ऐश्वर्या राय बच्चन भी इन दिनों खूब सुर्खियों में है। हाल में ही ऐश्वर्या को मुकेश अंबानी की हाउस पार्टी में स्पॉट किया गया। पार्टी में वह पति अभिषेक बच्चन के साथ पहुंची। पार्टी के दौरान ऐश्वर्या ने रेड कलर का अनारकली सूट पहना था। सूट के साथ ऐश्वर्या ने बाल खुले छोड़े थे और रेड लिपस्टिक लगाई हुई थी। फुटवियर में उन्होंने गोल्डन हील्स पहनी।
क्याफिर से प्रेगनेंट है एश्वर्या?ऐश्वर्या की तस्वीरें देखकर ऐसा लग रहा है जैसे वो प्रेग्नेंट हों। यूजर्स ऐश्वर्या की तस्वीरों पर कमेंट करके पूछ रहे हैं कि ‘क्या वह प्रेग्नेंट हैं?’ यूजर्स ने कहा कि वो दुपट्टे से अपनी प्रेग्नेंसी छिपाने की कोशिश कर रही हैं हालांकि इस खबर पर ऐश्वर्या या बच्चन परिवार की ओर से कोई बयान नहीं आया है।बता दें कि साल 2007 में ऐश्वर्या और अभिषेक ने शादी की थी। 2011 में ऐश्वर्या ने बेटी आराध्या को जन्म दिया। शादी के इतने सालों बाद भी दोनों का प्यार कम नहीं हुआ है। कुछ समय पहले यह खबरें सुनने को मिली थी कि दोनों का रिश्ता ठीक नहीं चल रहा लेकिन सभी झूठी साबित हुईं। अब ऐश्वर्या की प्रेग्नेंसी की खबर सच है या झूठ यह तो वक्त ही बताएगा।
राजनांदगांव। राजनांदगांव से संचालित सचिव छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस के ग्रुप में अश्लील वीडियो डालने का एक मामला सामने आया है. अश्लील वीडियो संज्ञान में आते ही इस व्हाट्सएप ग्रुप को बंद कर दिया गया है.सचिव छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस के नाम से संचालित व्हाट्सएप ग्रुप में बीते बुधवार की रात लगभग 11:27 पर ग्रुप में जुड़े इवनवेल सिंह के मोबाइल से दो अश्लील वीडियो डाला गया. जिसके बाद मामला ग्रुप एडमिन चंद्रकला देवांगन के संज्ञान में आने पर इस व्हाट्सएप ग्रुप को बंद कर दिया है, वहीं इस मामले में पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई हेतु पत्र भी सौंपा गया है।
छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस सचिव चंद्रकला देवांगन ने बताया कि महिला कांग्रेस के इस ग्रुप में जिस व्यक्ति के मोबाइल से अश्लील वीडियो डाला है, वह पूर्व में मानव अधिकार नामक संस्था का प्रदेश और जिला अध्यक्ष भी रह चुका है, जिसके खिलाफ पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपा गय़ा है. इस मामले में पुलिस ने जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है।वहीं अश्लील वीडियो के मामले में इवनवेल सिंह का कहना है कि उसका मोबाइल रात 10 बजे चोरी हो गया था. जिसकी रिपोर्ट उसने सुबह बसंतपुर पुलिस थाने में दर्ज कराई है. कथित आरोपी इवनवेल सिंह के जिस मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो डाला गया है, वह नंबर कई अन्य व्हाट्सएप ग्रुपों में भी जुड़ा हुआ है. आरोपी इमनवेल खुद को निर्दोष बता रहा है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोरखनाथ बघेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस के नाम से सोशल मीडिया पर संचालित व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील वीडियो डालने का मामला सामने आया है, जिसकी शिकायत की गई है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुछ घंटे पहले हुए 26 लाख की धोखाधड़ी मामले में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लेने की बात कही है और कहा है कि हर व्यक्ति के पीछे पुलिस नहीं लगाया जा सकता है. वहीं पुलिस का कहना है कि सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है नाकेबंदी कर सर्चिंग की जा रही है।
दरअसल नंदन टीएमटी के कर्मचारी धीरेंद्र मिश्रा समता कालोनी ऑफिस से वॉलफोर्ट सिटी जाने के लिए अपने स्कूटी में पैसे लेकर जा रहा था. तभी सूंदर नगर मदर प्राइड स्कूल के पास स्कूटी सवार दो लोग आए और अपने आप को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर धीरेंद्र मिश्रा से लाइसेंस मांगने लगे और कहने लगे कि तुमको क्राइम ब्रांच के आफ़िस आना पड़ेगा. इसके बाद धीरेंद्र मिश्रा के पास रखे साढ़े 26 लाख को अपने पास रख लिया और उसे चकमा देकर फरार हो गए।
इस मामले में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का बयान भी सामने आया है. उनका कहना है कि क्राइम ब्रांच के भंग का जबरदस्त प्रचार हुआ है. आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लेंगे. हर व्यक्ति के पीछे पुलिस नहीं लगाया जा सकता है. किसके दिमाग में क्या घूम रहा ये नहीं कहा जा सकता है।
पुरानी बस्ती सीएसपी कृष्णा पटेल का कहना है कि नवीन अग्रवाल स्टील का बिजनेस करते हैं. समता कॉलोनी में उनका ऑफिस है. वॉलफोर्ट सिटी में उनका घर है. कंपनी का कैसियर है धीरेंद्र मिश्रा 26 लाख 50 हजार लेकर वॉलफोर्ट जा रहा था. उसी बीच में दो अज्ञात व्यक्ति आकर उनसे गाड़ी रोकने के लिए बोले और दोनों अपने आप को क्राइम ब्रांच का सिपाही बताकर 26 लाख 50 हजार की धोखाधड़ी कर फरार हो गए हैं. आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. आउटर इलाकों पर नाकेबंदी का पॉइंट दिया गया है. हुलिया बताया गया है उसी के आधार पर जितनी गाड़ियां जा रही सब की चेकिंग की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि लाखेनगर चौक के पास वॉलफोर्ट सिटी में रहने वाले व्यापारी के साथ धोखाधड़ी उस वक्त हुई जब वह ऑफिस जाने के लिए निकल था. सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है. नाकेबंदी भी की गई है. आउटर एरिया में पुलिस की टीम लगातार सर्चिंग कर रही है।
पुलिस का ये भी कहना है कि व्यापारी को दो व्यक्तियों ने रोककर कहा कि सामने चैकिंग चल रही है आप अपना बैग हमें दे दीजिए. पीड़ित ने 26 लाख रुपयों से भरा बैग आरोपियों को दे दिया. जिसके बाद बैग लेकर आरोपी फरार हो गए।
बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सीजीपीएससी सिविल जज एग्जाम और रिजल्ट को निरस्त करने का आदेश दिया गया है. हाईकोर्ट ने पीएससी को फिर से बिना फीस लिए सिविल जज का एग्जाम कराने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच में हुई है।
प्रश्नपत्र में गड़बड़ी के चलते सिविल जज परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. साथ ही पीएससी को नए सिरे से परीक्षा लेने का आदेश दिया है.दरअसल सीजीपीएससी के अधिकांश प्रश्नों में गलतियां थी. इसे लेकर 8 से अधिक परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. सीजीपीएससी सिविल जज की यह परीक्षा मई 2019 में हुई थी।
याचिकाकर्ता की वकील अंचल कुमार मात्रे ने बताया कि करीब 6 महीने पहले हुई परीक्षा को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है और पीएससी को अपने व्यय पर फिर से परीक्षा कराने का आदेश दिया है. उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए जज ने पाया कि प्रश्नपत्र में 70 प्रतिशत गड़बड़िया थी. जिस पर याचिका कर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए इस परीक्षा को निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया है।
उन्होंने बताया कि मुख्य याचिकाकर्ता कुमार सौरभ, नुसरत तहसीन कादरी है. सिविल जज के लिए निकली 39 पदो की भर्ती के लिए करीब 8 हजार लोगों ने फार्म भरा था जिसमें से 47 सौ लोगों ने परीक्षा दी थी।
बता दें कि हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर कहा गया था कि पीएससी ने मॉडल आंसर में की गई आपत्ति के बावजूद गलत उत्तर के आधार पर नतीजे जारी किए हैं. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 6 फरवरी 2019 को विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत सिविल जज (प्रवेश स्तर) के 39 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. 7 मई 2019 को ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा हुई थी.
रायपुर। राजधानी रायपुर में आज एक ओर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू लाॅ एंड आर्डर की समीक्षा कर रहे थे, तभी शहर में एक कारोबारी से साढ़े 26 लाख रूपए धोखाधड़ी किए जाने की खबर सामने आ गई. राजधानी पुलीस घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल हरकत में आयी और तत्काल चारों तरफ़ घेराबंदी करके आरोपी की तलाश में जूट गयी है।
जानकारी के मुताबिक राजधानी के कुशालपुर इलाके में नंदन टीएमटी ग्रुप के कर्मचारियों से धोखाधड़ी की बड़ी वारदात हुई है. बताया जा रहा है कि ग्रुप के चार कर्मचारी बड़ी रकम लेकर जा रहे थे, ठीक उस दौरान दो लोगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया है।
बताते हैं कि आरोपियों ने क्राइम ब्रांच से होने का हवाला देते हुए रकम जप्त किया और इस रकम का ब्यौरा मांगते हुए कहा कि थाने आकर हिसाब देकर ले जाना.पीड़ित कर्मचारियों ने इस धोखाधड़ी की शिकायत डीडी नगर थाने में की है. पुलिस इस मामले की विवेचना में जुट गई है।
रायगढ़। रायगढ़ में एक अनोखी चोरी का मामला सामने आया है। जहां चोर हीरे, जवाहरात या नकदी नहीं, बल्कि किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्र चुराकर ले गए। जी हां, पिछले दिनों धान खरीदी को लेकर केंद्र से चल रही तनातनी के कारण कांग्रेस ने किसानों का हस्ताक्षर अभियान चलाया था। इन पत्रों को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजने वाली थी। लेकिन इसके पहले ही अज्ञात चोर ने दस हजार पत्र चुरा लिए।
हम आपको बता दें कि धान बोनस को लेकर के कांग्रेस द्वारा एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। इसे केंद्र सरकार को भेजने के लिए कमेटी द्वारा आज रायपुर भेजना था। यह कार्ड रायपुर से दिल्ली जाता इससे पहले चोरों को भनक लग गई।अभियान हस्ताक्षर वाले अलमारी में रखे 10000 साइन वाले फार्म को अज्ञात चोरों ने चोरी कर लिया और मात्र अलमारी में 100 पीस शेष बचे फॉर्म को छोड़ कर रफूचक्कर हो गए। इसके अलावा एक एलईडी टीवी को निशाना बनाकर चलते बने।
दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज मानहानि मामले में फैसला सुनाते हुए उनकी माफी को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया को बंद कर दिया है। वहीं ऐसे लोगों को चेतावनी दी हैए जो बिना सोचे.समझे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अपने राजनीतिक हित साधते हैं। अदालत ने राहुल गांधी को भविष्य के लिए चेताया।
आपको बता दें कि चौकीदार चोर है बयान पर राहुल ने माफी मांग ली थी। शीर्ष अदालत ने राहुल गांधी के माफीनामे को स्वीकर करते हुए राहुल गांधी को नसीहत दी कि भविष्य में कोर्ट से जुड़े किसी भी मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक भाषण देने में सतर्कता बरतें। अदालत ने राफेल मामले को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए शीर्ष अदालत का नाम लिया था। जिसे लेकर ही पूरा विवाद था।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोईए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिए लंबित इस मामले पर 10 मई को सुनवाई पूरी कर ली थी। अदालत ने राहुल गांधी को भविष्य में अदालत से जुड़े किसी भी मामले में किसी भी तरह का राजनीतिक भाषण देने में सतर्कता बरतने के लिए कहा है। राहुल गांधी की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा था कि कांग्रेस नेता ने शीर्ष अदालत के हवाले से टिप्पणी करने को लेकर माफी मांग ली है। वहीं भाजपा नेता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि राहुल की माफी को अस्वीकार करना चाहिए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
बता दें कि यह याचिका भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने उनके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी चौकीदार चोर है मामले में दर्ज कराई थी। उन्होंने इस अवमानना याचिका को उच्चतम न्यायालय से जोडक़र दाखिल किया थी। अदालत ने इसपर सुनवाई के बाद 10 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी को गलत ठहराया था। राहुल गांधी ने इस बयान को लेकर अदालत से इसे अनजाने में दिया गया बताते हुए माफी भी मांगी थी।
दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने लोगों को बैंक में खाता खोलने में आने आ रही परेशानियों को देखते हुए एक बड़ी राहत दी है।
सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड में पता अलग होने पर भी केवल एक स्वघोषणा पत्र देकर लोग खाता खुलवा सकते हैं।अधिसूचना के मुताबिक अब जो लोग अपना केवाईसी के लिए आधार नंबर दे रहे हैं और पता कोई और देना चाहते हैं जो आधार कार्ड पर लिखे पते से अलग है तो एक स्वघोषणा पत्र देकर अपना दूसरा पता दे सकेंगे।सरकार के इस फैसले से मूल निवास से दूर रहने वाले या दूसरी जगह काम करने वाले लाखों कामगारों को फायदा होगा।
बुधवार को जारी राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग सूचनाओं के रोकथाम अधिनियम में संशोधन कर ये बदलाव किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसे कामगार जहां रहते हैं उन्हें बैंक खाता खोलने में दिक्कत होती थी क्योंकि आधार पर पता उनके घर का होता था और काम किसी दूसरे शहर में करते थे।
सरकार ने प्रवासियों को बैंक खाता खुलवाने में सहूलियत देने तथा वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। इस पहल के लिए कई क्षेत्रों से लंबे समय से मांग की जा रही थी।
दिल्ली। भारतीय सेना में पहली बार किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है। लेफ्टिनेंट कर्नल ज्योति शर्मा को भारतीय सेना की महिला न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। वह सैन्य कानूनी विशेषज्ञ के रूप में पूर्वी अफ्रीकी देश सेशेल्स की सरकार को अपनी सेवाएं देंगी।यह पहला मौका है जब भारतीय सेना में किसी महिला न्यायाधीश को नियुक्त किया गया है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि इससे पहले किसी भी महिला को न्यायाधीश के तौर पर भारतीय सेना में नियुक्त नहीं किया गया था। ज्योति शर्मा विदेश से जुडे मामले देखेंगी। गौरतलब है कि भारत में न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी का पद सेना के लेफ्टिनेंट को दिया जाता है। ये सेना का न्यायिक प्रमुख होते हैं। भारतीय सेना की न्यायाधीश एडवोकेट जनरल एक अलग शाखा है। इसमें कानूनी रूप से योग्य सेना के अधिकारी शामिल होते है। गौरतलब है कि एडवोकेट जनरल अधिकारी सभी तरह से सेना को कानूनी मदद देते हैं।
शादीशुदा महिलाओं का सेना में प्रतिबंध
गौरतलब है कि भारतीय सेना ने अपनी कानूनी शाखा न्यायाधीश एडवोकेट जनरल में आवेदन करने के लिए विवाहित महिलाओं पर प्रतिबंध लगाया है। इसे लेकर अदालत में याचिका भी दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में सेना ने अपने पक्ष को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सेना चाहती है कि महिलाए कठिन ट्रेनिंग को बिना किसी छुट्टी के पूरा करें। बता दें कि इस मामले में कानून की छात्रा कुश कालरा ने अदालत में याचिका दाखिल कर सेना से जवाब मांगा था। जिसपर जवाब देते हुए सेना की ओर से कहा गया कि विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कारणों से प्रतिबंधित किया गया है। क्योंकि शादी के बाद उन्हें लंबी छुट्टियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में शादी के बाद वो प्री कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी नहीं कर सकती हैं। हालांकि ये सिर्फ एडवोकेट जनरल के पद तक ही सीमित नहींए है बल्कि सेना के किसी भी विभाग में शादीशुदा लड़कियों को नौकरी नहीं दी जा सकती है।
दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को सबरीमाला मंदिर मामले को सुनवाई के लिए सात जजों की पीठ के पास भेज दिया है। हालांकि न्यायालय ने बड़ी पीठ में सुनवाई के बाद फैसला आने तक अपना पूर्व में दिया गया फैसला लागू रखने का निर्णय दिया है। सीजेआई ने गुरुवार को कहा कि पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश केवल इस मंदिर तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के मस्जिदों और परसी मंदिर में प्रवेश को लेकर भी है। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य धर्म और विश्वास पर बहस को पुनर्जीवित करना था। पीठ ने कहा कि धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध केवल सबरीमला तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य धर्मों में भी ऐसा है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपनी ओर से तथा न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की ओर से फैसला पढ़ा। शीर्ष अदालत ने 3रू2 के बहुमत से पुनर्विचार याचिकाओं को बड़ी बेच को स्थानांतरित किया है। जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसपर असहमति जताई। मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश पर बड़ी बेंच का फैसला आने तक अदालत का पूर्ववर्ती फैसला लागू रहेगा। पीठ ने कहा कि सबरीमलाए मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं में खतना जैसे धार्मिक मुद्दों पर फैसला वृहद पीठ लेगी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता धर्म और आस्था पर बहस फिर से शुरू करना चाहते हैं। सबरीमला मामले पर फैसले में न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन और डीवाई चंद्रचूड़ की राय अलग थी।मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का हवाला देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को सबरीमला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक समान नीति बनाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे धार्मिक मुद्दों पर सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सबरीमला मामले में पुनर्विचार समेत सभी अन्य याचिकाएं उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजीं। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को 4 के मुकाबले एक के बहुमत से फैसला दिया था जिसमें केरल के सुप्रसिद्ध अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 की आयुवर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया गया था। फैसले में शीर्ष अदालत ने सदियों से चली आ रही इस धार्मिक प्रथा को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था। इस फैसले के बाद लगभग पूरे केरल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने 4रू1 की सहमति से यह फैसला सुनाते हुए विशेष उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न करने देने को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। अदालत के फैसले से पहले केरल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।