जांजगीर चाम्पा जिले के..डेडीकेट कोविड हॉस्पिटल (ECTC) और अन्य कोविड हॉस्पिटलों में संपर्क नम्बर…
ईसीटीसी से संपर्क करने के लिए सिविल सर्जन डॉ ए.के. जगत संपर्क नंबर 7389548695 और ईसीटीसी के प्रभारी डॉ आलोक मंगलम का मोबाइल नंबर- 9399732022 से संपर्क किया जा सकता है।
इसी प्रकार आकांक्षा कोविड केयर सेंटर के प्रभारी डॉ रामेश्वर पंकज – 9009953770, 8770862277, 8109151416
दिव्यांग कोविड केयर सेंटर प्रभारी डाँ संत राम सिदार 81205 90657
जेठा सक्ती कोविड केयर सेंटर प्रभारी अधिकारी डॉ शशांक शर्मा – 9584839498 और बीएमओ डॉ अनिल चौधरी 9993840693,
धौराभाठा डभरा कोविड केयर सेंटर बीएमओ डॉ एन पी मिश्रा 9329409691,
पिहरीद मालखरौदा कोविड केयर सेंटर प्रभारी अधिकारी बीएमओ डॉ रविंद्र सिदार 798718 1017,
महुदा बलौदा कोविड केयर सेंटर प्रभारी अधिकारी डॉ रामायण सिंह 9300327782, 8120493727, बीपीएम श्री पार्थ प्रताप सिंह 9826677226,
एमएमआर कॉलेज चांपा कोविड केयर सेंटर प्रभारी अधिकारी डॉ मनीष श्रीवास्तव 7869413400.
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कोविड19 से लड़ने जिला प्रशासन ने कोविड मरीजों के लिए जारी किए हेल्प नंबर…
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आओ प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाये, एक नहीं अधिक से अधिक पेड़ लगाये – अमित साहू
खरसिया। गौरव दुनिया डॉट कॉम के प्रधान संपादक अमित साहू ने कहा कि कोरोना आपदा के अवसर पर हमें इस ओर भी गौर करने की आवश्यकता है की ये स्थिति क्यो आईं ओर कैसे आई …?अमित साहू कहते है कि मानव अपनी विकास की ओर बढता जा रहा है पर वह प्रकृति की निरंतर अनदेखी कर रहा है ! हम प्रकृति से जितना दूर जाते रहेंगे, प्रकृति भी हमें उतना ही दूर करती रहेगी ! कही प्राकृतिक आपदा का सही कारण कही प्रकृति के साथ खिलवाड़ तो नही …???
सभी मनुष्यों का अपने आप को सर्वोपरि समझना , प्रकृति के बनाए नियमो का दिन प्रतिदिन उलंघन करना …अनेको पर्यावरण विभागों , मौसम विभागों , समाचार पत्रो, न्यूज़ एजेन्सिज द्वारा हमें सदैव निरंतर सतर्क किया जा रहा है की ….
धरातल में प्रकृति का सन्तुलन निरन्तर बिगड़ता जा रहा है, निरन्तर ग्लोबल वार्मिंग ,जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण , थल प्रदूषण , निरन्तर छायादार वृक्षों का कटना , कल कारखानों से निकलने वाले धुएं, निरन्तर कभी ना नाश होने वाले प्लास्टिक पॉलीथिन को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना, खुले में शौच, मानवों में आपसी भाईचारे की भावना की समाप्ति, मानवों में मानवता नैतिकता एक मात्र दिखावा ही रह जाना चारो तरफ छल कपट का बोल बाला होना ….
बड़े बड़े वैज्ञानिक बता बता कर थक गये की प्रकृति के साथ खिलवाड मत करो। हम नही मान रहे तो कही ऐसा तो नही की प्रकृति ये बताने का प्रयास कर रही हो की हम अपने लिऐ नही तो कम से कम अपने आने वाले पीढ़ी के लिये प्रकृति को संरक्षित और सुरक्षित करके चले ….
प्रकृति के अधीन हम हैं प्रकृति हमारे अधीन नही…
आओ प्रकृति के साथ सामंजस्य बेठाये…और आने वाले कल को बेहतर बनाए, आपका एक एक प्रयास, आने वाले कल का सुंदर भविष्य है।
आओ एक नहीं अधिक से अधिक पेड़ लगाये…। -

लॉकडाउन का पालन कराने मुस्तैदी से जुटी खरसिया पुलिस, बेवजह घूम रहे लोगों पर हुई कार्यवाही…
सुनील अग्रवाल खरसिया। लॉकडाउन में बेवजह घूम रही लापरवाह लोगों पर खरसिया पुलिस कार्यवाही कर रही है। पेट्रोलिंग पार्टी के द्वारा लगातार लोगों से घरों में रहकर लॉक डाउन का पालन करनी की अपील की जा रही है वहीं आज शाम रायगढ़ चौंक पर बेवजह घूमने निकल लोगों को पुलिस ने फटकार लगाई और उनका चालान भी काटा।
खरसिया थाना प्रभारी सुम्मत राम साहू ने बताया कि पुलिस कप्तान के निर्देशानुसार ऐसे लापरवाह लोगों के विरुद्ध अपराध भी पंजीबद्ध किया जा रहा है, लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे पांच लोगों के विरुद्ध खरसिया थाना में एफआईआर भी दर्ज किया गया है।
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बालोद और मुंगेली में आरटीपीसीआर टेस्टिंग लैब की मंजूरी,भूपेश ने कलेक्टरों को रेमडेसिविर और जीवन रक्षक दवाईयां खरीदने की दी अनुमति….
मुख्यमंत्री ने समीक्षा करते हुए कहा कि हमें बिना थके, बिना रूके कोरोना से लड़ाई जीतना है। सबके सहयोग और टीम भावना के साथ व्यवस्थित रूप से काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को जल्द से जल्द उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञों के माध्यम से आवश्यक दवाईयों का किट तैयार करे और मितानिनों के माध्यम से इस किट के वितरण करने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टरों ने अपने स्तर पर बेहतर व्यवस्था की है। इसमें सतत निगरानी रखी जाए और कोरोना पर शीघ्रता से नियंत्रण के लिए जिलों में पॉजिटिविटी रेट 5 प्रतिशत से नीचे लाने का हर संभव प्रयास हो। उन्होंने कहा कि कलेक्टर यह भी ध्यान रखें कि लॉकडाउन के दौरान आम जनता को कोई परेशानी न हो तथा अनावश्यक रूप से आवाजाही करने वालों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप जरूरतमंदों को मनरेगा के माध्यम से रोजगार भी उपलब्ध कराया जाए।श्री बघेल ने कलेक्टरों से कहा कि बाहर से आने वाले लोगों की रेल्वे स्टेशनों, बस स्टैण्डों तथा अंतर्राज्यीय सीमाओं के खासकर एंट्री प्वाइंट पर ही कड़ाई से टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति टेस्टिंग से न छूटे। बाहर से आने वाले लोगों का टेस्टिंग के उपरांत रिपोर्ट के आधार पर क्वॉरंटाईन सेंटर और आइसोलेशन केन्द्र में अलग-अलग रखने की व्यवस्था की जाए। आइसोलेशन वालों की निगरानी भी की जाए। इसके लिए उन्होंने हर ग्राम पंचायतों में क्वॉरंटाईन सेंटर तथा आइसोलेशन सेंटर की व्यवस्था के लिए आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड संक्रमित मरीजों के घरों में पोस्टर की जगह स्टेंसिल पेंट कर सूचना प्रदर्शित की जाए। उन्होंने कहा कि घरों में लगाए जाने वाले पोस्टर अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। घर में प्रदर्शित की जाने वाली सूचना का संदेश सकारात्मक हो एवं प्रेरणादायी नारों से युक्त हो। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग संदेश का प्रारूप डिजाईन कर उपलब्ध कराए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी जिलों में ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड, वेंटिलेटर वाले बेड की उपलब्धता, ऑक्सीजन की सप्लाई चैन, ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता और रोटेशन, मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता और उनकी भर्ती की प्रगति, रेमडेसिविर और अन्य आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा सीएसआर मद, औद्योगिक क्षेत्र और सामाजिक संगठनों के सहयोग से किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की।बैठक में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि होम आइसोलेशन वाले मरीजों का फालोअप किया जा रहा है। कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ, सीईओ और संभव हो तो जनप्रतिनिधि प्रतिदिन 10-10 मरीजों से टेलीफोन पर संपर्क कर उनकी स्थिति की जानकारी लेकर उनके उपचार में सहायता करे।
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BJP नेता ने किया स्टिंग, रायपुर के निजी अस्पताल में कोरोना इलाज के नाम पर लूट…
रायपुर। कोरोना के इलाज के नाम पर निजी अस्पताल की खुले आम लूट सामने आई है. इस लूट का स्टिंग बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास ने किया है. इसमें रायपुर का एक निजी अस्पताल कोरोना मरीज को भर्ती करने से पहले 3.50 लाख रुपए के पैकेज की डिमांड कर रही है।
इतना ही नहीं कोरोना मरीज के वैंटीलेटर या आईसीयू पर जाते ही 5 लाख रुपए का पैकेज. इसमें भी ये अस्पताल पैसे चैक में लेने को तैयार नहीं है. जिस अस्पताल का स्टिंग हुआ उसका नाम लक्ष्मी केयर सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल है और ये राजधानी रायपुर के भाठागांव में है. इस संबंध में अस्पताल का पक्ष लेने कई बार फोन किया गया लेकिन फोन का कोई भी जवाब नहीं मिला. फोन अस्पताल के अंतिम पांच अंक 48469 नंबर पर किया गया था।स्टिंग को अपने सोशल मीडिया अकाउंट में शेयर करते हुए श्रीवास ने लिखा है कि
‘जिंदगी का सौदा कैसे बेशर्मी के साथ हो रहा है इस दृश्य को देखने मुझे खुद उस अस्पताल जाना पडा जहा कल एक गरीब बच्ची अपने अन्तिम सांसे गिन रहे पिता को लेकर गयी थी जिसे कम पैसे होने के कारण भगा दिया गया था. दलालों ने हर इलाज का ऐसा रेट तय कर रखा है मानो आप शादी या हनीमून के पैकेज तय करने आये हो. काउंटर में मरीज भर्ती की बात करने के बाद रेट पूछने पर नर्स दीदी ने कोंटे में ले जाकर सारा रेट का तिक्डम समझाया और हम भी बिल्कुल चैक फाडने को तैयार हुए. फ़िर शुरु हुआ अंडर ग्राउंड सौदे का खेल जहां डॉक्टर मोहतरमा ने और रेट बढाकर सब पैसा नकद में लेना स्वीकारा टैक्स में लूट अलग और अट्टहास करते हुए सीधा गला काटने की प्रतिस्पर्धा. थोडा भी गैरत है तो सरकार स्पेशल सेल का गठन कर ऐसे अस्पतालों में कार्यवाही करने का साहस दिखाये और इन सफेद कोर्ट वालों को जिन्हे देश में भगवान का दर्जा देते है ऐसे धनलोभियो को जेल भेजे. जय छत्तीसगढ़ महतारी हम सबकी रक्षा करना. मामला लक्ष्मी केयर भाटागांव रायपुर का.’
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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर एक्शन, मरीजों को लगे रेमडेसिविर इंजेक्शन की होगी जांच, क्या वाकई जरूरत थी या फिर….
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर एक्शन मोड में नजर आ रहा है. हेल्थ विभाग का दावा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का जमकर दुरुपयोग हुआ है. खामियाजा इंजेक्शन की क़िल्लत हुई. यह हालांकि स्वास्थ्य विभाग किल्लत बहुत जल्द दूर करने की बात कही है. साथ ही जो इंजेक्शन आज तक मरीजों को लगी है, उनका रिकॉर्ड टीम बनाकर खंगाला जाएगा.
रिकॉर्ड खंगालने उतरेगी 10 टीम
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल ने कहा कि रेमडेशिविर इंजेक्शन का दुरुपयोग हुआ है. आज इंजेक्शन की मांग को लेकर साथ में पर्ची लेकर पहुंचे लोगों से बातचीत की. पर्ची में इंजेक्शन लिखने वाले डॉक्टरों से भी बात की हूं. डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन लेबल 95 % से ज्यादा है. ऐसी स्थिति में रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग नहीं करना चाहिए.लेटर हेड में रेमडेसिविर का प्रिस्क्रिप्शन
राजधानी में कम से कम 10 जांच टीम गठित कर जांच के लिए भेजा जाएगा. तमाम हॉस्पिटल के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे. डॉक्टर ने किन परिस्थितियों में मरीज के लिए इंजेक्शन लिखा है. डॉक्टर के लेटर हेड में रेमडेसिविर का प्रिस्क्रिप्शन आ रहा है. डॉक्टर मना कर रहे हैं कि उसने नहीं लिखा है तो आख़िर ये कौन कर रहा है.
दुरुपयोग पाए जाने पर ये होगी कार्रवाई
रिकॉर्ड खंगालने के दौरान हास्पिटल में या डॉक्टरो या अन्य स्टाफ़ की गलती पाए जाने पर उन पर कार्रवाई तो की जाएगी साथ ही कुछ हॉस्पिटल की मान्यता भी ख़त्म किया जाएगाक्रिटिकल स्थिति में इंजेक्शन का प्रयोग
जिला चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि रेमडेशिविर इंजेक्शन का प्रयोग उन मरीज़ों पर करना चाहिए, जिनके फेफड़े में ज़्यादा संक्रमण है. ऑक्सीजन देने के बाद भी सांस लेने में दिक़्क़त हो रही है. ऐसी स्थिति में इंजेक्शन का प्रयोग करें।कई सवालों को लेकर जांच करेगी टीम-
- राजधानी में मरीज़ों को लगे रेमडेसिविर इंजेक्शन की होगी जांच
- जिन मरीज़ों को लगी है इंजेक्शन क्या उन्हें थी जरूरत
- क्या डॉक्टरों की अनुमति के बाद लगाई गई इंजेक्शन
- कोविड अस्पतालों की जांच के दस अलग अलग अलग टीम होगी गठित
- जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर ज़िम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
- घर बैठे प्रायवेट हॉस्पिटलों में जाकर लगवाए जा रहे इंजेक्शन
- दुरुपयोग को रोकने के लिए एक्शन मूड में स्वास्थ्य विभाग
- रेमडेसिविर की दुरुपयोग से पैदा हुई कमी
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कोरोना संक्रमण की रोकथाम व बचाव के लिए बना जिला स्तरीय कंट्रोल रूम….
कोरोना से संबंधित किसी भी जानकारी व सहायता मिलेगी कंट्रोल रूम से
संक्रमण अभी टला नहीं, और सतर्क रहने की जरूरत : सीएमएचओ डॉ. केसरी
जिले में संक्रमण की चेन को रोकने ले लिए 27 अप्रैल से लॉकडाउन लगाया गया है|
इसी कड़ी में अब कलेक्टर भीम सिंह व सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी के निर्देश पर जिला स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। कंट्रोल रूम कोविड के रोगियों की चिकित्सीय सहायता प्रदान करेगा| कंट्रोल रूम के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर टी के टोंडर को सौंपी गई है।
कंट्रोल रूम में तीन पालियों में 2-2 डॉक्टर्स किसी भी प्रकार की आकस्मिक स्थिति से निबटने के लिए तैयार रहते हैं। इसके अलावा कंट्रोल रूम में 25 लोगों का अलग से स्टाफ है जो ट्रेसिंग, फॉलोअप, काउंसिलिंग जैसी प्रक्रियाओं को अंजाम देता है। चार काउंसलर होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की सतत मॉनिटरिंग करते हैं। प्रत्येक 10 मरीज के पीछे 1 डॉक्टर की डयूटी लगाई है। इसके अलावा को-मॉर्बिट मरीजों के लिए जिसा स्तरीय विशेष टीम गठित की गई है जो सिर्फ उनके लिए है।
डॉक्टर टोंडर ने बताया “कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम व उससे लोगों को बचाने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में बनाया गया है। कोविड संक्रमण होने से लोगों की अचानक तबीतय खराब होती है तो वह कंट्रोल रूप में दिए दूरभाष नंबर- सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक की पाली के फोन नंबर 76479-21193 व 76479-21146, दोपहर 2 बजे से रात्रि 8 बजे तक 76479-21172 व 76479-21147 और रात्रि 8 से सुबह 8 बजे तक 76479-21175 व 76479-21184 हैं। लोग 76479-21154 और 76479-21157 पर अपना कंसेट और आवेदन पत्र वाट्स अप कभी भी कर सकते हैं।जानकारी मिलने के उपरांत संबंधित को तुरंत चिकित्सीय सुविधा एवं इलाज उपलब्ध कराया जाएगा । इतना ही नहीं बाहर से आ रहे लोगों की जानकारी भी इस नंबर पर दी जा सकती है। इस कोरोना काल में लोग अपना विशेष ध्यान रखें। यदि उन्हें कोविड-19 से संबंधित किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो वह तुरंत नजदीकी सीएचसी या अस्पताल में अपना कोविड टेस्ट कराएं। यदि उन्हें स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या भी होती या वह कोरोना संक्रमण से संबंधित कोई महत्वपूर्ण सूचना देना चाहता है तो वह नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर पर संपर्क कर सकता है। कंट्रोल रूम 24 घंटे चालू रहेगा।“
सावधानी ही बचाव
कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉक्टर योगेश पटेल ने बताया, “ इस बार कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है। इसलिए इस समय सिर्फ सावधानी ही बचाव है। लोगों से यही अपील है कि दो गज दूरी मास्क है जरूरी नियम का पालन अनिवार्य रूप से करें इसमें कोई भी लापरवाही न बरतें। इस बार खतरा पहले से बढ़कर है। इसलिए लोगों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोरोना अनुरूप व्यवहारों को अपनाना ही चाहिए। इसके अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं है”।
सभी लोगों को करना होगा प्रयास : सीएमएचओ डॉ. केसरी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसएन केसरी ने बताया,“कोरोना के लक्षण दिखने पर लोग तुरंत इसकी जांच कराएं। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, सतर्कता और सुरक्षा ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है। जिन लोगो को टीका लग चुका है उनको भी लापरवाही नहीं बरतनी है, टीका सिर्फ आपकी इम्युनिटी बढ़ाएगा। इसलिए हमें टीकाकरण के बाद भी मास्क लगाना है, दो गज की दूरी का पालन और हाथों को भी नियमित रूप से साबुन या सैनिटाइजर से साफ करते रहना है। इस समय हम एक तीव्र संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं ऐसे में कोरोना वायरस से बचने का पूरा प्रयास समाज के सभी वर्ग को करना है।“
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मरने के बाद शव के लिए भी संवेदनशीलता नही बची, स्ट्रेचर पर निकली मानवता की अर्थी, जिसने भी देखा स्तब्ध रह गया…
रायपुर। देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। इस दौरान मौत जिस तरह का तांडव कर रही है और इसकी भयावह तस्वीर श्मशान से लेकर कब्रिस्तान तक पसरी हुई है। दूसरी तरफ इस तरह के दुख भरे दृश्य के बारे में शायद ही किसी ने कभी सोचा होगा। जो इन दिनों देखने को मिल रहे हैं। इसे बेबसी कहेंगे या बदकिस्मती कि मरने के बाद शव के लिए भी संवेदनशीलता नहीं बची है।
जानिए पूरा मामला…
मामला रायपुर के अंबेडकर अस्पताल का है। जहां नर्मदा बहाहुद नाम की महिला कुछ दिनों से कोविड-19 आईसोलेशन वॉर्ड में अपना इलाज करवा रही थी। इसी बीच कुछ दिनों बाद जब उनका एंटीजन टेस्ट किया गया तो रिपोर्ट निगेटिव आई। ऐसे मे घरवालों ने rt pcr टेस्ट भी करवा लिया। जिसकी रिपोर्ट अब तक आई नहीं थी कि उधर नर्मदा की मौत हो गई।
ऐसे में अस्पताल और परिजनों के बीच तनातनी हो गई। परिजन कहने लगे कि रिपोर्ट तो नेगेटिव थी। ऐसे में परिजन मृतिका के शव को ले जाना चाहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन यही कहता रहा कि पेशेंट की मौत का सही कारण जब तक नहीं पता चलता, वे लाश को अपनी ही कस्टडी में रखेंगे।
काफी देर तक परिजन शव ले जाने के लिए परेशान होते रहे। लेकिन जब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा। वह अस्पताल के स्ट्रेचर पर ही शव को लिटा कर सड़क पर निकल पड़े। अंबेडकर अस्पताल से शास्त्री चौक तक इसी तरह से शव को लेकर जाया जाता रहा।
घटना से सभी हुए आहत
इस असामाजिक घटना को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। आखिरकार शास्त्री चौक पर एक कार की मदद से अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाया गया। इसके बाद घर वालों ने स्ट्रेचर वहीं पर छोड़ दिया। ऐसे में जब अस्पताल वालों को अपने स्ट्रेचर की याद आई तो उन्होंने एंबुलेंस भेजकर उसे वापस मंगा लिया।
गौरतलब है कि इंतजार संवेदनहीनता की भयावह तस्वीर लगातार देखने को मिल रही है। पॉज़िटिव नेगेटिव के आपसी मतभेद में मानवता की अर्थी स्ट्रेचर पर निकाली गयी। -

एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ रेमडेसिविर ही नहीं, 10 रुपए का ये इंजेक्शन भी है कोरोना में कारगर…
बढ़ते कोरोना मरीजों और बेड की मारामारी के बीच सुकून की खबर है. कोरोना की दूसरी लहर के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग काफी बढ़ी है. बाजार में इसकी कमी है. संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल इंस्टीटयूट (एसजीपीजीआइ) के डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए रेमडेसिविर के विकल्प के रूप में ‘डेक्सामेथासोन’ इंजेक्शन के प्रयोग का सुझाव दिया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इसका इंजेक्शन 10 रुपए, जबकि गोली महज दो रुपए में उपलब्ध है. डॉक्टरों ने डेक्सामेथासोन को कोरोना मरीजों के उपचार में उपयोगी बताया है. एसपीजीआई के आइसीयू एक्सपर्ट प्रोफेसर संदीप साहू का कहना है कि रेमडेसिविर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मान्यता नहीं दी है. डॉक्टर इस इंजेक्शन की सलाह देकर परेशानी नहीं बढ़ाएं. उन्होंने बताया कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में हाल ही प्रकाशित शोध में सामने आया है कि डेक्सामेथासोन सांस संबंधी बीमारियों के उपचार में कारगर है।रिपोर्ट के मुताबिक दो हजार से अधिक ऐसे कोरोना रोगी, जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से कम था. डेक्सामेथासोन इन्हें दिया गया तो 28 दिन बाद ऐसे लोगों की मृत्यु दर काफी कम थी. इन्हें वेंटिलेटर की जरुरत भी नहीं पड़ी।
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सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमतों की घोषणा की, सरकारी अस्पतालों में 400 और प्राइवेट में 600 रुपए की एक डोज मिलेगी….
दिल्ली। भारत सरकार के निर्देशों के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमतों की घोषणा कर दी है. राज्य सरकारों के लिए कोविशील्ड वैक्सीन की प्रति डोज की कीमत 400 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों के लिए प्रति डोज की कीमत 600 रुपये होगी. संक्रमण से बचने के लिए कोविशील्ड की दो डोज ली जारी है. पहली और दूसरी डोज के बीच 4 से 6 हफ्ते का अंतर होता है।