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  • छत्तीसगढ़ मेँ IPS अधिकारीयों का थोक मेँ तबादला,जानें किसे कंहा भेजा गया…

    छत्तीसगढ़ मेँ IPS अधिकारीयों का थोक मेँ तबादला,जानें किसे कंहा भेजा गया…

    अजय कुमार यादव बने आईजी, राजनांदगांव रेंज।

    सुनील शर्मा को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का नया एसपी नियुक्त किया गया।

    अजय कुमार यादव बने आईजी, राजनांदगांव रेंज।

    बालाजी राव सोमावर को पुलिस मुख्यालय भेजा गया।

    प्रशांत कुमार अग्रवाल भी पुलिस मुख्यालय में पदस्थ।

    चंद्रमोहन सिंह बने दंतेवाड़ा के नए एसपी।

    हरीश राठौर कोरिया के नए एसपी होंगे।

    भावना पांडेय को धमतरी का एसपी बनाया गया।

    राय गौरव रामप्रवेश को बलौदाबाजार-भाटापारा की जिम्मेदारी मिली।

    उमेश प्रसाद गुप्ता बीजापुर के एसपी होंगे।

    मयंक को सुकमा का एसपी बनाया गया।

    संदीप कुमार पटेल नारायणपुर के एसपी नियुक्त किए गए।

    जितेंद्र कुमार यादव को कबीरधाम का एसपी बनाया गया

    योगेश कुमार पटेल को सूरजपुर और चव्हाण किरण गंगाराम को बलोद का एसपी बनाया गया।

  • मंच से BJP विधायक शकुंतला पोर्ते ने कहा – मेरा बस चले तो पूरे क्षेत्र को शराब मुक्त कर दूं… वीडियो वायरल

    मंच से BJP विधायक शकुंतला पोर्ते ने कहा – मेरा बस चले तो पूरे क्षेत्र को शराब मुक्त कर दूं… वीडियो वायरल

    सूरजपुर। प्रतापपुर की भाजपा विधायक शकुंतला पोर्ते का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विधायक पोर्ते शराबबंदी और नशामुक्त समाज को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखती नजर आ रही हैं। मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा बस चले तो पूरे विधानसभा क्षेत्र को शराब-मुक्त कर दूं।

    विधायक शकुंतला पोर्ते ने कहा कि किसी व्यक्ति पर यह दबाव नहीं बनाया जा सकता कि वह शराब का सेवन न करे, लेकिन समाज और परिवार की भलाई के लिए लोगों को स्वयं आगे आकर नशे से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने लोगों से शराब और अन्य बुरी आदतों को छोड़कर सकारात्मक जीवन अपनाने की अपील की।

    अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि यदि एक व्यक्ति भी गलत रास्ते पर जाने से बचता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। नशामुक्त समाज ही मजबूत और विकसित समाज की नींव है, जिससे क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।

    विधायक शकुंतला पोर्ते ने विधानसभा क्षेत्र को नशामुक्त बनाने की अपनी इच्छा जताई और लोगों से इस दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। विधायक शकुंतला पोर्ते के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर शराबबंदी की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं क्षेत्र में विधायक के इस विचार की खूब तारीफ हो रही है।

  • BSNL ने लॉन्च किया ₹1,34,166 का फोन, किसे इसकी जरूरत है, और यह क्या कर सकता है?

    BSNL ने लॉन्च किया ₹1,34,166 का फोन, किसे इसकी जरूरत है, और यह क्या कर सकता है?

    सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL ने भारत में एक नया सैटेलाइट फोन पेश किया है, लेकिन यह आम स्मार्टफ़ोन खरीदारों के लिए नहीं है। ₹1,34,166 (टैक्स सहित) की कीमत वाला यह हैंडसेट उन यूज़र्स के लिए बनाया गया है जो अक्सर ऐसी जगहों पर काम करते हैं, या यात्रा करते हैं, जहाँ पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क नहीं होते।

    सेल्युलर टावरों पर निर्भर रहने के बजाय, यह फ़ोन सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होता है, जिससे देश की सबसे दूर-दराज़ जगहों पर भी वॉइस कम्युनिकेशन संभव हो पाता है। यहाँ BSNL के नए सैटेलाइट फोन के बारे में सब कुछ बताया गया है – यह किसके लिए है, और इसकी कीमत इतनी ज़्यादा क्यों है।

    BSNL के सैटेलाइट फ़ोन में क्या खास है?

    आम स्मार्टफ़ोन के उलट, नया BSNL हैंडसेट एक इनमारसैट (Inmarsat) सैटेलाइट फ़ोन है, जिसे जरूरी कम्युनिकेशन (mission-critical communication) के लिए बनाया गया है। BSNL के अनुसार, यह डिवाइस डिफेंस, समुद्री ऑपरेशन, आपदा प्रबंधन, माइनिंग, दूर-दराज़ के इंडस्ट्रियल साइट्स और एडवेंचर ट्रैवल जैसे सेक्टर के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ अक्सर मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होती।

    इसकी सबसे बड़ी खासियत सैटेलाइट कनेक्टिविटी है, जो यूज़र्स को पारंपरिक मोबाइल टावरों की पहुँच से बाहर होने पर भी वॉइस कॉल करने की सुविधा देती है। इस हैंडसेट में SOS इमरजेंसी सपोर्ट फीचर, मुश्किल हालात में भी काम करने लायक मज़बूत डिज़ाइन और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए अच्छी बैटरी लाइफ़ भी मिलती है।

    क्योंकि यह फोन ज़मीनी नेटवर्क के बजाय सीधे सैटेलाइट से कम्युनिकेट करता है, इसलिए यह उन अलग-थलग इलाकों में भी काम करता रहता है, जहाँ आम टेलीकॉम सर्विस काम नहीं करतीं।

    इसे कौन और कैसे खरीद सकता है?

    उम्मीद है कि यह सैटेलाइट फोन आम स्मार्टफ़ोन रिटेलर्स या ऑनलाइन मार्केटप्लेस के ज़रिए नहीं बेचा जाएगा। जैसा कि TechDekhoji ने X पर बताया है, इच्छुक खरीदारों को सीधे BSNL से संपर्क करना होगा और बताना होगा कि वे इसका इस्तेमाल किसलिए करना चाहते हैं, क्योंकि सैटेलाइट फोन आम ग्राहकों के बजाय खास कामों के लिए होते हैं।

    BSNL ने इस डिवाइस की कीमत ₹1,34,166 (सभी टैक्स सहित) रखी है। ज़्यादा जानकारी चाहने वाले ग्राहक कंपनी से संपर्क कर सकते हैं, या खरीद से जुड़ी जानकारी और ज़रूरी शर्तों के लिए अपने नज़दीकी BSNL ऑफ़िस जा सकते हैं।

  • नाबालिग लड़की ने कार से तीन लोगों को कुचला : पुलिस ने पिता को बनाया सह आरोपी, हाईकोर्ट ने माना सही

    नाबालिग लड़की ने कार से तीन लोगों को कुचला : पुलिस ने पिता को बनाया सह आरोपी, हाईकोर्ट ने माना सही

    बिलासपुर। सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत के मामले में नाबालिग बेटी को वाहन की चाबी देने वाले पिता की याचिका को हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपी पिता रायगढ़ निवासी घनश्याम महिलाने के खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को निरस्त करने से इनकार कर दिया है। घटना 30 अक्टूबर 2025 की है।

    रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कापू रोड स्थित छाल मोड़ खमहार के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। इसमें कार की चपेट में आने से 3 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें एक महिला और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई, दुर्घटना के समय कार को आरोपी घनश्याम महिलाने की नाबालिग बेटी लापरवाहीपूर्वक चला रही थी। मामले में पिता को पुलिस ने सह आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक यह जानते हुए भी कि बेटी नाबालिग है, कार की चाबी सौंपने और उसे गाड़ी चलाने की अनुमति देना खतरनाक है।

    सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरी कार्यवाही निरस्त करने की मांग
    पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 105 व धारा 3 ( 5 ) और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199, 184,3/181 व 4/181 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। मामले में घनश्याम महिलाने की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि, याचिकाकर्ता न तो वाहन का पंजीकृत मालिक है और न ही दुर्घटना के समय गाड़ी चला रहा था।

    अधिवक्ता ने घटना स्थल के पास के एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी कैमरे के फूटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया, घटना के समय गाड़ी नाबालिग बेटी नहीं, बल्कि अभिषेक भास्कर नामक बालिग व्यक्ति चला रहा था और बेटी बगल की सीट पर बैठी थी। याचिकाकर्ता शासकीय कर्मचारी है और एकतरफा जांच के कारण उसके कैरियर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, उसके खिलाफ पूरी कार्यवाही निरस्त की जाए।

    हाईकोर्ट साक्ष्यों का परीक्षण या मिनी ट्रायल नहीं कर सकता
    मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट साक्ष्यों का परीक्षण या मिनी ट्रायल नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता द्वारा पेश किया गया सीसीटीवी फूटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट उसके बचाव का हिस्सा है। इनकी प्रमाणिकता और सत्यता का फैसला निचली अदालत में ट्रायल के दौरान ही हो सकता है।

    डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस चार्जशीट में स्पष्ट आरोप है कि पिता ने जानते हुए, नाबालिग को चाबी सौंपी थी। प्रथम दृष्टया अपराध की सामग्री मौजूद होने के कारण कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के संज्ञान लेने के आदेश को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह अपनी सभी दलीलें ट्रायल कोर्ट के समक्ष रख सकता है।

  • CG : पुलिसकर्मी की बेटी पर चोरी का आरोप, आहत में सुसाइड …

    CG : पुलिसकर्मी की बेटी पर चोरी का आरोप, आहत में सुसाइड …

    कोरिया। जिले के बैकुंठपुर में 17 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद परिजनों ने IC मार्ट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित मार्ट को सील कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, छात्रा अपनी बड़ी बहन के साथ IC मार्ट में खरीदारी करने गई थी। परिजनों का आरोप है कि दोनों पर चोरी का आरोप लगाकर काफी देर तक रोका गया। दावा किया गया है कि उनसे सामान की सूची बनवाई गई और छात्रा से लिखित रूप में यह स्वीकार भी कराया गया कि उसने और उसकी बहन ने दुकान से चोरी की है।

    मृतका के पिता, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, का कहना है कि जब वे मार्ट पहुंचे तो उनसे पहले 20 हजार और बाद में 50 हजार रुपये देने की मांग की गई। उनका यह भी आरोप है कि छात्रा की स्कूटी भी मार्ट प्रबंधन ने अपने कब्जे में रख ली और पैसे दिए बिना लौटाने से इनकार कर दिया। परिवार का कहना है कि घटना के बाद छात्रा गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी। बुधवार 8 जुलाई दोपहर उसने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि कथित अपमान, दबाव और वसूली की मांग से आहत होकर छात्रा ने यह कदम उठाया।

  • बड़े पैमाने में कई जिलों के निरीक्षकों के तबादले,DGP ने जारी किया आदेश,देखें लिस्ट…

    बड़े पैमाने में कई जिलों के निरीक्षकों के तबादले,DGP ने जारी किया आदेश,देखें लिस्ट…

    छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 64 निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) के तबादले के आदेश जारी किए हैं। पुलिस स्थापना बोर्ड की अनुशंसा पर जारी इस आदेश के तहत अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर भेजा गया है।

  • वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

    वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

    बिलासपुर। सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, दो आईएएस अफसरों समेत चार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है।

    याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत पात्र भू-विस्थापितों को भत्ता या अन्य लाभ उपलब्ध नहीं कराए गए। याचिका में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के अलावा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो तथा डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। मामला सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़ा है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की तकरीबन 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस प्रक्रिया में 800 से अधिक परिवारों ने अपनी जमीन दी थी।भू-विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत प्रभावित परिवारों को नौकरी अथवा नियमानुसार भत्ता दिया जाना था, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। 2013 में प्लांट शुरू हुआ और तीन साल के भीतर वर्ष 2016 में बंद हो गया। याचिका के अनुसार, एथेना पावर प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन वित्तीय संकट के चलते वर्ष 2016 में इसे बंद करना पड़ा। बाद में वर्ष 2022 में वेदांता ग्रुप ने इस प्लांट का अधिग्रहण किया और वर्ष 2025 में इसका संचालन दोबारा शुरू किया*न तो रोजगार मिला न नियमानुसार भत्ताभू-विस्थापितों का आरोप है कि प्लांट दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही नियमानुसार भत्ता उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि वे बीते 13 वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित हैं। भू-विस्थापित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों की ओर से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। तकरीबन दो वर्ष बाद हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य शासन को मामले के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थेहाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने प्लांट प्रबंधन को पत्र जारी कर पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद आगे का पालन नहीं किया गया

  • सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना काफ़ी नहीं, जब तक लोगों को ठोस नतीजे न मिलें 00 बारिश में बिजली आपूर्ति ठप होने पर जनहित याचिका पर सुनवाई

    सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना काफ़ी नहीं, जब तक लोगों को ठोस नतीजे न मिलें 00 बारिश में बिजली आपूर्ति ठप होने पर जनहित याचिका पर सुनवाई

    बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने जरा सी बरसात में बिलासपुर शहर की बिजली सप्लाई ध्वस्त होने के मामले में स्वयं संज्ञान लिया है।सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बिजली सप्लाई में किसी तरह की रुकावट या पानी भरने की शिकायत होने पर, तुरंत सुधार के उपाय किए जाएंगे ताकि बिना किसी देर के शिकायत का समाधान हो सके। मॉनिटरिग के लिए अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

    कोर्ट ने कहा कि, इस मामले में बिजली विभाग एवं नगर निगम की ओर से जवाब पेश किए जाने के बाद अब अधिकारियों को यह पक्का करना होगा कि मौजूदा मानसून सीजन के दौरान, म्युनिसिपल लिमिट के अंदर पब्लिक सड़कों, गलियों और दूसरे इलाकों में ऐसा पानी जमा न हो, बारिश के पानी के फ्री फ्लो के लिए ड्रेनेज सिस्टम की ठीक से सफाई और मेंटेनेंस हो, और जहां तक हो सके बिना रुकावट बिजली सप्लाई बनी रहे।गौरतलब है कि पिछले दिनों बारिश होने से आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी* घंटों बाद सुधार किया जा सका ।कई इलाकों में रात भर बिजली सप्लाई बाधित रही। हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए बिजली विभाग एवं नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था*शिकायतें जल्दी दूर करने बन रहा सिस्टमइस नोटिस पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने बिजली डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को मजबूत करने और खराब मौसम में बिजली सप्लाई को तुरंत बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी* बताया गया कि, खराब सीमेंट के खंभों को लोहे के खंभों से बदलने, इमरजेंसी इक्विपमेंट और मैनपावर बढ़ाने, दो नए सप्लाई ज़ोन बनाने, कमजोर कंडक्टरों को बदलने के लिए फंड मंजूर करने, और सबस्टेशन बनाने, और मेंटेनेंस के लिए और लोगों को रखने, और कंज्यूमर की शिकायतों को जल्दी दूर करने के लिए एक सिस्टम बनाने के अलावा, बिना रुकावट बिजली सप्लाई के लिए बेहतर इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन पक्का करने के लिए कदम उठाए गए हैं*बहुत कुछ किया जाना बाकीविभाग के जवाब पर हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्बारा प्रस्तावित और शुरू किए गए उपायों को बताते हुए एफिडेविट फाइल किए जाने के बावजूद, इस कोर्ट का मानना है कि, प्रस्तावित उपायों को ज़मीनी स्तर पर असरदार तरीके से लागू करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है* सिर्फ़ एक्शन प्लान बनाना तब तक काफ़ी नहीं होगा जब तक कि, वे बिलासपुर के निवासियों के फ़ायदे के लिए ठोस नतीजे न दें* इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार के एनर्जी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, सीएसपीडीसीएल के मैनेजिग डायरेक्टर और बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने-अपने एफिडेविट में बताए गए फैसलों को लागू करने पर खुद नज़र रखें और इस कोर्ट के पहले के निर्देशों के मुताबिक हुई प्रोग्रेस और उठाए गए ठोस कदमों को बताते हुए नए एफिडेविट फाइल करें* बिजली सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट या पानी भरने की शिकायत होने पर, तुरंत सुधार के उपाय किए जाएंगे ताकि बिना किसी देरी के शिकायत का समाधान हो सके।

  • खरसिया के श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के विरुद्ध मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, जिला शिक्षा अधिकारी की बड़ी कार्रवाई…

    खरसिया के श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के विरुद्ध मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा, जिला शिक्षा अधिकारी की बड़ी कार्रवाई…

    बीईओ के औचक निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं, शोकाज नोटिस का स्कूल प्रबंधन ने जवाब भी नहीं दिया 

    किताब, कॉपी और गणवेश की बिक्री से लेकर छात्रवृत्ति, यू-डाईस प्लस और अपार आईडी में अनियमितताओं सहित कई मामलों में मिली खामियां

    रायगढ़। जिले के एक निजी स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी बीईओ के औचक निरीक्षण से खरसिया के बाम्हनपाली स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) के संचालन में अनियमितताएं सामने आई थी, जिस पर स्कूल प्रबंधन को शोकाज नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया था। परंतु निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में निजी विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी), विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) एवं बीआरसी को निजी विद्यालयों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जाता है कि इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी खरसिया द्वारा ग्राम बाम्हनपाली स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत किया गया। इधर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच प्रतिवेदन के आधार जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित शैक्षणिक संस्थान को शोकाज नोटिश जारी किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया है। जिसके आधार पर विद्यालय के विरुद्ध बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उसकी मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की कार्यवाही के लिए आगे प्रेषित की गई है।

    छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति योजना का लाभ उपलब्ध नहीं कराया

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्वयं के प्रकाशन की पाठ्यपुस्तकों और कॉपियों का सीधे विद्यार्थियों एवं पालकों को विक्रय किया जा रहा था। पुस्तकों और कॉपियों पर विद्यालय का नाम मुद्रित पाया गया। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में ही विद्यार्थियों को गणवेश भी बेचा जा रहा था, जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम एवं शासन के निर्देशों के अनुसार इस प्रकार की व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।

    जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 230 विद्यार्थियों में से किसी भी छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति योजना का लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। विद्यालय द्वारा एक भी पात्र विद्यार्थी की छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं कराई गई, जिससे शासन की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह प्रभावित पाया गया।

    यू-डाईस प्लस पोर्टल में दर्ज आंकड़ों में भी गंभीर विसंगतियां

    निरीक्षण के दौरान यू-डाईस प्लस पोर्टल में दर्ज विद्यार्थियों के आंकड़ों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। विद्यालय में कक्षा 9वीं और 10वीं में वास्तविक रूप से मात्र 10-10 विद्यार्थी अध्ययनरत पाए गए, जबकि पोर्टल पर कक्षा 9वीं में 66 तथा कक्षा 10वीं में 33 विद्यार्थियों की ऑनलाइन प्रविष्टि दर्ज थी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अन्य विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर उनके पेन (परमानेंट एजुकेशन नंबर) एवं अपार आईडी तैयार किए गए। इस संबंध में पूर्व में जारी स्पष्टीकरण नोटिस का भी विद्यालय द्वारा निर्धारित अवधि में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
    जिला प्रशासन को यह शिकायत भी प्राप्त हुई कि पालकों द्वारा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) मांगे जाने पर विद्यालय प्रबंधन अनावश्यक रूप से टालमटोल करता है और समय पर टीसी जारी नहीं करता। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों से ‘इनफिनिटी मोबाइल एप्लीकेशन’ के नाम पर पाठ्यपुस्तकों के साथ 1300 से 2000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि वसूले जाने की भी पुष्टि जांच में हुई।

    यूथ एवं ईको क्लब सहित अन्य गतिविधियों का विद्यालय में प्रभावी संचालन नहीं

    जांच में यह भी पाया कि शासन के निर्देशानुसार संचालित किए जाने वाले यूथ एवं ईको क्लब सहित अन्य गतिविधियों का विद्यालय में प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा था। समग्र जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा शासन की विभिन्न गाइडलाइन एवं निर्देशों की लगातार अवहेलना की जा रही है।

    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के विपरीत पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का विक्रय

    जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर अभिमत व्यक्त किया है कि विद्यालय द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का विक्रय किया जा रहा है। विद्यालय की पुस्तकें एवं गणवेश स्थानीय बाजार अथवा ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पालकों को विवश होकर विद्यालय से ही सामग्री खरीदनी पड़ती है। साथ ही छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजना का क्रियान्वयन नहीं करना, यू-डाईस प्लस पोर्टल में कथित फर्जी प्रविष्टियां करना तथा शासन के निर्देशों की लगातार अनदेखी करना अत्यंत गंभीर अनियमितताएं हैं।

    जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जिले में निजी विद्यालयों द्वारा शासन के नियमों एवं विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार सभी निजी विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी में जुटी एजेंसी…

    महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी में जुटी एजेंसी…

    महादेव सट्टा ऐप से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. जहां महादेव सट्टा ऐप संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है. उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है. चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था.

    महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार
    फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ को भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है. भारत सरकार ने गिरफ्तारी के बाद उसे वापस लाने के लिए ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण की तैयारियों में जुटी है. चंद्राकर को ओमान की राजधानी मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

    कौन है सौरभ चंद्राकर?

    सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है.
    सौरभ की एक जूस की दुकान भी थी. इससे पहले वह कपड़े की दुकान में काम करता था.
    2019 में वो दुबई गया और अपने एक दोस्त रवि उत्पल को भी बुलाया. इसके बाद उसने महादेव एप लांच किया और फिर धीरे-धीरे ऑनलाइन सट्टा बाजार का बड़ा नाम बन गया.
    महादेव सट्टा ऐप के नाम पर करीब 6000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया.

    क्या है महादेव सट्टा ऐप घोटाला?
    बता दें कि साल 2016 में छत्तीसगढ़ के रहने वाले सौरभ चंद्राकर, रवि उप्‍पल और अतुल अग्रवाल ने साल महादेव बुक ऐप लॉन्‍च किया था. जब यह ऐप लॉन्च हुआ तो शुरुआत में इसके जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी होती थी, जिस पर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ पोकर, तीन पत्‍ती, वर्चुअल गेम यहां तक की चुनाव को लेकर भी भविष्‍यवाणी पर दांव लगाया जाता था.

    इसके बाद साल 2020 में सौरभ चंद्राकर, रवि उप्‍पल और अतुल अग्रवाल ने हैदराबाद स्थित रेड्डी अन्ना नामक एक और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म को 1 हजार करोड़ रुपए में खरीदा. इसके बाद यूजर्स की संख्या में बंपर इजाफा हुआ और हजारों करोड़ का कारोबार होने लगा. साल 2022 में आयकर विभाग और ED ने जब इस पर शिकंजा कसा तो करीब 6000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे, जिसकी जांच की जा रही है.