मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सिंचाई घोटाले में बड़ी राहत मिली है. अजित पवार के खिलाफ सिंचाई घोटाले के 9 मामलों को बंद कर दिया गया है. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई घोटाले से संबंधित 3000 प्रोजेक्ट्स जांच के घेरे में हैं और इनमें से 9 मामलों को सबूतों के अभाव में बंद कर दिया गया है. अभी तक जिन टेंडर की जांच की गई है, उनमें एसीबी को अजित पवार के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला है।
महाराष्ट्र ऐंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक परमबीर सिंह ने बताया कि जिन भी मामलों को आज बंद किया गया है उनमें से कोई भी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से संबंधित नहीं है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने अजित पवार के खिलाफ दर्ज 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले में 9 केस बंद कर दिए हैं. हालांकि सिंचाई घोटाले में अभी भी 11 केस दर्ज हैं. महाराष्ट्र में करीब 70 हज़ार करोड़ के सिंचाई घोटाले में अजित पवार आरोपी थे. उपमुख्यमंत्री बनने के 48 घंटों के भीतर ही अजित पवार से जुड़े कुछ मामले बंद हुए हैं।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले मामलों की सूची में कोई भी मामला महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार के खिलाफ कथित रूप से सिंचाई भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित नहीं है. ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि जो मामले बंद थे वे सशर्त थे. यदि मामले में अधिक जानकारी प्रकाश में आती है या अदालतें आगे की जांच का आदेश देती हैं. ब्यूरो के महानिदेशक, परमबीर सिंह ने कहा कि हम सिंचाई संबंधी शिकायतों में लगभग 3000 निविदाओं की जांच कर रहे हैं. ये नियमित पूछताछ हैं जो बंद हैं और सभी चल रही जांच जारी है।
दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एक संयुक्त याचिका पर आदेश दिया है कि कल (बुधवार) शाम 5 बजे से पहले विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हो। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का लाइव प्रसारण भी हो।जस्टिस रमना ने आज मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट और विधायिका के अधिकार पर लंबे समय से बहस चली आ रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए और लोगों को अच्छे शासन का अधिकार है। इस मामले ने राज्यपाल की शक्तियों को लेकर बहुत अहम संवैधानिक मुद्दे को उठाया है।कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक और उत्तराखंड के मामलों को भी जिक्र किया। कल सुबह 11 बजे विधायकों का शपथ ग्रहण हो, शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण हो। कोर्ट ने कहा कि विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर करवाएंगे।एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि आज संविधान दिवस के मौके पर संविधान की जीत हुई है। मैं मांग करता हूं कि देवेंद्र फडणवीस तुरंत अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपे।शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस द्वारा लगाई गई याचिका में राज्यपाल द्वारा अचानक से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और आनन फानन में देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिलवाने के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था।इसके साथ ही इन तीनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट करवाने की भी अपील की थी। रविवार और सोमवार को सभी पक्षों की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए आज का दिन निर्धारित किया था।
अजित पवार ने 54 विधायकों की चिट्ठी सौंपी थी
तुषार मेहता ने कहा कि क्या आर्टिकल 32 की याचिका में राज्यपाल के आदेश को इस तरह से चुनौती दी जा सकती है या नहीं? राज्यपाल को पता था कि चुनाव पूर्व का एक गठबंधन जीता है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अजित पवार की चिट्ठी सौंपी जिसमें 54 विधायकों के नाम थे।उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को चुनाव हुआ, 24 को नतीजा घोषित हुआ, BJP के 105 सदस्य है शिवशेना के 56 सदस्य NCP के 54 सदस्य है। शिवसेना और BJP का प्री पोल अलाइंस था। सबसे पहले BJP को बुलाया गया वह बहुमत नही साबित कर पाए उसके बाद शिवसेना को बुलाया गया वह भी बहुमत नही साबित कर पाए उसकके बाद NCP को बुलाया गया था।
अजित पवार की चिट्ठी के बाद ही राज्यपाल ने हटाया राष्ट्रपति शासन
तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के पत्र के आधार पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी। गवर्नर के वकील तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस की चिट्ठी में लिखा गया है कि उनके साथ NCP के 54 विधायकों के साथ 11 निर्दलीय का समर्थन है।अजित पवार विधायक दल के नेता हैं।उन्होंने चिट्ठी पढ़ी। जिसमें कहा है कि मुझे सभी एनसीपी विधायकों का समर्थन है। हमने तय किया है कि फडणवीस को समर्थन दें। चिट्ठी में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन ज्यादा नहीं चलने चाहिए, इसलिए उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया जाए।तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेक से सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया है, उसका पर्याप्त आधार है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने कहा कि मुझे दो से तीन दिन का वक्त दिया जाए, ताकि रिप्लाई फाइल किया जा सके।तुषार मेहता ने कहा कि इनको चिंता है कि विधायक भाग जाएंगे। अभी इन्होंने किसी तरह से उनको पकड़ा हुआ है। विधानसभा की कार्रवाई कैसे चले? इसमें दखल से भी कोर्ट को परहेज करना चाहिए।
मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता
देवेंद्र फडणवीस के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा कि अजित पवार ने कहा कि हमारा समर्थन आपके साथ है। वे लोग हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं, और हम पर आरोप लगा रहे हैं। हमारे चुनाव पूर्व साथी शिवसेना ने चुनाव के बाद हमारा साथ छोड़ दिया।फिर एनसीपी आई और हमारे सदस्य 170 हो गए। राज्यपाल ने हमें आमंत्रण दिया। अजित पवार हमारे साथ हैं। एक पवार दूसरी तरफ बैठे हैं। जिनके पारिवारिक झगड़े से हमे कोई लेना देना नहीं है। ये केस येदुरप्पा मामले से अलग है। मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता।रोहतगी ने कहा कि अब जो होगा विधानसभा के फ्लोर पर होगा। लेकिन राज्यपाल पर आरोप क्यों? उन्होंने भी तो फ्लोर टेस्ट के लिए ही बोला है। फ्लोर टेस्ट कब होगा ये तय करने का अधिकार राज्यपाल का है। इसे कोर्ट को तय नहीं करना चाहिए।राज्यपाल पर आरोप लगाना गलत है। फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को नहीं कहा जा सकता कि कितने दिन में कराना है। यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। राज्यपाल के कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकता।जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ के समक्ष शिवसेना की तरफ से वकील कपिल सिब्बल, एनसीपी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, देवेंद्र फडणवीस की तरफ से मुकुल रोहतगी पेश हुए थे और अजित पवार की तरफ से वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह पेश हुए थे।केंद्र यानि राज्यपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील रखी थी। कोर्ट ने रविवार और सोमवार को इस मामले में सभी पक्षों की दलीले सुनीं और अपना फैसला आज (मंगलवार) तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।सोमवार को कोर्ट में राज्यपाल की तरफ से पेश हुए वकील तुषार मेहता ने अजित पवार के समर्थन की वह चिट्ठी भी पेश की जिसमें 54 विधायकों के समर्थन की बात कही गई थी।कोर्ट को बताया कब-कब क्या क्या हुआसोमवार को केन्द्र के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता चुनाव परिणाम से अब तक का घटनाक्रम कोर्ट को बताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने कब-कब क्या किया। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। BJP ने मना कर दिया।10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उसने भी मना कर दिया। 11 को एनसीपी ने भी मना किया तो राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उसके बाद से किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। अजित पवार का समर्थन पत्र पेश हुए, NCP के विधायक दल के नेता के तौर पर जिसमें 54 विधायक का नाम है।
‘मैं ही एनसीपी हूं’
अजित पवार के वकील पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह ने कहा, ‘मैंने 22 नवंबर को एनसीपी विधायक दल के नेता के रूप में काम किया। उस दिन अन्यथा दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था। राज्यपाल ने अपने विवेक से कार्य किया।अजित पवार की ओर से मनिंदर सिंह ने कहा, ‘जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही। फिर विवाद क्यों?अजित पवार ने कहा था कि मैं एनसीपी हूं। विधायक दल का नेता हूं। यही सही है, कोर्ट को आर्टिकल 32 के तहत इस याचिका को नहीं सुनना चाहिए। इन्हें हाईकोर्ट जाने को कहना चाहिए। अगर बाद में कोई स्थिति बनी है इसे राज्यपाल देखेंगे। उनके ऊपर छोड़ा जाए। कोर्ट इसमें दखल क्यों दें?’
जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें
जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी को कहा कि अपनी दलीलों को याचिका कि मांगों तक सीमित रखिए। इस पर सिंघवी ने कहा, ‘Mylord आपका कहना सही है। मगर वे बातें अंतरात्मा को धक्का पहुंचती है, जब कोई कोर्ट में खड़ा होकर कहता है कि मैं एनसीपी हूं।’सिंघवी ने कहा कि अजित पवार को विधायक दल का नेता चुनने के लिए किए गए विधायकों के हस्ताक्षर राज्यपाल को दिए गए पत्र में लगा दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि मैं इन बातों पर जोर नहीं देना चाहता, मगर ये बातें अपने आप में आधार हैं। फ्लोर टेस्ट आज ही हो जाना चाहिए। सिंघवी और रोहतगी में बहस होने पर जस्टिस रमना ने दोनों को शांत होने के लिए कहा।रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए कोई महीनों का समय नहीं दिया है। उन्होंने 30 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश नहीं दे सकता।ये कह रहे हैं कि कोर्ट सत्र बुलाये और ये भी तय करे कि को कब नाश्ता करेगा और कब लंच करेगा। मुकुल रोहतगी ने कहा कि पूर्व में कोर्ट ने संसद की कार्रवाई में दखल देने से मना किया था। इनका केस यह है कि आज ही फ्लोर टेस्ट हो।एनसीपी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को सही कह रहे हैं तो फिर इसमें देर क्यों? इसी तर्क के केस में कोर्ट के पुराने आदेश हमारे सामने हैं, उनकी उपेक्षा नहीं कि जा सकती। अनकवरिंग लेटर और अनएड्रेस लेटर को राज्यपाल ने कैसे स्वीकार किया।
जब कोर्ट में सब हंसने लगे
तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा, ‘आपके आदेश का दूरगामी असर होगा। विस्तृत सुनवाई के बाद ही आदेश जारी करें। जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है। इस मामले में पूर्व के कुछ आदेशों के आधार पर अंतरिम आदेश न दें।इस मामले में हमें विस्तृत जवाब दायर करने दीजिए।’तुषार मेहता ने कहा कि ये लोग एक याचिका दायर कर यहां आए हैं और एक वकील पर तो सहमत नहीं हो पाए। गठबंधन में सहमत कैसे हो पाएंगे।कोर्ट में सब हंसने लगे।तुषार मेहता ने कहा कि जो नई चिट्ठी ये कोर्ट को दे रहे हैं, उसमें भी कई विधायकों के नाम पते नहीं है। आपके अनुसार हम फ्लोर टेस्ट हारने को तैयार हैं। तो फ्लोर टेस्ट तय समय पर होने दो। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें।
शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। ऐलान किया कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बना रही हैं। ये शाम को 7 बजे हुआ। सुबह 5 बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला क्यों लिया गया?ऐसा राष्ट्रीय आपातकाल क्या था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था।
देश मे ऐसी क्या राष्ट्रीय विपदा आ गई थी कि सुबह 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटा और 8 बजे मुख्यमंत्री की शपथ भी दिलवा दी गई। जिस तरह पीएम के कहने पर बिना कैबिनेट मीटिंग के फैसले हुआ, वह आपातकालीन प्रावधान है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें।
शिवसेना के वकील सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए। कोर्ट ने पहले भी किया है, आज भी करना चाहिए। सबसे सीनियर मेंबर प्रोटेम स्पीकर होता है, वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। कोर्ट को आदेश देना चाहिए।
बता दें कि इससे पहले रविवार को अहम सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल, सीएम और डिप्टी सीएम को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने इस मामले में गवर्नर (केंद्र), सीएम और डिप्टी सीएम को राज्यपाल को सौंपे गए दस्तावेज आज कोर्ट में पेश करने को कहा था।
मध्यप्रदेश। पहले कर्नाटक में सत्ता गंवाई, फिर महाराष्ट्र में सरकार बनते-बनते रह गई और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की मुश्किल बढ़ने को लेकर फिर से कयासों का दौर शुरू हो गया। दरअसल विधानसभा चुनाव 2018 में काफी जद्दोजहद के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर अचानक अटकलों का बाजार गर्म हो गया।
काफी समय से सिंधिया के बीजेपी से संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में अचानक सिंधिया के ट्विटर प्रोफाइल से ‘कांग्रेस’ का गायब हो जाना भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप का कारण बन गया। आखिरकार सिंधिया ने खुद सफाई देकर कयासों पर लगाम लगा दी।
पहले शिवराज, फिर मोदी से मुलाकात
मध्य प्रदेश में कमल नाथ (Kamal Nath) और सिंधिया में से मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करने के लिए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अच्छी खासी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। तब जाकर कमल नाथ का नाम फाइनल हुआ तो सिंधिया खेमे ने विरोध भी किया था।
सरकार बनने के ठीक बाद शिवराज सिंह से सिंधिया की मुलाकात की खबर सामने आई थी। इसके बाद लगातार सिंधिया खेमे के माने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री दिग्विजय सिंह और कमल नाथ के खिलाफ बयान देते रहे।
कुछ दिनों पहले सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से भी मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात के बाद उनकी तरफ से कहा गया कि बाढ़ग्रस्त मध्य प्रदेश के संदर्भ में बातचीत करने गए थे।
यूं चला कयासों का दौर
तमाम घटनाक्रमों के चलते कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस से नाराज सिंधिया बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। चंद सीटों के फासले से सरकार बनाने से चूकी बीजेपी से सिंधिया के संपर्क में होने की खबरों ने कमल नाथ सरकार के लिए मुश्किल के संकेत दे दिए।
इसके चलते ट्विटर प्रोफाइल में बदलाव से मामला गर्मा गया, लेकिन सिंधिया ने खुद एएनआई से बातचीत में मामला स्पष्ट कर दिया।
रायपुर। पूर्व कलेक्टर व भाजपा नेता ओपी चौधारी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जय-वीरू को याद किया है. उन्हें याद करने की भी एक वजह है. वजह जानने से पहले ये जय वीरू है कौन ये जान लीजिए ? ओपी चौधरी ने सीएम भूपेश और मंत्री टीएस सिंहदेव को ये नाम दिया है. यदि आपने शोले फिल्म देखी होगी तो इस भूमिका को बखूबी जानते होंगे।
चालिए अब मुद्दे की बात पे आते हैं. दरअसल भाजपा नेता ओपी चौधरी ने कांग्रेस की सरकार बनने से पहले छत्तीसगढ़िया विद्यमितानों के लिए किए गए वादों को याद दिलाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही पता नहीं जय-वीरू को क्या हो गया है ? और उनकी दोस्ती को ?उन्होंने कहा कि जय-वीरू यानी सीएम भूपेश और मंत्री टीएस सिंहदेव कांग्रेस की सरकार बनते ही अपने वादे भूल गए हैं. ओपी ने वादा याद दिलाते हुए आग्रह किया है कि यदि छत्तीसगढ़िया विद्यमितानों की तत्काल शिक्षक के रूप में नियमित भर्ती की जाती है, तो वो स्वयं जय वीरू को गुलदस्ता देने जाएंगे. उन्होंने यह भी साफ किया है कि इस आग्रह को राजनीति से अलग समझे. इसमें कोई राजनीति नहीं की जा रही है.
ओपी चौधरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया है जिसमें कांग्रेस द्वारा वादा किए गए लेटर को भी अटैच करते हुए लिखा है कि…
जब कांग्रेस छत्तीसगढ़ में विपक्ष में थी, तो एक जोड़ी जय-वीरू कहलाती थी। तब जय ने छ्त्तीगढिया विद्यमितान भाई-बहनों को लिखित वादा किया था, कि कांग्रेस की सरकार बनते ही की जायेगी। सरकार बनते ही पता नहीं क्या हो गया है जय-वीरू को? और उनकी दोस्ती को?राजनीति से अलग जय-वीरू दोनों से गुजारिश है, कि छ्त्तीगढिया विद्यमितान भाई-बहनों का तत्काल नियमित भर्ती सुनिश्चित करें। मैं विद्यमितान साथियों के साथ धन्यवाद का गुलदस्ता,जय वीरू दोनों को देने आऊँगा।
सरकार बनने के पहले किए गए टीएस सिंहदेव के वादे का वो लेटर…
मुंबई। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के करीबन महीने भर बाद सरकार बनने की राह नजर आ रही है. शिवसेना के उद्धव ठाकरे के साथ एनसीपी के नेता शरद पवार और कांग्रेस के नेताओं की हुई बैठक में सरकार बनाने पर चर्चा की. बैठक में उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बनी. लेकिन अन्य पदों को लेकर अभी भी कश्मकश जारी है.
शिवसेना के उद्धव ठाकरे व आदित्य ठाकरे, एनसीपी के शरद पवार व अजीत पवार के साथ कांग्रेस के नेताओं की शुक्रवार को हुई बैठक में उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति बनी. इस पर अंतिम चर्चा शनिवार को और तीनों दलों के बीच होगी, जिसके बाद संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के जरिए प्रदेश की जनता को संदेश दे दिया जाएगा. इसके साथ ही तीनों दल राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का अपना दावा पेश करेंगी
बैठक में हुई चर्चा से जो बात सामने बाहर निकलकर आ रही है, उसके अनुसार, शिवसेना को मुख्यमंत्री के पद के अलावा 16 मंत्री के पद मिलेंगे. वहीं एनसीपी के खाते में डिप्टी सीएम के अलावा 14 मंत्रियों के पद आएंगे. कांग्रेस को विधानसभा में स्पीकर के साथ 12 मंत्री पद मिल सकते हैं. हालांकि, विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर को लेकर अभी भी तीनों दलों के बीच कश्मकश की स्थिति बताई जा रही है.
बरमकेला। स्वच्छ भारत अभियान को तार-तार करते हुए ग्राम सरपंच और सचिव ने 189 शौचालयों में से महज 92 शौचालय गांव को ओडीएफ घोषित करा लिया. इसके साथ शेष रह गए 97 शौचालयों की रकम डकार गए. अपने ही प्रतिनिधि के हाथ ठगे गए ग्रामीण अब कार्रवाई की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं. लेकिन प्रशासनिक अधिकारी भी आला दर्ज के हैं, जिन्होंने हड़ताल खत्म कराने की बजाए और ग्रामीणों की खिल्ली उड़ाते हुए आंदोलन को जारी रखने के लिए उकसा कर चले गए।
दरअसल बरमकेला जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत खैरगढ़ी में स्वच्छ भारत अभियान के तहत पात्र लोगों के घरों में 189 शौचालय का निर्माण करना था, लेकिन सरपंच-सचिव ने मात्र 92 शौचालय बनाकर ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित करा दिया. जो शौचालय बनाये गए वे भी बहुत घटिया स्तर के हैं. ग्रामीणों की माने तो शौचालय बनने के बाद अब तक उपयोग भी नहीं हुआ है. 189 शौचालय में से मात्र 92 बनाने के बाद शेष शौचालय की राशि का सरपंच हितासिनी साहू और सचिव ने मिलकर हजम कर दिया. इसकी भनक लगने पर गांव के जागरूक ग्रामीणों ने शिकायत जनपद से लेकर जिला पंचायत सीईओ तक की, लेकिन जांच किसी ने नहीं की।
ग्रामीणों ने इसके बाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच कर कार्रवाई की मांग रखी. इस पर जांच तो शुरु हुई, लेकिन महीनों बाद भी आज तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. प्रशासन के लचर रवैये से आक्रोशित ग्रामीण अब हड़ताल पर बैठ गए हैं. पिछले चार दिनों से ग्रामीण दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए हड़ताल कर रहे हैं. शुक्रवार को सारंगढ़ एसडीएम आईएएस चंद्रकांत वर्मा, बरमकेला तहसीलदार राकेश वर्मा के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को हड़ताल खत्म करने कहा, लेकिन ग्रामीण दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते रहे. इस बीच एसडीएम के चुटकी लिए जाने पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए तो एसडीएम ने आंदोलन पर बैठे रहने की नसीहत देकर चलते बने।
एसडीएम वर्मा ने ग्रामीणों की मांग पर तंज कसते हुए कहा कि इंसान को जब बुखार होता है, तो सीधे कैंसर का इलाज नहीं कराया जाता. हाथ में चोट लगती हैं तो सीधे हाथ को नहीं काटा जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट देखने के बाद नियमानुसार सब पर कार्रवाई की जाएगी. इस पर ग्रामीणों ने कहा कि जब कैंसर हो तो हाथ काटना ही पड़ता है. जाते-जाते एसडीएम ने यह भी कहा कि इतना बड़ा मामला नहीं है जितना बड़ा बनाया जा रहा है. एसडीएम की इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई. जाते-जाते उन्होंने यह भी कहा कि आप लोग अपना काम करें वे अपना काम करेंगे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक बार फिर AIMIM पर हमला बोलते हुए कहा कि हैदराबाद से नोटों के बैग भरकर यहां आ रहे और मुसलमानों का हमदर्द होने का दावा करने वाले नेता भाजपा के सबसे बड़े जिगरी दोस्त और उसके एजेंट हैं।इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, मुसलमानों के तुष्टिकरण और उन्हें वोट बैंक समझने के आरोपों का सामना करने वाली बनर्जी ने समुदाय से राज्य के बाहर से आने वाले नेताओं पर विश्वास ना करने को कहा।
तृणमूल प्रमुख ने कहा कि मुसलमानों को केवल राज्य के नेताओं पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि केवल वे ही पश्चिम बंगाल के लोगों के हित के लिए लड़ सकते हैं।बनर्जी ने मुर्शिदाबाद के सागरदिघी में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान तंज कसते हुए कहा, ‘‘ उन नेताओं पर विश्वास ना करें जो बाहर से आते हैं और खुद को आपका (अल्पसंख्यकों का) हमदर्द दिखाने की कोशिश करते हैं।केवल बंगाल के नेता ही आपके हित के लिए लड़ सकते हैं। हैदराबाद से नोटों से भरे बैग लेकर आने वाले नेता और खुद को मुसलमानों का हमदर्द बताने वाले भाजपा के सबसे बड़े जिगरी दोस्त हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘वे (हैदराबाद से आने वाले नेता) मुस्लिमों के हितों की कभी रक्षा नहीं कर सकते क्योंकि वे भाजपा के एजेंट हैं।’’ एआईएमआईएम पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं धर्म के नाम पर राजनीति करने में विश्वास नहीं रखती। लेकिन कुछ लोग हैदराबाद से आ रहे हैं और माहौल खराब कर रहे हैं।’’इसके बाद बरहामपुर में एक प्रशासनिक बैठक को संबोधित करते हुए बनर्जी ने पुलिस को हैदराबाद से आने वाले लोगों के प्रति अधिक सतर्क रहने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस को मुर्शिदाबाद आकर इधर-उधर बैठकें कर रहे लोगों के प्रति अधिक सक्रिय एवं सतर्क रहने की जरूरत है। कुछ स्कूलों और मदरसों पर भी नजर रखें।’’
‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (AIMIM) के राज्य प्रमुख जमीरुल हसन ने बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हमारी पार्टी की राज्य में पकड़ मजबूत होती देख बनर्जी अपना आपा खो बैठी हैं।हसन ने कहा, ‘‘ हमारी पार्टी (एआईएमआईएम) की मुसलमानों और दलितों पर पकड़ मजबूत होने के कारण, वह अपना आपा खो बैठी हैं। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि एआईएमआईएम राज्य में 2021 के विधानसभा चुनाव लड़ेगी।’’गौरतलब है कि कूचबिहार में सोमवार को एक कार्यक्रम में ममता ने इशारों ही इशारों में ओवैसी पर निशाना साधते हुए लोगों से हैदराबाद से आने वाले “अल्पसंख्यक चरमपंथियों” की बातों में नहीं आने के लिये कहा था।ममता के इस बयान पर पलटवार करते हुए औवेसी ने कहा, ‘‘ तृणमूल प्रमुख के राज्य में विकास सूचकांक पर मुसलमानों की हालत सबसे खराब है।’’
दिल्ली। झारखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई हैं. सभी विपक्षी दलों ने सीएम रघुवर दास को घेरने का तगड़ा प्लान बनाया है. जिससे सीएम अपनी ही सीट पर बुरी तरह फंस गए हैं।
भाजपा से टिकट नहीं मिलने से खफा झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अब वे सीएम रघुबर दास के खिलाफ उनकी ही सीट से चुनाव मैदान में ताल ठोकेंगे।
सरयू राय ने जमशेदपुर पूर्वी सीट से मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. राय ने कहा कि मैं जमशेदपुर ईस्ट और जमशेदपुर वेस्ट दोनों ही सीटों से चुनाव लड़ूंगा लेकिन मेरा फोकस सीएम को हराने पर होगा. उन्होंने कहा कि मैं पिछले पांच साल से करप्शन का मुद्दा उठा रहा हूं लेकिन कोई मेरी बात किसी ने नहीं सुनी उलटा मेरा ही टिकट काट दिया गया।
रायपुर। हाल ही में मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए सुनील कुजूर को सहकारिता निर्वाचन आयुक्त बनाया गया है. राज्य शासन ने उनका आदेश जारी कर दिया है. आदेश जारी होने के साथ ही उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है. कुजूर 31 अक्टूबर को रिटायर हुए थे.
भूपेश सरकार सुनील कुजूर को बतौर मुख्य सचिव एक्सटेंशन देना चाहती थी. इसके लिए केंद्र सरकार को दो बार चिट्ठी भी लिखी गई थी, लेकिन केंद्र ने एक्सटेंशन देने से साफ मना कर दिया था. यह तय माना जा रहा था कि कुजूर को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग दी जा सकती है.इससे पहले पिछली सरकार में गणेश शंकर मिश्रा सहकारिता निर्वाचन आयुक्त बनाए गए थे. भूपेश सरकार बनने के बाद कांग्रेसी विधायक देवेंद्र यादव ने रेडियस वाटर घोटाले मामले की शिकायत की थी. इस घोटाले की जांच विधानसभा की कमेटी ने की थी, जिसमें गणेश शंकर मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे. इस शिकायत के बाद ही उन्हें सहकारिता निर्वाचन आय़ुक्त के पद से हटा दिया गया था
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लगा झटकाआयकर न्यायाधिकरण ने ‘यंग इंडिया’ को चैरिटेबल ट्रस्ट बताने का दावा किया खारिजन्यायाधिकरण ने आदेश में कहा कि यह व्यावसायिक ट्रस्ट हैसोनिया और राहुल दोनों यंग इंडिया के निदेशक हैं।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को आयकर न्यायाधिकरण से झटका लगा है। न्यायाधिकरण ने यंग इंडिया को चैरिटेबल ट्रस्ट बताने के गांधी परिवार के दावे को खारिज कर दिया। अब उनके खिलाफ 100 करोड़ रुपये का आयकर का मामला फिर खुल सकता है।गांधी परिवार ने दावा किया था कि यंग इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट है और उसे आयकर में छूट मिलनी चाहिए। न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा कि यह व्यावसायिक ट्रस्ट है। इसके द्वारा ऐसा कोई काम नहीं किया गया है जो चैरिटेबल श्रेणी में हो। न्यायाधिकरण ने सुनवाई के दौरान पाया कि कांग्रेस ने यंग इंडिया को कर्ज दिया, सोनिया और राहुल दोनों यंग इंडिया के निदेशक हैं। दोनों के पास कंपनी की 36 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास 600 शेयर हैं। कांग्रेस ने 2017 में दिल्ली हाईकोर्ट अर्जी देकर बताया था कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चैरिटेबल कंपनी है। इस साल जनवरी में आयकर विभाग ने सोनिया और राहुल को नोटिस जारी कर 100 करोड़ रुपये कर चुकाने को कहा था। आयकर के आकलन के अनुसार, गांधी परिवार ने जो रिटर्न दाखिल किया था, उसमें 300 करोड़ रुपये के आयकर की जानकारी ही नहीं थी।