Author: Sunil Agrawal

  • होटल में धमकी देकर युवती से दुष्कर्म, तबीयत बिगड़ने पर हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती, आरोपी युवक गिरफ्तार

    होटल में धमकी देकर युवती से दुष्कर्म, तबीयत बिगड़ने पर हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती, आरोपी युवक गिरफ्तार

    रायपुर। पचपेड़ी नाका स्थित होटल कारबिज में 23 वर्षीय युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आया है. घटना के बाद युवती की तबीयत बिगड़ गई. उसे तेलीबांधा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.अस्पताल के डॉक्टरों ने पुलिस को फोन कर घटना की जानकारी दी. पुलिस ने आरोपी युवक वरुण नायक के खिलाफ जीरो में अपराध दर्ज किया है. आरोपी बिलासपुर का रहने वाला है. तेलीबांधा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. जीरो में मामला कायम करने के बाद टिकरापारा थाने को केस ट्रांसफर किया गया है।

    पीड़िता एक एक शो रूम में काम करती हैं. ऑटोमोबाइल से जुड़े लोगों की होटल कारबिज में तीन दिन की ट्रेनिंग थी. उसी में शामिल होने पीड़िता आई थी. ट्रेनिंग लेट में खत्म होने पर पीड़िता को घर जाने के लिए बस नहीं मिल पाई. बस नहीं मिलने के बाद होटल में ही युवती रुक गई थी.  ट्रेनिंग में शामिल होने आए कुछ युवक भी उसी होटल में रुके थे. इसी दौरान आरोपी वरुण नायक ने उसके कमरे में घुस गया और युवती को धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया.पीड़िता का आरोप है कि लगभग रात 11:30 बजे वरुण नायक नाम का युवक उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद उसने दरवाजा खोला, तभी वरुण नायक कमरे के अंदर आ गया और दरवाजा बंद कर दिया. फिर डरा धमकाकर और उसका गला दबाकर उसके साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता ने इसके बाद पूरी घटना अपने सहेलियों को बताई. सहेलियों ने तबीयत बिगड़ने पर पीड़िता को कर्मा अस्पताल में भर्ती कराई।

    तेलीबांधा टीआई मोहसिन खान ने बताया कि 23 वर्षीय युवती के साथ बिलासपुर के रहने वाले वरुण नायक ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया है. दुष्कर्म के बाद युवती की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसे तेलीबांधा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के डॉक्टर ने फोन कर घटना की सूचना थाने को दी. जिसके बाद जीरो में मामला कायम करके टिकरापारा थाने को केस ट्रांसफर किया गया है. आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

  • फोरम का बड़ा फैसला, हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिये जमा योजना चलाने वाली महिला डॉक्टर पर लगा 1 लाख 83 हजार का हर्जाना

    फोरम का बड़ा फैसला, हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिये जमा योजना चलाने वाली महिला डॉक्टर पर लगा 1 लाख 83 हजार का हर्जाना

    दुर्ग। राधिका नगर भिलाई के श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए रकम निवेश करवाने के बाद तय समय में परिपक्वता राशि वापस नहीं किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने हॉस्पिटल की प्रोप्राइटर डॉ. नीता सोनी के खिलाफ आदेश पारित किया है. जिसके तहत डॉ. नीता सोनी पर 1 लाख 83 हजार रुपये हर्जाना लगाया गया है।

    क्या है मामला

    श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में बोरसी दुर्ग निवासी प्रवीण कुमार साहू ने परिवाद दायर किया था। जिसके अनुसार अनावेदक महिला डॉक्टर नीता सोनी ने अपने हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए परिवादी से 1 लाख 50 हजार रुपये का निवेश करवाकर दिनांक 07 फरवरी 2014 को डिपाजिट सर्टिफिकेट जारी किया था, जमा योजना की शर्त अनुसार 2 प्रतिशत ब्याज 36 माह दिए जाने का प्रमाण पत्र हॉस्पिटल प्रोपराइटर द्वारा प्रदान किया गया था, जिसकी अवधि 06 फरवरी 2017 तक थी। लेकिन परिपक्वता पश्चात मूल रकम लौटाने के लिए टालमटोल किया जाता रहा। मूल रकम व बकाया ब्याज की रकम के लिए परिवादी ने महिला डॉक्टर को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भी भिजवाया लेकिन इसके बाद भी अनावेदक ने रकम नहीं लौटाई, तब परिवादी ने जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के समक्ष शिकायत पेश की।

    अनावेदक का जवाब

    फोरम के समक्ष अनावेदक महिला डॉक्टर की ओर से जवाब दिया गया कि परिवादी उसके हॉस्पिटल में रकम प्राप्त करने हेतु नहीं आया जबकि नियम के अनुसार हॉस्पिटल में आकर आवेदन प्रस्तुत करना था और सुरक्षा के रूप में दिए गए चेक एवं प्रमाण पत्र को मूलतः वापस करना था।

    फोरम का फैसला

    प्रकरण पर विचारण पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने नियत अवधि के बाद निवेश की गई रकम वापस नहीं करने को ग्राहक के प्रति सेवा में कमी तथा व्यवसायिक दुराचरण की श्रेणी में आने वाला कृत्य मानते हुए श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रोप्राइटर डॉ. श्रीमती नीता सोनी पर 1 लाख 83 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत एक माह के भीतर निवेश की गई रकम 1 लाख 50 हजार रुपये, बकाया ब्याज राशि 12 हजार रुपये, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के रुप में 20 हजार रुपये व वाद व्यय की राशि 1 हजार रुपये तथा जमा रकम पर परिवाद प्रस्तुति दिनांक से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।

  • गैंगरेप मामले में बिलासपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चार आरोपियों को मिली 30 साल की सजा

    गैंगरेप मामले में बिलासपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चार आरोपियों को मिली 30 साल की सजा

    बिलासपुर। बिलासपुर जिला न्यायालय ने नाबालिग से गैंगरेप मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को 30 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. बिलासपुर जिला न्यायालय के जज संजीव तामक ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है. मामले में पीड़िता की वकील प्रियंका शुक्ला ने बताया कि पुलिस में मामला दर्ज कराने पर पीड़ित परिवार को आरोपियों द्वारा धमकाया गया परेशान किया गया. क्योंकि पीड़िता गरीब मजदूर परिवार से थी. इसलिए मामले को लड़ने में परेशानी भी हुई, लेकिन न्याय की जीत हुई है.उन्होंने कहा कि मजदूर परिवार को लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला है. इस तरह की घटनाओं को रोकने बहुत सारे काम करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटना दोबारा घटे ही नहीं. गैंगरेप के आरोपी मनोज वाडेकर, नागेश्वर रजक, ईश्वर, चरण सिंह चौहान को एडीजे कोर्ट ने 30 साल की सजा सुनाई है. बता दें कि देवारीखुर्द के आदतन बदमाशों ने नाबालिग को 2015 में अपने हवश का शिकार बनाया था. पुलिस थाने में मामला 2017 में दर्ज हुआ था.
  • राजधानी के 3 अलग-अलग संस्थानों में इनकम टैक्स विभाग ने दी दबिश…

    राजधानी के 3 अलग-अलग संस्थानों में इनकम टैक्स विभाग ने दी दबिश…

    रायपुर। राजधानी रायपुर के गणेश राम नगर की 3 संस्थानों में इनकम टैक्स ने दबिश दी है. अम्बे सेल्स, परमार थ्रेड हाउस, कन्हैया थ्रेड हाउस के दफ्तरों में इनकम टैक्स विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है.जानकारी के अनुसार इन तीनों संस्थानों में वित्तीय लेन देन का सर्वे चल रहा है. संस्थानों का धागे और सिलाई संबंधित सामान का बड़ा कारोबार है. इनकम टैक्स विभाग की टीम अंदर जाकर दस्तावेजों की जांच कर रही है. फिलहाल अभी तक क्या कुछ कार्रवाई हुई इसका पता नहीं चल सका है.
  • अंबेडकर अस्पताल में पूर्व गृहमंत्री व विधायक के बेटे के फेफड़े का हुआ सफल ऑपरेशन

    अंबेडकर अस्पताल में पूर्व गृहमंत्री व विधायक के बेटे के फेफड़े का हुआ सफल ऑपरेशन

    रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने पूर्व गृहमंत्री व वर्तमान विधायक ननकीराम कंवर के बेटे प्रमोद कुमार कंवर के ट्यूबर कुलोसिस के कारण खराब हो चुके फेफड़े को सर्जरी के जरिये ठीक किया. मरीज को ”ब्रोन्कोप्लुरल फिस्टुला विद पायोथोरेक्स एंड फाइब्रोसिस ऑफ लंग्स“ नामक बीमारी थी. इस बीमारी में फेफड़ा पूरी तरह से खराब होकर मवाद से भर गया तथा सिकुड़ कर पत्थर की तरह कड़ा हो गया था.फेफड़े में भर गया था मवादमरीज प्रमोद को 4 माह पहले टी. बी. के कारण सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गया। बायां फेफड़ा खराब हो गया था एवं फेफड़े में छेद हो गया था जिसको मेडिकल भाषा में ”ब्रोन्कोप्लुरल फिस्टुला विद पायोथोरेक्स एंड फाइब्रोसिस ऑफ लंग्स“ ( Broncho pleural fistula with pyothorax and fibrosis of lung ) कहते हैं। इस बीमारी में टी. बी. के कारण फेफड़ा पूर्णतः खराब होकर मवाद से भर जाता है एवं साथ में सिकुड़ कर पत्थर जैसे कड़ा हो जाता है एवं फेफड़े में बड़ा सा छेद हो जाता है।हाई रिस्क सर्जरीसबसे पहले मरीज का इलाज 4 महीना पूर्व प्राइवेट अस्पताल में हुआ परंतु वहां से राहत नहीं मिलने पर मेकाहारा में टीबी एवं चेस्ट विभाग में आये। वहां पर डॉ. पंडा के सरंक्षण में इलाज चला एवं उन्होंने हार्ट चेस्ट और वैस्कुलर (सीटीवीएस) विभाग में सर्जरी के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. साहू के पास रिफर किया। वहां डॉ. साहू ने सी. टी. स्केन के लिए रेडियोलॉजी विभाग में डॉ. एस. बी. एस. नेताम के पास रिफर किया। सी. टी. स्केन देखकर पता चला कि इसका इलाज सिर्फ ऑपरेशन से ही संभव है। चूंकि यह सर्जरी हाई रिस्क केटेगरी का था एवं बीमारी दुबारा हो सकती थी इसलिए हाई रिस्क कंसेट लिया गया। इस ऑपरेशन में बायें छाती को खोलकर फेफड़ों को ठीक करके अलग किया गया एवं फेफड़े में जो छेद था उसको विशेष स्टेपलर की मदद से बंद किया गया। आज ऑपरेशन को 12 दिन हो गये हैं। मरीज स्वस्थ्य है एवं डिस्चार्ज लेकर घर जाने को तैयार है।निजी अस्पतालों से बेहतर सुविधाविभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू कहते हैं कि यदि चिकित्सक और स्टॉफ अपने कार्य के प्रति समर्पित हों तो सरकारी अस्पतालों में भी निजी अस्पतालों की तुलना में कई गुना बेहतर इलाज होता है। यहां पर 24 घंटे दक्ष डॉक्टरों की टीम होती है जो कहीं अन्य जगह नहीं मिलती। सरकारी अस्पताल में कार्य करने वाले किसी भी सर्जन एवं फिजिशियन का अनुभव अन्य प्रायवेट अस्पतालों की तुलना में अधिक होता है क्योंकि यहां पर हर वह केस आता है जो बाकी अस्पतालों से रिजेक्ट होता है। एसीआई में सर्जरी की क्वालिटी विश्वस्तरीय है। यहां पर वो सभी केस होते हैं जो विश्व के उच्चस्तरीय अस्पताल में होते हैं। यहां पर बहुत से ऐसे केस हुए हैं जो कि छ.ग. में भी पहली बार हुआ है। यहां कि सुविधा किसी प्राइवेट अस्पताल से कई गुना अच्छी है। जनता के प्रतिनिधि भी अपने सरकारी तंत्र में विश्वास करते हैं तो यह और भी विश्वसनीय हो जाता है एवं सामान्य जनता जो सरकारी अस्पताल के नाम से कतराते हैं उसके लिए बहुत अच्छा उदाहरण है। सरकारी अस्पताल में वेटिंग ज्यादा होता है परंतु कार्य अच्छा होता है।ऑपरेशन में शामिल टीमकार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहूएनेस्थेटिस्ट – डॉ. ओ. पी. सुंदरानी, डॉ. सौम्या (पी. जी. डॉक्टर)नर्सिंग स्टॉफ – राजेन्द्र साहू, चोवाराम, मुनेसएनेस्थेसिया टेक्निशियन – भूपेन्द्र चंद्रा
  • कर्मचारियों की साठ-गांठ से सरकारी खजाने में सेंधमारी, जांच में पाई गई लाखों रुपए की अनियमितता…

    कर्मचारियों की साठ-गांठ से सरकारी खजाने में सेंधमारी, जांच में पाई गई लाखों रुपए की अनियमितता…

    गरियाबंद। मैनपुर के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला कोषालय से साठ-गांठ कर खजाने में सेंधमारी का मामला सामने आया है. स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघ के पदाधिकारी विशांत नायर ने फरवरी 2019 में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से की थी. जिसके बाद शिकायत पत्र की जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ है. कलेक्टर श्याम धावडे ने मामले की जांच का जिम्मा देवभोग बीएमओ सुनील भारती को दिया था. लंबे अवधि तक चली जांच के बाद बीएमओ ने तीन दिन पहले 150 पन्नो का जांच प्रतिवेदन एसडीएम भूपेंद्र साहू को सौपा है. एसडीएम साहू ने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक लाखों रुपये की अनियमितता पाई गई है. जिसमे स्वास्थ विभाग मैनपुर व जिला कोषालय की मिली भगत पाई गई है।
    स्वीपर भोजराम दीवान ने बताया कि उसके खाते में बीएमओ के सरकारी खाते से 6 बार में 9 लाख रुपये डाले गए, सभी रकम उसने तत्कालीन लेखापाल वीरेंद्र भंडारी को ले जाकर दिया. बदले में उसे केवल 10 हजार रुपये मिले हैं. इसी तरह वार्ड बॉय विनोद ध्रुव ने भी बताया है कि 4 बार में उसके खाते में 4 लाख आये,5 हजार ही मिले बाकी रकम उसने भंडारी को दिया. वर्तमान लेखाधिकारी ने भी स्वीकार किया है कि कुछ कर्मियों के नाम से 3 किश्त में निकले 10 लाख रुपये उसने निकाले ऐसे ही तत्कालीन लेखाकर्मी वीरेन्द्र भंडारी ने 6 लोगो के नाम के 25 लाख निकलना स्वीकार किया है।
    मैनपुर स्वास्थ्य विभाग के इन दोनों लेखाकर्मी ने अपने बयान में बताया है कि निकाले जाने वाले सभी रूययों के आधे हिस्से गरियबन्द जिला कोषालय में लिपिक वर्ग 2 में पदस्थ गुरविंद साव को देते थे,आधी रकम को बीएमओ के साथ मिलकर बांट लेते थे. जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन लेन देन के अलावा 22 अन्य कर्मी के नाम से लगभग 45 लाख रुपये बीएमओ के पीएनबी स्थित खाते से निकलना पाया गया है. सम्बंधित कर्मियों को रूपये निकालने की जानकारी तक नही है,क्योंकि ये रूपए सीधे चेक के माध्यम से केश विड्रॉल कर लिया गया है.इस पूरे मामले की जांच में दर्ज हुए बयान के मुताबिक, जिला कोषालय के लिपिक गुरविन्द शॉव ने इस तरह के लेन देन से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा है कि बिल बाउचर बीएमओ का आता है,वो तय करते हैं किसे किस मद का रूपये देना है. हमें इसके बारे में कुछ भी जानकारी नही हैं क्योंकि ट्रेजरी से पैसे बीएमओ के खाते में जाते हैं मेरा बीपी शुगर बढ़ा हुआ है मैं ज्यादा बात नहीं कर सकता मैं अभी अस्पताल में हूं।
  • भारतीय पासपोर्ट पर कमल निशान पर छत्तीसगढ़ के मंत्री टी एस सिंहदेव ने उठाया सवाल, ट्वीट कर पूछा-भाजपा का चिन्ह राष्ट्रीय प्रतीक की जगह लेगा? अब आगे क्या, रिपल्बिक आफ आरएसएस?

    भारतीय पासपोर्ट पर कमल निशान पर छत्तीसगढ़ के मंत्री टी एस सिंहदेव ने उठाया सवाल, ट्वीट कर पूछा-भाजपा का चिन्ह राष्ट्रीय प्रतीक की जगह लेगा? अब आगे क्या, रिपल्बिक आफ आरएसएस?

    रायपुर। भारतीय पासपोर्ट पर कमल के निशान को लेकर बवाल मचा हुआ है. इसे लेकर नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है. पासपोर्ट पर कमल का निशान छापे जाने पर विपक्ष एक के बाद एक मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इस मामले पर बीजेपी पर निशाना साधा है.उन्होंने ट्वीट के जरिए सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या भाजपा का पार्टी चिन्ह अब पासपोर्ट पर राष्ट्रीय प्रतीक की जगह लेने जा रहा है? टी एस सिंहदेव ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि अब देश में आगे क्या होगा? उन्होंने प्रश्नवाचक चिन्ह के साथ लिखा है-रिपब्लिक ऑफ आरएसएस?

    बता दें कि केरल के कोझिकोड में कमल के निशान वाले वाले पासपोर्ट बांटे जाने का मुद्दा कांग्रेस सांसद एम के राघवन ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया था. राघवन ने आरोप लगाया कि यह सरकारी संस्थानों का भगवाकरण करने की कोशिश है क्योंकि कमल बीजेपी का चुनाव चिन्ह है।

    वहीं इसे लेकर विदेश मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए कमल का निशान लाया गया है. अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का भी बारी-बारी से इस्तेमाल किया जाएगा.

  • बिलासपुर पुलिस की बड़ी सफलता… पुलिस कप्तान ने किया क्लोनिंग गिरोह का खुलासा..कहा..सैकड़ों को दिया करोड़ों का झटका..बिहार के 5 आरोपी पकड़ाये..

    बिलासपुर पुलिस की बड़ी सफलता… पुलिस कप्तान ने किया क्लोनिंग गिरोह का खुलासा..कहा..सैकड़ों को दिया करोड़ों का झटका..बिहार के 5 आरोपी पकड़ाये..

    बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस ने अन्तर्राज्यीय हाईटेक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। कमोबेश सभी आरोपी बिहार के रहने वाले है। आरोपी गुगल मैप के सहारे पहले तो एटीएम की लोकेशन का पता लगाते थे। इसके बाद अत्याधुनिक सिस्टम के सहारे एटीएम का कार्ड बनाते। फिर अपने मंसूबों को अंजाम देते थे। आरोपियों ने अब तक सैकड़ों लोगों को करोड़ों रूपए का चपत लगाया है।

    एटीएम क्लोनिंग गिरोह का पर्दाफाश           बिलासपुर पुलिस ने बहुत बड़े एटीएम क्लोनिंग कर लोगों के खाते से रकम पार करने वाले गिरोह का भांडाफोड़ा है। सिविल लाइन कन्ट्रोल रूम में आज पुलिस कप्तान प्रशांत अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर एटीएम क्लोनिंग करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस कप्तान ने बताया कि 7 दिसम्बर 2019 को रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी देवलाल पासवान दयालबंद स्थित प्रयाग डेंटल कालेज के पास स्थित एसबीआई एटीएम से रूपये निकालने गए। लेकिन नहीं निकले। पास में खडे दो लडको ने मदद के बहाने बुजुर्ग को दूसरे एटीएम से रूपए निकालने को कहा। देवलाल दूसरे एटीएम से 5000 रूपये निकालकर घर चले गए। दो दिन बाद 10 दिसम्बर को देवलाल एक बार फिर तोरवा स्थित एटीएम बूथ से रूपया निकालने गए । उन्हें जानकारी मिली की अकाउन्ट में रूपए नहीं है। उनके खाते से सभी रकम का आहरण हो चुका है। घटना के बाद देवलाल ने सिविल लाइन थाना पहुंचकर शिकायत की।

    पुलिस टीम का गठन और जांच पड़ताल पुलिस कप्तान प्रशान्त अग्रवाल ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद ज्ञात हुआ कि आरोपियों ने एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर अकाउन्ट खाली किया है। समझते देर नहीं लगी कि क्लोनिंग समूह इस समय बिलासपुर में सक्रिय हो गए हैं। मामले की तह तक जाने की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर ओ.पी.शर्मा ,नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाईन  आर.एन.यादव और सायबर सेल उप पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी को त्वरित कार्यवाही का निर्देश दिया गया। छानबीन के दौरान थाना प्रभारी सिविल लाईन और सायबर सेल ने तत्काल प्रभाव से तकनीकी साक्ष्य एकत्रित करने की योजना तैयार कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया केचैनल मैनेजर समेत अन्य सूत्रों से सम्पर्क किया।

    रायपुर में संदेहियों की धरपकड़ प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि विश्वसनीय तकनीकी सुराग मिलने के दौरान जानकारी मिली कि क्लोनिंग कर लोगों का अकाउन्ट साफ करने वाले संदेही इस समय राजधानी क्षेत्र रायपुर में सक्रिय हैं। मामले की जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियो को दी गयी। इसके बाद संदेहियों को पकड़ने व्यापक योजना का खाका तैयार किया गया। साथ ही संदेहियों की पल पल की गतिविधियों पर नजर रखा जाने लगा। जानकारी मिली कि संदेहियों ने इस समय अपना रूख रायपुर से बिलासपुर की तरफ किया है। पुलिस टीम ने वाहनों की पहचान कर संदेहियों की घेराबन्दी की गयी। गाडी में सवार युवकों से से पूछताछ की गयी। संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने से युवकों से पुलिस ने कडाई से पूछताछ की।  आरोपियों ने क्लोनिंग की घटना को स्वीकार किया। 

    आरोपियों ने कबूला जुर्म..बताया क्लोन का तरीका पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि कि वे लोग देश के कोने कोने में घूम घूूम कर क्लोनिंग के माध्यम से वारदात को अंजाम देते है। आरोपियों ने बताया कि एटीएम कार्ड क्लोन करने के लिए आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करते हैं। एटीएम कार्ड की क्लोनिंग तैयार करने में एटीएम कार्ड रीडर , मिनी स्कीमिंग डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं। एटीएम कार्ड रीडर तकनीक के माध्यम से वारदात को अंजाम देने के लिए  ऐसे एटीएम बूथ का चयन करते हैं जहां एटीएम की दो मशाीनें लगी हो । सदस्य के दो सदस्य एटीएम मशीन के बाहर खडे रहते है। दो सदस्य एटीएम बूथ के अंदर किसी भी एक एटीएम मशीन में जो पुरानी हो उसका हुड खोलकर मूल मशीन में लगे एटीएमकार्ड रीडर के स्क्रेच कर बाहर निकाल देते हैं। उसके स्थान पर अपने पास रखे एटीएम कार्ड रीडर को लगा देते थे। जब कोई ग्राहक रूपये निकालने जाता है तो मशीन में कार्ड डालने के बाद ट्रानजेक्शन नही होता था।  लेकिन कार्ड रीडर से कार्ड की जानकारी संग्रहित हो जाती है। इस दौरान दोनों में से एक व्यक्ति दुसरे मशीन से रूपये निकालते प्रयास कर रहे ग्राहक पिन इन्टर करते समय देखते रहते हैं। इस दौरान उसे याद भी कर लेते हैं। पुलिस कप्तान ने बताया कि इस प्रकार कई ग्राहकों के कार्ड में संग्रहित जानकारी और पिन नंबर जानने के बाद अपना कार्ड रीडर मशीन से निकाल कर आरोपी चले जाते थे।

    घटना को कैसे देते थे अंजाम इसके बाद क्लोनिंग समूह  मिनी स्कीमिंग डिवाइस के माध्यम से एटीएम कार्ड क्लोन करने किसी भी बैंक के एटीएम बूथ में जाते थे। जहां डल क्लाइण्ट को देखकर उसकी मदद करने के इरादे से उसका एटीएम  कार्ड हासिल कर लेते थे। मिनी स्कीमिंग डिवाइस में स्वैप कर ग्राहक के जानकारी के बिना संबंधित जानकारी रिकार्ड कर याद कर लेते थे। इसके बाद आरोपी संग्रहित जानकारी के आधार पर अपने पास रखे लैपटाप, और  साफ्टवेयर के माध्यम से डुप्लीकेट एटीएम कार्ड तैयार करते हैं। और कार्ड के पीछे दर्ज नम्बर के सहारे किसी भी एटीएम बूथ से मिनी स्टेटमेंट निकालकर बैलेंस चेक करते और रुपयों को निकालते हैं। पुलिस कप्तान के अनुसार पकडे गए आरोपियों ने बताया कि रायपुर के औद्ययोगिक क्षेत्र उरला के एक एटीएम बूथ में  बिलासपुर से रायपुर जाने के बाद कार्ड रीडर लगाए थे। इस दौरान कई कार्ड के क्लोन तैयार किए। लगभग 9 क्लोन कार्ड से रूपये आहरण बैलेंस चेक मिनी स्टेट मेंट को निकाला है।आरोपियों ने बताया कि रायपुर के भनपुरी स्थित आईडीबीआई बैंक के एटीएम  से क्लोन किए। कुल 9 कार्ड में लगभग 2 करोड रूपये थे। जिनका आहरण ये अन्य प्रदेशों के एटीएम से किया। इस दौरान सबसे ज्यादा रूपया एक खाते से करीब 1,77,19,000 रूपये निकाले।

    चलती गाडी में तैयार किया क्लोन पकडे गए आरोपियों में बताया कि 7 दिसम्बर 2019 को बिलासपुर में व्यक्ति को मदद करने के बहाने स्कीमर डिवाइस से जानकारी हासिल की। पिन जानने  के बाद चलती गाडी में एटीएम क्लोन तैयार किया। सीएमडी चौक स्थित एटीएम से रूपये निकाले। फिर प्यूमा के शौ रूम पहुंचकर जूता और टाइटन शोरूम से घटियों खरीदी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पिछले एक वर्ष से देश के विभिन्न प्रदेशोें में बिहार , झारखण्ड , पश्चिम बंगाल, उडिसा, महाराष्ट्र, दिल्ली , छत्तीसगढ, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड में कई घटना को अंजाम दे चुके हैं।

    गुगल मैप का सहारा प्रशांत अग्रुवाल ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान जानकारी दी है कि एटीएम बूथ के चयन में गुगल मैप का सहारा लेते थे। नजदीकी एटीएम बूथ की जानकारी हासिल कर नेविगेट कर सीधे एटीएम बूथ पहुचते थे।  गार्ड होने की दशा में दूसरे एसबीआई एटीएम में जाते थे।                     पकडे गए आरोपियों में से एक आरोपी श्रीकांत सिंह ने बताया कि वह 2011 में अपने -अपने साथियों के साथ एटीएम कार्ड बदल कर धोखे से राशि आहरित करने जुर्म में पटना बिहार में गिरप्तार हो चुका है।               पुलिस कप्तान ने जानकारी दी कि आरोपियों के पास से 60 से अधिक एटीएम कार्ड  मिले हैं। ज्यादातर एटीएम कार्ड क्लोन से तैयार किये गए हैं। बैकों से संपर्क कर कार्डधारको के संबंध में जानकारी हासिल की जा रही है। जानकारी मिलने के बाद संबंधित कार्ड धारको को सूचित किया जाएगा। 

    गिरप्तार आरोपियों के नाम

    1. ओंकार सिंह पिता रामाशीष सिंह उम्र 36 वर्ष निवासी आस्था स्पेस टाउन गिमना रोड मांगो जमशेदपुर (झारखण्ड)2. श्रीसंत कुमार सिंह पिता रामाशीष उम्र 31 वर्ष निवासी ग्राम धनगांव थाना फतेहपुर जिला गया बिहार ।3. राकेश रंजन सिंह पिता रामाशीष सिंह उम्र 38 वर्ष निवासी सी-.15 गौरसिटी नोएडा जीजीबी नगर नगर दिल्ली  प्लाट नं. 14 कल्याणपुर मुंगेर (बिहार)।4. राजीव रंजन सिंह पिता गोपाल कश्यप् सिंह उम्र 36 वर्ष निवासी बिरवाल कालोनी बेकारबंध धनबाद (झारखण्ड)।5. सूरज कुमार सिंह पिता शैलेन्दर सिंह उम्र 28 वर्ष निवासी रामगढ ,जमूरिया बाजार स्याल थाना गुरकुण्डा झारखण्ड।

    आरोपियों से बरामद सामाग्री पुलिस कप्तान ने बताया कि आरोपियों के पास से 1 नग लैपटाप चार्जर, 7 नग स्मार्ट औक  बेसिक फोन जब्त किया गया है। इसके अलावा आरोपियों के पास से 1 नग विटारा ब्रीजा वाहन, स्कीमर डिवाइस मेन्यूअल और बैटरी आपरेटेड, 60 नग विभिन्न बैंको के 20 से अधिक बैंकों के एटीएम कार्ड मिले हैं। आरोपियों के पास से शापिंग कार्ड  कई खातो के मिनी स्टेटमेंट आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड ,पेन कार्ड , क्लोनिंग टूल किट नगदी रकम को भी बरामद किया गया है।

    अधिकारियों की जमकर तारीफ प्रशांत अग्रवाल ने इस दौरान क्लोनिंग गिरोह का खुलासा करने में शामिल सिविल लाईन थाना प्रभारी कलीम खान ,सायबर सेल प्रभाकर तिवारी, उप निरीक्षक शंकर गोस्वामी, दीपक उपाध्याय, गोविंद शर्मा, राहुल सिंह ,सहायक उप निरीक्षक अवधेश सिंह, मनोज बघेल , विकास राम , मुकेश वर्मा, राकेश बंजारे की भूमिका की जमकर तारीफ की है।

  • कंपनी ने हर कर्मचारी को दिया 35 लाख का बोनस, खुशी के मारे रो पड़े कर्मचारी

    कंपनी ने हर कर्मचारी को दिया 35 लाख का बोनस, खुशी के मारे रो पड़े कर्मचारी

    दिल्ली। कंपनियां अक्सर अपने कर्मचारियों का बेहद ख्याल रखती हैं. ऐसी ही एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को इतना तगड़ा गिफ्ट दिया कि सबकी आंखे भर आईं.अमेरिका की एक रियल एस्टेट कंपनी ने अपने दो सौ के करीब कर्मचारियों को 70 करोड़ रुपये का बोनस दिया. खास बात ये है कि ये बोनस उनको बेहद चुपचाप और सरप्राइज के तौर पर दिया गया. अचानक इतना बड़ा गिफ्ट पाकर सभी कर्मचारी भावुक हो गए। दरअसल कंपनी ने अपने सभी कर्मियों को एक पार्टी में इनवाइट किया फिर एक लिफाफे में सभी कर्मचारियों को 50 हजार डॉलर यानि करीब 35 लाख रुपये गिफ्ट कर दिये गए. कंपनी इतना बड़ा गिफ्ट देने जा रही है इसकी भनक किसी कर्मचारी को नहीं लगी. सेंट जॉन प्रॉपर्टीज के प्रेसिडेंट लॉरेंस मेक्रांट्स ने कहा कि कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों की मेहनत के बगैर टॉप पर नहीं पहुंच सकती. हमने सिर्फ अपने कर्मचारियों का सम्मान किया है।
  • बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    जब कोई व्यक्ति समस्याओं से घिर जाता है तो उसे न्यायालय से ही उम्मीद रहती है। वकीलों की बेतहाशा फीस के कारण आदमी अपने किसी भी मामले को न्यायालय में ले जाने से डरता है, लेकिन कानून में इतनी गुंजाइश है कि आप न्यायालय की अनुमति से अपना केस खुद लड़ सकते हैं। अधिवक्ता अधिनियम के अंतर्गत आप बगैर अधिवक्ता हुए विधि व्यवसाय नहीं कर सकते परंतु स्वयं का मुकदमा लड़ सकते हैं, यह आपका नैसर्गिक अधिकार है। न्यायालय आपको अपना मुकदमा लड़ने से कतई निषिद्ध नहीं कर सकता। आप न्यायालय में वक़ील स्वयं की इच्छा से नियुक्त करते हैं तथा मुकदमे के लिए वक़ील पत्र पर हस्ताक्षर करके वकील को अपने मुकदमे में प्रत्येक प्रकार के अधिकार सौंपते हैं।

    कभी कभी जीवन में ऐसी परिस्थितियों का जन्म होता है जब आप को किसी आपराधिक मामलों में आरोपी बना दिया जाएं और राज्य द्वारा न्यायालय में आप पर कोई अभियोजन चलाया जा रहा है या फिर आपके किसी अधिकार के अतिक्रमण होने पर आप कोई सिविल मामला लेकर न्यायालय की शरण में जाते हैं। इनमें हर परिस्थिति में आपको वक़ील नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है, न्यायालय आपको वक़ील नियुक्त करने हेतु विवश नहीं करता। वक़ील आपकी सुविधा के लिए आप खुद नियुक्त करते हैं। भारतीय न्याय व्यवस्था बेहद तकनीकी है, जहां आपको पग पग पर वैधानिक जानकारियों की आवश्यकता होती है। इस परेशानी से व्यथित न हों, इसलिए आप न्यायालय में पैरवी के लिए वक़ील नियुक्त करते हैं। आज हम चर्चा करेंगे उन बिंदुओं पर जिनकी सहायता से आप स्वयं भी खुद के मुकदमे में पैरवी कर सकते हैं। हालांकि यह बिंदु नितांत सटीक तो नहीं परन्तु फिर भी आपको स्वयं का मुकदमा लड़ने में ज़रूर सहायता करेंगे। आपको अपना मुकदमा लड़ने के लिए केवल थोड़ा बहुत सामाजिक जानकारियों और साधारण तर्क पर ज्ञान हो और साथ ही कम से कम हिंदी भाषा में आप निपुण हों, ताकि अपनी बात को भाषा की सहायता से प्रभावी बना सकें।

    आइए जनाते हैं, क्या हैं वे बिंदु?

    बेयर एक्ट ख़रीदें- किसी भी अधिनियम पर बाज़ार में अलग अलग प्रकाशन संस्थाएं बेयर एक्ट प्रकाशित करती हैं। इनकी कीमत नाममात्र की होती है। आप बाज़ार से इन बेयर एक्ट को खरीद सकते हैं। इनकी भाषा भी कोई गूढ़ गहन नहीं होती है, परंतु उस ही शब्द को उपयोग किया जाता है जिस शब्द को विधायिका ने प्रयोग किया है।

    आपराधिक मामले में- यदि आप पर किसी आपराधिक मामले का अभियोजन चल रहा है तो आप सर्वप्रथम तीन अधिनियम की बेयर एक्ट खरीदें- भारतीय दंड संहिता 1860 दंड प्रक्रिया सहिंता 1973 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 भारतीय दंड सहिंता भारत की सीमा में अपराधों का निर्धारण करती है और उनके लिए दंड बताती है। दंड प्रक्रिया सहिंता उन अपराधों में किस प्रकिया से व्यक्ति को दंड तक ले जाया जाएगा, इसका निर्धारण करती है। साक्ष्य अधिनियम यह तय करता है कि किन साक्ष्यों को प्रकिया में शामिल किया जाएगा तथा कौन से एविडेन्स पर आरोपी को सज़ा दी जा सकती है। यह तीनों अधिनियम किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। सारा मुकदमा इन तीनों के आधार पर ही पर ही संचालित किया जाता है।

    न्यायाधीश से आज्ञा लेना- आप न्यायाधीश से आज्ञा लेकर ही स्वयं के मुकदमे में स्वयं पैरवी कर सकते हैं, परन्तु न्यायाधीश आपको वकील नियुक्त करने का परामर्श दे सकते हैं। इस पर आप कह सकते हैं कि पुलिस कार्यवाही में मुझे खुद ही पैरवी करने की अनुमति दें तथा इतना समय दें कि मैं ड्राफ्टिंग इत्यादि कर सकूं। अगर आप निरुद्ध हैं तो- यदि आप किसी आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं और पुलिस ने आपको बंदी बनाया हुआ है। संविधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत पुलिस को आपको गिरफ्तार करने के चौबीस घंटों के भीतर किसी भी क्षेत्राधिकार के न्यायालय में पेश करना होगा। जब आपको न्यायालय में पेश किया जाए तो आप पुलिस से अपनी एफआईआर की एक प्रति मांग सकते हैं। एफआईआर लेकर सबसे पहले उस घटना का विवरण पढ़ें फिर किन धाराओं में आपको निरूद्ध किया गया है यह जानकारी देखें तथा अपराध की सूचना देने वाला कौन व्यक्ति है यह नाम देखें। पुलिस की गिरफ्तारी के बाद बंदी व्यक्ति स्वयं अपनी जमानत याचिका लगा सकता है। आरोपी को सबसे पहले एफआईआर से यह मालूम करना होगा कि किन धाराओं तथा अधिनियम के अंतर्गत मुझ पर प्रकरण दर्ज किया गया है तथा वह अपराध जमानतीय है या गैरजमानती है। जमानती अपराध में मजिस्ट्रेट और पुलिस द्वारा जमानत दे दी जाती है पर गैरजमानती अपराध की सूरत में जमानत देने या नहीं देना न्यायलय के विवेक पर निर्भर करता है। न्यायालय से यह निवेदन करें कि पुलिस मुझे जमानत याचिका दाखिल करने के लिए थोड़ा समय दे। बाजार में सभी अभिवचनों के फॉर्मेट उपलब्ध होते हैं आप उन अभिवचनों को खरीद कर न्यायालय में अपनी जमानत याचिका लगा दें। याचिका बनाकर कोर्ट बाबू को दी जा सकती है, फिर मजिस्ट्रेट उस पर संज्ञान लेंगे। यदि न्यायालय आपको जमानत पर छोड़ देता है तो किसी जमानतदार के सहयोग से आप पुलिस निरूद्ध से बाहर हो सकते हैं। पुलिस निरूद्ध से बाहर होकर आप उन धाराओं, उन अधिनियम को पढ़ें जिनके अन्तर्गत आपको आरोपी बनाया गया है।

    विचारण के दरमियान- जब आप पर आरोप तय हो जाएं और पुलिस द्वारा अपना अंतिम प्रतिवेदन (चालान) प्रस्तुत कर दिया जाए तो आप गवाहों का प्रतिपरीक्षण कीजिए। आपको न्यायलय के नकल विभाग में एक एप्लिकेशन लगाने पर बोर्ड पर रखी आपके मुकदमे को फाइल में लगे पुलिस के पेश किए चालान की नकल की सत्यप्रतिलिपि प्राप्त हो जाएगी। चालान को अच्छे से पढ़ना- चालान की नकल मिलने पर आप चालान को अच्छे से पढ़िए तथा किन किन गवाहों ने क्या क्या कथन किया है। इस पर मंथन कीजिए तथा ऐसे तर्क को जन्म दीजिए, जिससे आप गवाहों के दिये कथन को अपने विरुद्ध दिए कथन को अपने पक्ष में कर लें तथा अपने खिलाफ गए गवाहों को झूठा सिद्ध कर सकें।

    सिविल मामले में- सिविल मामले में अपना मुकदमा स्वयं लड़ना अपेक्षाकृत थोड़ा सरल होता है, क्योंकि यहां हमारे पास समय रहता है तथा हम पुलिस द्वारा निरूद्ध नहीं होते हैं। किसी भी सिविल मुकदमों में यदि आपको स्वयं मुकदमा लड़ना है तो सिविल प्रक्रिया सहिंता अच्छे से समझिए और यह देखिए कि आपके किस अधिकार का अतिक्रमण हो रहा है और वह अधिकार किस अधिनियम के अंतर्गत आ रहा है। जैसे अगर कोई संविदा विधि से संबंधित मामला है तो सबसे पहले भारतीय संविदा अधिनियम देखें। कोई मामला राजस्व से संबंधित है तो अपने प्रदेश का राजस्व अधिनियम या कोड देखिए और उस पर गहन शोध करें। मामले की समस्त कार्यवाही सी पी सी के अंतर्गत ही कि संचालित की जाती है।