Author: Sunil Agrawal

  • कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्र के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश

    कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्र के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश

    रायपुरछत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा सत्र 2019-20 के प्रश्न पत्र के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार कक्षा 9वीं और 10वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा 16 दिसम्बर से 31 दिसम्बर तक और कक्षा 11वीं और 12वीं की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 9 दिसम्बर से 21 दिसम्बर तक आयोजित की जानी है।

    माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव  व्ही.के. गोयल ने यह जानकारी आज स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम की अध्यक्षता और प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी की उपस्थिति में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में दी। शासन के आदेशानुसार कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्धवार्षिक एवं कक्षा 9वीं एवं 11वीं की मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्र मंडल द्वारा मुद्रित कर उपलब्ध कराया जाना है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को कक्षा 9वीं से 12वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा और कक्षा 9वीं एवं 11वीं की वार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्र कक्षा एवं विषयवार कोड अनुसार उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में इसके परिशिष्ट की सूची भी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश की प्रति के साथ उपलब्ध कराई गई। जारी निर्देश में कहा गया है कि परिशिष्ट में दर्शित विषयों के अतिरिक्त अन्य विषयों के प्रश्न पत्र स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाएंगे।

    मंडल द्वारा प्रश्नपत्र संभागीय कार्यालयों बिलासपुर, अम्बिकापुर, जगदलपुर, राजनांदगांव और मुख्यालय रायपुर संभाग से संबंधित संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को वितरित किए जाएंगे। जिला शिक्षा अधिकारियों को वाहन व्यय मंडल द्वारा दिया जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारी 2 दिसम्बर को संभागीय कार्यालय से प्रश्नपत्र प्राप्त करेंगे और 4 दिसम्बर को अपने जिले के समस्त शासकीय विद्यालय में वितरित करेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी अपने जिले के शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को प्राप्त प्रश्नपत्रों का नॉमिनल रोल से मिलान और कमी पूर्ति की सूचना के निर्देशित करेंगे। जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रत्येक विषयों के 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रश्नपत्र प्रदान किए जा रहे हैं। किसी विषय में अतिरिक्त प्रश्नपत्र की मांग (कमी/पूर्ति) होने पर संबंधित संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रदान किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को उनके जिले के अंतर्गत आने वाले शासकीय विद्यालयों के नॉमिनल रोल अनुसार प्रश्नपत्रों की जानकारी ई-मेल के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी है। सभी विषयों के प्रश्नपत्र हिन्दी माध्यम में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि किसी विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम के परीक्षार्थी हो तो स्थानीय स्तर पर प्रश्नपत्र का अंग्रेजी अनुवाद कराकर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रश्नपत्र केवल शासकीय विद्यालयों को ही प्रदान किया जाना है। संस्थाओं से परीक्षा शुल्क शासन द्वारा निर्धारित शुल्क अनुसार मंडल कार्यालय को ऑनलाईन प्रेषित किया जाना है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा प्रश्नपत्र जिला शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराए जाएंगे।जिसकी गोपनीयता एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होगी।

    शासन द्वारा कुछ शालाओं का उन्नयन कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं में किया गया है, उसकी जानकारी मंडल को प्राप्त ना होने की दिशा में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं होगा। ऐसी शालाओं में मंडल द्वारा भेजे गए अतिरिक्त प्रश्नपत्रों में से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाना है। निर्धारित शुल्क जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मंडल को भिजवाने की व्यवस्था किया जाना है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी अपने जिले के शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को पृथक से अपने स्तर पर स्पष्ट आदेश प्रसारित करें।

  • मंदी के कारण उद्यमी ने लगाई फांसी, खुदकुशी से पहले बेटी को भेजा वाट्सएप

    मंदी के कारण उद्यमी ने लगाई फांसी, खुदकुशी से पहले बेटी को भेजा वाट्सएप

    औरंगाबाद। सिडको वालूज महानगर-1 में रहने वाले लघु उद्यमी विष्णु कालवणे ने खुदकुशी कर ली. मौत को गले लगाने से पहले विष्णु ने पुणे में रहने वाली विवाहित पुत्री रोशनी को वाट्सएप पर एक संदेश भी भेजा. संदेश मिलते ही रोशनी घबरा गई. उसने पंढरपुर में रह रहे अपने भाई को यह बता बताई. इसके बाद कालवणे की पत्नी और पुत्र वहां पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मीडिया रिपोट्स से मुताबिक, वाट्सएप में कालवणे ने लिखा था कि उद्योग में छाई मंदी के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत घट गया. काम के आर्डर कम मिल रहे हैं. कंपनी के कुशल कर्मचारियों को बिना काम के वेतन देनी पड़ रही है. खर्च का भार बढ़ रहा है। वहीं, पिछले वर्ष भर से जीएसटी की रकम भरनी रह गई है. अफसर रकम मांगने के लिए बार- बार चक्कर काट रहे हैं. थोडी और मियाद मांगने पर अधिकारी वह देने को राजी नहीं हैं. इसलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं. जीएसटी के कारण संभवतः यह पहली आत्महत्या है।
  • भगवान राम के वनवास के 10 साल छत्तीसगढ़ में 51 स्थानों में बीते थे, जानिए कौन-कौन से हैं वो स्थान…

    भगवान राम के वनवास के 10 साल छत्तीसगढ़ में 51 स्थानों में बीते थे, जानिए कौन-कौन से हैं वो स्थान…

    रायपुर। भगवान श्रीराम को लेकर छत्तीसगढ़ में ऐसी मान्यता है कि उन्होंने 14 वर्ष के वनवास काल में से 10 वर्ष दण्डकारण्य में व्यतीत किए. रामायण कथा के कई लेखों में भगवान श्रीराम के छत्तीसगढ़ (दक्षिण कोसल) में प्रवास के वृतांत हैं. रामायण से संबंधित कई शोधकर्ताओं ने आज के छत्तीसगढ़ राज्य में श्रीराम के इस पथ को चिन्हित करने का प्रयास किया है।

    छत्तीसगढ़ का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही प्रशस्त है. त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कौसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था. दण्डकारण्य में भगवान श्रीराम के वनगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है. शोधकर्ताओं के शोध किताबों से प्राप्त जानकारी अनुसार, प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष से अधिक समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया था।

    प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने के बाद छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था. इसलिए छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है. छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के भरतपुर तहसील में मवाई नदी से होकर जनकपुर नामक स्थान से लगभग 28 किमी की दूरी पर स्थित सीतामढ़ी-हरचौका नामक स्थान से प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया।

    शोध प्रकाशनों के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया, जिसमें से 51 स्थल ऐसे हैं, जहां प्रभु राम ने भ्रमण के दौरान रूककर कुछ समय व्यतीत किया था. शोधकर्ताओं ने अपने शोध के आधार पर प्रभु श्रीराम के इन स्थलों में भ्रमण किए जाने की पुष्टि की है. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इन राम वनगमन पथ का पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजना पर कार्य किया जा रहा है. इनके विकास का उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों, आगंतुकों के साथ साथ राज्य के लोगों को भी इन राम वनगमन मार्ग एवं स्थलों से परिचित कराना है।

    प्रदेश के 51 स्थल जहां श्रीराम ने समय व्यतीत किया

  • मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में JIO का कमाल, एयरटेल, आइडिया, बीएसएनल को पछाड़ा…

    मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में JIO का कमाल, एयरटेल, आइडिया, बीएसएनल को पछाड़ा…

    रायपुर। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में सितंबर के महीने में कुल मोबाइल ग्राहक 7.54 करोड़ हो गए हैं. अगस्त में इनकी संख्या 7.52 करोड़ थी. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में कुल 1.68 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के महीने में सिर्फ जियो ही ग्राहक जोड़ने में कामयाब रही है, वहीं भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल के ग्राहकों में कमी आई है।टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई के आंकड़ों की बात कहें तो रिलायंस जियो के अगस्त में 2.62 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, जो सितंबर में बढ़कर 2.68 करोड़ हो गए. जियो ने सितंबर के महीने में 5.6 लाख ग्राहक जोड़े हैं. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भारती एयरटेल के अगस्त में 1.49 करोड़ सब्सक्राइबर थे, जो सितंबर में घटकर 1.48 करोड़ हो गए हैं. वोडाफोन-आइडिया के 2.76 करोड़ ग्राहक थे, जो सितंबर में घटकर 2.73 करोड़ हो गए हैं. बीएसएनएल के 63.8 लाख ग्राहक थे जो सितंबर में घटकर 63.7 लाख हो गए हैं। पूरे भारत की बात कहें तो कुल 117.37 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं. अगस्त में इनकी संख्या 117.1 करोड़ थी.  सितंबर में एक्टिव मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 96.08 करोड़ रही. सितंबर में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. वहीं शहरी इलाकों में ग्राहकों की संख्या घटी है. सितंबर में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 51.10 करोड़ से बढ़कर 51.72 करोड़ हो गई है. जियो फोन की अधिकतर बिक्री ग्रामीण इलाकों में ही होती है. पूरे भारत के लिहाज से वोडाफोन-आइडिया ने 25.7 लाख और भारती एयरटेल ने 23.8 लाख ग्राहक खोए हैं, वहीं रिलायंस जियो ने 69.83 लाख ग्राहक जोड़े हैं।
  • देश छोड़कर भाग गया स्वामी नित्यानंद, गुजरात पुलिस ने दर्ज किया था अपराध

    देश छोड़कर भाग गया स्वामी नित्यानंद, गुजरात पुलिस ने दर्ज किया था अपराध

    अहमदाबाद। आश्रम चलाने के लिए बच्चों को अगवा कर श्रद्धालुओं से चंदा जुटाने के काम में लगाने के आरोप से घिरा स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है. मीडिया रिपोट्स के मुताबिक नित्यानंद के खिलाफ बुधवार को एक दंपति ने अपनी दो बेटियों को छुड़ाने के लिए केस दर्ज कराई थी।

    केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने बाबा की दो महिला अनुयायियों साध्वी प्राण प्रियानंद और प्रियातत्व रिद्धि किरण को गिरफ्तार किया गया था. दोनों पर चार बच्चों को कथित तौर पर अगवा कर उन्हें एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का आरोप है।अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एसवी अंसारी ने बताया कि नित्यानंद विदेश भाग गया है. नित्यानंद कर्नाटक में अपने खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने के बाद ही देश छोड़कर भाग गया था और उसे यहां ढूंढना समय की बर्बादी होगी. उसके भारत आने के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है।

    आश्रम में सर्च ऑपरेशन,  43 टैबलेट और कई मोबाइल जब्‍त

    पुलिस ने नित्‍यानंद के आश्रम में सर्च ऑपरेशन चलाया है. आश्रम से चार लैपटॉप, 43 टैबलेट, पेन ड्राइव और कई मोबाइल जब्‍त किये गए. पुलिस ने कहा कि फिलहाल नित्‍यानंद की तलाश नहीं कर रहे हैं. पहले हम गिरफ्तार की गईं अनुयायियों से पूछताछ करेंगे. सुबूत जुटाएंगे, फिर आगे की कार्रवाई करेंगे।

  • एसपी ने की बड़ी सर्जरी,जिले के 235 आरक्षक और प्रधान आरक्षकों का किया तबादला…

    एसपी ने की बड़ी सर्जरी,जिले के 235 आरक्षक और प्रधान आरक्षकों का किया तबादला…

    रायगढ़। जिले के एसपी संतोष कुमार सिंह ने 235 प्रधान आरक्षकों व आरक्षकों  के जिले के भीतर विभिन्न थानों में स्थानांतरण किया है। रायगढ़ जिले के एसपी बनने के बाद उनकी यह पहली बड़ी विभागीय सर्जरी है। इस फेरबदल से पुलिस महकमे के कामकाज में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है । हालांकि शहर सहित ऐसे कई थाने हैं जहां सालों से पुलिस के कुछ जवान डटे हुए हैं या पड़ोसी थानों मैं ही अपनी सुविधा के अनुसार चले गए हैं और इस लिस्ट में भी वह शामिल नहीं हो सके हैं। स्थानांतरित किए गए प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों की सूची इस प्रकार है-
  • अंजलि जैन 9 महीने बाद सखी सेंटर हुई रिहा, चेहरे में दिखी मुस्कान, पिता से जान को खतरा बताकर की सुरक्षा की मांग

    अंजलि जैन 9 महीने बाद सखी सेंटर हुई रिहा, चेहरे में दिखी मुस्कान, पिता से जान को खतरा बताकर की सुरक्षा की मांग

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की चर्चित अंजलि-इब्राहिम मामले में आखिरकार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सखी सेंटर से अंजलि जैन की रिहाई की गई है. सखी सेंटर में रह रही अंजली जैन के बाहर निकलते ही उसके चेहरे में मुस्कान नजर आई. अंजली के मर्जी के अनुसार उसे पति आर्यन आर्य को सौंपा गया. लेकिन अंजलि ने अपनी को जान को पिता से खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। दरअसल 19 मार्च से 9 महीने तक अंजलि सखी सेंटर में रह रही थी. अंजलि को बाहर निकालने से पहले सखी सेंटर के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लगा दी गई थी. सखी सेंटर आने जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैरिकेड लगा रखा है. जिससे कोई अनहोनी न हो. सेंटर से रिहाई के वक्त एसएसपी आरिफ शेख और एसडीएम प्रणव सिंह मौजूद रहे.सखी सेंटर से बाहर निकलने के बाद अंजलि जैन ने कहा कि मैं अपनी मर्जी से पति के साथ जा रही हूं. थोड़े टाइम के लिए मुझे सुरक्षा की जरूरत है. मुझे अपनी पिता से खतरा है. मेरे परिवार वालों से अपील करती हूं वो इन चीजों को स्वीकार कर ले. जो हुआ वो गया इन चीजों को अब जल्द खत्म करे. जिस प्रकार से लड़ते आई हूं आगे भी अपनी लड़ाई उसी प्रकार लड़ूंगी और जीतूंगी. यह सब होगा ऐसा नहीं सोची थी, पर अब ऐसा हो रहा है. मेरे पिता मुझे आशीर्वाद देकर इसे स्वीकार कर ले. मैं माँ-बाप से रिश्ता नहीं तोड़ी हूं. उन्हें मनाने की कोशिश करूंगी। हाईकोर्ट ने 15 नवंबर को अंजलि के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अंजली जैन को अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ और अपनी मर्ज़ी की जगह में रह सकती है. अदालत ने ज़िले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष अंजलि जैन को सखी सेंटर से मुक्त कराए जाने के निर्देश भी दिए थे. जिसके बाद अंजलि जैन ने पति आर्यन आर्य उर्फ मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी के साथ रहने का निर्णय लिया है। क्या है पूरा मामला ? 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी मुस्लिम परिवार से आते हैं और 23 वर्षीय अंजलि जैन जैन परिवार से आती है. दोनों छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के रहने वाले है. दो साल पहले इनकी आपस में जान-पहचान हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया. फिर 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में दोनों ने शादी कर ली थी. शादी के बाद इब्राहिम ने दावा किया था कि उन्होंने शादी से पहले हिंदू धर्म अपना लिया था. इसके बाद अपना नाम आर्यन आर्य रखा था. शादी के बाद से ही मामले में कई पेंच फंसते गए और मामला स्थानीय अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चला।
  • डीकेएस अस्पताल में अब नहीं होगा मुफ्त में इलाज, इस वजह से स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने लिया बड़ा फैसला

    डीकेएस अस्पताल में अब नहीं होगा मुफ्त में इलाज, इस वजह से स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने लिया बड़ा फैसला

    रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का बड़ा बयान देते हुए कहा कि डीकेएस अस्पताल में मुफ्त इलाज बंद होगा. इलाज के लिए मुख्यमंत्री की अनुशंसा लेनी होगी और संजीवनी कोष से इलाज होगा. मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा कि डीकेएस स्वायत्त संस्था है. वर्तमान में डीकेएस घाटे में चल रहा है. अस्पताल की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए यह फैसला लिया गया है।

    उन्होंने कहा कि डीकेएस अस्पताल नाम के लिए सरकारी है. वास्तविक स्वरूप उसका स्वायत्त है. अपने पैसे से खड़े रहना है. प्रबंधन को मैंने डायरेक्शन दिया है. फ्री इलाज के लिए अगर संजीवनी कोष से राशि मिलती है या मुख्यमंत्री के कहने पर ही फ्री इलाज की व्यवस्था करें. अन्यथा जो भी प्रकरण आएंगे बिना संजीवनी कोष के उसको स्वीकृति डीकेएस नहीं कर पाएगा. डीकेएस के पास गार्ड को देने के लिए पैसे नहीं है. बिजली बिल पटाने के पैसे नहीं है. अन्य जो ऊपरी खर्चा है उसके लिए पैसे नहीं है. यह करीब 2 करोड़ के आसपास है. आमदनी मुश्किल से 50 लाख है. सवा करोड़ से ज्यादा का वहां पर डिफिशिएंट है. ऐसे में वह संस्था नहीं चल पाएगी।

  • भीमा मंडावी हत्याकांड मामले में शासन को बड़ा झटका, एनआईए ही करेगी मामले की जांच, शासन की रिट अपील कोर्ट ने की खारिज…

    भीमा मंडावी हत्याकांड मामले में शासन को बड़ा झटका, एनआईए ही करेगी मामले की जांच, शासन की रिट अपील कोर्ट ने की खारिज…

    बिलासपुर। विधायक भीमा मंडावी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है. चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की रिट पीटिशन को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के जांच की जिम्मा एनआईए को दिए जाने के फैसले को बरकरार रखा है. बता दें कि जस्टिस आरसी सामंत की सिंगल बेंच ने पहले ही मामले की जांच के दस्तावेज एनआईए को सौंपने के दिये थे. इस फैसले के खिलाफ शासन ने रिट याचिका दायर की थी. चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में बुधवार को मामले की सुनवाई हुई. दरअसल, भीमा मंडावी हत्याकांड की राज्य सरकार ने न्यायिक जांच का निर्णय लिया था, वहीं केंद्र सरकार ने एनआईए जांच का आदेश देते हुए अधिसूचना जारी की थी.इस अधिसूचना में एनआईए एक्ट और अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए राज्य सरकार से पुलिस जांच रोकने और मामले के दस्तावेज एनआईए को सौंपने को कहा गया था. एनआईए ने इसके बाद राज्य पुलिस की ओर से घटना से संबंधित जानकारी नही दिए जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच से जुड़े सभी दस्तावेज एनआईए को सौंपने का आदेश जारी किया था. उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ शासन की ओर से हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिट याचिका लगाई गई थी, जिस पर कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि मामले की जांच एनआईए ही करेगी.
  • इब्राहिम- अंजलि जैन मामला :सुप्रीम कोर्ट की शरण मे….पिता ने अपील दायर की

    इब्राहिम- अंजलि जैन मामला :सुप्रीम कोर्ट की शरण मे….पिता ने अपील दायर की

    रायपुर। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश दिनांक 15-11-2019 को चुनौती देते हुए अंजली जैन के पिता अशोक जैन द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी गयी है जिसकी सुनवाई दिनांक 25-11-2019 को नियत हो गयी है। इसी मामले से संबंधित एक याचिका अंजली जैन की सुरक्षा एवं कस्टडी को लेकर दिनांक 21-11-2019 को नियत है, उक्त याचिका में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लड़की की सुरक्षा का गंभीरता से संज्ञान लेते हुवे सुनवाई लंबित है, जिसमे छत्तीसगढ़ शासन, DGP, IG, SP, कलेक्टर, सखी सेंटर, आरोपी इब्राहिम सिद्दीकी एवं अन्य पक्षकार है एवं उनके वकील लगातार सुनवाई दिनांक को उपस्थित रहे है, उन्हें इस केस के लंबित होने के सम्बन्ध में जानकारी है।

    गौरतलब है की यहा याचिका WPHC No 24 को चुनौती देते हुए पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है। आएसी परिअथिति में हाई कोर्ट के आदेश दिनांक 15।11।2019 के परिपालन को लेकर काफी संवंधनिक एवम् क़ानूनी प्रश्न उत्त्पन्न होते है। ऐसी परिस्थिति में जो भी कारवाही होना संभावित है उसपर भी संवैधानिक प्रश्न उत्त्पन्न होते है। ऐसी अवस्था में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार न्यायिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है। ज्ञात हो की वर्तमान में अशोक जैन भी छत्तीसगढ़ के बाहर है एवं हाई कोर्ट के आदेश अनुसार उनको कारवाही के 24 घंटे पूर्व सुचना देना आवश्यक है जो को अभी तक नहीं हुई है। ऐसी गंभीर परिस्थिति के क्रियान्वनं में पिता का रहना बहुत महत्वपूर्ण प्रतीत होता है।