Blog

  • छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष के भाई ने की आत्महत्या,मचा हड़कंप…

    छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष के भाई ने की आत्महत्या,मचा हड़कंप…

    छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा से एक बड़ी दुखद खबर सामने आ रही है. बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के भाई शेखर चंदेल (भाजपा नेता) ने सुसाइड कर लिया है. हालांकि इसके पीछे की क्या वजह थी ये सामने नहीं आ पाई है. उनका शव नैला रेलवे स्टेशन के पास मिला. सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया. बीजेपी नेता ने ऐसा कदम क्यों उठाया इसकी जांच की जा रही है.

    भाजपा नेता की रेलवे ट्रैक पर लाशः शेखर चंदेल की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ हैं. बताया जा रहा हैं कि शेखर चंदेल अपने राइस मिल से रात साढ़े 08 बजे पैदल निकले थे. मोबाइल में चर्चा करते हुए जा रहे थे. जिसके बाद रात लगभग 10 बजे ट्रेन से युवक के कटने की सूचना मिली. शर्ट से मृतक की पहचान हो सकी. मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने में पुलिस जुट गई हैं.

    पूर्व नेता प्रतिपक्ष के छोटे भाई शेखर चंदेल वर्तमान में स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त के पद पर थे. जिला पंचायत सदस्य के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं. शेखर चंदेल की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हैं. रात से ही जिला अस्पताल परिसर में लोगो का आना जाना शुरू हो गया हैं.

  • छत्तीसगढ़ वाणिज्य व्याख्याता संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने महंगाई भत्ता के लिए सभी शिक्षक साथियों काे फेडरेशन के बैनर तले 27 सितम्बर काे आज एक दिवसीय आंदोलन के लिए किया आव्हान…

    छत्तीसगढ़ वाणिज्य व्याख्याता संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने महंगाई भत्ता के लिए सभी शिक्षक साथियों काे फेडरेशन के बैनर तले 27 सितम्बर काे आज एक दिवसीय आंदोलन के लिए किया आव्हान…

    छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के पदाधिकारियों के आह्नान पर प्रदेश के 100 से अधिक संगठनाे के साथ छत्तीसगढ़ वाणिज्य व्याख्याता संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णु प्रसाद साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष ममता वाडदे , गीता नायर, प्रदेश संचालक खाेमनलाल साहू प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे,प्रदेश संरक्षक श्री जगदीश दिल्लीवार ने प्रदेश के व्याख्याता एवं शिक्षक साथियों काे 11 सितम्बर की भांति 27 सितंबर काे महंगाई भत्ता के लिए एक दिवसीय सामुहिक अवकाश लेकर मोदी की गारंटी के तहत केंद्र के समान देय तिथि से 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता,जुलाई 2019 से  देय तिथि पर लंबित महंगाई भत्तों के एरियर्स राशि का जी पी एफ खाते में समायोजन करने एवं मध्यप्रदेश की भांति 300 दिवस अर्जित अवकाश नगदीकरण,चार स्तरीय समयमान वेतनमान,केंद्र के समान गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृत करने की मांगों को लेकर 27 सितंबर, 2024 दिन शुक्रवार को कलम बन्द- काम बंद हड़ताल किया जा रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बाल यौन शोषण सामग्री देखने पर भी होगी सख्त सजा, डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर कड़ा रुख!

    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बाल यौन शोषण सामग्री देखने पर भी होगी सख्त सजा, डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर कड़ा रुख!

    भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना भी एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। यह फैसला न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता लाता है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।

    फैसले की मुख्य बातें
    1. बाल यौन शोषण सामग्री देखना या डाउनलोड करना: अब POCSO (बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम) और IT अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होगा।


    भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना भी एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। यह फैसला न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता लाता है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।

    . बाल यौन शोषण सामग्री देखना या डाउनलोड करना: अब POCSO (बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम) और IT अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होगा।


    2. ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ शब्द का स्थान: अब इसे “बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री” (CSEAM) के नाम से संबोधित किया जाएगा।


    3. केंद्र सरकार से अध्यादेश की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत अध्यादेश लाने का आग्रह किया है।

    4. संसद से POCSO अधिनियम में संशोधन की सिफारिश: अदालत ने संसद से POCSO अधिनियम में आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया है, ताकि इसे अधिक सख्त और प्रभावी बनाया जा सके।

    यह निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय के उस पूर्व फैसले को खारिज करता है, जिसमें कहा गया था कि केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक कि इसे प्रसारित न किया जाए। इस नए फैसले ने अब इसे स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित कर दिया है, जिससे बाल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है।

    विशेषज्ञों की राय
    बाल अधिकार कार्यकर्ता रीना मिश्रा का मानना है, “यह फैसला बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को भी बढ़ाएगा।”

    साइबर कानून विशेषज्ञ अमित शर्मा ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “तकनीकी प्रगति के साथ-साथ बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक था। यह भविष्य में ऑनलाइन बाल शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।”


    अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
    भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर सख्त कानून बनाए हैं। वहां “प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट” (PECA) 2016 के तहत, बाल यौन शोषण सामग्री के मामलों में 7 साल तक की सजा और 50 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह स्पष्ट करता है कि इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए पड़ोसी देशों ने भी कड़े कदम उठाए हैं।

    भारत में मौजूदा कानूनी ढांचा
    POCSO अधिनियम: बाल यौन शोषण से संबंधित अपराधों के लिए मुख्य कानून।

    IT अधिनियम 2000: इस अधिनियम की धारा 67 और 67A के तहत अश्लील सामग्री का निर्माण, प्रकाशन, या वितरण दंडनीय है।

    भारतीय दंड संहिता (IPC): IPC की धारा 292, 293, 500, और 506 इस तरह के अपराधों को नियंत्रित करने में सहायक हैं।

    यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला डिजिटल युग में बाल सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। बच्चों के खिलाफ हो रहे ऑनलाइन अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और यह निर्णय इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल कानूनी प्रावधानों में स्पष्टता आएगी, बल्कि समाज में बाल सुरक्षा को लेकर एक नई जागरूकता भी विकसित होगी।

    हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। कानून बनाने भर से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक समर्पित और ठोस प्रयास ही इस कानून को सफल बना सकेगा।
    यह निर्णय हमें यह भी याद दिलाता है कि डिजिटल युग में बाल सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें मिलकर एक ऐसा समाज बनाना होगा, जहां हर बच्चा सुरक्षित, खुशहाल और अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त हो सके। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

    चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना या डाउनलोड करना POCSO के तहत अपराध माना जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह ‘चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूसिव मटेरियल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए. केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर इसमें बदलाव करे. अदालतें भी चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द का इस्तेमाल न करें।

  • पूर्व पार्षद सुनील अग्रवाल व नगर पालिका सूरजपुर के अधिकारी वासुदेव चौहान एवं उप यंत्री श्रीमती ओटा फफूल्ला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज…

    पूर्व पार्षद सुनील अग्रवाल व नगर पालिका सूरजपुर के अधिकारी वासुदेव चौहान एवं उप यंत्री श्रीमती ओटा फफूल्ला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज…

    सूरजपुर। डॉ डी०के० सोनी अधिवक्ता एवं आईटीआई कार्यकर्ता के द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूरजपुर के न्यायालय में सुनील अग्रवाल पूर्व पार्षद के रूप के विरुद्ध धारा 156(3) दंड प्रकरण संहिता के तहत मय दस्तावेजों के आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि सुनील अग्रवाल जो वर्ष 2013 में नगर पालिका परिषद सूरजपुर के निर्वाचित पार्षद थे के द्वारा ठेकेदार के रूप में वार्ड क्रमांक 13 बाडका पारा रोड से हार्ट बाजार तक सीसी रोड निर्माण का कार्य कराया गया था जिसकी शिकायत कलेक्टर सूरजपुर से की गई थी

    जिसमें जांच में यह पाया गया कि सुनील अग्रवाल के द्वारा निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है तथा जिस तरह का कार्य कराया थावह नहीं कराया गया एवं बिना कार्य कराए ही 2,27,882/- रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया गया है जिसके संबंध में माननीय कलेक्टर सूरजपुर के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 01/अ-89/13-14 शासन प्रति सुनील अग्रवाल चला था जिसमें शासकीय राशि का गबन प्रमाणित पाया गया था जिसके आधार पर सुनील अग्रवाल को छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41(3) के अंतर्गत नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत का आगामी अवधि अर्थात आदेश दिनांक से 5 वर्षों के लिए पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए अपात्र कर दिया गया।

    कलेक्टर के उपरोक्त आदेश से यह प्रमाणित हो गया कि ठेकेदार सुनील अग्रवाल पार्षद के द्वारा लोक सेवक होने के बाद भी वार्ड क्रमांक 13 में निर्मित सीसी सड़क बड़का पारा रोड से हार्ड बाजार तक के सीसी रोड निर्माण कार्य में कुल 2,27,882/- रुपए को बिना कार्य कराए फर्जी दस्तावेज तैयार कर एवं फर्जी बिल निकाल कर तथा फर्जी मूल्यांकन कराकर पूर्वी राशि सुनील अग्रवाल द्वारा ले लिया गया जो की स्पष्ट रूप से अपराधिक कृत्य में आता है तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने, कूट रचना करने तथा शासकीय राशि आहरण करने के संबंध में अपराधिक कृत्य किया गया है जो धारा 409, 420, 467, 468 भा०द०वि० के तहत दंडनीय अपराध है जिसके कारण सुनील अग्रवाल के विरुद्ध शासकीय राशि का गबन फर्जी दस्तावेज के आधार पर करने के संबंध में प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था।सुनील अग्रवाल के द्वारा नगर पालिका परिषद के निर्वाचित पार्षद पद पर होने के बाद भी ठेकेदार का कार्य किया गया तथा फर्जी दस्तावेज तैयार का शासकीय राशि का आहरण किया उक्त शासकीय राशि आहरण करने के संबंध में तथा अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता तथा तकनीकी की जांच रिपोर्ट कलेक्टर सूरजपुर के समक्ष दिनांक 27/9/2013 को प्रस्तुत किया गया था इसमें यह उल्लेख किया गया है कि सुनील अग्रवाल के द्वारा निर्माण कार्यों में काफी गड़बड़ी की है जिसके लिए सुनील अग्रवाल दोषी है।    

    उपरोक्त जांच प्रतिवेदन एवं दस्तावेज से यह  प्रमाणित होता है कि सुनील अग्रवाल के द्वारा फर्जी दस्तावेज के माध्यम से शासकीय राशि का गबन किया है जो की अपराधिक कृत्य है तथा अपराध अंतर्गत धारा 409,420 ,467, 468 भा०द०वि० के तहत दंडनीय है। जिसके लिए प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु दिनांक 14/2/2024 को थाना प्रभारी सूरजपुर को आवेदन लिखा गया जिसमें किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने के कारण दिनांक 27/3/2024 को पुलिस अधीक्षक सूरजपुर के समक्ष प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें किसी भी प्रकार के कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूरजपुर के न्यायालय 156(3) दंड प्रकरण संहिता का आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिस पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सूरजपुर श्री डी.एस. बघेल के द्वारा सुनवाई करने के उपरांत एवं प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद दिनांक 3/9/2024 को आदेश पारित करते हुए सुनील अग्रवाल के विरोध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज का अन्वेषण करते हुए शीघ्र अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।जिसके आधार पर थाना सूरजपुर के द्वारा अपराध क्रमांक 531/2024 अंतर्गत धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, 34 भा.द.वि. के तहत  सुनील अग्रवाल व नगर पालिका सूरजपुर के अधिकारी वासुदेव चौहान एवं उप यंत्री श्रीमती ओटा फफुल्ला टोप्पों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

  • दिल्ली में आर एस एस का आधुनिक भवन तैयार….

    दिल्ली में आर एस एस का आधुनिक भवन तैयार….


    ‌‌देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नया आधुनिक कार्यालय तकरीबन बन कर निर्मित हो गया है। दिल्ली में संघ के पूराने कार्यालय झंडेवालान को गिराकर 2.5 एकड़ भूमि पर बनायेंगे  संघ के कैशवकुंज में बहुमंजिला तीन टावर ओर आने-जाने के लिए 12-13- लिफ्ट है। टावर के प्रवेश द्वार पर एक एक्सरे मशीन,स्वागत कक्ष बनाया गया है। अति आधुनिक ओर नागापुर मुख्यालय से काफी बड़े तीन टावर वाले दिल्ली संघ कार्यालय केशव कुंज में,संघ के अनुषांगिक संगठनों के कार्यालय,स्वागत कक्ष के पास हनुमान मंदिर,संघ गणवेश सामग्री वितरण  के लिए भंडार केन्द्र,20 बैंड का अस्पताल,सभी सामान्य बीमारियों की जांचो के लिए आधुनिक मंशीनो वाली पैथोलॉजी लेब,अतिथि आवास बनाया गया है। समाचार पत्र ऑर्गनाइजर,पांचजन्य के आफिस सहित प्रकाशन विभाग,एक विश्व संवाद विभाग है। केशव कुंज प्रांगण में एक साथ तकरीबन 200 गाड़ियों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। दिल्ली संघ कार्यालय केशव कुंज की सूरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के जिम्मे सौंपने के संकेत मिले है।

    दिल्ली में संघ के केशव कुंज में 12 मंजिला पहली टावर में 80-90 कमरे,12फ्लोर,प्रत्येक फ्लोर 7-8 कमरों का निर्माण किया गया है। राजस्थानी शैली में निर्मित किए दूसरा टावर  4 मंजिला है। दूसरे टावर के एक फ्लोर में संघ सरसंघचालक मोहन भागवत का आवास,अन्य फ्लोर में संघ के बड़े राष्ट्रीय पदाधिकारियों के। संघ केशव कुंज के दूसरे से तीसरे टावर के बीच एक बड़ा मैदान,उसमें संघ स्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की मूर्ति स्थापित की गई है। जिसे संघ स्थान का नामकरण किया गया है।

  • शिक्षकों की कमी से परेशान स्कूली छात्राओं ने किया नगर पालिका का घेराव..देर शाम डीईओ ने की व्यवस्था..

    शिक्षकों की कमी से परेशान स्कूली छात्राओं ने किया नगर पालिका का घेराव..देर शाम डीईओ ने की व्यवस्था..


    खरसिया। नगर पालिका कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्कूली छात्राएं  विद्यालय में शिक्षिकों और भृत्यों की कमी को लेकर नारेबाजी करते हुए नगर पालिका कार्यालय का घेराव करने पहुंच गयी, जहां मुख्य नगर पालिका अधिकारी अनुपस्थित होने के कारण स्कूली छात्राओं के द्वारा नारेबाजी करते हुए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं एसडीएम खरसिया कार्यालय की ओर जाने लगे उक्त वाकये की जानकारी मिलते ही प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और आनन फानन में एसडीएम खरसिया ने तहसीलदार खरसिया एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी को स्कूली छात्राओं को समझाने हेतु भेजा। स्कूली छात्राओं के एसडीएम कार्यालय पहुंचने के पहले तहसीलदार एवं बीईओ ने छात्राओं से मिलकर उनसे चर्चा की और उनकी समस्याओं को शीघ्र समाधान करने का आश्वासन देते हुए उन्हें आधे रास्ते से ही वापस भेजने में सफलता पाई। 

    विदित हो कि स्थापना काल से ही शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का संचालन नगर पालिका परिषद खरसिया करते हुए आ रही है। तब इस विद्यालय में प्लेसमेंट एवं कुछ शासकीय शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा विद्यालय में अध्यापन कार्य सुचारू रूप से संचालित होते हुए आ रही थी, किंतु विगत कुछ माह पूर्व इस विद्यालय को राज्य शासन के अधीन किये जाने का आदेश आया और विद्यालय शिक्षा विभाग के अधीन होने के कारण विद्यालय में जो शिक्षिकाएं प्लेसमेंट के तहत अपनी सेवाएं दे रही थी उन्हें मुक्त कर दिया गया।  इस संबंध में नगर पालिका परिषद खरसिया के द्वारा अपने पीआईसी बैठक में उक्त विद्यालय में 04 शिक्षिकाओं को पदों पर कार्य करने हेतु स्वीकृति प्रदान करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा गया है, किंतु शासन को कोई दिशा निेर्देश प्राप्त नहीं होने के कारण नगर पालिका प्रशासन द्वारा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं के लिये शिक्षिकाओं की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। इस प्रकार शासन प्रशासन की ढुल मूल रवैये से परेशान होकर कन्या स्कूल के छात्राओं ने आज नगर पालिका, एसडीएम कार्यालय एवं बीईओ कार्यालय घेराव का मन बनाते हुए अपना आंदोलन का आगाज करते हुए सर्वप्रथम नगर पालिका परिसर पहुंचे जहां सीएमओ के अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें निराशा हाथ लगी किंतु वहां छा़त्राओं को जानकारी मिली कि शिक्षकों की व्यवस्था का कार्य कार्य एसडीएम एवं विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है, तब स्कूली छात्राओं ने नारे बाजी करते हुए तहसील कार्यालय मदनपुर की ओर रवाना हो गये। जब स्थानीय प्रशासन को स्कूली छात्राओं द्वारा अपने स्कूल में शिक्षकों के पदस्थापना को लेकर किये जा रहे नारेबाजी एवं एसडीएम एवं बीईओ कार्यालय के घेराव की जानकारी मिली तो तत्काल तहसीलदार एवं बीईओ स्कूली छात्राओं को समझाने निकल पड़े।  तब तक स्कूली छात्रायें हमालपारा पहुंच चुकी थी यदि कुछ और विलंब होता तो छात्राएं आज अपनी मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय एवं बीईओ कार्यालय पहुंच चुके होते, किंतु बीच रास्ते में ही तहसीलदार एवं बीईओ ने उनकी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए शीघ्र शिक्षिकाओं का व्यवस्था करने का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर छात्राओं ने अपना आंदोलन समाप्त कर अपने अपने घर लौटे तब कहीं जाकर प्रशासन की सांस में सांस आई।



    इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील शर्मा  ने बताया कि  नगर पालिका में प्लेसमेंट कर्मचारियों को सेटअप में 96 कर्मचारियों की स्वीकृति थी जिसमें 7 शिक्षक स्वीकृत है जो कि 4 कन्या स्कूल के एवं 3 बाल मंदिर के  थे, उसी प्लेसमेंट का टेंडर हुआ है एवं उसी के तहत अनुबंध हुआ है। नगर पालिका परिषद की बैठक दिनांक 27.06.2024 को क्रमांक 19 में निर्णय लेकर हमने पुनः उक्त सेटअप के साथ प्रस्ताव पारित कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजा जा चुका है किंतु राज्य शासन द्वारा आज पर्यन्त हमें किसी प्रकार का कोई मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ है।

    विधायक मिले छात्राओं से

    उक्त घटना की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल खरसिया रेस्ट हाउस पहुंचे और स्कूली छात्राओं से मिले जहां छात्राओं के द्वारा उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराया गया, जिस पर उनके द्वारा तत्काल जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से तत्काल शिक्षकों तथा भृत्यों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, जिस पर देर शाम जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा 5 शिक्षकों तथा 2 भृत्यों की व्यवस्था कर दी गयी।

    तहसीलदार ने दी जेल भेजने की धमकी
    छात्राओं के साथ रैली में कुछ युवा नेता भी चल रहे थे। रैली को रोककर तहसीलदार और बीईओ ने समझाया गया, इस दौरान तहसीलदार लोमेस कुमार मिरी ने कहा कि नेताओं से कोई बात नहीं की जाएगी। केवल छात्राओं की बात सुनी जाएगी। इस दौरान उन्होंने युवकों को जेल भेजने की चेतावनी भी दी। बताया जा रहा है कि तेज गर्मी और उमस के कारण एक छात्रा को चक्कर आ गया। डॉ. डीपी पटेल के द्वारा उसका उपचार किया गया।

  • बैन कर दिया टेलीग्राम….

    बैन कर दिया टेलीग्राम….


    रूस से जंग के बीच यूक्रेन सरकार ने टेलीग्राम पर बैन लगा दिया है। यूक्रेन की नेशनल सेक्यूरिटी एंड डिफेंस काउंसिल ने इसका एलान करते हुए कहा ‘सरकारी और सेना के अधिकारियों का टेलीग्राम इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि रूस इसका इस्तेमाल जासूसी के लिए कर सकता है। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए टेलीग्राम को बैन किया जा रहा है।’

  • गुरुवार को बालको एयर स्ट्रिप पर बड़ा हादसा टला, रनवे पर उछला विमान”मंत्री ओपी चौधरी ने किया निरीक्षण…

    गुरुवार को बालको एयर स्ट्रिप पर बड़ा हादसा टला, रनवे पर उछला विमान”मंत्री ओपी चौधरी ने किया निरीक्षण…

    रायगढ़। बीते गुरुवार दोपहर को बालको एयर स्ट्रिप पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह और प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी जिस विमान में सवार थे, वह लैंडिंग के दौरान रनवे पर दो बार उछल गया। पायलट की सूझबूझ से विमान को तुरंत टेक ऑफ किया गया और सावधानीपूर्वक दूसरी बार लैंड किया गया।

    घटना गुरुवार दोपहर 2:30 बजे की है जब भाजपा के नेता दिवंगत डॉ. बंशीलाल महतो की पत्नी के दसवीं के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोरबा जा रहे थे। बालको एयर स्ट्रिप पर लैंडिंग के समय यह घटना घटी। विमान में सवार भाजपा पदाधिकारियों ने बताया कि रनवे की खराब हालत के कारण यह हादसा हुआ।

    मंत्री ओपी चौधरी ने घटना के बाद खुद एयर स्ट्रिप का निरीक्षण किया। रनवे की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और कलेक्टर व एसपी को बालको प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। मंत्री चौधरी ने पायलट से पूरी घटना की रिपोर्ट भी ली और पूरी स्थिति को समझा।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बालको एयर स्ट्रिप पर इस तरह की घटना हुई हो। 2022 में तत्कालीन डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के साथ भी ऐसा ही हादसा हुआ था, जब लैंडिंग के दौरान झटके महसूस किए गए थे, लेकिन तब इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

    सम्बंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश

    मंत्री चौधरी ने अधिकारियों को जल्द से जल्द रनवे की मरम्मत और निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • दिल्ली में 200 से ज्यादा सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का दावा, अब क्या करेगी सरकार?

    दिल्ली में 200 से ज्यादा सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का दावा, अब क्या करेगी सरकार?

    केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में दो अलग-अलग केंद्रीय सरकारी एजेंसियों के नियंत्रण में 200 से अधिक संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है। इसकी जानकारी तीन मंत्रालयों के अधिकारियों ने जांच समिति को दी है.

    दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसद की समिति को केंद्र सरकार के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में 200 से ज्यादा प्रॉपर्टी, जो दो अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के कंट्रोल में थीं, उन्हें वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया है। शहरी विकास और सड़क परिवहन सचिव और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने दूसरे मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त समिति को अपनी बातें बताईं।विपक्षी सदस्यों ने सचिवों से सवाल किया कि जब रेल मंत्रालय जैसे मंत्रालयों के पास खुद के नियम और ट्रिब्यूनल हैं, तो फिर ऐसे बिल की क्या जरूरत है?

    सूत्रों ने बताया कि विपक्षी सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि कई सरकारी एजेंसियों ने वक्फ बोर्ड के साथ जमीन के विवाद से जुड़े केस जीते हैं और जमीन भी उनके कब्जे में है। तो फिर इस बिल की क्या जरूरत है? सूत्रों ने बताया कि विपक्षी सदस्यों ने तीनों मंत्रालयों के अधिकारियों से बिल के नियमों के बारे में सवाल पूछे क्योंकि ये नियम उनके मंत्रालयों के कुछ कानूनों को खत्म कर सकते हैं।

    दिए गए ये सुझाव
    सूत्रों ने बताया कि विपक्ष के जवाब में, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुझाव दिया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वक्फ की संपत्ति का इस्तेमाल धार्मिक और कल्याणकारी कामों के लिए हो, न कि निजी फायदे के लिए। सूत्रों ने बताया कि दुबे ने कहा कि कुछ संपत्ति वक्फ संपत्ति के बजाय शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत भी आ सकती है। वहीं शहरी विकास मंत्रालय ने सुझाव दिया कि दिल्ली की नई राजधानी बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण ब्रिटिश काल (1911-1912 में) के दौरान किया गया था, लेकिन बाद में, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अधिग्रहित संपत्तियों में से कई को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया, जिसके कारण कई अदालती मामले सामने आए। वक्फ संपत्ति घोषित की गई संपत्तियों में भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के नियंत्रण में 108 संपत्तियां और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के नियंत्रण में 138 संपत्तियां शामिल हैं।

    राष्ट्रीय राजधानी के निर्माण के लिए कुल 341 वर्ग किलोमीटर भूमि का अधिग्रहण किया गया था और प्रभावित व्यक्तियों को उचित मुआवजा दिया गया था, इस दावे का सदस्यों ने विरोध किया था। सदस्य यह भी चाहते थे कि सरकार यह पता लगाए कि क्या दिल्ली में संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड द्वारा किए गए दावे 1954 के वक्फ अधिनियम में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद किए गए थे।

  • योगी सरकार का बड़ा एक्शन…

    योगी सरकार का बड़ा एक्शन…

    2.44 लाख कर्मचारियों का वेतन सरकार ने रोक दिया है

    कर्मचारियों को 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने को कहा गया था।

    अभीतक केवल 71% कर्मचारियों ने ही दिया था अपनी संपत्ति का ब्यौरा।

    जिन कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया उन सभी के वेतन रोक दिए गए हैं।

    मुख्य सचिव ने 31 अगस्त तक का दिया था समय, चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देने के दिए गए थे निर्देश।