Blog

  • आपदा प्रबंधन के 50 हजार घूस के नाग ने रायगढ कलेक्ट्रेट के बाबू की नौकरी को डसा…

    आपदा प्रबंधन के 50 हजार घूस के नाग ने रायगढ कलेक्ट्रेट के बाबू की नौकरी को डसा…

    रायगढ़ कलेक्ट्रेट में राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा के एक बाबू को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उस समय गिरफ्तार किया, जब वह सर्पदंश से मृत महिला के परिजन से रिश्वत की गारंटी के रूप में ₹50 हजार का हस्ताक्षरित चेक ले रहा था। ACB के अनुसार, रिश्वत की रकम की बजाय गारंटी के तौर पर हस्ताक्षरित चेक मांगकर रिश्वतखोरी का यह पहला मामला है।

    सर्पदंश मुआवजे के लिए मांगी थी रिश्वत

    पुसौर तहसील के ग्राम बुलाकी निवासी विजय सिदार ने ACB बिलासपुर से शिकायत की थी कि उनकी पत्नी रामकुमारी की वर्ष 2023 में सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। शासन की राहत योजना के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन मामला कलेक्ट्रेट रायगढ़ में लंबित था। शिकायत के अनुसार, राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ बाबू राजकुमार सिदार ने मुआवजा राशि जल्द बैंक खाते में जारी कराने के एवज में ₹50 हजार की रिश्वत मांगी। आरोपी ने यह भी कहा कि मुआवजा मिलने तक ₹50 हजार का हस्ताक्षरित चेक गारंटी के तौर पर जमा करना होगा।

    शिकायत सही मिली, जाल बिछाकर पकड़ा

    ACB ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद मंगलवार 28 जुलाई को जाल बिछाया गया। जैसे ही आरोपी बाबू ने शिकायतकर्ता से ₹50 हजार का हस्ताक्षरित चेक लिया, ACB टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

    भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

    आरोपी राजकुमार सिदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    इसलिए असामान्य

    यह मामला इसलिए भी असामान्य है क्योंकि आरोपी ने नकद रिश्वत लेने के बजाय हस्ताक्षरित चेक को “गारंटी” के रूप में मांगा था। ACB का कहना है कि इस तरह की रिश्वतखोरी का यह अब तक का पहला मामला सामने आया है।

  • करेले के ढेर में छिपे कोबरा ने युवक को डसा, सिम्स में हालत नाजुक…

    करेले के ढेर में छिपे कोबरा ने युवक को डसा, सिम्स में हालत नाजुक…

    बिलासपुर। नेहरू नगर स्थित साप्ताहिक सब्जी बाजार में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब करेला खरीद रहे एक युवक को सब्जियों के ढेर में छिपे एक जहरीले कोबरा सांप ने डस लिया। इस घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया और दहशत के मारे लोग इधर-उधर भागने लगे। घायल युवक को गंभीर अवस्था में सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

     

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहतराई निवासी बिहारी साहू नेहरू नगर के साप्ताहिक बाजार में सब्जी खरीदने गए थे। जब वे एक दुकान पर करेला छांट रहे थे, तभी करेलों के बीच छिपा कोबरा अचानक फन फैलाकर बाहर निकला और उनके हाथ पर डस लिया। सांप के डसते ही युवक चीख पड़ा, जिसे सुनकर आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।

     

    स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल बिहारी साहू को तत्काल सिम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल युवक की स्थिति नाजुक बनी हुई है। वहीं, इस अप्रत्याशित घटना के बाद से सब्जी बाजार में व्यापारियों और ग्राहकों के बीच काफी दहशत का माहौल है।

  • साथी ट्रेनी IPS का किया शारीरिक शोषण, प्राइवेट वीडियो बना कर किया ब्लैकमेल, आरोपी ट्रेनी अफसर की तलाशी शुरू…

    साथी ट्रेनी IPS का किया शारीरिक शोषण, प्राइवेट वीडियो बना कर किया ब्लैकमेल, आरोपी ट्रेनी अफसर की तलाशी शुरू…

    तेलंगाना में ट्रेनी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक महिला ट्रेनी IPS अधिकारी की शिकायत के बाद आरोपी ट्रेनी IPS अधिकारी मुलागानी उदय कृष्णा रेड्डी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। महिला अधिकारी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने लंबे समय तक उसका यौन उत्पीड़न किया, शारीरिक हमला किया, उसकी जानकारी के बिना प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड किया और उसी वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है।

    हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद से फरार आरोपी

    तेलंगाना पुलिस के अनुसार, मुलागानी उदय कृष्णा रेड्डी ने हाई कोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने और गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की थी। लेकिन अदालत से उसे अंतरिम राहत नहीं मिली। इसके बाद पुलिस जब पूछताछ के लिए नोटिस देने उसके दोनों बताए गए पतों पर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद मिला। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश के लिए मैनहंट शुरू कर दिया। इस मामले की जांच इंस्पेक्टर ज्योत्सना कर रही हैं, जबकि पूरी जांच की निगरानी SHE Teams की डीसीपी लावण्या नाइक जाधव कर रही हैं। डीसीपी ने महिला ट्रेनी IPS अधिकारी का बयान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अकादमी के अधिकारियों की मौजूदगी में दर्ज किया।

    महिला ट्रेनी IPS ने लगाए गंभीर आरोप

    करीब 30 वर्षीय महिला ट्रेनी IPS अधिकारी ने शिकायत में कहा कि 23 जून से आरोपी उसे इंस्टेंट मैसेजिंग एप पर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेज रहा था। वह अकादमी में उसके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां भी करता था। महिला अधिकारी का आरोप है कि आरोपी ने उस पर दूसरे ट्रेनी अधिकारी के साथ संबंध होने का झूठा आरोप लगाया और उसे इसे स्वीकार करने का दबाव बनाया। शिकायत के अनुसार, 9 जुलाई को आरोपी ने उसे जबरन अपने कमरे में ले जाकर बाल पकड़कर मारपीट की, गला दबाने की कोशिश की, चाकू गर्दन पर रखकर डराया और बाहर नहीं जाने दिया। अगले दिन भी उसके साथ मारपीट की गई। महिला अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी जानकारी और सहमति के बिना उसका प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे उसके पति को भेजकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की।

    कई गंभीर धाराओं में केस, अकादमी से किया गया सस्पेंड

    शिकायत के आधार पर अत्तापुर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें महिला की मर्यादा भंग करने की कोशिश, यौन उत्पीड़न, पीछा करना, गलत तरीके से बंधक बनाना, चोट पहुंचाना, आपराधिक धमकी और महिला का अपमान करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की गोपनीयता के उल्लंघन और यौन स्पष्ट सामग्री से जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं। प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) ने आरोपी ट्रेनी अधिकारी को प्रशिक्षण से निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है।

    शिकायत के बाद आत्महत्या करने का किया गया दावा

    मामला दर्ज होने के अगले दिन आरोपी ने कथित तौर पर अधिक मात्रा में शराब पी ली और बेहोश हो गया था। उसके भाई और दोस्तों ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शुरुआत में आत्महत्या की कोशिश की आशंका जताई गई, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि गैस्ट्रिक जांच में कोई असामान्य चीज नहीं मिली। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल कथित सुसाइड नोट को लेकर पुलिस ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। दूसरी ओर आरोपी ने सोशल मीडिया पोस्ट में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताते हुए कहा है कि उसे न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और उसे विश्वास है कि सच सामने आएगा। अस्पताल से आरोपी को दो दिन बाद छुट्टी दे दी गई थी। बाद में कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत की याचिका खारिज की जिसके बाद से पुलिस उसकी तलाशी कर रही है।

  • कार के साथ बह गए कारोबारी पति-पत्नी, मूसलाधार बारिश में पार कर रहे थे नाला, रायगढ़ में तलाश जारी…

    कार के साथ बह गए कारोबारी पति-पत्नी, मूसलाधार बारिश में पार कर रहे थे नाला, रायगढ़ में तलाश जारी…

     रविवार शाम सारंगढ़ के एक व्यवसायी दंपत्ति की कार अनियंत्रित होकर नाला में गिर गई और तेज बहाव से गहरे पानी में जाने से पति-पत्नी लापता हो गए। घटना की सूचना पर पुलिस व रेस्क्यू टीम देर शाम तक तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला है। वहीं आज सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू की। बता दें कि सुबह से टीम शव की खोजबीन में जुटी हुई है।

     अनियंत्रित होकर नाले में गिरी कार

    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सारंगढ़ थाना क्षेत्र के घोटला बड़े निवासी देवनारायण पटेल पत्नी सविता पटेल के साथ रविवार सुबह किसी व्यवसायिक काम से सारंगढ़ गए थे। दोपहर में मूसलाधार बारिश होने से शाम को दोनों कार में सवार होकर घर लौट रहे थे। शाम करीब 6 बजे माधोपाली-बांधापाली के बीच बहने वाला लात नाला के पुराने पुल को पार कर रहे थे, तभी पुल पर एक बड़ी लकड़ी होने के कारण उससे बचते हुए आगे निकले तो कार अनियंत्रित होकर नाला में गिर गई। तेज बारिश के कारण नाला में अधिक बहाव होने से कार काफी दूर बह गई।

    देर शाम तक रेस्क्यू टीम करती रही तलाश

    आस-पास के लोगों ने कुछ देर बाद देखा कि नाला के गहरे पानी में कार तैर रही है तो इसकी सूचना सारंगढ़ पुलिस को दी। इससे पुलिस व रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से कार कार को बाहर निकाला गया, लेकिन उसमें सवार देवनारायण पटेल व उनकी पत्नी सविता पटेल का पता नहीं सका। पुलिस का कहना है कि अंधेरा होने व पानी का बहाव तेज होने से तलाश रोकी गई है। सुबह में फिर से खोज बीन की जाएगी।

    प्रशासन ने लोगों से की अपील

    हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफनते नालों और पुलों को पार करने का जोखिम न उठाएं तथा जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और गोताखोरों की मदद से लापता दंपती की तलाश जारी है।

  • तीन नगर पंचायतों में सीएमओ नहीं, मातहतों को बनाया प्रभारी…

    तीन नगर पंचायतों में सीएमओ नहीं, मातहतों को बनाया प्रभारी…

    रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बड़े शहर तो बढ़े, लेकिन छोटे कस्बे भी तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते गए हैं। शहरी निकायों की संख्या भी बढ़ती गई। लेकिन सरकार इन संस्थाओं को हमेशा दोयम दर्जे का ही मानती आई। यही कारण है कि आधे से अधिक नगर पंचायतों में मातहतों को सीएमओ जैसा पद दिया। रायगढ़ ऐसे तीन नगर पंचायत हैं। शहरी निकायों के नाम पर केवल प्रदेश में केवल नगर निगमों को ही गिना जाता है। बाकी को सरकार बैसाखी का सहारा देकर चला रही है। प्रदेश में कुल 194 नगरीय निकाय हैं। इनमें कुल 14 नगर निगम, 59 नगर पालिका और 121 नगर पंचायत हैं।

    इनमें से 82 में मातहत कर्मचारियों को सीएमओ का प्रभार दिया गया है। 17 नगर पालिका परिषद और 65 नगर पंचायत ऐसे हैं जहां सहायक ग्रेड-2 को भी सीएमओ बनाया गया है। विवादों में रहने वाली पोस्टिंग पर सरकार भी कोई सख्त फैसला नहीं कर पा रही है। कई बार तो ऐसा हो गया है कि जिस निकाय में भ्रष्टाचार के कारण अधिकारी निलंबित हुआ था, कुछ समय बाद उसकी पोस्टिंग वहीं हो गई। वर्तमान में रायगढ़ जिले के नपं किरोड़ीमल नगर में देवेंद्र सिंह सीएमओ हैं जो सहायक राजस्व निरीक्षक हैं।

    इसी तरह नपं धरमजयगढ़ में प्रभाकर शुक्ला को सीएमओ बनाया गया है जो राजस्व उप निरीक्षक हैं। इन निकायों में विकास कार्यों को लेकर विवाद और भ्रष्टाचार इसीलिए होता है क्योंकि काम पर इनका नियंत्रण ही नहीं होता। इस तरह की पदस्थापना के पीछे तगड़ी लॉबिंग होती है।

  • स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन! अतिरिक्त वसूली के आरोप में मित्तल कैंसर अस्पताल 3 महीने के लिए सस्पेंड…

    स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन! अतिरिक्त वसूली के आरोप में मित्तल कैंसर अस्पताल 3 महीने के लिए सस्पेंड…

    स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत योजना के तहत नामांकित मरीजों से अतिरिक्त नकद राशि वसूलने के मामले में कांपा (लोधीपारा) स्थित ‘मित्तल कैंसर अस्पताल’ पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने अस्पताल को योजना से तीन महीने के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस अवधि में अस्पताल में योजना के तहत किसी भी नए मरीज का कैशलेस इलाज नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन को मरीज से वसूले गए 90 हजार रुपए लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।

    Ayushman Bharat News: योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन

    स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मरीज अल्बर्ट एक्का के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मित्तल अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूले हैं। संयुक्त संचालक (जेडी) स्वास्थ्य की जांच में शिकायत सही पाई गई। अस्पताल ने परिजनों से दवाइयों के लिए 15226 रुपए और सर्जरी के नाम पर 90000 रुपए एक्स्ट्रा लिए थे। परिजनों के विरोध दर्ज कराने पर अस्पताल ने दवाइयों की रकम तो चेक के जरिए लौटा दी थी, लेकिन सर्जरी के पैसे यह कहकर नहीं लौटाए कि आयुष्मान का पैकेज कम है। अधिकारियों ने इसे योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना।

    नए मरीज भर्ती करने पर होगी कार्रवाई

    स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि अवधि के दौरान यदि अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत नया मरीज भर्ती किया तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अस्पताल परिसर में लगी योजना से संबंधित सभी प्रचार-प्रसार सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में भर्ती मरीजों को पूरा इलाज देकर ही डिस्चार्ज करने को कहा गया है।

  • ‘CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों पर एक्शन नहीं होगा, नाबालिग रिहा होंगे,’ सुप्रीम कोर्ट का आदेश…

    ‘CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों पर एक्शन नहीं होगा, नाबालिग रिहा होंगे,’ सुप्रीम कोर्ट का आदेश…

    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चले आंदोलन में शामिल होने वाले प्रोटेस्टर्स को बड़ी राहत मिली है. मंगलवार, 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि वे डिटेन या गिरफ्तार किए गए 18 साल के कम उम्र के बच्चों को रिहा करें. इसके अलावा, बिना क्रिमिनल हिस्ट्री वाले प्रोटेस्टर्स को भी छोड़ने का हुक्म दिया गया है. अंतरिम राहत के तौर पर सर्वोच्च अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर और कई दूसरे राज्यों में CJP प्रोटेस्ट में शामिल स्टूडेंट्स के खिलाफ दर्ज किसी भी FIR के मामले में कोई जबरदस्ती की कार्रवाई ना की जाए.

    भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों पर सुरक्षाबलों की कथित ज्यादती के मामलों को सुना. CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले प्रोटेस्टर्स को कोर्ट के आदेश से राहत नहीं मिलेगी.

    केंद्र और राज्यों को नोटिससुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच हाई-पावर्ड कमेटी से कराने का संकेत दिया. शीर्ष अदालत ने केंद्र और महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सरकारों को भी नोटिस जारी किए. जांच के दौरान सुरक्षाबलों पर हमलों के आरोपों को भी जांचा जाएगा.

    पुलिस पर सख्त टिप्पणीसुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि आंदोलनों के समय पुलिस को नए प्रोटोकॉल की जरूरत है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. बेंच ने कहा,

    “पूरी तरह से इंडिपेंडेंट जांच होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है तो जांच का कोई मतलब नहीं है.”

    सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में हो रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़े सभी CCTV, ड्रोन, बॉडी-कैमरा, वायरलेस कम्युनिकेशन और PCR रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. प्रोटेस्ट करने वालों का पर्सनल डेटा पब्लिश करने पर रोक लगा दी है.

    सुरक्षाबलों पर गंभीर आरोपCJP प्रोटेस्ट के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई. दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रोटेस्टर्स पर लाठियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े. सुरक्षाबलों पर प्रोटेस्टर्स के खिलाफ जरूरत से ज्यादा फोर्स इस्तेमाल करने का आरोप लगा. इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं.

  • ‘मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी..’, बीजेपी सांसद की बेटी प्रधान के खिलाफ पोस्‍ट? मच गया बवाल…

    ‘मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी..’, बीजेपी सांसद की बेटी प्रधान के खिलाफ पोस्‍ट? मच गया बवाल…

    नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर देशभर में पिछले 40 दिनों से प्रदर्शन जारी थी. छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद छात्र खुशी से झूम उठे. प्रधान के इस्तीफे का लोगों ने अपने तरीके से जश्न मनाया. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर स्‍टोरी लगाई तो कई लोगों ने पोस्‍ट किए. इन्हीं सब में बीजेपी के नेता की बेटी की एक पोस्ट जमकर वायरल हो रही है, जिसमें वह प्रधान के इस्तीफे पर अपनी खुशी जाहिर कर रही है.

    ओडिशा के भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर की पोस्ट इस समय हर जगह वायरल है . उनकी इस पोस्ट पर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं, इसके साथ ही तारीफ भी कर रहे हैं कि भले ही बीजेपी सांसद की बेटी है. इसके बाद भी उसने पोस्‍ट की हे. हालांकि उनकी इस पोस्ट ने बीजेपी में खलबली मचा दी है. पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उनका पोस्ट सुर्खियों में बना हुआ है.

    अर्चना ने क्या किया था पोस्ट
    आर्चिता ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर को तिरंगा झंडा लगाकर शेयर की थी. जिसमें उन्होंने लिखा, ‘Dharmendra Pradhan resigns amid massive student protests over NEET leak fiasco.’.

    आर्चिता की यह पोस्ट जैसे ही सामने आई. शुरुआत में लगा कि आईडी हैक हो चुकी है. हालांकि इसके बाद आर्चिता की एक और पोस्ट आई जिसने साफ कर द‍िया कि यह उन्‍होंने ही की है. नीट पेपर लीक विवाद के बीच प्रधान के इस्तीफे को लेकर की गई इस टिप्पणी पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की है जताई. कई लोग यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि पार्टी परिवार के समान होती है, परिवार के लिए इस तरह के शब्दों का यूज नहीं करना चाहिए. हालांकि बाद में उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिएक्टिवेट हो गया.

    नहीं करूंगी पोस्ट डिलीट-आर्चिता
    आर्चिता की सोशल मीड‍िया पोस्‍ट जैसे ही सामने आई तरह-तरह के बयान सामने आने लगे. इसके साथ ही परिवार यानी की मां अपराजिता सारंगी ने भी पोस्ट हटाने को कहा. लेकिन आर्च‍िता ने ऐसा करने से साफ इनकार कर द‍िया. उन्‍होंने यह भी लिखा कि उनके ऊपर पोस्ट डिलीट करने का बहुत दबाव है लेकिन वो ऐसा नहीं करेगी. हालांकि अब अर्चिता का अकाउंट डीएक्टिवेट हो गया है.

    प्रधान के समर्थन में उतरी अपराजिता सारंगी
    विवाद बढ़ने के बाद शनिवार रात को अपराजिता सारंगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में बयान दिया. उन्होंने लिखा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना बेहद साहस का काम है. वह इस कठिन समय में धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी हैं. हालांकि सांसद कार्यालय के असिस्टेंट धनेश्वर बारिक ने बेटी का बचाव किया. उन्‍होंने कहा आज के समय में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है.

  • ध्रुव राठी और कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके की बातचीत….

    ध्रुव राठी और कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके की बातचीत….

    नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी और “कॉकरोच जनता पार्टी” के प्रमुख अभिजीत दीपके के बीच हुई वीडियो कॉल बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है और लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर समर्थक और आलोचक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स इसे सामान्य बातचीत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं।

    कौन हैं ध्रुव राठी

    ध्रुव राठी जर्मनी के बर्लिन में रहने वाले एक लोकप्रिय भारतीय यूट्यूबर, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और राजनीतिक टिप्पणीकार हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर अपने शिक्षाप्रद वीडियो के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ ही वे अक्सर भारतीय सरकार और समाज की आलोचना करते हैं लाखों लोग उनके वीडियो देखते हैं प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व समर्थक से वे उनके मुखर आलोचक बन गए और इतिहास, राजनीति और वैश्विक मामलों की गहन पड़ताल करते हुए वर्तमान घटनाओं पर अपनी राय रखते हैं. यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफार्मों पर लाखों लोग उनके वीडियो देखते हैं.

    मीडिया में आई रिर्पोट की मानें तो वो हर महीने अपने वीडियो से 50 से 60 लाख तक कमाते हैं औऱ साथ ही रिपोर्ट के अनुसार उनकी सालाना इनकम 7.5 करोड़ रुपये है. दीपके बोले- हमें कॉकरोच कहने के लिए CJI का शुक्रिया केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान के इस्तीफे लिए दीपके ने CJI सूर्यकांत का शुक्रिया अदा किया। दीपके बोले- अगर आपने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो युवा सड़कों पर नहीं होते। प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता।

    अभिजीत ने यह भी कहा- हम कॉकरोच हैं। एक बार घुस जाएं, तो आसानी से निकलते नहीं। अभी सिर्फ एक इस्तीफा हुआ है। कॉकरोच से पंगा मत लो। दरअसल, यह पूरी कहानी 72 दिन पहले CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी से शुरू हुई थी। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने कहा था- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। कॉकरोच वाली टिप्पणी ने ही अनजाने में इस आंदोलन को इसकी पहचान देने वाला प्रतीक दिया था। विरोध का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल शब्द को छात्रों ने अपना लिया।

    सोशल मीडिया पर कॉकरोच इमोजी की बाढ़ आ गई, रातों-रात मीम्स बनने लगे, कलाकारों ने कार्टून बनाए और कैंपस में व्यंग्यात्मक पोस्टर घूमने लगे। दीपके ने इस अपमान को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में बदल दिया, जो पहले एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पेज के तौर पर शुरू हुई थी और बाद में छात्र आंदोलन का चेहरा बन गई। जब इसका एक सोशल मीडिया अकाउंट हटा दिया गया, तो यह “कॉकरोच इज बैक” नाम से दूसरे अकाउंट के साथ लौटा, जिसकी टैगलाइन थी – “कॉकरोच कभी नहीं मरते।”

    CJP ने सड़क नहीं, डिजिटल रास्ते को चुना अतीत के कई छात्र आंदोलनों के विपरीत, इसने सड़कों पर उतरने से पहले ऑनलाइन जोर पकड़ा। CJP तेजी से देश के सबसे बड़े डिजिटल समुदायों में से एक बन गया। आज CJP के इंस्टाग्राम पर लगभग 2.63 करोड़ (26.3 मिलियन) फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 1.48 करोड़ (14.8 मिलियन) और BJP के 95 लाख (9.5 मिलियन) फॉलोअर्स हैं।

    CJI का यह बयान सामने आया तो इसका विरोध होने लगा। नेताओं, लोगों और सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर आलोचना होने लगी। अगले ही दिन यानी 16 मई को CJI सूर्यकांत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक इवेंट में शामिल होने जबलपुर पहुंचे। वहां उन्होंने कॉकरोच वाले कमेंट पर सफाई दी। CJI सूर्यकांत ने कहा- यह कहना पूरी तरह बेबुनियाद है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की। यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने एक मामूली मामले की सुनवाई के दौरान मेरे ओरल कमेंट्स को गलत तरीके से पेश किया। मैंने उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली और फर्जी डिग्री के साथ कानूनी पेशे में आए थे। लेकिन मामला बहुत आगे बढ़ चुका था।

    16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। उस दिन से 25 जुलाई तक यानी करीब 72 दिन में इस बयान के बाद बनी CJP देश में सबसे ज्यादा चर्चा में रही।

    ऐसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी

    16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। इंस्टाग्राम पर भी अकाउंट बनाया। एक वेबसाइट भी बनाई गई। X पर एक गूगल फॉर्म जारी हुआ। इसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ लिखी एक तस्वीर के साथ कैप्शन था- ‘सभी कॉकरोचों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया जा रहा है। अगर आप जॉइन करना चाहते हैं, तो लिंक पर क्लिक करें। पार्टी जॉइन करने के लिए 4 जरूरी योग्यताएं बताई गईं- ‘अनइम्प्लॉइड, लेजी, क्रॉनिकली ऑनलाइन, एबिलिटी टू रैंट प्रोफेशनली।’ इसके बाद लोग लगातार CJP से जुड़ रहे हैं।

    17 से 20 मई तक कॉकरोच पार्टी के फॉलोअर्स लगातार बढ़े, लेकिन 21 मई को इसके अकाउंट बंद कर दिए गए। इसी दिन कॉकरोच इज बैक नाम से दूसरा अकाउंट बन गया। 22 मई को सबसे पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया। 24 मई को वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन जारी की गई। इस पर प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले 10 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।

    आज भी रजिस्टर्ड नहीं है CJP

    कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके इसके फाउंडर हैं। वही दीपके जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के लीडर रहे हैं।

    कब क्या क्या हुआ?

    3 मई- नीट-यूजी का आयोजन हुआ, 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए।

    12 मई – पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट-यूजी को रद कर दिया गया।

    24 जुलाई- केंद्र और सीजेपी के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधान के इस्तीफे पर जोर दिया। पार्टी से इस्तीफे तक… 10 तारीखें

    15 मई – कोर्ट की टिप्पणी बनी ट्रिगर

    16 मई – सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी

    4 जून – पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में आह्वान

    6 जून – नई दिल्ली में सीजेपी के पहले प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए दीपके भारत आए, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई।

    20 जून – सीजेपी ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू किया। 28 जून – सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की।

    18 जुलाई – वांगचुक को हटाया गया

    20 जुलाई – संसद मार्च, पहली वार्ता

    24 जुलाई – 26 दिन बाद केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म की।

    25 जुलाई – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आंदोलन की सबसे बड़ी जीत

  • CGPSC घोटाले में ED की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से होगी जांच; CM साय बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ BJP की जीरो टॉलरेंस नीति….

    CGPSC घोटाले में ED की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से होगी जांच; CM साय बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ BJP की जीरो टॉलरेंस नीति….

    रायपुर. सीजीपीएससी घोटाला मामले में (CGPSC SCAM) अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है. टामन सिंह सोनवानी से रिमांड अवधि के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूछताछ की जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भाजपा  सरकार को करप्शन मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने वाला बताया.

    करप्शन मामले में भाजपा की जीरो टॉलरेंस की नीति : CM साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में प्रदेश के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ था. प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से सीजीपीएससी घोटाले की जांच का वादा किया था. हमारी (भाजपा) पार्टी करप्शन के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है. उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में कोई भी अपराध करेगा तो कठोर कार्रवाई की जाएगी. जो भी दोषी पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई हो रही है.

    मन की बात में छ्त्तीसगढ़ का जिक्र

    प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में आज छत्तीसगढ़ का जिक्र हुआ. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री छग का जिक्र करते हैं. बीते दिनों बस्तर पण्डुम, मल्हार का ताम्र पत्र का जिक्र मन की बात हुई थी. पीएम मोदी ने इस एपिसोड में कैच द रैन अभियान में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कोरबा का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने गणेश चतुर्थी में अपने गांव से बनी से बनी मिट्टी की मूर्ति घर लाने का आव्हान किया.

    बीजेपी के लिए देश सर्वोपरि है : CM साय

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा को लेकर रविवार को सीएम साय ने कहा कि बीजेपी के लिए देश सर्वपरि है. धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है. वह संगठन के प्रभारी भी रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी सिद्धांतवादी पार्टी है. हम जनता की सेवा और देश की सेवा के लिए सरकार में आते हैं. धर्मेंद्र प्रधान प्रदेश के संगठन के प्रभारी भी रहे हैं.