Author: Sunil Agrawal

  • ड्राइविंग लाइसेंस, RC, पॉल्यूशन समेत इन डाक्यूमेंट्स की वैलिडिटी 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई….

    ड्राइविंग लाइसेंस, RC, पॉल्यूशन समेत इन डाक्यूमेंट्स की वैलिडिटी 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई….

    केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस समेत सभी मोटर व्‍हीकल डॉक्‍यूमेंट की वैधता 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी है।

    केंद्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच लोगों को बड़ी राहत देते हुए ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के रजिस्‍ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट समेत तमाम जरूरी दस्‍तावेजों की वैधता इस साल के आखिर तक बढ़ा दी है. अब इन सभी को इस अवधि तक रिन्‍यू कराया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए मोटर व्‍हीकल से जुड़े फिटनेस, रजिस्‍ट्रेशन सर्टिफिकेट आरसी, पॉल्‍यूशन सर्टिफिकेट जैसे दस्‍तावेजों की वैधता 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ाने का फैसला लिया है. इससे लोगों अपने वाहन के एक्‍सपायर हो रहे दस्‍तावेजों को रिन्‍यू कराने के लिए काफी समय मिल जाएगा. आसान शब्‍दों में समझें तो अगर मोटर व्‍हीकल से जुड़ा आपका कोई दस्‍तावेज इस बीच एक्‍सपायर हो गया है या होने वाला है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप उसे 31 दिसंबर 2020 तक रिन्‍यू (Renew) करा सकते हैं. यही नहीं सरकार ने आपके एक्‍सपायर हो रहे ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता भी 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी है।

  • आयुर्वेद डॉक्‍टरों को सर्जरी का अधिकार देने के फैसले के विरोध में IMA, 11 दिसंबर को हड़ताल का ऐलान

    आयुर्वेद डॉक्‍टरों को सर्जरी का अधिकार देने के फैसले के विरोध में IMA, 11 दिसंबर को हड़ताल का ऐलान

    मुंंबई। सर्जरी आधुनिक मेडिकल साइंस का हिस्सा है और क्‍या इसे आयुर्वेद के साथ मुख्यधारा में लाया जा सकता है? इसका डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कड़ा विरोध कर रही है. दरअसल, हाल ही में सरकार ने आयुर्वेद के पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों (Ayurveda Doctors) को 58 सामान्य सर्जरी प्रक्रिया की ट्रेनिंग दिए जाने की अनुमति दे दी है. आयुर्वेदिक डॉक्टर कहते हैं सामान्य सर्जरी तो ये पहले भी कर रहे थे, 58 सर्जरीज़ का दायरा अब तय हुआ है.  बहरहाल, केंद्र सरकार की इस अधिसूचना पर डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रही है. दरअसल इस सरकारी पत्र में केंद्र सरकार ने आयुर्वेद के पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों को 58 सामान्य सर्जरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए ट्रेनिंग दिए जाने की अनुमति दे दी है. डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ की महाराष्ट्र इकाई ने इसके खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है. इस संबंध में 11 दिसंबर को डॉक्‍टरों ने हड़ताल की घोषणा की है।

    IMA महाराष्ट्र के अध्‍यक्ष डॉ अविनाश भोंडवे कहते हैं, ‘’सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ इंडियन मेडिसिन का दावा है कि ये ओरिजनल आयुर्वेदिक सर्जरीज़ हैं, उन्होंने इसे कोई संस्कृत नाम भी दिए हैं, लेकिन ये सारी मॉडर्न साइंस से ली हुईं सर्जरीज़ हैं, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर हम इसका विरोध कर रहे हैं. इसका असर उन तमाम मेडिकल छात्रों पर होगा जो डिग्री पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. महाराष्ट्र में सरकारी-प्राइवेट के 20 हज़ार मेडिकल स्टूडेंट आज से ही इस फ़ैसले का विरोध शुरू कर रहे हैं.”

    दूसरी ओर, आयुर्वेद कॉलेज सायन में 58 सर्जरी के बने सरकारी दायरे से खुशी है. 1954 में बने मुंबई के आयुर्वेद कॉलेज सायन में कई सामान्य सर्जरीज़ होती आई हैं, ट्रस्टी का कहना है की सर्जरीज़ का अधिकार तो पहले से था पर तय नहीं, अब 58 सर्जरी के बने सरकारी दायरे से ख़ुश हैं. आयुर्वेद कॉलेज सायन के ट्रस्‍टी डॉ मंगिरीश रंगनेकर कहते हैं कि ‘’आयुर्वेद के पोस्ट ग्रैजुएट डॉक्टर जो रुरल इलाक़े, पिछड़े इलाक़ों में काम करने वाले आयुर्वेदा डॉक्टर हैं ये सवाल बार बार उनके ख़िलाफ़ उठता रहा की की आपको सर्जरी का अधिकार है की नहीं, जबकि उनको राइट्स थे लेकिन ये डिफ़ाइंड नहीं था की कौन कौन सी सर्जरी के राइट्स हैं वो तो बेसिक सर्जरीज़ करते थे, ((पैच)) 79 का जो हमारा ऐक्ट प्रोविज़न था सर्जरीज़ का जो यूनिवर्सल था उसको एक दायरे में लाकर तय कर दिया की इन 58 के अलावा हमारे आयुर्वेद डॉक्टर कोई और सर्जरी नहीं कर पाएँगे।

     मैं मेरे एलोपेथिक भाइयों को कहूँगा की नेगेटिविटी छोड़ के साथ आएँ, अगर क्वालिटी इम्प्रूव करने के लिए सुझाव हैं तो ज़रूर हम ओपन हैं लेकिन सिर्फ़ विरोध करने के विरोध करना ग़लत है.”
    वैसे क़ानून के जानकार भी सरकारी क़दम को जल्दबाज़ी में लिया फ़ैसला बता रहे हैं. वकील श्रीराम परक्कत ने कहा, ‘’मुझे लगता है कि जल्दबाज़ी में यह  फ़ैसला लिया गया क्‍योंकि सर्जरी सिर्फ़ आयुर्वेदिक मेडिसिन के दम पर नहीं होती, इसमें एलोपैथिक एनेस्‍थीशिया की ज़रूरत पड़ती हैं, एलोपेथिक पोस्ट सर्जिकल केयर की ज़रूरत पड़ती है, ऐसे में एक मरीज़ को आयुर्वेदिक और एलोपैथी के मिक्स एंड मैच में डालना गलत है.” आयुर्वेद, आधुनिक तकनीक के तालमेल से आगे बढ़ने की कोशिश में है, सरकारी मुहर से शायद मदद भी मिलेगी लेकिन यह सवाल अभी तक अनुत्‍तरित है कि क्या ये इतना आसान होगा?  

  • 1 करोड़ रुपये वसूले GST अधिकारी ने वो भी इस तरह से….

    1 करोड़ रुपये वसूले GST अधिकारी ने वो भी इस तरह से….

    रायपुर। जीएसटी अधिकारी यू तो व्यापारियों के पाई-पाई का हिसाब रखने के लिए जाने जाते है. लेकिन जब बारी खुद के टैक्स पटाने और ईमानदारी से टैक्स अदा करने की आती है तो वो सारे नियम कायदे भूल जाते है।

    हम बात कर रहे है बिलासपुर के जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर आलोक जायसवाल की. इस अधिकारी ने पहले तो बिना अनुमित लिए कोचिंग पढ़ाई. इतना ही नहीं उन्होंने फ्री कोचिंग पढ़ाने के एवज में करीब 1 करोड़ रुपए की फीस अपने भतीजे के बैंक खाते में जमा करवाई।

    इस मामले में जीएसटी विभाग भी सवालों के घेरे में है. क्योंकि इस मामले की शिकायत विभाग से महीनों पहले की गई. लेकिन बावजूद इसके विभाग ने इसकी जांच शुरू नहीं की. अब जब मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया है तो अधिकारी नियम खंगालने और पूरे मामली की जांच करने की बात कह रहे है।
    जीएसटी अधिकारी आलोक जायसवाल बिलासपुर के दो कोचिंग जायसवाल कोचिंग और टेकलाइट कोचिंग से जुड़े हुए है. जिसमें से जायसवाल कोचिंग उनके भतीजे मयंक जासवाल की है और लॉकडाउन में उन्होंने एसीएफ की ऑन लाइन कोचिंग में प्रत्येक छात्र से 15-15 हजार रुपए भतीजे के खाते में जमा करवाएं और करीब 800-900 छात्रों ने कोचिंग में पढ़ाई की।

    https://youtu.be/xaRsX_RyYLo



    मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है. यदि वीडियो आया है तो सर्विस रूल पता कर लेती हूं. यदि ऑफिस के वक्त में यदि वे कोचिंग ले रहे है तो वो गलत है और यदि अनुमति लेकर वे जनकल्याण के लिए कोचिंग लेते है तो भी जानकारी ले लेती हूं. इस मामले की जांच जरूर होगी।
    रानू साहू, जीएसटी कमिश्नर, छत्तीसगढ़



    इस मामले में असिस्टेंट कमिश्नर आलोक जायसवाल का कहना है कि- मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं और इस मामले में मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि एसीएफ की परीक्षा देने वाले बच्चों को उन्होंने फ्री में कोचिंग दी है. जिसके लिए उन्होंने बच्चों से किसी प्रकार का कोई भी शुल्क नहीं लिया है।

  • प्रदेश में अब RT-PCR से कोरोना टेस्ट करवाने पर देने होंगे 750 रुपए….

    प्रदेश में अब RT-PCR से कोरोना टेस्ट करवाने पर देने होंगे 750 रुपए….

    रायपुर। कोरोना के बढ़ते आंकड़ों के बीच में छत्तीसगढ़ के लिए राहत भरी खबर यह है कि अब प्रदेशवासियों को आरटी-पीसीआर पद्धति से कोरोना जांच करवाने के लिए 750 रुपए ही खर्च करने पड़ेंगे।

    राज्य सरकार निजी लैब में जांच के लिए फिर से नए रेट निर्धारित करने वाली है, जबकि अभी 16 सौ रुपए देने होते हैं। इस दौरान अगर सैंपल कलेक्ट करवाने के लिए टैक्निशियन को घर बुलाने पर 200 रुपए एक्स्ट्रा देने होंगे।

    स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि प्रदेश में लगातार लोगों को सस्ते रेट पर इलाज और जांच के लिए प्रयास किया जा रहा है।

    सरकारी केंद्र में टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई जा रही है, जबकि निजी लैब में भी जांच की कीमतें कम करने की प्रक्रिया की जा रही है। नए रेट जल्द घोषित कर दिए जाएंगे।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने किया बड़ा ऐलान, कहा- ‘कुछ सप्ताह के भीतर आ जाएगा कोविड-19 वैक्सीन…

    प्रधानमंत्री मोदी ने किया बड़ा ऐलान, कहा- ‘कुछ सप्ताह के भीतर आ जाएगा कोविड-19 वैक्सीन…

    दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। पीएम मोदी ने बैठक में देशवासियों को खुशखबरी देते हुए कहा कि कोरोना का टीका अगले कुछ सप्ताह के भीतर आ जाएगा और वैज्ञानिकों की हरी झंडी मिलते ही देश में टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में करीब आठ टीके विकसित किए जा रहे हैं और वे परीक्षण के अलग अलग चरणों में हैं।

    उनका विनिर्माण भारत में होगा। भारत के तीन टीके भी परीक्षण के अलग अलग चरणों में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टीका अब बहुत दूर नहीं है।प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों की टीमें टीके के वितरण के लिए निकट सहयोग से काम कर रहीं हैं।भारत के पास टीके के वितरण की क्षमता एवं विशेषज्ञता है। हमारे पास टीकाकरण का अनुभव तथा विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक नेटवर्क है।

    राज्य सरकारों की मदद से शीत भंडारगृहों एवं अन्य टीकों को वहां से अलग अलग पहुंचाने की व्यवस्था का आकलन किया जा रहा है। टीके के भंडारण एवं वितरण की तात्कालिक स्थिति पर निगरानी के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि “दुनिया की नजर कम कीमत वाले सुरक्षित टीके पर है और इसलिए स्वाभाविक है कि पूरी दुनिया की नजर भारत पर भी है। कोरोना टीके को लेकर जो विश्वास इस चर्चा में नजर आया है, वो कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को और मजबूत करेगा।”

  •  भांग ड्रग्स नहीं, दवा है, संयुक्त राष्ट्र ने भी माना, 27 देशों ने पक्ष में किया मतदान

     भांग ड्रग्स नहीं, दवा है, संयुक्त राष्ट्र ने भी माना, 27 देशों ने पक्ष में किया मतदान

    दिल्ली । हर वर्ष हम महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को भांग का भोग जरूर लगाते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों व आयुर्वेद में भी भांग के गुणों को लेकर उल्लेख किया गया है, लेकिन बीते कई सालों में अंतरराष्ट्रीय जगत में भांग को एक ड्रग्स के रूप में पहचान मिली हुई है। लेकिन अब नए शोधों में पता चला है कि भांग एक ड्रग्स नहीं, बल्कि शरीर के लिए शानदार दवा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कई रिसर्च में भी इस बारे में दावा किया गया है और इसके अब संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी आखिरकार भांग को एक दवा के रूप में मान्यता दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की सिफारिश के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने ये कदम उठाया है।

    लेकिन प्रतिबंधित श्रेणी में बना रहेगा

    संयुक्त राष्ट्र ने भांग को भले ही एक दवा का दर्जा दे दिया है, लेकिन इसके सेवन पर प्रतिबंध लगा रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रग्स से श्रेणी में ऐसे पदार्थों को रखा जाता है, जो बेहद एडिक्टिव होते हैं और इंसानों के लिए खतरनाक होते हैं साथ ही मेडिकल में इसके फायदे बेहद कम या नहीं के बराबर होते हैं। अब इस लिस्ट से भांग को हटा दिया गया है।

    संयुक्त राष्ट्र के कानून के अनुसार अब भांग को गैर मेडिकल इस्तेमाल के तौर पर एक प्रतिबंधित ड्रग माना जाएगा। भांग को प्रतिबंधित ड्रग्स की लिस्ट से बाहर करने के लिए हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में एक मतदान कराया था। इस दौरान 27 देशों ने प्रतिबंध हटाने के पक्ष में पमतदान किया था, वहीं 25 देशों ने प्रतिबंध लागू रखने के लिए मतदान किया था। गौरतलब है कि भारत पाकिस्तान, नाइजीरिया, रूस जैसे देशो ने विरोध में मतदान किया था, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन ने पक्ष में मतदान किया था।

    अब भांग से बनी दवाओं से बढ़ सकती है मांग

    भांग को खतरनाक ड्रग्स की श्रेणी से हटाने के बाद इससे बनने वाली दवाओं की मांग बाजार में बढ़ सकती है। साथ ही इसको लेकर अब कई रिसर्च भी कई जा सकेंगी। संयुक्त राष्ट्र के फैसले के बाद भारत सहित कई देशों में भांग व गांजे के इस्तेमाल के लेकर पॉलिसी में बदलाव आ सकता है।

    गौरतलब है कि भांग व गांजे को एक दवा के रूप में स्थापित करने के लिए कई ग्रुप लंबे समय से काम कर रहे हैं। कनाडा, उरुग्वे, अमेरिका के 15 से अधिक राज्यों में गांजे व भांग के रिक्रिएशनल और मेडिकल इस्तेमाल पर पहले ही पाबंदी हटा दी गई है और इसका अच्छा बाजार भी उपलब्ध हो गया है। चूंकि भारत में अभी भी गांजा व भांग एक मादक पदार्थ के रूप में ही उपयोग किया जाता है, इसलिए सरकार इस पर से प्रतिबंध हटाने पर ज्यादा सावधानी बरत रही है।

  • मुख्य मंत्री भुपेश बघेल की सभा मे परिवार पहुँचा टी आई के खिलाफ न्याय मांगने…

    मुख्य मंत्री भुपेश बघेल की सभा मे परिवार पहुँचा टी आई के खिलाफ न्याय मांगने…

    जशपुर । मुख्य मंत्री भुपेश बघेल की सभा मे उस वक़्त हंगामा खड़ा हो गया जब बग़ीचा का एक परिवार रोते रोते मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने की कोशिश करने लगा। परिवार वालों का दहाड़ मारकर रोते हुए देखकर सभा मे उपस्थित लोग जहाँ सन्न रह गए वही उन्हें मुख्य्मंत्री तक जाने से रोका जाने लगा, लेकिन वह परिवार था कि रुकने को तैयार नहीं था। आखिरकार मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने उन्हें अपने पास बुला लिया, पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री को रोते रोते बताया कि बगीचा टी आई ने उनके परिवार के मुखिया को बेवजह गिरफ्तार कर लिया है और उसके साथ मार पीट की जा रही है। पीड़ित परिवार के सभी सदस्य महिलाएं थी, और उनका आरोप है कि टीआई ने उनके साथ भी मार पीट की है ।

    महिलाओं ने टीआई के ऊपर पैसे लेने के भी आरोप लगाए।
    मुख्य्मंत्री ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिया और सीएम का भरोसा पाकर पीड़ित परिवार मंच से नीचे उतरा ।

  • सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे….

    सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे….

    काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने काम के बंटवारे का राेस्टर जारी किया। इसमें तय किया गया है कि कौन-से जज के पास किस सब्जेक्ट के केस जाएंगे। 5 फरवरी से अमल में आने वाला यह रोस्टर सिस्टम सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लागू होगा। अभी तक चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री ही केस आवंटित करती थी।

    चीफ जस्टिस ने यह रोस्टर कोर्ट की वेबसाइट के जरिये सार्वजनिक किया। पुराने मामले नई व्यवस्था से बेअसर रहेंगे। नया रोस्टर सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन पर सवाल उठाने वाले चारों जजों के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी जनहित याचिकाओं पर सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही सुनवाई करेगी। शेष|पेज 7

    संविधान पीठ में कौन-कौन से जज शामिल होंगे, यह तय करने का अधिकार भी चीफ जस्टिस के पास ही रहेगा। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर काम के बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाया था। इन्होंने संविधान पीठ में भी सिर्फ पहले पांच वरिष्ठ जजों को ही रखने की मांग की थी।

    पुराना सिस्टम – चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री बांटती थी काम: काम आवंटन का कोई क्राइटेरिया नहीं था। चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री केस बांटती थी। सिर्फ चीफ जस्टिस ही जानते थे कि किसके पास कैसे मामले हैं। वह अपनी मर्जी से किसी के भी पास जनहित याचिका भेज सकते थे।

    नई व्यवस्था – क्राइटेरिया तय हुआ, किसके पास जाएगा कौन-सा सब्जेक्ट: व्यवस्था पारदर्शी हो गई। सबको पता होगा कि किस सब्जेक्ट की सुनवाई कौन-सी बेंच करेगी। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही करेगी। यह सिस्टम कई हाईकोर्ट में पहले से लागू है।

    सुप्रीम कोर्ट के पांच सीनियर जजों के बीच इस तरह बंटेगा काम:

    जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस के पास, इनमें ज्यादातर से जुड़े होते हैं बड़े विवाद: रोस्टर सिस्टम के तहत सभी जनहित याचिका, लेटर पिटीशन, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, आपराधिक, अवमानना, सिविल, जांच आयोग, कानूनी अधिकारियों की नियुक्ति, सामाजिक न्याय, संवैधानिक, सर्विस, चुनाव, आर्बिट्रेशन और संवैधानिक नियुक्तियों से जुड़े मामले चीफ जस्टिस की कोर्ट में आएंगे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चारों जजों के पास आएंगे ऐसे सब्जेक्ट मैटर: जस्टिस जे चेलमेश्वर: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, अपराध, साधारण सिविल, साधारण धन एवं गिरवी संपत्ति केस, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों से जुड़े मामले, भूमि एवं कृषि कानून, कब्जा छुड़ाने और उपभोक्ता संरक्षण संबंधी केस।

    जस्टिस रंजन गोगोई: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, कंपनी लॉ, सेबी, ट्राई, आरबीआई, अपराध, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन मामले, बैंकिंग, धन एवं गिरवी संपत्ति, स्टेट एक्साइज, सरकारी कांट्रेक्ट, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों और लाइसेंस विवाद से जुड़े केस।

    जस्टिस मदन बी लोकुर: भूमि अधिग्रहण, नौकरी, वन, वन्य जीवन, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक न्याय, साधारण सिविल केस, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन मामले, खदान, खनिज तत्व, भूमि कानून, उपभोक्ता संरक्षण और सशस्त्र बलों से जुड़े केस।

    जस्टिस कुरियन जोसेफ: श्रम, किराया, नौकरी, अपराध, परिवार कानून, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन संपत्ति और भूमि कानून संबंधी केस।

  • मुल्तानी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को अग्रिम जमानत दी

    मुल्तानी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को अग्रिम जमानत दी

    दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को 1991 के एक कनिष्ठ अभियंता की कथित हत्या से जुड़े मामले में बृहस्पतिवार को अंतरिम जमानत दे दी।

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर.सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की एक पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सैनी की अपील को स्वीकार किया, जिसमें अदालत ने 29 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत के सैनी के अनुरोध को खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिया कि एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही धनराशि के दो जमानती बॉन्ड भरने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दे। उच्च न्यायालय ने आठ सितम्बर को सैनी के, मुल्तानी की कथित हत्या के मामले में अग्रिम जमानत सहित दो आवेदन खारिज कर दिये थे। बलवंत सिंह मुल्तानी के गायब होने के 1991 के मामले में जालंधर में रहने वाले उसके रिश्तेदार पलविन्दर सिंह मुल्तानी की शिकायत पर सैनी और छह अन्य के खिलाफ मई महीने में मामला दर्ज किया गया।

  • नहीं रहे मसालों के बादशाह MDH वाले महाशय धर्मपाल, हार्ट अटैक से निधन

    नहीं रहे मसालों के बादशाह MDH वाले महाशय धर्मपाल, हार्ट अटैक से निधन

    देश की दिग्गज मसाला कंपनी महाशिया दी हट्टी (MDH) के मालिक महाशय धर्मपाल जी का निधन (MDH Owner Death News) हो गया है। स्वर्गीय गुलाटी ने अपनी कंपनी के जरिए भारतीय मसालों की पहचान पूरी दुनिया में दिलाई थी। सुबह 5.38 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 98 साल के थे। कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ। व्यापार और उद्योग में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए पिछले साल उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मभूषण से नवाजा था। वह अपनी कंपनी के CEO थे और 25 करोड़ उनकी सैलरी थी। 98 साल के गुलाटी अपने मसालों का विज्ञापन खुद ही करते थे।

    गुलाटी का जन्म 27 मार्च, 1923 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 में देश विभाजन के बाद वह भारत आ गए। तब उनके पास महज 1,500 रुपये थे। भारत आकर उन्होंने परिवार के भरण-पोषण के लिए तांगा चलाना शुरू किया। फिर जल्द ही उनके परिवार के पास इतनी संपत्ति जमा हो गई कि दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर मसाले की एक दुकान खोली जा सके।

    इस दुकान से मसाले का कारोबार धीरे-धीरे इतना फैलता गया कि आज उनकी भारत और दुबई में मसाले की 18 फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में तैयार एमडीएच मसाले दुनियाभर में पहुंचते हैं। एमडीएच के 62 प्रॉडक्ट्स हैं। कंपनी उत्तरी भारत के 80 प्रतिशत बाजार पर कब्जे का दावा करती है। धरमपाल गुलाटी अपने उत्पादों का ऐड खुद ही करते थे। अक्सर आपने उन्हें टीवी पर अपने मसालों के बारे में बताते देखा होगा। उन्हें दुनिया का सबसे उम्रदराज ऐड स्टार माना जाता था।

    धरमपाल गुलाटी (Dharampal Gulati News) कक्षा पांचवीं तक पढ़े थे। आगे की पढ़ाई के लिए वह स्कूल नहीं गए। उन्होंने भले ही किताबी शिक्षा अधिक ना ली हो, लेकिन कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गज उनका लोहा मानते थे। यूरोमॉनिटर के मुताबिक, धरमपाल गुलाटी एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले सीईओ थे। सूत्रों ने बताया कि 2018 में 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिली थी। गुलाटी अपनी सैलरी का करीब 90 फीसदी हिस्सा दान कर देते थे। वह 20 स्कूल और 1 हॉस्पिटल भी चला रहे थे।