Category: स्वास्थ्य

  • प्रदेश में पान मसाला, गुटखा और गुड़ाखू पर लगेगा प्रतिबंध, स्वास्थ्य मंत्री ने जीएसटी सचिव को लिखा पत्र, कहा- खाने से कैंसर और अन्य बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं लोग, तत्काल लगाएं प्रतिबंध

    प्रदेश में पान मसाला, गुटखा और गुड़ाखू पर लगेगा प्रतिबंध, स्वास्थ्य मंत्री ने जीएसटी सचिव को लिखा पत्र, कहा- खाने से कैंसर और अन्य बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं लोग, तत्काल लगाएं प्रतिबंध

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रदेश में तम्बाकुयुक्त गुटखा, पान मसाला एवं गुड़ाखू पर प्रतिबंध लगाने के लिए वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग के सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने आज लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश में तम्बाकुयुक्त गुटखा, पान मसाला एवं गुड़ाखू की बाजार में अवैध बिक्री हो रही है। इसे खाकर बड़ी संख्या में लोग दंत रोगों, कैंसर एवं अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। शासन के स्वास्थ्य बजट पर भी इसका असर पड़ रहा है।

    सिंहदेव ने पत्र में लिखा है – कई परीक्षणों से यह भी पुष्टि हुई है कि पान मसालों में अधिक मात्रा में मैग्नीशियम कॉर्बोनेट पाई गई है, जो सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। इसलिए प्रदेश में तम्बाकुयुक्त गुटखा, पान मसाला एवं गुड़ाखू पर तत्काल प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में विशेष तौर पर रेखांकित किया है कि विधानसभा में भी इस पर चर्चा हुई थी और स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने तम्बाकू और गुटखा को प्रतिबंधित या नियंत्रित करने कहा था।

  • अब छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड से होगा इलाज़ डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का मिलेगा लाभ

    अब छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड से होगा इलाज़ डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का मिलेगा लाभ

     राज्य के सभी राशन कार्डधारी परिवारों को डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का लाभ लेने के लिए अब राशन कार्ड के साथ कोई भी शासकीय पहचान पत्र अनिवार्य हो गया है। आज 17 जनवरी 2020 से अनुबंधित अस्पतालों में उपचार के लिए राशन कार्ड के साथ कोई भी शासकीय पहचान पत्र लेकर जाना अनिवार्य हो चुका है। अब योजनाओं का लाभ लेने के लिए स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यत समाप्त हो चुकी है।
    राज्य सरकार की महत्वकांक्षी डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना को लेकर 17 जनवरी 2020 से बड़ा परिवर्तन हो गया है। अब पहचान पत्र के लिए योजना में शामिल राज्य के सभी परिवारों को स्मार्ट कार्ड पर निर्भर नहीं रहना होगा। साफ्टवेयर के डेटाबेस से स्मार्ट कार्ड के आंकडे हटा दिये गये हैं। इस तरह अब मरीज व उनके परिजनों को पहचान पत्र के रूप में प्राथमिकता, अंत्योदय, राशन कार्ड के साथ आधार कार्ड अथवा कोई भी शासकीय पहचान पत्र साथ लेकर अनुबंधित अस्पतालों में जाना होगा। साफ्टवेयर इन मरीजों की पहचान अब नये फार्मूले से करेगा। यह नया फार्मूला साफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है। जो कि 17 जनवरी 2020 से काम करना शुरू कर दिया है।
    अस्पताल में ही बनेगा ई-कार्ड
    राज्य सरकार ने राशन कार्ड को डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के लिए अनिवार्य करते हुए मरीजों की राह आसान कर दी है। अब राशनकार्डधारी परिवारों को किसी सदस्य के बीमार पडने पर राशन कार्ड के साथ आधार कार्ड या अन्य शासकीय पहचान पत्र लेकर अनुबंधित अस्पताल जाना होगा। अनुबंधित अस्पतालों में ही तत्काल बीआईएस कर ई-कार्ड बना दिये जायेंगे। परिवार पचास हजार या पाॅच लाख रूपये जिसके भी योग्य होगा। वह लाभ उसे उपचार के दौरान दिया जावेगा।
    एस.एन.ए. का पूरा समन्वय
    इस नयी व्यवस्था के लागू होने के पूर्व ही राज्य नोडल एजेंसी ने पूरा समन्वय बना रखा है। साफ्टवेयर में हुए बड़े बदलाव के लिए सभी साफ्टवेयर इन्जीनियरों के मोबाईल नंबर अस्तपालों को पूर्व से ही मुहैय्या कराके रखे गये है। अस्पतालों व मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराई जा रहीं है।
    सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2011 के हितग्राहियों को मिलता रहेगा लाभ
    राशनकार्ड के साथ कोई एक शासकीय पहचान पत्र लाना अनिवार्य किया गया है साथ ही राशनकार्ड के अलावा समाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2011 के हितग्राहियों को योजना का लाभ पूर्ववत् मिलता रहेगा।
    पूर्व में बने ई-कार्ड काम करते रहेंगे
    डाॅ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना लागू होने से पूर्व ही आस्पतालों व कियोस्क केन्द्रों में ई-कार्ड बनाने का काम चल रहा था, जो कि अब भी यथावत् जारी है। पूर्व में बने हुए ई-कार्ड में किसी तरह की दिक्कत आने पर अस्पतालों व कियोस्क केन्द्रों में ई-कार्ड में बदलाव करते हुए नये कार्ड जारी कर दिये जाएगें।

  • शादी की पहली रात खुद को वर्जिन दिखाने के लिए ऑपरेशन करा रही लड़कियां, पकड़े गए सीक्रेट क्लीनिक

    शादी की पहली रात खुद को वर्जिन दिखाने के लिए ऑपरेशन करा रही लड़कियां, पकड़े गए सीक्रेट क्लीनिक

    शादी की पहली रात खुद को वर्जिन दिखाने के लिए कई लड़कियां सीक्रेट क्लीनिक का रुख कर रही हैं. डॉक्टर्स भी प्राइवेट पार्ट का यह छोटा सा ऑपरेशन कर लाखों छाप रहे हैं. लन्दन में ऐसे 22 क्लिनिक मिले हैं जहां महिलाओं ने खुद को वर्जिन दिखाने के लिए हायमन की सर्जरी कराई थी. आइए जानते हैं इस बारे में…
    डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक़, लंदन में ऐसी 22 क्लीनिकों के नाम सामने आए हैं जहां महिलाएं रुढ़िवादी परिवार के दबाव के चलते हायमन की सर्जरी करा चुकी हैं ताकि वो खुद को वर्जिन दिखा सकें . इस ऑपरेशन के जरिए प्राइवेट पार्ट की झिल्लीनुमा संरचना ‘हायमन’ जोकि सेक्स के दौरान टूट जाती है, को दोबारा बना दिया जाता है ताकि जब महिला शादी की पहली रात साथी के साथ संबंध बनाए तो इस दौरान वो खुद को वर्जिन दिखा सके।

    द गाइन सेंटर’ लंदन की एक क्लिनिक है जोकि हायमन की मरम्मत करती है ताकि शादी की पहली रात लड़की वर्जिनिटी साबित करने के बदाव से निकल सके. समाज में कई रूढ़िवादी लोगों का ऐसा मानना है कि अगर लड़की का हायमन फटा हुआ है तो वो वर्जिन नहीं है. यानी कि शादी से पहले किसी अन्य लड़के के साथ संबंध बना चुकी है. कई बार ये कारण शादी टूटने की वजह भी बन जाता है।

    रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मध्य पूर्वी इलाकों और एशियाई महिलाएं घर वालों और समाज के दबाव के चलते वर्जिनिटी को दोबारा हासिल करने के लिए ये ऑपरेशन करवा रही हैं. डॉक्टर्स भी इस सामाजिक दबाव का फायदा उठाते हुए लाखों की धन उगाही कर रहे हैं।

  • मंत्री सिंहदेव बदल रहे हैं स्वास्थ्य व्यवस्था की दशकों पुरानी परंपरा…..बदलेगा अस्पताल का वक्त….बदलेगी डाक्टर की ड्यूटी…बदलेगी हेल्थ अफसरों की जिम्मेदारियां….

    मंत्री सिंहदेव बदल रहे हैं स्वास्थ्य व्यवस्था की दशकों पुरानी परंपरा…..बदलेगा अस्पताल का वक्त….बदलेगी डाक्टर की ड्यूटी…बदलेगी हेल्थ अफसरों की जिम्मेदारियां….

    स्वास्थ्य व्यवस्था से बाबा आदम जमाने से चली आ रही परंपरा अब बदलने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में नये साल से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आमलोगों के हित में लिये सबसे अहम निर्णय के मुताबिक अब पूरे दिन ओपीडी खुली रहेगी, सालों से व्यवस्था ऐसी रही थी, जिसके बाद सुबह से महज दोपहर 1 या 2 बजे तक ही ओपीडी खुली रहती थी, जिसकी वजह से तय वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने वाले ओपीडी के मरीजों को वापस लौट जाना पड़ता था या फिर मजबूरी में निजी अस्पताल में जाकर इलाज कराना पड़ता था। नयी व्यवस्था के मुताबिक अब दो अलग-अलग पालियों में ओपीडी लगा करेगी। नये निर्देश के मुताबिक जिला अस्पतालों में मार्च से अक्टूबर महीने से सुबह 9 बजे से 1 बजे तक पहली पारी और शाम 5 बजे से 7 बजे तक ओपीडी खुली रहेगी, वहीं नवंबर से फरवरी तक शाम की ओपीडी 4 बजे से छह बजे तक होगी। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व उप स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी का वक्त सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 10 से 2 बजे तक और शाम में 5 बजे से 8 बजे तक ओपीडी होगी। वहीं रविवार व अन्य छुट्टी के दिनों में जिला अस्पतालों व सिविल अस्पताल में 24 घंटे इमरजेंसी ओपीडी खुली रहेगी। वहीं लगातार दो दिन की छुट्टी के दौरान दूसरे दिन छुट्टी में सुबह 10 से 12 बजे तक ओपीडी खुली रहेगी।
  • नसबंदी कराने आई महिला को डॉक्टर ने मारा मुक्का… टूटा दांत…मच गया हडक़ंप…

    नसबंदी कराने आई महिला को डॉक्टर ने मारा मुक्का… टूटा दांत…मच गया हडक़ंप…

    अम्बिकापुर। शहर के मेडिकल कॉलेज में नसबंदी कराने आई महिला के साथ डॉक्टरों ने किसी असमाजितक तत्व की तरह व्यवहार किया है। दरअसल नसबंदी कराने आई महिला के साथ डॉक्टरों ने मारपीट करते हुए उसके दांत तोड़ दिए। मामले को लेकर पीडि़ता के पति ने शिकायत दर्ज कराई है।मिली जानकारी के अनुसार अम्बिकापुर के घुटरापारा वार्ड क्रमांक 23 मे रहने वाली महिला संतोषी सिंह को वार्ड मे रहने वाली मितानिन टीटी नसबंदी के लिए लेकर आई थी। लेकिन जब संतोषी को नसबंदी के लिए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में लेकर आया गया। डॉक्टर जे एक्का ने अपनी ऑपरेशन की फार्मेलिटी के लिए महिला को पेट दबाने के लिए कहा औऱ वो नही दबा पाईं। इस बात से नाराज होकर डॉक्टर ने उसे चेहरे पर मुक्के से वार कर दिया।डॉक्टर के हमले से महिला का दांत टूट गया। पीडि़ता के पति के मुताबिक अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल मे किसी महिला की डाक्टर द्वारा पिटाई के बाद दांत टूटने की घटना अपने आप में पहली घटना होगी। इस मामले मे बिना किंतु परंतु के आरोपी डाक्टर पर कार्रवाई होना चाहिए। मामले में खुद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जानकारी ली है। उन्होंने कहा है कि सरकार की नसबंदी जैसी प्रतोत्साहन योजनाओं में जिन डाक्टरो को ईमानदारी से काम करना चाहिए, उसी में लगे डाक्टर मरीजों से मारपीट कर रहे हैं। मामले में जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
  • एम्सः छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत वाली खबर…

    एम्सः छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत वाली खबर…

    रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर (एम्स)  में बढ़ती मरीजों की संख्‍या को देखते हुए नए साल से अस्‍पताल में 160 बिस्‍तरों की संख्‍या बढ़ाई जा रही है. इसके अलावा 10 नए आपरेशन थियेटर भी शुरू होंगें. अब एक जनवरी से यह 960 बिस्‍तर वाला अस्‍पताल हो जाएगा. वर्तमान में 800 बेड से बढ़ाकर यह 960 बिस्तर के साथ प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा एम्‍स अस्पताल बन जाएगा जबकि 1200 बिस्तर के साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर हॉस्पिटल पहले स्थान पर है। मेडिसीन विभाग में मरीजों की बढ़ती संख्‍या के कारण आईपीडी जनरल वार्ड, आईसीयू वार्ड, केंसर वार्ड में 15-15 बेड बढाएं जा रहे हैं. वहीं टीबी और छाती रोग संबंधित वार्ड में बेड की संख्‍या 30 से बढाकर 55 की जायेगी. एम्‍स अस्‍पताल में कुल स्‍वीकृत बेड की संख्‍या 960 है जो 2020 में पूरी हो जायेगी.  अस्‍पताल अधीक्षक डॉ करण पीपरे ने बताया केंसर वार्ड में रेडियोथेरपी और कीमोथेरपी लेने वाले मरीज जो दूर-दराज के गांव से आते हैं उनको बेहतर सुविधा देने के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। 10 नए ऑपरेशन थेयटर का होगा शुभारंभ एम्‍स अस्‍पताल में आधुनिक सुविधाओं से लैस 10 नए ऑपरेशन थियेटर भी एक जनवरी से शुरु होंगे. एम्‍स अस्‍पताल में वर्तमान में 20 ऑपरेशन थियेटर में मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है. डॉ. पीपरे ने बताया, नये ऑपरेशन थियेटर में कई नये उपकरण भी लगाए गए हैं.  इससे सर्जरी, ईएनटी, आर्थो, डेंटल, न्यूरो सर्जरी विभागों को अलग-अलग ऑपरेशन थियेटर मिलने लगेंगें. ऑपरेशन थियेटर की संख्‍या 30 हो जाने से मरीजों को वेटिंग की समस्‍या से काफी राहत मिलेगी. मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसे आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है. आपरेशन थियेटर में नये-नये चिकित्सकीय उपकरण, आधुनिक सुविधा व्यवस्थित की गयी है. डॉ. पीपरे ने कहा,  नये ऑपरेशन थियेटर बनने से लोगों को बेहतर शल्य चिकित्सा सेवा उपलब्ध होगी. आपात चिकित्‍सा के दौरान मरीजों को एम्‍स अस्‍पताल में बेहतर सर्जरी मिलने से अन्‍य राज्‍य जाने की परेशानी से बच जाएंगे.
  • सरकार ने माना- फर्जी हैं देश के 57% ‘डॉक्टर’, 31 फीसदी 12वीं से आगे पढ़े भी नहीं

    सरकार ने माना- फर्जी हैं देश के 57% ‘डॉक्टर’, 31 फीसदी 12वीं से आगे पढ़े भी नहीं

    2018 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में कहा था कि देश में 57 फीसदी से अधिक झोलाछाप डॉक्टरों की रिपोर्ट गलत है। लेकिन, अब वही स्वास्थ्य मंत्रालय WHO की रिपोर्ट की पुष्टि कर रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 57.3 फीसदी डॉक्टरों के पास मेडिकल से संबंधित को भी शैक्षणिक योग्यता नहीं है।

    WHO ने 2001 की जनगणना के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण इलाकों में 20 फीसदी बिना डिग्री वाले डॉक्टर लोगों का इलाज कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी बताया कि करीब 31% झोलाछाप डॉक्टर ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है।अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में डॉक्टरों को लेकर काफी असामांजस्य वाली स्थिति है।

    टाइम्स ऑफ इंडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया है कि ग्रामीण इलाकों और गरीब आबादी के बीच बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। ऐसे में झोलाझाप डॉक्टरों की भरमार है।

  • ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी जैसी 21 दवाईयां होगी महंगी…50 प्रतिशत तक बढेंगे दाम…

    ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी जैसी 21 दवाईयां होगी महंगी…50 प्रतिशत तक बढेंगे दाम…

    ऐंटीबॉयोटिक, ऐंटी-ऐलर्जिक, मलेरिया और विटामिन-सी की दवाओं का रेट बढऩे जा रहा है। केंद्र सरकार ने 21 महत्वपूर्ण दवाओं के सिलिंग प्राइस में 50 फीसदी बढ़ोतरी की मंजूरी दी है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर NPAA ने शुक्रवार को कहा कि 21 महत्वपूर्ण दवाओं की सिलिंग प्राइस में एकबार 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है। सिलिंग प्राइस का निर्धारण सरकार करती है, वैसे दवाओं की कीमत कंपनी द्वारा बाजार के आधार पर किया जाता है।

    फॉर्मा सेक्टर लंबे समय से NPAA से कीमत रिवाइज करने की मांग कर रहा था। उनका कहना था कि दवाई बनाने में इस्तेमाल होने वाला रॉ कंपोनेंट महंगा हो गया है, इसलिए एकबार कीमत बढ़ाने की अनुमति दी जाए। दवाई बनाने में कई कंपोनेंट चीन से मंगाए जाते हैं और ट्रेड वॉर के कारण कीमतों में लगभग 200 फीसदी तक उछाल आया है।

    NPAA की तरफ से कहा गया कि ये सभी महत्वपूर्ण दवाएं हैं। इनका बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है और ये दवाएं देश के पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के लिए जरूरी हैं। दवा बनाने वाली कंपनियों ने कई बार सरकार से इनका प्रॉडक्शन बंद करने की अपील की, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया।

    नियम के अनुसार दवाओं की कीमत मार्केट के आधार पर तय की जाती है। कॉस्टिंग के आधार पर इसकी कीमत तय नहीं होती है। लेकिन, सरकार ने जरूरी दवाओं के लिए विशेष नियम बनाया है। इसकी उपलब्धता हर जगह है और ये बहुत सस्ती होती हैं।

  • अंबेडकर अस्पताल में पूर्व गृहमंत्री व विधायक के बेटे के फेफड़े का हुआ सफल ऑपरेशन

    अंबेडकर अस्पताल में पूर्व गृहमंत्री व विधायक के बेटे के फेफड़े का हुआ सफल ऑपरेशन

    रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने पूर्व गृहमंत्री व वर्तमान विधायक ननकीराम कंवर के बेटे प्रमोद कुमार कंवर के ट्यूबर कुलोसिस के कारण खराब हो चुके फेफड़े को सर्जरी के जरिये ठीक किया. मरीज को ”ब्रोन्कोप्लुरल फिस्टुला विद पायोथोरेक्स एंड फाइब्रोसिस ऑफ लंग्स“ नामक बीमारी थी. इस बीमारी में फेफड़ा पूरी तरह से खराब होकर मवाद से भर गया तथा सिकुड़ कर पत्थर की तरह कड़ा हो गया था.फेफड़े में भर गया था मवादमरीज प्रमोद को 4 माह पहले टी. बी. के कारण सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गया। बायां फेफड़ा खराब हो गया था एवं फेफड़े में छेद हो गया था जिसको मेडिकल भाषा में ”ब्रोन्कोप्लुरल फिस्टुला विद पायोथोरेक्स एंड फाइब्रोसिस ऑफ लंग्स“ ( Broncho pleural fistula with pyothorax and fibrosis of lung ) कहते हैं। इस बीमारी में टी. बी. के कारण फेफड़ा पूर्णतः खराब होकर मवाद से भर जाता है एवं साथ में सिकुड़ कर पत्थर जैसे कड़ा हो जाता है एवं फेफड़े में बड़ा सा छेद हो जाता है।हाई रिस्क सर्जरीसबसे पहले मरीज का इलाज 4 महीना पूर्व प्राइवेट अस्पताल में हुआ परंतु वहां से राहत नहीं मिलने पर मेकाहारा में टीबी एवं चेस्ट विभाग में आये। वहां पर डॉ. पंडा के सरंक्षण में इलाज चला एवं उन्होंने हार्ट चेस्ट और वैस्कुलर (सीटीवीएस) विभाग में सर्जरी के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. साहू के पास रिफर किया। वहां डॉ. साहू ने सी. टी. स्केन के लिए रेडियोलॉजी विभाग में डॉ. एस. बी. एस. नेताम के पास रिफर किया। सी. टी. स्केन देखकर पता चला कि इसका इलाज सिर्फ ऑपरेशन से ही संभव है। चूंकि यह सर्जरी हाई रिस्क केटेगरी का था एवं बीमारी दुबारा हो सकती थी इसलिए हाई रिस्क कंसेट लिया गया। इस ऑपरेशन में बायें छाती को खोलकर फेफड़ों को ठीक करके अलग किया गया एवं फेफड़े में जो छेद था उसको विशेष स्टेपलर की मदद से बंद किया गया। आज ऑपरेशन को 12 दिन हो गये हैं। मरीज स्वस्थ्य है एवं डिस्चार्ज लेकर घर जाने को तैयार है।निजी अस्पतालों से बेहतर सुविधाविभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू कहते हैं कि यदि चिकित्सक और स्टॉफ अपने कार्य के प्रति समर्पित हों तो सरकारी अस्पतालों में भी निजी अस्पतालों की तुलना में कई गुना बेहतर इलाज होता है। यहां पर 24 घंटे दक्ष डॉक्टरों की टीम होती है जो कहीं अन्य जगह नहीं मिलती। सरकारी अस्पताल में कार्य करने वाले किसी भी सर्जन एवं फिजिशियन का अनुभव अन्य प्रायवेट अस्पतालों की तुलना में अधिक होता है क्योंकि यहां पर हर वह केस आता है जो बाकी अस्पतालों से रिजेक्ट होता है। एसीआई में सर्जरी की क्वालिटी विश्वस्तरीय है। यहां पर वो सभी केस होते हैं जो विश्व के उच्चस्तरीय अस्पताल में होते हैं। यहां पर बहुत से ऐसे केस हुए हैं जो कि छ.ग. में भी पहली बार हुआ है। यहां कि सुविधा किसी प्राइवेट अस्पताल से कई गुना अच्छी है। जनता के प्रतिनिधि भी अपने सरकारी तंत्र में विश्वास करते हैं तो यह और भी विश्वसनीय हो जाता है एवं सामान्य जनता जो सरकारी अस्पताल के नाम से कतराते हैं उसके लिए बहुत अच्छा उदाहरण है। सरकारी अस्पताल में वेटिंग ज्यादा होता है परंतु कार्य अच्छा होता है।ऑपरेशन में शामिल टीमकार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहूएनेस्थेटिस्ट – डॉ. ओ. पी. सुंदरानी, डॉ. सौम्या (पी. जी. डॉक्टर)नर्सिंग स्टॉफ – राजेन्द्र साहू, चोवाराम, मुनेसएनेस्थेसिया टेक्निशियन – भूपेन्द्र चंद्रा
  • अब बिना पहचान पत्र के ‘दूध’ नहीं दे सकेंगे ‘दूधवाले भैय्या’ पहले चरण में एक लाख दूधवालों का होगा रजिस्ट्रेशन

    अब बिना पहचान पत्र के ‘दूध’ नहीं दे सकेंगे ‘दूधवाले भैय्या’ पहले चरण में एक लाख दूधवालों का होगा रजिस्ट्रेशन

    दिल्ली। दूध का मामला सीधा सीधा लोगों की सेहत से जुड़ा है. बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी दूध पर किसी न किसी रुप में निर्भर रहते हैं. इसको देखते हुए सरकार अब दूधवालों की पहचान करके ही उन्हें दूध देने का अधिकार देगी।

    दूध में मिलावट रोकने और मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के मकसद से सरकार दूध सप्लाई करने वाले दूधियों  को पहले तो ट्रेनिंग देगी फिर उनको पहचान पत्र जारी करेगी ताकि वो लोगों को अच्छी गुणवत्ता का दूध उपलब्ध करा सकें।

    FSSAI ने फैसला लिया है कि हर दूध वाले को एक पहचान पत्र  दिया जाएगा. देश में दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए संस्था ने ये फैसला लिया है. इसके लिए चरणबद्ध तरीके से दूधवालों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. पहले चरण में एक लाख दूध वालों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. अगर लोगों की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा.