसील यथावत जांजगीर-चांपा जिले में ही रहेगी…

    नवगठित सक्ती जिले में 2 उपखंड, 5 तहसीलें शामिल होंगी, बम्हनीडीह तहसील यथावत जांजगीर-चांपा जिले में ही रहेगी…

    नवगठित सक्ती ज़िले में 02 उपखंड, 05 तहसील, 04 विकासखंड, 465 ग्राम और 6,45,254 की आबादी होंगी शामिल, जांजगीर चांपा,5 सितंबर, 2021/ नागरिकों और आमजनता की सहुलियत के मद्देनजर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 15 अगस्त 2021 को जांजगीर-चांपा से अलग कर सक्ती को नया जिला बनाने की घोषणा कर क्षेत्र के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी की है।

    सक्ती को नया जिला बनाने से इस क्षेत्र के लोगों के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। आम लोगों को अपने प्रशासनिक और विभागीय कामकाज के लिए अधिक दूरी तय करने से मुक्ति मिलेगी वहीं आने जाने में होने वाले खर्च की बचत होगी।
    जांजगीर चांपा जिला प्रशासन द्वारा नवगठित सक्ती जिले के प्रशासनिक क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक बम्हनीडीह तहसील पूर्ववत जांजगीर-चांपा जिले में ही शामिल रहेगी।
    प्रस्तावित नए जिले सक्ती में उपखंड सक्ती की तहसील सक्ती, मालखरौदा, जैजैपुर और उपखंड डभरा की तहसील डभरा सहित कुल 5 तहसीलें शामिल होंगी।

    सक्ती जिले की सीमाएं –

    नवगठित सक्ती जिले के उत्तर में करतला तहसील (जिला कोरबा), दक्षिण में सारंगढ़ (जिला-रायगढ़), पूर्व में खरसिया (जिला-रायगढ़) और पश्चिम में सारागांव, बम्हनीडीह तहसील (जांजगीर चांपा) होंगी।
    सक्ती जिले में 02 उपखंड (सब डिवीजन) सक्ती और डभरा (नवीन जिला सक्ती में मालखरौदा और जैजैपुर प्रस्तावित उपखंड सम्मिलित है) की 05 तहसीलें क्रमशः – सक्ती, डभरा, जैजैपुर, मालखरोदा और नया बाराद्वार (प्रस्तावित तहसील अड़भार) उप तहसील – चंद्रपुर, हसौद, भोथिया,4 विकासखंड/ जनपद पंचायत क्रमशः सक्ती जैजैपुर, मालखरौदा और डभरा शामिल होंगे।

    18 राजस्व निरीक्षक मंडल,153 पटवारी हल्का और 465 ग्राम – सक्ती जिले में 18 राजस्व निरीक्षक मंडल शामिल होंगे। इनमें जाजंग, सक्ती, पोरथा, नया बाराद्वार, नगरदा, सकर्रा, अड़भार, छपोरा, मालखरौदा, ठठारी, जैजैपुर, बेलादूला, हसौद, देवरघटा, धुरकोट, डभरा, सपोस और चंद्रपुर शामिल हैं।

    जिले में राजस्व प्रकरणों की संख्या 4,833, कुल मकबूजा रकबा- 1,23,094 और गैर मकबूजा रकबा- 28,882 है।
    जिले का कुल राजस्व क्षेत्रफल 1,51,976 वर्ग किलोमीटर है।
    जिले में कुल खातेदार 2,24,256 है। 2011 जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 6,47,254 है। कुल ग्रामों की संख्या 465, आबाद ग्राम 463, विरान ग्राम 02, कुल पटवारी हल्कों की संख्या 153 हैं। सक्ती जिले में 319 ग्राम पंचायतें, 6 नगरीय निकाय शामिल होंगे।जिले में 513 कोटवार और 365 पटेल होंगे।

  • जब हाईकोर्ट में प्रकरण चल रहा तो हम क्यूं करें सुनवाई ?…. जीपी सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी….

    जब हाईकोर्ट में प्रकरण चल रहा तो हम क्यूं करें सुनवाई ?…. जीपी सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी….

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS जीपी सिंह मामले में सुनवाई की है. जीपी सिंह मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि इस पूरे मामले की सुनवाई जब हाईकोर्ट कर रहा है तो फिर हम क्यूं करें? कोर्ट ने जीपी सिंह के तीन अलग-अलग प्रकरणों में दी गई अंतरिम राहत पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।

    सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में ईओडब्ल्यू की ओर से दर्ज किए गए एफआईआर पर राहत देने से इंकार कर दिया है. ऐसे में अब जी पी सिंह पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि, कोर्ट में पूर्व में अंतरिम राहत देते हुए गिरफ़्तारी पर रोक लगाई थी, अब यह रोक हट गई है, ऐसे में गिरफ़्तारी की जा सकती है।

    इधर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पैरवी करते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट से गिरफ़्तारी में मिली राहत की वजह से जी पी सिंह जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. इसी वजह से हाईकोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी थी. रोहतगी ने जी पी सिंह को राहत देने का अंतरिम आदेश वापस लेने की मांग की थी।

    कोर्ट ने जीपी सिंह के तीन अलग-अलग प्रकरणों में दी गई अंतरिम राहत पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में ईओडब्ल्यू की ओर से दर्ज किए गए एफआईआर पर राहत देने से इनकार कर दिया है. ऐसे में अब जीपी सिंह पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक गई है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि, कोर्ट में पूर्व में अंतरिम राहत देते हुए गिरफ़्तारी पर रोक लगाई थी, अब यह रोक हट गई है, ऐसे में गिरफ़्तारी की जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि हाईकोर्ट पांच हफ्ते बाद सुनवाई करेगा और सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, और अब वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले पर जब हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है तो फिर हम क्यों सुनवाई करें।

    इस पर रोहतगी ने कहा कि राज्य सरकार के पक्ष को सुन लें. जीपी सिंह अतिरिक्त एजीडी के पद पर कार्यरत थे, और सरकार के खिलाफ काम कर रहे थे. वह मुस्लिम-हिन्दू को एक-दूसरे के खिलाफ भड़का रहे थे, जिससे सरकार गिर जाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मिले गिरफ्तारी से संरक्षण की वजह से वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. यही वजह थी कि हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी थी. इसके साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट ने जीपी सिंह को राहत देने का अंतरिम आदेश वापस लेने की मांग की।

    जीपी सिंह की ओर से अधिवक्ता फली नारिमन ने कोर्ट को कहा कहा कि उन्हें बिना किसी मीटिंग के सस्पेंड कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि कोई साक्ष्य नहीं है. यह सब प्लांटेड है, और मुख्यमंत्री इसलिए मुझसे खफा हैं, क्योंकि मैंने पूर्व सीएम के खिलाफ कदम उठाने को मना कर दिया था।

  • दिवाली पर लोगों को किया आगाह, कोरोना संक्रमण को लेकर गृह मंत्रालय ने राज्यों को लिखी चिट्ठी….

    दिवाली पर लोगों को किया आगाह, कोरोना संक्रमण को लेकर गृह मंत्रालय ने राज्यों को लिखी चिट्ठी….

    केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के स्थानीय संक्रमण और देश में बीमारी के सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बने रहने के मद्देनजर राष्ट्रव्यापी कोविड-19 नियंत्रण उपायों को मंगलवार को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया. सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखी चिट्ठी में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने चेताया कि आगामी त्योहारों के मौसम में कोविड उपयुक्त व्यवहार का कड़ाई से पालन नहीं किए जाने का अंदेशा है जिससे संक्रमण के मामलों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 मामलों की संख्या में कमी आने के बावजूद दिशा-निर्देशों को लागू करना अहम है ताकि त्योहार को सावधानी, सुरक्षित तरीके से और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ मनाया जा सके. भल्ला ने कहा कि कोविड के दैनिक मामले और मरीजों की कुल संख्या देश में तेजी से कम हो रही है लेकिन चंद राज्यों में स्थानीय तौर पर वायरस का फैलाव हो रहा है और देश में कोविड-19 सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है.

    पत्र में कहा गया है, ” उन कार्यक्रमों में काफी सतर्कता बरती जाए जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे ताकि कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका से बचा जा सके.” उसमें कहा गया है, ” मेलों, त्यौहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर लोगों के जमा होने से देश में कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं.” गृह सचिव ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां हर जिले में संक्रमण दर और अस्पताल व आईसीयू में बिस्तरों की संख्या पर करीब से निगाह रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन जिलों में संक्रमण दर अधिक है, वहां पर संबंधित प्रशासन को अति सक्रिय उपाय करने चाहिए ताकि मामलों में वृद्वि को रोका जा सके और वायरस के फैलाव को काबू किया जा सके.

    भल्ला ने कहा कि यह भी जरूरी है कि मामलों में बढ़ोतरी की आशंका की चेतावनी देने वाले संकेतों को जल्दी पहचाना जाए और प्रसार को काबू करने के उपाय किए जाएं. उन्होंने कहा, ” इसके लिए स्थानीय दृष्टिकोण की जरूरत पड़ेगी जिसका जिक्र स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 21 सितंबर 2021 के परामर्श में है.” गृह सचिव ने कहा कि ‘टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट- वैक्सीनेट’ (जांच, पता लगाना, इलाज करना, टीकाकरण) एवं कोविड उपयुक्त व्यवहार की पांच सूत्री रणनीति पर ध्यान दिया जाए, ताकि त्योहारी मौसम सुरक्षित तरीके से गुजर जाए और मामलों में बढ़ोतरी भी न हो.

    भारत में एक दिन में कोविड-19 के 18,795 नए मामले सामने आने के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3,36,97,581 हो गई. देश में 201 दिन बाद संक्रमण के 20 हजार से कम नए मामले सामने आए हैं. वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या कम होकर 2,92,206 हो गई, जो 192 दिनों बाद सबसे कम है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को सुबह आठ बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 179 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,47,373 हो गई. संक्रमण से मौत के ये मामले 193 दिन में सबसे कम है. इससे पहले 19 मार्च को संक्रमण से मौत के 154 मामले सामने आए थे.

  • महज 25 किलोमीटर की दूरी के लिए CM चन्नी ने इस्तेमाल किया सरकारी हेलिकॉप्टर, CMO ने दी सफाई

    महज 25 किलोमीटर की दूरी के लिए CM चन्नी ने इस्तेमाल किया सरकारी हेलिकॉप्टर, CMO ने दी सफाई

    पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक फैसले के बाद विवाद बढ़ गया है. इस मुद्दे को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय को सफाई देनी पड़ी है. दरअसल, हुआ ये कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को अमित शाह से मिलने के लिए दिल्ली रवाना होना था. दिल्ली रवाना होने के लिए चन्नी को  मोहाली हवाई अड्डा पहुंचना था.  मोहाली हवाई अड्डा पहुंचने के लिए उन्होने सरकारी हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया. जबकि, उनके आवास से मोहाली हवाई अड्डे की दूरी महज 25 किलोमीटर है.

    सीएमओ ने दी सफाई

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि मामला बढ़ने के बाद पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस घटना को लेकर सफाई दी गई. सीएमओ ने बताया कि चार्टर्ड प्लेन पकड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया. सीएमओ की ओर से यह भी कहा गया है कि चूंकि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पास समय कम था, इसलिए वह मोहाली में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए सीएम के आवास के सामने स्थित राजिंदर पार्क से सरकारी हेलिकॉप्टर ले गए. 

    CM के हेलिकॉप्टर में खराबी की फैली अफवाह

    मिली जानकारी के मुताबिक सीएमओ की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने राजिंदर पार्क से उड़ान भरी और मोहाली हवाई अड्डे पर उतरे. बता दें कि यह काफी कम दूरी थी इस कारण हेलिकॉप्टर उतरने के बाद अफवाह भी फैली कि मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर में खराबी आ गई है. हालांकि, सूत्रों ने बताया कि एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीएम चन्नी की ये एक छोटी सी उड़ान थी.

    अमित शाह से करनी थी मुलाकात

    दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के लिए दिल्ली स्थित उनके आवास पहुंचे. सीएम चन्नी चार्टर्ड फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली पहुंचे. इस दौरान उनके साथ पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष कुलजीत सिंह नागरा और कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू भी थे.

    चार्टर्ड विमान को लेकर सीएमओ ने दी जानकारी

    मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों की ओर से जानकारी दी गई कि सीएम को रात 8 बजे अमित शाह से मिलना था और मीटिंग के बाद रात को ही वापस लौटना था. हेलिकॉप्टर रात में नहीं उड़ सकता था इसलिए एक चार्टर्ड प्लेन किराए पर लिया गया. पहले से ही चार्टर्ड विमान किराए पर लिया गया था इस कारण उन्होंने कुलजीत सिंह नागरा और रवनीत सिंह बिट्टू को भी साथ ले गए

  • रिटायर्ड IAS विवेक ढांड और MK राउत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को किया रद्द….

    रिटायर्ड IAS विवेक ढांड और MK राउत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को किया रद्द….

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विवेक ढांड और एम के राउत के द्वारा स्पेशल लीव पिटीशन दायर की गई थी, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायधीशों ने एक आदेश जारी किया है. जिसमें छत्तीसगढ उच्च न्यायालय के द्वारा एक जनहित याचिका में पारित किए गये आदेश को रद्द कर दिया है।

    इस आदेश में माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग विभाग में आरोपित भ्रष्टाचार के सदंर्भ में केंद्र सरकार की जॉच एजेंसी सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर इस मामले की जांच करने के लिए निर्देशित किया था. वरिष्ठ अधिवक्ता परमजीत सिंह पटवालिया और अधिवक्ता अवि सिंह अपीलार्थीगण की ओर से बहस करते हुए तर्क पेश किए कि उपरोक्त आदेश अरक्षणीय है. इसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि इसमें न्यायालय में अफसरों के खिलाफ आदेश जारी करने के पूर्व उन्हें नोटिस जारी नहीं किया था।

    उन्होंने कहा कि उसी विभाग के असंतुष्ट कर्मचारियों ने यह जनहित याचिका लगाकर न्यायालय के क्षेत्राधिकारिता का दुरूपयोग किया है. वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह तर्क पेश किया कि उच्च न्यायालय बिना किसी जांच के आरोपित कई हजार करोड़ रूपये के फंड के दुरूपयोग के निष्कर्ष पर पहुंच गई, जो कि जनहित याचिकाकर्ताओं के महज कपोलकल्पित आंकड़ों पर आधारित है. छत्तीसगढ़ शासन की ओर से वष्ठि अधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा महाधिवक्ता और मुकुल रोहतगी ने तर्क पेश किए।

    तर्कों को सुनने बाद सर्वोच्च न्यायालय ने यह मानते हुए कि माननीय उच्च न्यायालय के द्धारा आदेश जारी करने की प्रकिया का त्रुटिपूर्ण थी, अमान्य कर दिया. मामले को सर्वोच्च न्यायालय को रिमांड बैक करते हुए सभी पक्षों को सुनते हुए विधिसम्मत तरीके से मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया है. वहीं इस दौरान सीबीआई को भी किसी भी तरह की विपरीत कार्रवाई करने से रोकने का आदेश दिया है।

  • महिला इंस्पेक्टर ने एस पी पर लगाया गंभीर आरोप, तंग आकर गृह विभाग से की वीआरएस की मांग…

    महिला इंस्पेक्टर ने एस पी पर लगाया गंभीर आरोप, तंग आकर गृह विभाग से की वीआरएस की मांग…

    पटना। सीनियर इंस्पेक्टर अजय सिंह के बाद अब बिहार पुलिस के स्पेशल ब्रांच के एसपी (ए) दीपक वर्णवाल के खिलाफ महिला इंस्पेक्टर सामने आई हैं. ये मामला और भी गंभीर है. महिला इंस्पेक्टर अंशु कुमारी ने एसपी पर विभागीय कार्रवाई के दौरान मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. महिला इंस्पेक्टर एसपी के व्यवहार से इतनी परेशान हो गई हैं कि उन्होंने रिटायरमेंट से नौ साल पहले ही विभाग को वोलंटरी रिटायरमेंट के लिए पत्र लिखा है और जल्द से उन्हें वीआरएस दे देने की मांग की है.

    दरअसल, महिला इंस्पेक्टर पर साल 2012 के एक मामले में विभागीय कार्रवाई चल रही है. इस कार्रवाई के संचालन प्रभारी एसपी (ए) दीपक वर्णवाल हैं. अंशु का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान एसपी (ए) काफी परेशान करते हैं. साथ ही असंसदीय भाषा का भी प्रयोग करते हैं. उनके इस व्यवहार से उनसे साथ ही उनका पूरा परिवार परेशान और दुखी है। बड़े डॉक्टर की बीवी हैं अंशु अंशु ने कहा, ” दीपक वर्णवाल बड़े अधिकारी हैं और महिलाकर्मी होकर मैं उनसे लड़ नहीं सकती. साथ बेईज़्ज़त और जलील होकर काम भी नहीं कर सकती. ऐसे में मैंने चुपचाप वीआरएस लेने का फैसला लिया और इस बाबत 26 जुलाई, 2021 को ही बेगूसराय के एसपी को एक पत्र लिखा. पत्र की कॉपी डीजीपी, आईजी हेडक्वार्टर और बेगूसराय के डीआईजी को भेज दी गई थी. लेकिन फिर शुक्रवार को सीनियर इंस्पेक्टर अजय सिंह का मामला सामने आया, जिसके बाद मुझमें हिम्मत मिली और मैंने सारी बातें सबके सामने रख दीं.” बता दे कि अंशु पटना के एक बड़े डॉक्टर की बीवी हैं. पहले वो पुलिस विशेष शाखा में ही पदस्थापित थी. बीते दिनों उनका तबादला बेगूसराय हुआ था. इधर, इस पूरे मामले को बिहार पुलिस एसोसिएशन ने गंभीरता से लिया है. इस संबंध में एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह ने कहा, ” पुलिस निरीक्षक अंशु कुमारी ने फ़ोन पर उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में जानकारी दी. यह घटना काफी ही गंभीर है. एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर के साथ इस तरह का अभद्र व्यवहार करना, जिससे मजबूरन उसे वीआरएस के लिए आवेदन देना पड़े, काफ़ी गंभीर और पहला मामला है. इस गम्भीर मुद्दों को बिहार पुलिस एसोसिएशन का शिष्टमंडल पुलिस मुख्यालय और सरकार में रखेगा.”

  • डेथ सर्टिफिकेट में कोविड मौत जरूरी नही, कोरोना से मरने वाले के परिजनों को 30 दिनों के भीतर मिलेगी अनुग्रह राशि – SC

    डेथ सर्टिफिकेट में कोविड मौत जरूरी नही, कोरोना से मरने वाले के परिजनों को 30 दिनों के भीतर मिलेगी अनुग्रह राशि – SC

    सुप्रीम कोर्ट में कोविड से मौत (Covid Death) पर मुआवजे को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमआर शाह (Justice MR Shah) और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना (Justice AS Bopanna) की पीठ ने कहा कि मृतक के परिजन को न्यूनतम 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

    पीठ ने कहा कि राज्य या केंद्र सरकार अलग से भी मुआवजे (compensation) की राशि बढ़ा सकती हैं। यह राशि आधार लिंक होगी और डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर प्रोसेस से मृतक के परिजनों को राशि मिलेगी। लाभार्थियों की सूची प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित करनी होगी।

    कोरोना के चलते आत्महत्या करने वालों के परिवारों को मिलेगा लाभ

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कोरोना होने के चलते आत्महत्या करने वालों के परिवार को भी मदद मिलेगी। यह राशि राज्य सरकार अपने आपदा प्रबंधन कोश (disaster management fund) से देंगी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आवेदन करने के 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि उपलब्ध करानी होगी।

    डेथ सर्टिफिकेट में कोविड मौत जरूरी नही

    एक अहम व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई सरकार इस आधार पर मुआवजा (compensation) देने से मना नहीं कर सकती कि डेथ सर्टिफिकेट में कोविड को मौत (Covid death) की वजह  नही बताया गया है। अगर सर्टिफिकेट पहले ही जारी किया जा चुका है और परिवार के किसी सदस्य को आपत्ति है तो वह संबंधित अवॉरिटी में अपील कर सकते हैं।

    कैसे मिलेगा मुआवजा राशि

    केंद्र की ओर से पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अनुवाह राशि के लिए कोविड डेथ (Covid death) सर्टिफिकेट पेश करना होगा। राज्य सरकारें एसडीआरएफ से यह पैसे देगी और डिस्ट्रक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथोरिटी (disaster management authority) पैसे का वितरण करेगी। इसके लिए जो भी दावेदार होगा वह संबंधित अथॉरिटी के सामने जरूरी दस्तावेज और डेथ सर्टिफिकेट (death certificate) पेश करेगा और दस्तावेज पेश होने के बाद उसे वेरिफाई किया जाएगा और 30 दिनों के भीतर उसे अनुग्रह राशि दी जाएगी।

  • शिविर लगाकर बिजली बिल संबंधी समस्याओं का किया गया निराकरण….

    शिविर लगाकर बिजली बिल संबंधी समस्याओं का किया गया निराकरण….


    रायगढ़। “घर में एक टीवी, पंखा व 4 एलईडी बल्ब, भेज दिया 50 हजार का बिल” के संबंध में समाचार पत्र में खबरे प्रकाशित हुई थी। जिसके संबंध में कार्यपालन यंत्री छ.ग. स्टे.पॉ.डिस्ट्री.कं.लिमि.रायगढ़ श्री गुंजन शर्मा ने बताया कि रायगढ़ के कोड़ातराई उपसंभाग के दो ग्राम मिड़मिड़ा एवं लंहगापाली में कुछ उपभोक्ताओं को एकमुश्त खपत के विद्युत देयक जारी होने की शिकायत में आने पर इसकी सूक्ष्म जांच करायी गई। जिसमें मेसर्स-इन्फो-सॉफ्ट डाटा सर्विसेस प्रा.लिमिटेड द्वारा ग्राम मिड़मिड़ा के 17 घरेलू प्रकाश-पंखे उपभोक्ता एवं ग्राम लंहगापाली के 2 घरेलू प्रकाश-पंखे उपभोक्ताओं को एकमुश्त वाचन/खपत के आधार पर माह जुलाई 2021 का देयक भेजा गया। विगत कुछ माहों में उपभोक्ताओं को उनके परिसर में दिए गए स्पॉट बिल में अंकित वर्तमान वाचन तथा कंपनी द्वारा संचालित सॉफ्टवेयर-मिडिलवेयर में अंकित वाचन में अंतर पाया गया है। जिसकी पुष्टि हेतु प्राथमिक तौर पर कोड़तराई उपसंभाग के ग्राम-मिड़मिड़ा एवं ग्राम-औरदा के उपभोक्ताओं के विद्युत देयक की जांच की गई।
    जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट हो रहा है कि मेसर्स इन्फो-सॉफ्ट डाटा सर्विसेस लिमिटेड द्वारा स्पॉट पर दिए जा रहे विद्युत देयक एवंं उनके सॉफ्टवेयर-मिडिलवेयर में अंकित वाचन में बड़ा अंतर पाया गया। जिसके परिणाम स्वरूप ही उपभोक्ताओं को एकमुश्त खपत का विद्युत देयक जारी हुआ है। कार्यपालन यंत्री श्री शर्मा ने बताया कि इस संबंध में कंपनी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस जारी करने के 24 घंटे के अंदर उत्तर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में कंपनी के विरूद्ध कार्यवाही करने पुलिस को पत्र लिखा गया है। उन्होंने आगे बताया कि उपभोक्ताओं के समस्याओं का निराकरण की दृष्टि से ग्राम-मिड़मिड़ा में 22 सितम्बर 2021 को शिविर आयोजित कर सभी उपभोक्ताओं की समस्याओं का निराकरण कर दिया गया है। इसके साथ ही ग्राम-मिड़मिड़ा के कुछ उपभोक्ताओं के परिसर की जांच की गई। जांच में घरों में उपभोक्ता के द्वारा भोजन पकाने हेतु हीटर का उपयोग किया जाना पाया गया। जिसके कारण उनके खपत में वृद्धि हुई। चूंकि उपभोक्ता बीपीएल श्रेणी के अंतर्गत आते है जिससे वर्ष भर में 1200 यूनिट से अधिक खपत करने के पश्चात कंपनी नियमानुसार उपभोक्ताओं की श्रेणी बीपीएल से घरेलू में स्वत: ही परिवर्तित हो गई। उक्त बात की जानकारी उपभोक्ताओं को दी गई। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनके विद्युत देयक का स्लैब में बिलिंग कर बिल की राशि में कमी की गई तथा उपभोक्ताओं को भुगतान हेतु किश्ती की भी सुविधा प्रदान की गई।