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  • इस राज्य की शानदार पहल, स्कूलों में लड़कों को दिलाई जाएगी लड़कियों की इज्जत करने की शपथ

    इस राज्य की शानदार पहल, स्कूलों में लड़कों को दिलाई जाएगी लड़कियों की इज्जत करने की शपथ

    दिल्ली। देश में महिलाओं के खिलाफ लगातार अपराध हो रहे हैं. इसको लेकर न सिर्फ लोगों में गुस्सा है बल्कि कई राज्यों की सरकारें इसको रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं. अब दिल्ली सरकार ने नई पहल की है।

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि अब दिल्ली सरकार के स्कूलों और कॉलेजों में लड़कों को लड़कियों का सम्मान करने की शपथ दिलाई जाएगी. इसके साथ ही उनको महिलाओं का सम्मान करने के बारे में ट्रेंड किया जाएगा।

    केजरीवाल ने कहा कि यह फैसला दिल्ली के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों पर लागू होगा. कक्षा छह से बच्चों के लिए ये नियम लागू होगा. इसके मुताबिक लड़कों को शपथ लेनी होगी कि वे किसी भी लड़की के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेंगे।

  • इस वजह से फ्रांस ने अपने नागरिकों को भारत न जाने की दी सलाह

    इस वजह से फ्रांस ने अपने नागरिकों को भारत न जाने की दी सलाह

    दिल्ली। पूरे देश में इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून के बाद हालात बिगड़ गए हैं. खासकर पूर्वोत्‍तर के राज्यों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. इसको लेकर देश के साथ साथ विदेशी सरकारों को भी चिंता होने लगी है।

    फ्रांस की सरकार ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि वे भारत की यात्रा पर इन दिनों न जाएं. खास बात ये है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों में हालात बेहद खराब बने हुए हैं. हालात ये है कि असम में होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  और जापानी पीएम शिंजो आबे के कार्यक्रम को इस हिंसा की वजह से स्थगित करना पड़ा।

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी पूर्वोत्तर के खराब हालात के चलते अपना शिलॉन्‍ग का दौरा रद्द करना पड़ा. मेघालय में सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है. अब फ्रांस ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. फ्रांस सरकार ने कहा है कि भारत जाने से फिलहाल फ्रांसीसी नागरिक बचें।

  • ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी जैसी 21 दवाईयां होगी महंगी…50 प्रतिशत तक बढेंगे दाम…

    ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी जैसी 21 दवाईयां होगी महंगी…50 प्रतिशत तक बढेंगे दाम…

    ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी की दवाओं का रेट बढऩे जा रहा है। केंद्र सरकार ने 21 महत्वपूर्ण दवाओं के सिलिंग प्राइस में 50 फीसदी बढ़ोतरी की मंजूरी दी है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर NPAA ने शुक्रवार को कहा कि 21 महत्वपूर्ण दवाओं की सिलिंग प्राइस में एकबार 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है। सिलिंग प्राइस का निर्धारण सरकार करती है, वैसे दवाओं की कीमत कंपनी द्वारा बाजार के आधार पर किया जाता है।

    फॉर्मा सेक्टर लंबे समय से NPAA से कीमत रिवाइज करने की मांग कर रहा था। उनका कहना था कि दवाई बनाने में इस्तेमाल होने वाला रॉ कंपोनेंट महंगा हो गया है, इसलिए एकबार कीमत बढ़ाने की अनुमति दी जाए। दवाई बनाने में कई कंपोनेंट चीन से मंगाए जाते हैं और ट्रेड वॉर के कारण कीमतों में लगभग 200 फीसदी तक उछाल आया है।

    NPAA की तरफ से कहा गया कि ये सभी महत्वपूर्ण दवाएं हैं। इनका बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है और ये दवाएं देश के पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के लिए जरूरी हैं। दवा बनाने वाली कंपनियों ने कई बार सरकार से इनका प्रॉडक्शन बंद करने की अपील की, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया।

    नियम के अनुसार दवाओं की कीमत मार्केट के आधार पर तय की जाती है। कॉस्टिंग के आधार पर इसकी कीमत तय नहीं होती है। लेकिन, सरकार ने जरूरी दवाओं के लिए विशेष नियम बनाया है। इसकी उपलब्धता हर जगह है और ये बहुत सस्ती होती हैं।

  • गैंगरेप मामले में बिलासपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चार आरोपियों को मिली 30 साल की सजा

    गैंगरेप मामले में बिलासपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चार आरोपियों को मिली 30 साल की सजा

    बिलासपुर। बिलासपुर जिला न्यायालय ने नाबालिग से गैंगरेप मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को 30 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. बिलासपुर जिला न्यायालय के जज संजीव तामक ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है. मामले में पीड़िता की वकील प्रियंका शुक्ला ने बताया कि पुलिस में मामला दर्ज कराने पर पीड़ित परिवार को आरोपियों द्वारा धमकाया गया परेशान किया गया. क्योंकि पीड़िता गरीब मजदूर परिवार से थी. इसलिए मामले को लड़ने में परेशानी भी हुई, लेकिन न्याय की जीत हुई है.उन्होंने कहा कि मजदूर परिवार को लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला है. इस तरह की घटनाओं को रोकने बहुत सारे काम करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटना दोबारा घटे ही नहीं. गैंगरेप के आरोपी मनोज वाडेकर, नागेश्वर रजक, ईश्वर, चरण सिंह चौहान को एडीजे कोर्ट ने 30 साल की सजा सुनाई है. बता दें कि देवारीखुर्द के आदतन बदमाशों ने नाबालिग को 2015 में अपने हवश का शिकार बनाया था. पुलिस थाने में मामला 2017 में दर्ज हुआ था.
  • राजधानी के 3 अलग-अलग संस्थानों में इनकम टैक्स विभाग ने दी दबिश…

    राजधानी के 3 अलग-अलग संस्थानों में इनकम टैक्स विभाग ने दी दबिश…

    रायपुर। राजधानी रायपुर के गणेश राम नगर की 3 संस्थानों में इनकम टैक्स ने दबिश दी है. अम्बे सेल्स, परमार थ्रेड हाउस, कन्हैया थ्रेड हाउस के दफ्तरों में इनकम टैक्स विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है.जानकारी के अनुसार इन तीनों संस्थानों में वित्तीय लेन देन का सर्वे चल रहा है. संस्थानों का धागे और सिलाई संबंधित सामान का बड़ा कारोबार है. इनकम टैक्स विभाग की टीम अंदर जाकर दस्तावेजों की जांच कर रही है. फिलहाल अभी तक क्या कुछ कार्रवाई हुई इसका पता नहीं चल सका है.
  • कंपनी ने हर कर्मचारी को दिया 35 लाख का बोनस, खुशी के मारे रो पड़े कर्मचारी

    कंपनी ने हर कर्मचारी को दिया 35 लाख का बोनस, खुशी के मारे रो पड़े कर्मचारी

    दिल्ली। कंपनियां अक्सर अपने कर्मचारियों का बेहद ख्याल रखती हैं. ऐसी ही एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को इतना तगड़ा गिफ्ट दिया कि सबकी आंखे भर आईं.अमेरिका की एक रियल एस्टेट कंपनी ने अपने दो सौ के करीब कर्मचारियों को 70 करोड़ रुपये का बोनस दिया. खास बात ये है कि ये बोनस उनको बेहद चुपचाप और सरप्राइज के तौर पर दिया गया. अचानक इतना बड़ा गिफ्ट पाकर सभी कर्मचारी भावुक हो गए। दरअसल कंपनी ने अपने सभी कर्मियों को एक पार्टी में इनवाइट किया फिर एक लिफाफे में सभी कर्मचारियों को 50 हजार डॉलर यानि करीब 35 लाख रुपये गिफ्ट कर दिये गए. कंपनी इतना बड़ा गिफ्ट देने जा रही है इसकी भनक किसी कर्मचारी को नहीं लगी. सेंट जॉन प्रॉपर्टीज के प्रेसिडेंट लॉरेंस मेक्रांट्स ने कहा कि कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों की मेहनत के बगैर टॉप पर नहीं पहुंच सकती. हमने सिर्फ अपने कर्मचारियों का सम्मान किया है।
  • बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    जब कोई व्यक्ति समस्याओं से घिर जाता है तो उसे न्यायालय से ही उम्मीद रहती है। वकीलों की बेतहाशा फीस के कारण आदमी अपने किसी भी मामले को न्यायालय में ले जाने से डरता है, लेकिन कानून में इतनी गुंजाइश है कि आप न्यायालय की अनुमति से अपना केस खुद लड़ सकते हैं। अधिवक्ता अधिनियम के अंतर्गत आप बगैर अधिवक्ता हुए विधि व्यवसाय नहीं कर सकते परंतु स्वयं का मुकदमा लड़ सकते हैं, यह आपका नैसर्गिक अधिकार है। न्यायालय आपको अपना मुकदमा लड़ने से कतई निषिद्ध नहीं कर सकता। आप न्यायालय में वक़ील स्वयं की इच्छा से नियुक्त करते हैं तथा मुकदमे के लिए वक़ील पत्र पर हस्ताक्षर करके वकील को अपने मुकदमे में प्रत्येक प्रकार के अधिकार सौंपते हैं।

    कभी कभी जीवन में ऐसी परिस्थितियों का जन्म होता है जब आप को किसी आपराधिक मामलों में आरोपी बना दिया जाएं और राज्य द्वारा न्यायालय में आप पर कोई अभियोजन चलाया जा रहा है या फिर आपके किसी अधिकार के अतिक्रमण होने पर आप कोई सिविल मामला लेकर न्यायालय की शरण में जाते हैं। इनमें हर परिस्थिति में आपको वक़ील नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है, न्यायालय आपको वक़ील नियुक्त करने हेतु विवश नहीं करता। वक़ील आपकी सुविधा के लिए आप खुद नियुक्त करते हैं। भारतीय न्याय व्यवस्था बेहद तकनीकी है, जहां आपको पग पग पर वैधानिक जानकारियों की आवश्यकता होती है। इस परेशानी से व्यथित न हों, इसलिए आप न्यायालय में पैरवी के लिए वक़ील नियुक्त करते हैं। आज हम चर्चा करेंगे उन बिंदुओं पर जिनकी सहायता से आप स्वयं भी खुद के मुकदमे में पैरवी कर सकते हैं। हालांकि यह बिंदु नितांत सटीक तो नहीं परन्तु फिर भी आपको स्वयं का मुकदमा लड़ने में ज़रूर सहायता करेंगे। आपको अपना मुकदमा लड़ने के लिए केवल थोड़ा बहुत सामाजिक जानकारियों और साधारण तर्क पर ज्ञान हो और साथ ही कम से कम हिंदी भाषा में आप निपुण हों, ताकि अपनी बात को भाषा की सहायता से प्रभावी बना सकें।

    आइए जनाते हैं, क्या हैं वे बिंदु?

    बेयर एक्ट ख़रीदें- किसी भी अधिनियम पर बाज़ार में अलग अलग प्रकाशन संस्थाएं बेयर एक्ट प्रकाशित करती हैं। इनकी कीमत नाममात्र की होती है। आप बाज़ार से इन बेयर एक्ट को खरीद सकते हैं। इनकी भाषा भी कोई गूढ़ गहन नहीं होती है, परंतु उस ही शब्द को उपयोग किया जाता है जिस शब्द को विधायिका ने प्रयोग किया है।

    आपराधिक मामले में- यदि आप पर किसी आपराधिक मामले का अभियोजन चल रहा है तो आप सर्वप्रथम तीन अधिनियम की बेयर एक्ट खरीदें- भारतीय दंड संहिता 1860 दंड प्रक्रिया सहिंता 1973 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 भारतीय दंड सहिंता भारत की सीमा में अपराधों का निर्धारण करती है और उनके लिए दंड बताती है। दंड प्रक्रिया सहिंता उन अपराधों में किस प्रकिया से व्यक्ति को दंड तक ले जाया जाएगा, इसका निर्धारण करती है। साक्ष्य अधिनियम यह तय करता है कि किन साक्ष्यों को प्रकिया में शामिल किया जाएगा तथा कौन से एविडेन्स पर आरोपी को सज़ा दी जा सकती है। यह तीनों अधिनियम किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। सारा मुकदमा इन तीनों के आधार पर ही पर ही संचालित किया जाता है।

    न्यायाधीश से आज्ञा लेना- आप न्यायाधीश से आज्ञा लेकर ही स्वयं के मुकदमे में स्वयं पैरवी कर सकते हैं, परन्तु न्यायाधीश आपको वकील नियुक्त करने का परामर्श दे सकते हैं। इस पर आप कह सकते हैं कि पुलिस कार्यवाही में मुझे खुद ही पैरवी करने की अनुमति दें तथा इतना समय दें कि मैं ड्राफ्टिंग इत्यादि कर सकूं। अगर आप निरुद्ध हैं तो- यदि आप किसी आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं और पुलिस ने आपको बंदी बनाया हुआ है। संविधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत पुलिस को आपको गिरफ्तार करने के चौबीस घंटों के भीतर किसी भी क्षेत्राधिकार के न्यायालय में पेश करना होगा। जब आपको न्यायालय में पेश किया जाए तो आप पुलिस से अपनी एफआईआर की एक प्रति मांग सकते हैं। एफआईआर लेकर सबसे पहले उस घटना का विवरण पढ़ें फिर किन धाराओं में आपको निरूद्ध किया गया है यह जानकारी देखें तथा अपराध की सूचना देने वाला कौन व्यक्ति है यह नाम देखें। पुलिस की गिरफ्तारी के बाद बंदी व्यक्ति स्वयं अपनी जमानत याचिका लगा सकता है। आरोपी को सबसे पहले एफआईआर से यह मालूम करना होगा कि किन धाराओं तथा अधिनियम के अंतर्गत मुझ पर प्रकरण दर्ज किया गया है तथा वह अपराध जमानतीय है या गैरजमानती है। जमानती अपराध में मजिस्ट्रेट और पुलिस द्वारा जमानत दे दी जाती है पर गैरजमानती अपराध की सूरत में जमानत देने या नहीं देना न्यायलय के विवेक पर निर्भर करता है। न्यायालय से यह निवेदन करें कि पुलिस मुझे जमानत याचिका दाखिल करने के लिए थोड़ा समय दे। बाजार में सभी अभिवचनों के फॉर्मेट उपलब्ध होते हैं आप उन अभिवचनों को खरीद कर न्यायालय में अपनी जमानत याचिका लगा दें। याचिका बनाकर कोर्ट बाबू को दी जा सकती है, फिर मजिस्ट्रेट उस पर संज्ञान लेंगे। यदि न्यायालय आपको जमानत पर छोड़ देता है तो किसी जमानतदार के सहयोग से आप पुलिस निरूद्ध से बाहर हो सकते हैं। पुलिस निरूद्ध से बाहर होकर आप उन धाराओं, उन अधिनियम को पढ़ें जिनके अन्तर्गत आपको आरोपी बनाया गया है।

    विचारण के दरमियान- जब आप पर आरोप तय हो जाएं और पुलिस द्वारा अपना अंतिम प्रतिवेदन (चालान) प्रस्तुत कर दिया जाए तो आप गवाहों का प्रतिपरीक्षण कीजिए। आपको न्यायलय के नकल विभाग में एक एप्लिकेशन लगाने पर बोर्ड पर रखी आपके मुकदमे को फाइल में लगे पुलिस के पेश किए चालान की नकल की सत्यप्रतिलिपि प्राप्त हो जाएगी। चालान को अच्छे से पढ़ना- चालान की नकल मिलने पर आप चालान को अच्छे से पढ़िए तथा किन किन गवाहों ने क्या क्या कथन किया है। इस पर मंथन कीजिए तथा ऐसे तर्क को जन्म दीजिए, जिससे आप गवाहों के दिये कथन को अपने विरुद्ध दिए कथन को अपने पक्ष में कर लें तथा अपने खिलाफ गए गवाहों को झूठा सिद्ध कर सकें।

    सिविल मामले में- सिविल मामले में अपना मुकदमा स्वयं लड़ना अपेक्षाकृत थोड़ा सरल होता है, क्योंकि यहां हमारे पास समय रहता है तथा हम पुलिस द्वारा निरूद्ध नहीं होते हैं। किसी भी सिविल मुकदमों में यदि आपको स्वयं मुकदमा लड़ना है तो सिविल प्रक्रिया सहिंता अच्छे से समझिए और यह देखिए कि आपके किस अधिकार का अतिक्रमण हो रहा है और वह अधिकार किस अधिनियम के अंतर्गत आ रहा है। जैसे अगर कोई संविदा विधि से संबंधित मामला है तो सबसे पहले भारतीय संविदा अधिनियम देखें। कोई मामला राजस्व से संबंधित है तो अपने प्रदेश का राजस्व अधिनियम या कोड देखिए और उस पर गहन शोध करें। मामले की समस्त कार्यवाही सी पी सी के अंतर्गत ही कि संचालित की जाती है।

  • निर्भया केस: आरोपियों को फांसी की याचिका पर सुनवाई टली…अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार…अगली सुनवाई 18 को…

    निर्भया केस: आरोपियों को फांसी की याचिका पर सुनवाई टली…अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार…अगली सुनवाई 18 को…

    दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों की पेशी शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई। फांसी की सजा पर पटियाला हाउस कोर्ट में इनके डेथ वारंट पर बहस हुई। निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी की मांग वाली निर्भया की मां की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक दोषी की रिव्यू पिटीशन लंबित है उस पर फैसले का इंतजार करिए उसके बाद ही फैसला दिया जा सकता है।सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को दोपहर दो बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी।

    निर्भया की मां ने कहा- 18 दिसंबर होगी फैसले की तारीखपटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के बाद निर्भया की मां ने कहा कि हम लोग सात साल से फांसी का इंतजार कर रहे हैं और न्याय लेकर रहेंगे। जहां भी जाना पड़ेगा जाएंगे, अब पीछे नहीं हटेंगे। निर्भया की मां व उनके पिता दोनों ने कहा कि 18 दिसंबर को निर्भया के दोषियों का डेथ वारंट जारी होगा।

    17 दिसंबर को होनी है दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई

    निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले के गुनहगारों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। अक्षय ने इसके खिलाफ याचिका लगाई है।

    बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की साइट पर जारी नोटिस के मुताबिक तीन सदस्यीय पीठ 17 दिसंबर दोपहर दो बजे सुनवाई करेगी। अक्षय ने अपने वकील के जरिये दाखिल याचिका में कहा है कि प्रदूषण के कारण वैसे ही लोगों की जिंदगी कम हो रही है फिर फांसी देने की क्या जरूरत है।

    कोर्ट मामले के तीन अन्य दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका बीते साल जुलाई में खारिज कर चुका है। गौरतलब है कि इन दरिंदों ने 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल छात्रा निर्भया से दुष्कर्म कर उसकी नृशंस हत्या कर दी थी।

  • IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी…..केंद्र में इस पद पर पहुंचने वाली फिलहाल छत्तीसगढ़ से इकलौती ब्यूरोक्रेट्स ….आदेश हुआ जारी…

    IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी…..केंद्र में इस पद पर पहुंचने वाली फिलहाल छत्तीसगढ़ से इकलौती ब्यूरोक्रेट्स ….आदेश हुआ जारी…

    रायपुर। IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी है। छत्तीसगढ़ की वो फिलहाल इकलौती अफसर हैं, जिन्हे गर्वमेंट आफ इंडिया ने एडिश्नल सिकरेट्री का पोस्ट मिला है। हालांकि इससे पहले छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अमिताभ जैन और रेणु पिल्लई एडिश्नल सिकरेट्री इम्पैनल हुई थी, लेकिन उन्हें पोस्टिंग नहीं मिली थी।1987 बैच की IFS अफसर उमा देवी की पोस्टिंग ACC यानि अपाइंटमेंट  कमेटी आफ द कैबिनेट के अप्रूवल के बाद हुई है। उमा देवी को वन एवं पर्यावरण जलवायु परिवर्तन विभाग में एडिश्नल सिकरेट्री बनाया गया है।

    उमा देवी की ये पोस्टिंग खास इसलिए है कि वो सेंट्रल में  छत्तीसगढ़ कैडर की इकलौती एडिश्नल सिकरेट्री होगी, इससे पहले सूबे IAS अफसर भी जो सेंट्रल में पोस्टेड हैं, वो भी अभी तक ज्यादातर ज्वाइंट सिकरेट्री तक ही पहुंच पाये हैं।

    उमा देवी जम्मू कश्मीर के चीफ सिकरेट्री व्हीआर सुब्रह्मण्यम की पत्नी हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने कुल 16 अफसरों के प्रमोशन लिस्ट जारी की है। उस सूची में उमा देवी छत्तीसगढ़ की इकलौती अफसर हैं।

  • तलाक की अर्जी अगर पेंडिंग, तो भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

    तलाक की अर्जी अगर पेंडिंग, तो भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

    हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए बेंच ने कहा कि तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो।

    सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को लेकर बड़ा फैसला दिया है. हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के खिलाफ दायर अपील के लंबित होने के दौरान महिला या पुरुष में से किसी के भी दूसरी शादी पर रोक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में कहा है कि अगर तलाक की अर्जी लंबित है और दोनों पक्षों में केस को लेकर सहमति है, तो दूसरी शादी मान्य होगी।

    अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने कहा कि तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो.सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया. वर्तमान मामले में तलाक की डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान पति ने पहली पत्नी के साथ समझौता करते हुए तलाक वापस लेने की अर्जी वापस दाखिल की थी. इसी दौरान दूसरी शादी कर ली. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी शादी को अमान्य करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने पति की अर्जी को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया।

    दरअसल, दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 31 अगस्त 2009 को पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए में तलाक की डिक्री मंजूर की थी. पति ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी. लेकिन, मामला आगे बढ़ने से पहले ही पति-पत्नी के बीच समझौता हो गया. 15 अक्टूबर, 2011 को पति अपील वापस लेने की अर्जी दाखिल कर दी. लेकिन, जब ये केस पेंडिंग था, उस समय ही पति ने दिसंबर 2011 में दूसरी शादी कर ली।

    इस शादी के बाद दूसरी महिला ने शादी को कोर्ट में चुनौती दे दी. उसने अपील में कहा, तलाक की अपील पेंडिंग के दौरान शादी हुई है, इसलिए इसे शून्य करार दिया जाए. निचली कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी. हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे मान लिया और शादी को शून्य घोषित कर दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां पर हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया गया.