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  • छत्तीसगढ़ के कई जिलों के एसपी की तबादला सूची तैयार हुई….

    छत्तीसगढ़ के कई जिलों के एसपी की तबादला सूची तैयार हुई….

    रायपुर। आईएएस अधिकारियों के तबादले के बाद अब आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों की मानें तो लिस्ट तैयार हो चुकी है और जल्द ही तबादला सूची जारी होने की संभावना है।
    छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी समय बड़े पैमाने पर आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर सकती है।सूची बनकर तैयार है।

    पुलिस महकमे के जानकारों के अनुसार कोरबा,राजनांदगांव,सूरजपुर,अम्बिकापुर, बिलासपुर,रेल्वे,महासमुंद,नारायणपुर,धमतरी,गरियाबंद,बलौदाबाजार, बस्तर,गौरेला पेंड्रा मरवाही,जशपुर,कोरिया,बालोद,दन्तेवाड़ा,रायगढ़ व जांजगीर चांपा के पुलिस अधीक्षक बदले जा रहे हैं।तबादला सूची को स्वीकृति मिल चुकी है। लूप लाईन व बटालियन में पदस्थ अनेक अधिकारियों को इस बार महत्व दिया गया है।वहीं इस बार भी 1-2 जिला में पुलिस अधीक्षक की कमान महिला अधिकारियों के हाथ में होगी।

  • मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई ढाई-ढाई साल का फार्मूला नहीं…बात बेतुकी, ऐसा कोई करार नहीं हुआ : पीएल पुनिया

    मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई ढाई-ढाई साल का फार्मूला नहीं…बात बेतुकी, ऐसा कोई करार नहीं हुआ : पीएल पुनिया

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री के फॉर्मूला फिर जोर पकडऩे लगा है ऐसा महसूस हो रहा है। हालांकि वरिष्ठ नेता और मंत्री रविंद्र चौबे ने एक बयान में कहा है कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई ढाई-ढाई साल का फार्मूला नहीं है। चूँकि जब छत्तीसगढ़ में 67 विधायक कांग्रेस के चुन कर आए थे तब मुख्यमंत्री पद के लिए काफी मशक्क़तो का दौर चला था जग जाहिर है। एक समय यह भी हो गया था कि ताम्रध्वज साहू को मुख्यमंत्री बना दिया जाय। उस समय एक अनार सौ बीमार वाली बात हो रही थी। भूपेश बघेल, टी एस सिंहदेव, डाक्टर चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू चारो मुख्यमंत्री की कुर्सी दौड़ में शामिल थे। वैसे कांग्रेस की परंपरा रही है कि अधिकतर प्रदेशों में जो कांग्रेस अध्यक्ष रहे हो उसी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाता है और सरकार अगर बनी तो मुख्यमंत्री का दावेदार कांग्रेस अध्यक्ष ही सर्वोपरि होता है हालांकि सब जगह यह फार्मूला लागू भी नहीं किया गया है। लेकिन छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में ऐसे देखा जाये तो भूपेश बघेल का पलड़ा भारी दिख रहा था। लेकिन चुनाव के समय की परिस्थिति में टीएस सिंहदेव को भी कम आंकना भी ठीक नहीं था वित्तीय प्रबंधन में टी एस बाबा का कोई सानी नहीं है। बहरहाल मुख्यमंत्री बनने के वक्त काफी रस्साकशी भी देखने को मिली थी और अंत में यह भी प्रचारित की गई औ उड़ती हुई खबर भी सत्ता के गलियारे से छनकर आयी थी कि छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर सहमति बनी है। बहरहाल ढाई-ढाई साल या पुरे पांच साल ये तो कांग्रेस आलाकमान को तय करना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ढाई साल 17 जून को हो रहा है लेकिन जुबानी जंग अभी से चालू हो गई है। हालांकि इस मामले में कोई तल्खियां दोनों तरफ से नहीं आ रही है। नपी तुली शब्दों का ही प्रयोग अभी हो रहा है। हालांकि इन सारी अटकलबाजियों पर प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बयान दिया की ढाई-ढाई साल का कोई फार्मूला छत्तीसगढ़ में नहीं है। इस प्रकार उन्होंने सारी कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने यह भी कह कि इस प्रकार की कोई न तो चर्चा है और न ही ऐसा कुछ होने वाला है। कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ में पूरे पांच साल भूपेश बघेल के नेतृत्व में पूरा करेगी। पूर्व में कुछ समय पहले स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बयान के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा बयान दिया था कि अगर आलाकमान का आदेश होगा, तो वे तुरंत इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। सीएम ने यह भी कहा था कि उन्हें पद का मोह नहीं है। ढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर जब हवा उडी थी तब बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि, किसी का कार्यकाल तय नहीं होता, हाईकमान फैसला लेता है। उन्होंने एक समारोह में पत्रकारों से कहा था कि, राजनीति में कुछ स्थायी नहीं। वैसे देखा गया है कि कांग्रेस में आला कमान समय और परिस्थिति के अनुसार तात्कालिक निर्णय लेती है। कांग्रेस पार्टी की कुछ राज्यों में सरकार है जिसमे पंजाब और राजस्थान पहले ही मुख्यमंत्री को बदलने हेतु विरोधीगुट भारी दबाव बनाये हुए है। आलाकमान ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लेगा जिससे किसी भी मुख्यमंत्री को बदलने के बाद अन्य प्रदेशो में भी उसका असर दिखे। आलाकमान अपने सबसे निकट कैप्टन अमरिंदर सिंह को खोना नहीं चाहता एवं अपने पारिवारिक मित्र अशोक गहलोत को कार्यमुक्त होने देना नहीं चाहता। इसी कारण राजनितिक पंडितो का यह अनुमान है कि कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव तक किसी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री को बदलने के पक्ष में नहीं है । दिल्ली के राजनितिक गलियारों की बातो को सच मानो तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी किसी कीमत पर मुख्यमंत्रियों को नहीं बदलने की मंशा राहुल और प्रियंका के सामने जाहिर कर चुकी हैं।

  • सब इंस्पेक्टर ने की आत्महत्या, अपने घर में लगाया फांसी…

    सब इंस्पेक्टर ने की आत्महत्या, अपने घर में लगाया फांसी…

    धमतरी। जिले के अजाक थाने में पदस्थ एक सब इंस्पेक्टर ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला रुद्री इलाके का बताया जा रहा है। आत्महत्या के कारणों का तत्काल खुलासा नहीं हो पाया है हालांकि कई लोग इसका वजह डिप्रेशन बता रहे हैं।

    अजाक थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर टिम्बक राव के बारे में बताया जा रहा है कि हादसे के समय उनकी पत्नी मंदिर गई हुई थी जब वह लौटकर आई उसने अपने पति का शव फांसी के फंदे में झूलता पाया। इसके बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। फिलहाल शव का पोस्टमॉर्टेम किया जा रहा है।

    बताया जाता है कि 56 वर्षीय टिम्बक राव जिले के अजाक थाने में पदस्थ थे। बताया जाता है कि उनका बेटा जो पोलिवे में ही था, साल 2015 में उसकी मौत हो गयी थी, इसके बाद से ही वो लगातार बीमार रहने लगे और शनिवार को उन्होंने अपनी जीवनलीला खत्म कर ली।

  • जिला खाद्य अधिकारी हुए निलंबित, इस मामले में हुई कार्रवाई….

    जिला खाद्य अधिकारी हुए निलंबित, इस मामले में हुई कार्रवाई….

    जशपुर जिले के जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंह कंवर को राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के विषेध सचिव मनोज कुमार सोनी द्वारा जारी किए गए निलंबन आदेश में खाद्य अधिकारी की कार्यप्रणाली को लापरवाह बताया गया है।

    आदेश पत्र में लिखा गया है कि घनश्याम सिंह कंवर के विरुद्ध बार बार शिकायते आ रही थी।कांसाबेल के पीडीएस दूकान में लापरवाही की शिकायत पर इनके द्वारा किसी तरह की कोई कार्रवाई नही की गई इसके अलावे इस तरह की कई शिकायतें मिलती रही और उन्हें समझाईश भी दी गयी लेकिन बार बार गलतियों दोहराए जाने के कारण हितग्रहीयो को योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा था।

  • डीएमएफ कमेटी से प्रभारी मंत्री आउट! अब कलेक्टर होंगे अध्यक्ष और सांसद…

    डीएमएफ कमेटी से प्रभारी मंत्री आउट! अब कलेक्टर होंगे अध्यक्ष और सांसद…

    रायपुर। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के खनिज बहुल जिलों में गठित जिला खनिज न्यास संस्थान यानी डीएमएफ की समिति को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब डीएमएफ समिति से प्रदेश सरकार के सभी प्रभारी मंत्री बाहर हो जाएंगे।
    जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि डीएमएफ की समिति में अब जिला कलेक्टर ही अध्यक्ष होंगे। क्षेत्र से सांसद समिति के सदस्य होंगे। ऐसे में साफ है कि केंद्र के इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ में डीएमएफ के मामले में प्रभारी मंत्री और विधायक बाहर हो जाएंगे। इसी आदेश में ये भी कहा गया है कि लोकसभा सदस्य संंबंधित जिले की कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

    केंद्र सरकार के खनिज मंत्रालय ने ये आदेश जारी किया है कि डीएमएफ कमेटी में अब चेयरमैन यानी अध्यक्ष के पद पर जिला कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर, जिला दंडाधिकारी ही होंगे। इनके अलावा कोई भी व्यक्ति इस कमेटी का अध्यक्ष नहीं हो सकता। ।
    बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद डीएमएफ के मामले में नियम में बदलाव किया गया था। राज्य सरकार की बनाई व्यवस्था के मुताबिक राज्य में जिलों की खनिज न्यास संस्थान यानी कमेटी में जिले के प्रभारी मंत्री अध्यक्ष हैं, जबकि कलेक्टर के पास सचिव की जिम्मेदारी थी।

    भूपेश सरकार ने राज्य की कमेटियों में विधायकों को सदस्य के रूप में शामिल किया था। दरअसल कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए भी ये सवाल उठाती रही है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को अधिकार से वंचित कर कलेक्टरों को अधिकार दिए गए हैं। उस समय ये व्यवस्था पिछली राज्य सरकार ने बनाई थी।

    गौरतलब है की डीएमएफ फंड से राज्य के खनन प्रभावित जिलों को खनन के अनुपात में राशि मिलती है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य को यह राशि 6 हजार 470 करोड़ रुपए मिलेगी। इस राशि से राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्र में इलाज, शिक्षा व अन्य आवश्यक कार्यों पर राशि खर्च करती है।

    इस मामले में रायगढ़ सांसद गोमती साय ने चर्चा के दौरान बताया कि इसके लिए सदन में वकायदे प्रस्ताव लाया गया था इसके बाद केंद्र की ओर से राज्य सरकार को आदेश जारी किए गए हैं।उन्होंने बताया कि पूर्व में कलेक्टर ही डीएमएफ के अध्यक्ष और सांसद ,जिला पंचायत अध्यक्ष इसके सदस्य हुआ करते थे लेकिन प्रदेश में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद क्लेक्टर को डीएमएफ का सचिव और प्रभारी मंत्री को अध्यक्ष बना दिया गया था ।

    हांलाकि इस मामले में जब जशपुर क्लेक्टर महादेव कावरे से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि-” मेरे पास कोई कॉपी नहीं आई है । राज्य सरकार के माध्यम से कोई निर्देश भी नहीं मिला है।”

    सूत्रों की मानें तो इस मामले में केंद्र का आदेश आने के बाद अब राज्य सरकार इस पूरे मामले को लेकर नया नियम बनाएगी। इस संबंध में विचार विमर्श किया जा रहा है।

  • “आपके पास वैक्सीन नहीं तो घोषणाएं क्यों करते हैं”, हाई कोर्ट ने लगाई केंद्र को फटकार…

    “आपके पास वैक्सीन नहीं तो घोषणाएं क्यों करते हैं”, हाई कोर्ट ने लगाई केंद्र को फटकार…

    दिल्ली। ब्लैक फंगस और वैक्सीनेशन के मामले पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की कड़ी फटकार लगाई. दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिपणी करते हुए केंद्र से पूछा सवाल कि अगर आपके पास वैक्सीन नहीं है तो घोषणाएं क्यो करते हैं. हाई कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह नीति तैयार करे कि दवाइयों की कमी के समय किसे प्रतिकमिकता दी जाएगी? हाई कोर्ट ने युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए कहा है. ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले और इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं पर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर किया है, जिस पर कोर्ट भड़क गया. कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट को अस्पष्ट और सरकार को नॉन कमिटल कहा।

    दरअसल, सेंट्रल गवर्मेंट ब्लैक फंगस पर दायर स्टेटस रिपोर्ट के आंकड़ों पर फंस गई और हाई कोर्ट ने सवाल खड़ा कर दिया. स्टेटस रिपोर्ट में दवाइयों का प्रोजेक्टेड आंकड़ा 2 लाख 30 हज़ार बताया गया था? इस पर कोर्ट ने सीधे सवाल करते हुए कहा कि कितनी दवाइयां किसे दी गई यानी मिलीं. ये जानकारी कहां से मिली गई? कोर्ट की यह जानने में बिल्कुल रुचि नहीं है कि ये दवाइयां कहा से खरीदी गईं।

    कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वो नीति तैयार करे कि दवाइयों की कमी के समय किसे प्रतिकमिकता दी जाएगी? यही नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने वैक्सीन की कमी पर केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वैक्सीन की कमी है तो घोषणाएं क्यों की जाती हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि अगर वैक्सीन की कमी है तो प्राथमिकता तय की जाए. पहले 60 प्लस को वैक्सीन देने के बारे में क्यों फैसला लिया गया. कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने कितने युवाओं को खो दिया है और आप ऐसे लोगों को बचाने में लगे हुए हैं जो अपनी जीवन जी चुके हैं।

    कोर्ट ने ये भी स्पस्ट किया है कि वो यह नहीं कह रहा कि सीनियर सिटीजन को वैक्सीन मत दीजिए लेकिन अगर वैक्सीन कम है तो आप प्राथमिकता तय करिए. कोर्ट ने केंद्र की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आप पीएम को एसपीजी सुरक्षा इसलिये देते है क्योंकि उन्हें उसकी जरूरत है. आज देश को युवाओं की जरूरत है, इसलिए युवाओ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आज उनके जानकारी में आया है कि अनाथ बच्चों के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं लेकिन, आखिरकार इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी. बच्चो को उनके अभिभावकों से जो स्नेह मिल सकता है, वो और कहीं से नहीं मिल सकता।

  • WhatsApp पर 3 रेड टिक’ वाले मैसेज की क्या है पूरी सच्चाई, क्या सरकार पढ़ रही है आपके मैसेज?

    WhatsApp पर 3 रेड टिक’ वाले मैसेज की क्या है पूरी सच्चाई, क्या सरकार पढ़ रही है आपके मैसेज?

    व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैसेज फारवर्ड किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि नए आईटी नियम लागू होने के बाद सभी के व्हाट्सएप मैसेज व कॉल रिकॉर्ड किए जाएंगे। साथ ही उनकी सोशल मीडिया की एक्टीविटी पर नजर रखी जाएगी।

    इस मैसेज में दावा किया गया गया है कि इंस्टैंट मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने नए नियम लागू कर दिये हैं। इसमें दो ब्लू टिक- एक रेड टिक और तीन रेड का अर्थ समझाया है। ब्लू टिक व एक रेड टिक का मतलब है कि सरकार कार्रवाई कर सकती है, जबकि तीन रेड टिक का मतलब है कि कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आप इस तरह के मैसेज से घबराएं, उससे पहले बता देते हैं कि ये दावे फर्जी हैं।

    बताते चलें कि इस तरह का मैसेज बीते साल भी वायरल हुआ था। इस नए व फर्जी मैसेज में कहा कि कोई यूजर्स सरकार के खिलाफ या किसी धार्मिक मुद्दे पर नकारात्मक संदेश शेयर करता है, तो उसको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    व्हाट्सएप ने अभी तक नए आईटी नियम को लागू नहीं किया है। न ही नए निययों में तीन रेड टिक और ब्लूट टिक जैसा कोई नियम है। अभी तक व्हाट्सएप में सिर्फ दो टिक नजर आते हैं, जिनका मतलब भी आपको बता देते हैं। व्हाट्सएप पर सेंड किए गए मैसेज पर एक टिक बनता है, जिसका मतलब है कि मैसेज सेंड हो गया, जबकि दो टिक का मतलब कि मैसेज डिलिवर हो गया और दो ब्लू टिक का मतलब कि प्राप्तकर्ता ने मैसेज को पढ़ लिया है।

    क्या व्हाट्सएप के मैसेज कोई पढ़ सकता है?

    WhatsApp में end-to-end encrypted फीचर है, जिसकी वजह से सेंडर्स और रिसीवर ही मैसेज को एक्सेस कर सकते हैं और इसे बीच में डिकोड नहीं किया जा सकता है। आपकी चैट्स, फोटो, वीडियो, वॉयस मैसेज, डॉक्यूमेंट, स्टेट्स अपडेट और कॉल को व्हाट्सएप भी एक्सेस नहीं कर सकता है।

    नए आईटी नियमों की घोषणा 25 फरवरी की गई थी और इन्हें 26 मई से प्रभाव में आना था। लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों ने इसे लागू नहीं किया गया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर किसी पोस्ट के लिए शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

  • छत्तीसगढ़ में जरूरी कागजात की होगी होम डिलीवरी….

    छत्तीसगढ़ में जरूरी कागजात की होगी होम डिलीवरी….

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल परिवहन विभाग द्वारा ‘तुंहर सरकार तुंहर द्वार अब पहुंचही जरूरी कागजात आपके द्वार’ नाम से शुरू की जा रही नई सुविधा का एक जून को दोपहर 12 बजे अपने निवास कार्यालय से वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। इस नई सुविधा के माध्यम से परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशवासियों को समस्त प्रकार के स्मार्ट कार्ड आधारित ड्रायविंग लायसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र से संबंधित 22 परिवहन सेवाएं स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदकों एवं वाहन स्वामियों के घर के पते पर पहुंचाया जाएगा। आवेदकों को सेवाएं प्राप्त करने के लिए www.parivahan.gov.in पर आवेदन करना होगा।
    कार्यक्रम का लाइव प्रसारण https://m.facebook.com/ChhattisgarhCMO/ पर किया जाएगा।परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा शुरू की जा रही इस नई सुविधा में लाइसेंस की 10 और वाहन से सबंधित 12 सेवाएं घर पहुंचाकर दी जाएगी। नये वाहनों का पंजीयन, पुराने वाहनों का आरसीसी में संशोधन, नवीन ड्रायविंग लायसेंस व पुराने लायसेंस में कराए जाने वाले परिवर्तन के बाद ड्रायविंग लायसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) सीधे पंजीकृत पते भारतीय डाक के स्पीड पोस्ट के माध्यम से अधिकतम 7 दिवसों में उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इन्हें विभाग द्वारा डिस्पेच करते हुए आवेदकों के दिए गए पते में स्पीड पोस्ट के ट्रेकिंग आईडी सहित एसएमएस भी भेजा जाएगा, जिससे आवेदकों को वस्तु-स्थिति की जानकारी मिल सके। यदि आवेदक घर में उपलब्ध नहीं रहता है तो भी आवेदक को एसएमएस के माध्यम से डिलीवरी के लिए सूचित किया जाएगा।
    मंत्री अकबर ने बताया कि वाहन से संबंधित आवेदकों से प्राप्त होने वाले प्रकरण जैसे मोटरयानों का नवीन पंजीयन, स्वामित्व अंतरण, मोटरयान का अल्ट्रेशन, पंजीकृत कार्ड में पता परिवर्तन, मोटरयान में परिवर्तन, फायनेंसन के फ्रेश आरसी, हॉइपोथिकेशन जोड़ना-जारी रखना-रद्द करना, पंजीकृत कार्ड की द्वितीय प्रति, पंजीयन क्रमांक पुनः समानुदेशन, पंजीयन का नवीनीकरण का परिवहन कार्यालय के द्वारा दस्तावेजों का आवश्यक परीक्षण एवं मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वाहनों का आवश्यक निरीक्षण करने के पश्चात पंजीयन अधिकारी के द्वारा अनुमोदन किया जाएगा।

    इस नयी व्यवस्था से सुगम संचालन के लिए परिवहन विभाग द्वारा हेल्पलाइन नम्बर 75808-08030 जारी किया जा रहा है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से आवेदक परिवहन कार्यालयों को अनुमोदन उपरांत स्मार्ट कार्ड आधारित ड्रायविंग लायसेंस एवं रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र प्रेषण के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • IAS रणबीर शर्मा थप्पड़कांड: कमिश्नर ने पीड़ित लड़कों का लिया बयान, सरकार को जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    IAS रणबीर शर्मा थप्पड़कांड: कमिश्नर ने पीड़ित लड़कों का लिया बयान, सरकार को जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    सूरजपुर। कलेक्टर रहते रणबीर शर्मा ने 22 मई को लड़कों की पिटाई की थी. घटना के बाद उनका तबादला कर दिया गया. लेकिन मामला अभी शांत नहीं हुआ है. सरगुजा कमिश्नर जिनेविवा किंडो ने आज पीड़त लड़कों से पूछताछ कर उनका बयान लिया है. हालांकि कमिश्नर ने मीडिया से दूरी बनाए रखा है और कुछ भी कहने से बच रही हैं।

    दरअसल मामले की जांच के लिए सरगुजा कमिश्नर जिनेविवा किंडो सूरजपुर सर्किट हाउस पहुंची थी. पूर्व कलेक्टर रणवीर शर्मा द्वारा 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को डंडे से पिटाई करने और एक युवक को थप्पड़ मारकर मोबाइल तोड़ने के मामले की जांच की. दोनों पीड़ित लड़कों से करीब आधे घंटे तक पूछताछ करने के बाद बयान लिया गया. इस मामले की जांच रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी।

    पीड़ित युवक अमन मित्तल ने कहा कि आज टीम आईं है, उनके दौरा हमें बुलाया गया था. हमने अपनी पूरी बात उन्हें बता दी है. उन्होंने हमारी पूरी बातों को ध्यान से सुना हमारे साथ जो भी हुआ था. हमने अच्छे से कमिश्नर को बता दिया है।

    नाबालिग पीड़ित ने कहा कि 6 लोगों की टीम आई थी. मेरे साथ जो घटना घटी, उस पूरे बयान को टाइप किया गया है. मुझसे साइन भी कराया गया. करीब आधे घंटे तक मुझसे बात की गई. उस दिन के पूरे घटना को अच्छे से बताया गया. उस दिन मैं दवा लेने जा रहा था, तभी यह घटना हुआ था।

    बता दें कि सूरजपुर जिले में लॉकडाउन के बीच 22 मई को पूर्व कलेक्टर रणबीर शर्मा खुद सड़कों पर उतरे थे. इस दौरान उन्होंने एक लड़के को थप्पड़ जड़ दिया. उसका फोन भी तोड़ दिया. उसके बाद पुलिस के जवानों से भी उसे डंडे पड़वाए थे. कलेक्टर ने खुद जवानों को मारने के निर्देश दिए।

    इसके अलावा एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़का जो दवा लेने जा रहा था, उसकी भी पिटाई की गई. नाबालिग ने पूर्व कलेक्टर रणबीर शर्मा पर ही मारपीट करने का आरोप लगाया है. इस मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में की गई है. थप्पड़कांड के बाद उन्हें रणबीर शर्मा को कलेक्टर के पद से हटाकर मंत्रालय में सयुंक्त सचिव के रूप में पदस्थ कर दिया गया है।

    इस दोनों मामले की जांच के लिए ही सरगुजा कमिश्नर जिनेविवा किंडो सूरजपुर पहुंची थी. कमिश्रर ने दोनों पीड़ितों का बयान लिया है. अब कमिश्नर जांच रिपोर्ट तैयार राज्य सरकार को सौपेंगी. अब देखना यह होगा कि पूर्व कलेक्टर रणबीर शर्मा पर क्या कुछ कार्रवाई होती है?

  • SP ने की कार्रवाई, बीएमओ और तहसीलदार के साथ मिलकर डॉक्टर से की थी लाखों की उगाही…

    SP ने की कार्रवाई, बीएमओ और तहसीलदार के साथ मिलकर डॉक्टर से की थी लाखों की उगाही…

    रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ एसपी ने वसूली मामले में उप निरीक्षक (SI) कमल किशोर पटेल को निलंबित कर दिया है. सारंगढ़ थाना इलाके में वारे क्लीनिक से तहसीलदार और बीएमओ के साथ मिलकर एसआई ने लाखों रुपए की वसूली की थी. शिकायत के बाद जांच सही पाए जाने पर एसपी ने यह कार्रवाई की है.

    डॉक्टर से की अवैध वसूली

    जानकारी के मुताबिक वारे क्लीनिक के डॉ. खगेश्वर प्रसाद ने सारंगढ़ तहसीलदार, बीएमओ और सारंगढ़ थाने में पदस्थ उप निरीक्षक कमल किशोर पटेल के खिलाफ एसपी संतोष कुमार से शिकायत की गई थी. जिसमें कहा गया कि इस तीनों ने मिलकर जबरन डराया धमकाया, फिर लाखों रुपए वसूल लिए।

    एसपी ने उप निरीक्षक को किया निलंबित
    पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने शिकायत के बाद उप निरीक्षक कमल किशोर पटेल को लाइन अटैच कर दिया. उसके बाद मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक (IUCAW) से कराई गई. जांच अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. जांच रिपोर्ट में मामला सही पाए जाने पर उप निरीक्षक पटेल कमल किशोर पटेल को निलंबित कर दिया गया।

    जांच में सही मिली शिकायत

    पुलिस की जांच में पाया गया कि उप निरीक्षक कमल किशोर पटेल हिर्री ग्राम के वारे क्लीनिक में बीएमओ और तहसीलदार के साथ दबिश देने पहुंचा था. लेकिन थाने में इस संबंध में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं किया गया. गवाहों के कथन और अन्य सम्पूर्ण जांच में पैसों का लेनदेन संदिग्ध मिला. SI का यह कृत्य दायित्वों के विपरीत पाया गया।

    तहसीलदार, बीएमओ के खिलाफ भी चल रही जांच 

    निलंबन अवधि के दौरान उप निरीक्षक कमल किशोर पटेल का मुख्यालय रक्षित केंद्र रायगढ़ रहेगा. उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. वहीं सारंगढ़ तहसीलदार, बीएमओ के खिलाफ भी जांच चल रही है।