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  • टीआई 2 साल से करता रहा बलात्कार, 3 बार करवाया गर्भपात

    टीआई 2 साल से करता रहा बलात्कार, 3 बार करवाया गर्भपात

    जशपुर जिले के पत्थलगांव थाने का मामला

    अपने ड्राइवर और होटल कर्मचारी को कई बार गाड़ी लेकर बेचता था रायगढ़ बुलवाने

    जशपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव थाने के टीआई ओमप्रकाश ध्रुव पर एक महिला ने यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने डीजीपी डीएम अवस्थी को दो पेज की लिखित शिकायत में सिलसिलेवार बताया है कि ध्रुव ने दो बरसों तक किस तरह उसका दैहिक शोषण किया। इस दौरान उसने तीन बार गर्भवती हुई और तीनों बार टीआई ने गर्भपात करवा दिया। डीजीपी ने महिला की शिकायत को एसपी जशपुर को भेज दिया है।

    वहीं, जशपुर के एसपी शंकरलाल बघेल ने  बताया कि महिला की शिकायत डीजीपी साहब ने मेरे पास भेजा था। उन्होंने एडिशनल एसपी उनेजा खातून को जांच के लिए कहा है।

    डीजीपी ने क्या कहा

    डीजीपी डीएम अवस्थी ने दो टूक कहा, इस मामले में किसी को बख्शने का सवाल ही पैदा नहीं होता। महिला की शिकायत पर कार्रवाई कल ही हो जाएगी। महिला ने डीजीपी को भेजे अपनी शिकायत में कहा है कि दो साल पहले वह टीआई ध्रुव के संपर्क में आई। उसने फरेब पूर्वक उससे दैहिक संबंध बनाए। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा।

    टीआई के नाम पर होटल का कमरा परमानेंट बुक

    टीआई के नाम पर पत्थलगांव के एक होटल में हमेशा कमरा बुक रहता है। उसी होटल में वह हमेशा मुझे बुलाता था। इस बीच वह तीन बार गर्भवती हुई। लेकिन, ध्रुव ने दबाव डालकर गर्भपात करवा दिया। पीड़िता का कहना है, टीआई हमेशा कहता था, वे पति-पत्नी की तरह रहेंगे, कभी वह छोडे़गा नहीं। पीड़िता का आरोप है कि कई बार रात में अपने ड्राईवर और होटल के कर्मचारी को वह स्कार्पियो गाड़ी में उसे लेने रायगढ़ भेज देता था।

    शिकायत के अनुसार पीड़िता को एक दिन पता चला कि वह शादी शुदा है तो उसने संबंध विच्छेद करते हुए मिलने से मना कर दिया। लेकिन, धु्रव नहीं माने। अलबत्ता, उसने होटल में ही आत्महत्या की कोशिश की। पीड़ित महिला का कहना है कि धु्रव उसे साईक्लोजिक ब्लैकमेल करता था, इसलिए वह उसके साथ जुड़ी रही। लेकिन, इस साल 26 जुलाई को मुझे लेने धुव्र खुद रायगढ़ आए। वह तीन दिन पत्थलगांव के होटल में रही। फिर, 29 जुलाई को वह रायगढ़ छोड़ गए। इसके बाद उन्होंने मेरा फोन पिक करना बंद कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि टीआई अब उसे धमका भी रहा है। साथ ही समझौता करने के लिए प्रेशर डाला जा रहा है। महिला ने कपटपूर्ण तरीके से उसका जीवन खराब करने वाले टीआई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    इस मामले में टीआई ध्रुव का पक्ष लेने के लिए उनके सरकारी और निजी नम्बर पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

  • अब लगेगा 4000 का जुर्माना, सीएम को भी नहीं छोड़ेंगे…

    अब लगेगा 4000 का जुर्माना, सीएम को भी नहीं छोड़ेंगे…

    दिल्ली की केजरीवाल सरकार विधानसभा चुनाव के पहले पूरी तरह से एक्शन में नजर आ रही है। दरअसल प्रदूषण कम करने की जुगत में लगी ‘आप’ एक बार फिर से दिल्ली में 4 से 15 नवंबर के बीच ऑड-इवन लागू करने जा रही है। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब ऑड-इवन रूल तोड़ने पर 4000₹ का जुर्माना देना होगा।

    इस दायरे मे सीएम और मंत्री भी आएंगे

    साल 2016 में ऑड-इवन नियम तोड़ने पर जुर्माना राशि 2000 थी।

  • पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    ऐसी व्यवस्था करने वाला राजस्थान पहला राज्य

    राजस्थान सरकार ने निकाय चुनाव को लेकर ऐसी व्यवस्था की है जो देश में पहली बार किसी राज्य में लागू हुई है. इसके तहत पार्षद का चुनाव नहीं लड़ने वाला व्यक्ति और हारा हुआ प्रत्याशी भी मेयर-सभापति बन सकता है। यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा विधायक या सांसद का चुनाव लड़े बिना ही या जीते बिना ही मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुन लिए जाते हैं। यह हाईब्रिड मॉडल उतारने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है।

  • डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा – ‘अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दूंगा,मूर्ख मत बनो’

    डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा – ‘अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दूंगा,मूर्ख मत बनो’

    डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की के राष्ट्रपति एडोरगन को पत्र लिखा है,जिसमें उन्होंने कुर्दो पर हमला नहीं रोकने की स्थिती में तुर्की की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की धमकी दी है। उन्होंने एडोरगन को लिखा ‘सख्त आदमी मत बनो, मूर्ख मत बनो।’ उन्होंने आगे लिखा आप हजारों लोगों की मौत का कारण नहीं बनना चाहेंगे, और मै भी तुर्की की अर्थव्यवस्था की बर्बादी का जिम्मेदार नही बनना चाहता।

  • ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    द‍िल्‍ली। अगर आप भी है र‍िलायंस ज‍ियो के ग्राहक है तो यह खबर जरूर पढ़ लें। बता दें कि जियो ने अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान में मिलने वाले फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म कर दिया है। शुरूआत‍ के समय में जियो को कम कीमत में ज्यादा बेनिफिट देने वाली कंपनी के तौर पर जाना जाता रहा है। ऐसे में अचानक फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किया जाना सब्सक्राइबर्स के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। हाल ही में जियो ने घोषणा की थी कि अब वह दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल के बदले सब्सक्राइबर्स से 6 पैसे प्रति मिनट का इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज लेगा। इसके बाद से ही जियो सब्सक्राइबर्स के साथ ही टेलिकॉम इंडस्ट्री में काफी हलचल देखी जा रही है।

    ज‍ियो के इन प्लान्स पर होगा असर

    बता दें कि जियो के पास 10 रुपये से लेकर 1,000 रुपये के बीच के टॉक टाइम प्लान मौजूद हैं। ये प्लान्स पहले फुल टॉक टाइम के साथ आते थे, लेकिन अब इनमें फुल टॉक टाइम मिलना बंद हो गया है। अब जियो के 10 रुपये वाले टॉक टाइम रिचार्ज में यूजर्स को 7.47 रुपये का टॉक टाइम ऑफर किया जा रहा है। इसी प्रकार 20 रुपये में 14.95 रुपये, 50 रुपये में 39.37 रुपये, 100 रुपये में 81.75 रुपये, 500 रुपये में 420.73 रुपये और 1000 रुपये वाले प्लान में 844.46 रुपये का टॉक टाइम दिया जा रहा है। हालांकि लोगों कि माने तो इसे जियो द्वारा लगाए गए आईयूसी के असर मान रहे हैं।

    सब्सक्राइबर्स को कंपनी के फैसले से लगा झटका

    जियो सब्सक्राइबर्स को कंपनी द्वारा ल‍िया गया फैसला, यानि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने से झटका लगा है। जियो शुरुआत से अपने प्रीपेड पोर्टफोलियो में कई सारे प्लान ऑफर करता रहा है। इनमें उन प्लान्स की भी कमी नहीं थी जिनमें सब्सक्राइबर्स को रिचार्ज पर फुल टॉक टाइम ऑफर किया जाता था। फुल टॉक टाइम वाले प्रीपेड प्लान उन यूजर्स को काफी पसंद थे जिन्हें ज्यादा वॉइस कॉलिंग की जरूरत पड़ती थी। इन प्रीपेड टॉक टाइम प्लान्स में किसी किसी प्रकार का डेटा नहीं ऑफर किया जाता था। वहीं जियो के प्लान्स में मजेदार यह है कि अब अलग-अलग डेली डेटा लिमिट वाले पॉप्युलर डेटा प्लान आईयूसी टॉक टाइम वाउचर के साथ आ रहे हैं। इससे यूजर्स को प्रीपेड डेटा रिचार्ज के साथ आईयूसी रिचार्ज के कई ऑप्शन मिल गए है।

    इन कारणों से जियो ने क‍िया बदलाव

    जानकारी दें कि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने की वजह जियो और दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर्स के बीच चल रहे टैरिफ वॉर को माना जा सकता है। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब एयरटेल ने जियो पर आरोप लगाया कि उसने अपनी रिंग टाइम को घटाकर 25 सेकंड कर दिया है। इस कारण जियो सब्सक्राइबर्स द्वारा दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल अक्सर मिस हो जाते थे। इसके बदले जियो के नेटवर्क पर कॉल बैक आने की संख्या बढ़ गई थी। वहीं जियो पर दूसरे नेटवर्क ऑपरेटर द्वारा कॉल आने की स्थिति में जियो को उस ऑपरेटर से आईयूसी का फायदा होता था। दूसरी ओर इसके बाद एयरटेल ने भी अपने रिंग टाइम को 25 सेकंड करने का फैसला किया। इसके बाद जियो को आईयूसी इंट्रोड्यूस करना पड़ा। कंपनी को इससे दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाली कॉल के लिए खुद पैसे नहीं देने पड़ेंगे क्योंकि वह अब इसे सब्सक्राइबर्स से वसूल रही है। आईयूसी चार्ज को लेकर कहा जा रहा है कि ट्राई इसे इस साल के अंत तक खतम कर देगा।

  • निर्मला सीतारमण के पति ने अखबार में लिखकर कहा, ‘देश बचाना है तो मनमोहन मॉडल यूज़ करना होगा’

    वित्तमंत्री कौन हैं? निर्मला सीतारमण,और दूसरी तरफ उनके पति परकाला प्रभाकर

    एक तरफ भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री कह रहे हैं कि देश में मंदी नहीं है, और दूसरी तरफ परकाला प्रभाकर ने 14 अक्टूबर को अंग्रेजी के अखबार ‘द हिन्दू’ में लेख लिखा. इस लेख में परकाला प्रभाकर ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के पास अर्थव्यवस्था को लेकर कोई रोडमैप नहीं है.

    लेख का शीर्षक : A lodestar to steer the economy. इस लेख में वित्तमंत्री के पति परकाला प्रभाकर ने लिखा है कि भाजपा सरकार को नेहरू की आलोचना करने के बजाय, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के आर्थिक मॉडल से सीख लेनी चाहिए.

    दी हिन्दू में छपा परकला प्रभाकर का लेख.
    दी हिन्दू में छपा परकाला प्रभाकर का लेख.

    हम इस लेख के कुछ महत्त्वपूर्ण हिस्सों को आपसे साझा करना चाहते हैं. परकाला प्रभाकर ने लिखा है,

    “एक तरफ तो सरकार आर्थिक मंदी से लगातार मना कर रही है, लेकिन लगातार आ रहे आंकड़े बता रहे हैं कि सेक्टर दर सेक्टर बेहद गंभीर रूप से प्रभावित होते जा रहे हैं.”

    इसके बाद प्रभाकर ने जीडीपी के गिरते आंकड़ों और बेरोज़गारी के आंकड़े साझा किये हैं, और कहा है,

    “अभी भी इस बात का इंतज़ार हो रहा है कि सरकार के वे प्रयास दिखाई दें, जिनसे अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता हो. सरकार के पास कोई रणनीति भी है कि अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का सामना किया जा सके, इसके भी साक्ष्य बेहद कम हैं.”

    प्रभाकर ने कहा है कि मौजूदा भाजपा सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है कि गिरती अर्थव्यवस्था का कैसे सामना किया जाए? उन्होंने कहा है कि प्रमुख समस्या ये है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने के विचार को भाजपा ने वर्षों से नज़रंदाज़ किया है. जनसंघ के दिनों से ही भाजपा ने नेहरू की समाजवादी राजनीति की आलोचना की. पार्टी की आर्थिक विचारधारा केवल नेहरू मॉडल के विरोध तक ही सीमित रही. उन्होंने आगे लिखा है कि अर्थव्यवस्था पर आएं तो भाजपा की आर्थिक नीति “नेति-नेति” यानी “ये नहीं-ये नहीं” तक सीमित रही, जबकि किसी भी मौके पर भाजपा ने अपनी “नीति” का ज़िक्र नहीं किया.

    भाजपा की जिस नीति ने पार्टी को सरकार दी, पार्टी को भारत के राजनीतिक संवाद में केन्द्रीय भूमिका दी, उस नीति का अर्थव्यवस्था से कोई मतलब नहीं रहा है. प्रभाकर ने देश अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार पर भी सवाल उठाए हैं. कहा है कि 1998 से 2004 तक देश में नॉन-कांग्रेसी सरकार रही, लेकिन इस दौरान देश की आर्थिक नीति की दिशा में बड़े कदम नहीं उठाए गए.

    “पार्टी का इंडिया शाइनिंग कैम्पेन वोटरों को लुभा पाने में असफल रहा. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोगों को लगने लगा कि सरकार के पास आर्थिक दर्शन और कोई फ्रेमवर्क नहीं है.”

    इसी वजह से पार्टी की 2004 लोकसभा चुनाव में हार हुई. लेकिन प्रभाकर ने ये भी बताया है कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्त्व को इन बातों के बारे में अच्छे से पता है. मौजूदा नेतृत्त्व ने बेहद चालाक तरीके से सरकार के अर्थव्यवस्था के एजेंडे को मौजूदा लोकसभा चुनाव के कैम्पेन के समय सामने नहीं रखा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रवाद और खांटी राजनीति को कैंपेन के केंद्र में रखा.

    इसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकाला प्रभाकर ने 1991 की नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों का उल्लेख किया. कहा कि इन नीतियों की उसके बाद की सभी सरकारों – चाहे वो किसी के भी सहयोग से बनी हों – ने तारीफ की है. लिखा है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो नेहरू की आर्थिक चेतना को जिलाने का प्रयास किया, लेकिन नरसिम्हा राव के साथ के बिना. यहीं पर इसका ज़िक्र भी ज़रूरी है कि कांग्रेस ने मनमोहन सिंह का सहारा लिया. उन्हें 2004 में भारत के प्रधानमंत्री का पद दिया.

    प्रभाकर ने कहा है कि भाजपा नेहरू की आर्थिक नीतियों की आलोचना करती है, नेहरू के आर्थिक ढाँचे का विरोध करना भाजपा ने रोका नहीं है. वक़्त रहते अगर भाजपा राव-सिंह के आर्थिक एजेंडे की सहायता ले लेती या उसे अपना ही लेती, तो भाजपा को इस मोर्चे पर सफलता मिल सकती थी. लेकिन भाजपा ने अभी तक उस आर्थिक ढाँचे को न तो चुनौती दी है, न तो उसे नकारा है. अगर भाजपा अभी भी आक्रामक तरीके से इस आर्थिक नीति को अपना लेती है तो ये नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धि ही होगी कि देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाएगी.

    परकला प्रभाकर आंध्र प्रदेश सरकार के संचार सलाहकार रह चुके हैं. लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के फेलो रह चुके हैं. इंटरनेट पर मिल रही जानकारी के मुताबिक़, परकला प्रभाकर का पूरा परिवार नरसिम्हा राव का करीबी रह चुका है. परकला प्रभाकर की मुलाकात निर्मला सीतारमण से जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई. दोनों की शादी 1986 में हुई. निर्मला का झुकाव भाजपा की तरफ और परकला प्रभाकर का झुकाव कांग्रेस की पॉलिटिक्स की तरफ रहा. प्रभाकर आर्थिक मुद्दों पर लम्बे समय से लिखते रहे हैं.

  • जमीन के हेर-फेर के मामले में पूर्व गृहमंत्री कंवर ने की EOW में शिकायत, क्रेता के साथ तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार पर दर्ज हुआ मामला

    जमीन के हेर-फेर के मामले में पूर्व गृहमंत्री कंवर ने की EOW में शिकायत, क्रेता के साथ तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार पर दर्ज हुआ मामला

    रायपुर। पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर द्वारा की गई शिकायत पर इकानामिक अफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) थाना में तत्कालीन शासकीय लोक सेवक तत्कालीन पटवारी हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा माखन लाल देशमुख, तत्कालीन पटवारी हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा, सनत कुमार पटेल, तत्कालीन नायब तहसीलदार भिलाई-03 घनश्याम शर्मा और विकेताओं व केताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

    दर्ज मामले के अनुसार, ग्राम महुदा पहन-07 पाटन जिला-दुर्ग में गरीब भूमिहीन किसानों को शासन की योजना अन्तर्गत वर्ष 1975-76 में शासकीय पट्टे पर कृषि कार्य के लिए 15.99 हेक्टेयर (39.97 एकड) भूमि को दी गई थी, जिसे तत्कालीन नायब तहसीलदार भिलाई-03 घनश्याम शर्मा b तत्कालीन पटवारी, हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा माखन लाल देशमुख एवं सनत कुमार पटेल द्वारा राजस्व दस्तावेजो में हेरफेर कर शासकीय पट्टे की भूमि को भूमि स्वामी हक दर्ज कर बिल्डर्स वसुन्धरा आयुर्वेदिक अनुसंधान प्रालि राजू शुक्ला पिता शिवमूरत निवासी रायपुर एवं विश्वास अग्रवाल, जैनम एग्रो फाईनेंस डायरेक्टर, गोपाल सोनकर पिता रामचंद निवासी रायपुर डायरेक्टर सुनील पारख एवं अन्य से सांठ-गांठ कर केता के पक्ष में रजिस्ट्री कराई गई. 

    रजिस्ट्री के समय तत्कालीन नायब तहसीलदार भिलाई-03 घनश्याम शर्मा, एवं तत्कालीन पटवारी, हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा माखन लाल देशमुख एवं सनत कुमार पटेल द्वारा रजिस्ट्री के लिये किसानों को शासकीय पट्टेदार की भूमि का “आसामीवार किस्तबंदी खतौनी” में भूमि स्वामी दर्ज करते हुये सत्यापित प्रति जारी किया गया है, जिससे वसुन्धरा आयुर्वेदिक अनुसंधान के.प्रालि एवं जैनम एग्रो फाईनेंस द्वारा भूमि क्रय की गई है इस प्रकार षडयंत्र पूर्वक पटवारी एवं नायब तहसीलदार से मिलकर रजिस्ट्री होना पाया गया
    नामांतरण के समय भी तत्कालीन लोक सेवक नायब तहसीलदार भिलाई-03 घनश्याम शर्मा, एवं तत्कालीन पटवारी, हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा माखन लाल देशमुख एवं सनत कुमार पटेल ने अपने-अपने शासकीय कार्य का लोप करते हुये मिसल रिकार्ड चेक न करते हुये शासकीय पट्टेदार की भूमि का नामांतरण जारी किया गया है. कृषि भूमि का स्वरूप परिवर्तित किया जाकर षडयंत्र के तहत भूमि की बिक्री की गई है.

    मामले में तत्कालीन शासकीय लोक सेवक तत्कालीन पटवारी हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा माखन लाल देशमुख, तत्कालीन पटवारी हल्का नम्बर-07 ग्राम-महुदा, सनत कुमार पटेल, तत्कालीन नायब तहसीलदार भिलाई-03 घनश्याम शर्मा, एवं विकेताओं एवं केताओं के विरूद्ध धारा-409, 467, 468, 471, 120 (बी) भादवि एवं 13(1) ए भ्रनिअधि 1988 संशोधन अधिनियम 2018 के तहत अपराध  दर्ज किया गया है.

  • कोर्ट में दिखा पुलिस का भयावह चेहरा… रेप पीड़िता ने कहा कि ये आरोपी नही लेकिन पुलिस के दबाव में इसका नाम लिया..

    कोर्ट में दिखा पुलिस का भयावह चेहरा… रेप पीड़िता ने कहा कि ये आरोपी नही लेकिन पुलिस के दबाव में इसका नाम लिया..

    रायपुर। राजधानी के विधानसभा थाना में दर्ज क्राईम नंबर 212/19 जिसमें कि पुलिस ने यह दावा किया था कि, चौदह वर्षीय किशोरी को बंधक बनाकर उससे देह व्यापार कराया गया था,और प्रकरण में धारा 366,376(3),370,370(क),34 के साथ साथ 6 पॉस्को एक्ट और अजाजजा अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(V)(क) जैसी भारी भरकम धाराएँ लगाई गई थीं, और प्रकरण में एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया था। उस मामले में पीडिता के कोर्ट में दिए बयान के बाद विधानसभा थाने की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

    पीडिता की बीते 3 अक्टूबर को इस मामले में अजाजजा अत्याचार निवारण के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता के न्यायालय में गवाही हुई जिसमें पीडिता ने पुलिस की डायरी के अनुसार बलात्कार के आरोपी को यह कहते हुए पहचानने से इंकार कर दिया कि

    “वह बलात्कार करने वाले व्यक्ति को पहचानती है, यह वो व्यक्ति नहीं है जिसने मेरे साथ बलात्कार किया था,वह व्यक्ति जिसने मेरे साथ ग़लत काम किया, उसकी क़द काठी तक इससे नहीं मिलती”

    पीड़िता के इस बयान के बाद उससे यह पूछा गया कि, पुलिस के सामने आपने इसी व्यक्ति को आरोपी के रुप में क्यों पहचाना तो पीडिता ने कोर्ट से कहा

    मुझे पुलिस ने कहा था कि हमने तुम्हें ले जाने वाली महिला से इसकी पहचान कराई है,यही है तुम पहचान करो तो मैंने कर दिया.. जबकि यह नहीं था”

    पीड़िता से इस मसले पर देर तक सवाल जवाब होते रहे लेकिन वह इस बयान पर अडिग रही कि, न्यायिक हिरासत में बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार यह वह व्यक्ति नहीं है जिसने उसका रेप किया था।
    प्रकरण में पुलिस की डायरी यह कहानी बताती थी कि, किशोरी को उसके परिजन हॉस्टल भेजना चाहते थे और वह वहाँ नहीं जाना चाहती थी तो उसने अपनी पूर्व परिचित महिला से संपर्क किया जो उसे रात को ले गई और एक परिचित के मकान में रख छोड़ा। जहां दो दिनों तक एक व्यक्ति आते रहा और उससे रेप करता रहा। पुलिस की केस डायरी के अनुसार रेप करने वाला एक ही व्यक्ति था और महिला ने रक़म लेकर किशोरी से दुष्कर्म कराया।
    यह इसी बरस के मई महीने का बहुचर्चित मामला है, और पुलिस की यह समूची कार्यवाही मीडिया की सुर्ख़ियाँ भी बनी थीं। हालाँकि जबकि यह मामला दर्ज किया गया था, प्रकरण पर सवाल तब भी उठे थे। बहरहाल पीड़िता के कोर्ट में दिए बयान के बाद अब विधानसभा पुलिस ही सवालों के घेरे में है।

  • नान घोटाला — IAS आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत मंजूर

    नान घोटाला — IAS आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत मंजूर

    रायपुर। प्रदेश के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में आरोपी बनाए गए आईएएस अधिकारी अलोक शुक्ला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने आलोक शुक्ला के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। इससे पहले अप्रैल में एक और आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को भी कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें भी अग्रिम जमानत दे दी थी।

    ये था पूरा मामला

    एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने 12 फरवरी 2015 को नागरिक आपूर्ति निगम के 28 ठिकानों में छापा मारकर करोड़ों रूपए बरामद किए थे, इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आईएएस अधिकारी डा.आलोक शुक्ला और नान के तत्कालीन एमडी अनिल टुटेजा के खिलाफ अभियोजन चलान के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को चिट्ठी लिखी थी। 4 जुलाई 2016 को केंद्र ने अभियोजन की अनुमति दे दी थी, बावजूद इसके राज्य शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। ऐन चुनाव के पहले करीब ढाई साल बीतने के बाद राज्य सरकार ने पूरक चालान पेश करते हुए दोनों ही आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल किए थे।

  • सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ा, राम मंदिर सुनवाई का आज अंतिम दिन

    सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ा, राम मंदिर सुनवाई का आज अंतिम दिन

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था।

    सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन अचानक से उग्र हो उठे। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के 72 वर्षीय वकील राजीव धवन ने हिन्दू महासभा के कुछ कागज़ात फाड़ डाले। हिन्दू महासभा ने उन्हें कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।

    बता दें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस संबंध में शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर सकती है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है। इस ख़बर के बाद अयोध्या मामले का घटनाक्रम तेजी से बदलता नज़र आ रह है।

    बुधवार को राम मंदिर मामले की सुनवाई का 40वाँ और अंतिम दिन है। सीजेआई ने साफ़-साफ़ कह दिया है कि सभी निर्धारित पक्षों को निश्चित समयावधि से अधिक नहीं दी जाएगी और आज शाम 5 बजे तक सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। हिन्दू पक्ष की ओर से दलील पेश करते हुए वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस तरफ कोर्ट का ध्यान दिलाया कि मुस्लिम पक्ष ने अभी तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं दिया है, जिससे पता चले कि विवादित भूमि पर उनका एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि 1857 से 1934 के बीच मुस्लिम पक्ष ने वहाँ नमाज़ पढ़ी होगी, लेकिन उसके बाद ऐसा कुछ भी होने का कोई सबूत नहीं है।

    वैद्यनाथन ने ये कहते हुए अपनी दलीलें समाप्त की कि नमाज़ पढ़ने के लिए तो काफी सारी जगहें हो सकती हैं, लेकिन राम जन्मभूमि सिर्फ़ एक ही जगह है और उसे बदला नहीं जा सकता। वहीं राम मंदिर पर पहली याचिका दाखिल करने वाले गोपाल सिंह विशारद के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि उस स्थल पर पहले से पूजा होती रही है। वकील रंजीत कुमार ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की याचिका खरिज करने की अपील के साथ अपनी बात समाप्त की। वहीं निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाबा अभिराम दास विवादित स्थल पर स्थित स्ट्रक्चर में मुख्य पुजारी थे।

    हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था। राजीव धवन ने जब आपत्ति जताई तो सीजेआई राजन गोगोई ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सभी जज उठ कर चले जाएँगे। हिन्दू महासभा के वकील विकास ने जब सीजेआई को पुस्तक देने की बात कही तो उन्होंने कहा कि पुस्तक उन्हें दे दी जाए ताकि वो दिवाली तक पढ़ते रहें और नवम्बर तक पढ़ते रहें। सीजेआई ने उन्हें पुस्तक पर हस्ताक्षर कर के देने को कहा। सीजेआई ने धवन को फटकारते हुए कहा कि चिल्लाना व्यर्थ है।

    वहीं, विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने के एवज में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने विचित्र शर्तें रखते हुए माँग किया कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। मुख्य न्यायाधीश आज सुनवाई के दौरान समय को लेकर एकदम सजग दिखे और निर्मोही अखरा के वकील ने जब डेढ़ घण्टे माँगे तो उन्हें समय की कमी का हवाला देकर 1 बजे तक का समय दिया गया।