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  • तीन नगर पंचायतों में सीएमओ नहीं, मातहतों को बनाया प्रभारी…

    तीन नगर पंचायतों में सीएमओ नहीं, मातहतों को बनाया प्रभारी…

    रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बड़े शहर तो बढ़े, लेकिन छोटे कस्बे भी तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते गए हैं। शहरी निकायों की संख्या भी बढ़ती गई। लेकिन सरकार इन संस्थाओं को हमेशा दोयम दर्जे का ही मानती आई। यही कारण है कि आधे से अधिक नगर पंचायतों में मातहतों को सीएमओ जैसा पद दिया। रायगढ़ ऐसे तीन नगर पंचायत हैं। शहरी निकायों के नाम पर केवल प्रदेश में केवल नगर निगमों को ही गिना जाता है। बाकी को सरकार बैसाखी का सहारा देकर चला रही है। प्रदेश में कुल 194 नगरीय निकाय हैं। इनमें कुल 14 नगर निगम, 59 नगर पालिका और 121 नगर पंचायत हैं।

    इनमें से 82 में मातहत कर्मचारियों को सीएमओ का प्रभार दिया गया है। 17 नगर पालिका परिषद और 65 नगर पंचायत ऐसे हैं जहां सहायक ग्रेड-2 को भी सीएमओ बनाया गया है। विवादों में रहने वाली पोस्टिंग पर सरकार भी कोई सख्त फैसला नहीं कर पा रही है। कई बार तो ऐसा हो गया है कि जिस निकाय में भ्रष्टाचार के कारण अधिकारी निलंबित हुआ था, कुछ समय बाद उसकी पोस्टिंग वहीं हो गई। वर्तमान में रायगढ़ जिले के नपं किरोड़ीमल नगर में देवेंद्र सिंह सीएमओ हैं जो सहायक राजस्व निरीक्षक हैं।

    इसी तरह नपं धरमजयगढ़ में प्रभाकर शुक्ला को सीएमओ बनाया गया है जो राजस्व उप निरीक्षक हैं। इन निकायों में विकास कार्यों को लेकर विवाद और भ्रष्टाचार इसीलिए होता है क्योंकि काम पर इनका नियंत्रण ही नहीं होता। इस तरह की पदस्थापना के पीछे तगड़ी लॉबिंग होती है।

  • स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन! अतिरिक्त वसूली के आरोप में मित्तल कैंसर अस्पताल 3 महीने के लिए सस्पेंड…

    स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन! अतिरिक्त वसूली के आरोप में मित्तल कैंसर अस्पताल 3 महीने के लिए सस्पेंड…

    स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत योजना के तहत नामांकित मरीजों से अतिरिक्त नकद राशि वसूलने के मामले में कांपा (लोधीपारा) स्थित ‘मित्तल कैंसर अस्पताल’ पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने अस्पताल को योजना से तीन महीने के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस अवधि में अस्पताल में योजना के तहत किसी भी नए मरीज का कैशलेस इलाज नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन को मरीज से वसूले गए 90 हजार रुपए लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।

    Ayushman Bharat News: योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन

    स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मरीज अल्बर्ट एक्का के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मित्तल अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूले हैं। संयुक्त संचालक (जेडी) स्वास्थ्य की जांच में शिकायत सही पाई गई। अस्पताल ने परिजनों से दवाइयों के लिए 15226 रुपए और सर्जरी के नाम पर 90000 रुपए एक्स्ट्रा लिए थे। परिजनों के विरोध दर्ज कराने पर अस्पताल ने दवाइयों की रकम तो चेक के जरिए लौटा दी थी, लेकिन सर्जरी के पैसे यह कहकर नहीं लौटाए कि आयुष्मान का पैकेज कम है। अधिकारियों ने इसे योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना।

    नए मरीज भर्ती करने पर होगी कार्रवाई

    स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि अवधि के दौरान यदि अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत नया मरीज भर्ती किया तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अस्पताल परिसर में लगी योजना से संबंधित सभी प्रचार-प्रसार सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में भर्ती मरीजों को पूरा इलाज देकर ही डिस्चार्ज करने को कहा गया है।

  • ‘CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों पर एक्शन नहीं होगा, नाबालिग रिहा होंगे,’ सुप्रीम कोर्ट का आदेश…

    ‘CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों पर एक्शन नहीं होगा, नाबालिग रिहा होंगे,’ सुप्रीम कोर्ट का आदेश…

    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चले आंदोलन में शामिल होने वाले प्रोटेस्टर्स को बड़ी राहत मिली है. मंगलवार, 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि वे डिटेन या गिरफ्तार किए गए 18 साल के कम उम्र के बच्चों को रिहा करें. इसके अलावा, बिना क्रिमिनल हिस्ट्री वाले प्रोटेस्टर्स को भी छोड़ने का हुक्म दिया गया है. अंतरिम राहत के तौर पर सर्वोच्च अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर और कई दूसरे राज्यों में CJP प्रोटेस्ट में शामिल स्टूडेंट्स के खिलाफ दर्ज किसी भी FIR के मामले में कोई जबरदस्ती की कार्रवाई ना की जाए.

    भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों पर सुरक्षाबलों की कथित ज्यादती के मामलों को सुना. CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले प्रोटेस्टर्स को कोर्ट के आदेश से राहत नहीं मिलेगी.

    केंद्र और राज्यों को नोटिससुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच हाई-पावर्ड कमेटी से कराने का संकेत दिया. शीर्ष अदालत ने केंद्र और महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सरकारों को भी नोटिस जारी किए. जांच के दौरान सुरक्षाबलों पर हमलों के आरोपों को भी जांचा जाएगा.

    पुलिस पर सख्त टिप्पणीसुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि आंदोलनों के समय पुलिस को नए प्रोटोकॉल की जरूरत है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. बेंच ने कहा,

    “पूरी तरह से इंडिपेंडेंट जांच होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है तो जांच का कोई मतलब नहीं है.”

    सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में हो रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़े सभी CCTV, ड्रोन, बॉडी-कैमरा, वायरलेस कम्युनिकेशन और PCR रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. प्रोटेस्ट करने वालों का पर्सनल डेटा पब्लिश करने पर रोक लगा दी है.

    सुरक्षाबलों पर गंभीर आरोपCJP प्रोटेस्ट के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई. दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रोटेस्टर्स पर लाठियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े. सुरक्षाबलों पर प्रोटेस्टर्स के खिलाफ जरूरत से ज्यादा फोर्स इस्तेमाल करने का आरोप लगा. इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं.

  • ‘मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी..’, बीजेपी सांसद की बेटी प्रधान के खिलाफ पोस्‍ट? मच गया बवाल…

    ‘मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी..’, बीजेपी सांसद की बेटी प्रधान के खिलाफ पोस्‍ट? मच गया बवाल…

    नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर देशभर में पिछले 40 दिनों से प्रदर्शन जारी थी. छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद छात्र खुशी से झूम उठे. प्रधान के इस्तीफे का लोगों ने अपने तरीके से जश्न मनाया. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर स्‍टोरी लगाई तो कई लोगों ने पोस्‍ट किए. इन्हीं सब में बीजेपी के नेता की बेटी की एक पोस्ट जमकर वायरल हो रही है, जिसमें वह प्रधान के इस्तीफे पर अपनी खुशी जाहिर कर रही है.

    ओडिशा के भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर की पोस्ट इस समय हर जगह वायरल है . उनकी इस पोस्ट पर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं, इसके साथ ही तारीफ भी कर रहे हैं कि भले ही बीजेपी सांसद की बेटी है. इसके बाद भी उसने पोस्‍ट की हे. हालांकि उनकी इस पोस्ट ने बीजेपी में खलबली मचा दी है. पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उनका पोस्ट सुर्खियों में बना हुआ है.

    अर्चना ने क्या किया था पोस्ट
    आर्चिता ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर को तिरंगा झंडा लगाकर शेयर की थी. जिसमें उन्होंने लिखा, ‘Dharmendra Pradhan resigns amid massive student protests over NEET leak fiasco.’.

    आर्चिता की यह पोस्ट जैसे ही सामने आई. शुरुआत में लगा कि आईडी हैक हो चुकी है. हालांकि इसके बाद आर्चिता की एक और पोस्ट आई जिसने साफ कर द‍िया कि यह उन्‍होंने ही की है. नीट पेपर लीक विवाद के बीच प्रधान के इस्तीफे को लेकर की गई इस टिप्पणी पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की है जताई. कई लोग यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि पार्टी परिवार के समान होती है, परिवार के लिए इस तरह के शब्दों का यूज नहीं करना चाहिए. हालांकि बाद में उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिएक्टिवेट हो गया.

    नहीं करूंगी पोस्ट डिलीट-आर्चिता
    आर्चिता की सोशल मीड‍िया पोस्‍ट जैसे ही सामने आई तरह-तरह के बयान सामने आने लगे. इसके साथ ही परिवार यानी की मां अपराजिता सारंगी ने भी पोस्ट हटाने को कहा. लेकिन आर्च‍िता ने ऐसा करने से साफ इनकार कर द‍िया. उन्‍होंने यह भी लिखा कि उनके ऊपर पोस्ट डिलीट करने का बहुत दबाव है लेकिन वो ऐसा नहीं करेगी. हालांकि अब अर्चिता का अकाउंट डीएक्टिवेट हो गया है.

    प्रधान के समर्थन में उतरी अपराजिता सारंगी
    विवाद बढ़ने के बाद शनिवार रात को अपराजिता सारंगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में बयान दिया. उन्होंने लिखा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना बेहद साहस का काम है. वह इस कठिन समय में धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी हैं. हालांकि सांसद कार्यालय के असिस्टेंट धनेश्वर बारिक ने बेटी का बचाव किया. उन्‍होंने कहा आज के समय में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है.

  • ध्रुव राठी और कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके की बातचीत….

    ध्रुव राठी और कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके की बातचीत….

    नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी और “कॉकरोच जनता पार्टी” के प्रमुख अभिजीत दीपके के बीच हुई वीडियो कॉल बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है और लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर समर्थक और आलोचक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स इसे सामान्य बातचीत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं।

    कौन हैं ध्रुव राठी

    ध्रुव राठी जर्मनी के बर्लिन में रहने वाले एक लोकप्रिय भारतीय यूट्यूबर, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और राजनीतिक टिप्पणीकार हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर अपने शिक्षाप्रद वीडियो के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ ही वे अक्सर भारतीय सरकार और समाज की आलोचना करते हैं लाखों लोग उनके वीडियो देखते हैं प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व समर्थक से वे उनके मुखर आलोचक बन गए और इतिहास, राजनीति और वैश्विक मामलों की गहन पड़ताल करते हुए वर्तमान घटनाओं पर अपनी राय रखते हैं. यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफार्मों पर लाखों लोग उनके वीडियो देखते हैं.

    मीडिया में आई रिर्पोट की मानें तो वो हर महीने अपने वीडियो से 50 से 60 लाख तक कमाते हैं औऱ साथ ही रिपोर्ट के अनुसार उनकी सालाना इनकम 7.5 करोड़ रुपये है. दीपके बोले- हमें कॉकरोच कहने के लिए CJI का शुक्रिया केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान के इस्तीफे लिए दीपके ने CJI सूर्यकांत का शुक्रिया अदा किया। दीपके बोले- अगर आपने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो युवा सड़कों पर नहीं होते। प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता।

    अभिजीत ने यह भी कहा- हम कॉकरोच हैं। एक बार घुस जाएं, तो आसानी से निकलते नहीं। अभी सिर्फ एक इस्तीफा हुआ है। कॉकरोच से पंगा मत लो। दरअसल, यह पूरी कहानी 72 दिन पहले CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी से शुरू हुई थी। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने कहा था- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। कॉकरोच वाली टिप्पणी ने ही अनजाने में इस आंदोलन को इसकी पहचान देने वाला प्रतीक दिया था। विरोध का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल शब्द को छात्रों ने अपना लिया।

    सोशल मीडिया पर कॉकरोच इमोजी की बाढ़ आ गई, रातों-रात मीम्स बनने लगे, कलाकारों ने कार्टून बनाए और कैंपस में व्यंग्यात्मक पोस्टर घूमने लगे। दीपके ने इस अपमान को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में बदल दिया, जो पहले एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पेज के तौर पर शुरू हुई थी और बाद में छात्र आंदोलन का चेहरा बन गई। जब इसका एक सोशल मीडिया अकाउंट हटा दिया गया, तो यह “कॉकरोच इज बैक” नाम से दूसरे अकाउंट के साथ लौटा, जिसकी टैगलाइन थी – “कॉकरोच कभी नहीं मरते।”

    CJP ने सड़क नहीं, डिजिटल रास्ते को चुना अतीत के कई छात्र आंदोलनों के विपरीत, इसने सड़कों पर उतरने से पहले ऑनलाइन जोर पकड़ा। CJP तेजी से देश के सबसे बड़े डिजिटल समुदायों में से एक बन गया। आज CJP के इंस्टाग्राम पर लगभग 2.63 करोड़ (26.3 मिलियन) फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 1.48 करोड़ (14.8 मिलियन) और BJP के 95 लाख (9.5 मिलियन) फॉलोअर्स हैं।

    CJI का यह बयान सामने आया तो इसका विरोध होने लगा। नेताओं, लोगों और सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर आलोचना होने लगी। अगले ही दिन यानी 16 मई को CJI सूर्यकांत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक इवेंट में शामिल होने जबलपुर पहुंचे। वहां उन्होंने कॉकरोच वाले कमेंट पर सफाई दी। CJI सूर्यकांत ने कहा- यह कहना पूरी तरह बेबुनियाद है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की। यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने एक मामूली मामले की सुनवाई के दौरान मेरे ओरल कमेंट्स को गलत तरीके से पेश किया। मैंने उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली और फर्जी डिग्री के साथ कानूनी पेशे में आए थे। लेकिन मामला बहुत आगे बढ़ चुका था।

    16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। उस दिन से 25 जुलाई तक यानी करीब 72 दिन में इस बयान के बाद बनी CJP देश में सबसे ज्यादा चर्चा में रही।

    ऐसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी

    16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। इंस्टाग्राम पर भी अकाउंट बनाया। एक वेबसाइट भी बनाई गई। X पर एक गूगल फॉर्म जारी हुआ। इसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ लिखी एक तस्वीर के साथ कैप्शन था- ‘सभी कॉकरोचों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया जा रहा है। अगर आप जॉइन करना चाहते हैं, तो लिंक पर क्लिक करें। पार्टी जॉइन करने के लिए 4 जरूरी योग्यताएं बताई गईं- ‘अनइम्प्लॉइड, लेजी, क्रॉनिकली ऑनलाइन, एबिलिटी टू रैंट प्रोफेशनली।’ इसके बाद लोग लगातार CJP से जुड़ रहे हैं।

    17 से 20 मई तक कॉकरोच पार्टी के फॉलोअर्स लगातार बढ़े, लेकिन 21 मई को इसके अकाउंट बंद कर दिए गए। इसी दिन कॉकरोच इज बैक नाम से दूसरा अकाउंट बन गया। 22 मई को सबसे पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया। 24 मई को वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन जारी की गई। इस पर प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले 10 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।

    आज भी रजिस्टर्ड नहीं है CJP

    कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके इसके फाउंडर हैं। वही दीपके जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के लीडर रहे हैं।

    कब क्या क्या हुआ?

    3 मई- नीट-यूजी का आयोजन हुआ, 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए।

    12 मई – पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट-यूजी को रद कर दिया गया।

    24 जुलाई- केंद्र और सीजेपी के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधान के इस्तीफे पर जोर दिया। पार्टी से इस्तीफे तक… 10 तारीखें

    15 मई – कोर्ट की टिप्पणी बनी ट्रिगर

    16 मई – सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी

    4 जून – पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में आह्वान

    6 जून – नई दिल्ली में सीजेपी के पहले प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए दीपके भारत आए, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई।

    20 जून – सीजेपी ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू किया। 28 जून – सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की।

    18 जुलाई – वांगचुक को हटाया गया

    20 जुलाई – संसद मार्च, पहली वार्ता

    24 जुलाई – 26 दिन बाद केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म की।

    25 जुलाई – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आंदोलन की सबसे बड़ी जीत

  • CGPSC घोटाले में ED की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से होगी जांच; CM साय बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ BJP की जीरो टॉलरेंस नीति….

    CGPSC घोटाले में ED की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से होगी जांच; CM साय बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ BJP की जीरो टॉलरेंस नीति….

    रायपुर. सीजीपीएससी घोटाला मामले में (CGPSC SCAM) अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है. टामन सिंह सोनवानी से रिमांड अवधि के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूछताछ की जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भाजपा  सरकार को करप्शन मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने वाला बताया.

    करप्शन मामले में भाजपा की जीरो टॉलरेंस की नीति : CM साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में प्रदेश के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ था. प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से सीजीपीएससी घोटाले की जांच का वादा किया था. हमारी (भाजपा) पार्टी करप्शन के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है. उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में कोई भी अपराध करेगा तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. जो भी दोषी पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई हो रही है.

    मन की बात में छ्त्तीसगढ़ का जिक्र

    प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में आज छत्तीसगढ़ का जिक्र हुआ. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री छग का जिक्र करते हैं. बीते दिनों बस्तर पण्डुम, मल्हार का ताम्र पत्र का जिक्र मन की बात हुई थी. पीएम मोदी ने इस एपिसोड में कैच द रैन अभियान में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कोरबा का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने गणेश चतुर्थी में अपने गांव से बनी से बनी मिट्टी की मूर्ति घर लाने का आव्हान किया.

    बीजेपी के लिए देश सर्वोपरि है : CM साय

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा को लेकर रविवार को सीएम साय ने कहा कि बीजेपी के लिए देश सर्वपरि है. धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है. वह संगठन के प्रभारी भी रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी सिद्धांतवादी पार्टी है. हम जनता की सेवा और देश की सेवा के लिए सरकार में आते हैं. धर्मेंद्र प्रधान प्रदेश के संगठन के प्रभारी भी रहे हैं.

  • मालवाहक रेल कॉरिडोर के लिए छत्तीसगढ़ के इन 25 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित, खरीदी-बिक्री पर लगी रोक…

    मालवाहक रेल कॉरिडोर के लिए छत्तीसगढ़ के इन 25 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित, खरीदी-बिक्री पर लगी रोक…

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के 25 गांवों की जमीन अब प्रस्तावित मालवाहक रेल कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को हरी झंडी दिए जाने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन और अंतरण पर रोक लगा दी गई है।

     पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक प्रस्तावित समर्पित मालवाहक रेल कॉरिडोर (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर संबंधित एसडीएम को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।

    करीब 2100 से 2200 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, खनिज और बंदरगाह क्षेत्रों को जोड़ना है। यह रेलमार्ग पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा। इस लाइन पर केवल मालगाड़ियां संचालित होंगी।

    Durg 25 Villages Land Acquisition: 25 गांवों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव

    दुर्ग जिले में यह कॉरिडोर दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के 25 गांवों से होकर गुजरेगा। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले लेन-देन रोकने के लिए जिला प्रशासन पहले ही संबंधित गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन, अंतरण और व्यपवर्तन पर रोक लगा चुका है।

    दावा-आपत्ति के बाद तय होगा मुआवजा

    अधिग्रहण के अगले चरण में प्रभावित भूमि का विवरण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद भू-स्वामियों को दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जनसुनवाई के बाद राजस्व विभाग और रेलवे की संयुक्त टीम जमीन, मकान, कुएं, पेड़-पौधों तथा अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेगी। निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। भुगतान के बाद ही जमीन रेलवे को हस्तांतरित होगी।

    जिले को मिलेगा औद्योगिक लाभ

    कॉरिडोर बनने से दुर्ग जिला देश के दो बड़े व्यापारिक केंद्रों सूरत और दानकुनी से सीधे जुड़ जाएगा। इससे इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योगों को माल परिवहन में सुविधा मिलेगी। साथ ही मुख्य रेलवे लाइन पर मालगाडिय़ों का दबाव कम होने से यात्री ट्रेनों के संचालन में भी सुधार आएगा। निर्माण चरण में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं किसानों को अपनी उपज देश के बड़े बाजारों तक कम लागत और कम समय में पहुंचाने का विकल्प मिलेगा, जिससे कृषि और व्यापार दोनों क्षेत्रों को लाभ होने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर, दानकुनी-सूरत मालवाहक रेल कॉरिडोर परियोजना से दुर्ग जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि भूमि अधिग्रहण (Durg Land Acquisition) के कारण प्रभावित ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पारदर्शी प्रक्रिया, उचित मुआवजा और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

  • विधायक ट्रोलिंग मामला: बीजेपी MLA अनुज शर्मा के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश…

    विधायक ट्रोलिंग मामला: बीजेपी MLA अनुज शर्मा के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश…

    बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर बढ़ती ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानहानि के मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पद्मश्री एवं विधायक अनुज शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए  कोर्ट ने उनके खिलाफ प्रसारित की जा रही मानहानिकारक, आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड सामग्री पर कड़ा ऐतराज जताया है। हाईकोर्ट ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पोस्ट करने वालों को नोटिस जारी कर विवादित कंटेंट को तत्काल हटाने का सख्त निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई।

    कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अनुज शर्मा और उनके  परिवार को निशाना बनाकर किए गए अश्लील पोस्ट, गाली-गलौज, मॉर्फ्ड वीडियो और तस्वीरों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता अनुज शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर कई फर्जी अकाउंट्स के जरिए उनकी पुरानी फिल्मों और गानों को एडिट कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

    याचिका की सुनवाई के दौरान अनुज शर्मा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि बिना अनुमति किसी की पहचान, छवि या आवाज का इस्तेमाल करना ‘व्यक्तित्व अधिकार’ (Personality Rights) और संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

    मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़े सभी मानहानिकारक, मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो व कैरिकेचर को तुरंत हटाने, प्रतिबंधित करने के निर्देश। संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों, चैनल एडमिन्स और कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया। बिना अनुमति पहचान व छवि का व्यावसायिक या दुष्प्रचार के लिए इस्तेमाल करने पर जवाब मांगा है।

  • डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगों ने भी लोगों को अपनी चालाकी का शिकार बनाने के नए तरीके खोजे…क्या है एनएफसी स्कैम??

    डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगों ने भी लोगों को अपनी चालाकी का शिकार बनाने के नए तरीके खोजे…क्या है एनएफसी स्कैम??

    डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगों ने भी लोगों को अपनी चालाकी का शिकार बनाने के नए तरीके खोज लिए हैं।

    इन्हीं में से एक है एनएफसी (NFC) स्कैम, जिसमें साइबर अपराधी बिना आपका कार्ड छीने, बिना पिन पूछे और बिना किसी ओटीपी (OTP) के ही बैंक खाते से पैसे उड़ा लेते हैं।

    इस नए और खतरनाक स्कैम में ठग कार्ड की ‘टैप एंड पे’ (कांटैक्टलेस पेमेंट) सुविधा का गलत फायदा उठाते हैं। अगर आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड में टैप टू पे सर्विस चालू है, तो अनजाने में आप भी साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि तकनीक के जरिए होने वाली यह ठगी कैसे काम करती है और इससे बचाव के क्या उपाय हैं।

    क्या है एनएफसी स्कैम और भीड़ में कैसे होती है ठगी ?

    एनएफसी यानी ‘नियर फील्ड कम्युनिकेशन’ एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से फोन या बैंक कार्ड को पॉस (POS) मशीन के करीब लाकर बिना पिन डाले कांटैक्टलेस पेमेंट किया जाता है। साइबर ठग इसी सुविधा का फायदा उठाने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपने साथ वायरलेस कार्ड रीडर या स्वैप मशीन छिपाकर चलते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी भीड़ में होता है और उसका एक्टिवेटेड कार्ड किसी अनजान डिवाइस के संपर्क में आ जाता है, तो ठग पल भर में बिना पिन या पासवर्ड के छोटी रकम का लेनदेन कर लेते हैं। यही कारण है कि बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को अपने कार्ड को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    किन लोगों को है ज्यादा खतरा और कहां बरतें सावधानी ?

    जिन बैंक ग्राहकों के डेबिट या क्रेडिट कार्ड में कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सर्विस पहले से एक्टिव है, उन्हें अपनी जेब, बैग और फोन की सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। मेट्रो, भीड़ से भरी बसें, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले बाजार ऐसी जगहें हैं, जहां ठग किसी के भी बेहद करीब आकर इस वारदात को अंजाम दे सकते हैं। अगर आपको अपने रोजमर्रा के लेनदेन में टैप टू पे सुविधा की आवश्यकता नहीं है, तो बेहतर होगा कि आप अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप की मदद से या सीधे बैंक से संपर्क करके इस सर्विस को तुरंत बंद (डिसेबल) करा दें।

    सतर्कता ही है बचाव: इन आसान तरीकों से सुरक्षित रखें बैंक खाता

    एनएफसी स्कैम से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपने कार्ड और फोन को हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें और किसी भी अनजान व्यक्ति को इनके करीब आने का मौका न दें। अपने बैंक खाते से जुड़े एसएमएस (SMS) और ऐप नोटिफिकेशन पर नियमित रूप से नजर रखें, ताकि किसी भी संदिग्ध या अनजान ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत मिल सके। जरूरत न होने पर कांटैक्टलेस लिमिट को शून्य कर देना एक समझदारी भरा कदम है। यदि आपको खाते से कोई भी अनजान लेनदेन दिखे या कार्ड खो जाए, तो बिना एक पल की देरी किए कार्ड को ब्लॉक कराएं और बैंक के साथ-साथ साइबर सेल को इसकी सूचना दें। थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी आपको डिजिटल ठगी से सुरक्षित रख सकती है।

  • थाना परिसर में आरक्षक ने की आत्महत्या, बैरक में फंदे पर लटका मिला शव, जांच में जुटी पुलिस…

    थाना परिसर में आरक्षक ने की आत्महत्या, बैरक में फंदे पर लटका मिला शव, जांच में जुटी पुलिस…

    सक्ती जिले के हसौद थाना परिसर से एक दुखद घटना सामने आई है। थाना परिसर स्थित बैरक में पदस्थ एक आरक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

    जानकारी के अनुसार, मृतक आरक्षक की पहचान जय लहरे (41 वर्ष) के रूप में हुई है। वे मूल रूप से भलवाही, लगरा, थाना पामगढ़ के निवासी बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरक्षक का शव थाना परिसर स्थित बैरक में खिड़की से बोरा सिलने में उपयोग होने वाली प्लास्टिक की रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला।
    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरक्षक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।