Author: Sunil Agrawal

  • राष्ट्रीय संकट के समय मूकदर्शक बन नहीं रह सकते : सुप्रीम कोर्ट

    राष्ट्रीय संकट के समय मूकदर्शक बन नहीं रह सकते : सुप्रीम कोर्ट

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फिर कोरोना संकट को लेकर सरकार को फटकार लगाई। कोरोना के बढ़ते मामलों और मरीजों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था और केंद्र को नोटिस जारी कर कोरोना से निपटने के लिए नेशनल प्लान मांगा था। इस मसले पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस एस. रविंद्र भट्ट की बेंच में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय संकट के समय यह अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती। अदालत सहयोग के दृष्टिकोण से सुनवाई कर रही है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछे सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना संकट से निबटने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में कई तरह के सवाल किये और जवाब मांगा –

    ऑक्सीजन को लेकर पूरा प्लान क्या है, फिलहाल कितना ऑक्सीजन है, इसका बंटवारा कैसे-कैसे होता है, राज्यों में फिलहाल स्थिति क्या है?

    एक मई से सबको वैक्सीन कैसे मिलेगी, देश के पास फिलहाल कितनी वैक्सीन हैं, सबको टीका कैसे लगेगा, इसके लिए सरकार की प्लानिंग क्या है?

    कोरोना वैक्सीन की अलग-अलग कीमत क्यों हैं? वैक्सीन के कीमत निर्धारण का आधार क्या है?

    रेमडेसिविर जैसी जरूरी दवाओं की आपूर्ति के लिए क्या तैयारी है?

    राज्य सरकारों से पूछा गया कि कोरोना संकट में उनके पास क्या-क्या इंतजाम हैं?

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग हाईकोर्ट की सुनवाई जारी रहेगी, क्योंकि हाईकोर्ट को अपने अपने राज्यों में जमीनी हकीकत का ज्यादा पता रहता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय संकट के समय सुप्रीम कोर्ट मूकदर्शक नहीं हो सकता. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर क्षेत्रीय सीमाओं के कारण किसी मुद्दे से निपटने में हाईकोर्ट को कोई कठिनाई होती है, तो हम मदद करेंगे।

    कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को डॉक्टर्स के बड़े-बड़े पैनल बनाने को कहा है, जिससे मरीजों को डॉक्टर की सलाह मिल सके। अब मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। सुनवाई से पहले केंद्र सरकार नया हलफनामा दायर करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते कोविड के बढ़ते मामलों के बीच देश भर में ऑक्सीजन, टीके और दवाओं के बांटने से जुड़ी समस्याओं को उठाने का फैसला किया और केंद्र को नोटिस जारी कर नेशनल प्लान मांगा था।

  • हम हवा में सांस लेते हैं, तो हवा को सिलेंडरों में क्यों नहीं भर लेते!मेडिकल ऑक्सीजन के बारे में जानिए सब कुछ….

    हम हवा में सांस लेते हैं, तो हवा को सिलेंडरों में क्यों नहीं भर लेते!मेडिकल ऑक्सीजन के बारे में जानिए सब कुछ….

    कोरोना की दूसरी लहर ने हमारी सभी तैयारियों की कलई खोलकर रख दी है। अस्पतालों में बेड और दवा तो दूर, मरीजों को ऑक्सीजन भी नहीं मिल रही। हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार 50 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन खरीदने के लिए दुनिया के बाजार में खड़ी है। ऐसे में लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हम सब हवा में सांस लेते हैं और वह हमारे चारों ओर मौजूद है…तो क्यों नहीं हम इस हवा को सिलेंडरों में भरकर मरीजों को लगा देते?
    आखिर अस्पतालों में पाइप से आने वाली ऑक्सीजन यानी मेडिकल ऑक्सीजन है क्या? यह बनती कैसे है? और क्यों इसकी कमी है?
    तो आइये जानते हैं ऐसे सभी सवालों के जवाब…

    Q मेडिकल ऑक्सीजन क्या है?
    कानूनी रूप से यह एक आवश्यक दवा है जो 2015 में जारी देश की अति आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। इसे हेल्थकेयर के तीन लेवल- प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शीयरी के लिए आवश्यक करार दिया गया है। यह WHO की भी आवश्यक दवाओं की लिस्ट में शामिल है।

    प्रोडक्ट लेवल पर मेडिकल ऑक्सीजन का मतलब 98% तक शुद्ध ऑक्सीजन होता है, जिसमें नमी, धूल या दूसरी गैस जैसी अशुद्धि न हों।
    Q हमारे चारों ओर हवा है और हम उसमें ही सांस लेते हैं, ऐसे में उसे ही हम सिलेंडरों में क्यों नहीं भर लेते?
    हमारे चारों ओर मौजूद हवा में मात्र 21% ऑक्सीजन होती है। मेडिकल इमरजेंसी में उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसलिए मेडिकल ऑक्सीजन को खास वैज्ञानिक तरीके से बड़े-बड़े प्लांट में तैयार किया जाता है। वह भी लिक्विड ऑक्सीजन।
    Q मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनाई जाती है?
    मेडिकल ऑक्सीजन बनाने के तरीके को समझने के लिए पहले कुछ बातों को जानना जरूरी है…

    बॉयलिंग पॉइंट

    जिस तरह पानी को 0 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करने पर वह जमकर बर्फ या ठोस बन जाता है और 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने पर उबलकर भाप यानी गैस में बदल जाता है, ठीक ऐसे ही हमारे आसपास मौजूद ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि इसलिए गैस हैं क्योंकि वह बेहद कम तापमान पर उबलकर गैस बन चुकी हैं।
    ऑक्सीजन -183 डिग्री सेल्सियस पर ही उबलकर गैस में बदल जाती है।
    यानी पानी का बॉयलिंग पॉइंट 100 डिग्री सेल्सियस है तो ऑक्सीजन का -183 डिग्री सेल्सियस।
    दूसरे शब्दों में कहें तो अगर हम ऑक्सीजन को -183 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंडा कर दें तो वह लिक्विड में बदल जाएगी।
    अब बात मेडिकल ऑक्सीजन बनाने के तरीके की…
    मेडिकल ऑक्सीजन हमारे चारों ओर मौजूद हवा में से शुद्ध ऑक्सीजन को अलग करके बनाई जाती है।
    हमारे आसपास मौजूद हवा में 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और बाकी 1% आर्गन, हीलियम, नियोन, क्रिप्टोन, जीनोन जैसी गैस होती हैं।
    इन सभी गैसों का बॉयलिंग पॉइंट बेहद कम, लेकिन अलग-अलग होता है।
    अगर हम हवा को जमा करके उसे ठंडा करते जाएं तो -108 डिग्री पर जीनोन गैस लिक्विड में बदल जाएगी। ऐसे में हम उसे हवा से अलग कर सकते हैं।
    ठीक इसी तरह -153.2 डिग्री पर क्रिप्टोन, -183 ऑक्सीजन और अन्य गैस बारी-बारी से तरल बनती जाएंगी और उन्हें हम अलग-अलग करके लिक्विड फॉर्म में जमा कर लेते हैं।
    वायु से गैसों को अलग करने की इस टेक्नीक को हम क्रायोजेनिक टेक्निक फॉर सेपरेशन ऑफ एयर कहते हैं।
    इस तरह से तैयार लिक्विड ऑक्सीजन 99.5% तक शुद्ध होती है।
    यह पूरी प्रक्रिया बेहद ज्यादा प्रेशर में पूरी की जाती है ताकि गैसों का बॉयलिंग पॉइंट बढ़ जाए। यानी बहुत ज्यादा ठंडा किए बिना ही गैस लिक्विड में बदल जाए।
    इस प्रक्रिया से पहले हवा को ठंडा करके उसमें से नमी और फिल्टर के जरिए धूल, तेल और अन्य अशुद्धियों को अलग कर लिया जाता है।
    Q ऑक्सीजन अस्पतालों तक पहुंचती कैसे है?
    मैनुफैक्चरर्स इस लिक्विड ऑक्सीजन को बड़े-बड़े टैंकरों में स्टोर करते हैं। यहां से बेहद ठंडे रहने वाले क्रायोजेनिक टैंकरों से डिस्ट्रीब्यूटर तक भेजते हैं।
    डिस्ट्रीब्यूटर इसका प्रेशर कम करके गैस के रूप में अलग-अलग तरह के सिलेंडर में इसे भरते हैं।
    यही सिलेंडर सीधे अस्पतालों में या इससे छोटे सप्लायरों तक पहुंचाए जाते हैं।
    कुछ बड़े अस्पतालों में अपने छोटे-छोटे ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हैं।
    Q अगर हवा से ऑक्सीजन बनती है और इसे सिलेंडरों से मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है तो उसकी कमी क्यों है?
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि कोरोना महामारी से पहले भारत में रोज मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 1000-1200 मीट्रिक टन थी, यह 15 अप्रैल तक बढ़कर 4,795 मीट्रिक टन हो गई।
    ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIIGMA) के अनुसार 12 अप्रैल तक देश में मेडिकल यूज के लिए रोज 3,842 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई हो रही थी।
    तेजी से बढ़ी मांग के चलते ऑक्सीजन की सप्लाई में भारी दिक्कत हो रही है।
    पूरे देश में प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन को डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाने के लिए केवल 1200 से 1500 क्राइजोनिक टैंकर उपलब्ध हैं।
    यह महामारी की दूसरी लहर से पहले तक के लिए तो पर्याप्त थे, मगर अब 2 लाख मरीज रोज सामने आने से टैंकर कम पड़ रहे हैं।
    डिस्ट्रीब्यूटर के स्तर पर भी लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदल कर सिलेंडरों में भरने के लिए भी खाली सिलेंडरों की कमी है।
    Q किसी इंसान को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत होती है?
    एक वयस्क जब वह कोई काम नहीं कर रहा होता तो उसे सांस लेने के लिए हर मिनट 7 से 8 लीटर हवा की जरूरत होती है। यानी रोज करीब 11,000 लीटर हवा। सांस के जरिए फेफड़ों में जाने वाली हवा में 20% ऑक्सीजन होती है, जबकि छोड़ी जाने वाली सांस में 15% रहती है। यानी सांस के जरिए भीतर जाने वाली हवा का मात्र 5% का इस्तेमाल होता है। यही 5% ऑक्सीजन है जो कार्बन डाइऑक्साइड में बदलती है। यानी एक इंसान को 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मेहनत का काम करने या वर्जिश करने पर ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए होती है।
    Q स्वस्थ इंसान एक मिनट में कितनी बार सांस लेता है?
    एक स्वस्थ वयस्क एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। हर मिनट 12 से कम या 20 से ज्यादा बार सांस लेना किसी परेशानी की निशानी है।
    Q अस्पतालों में आमतौर पर ऑक्सीजन के कौन से सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं?
    अस्पतालों में आमतौर पर 7 cubic meter क्षमता वाले ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। इसकी ऊंचाई करीब 4 फुट 6 इंच होती है। इसकी क्षमता सिर्फ 47 लीटर होती है, मगर इसमें प्रेशर से करीब 7000 लीटर ऑक्सीजन भरी जाती है।
    Q ऐसा एक ऑक्सीजन सिलेंडर कितनी देर तक काम आता है?
    अगर 7 cubic meter वाले सिलेंडर से लगातार किसी मरीज को ऑक्सीजन दी जाती रहे तो वह करीब 20 घंटे तक चलेगा।
    Q 7 cubic meter वाले मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर को भरवाने की कीमत क्या है?
    ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIIGMA) के प्रेसिडेंट साकेत टिकू के अनुसार अस्पतालों के 7 क्यूबिक मीटर वाले मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर को रिफिल कराने में 175 से 200 रुपए खर्च होते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अस्पताल के सभी खर्च जोड़ने के बाद भी ऐसे एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत 350 रुपए होनी चाहिए।
    Q क्या सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन के लिए अधिकतम कीमत तय कर रखी है?
    सरकार ने 1 cubic meter लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के अधिकतम (एक्स फैक्ट्री) दाम 15.22 रुपए और मेडिकल ऑक्सीजन के 25.71 रुपए तय कर रखे हैं। यह दाम जीएसटी के बिना हैं। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने यह कैपिंग 25 सितंबर 2020 को लागू की थी। इससे पहले ऑक्सीजन के अधिकतम दाम 17.50 रुपए प्रति cubic meter तय थे, लेकिन लिक्विड ऑक्सीजन के दाम पर कोई कैप नहीं थी।

    नोट: उपरोक्त जानकारियां इंटरनेट, विश्वसनीय स्रोत एवम अनुभवी चिकित्सकों से प्राप्त की हुई है।

  • जाने कैसे हो रहा स्मार्टफोन पर वायरस का अटैक, चुरा रहा अकाउंट-पासवर्ड…

    जाने कैसे हो रहा स्मार्टफोन पर वायरस का अटैक, चुरा रहा अकाउंट-पासवर्ड…

    Google Play Store को एंड्रॉयड ऐप्स और गेम्स इंस्टॉल करने के लिए काफी सेफ माना गया है. Google दावा करता है कि इसमें एंटी-मैलवेयर प्रोटेक्शन दिया गया है. इस वजह से स्टोर पर अपलोड होने से पहेल ऐप को स्कैन किया जाता है. थर्ड पार्टी से किसी ऐप को इंस्टॉल करने में काफी रिस्क रहता है. अब एक मैलवेयर को लेकर अलर्ट किया गया है. Google की ओर से Play Store पर Google Play Protect टूल भी दिया जाता है।

    ये टूल प्ले स्टोर के बाहर से भी इंस्टॉल हुए ऐप्स पर मैलवेयर चेक करता है. इन सब के बावजूद मैलवेयर का अटैक हो जाता है. मैलवेयर यूजर के फोन में इंस्टॉल हो जाता है और डिवाइस को इन्फेक्ट कर देता है.अब एक नए मैलवेयर Flubot को लेकर रिपोर्ट आई है. ये मैलवेयर यूजर के पासवर्ड को चुरा लेता है. ये किसी पॉपुलर ऐप की तरह दिखता है. इस वजह से यूजर्स इसके झांसे में आ जाते हैं. इस वायरस को लेकर Vodafone UK, Three और EE के अलर्ट के बाद BBC ने इसे रिपोर्ट किया था. इस वायरस को इंस्टॉल करावने के लिए यूजर्स को एक स्पैम SMS भेजा जाता है. मैसेज में पैकेज डिलीवरी की बात कही जाती है. डिलीवरी को ट्रैक करने के लिए यूजर को एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है. ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है. इस वजह से इसे मैन्यूअली इंस्टॉल करने को कहा जाता है.ऐसे मैलवेयर अटैक से सुरक्षित रहने के लिए यूजर्स को किसी थर्ड पार्टी ऐप को कही और से डाउनलोड करने से बचना चाहिए. ये उनकी सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है. सिर्फ प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करने से यूजर्स काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।

    जो लोग Flubot मैलवेयर से प्रभावित हो चुके हैं उन्हें किसी नए अकाउंट में लॉगिन नहीं करना चाहिए. नए अकाउंट में लॉगिन करने से उनका और भी डेटा स्कैमर्स के पास जा सकता है. NCSC ने कहा है कि इससे इन्फेक्टेड यूजर्स को तुरंत अपना फोन रिसेट कर लेना चाहिए. Flubot इंस्टॉल करने के बाद अगर उन्होंने किसी नए अकाउंट को बनाया है तो उसका पासवर्ड उन्हें बदल देना चाहिए।

  • रेमडेसिविर इंजेक्शन में मिलावट के रैकेट का पर्दाफाश,मरीज़ों को नमक मिला पानी बेचते डॉक्टर व नर्स हुये गिरफ्तार…

    रेमडेसिविर इंजेक्शन में मिलावट के रैकेट का पर्दाफाश,मरीज़ों को नमक मिला पानी बेचते डॉक्टर व नर्स हुये गिरफ्तार…

    रतलाम। रतलाम में मिलावटखोरी की हद हो गयी. कोरोना मरीज़ों के लिए भारी डिमांड के बीच रतलाम में रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन बेचने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ है. ये गिरोह इंजेक्शन की खाली बोतल में नमक और किसी दूसरे इंजेक्शन का पावडर भर कर बेच रहे थे. इस रैकेट में सरकारी मेडिकल कॉलेज की नर्स और डॉक्टर सब शामिल हैं।

    कोरोना के भीषण संकट काल में पूरे देश में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी मची हुई है. मुनाफाखोर, जमाखोर, मिलावटखोर और कालाबाज़ारी त्रासदी के इस मौके को भी कैश करा रहे हैं. रतलाम पुलिस ने ऐसा की एक रैकेट बर्स्ट किया है।

    इतना बड़ा गुनाह

    ये गिरोह इंजेक्शन की कालाबाज़ारी या जमाखोरी के भी बड़ा गुनाह कर रहे थे. ये रेमडेसिविर के नाम पर नकली इंजेक्शन बेच रहे थे. रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली बोतल में मोनोसेफ़ नमक और एक अन्य इंजेक्शन का पावडर मिलाकर नकली इंजेक्शन बनाकर मार्केट में सप्लाई कर रहे थे. पुलिस ने इस मामले में मेडिकल कॉलेज की नर्स, निजी अस्पताल के दो डॉक्टरों सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।

    12 नकली इंजेक्शन बेचे

    पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की नर्स रीना प्रजापत, हॉस्पिटल से रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली बोतल और उसकी पैकिंग इस गिरोह को सप्लाई करती थी. बाकि लोग उसमें नकली माल भरकर बेचते थे. ये गिरोह 20 से 35 हजार रूपए में जरूरतमंद लोगो को ये नकली इंजेक्शन बेच रहा था. इस खुलासे के बाद अब हड़कंप मचा हुआ है. ये गिरोह अब तक ऐसे कुल 12 नकली इंजेक्शन बेच चुका है।

    ICU से खाली रैपर-बोतल चुराती थी नर्स

    इस पूरे रैकेट का सुराग शनिवार रात उस समय चला था जब पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी मामले में जीवांश हॉस्पिटल पर दबिश दी थी. उस दौरान दो डॉक्टर 30 से 35 हजार में रेमडेसिविर बेचते पकडे गए थे. पूछताछ में इन्होंने तीसरे आरोपी का नाम बताया. उसके बाद पुलिस ने उसे मंदसौर से सोमवार को गिरफ्तार किया. जब पुलिस ने सभी कड़ियों को जोड़ा तो इसके तार मेडिकल कॉलेज की नर्स रीना प्रजापत से जुड़ गए. ये नर्स आईसीयू से रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली बोतल और उसकी पैकिंग की उठा लाती थी. और फिर गिरोह को सप्लाई कर देती थी. पुलिस ने जांच के बाद अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इन सभी पर जीवनरक्षक इंजेक्शन के नाम पर नकली माल बेचने के आरोप में रासुका लगाने की तैयारी है।

    मरीज़ों की तलाश

    पुलिस अब पता लगा रही है कि ये शैतान अब तक किस मरीज को ये इंजेक्शन सप्लाई कर चुके हैं और मरीज़ की हालत कैसी है. अगर उनमें से किसी मरीज की मौत होती है तो पुलिस अन्य धाराएं भी बढ़ाएंगी.

  • सेंट जेवियर्स स्कूल परिसर में पालकों को बेच रहे थे पुस्तक, शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई…

    सेंट जेवियर्स स्कूल परिसर में पालकों को बेच रहे थे पुस्तक, शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई…

    कोरबा। निजी स्कूल प्रबंधन आपदा में भी अवसर की तलाश करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे ही मामला बालको में सामने आया है, जहां सेंट जेवियर्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन परिसर के भीतर पालकों को पुस्तकें बेच रहा था. पालकों की शिकायत पर स्कूल पहुंची शिक्षा विभाग की टीम ने कार्रवाई की।

    पालकों की शिकायत पर पहुंची शिक्षा विभाग की टीम ने रंगे हाथों सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन को परिसर में पुस्तक बेचते हुए पकड़ा. जांच टीम ने बेची जा रही पुस्तकों जब्त कर पंचनामा कार्रवाई की. शिक्षा विभाग की टीम की कार्रवाई से गुस्साए स्कूल प्रबंधन ने टीम के सदस्यों को लैब में बंधक बनाए जाने की धमकी दी।

    इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पाण्डे ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला जाकर शांत हुआ. मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को स्कूल के मान्यता रद्द करने नोटिस जारी किया है।

  • त्रिपुरा के DM शैलेश यादव हुए सस्पेंड, शादी में लट्ठ चलवाने व रिश्तेदारों को बेईज्जत करने का आरोप…

    त्रिपुरा के DM शैलेश यादव हुए सस्पेंड, शादी में लट्ठ चलवाने व रिश्तेदारों को बेईज्जत करने का आरोप…

    शादी में लट्ठ चलवाने वाले, परिवार व् रिश्तेदारों को खुलेआम बेइज्जत, बेहूदगी से बात करने वाले त्रिपुरा वेस्ट के जिलाधिकारी ( डीएम ) शैलेश यादव सस्पेंड कर दिए गए हैं, दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें डीएम साहब कोरोना के कारण एक शादी समारोह को बेहद ही गलत ढंग से रुकवा रहे थे, बारातियों पर पुलिस से लठ भंजवा रहे थे, दूल्हे व् उसके रिश्तेदारों से बेहूदगी से बात कर रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद त्रिपुरा के कई भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री विप्लब देब को पत्र लिखकर डीएम शैलेश यादव को सस्पेंड करने की मांग की, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, डीएम साहब अब सस्पेंड कर दिए गए हैं।
    वायरल वीडियो में डीएम शैलेश यादव कहते हैं कि ‘शादी में उपस्थित सभी लोगों ने सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन किया है. सभी पर कार्यवाही की जाएगी, बताया जा रहा है कि 30 से ज्यादा लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी, लेकिन बाद में सभी को छोड़ दिया गया. इस घटना के बाद पश्चिम त्रिपुरा की सांसद और भाजपा नेता प्रतिमा भौमिक ने कहा कि वह दुल्हन के रिश्तेदारों से मिलने जाएंगी और उनसे इस घटना के बारे में बात करेंगी। कल रात जो हुआ वह सबसे ज्यादा अवांछित है। ऐसा नहीं होना चाहिए था. सुदीप रॉय बर्मन, आशीष कुमार साहा और सुशांत चौधरी सहित कई भाजपा विधायकों ने मुख्य सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर डीएम को हटाने की मांग की थी।

    वायरल वीडियो में डीएम शैलेश यादव काफी गुस्से में भी दिखे। इस दौरान डीएम ने कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे लोगों को वहां से भगा दिया। इतना ही नहीं डीएम शैलेश यादव ने दूल्हे को भी धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। साथ ही डीएम शैलेश ने कई लोगों के साथ अभद्रता भी की। इस दौरान डीएम शैलेश यादव ने भाषाई स्तर पर भी सारी सीमाओं को लांघ दिया।

    सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने के बाद डीएम शैलेश कुमार यादव ने माफ़ी मांगी, उन्होंने कहा, सोमवार रात जो कुछ हुआ, उसके लिए मैं माफ़ी माँगता हूँ, मेरा इरादा किसी की भावनाओं को आहत या अपमानित करना नहीं था।

  • राज्यों के लिए अच्छी खबर, 300 रुपए में मिलेगी ‘कोविशील्ड’ वैक्सीन….

    राज्यों के लिए अच्छी खबर, 300 रुपए में मिलेगी ‘कोविशील्ड’ वैक्सीन….

    दिल्ली। राज्यों के लिए कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड की कीमत में 25 प्रतिशत तक कम करने का फैसला लिया है. सीरम के सीईओ अदार पूनावाला ने रेट कम करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए कोविशील्ड की कीमत 300 रुपए कर दिया गया है।

    सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड को 70 प्रतिशत तक प्रभावी बताया गया है, लेकिन ये 90 प्रतिशत से भी ज्यादा असरदार हो सकती है. देश में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है. जिससे कोरोना को जल्द से जल्द मात दिया जा सके. क्योंकि कई देश वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना को हराने में सफल हुए हैं।

    बता दें कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण भयावह रूप ले चुका है. संक्रमण की रफ्तार से हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं. भारत अब तक महामारी में अपने सबसे कठिन क्षण से गुजर रहा है. रोजाना कोविड-19 मामलों में रिकॉर्ड उछाल देखा जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में भारत में जानलेवा वायरस की वजह से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि पिछले करीब एक हफ्ते से लगातार देश में 3 लाख से ज्यादा कोरोना के नए मरीज मिल रहे हैं. बिगड़ते हालातों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें चिंतित हैं।

  • पत्रकारो की शुरू हुई वर्चुअल बैठक, पत्रकार के विरुद्ध एफआईआर के खिलाफ एकजुट होने लगा प्रेस क्लब ,लिया ये फैसला …

    पत्रकारो की शुरू हुई वर्चुअल बैठक, पत्रकार के विरुद्ध एफआईआर के खिलाफ एकजुट होने लगा प्रेस क्लब ,लिया ये फैसला …

    रायगढ़। कोरोना संक्रमण के इस आपातकाल में जहाँ एक ओर शासन प्रशासन के साथ पूरे देश के पत्रकार देश को इस विषम परिस्थितियों से बाहर निकालने कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ खड़े नजर आ रहे है।वही दूसरी ओर रायगढ़ जिले के लैलूँगा से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है।जिसमें संक्रमण फैलने के अंदेशे को लेकर एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित प्रशासन को जागरूप करने संबंधी समाचार के बाद उल्टे स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने इसे प्रशासन का मनोबल तोड़ने जैसा कृत्य बताकर लैलूँगा थाने में संबंधित पत्रकार के खिलाफ इसकी लिखित शिकायत की है।जबकि खबर प्रकाशन के रोज ही उसी मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन की एक कार्यवाही से उस समाचार की सत्यता पर मुहर लग चुकी है।और उस पूरी कार्यवाही को खबर का असर बताया जा रहा है।


    बहरहाल इस मामले को लेकर पत्रकार को ही निशाना बनाकर उसके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के बाद पूरे जिले के पत्रकारों में रोष व्यपात है।और उनके द्वारा कड़े शब्दों में इसकी निंदा की जा रही है।


    दरअसल रायगढ़ जिले में14 अप्रैल से लगाए गए लाकड़ाऊंन के बाद के बाद जिले के लैलूँगा थाना क्षेत्र के गांवों और सीमावर्ती राज्य एवम जिलों से महुवा कोचियों द्वारा पसरे लगाकर भीड़भाड़ इकट्ठा करने की खबर आ रही थी।और लॉकडाउन के इस समय में सरहदी इलाकों में चल रही इस प्रकार की गतिविधियों से ग्रामीण इससे संक्रमण फैलने का अंदेशा जताते हुए काफी डरे हुए थे।जिसे संज्ञान में लेकर दैनिक पत्रिका के प्रतिनिधि आशुतोष मिश्रा ने मौका मुआयना कर इस पूरे मामले से जिला पुलिस अधीक्षक को अवगत कराते हुए।18 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।जिसके बाद उसी रोज लैलूँगा तहसीलदार द्वारा अवैध रूप से महुआ से लदी एक पिकअप वाहन और उसके मालिक की धरपकड़ कर एफआईआर दर्ज कराई गई।

    जो कि 14 अप्रैल को लगे लॉकडाउन के बाद इस मामले में अधिकारियों की पहली कार्यवाही थी।बताते चले कि खबर में वाहनों की धरपकड़ कर उन्हें छोड़े जाने का उल्लेख किए जाने से बौखलाकर तहसीलदार द्वारा संबंधित पत्रकार को एसडीएम आफिस बुलाकर काफी खरी खोटी सुनाई थी।जबकि 15 अप्रैल को अवैध महुवे से लदा एक वाहन थाने तक लाकर उसे बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया गया था।

    (वाट्सअप ग्रुप में वायरल एक अन्य मैसेज की आड़ में जबरन बनाया जा रहा पत्रकार को निशाना)

    इस पूरे मामले में पत्रकार के खिलाफ की गई कार्यवाही इस लिए विवादों से घिरी हुई है।क्योकि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वायरल किए गए मैसेज को लेकर अधिकारियों द्वारा संबंधित पत्रकार को निशाना बनाने की कोशिश की गई है।वायरल मैसेज में अधिकारियों के खिलाफ जो टिप्पणी की गई है।वो छब्बीस अप्रैल को की गई है।और समाचार का प्रकाशन 18 अप्रैल के अंक में हुआ था। और तहसीलदार द्वारा उस मैसेज को जरिया बनाकर पत्रकार से भड़ास निकालने को कोशिश की गई है।जबकि पत्रकार द्वारा अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की टीका टिप्पणी नही की गई।

    (पत्रकारों ने जताई गहरी नाराजगी)

    पत्रकार आशुतोष मिश्रा पर हुए एफआईआर पर लैलूंगा के सभी पत्रकारों ने नाराजगी जाहिर करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया साथ ही जांच कर उचित कार्यवाही की मांग भी की है । विदित हो की विगत 27.04.2021 को लैलूंगा के एसडीएम तहसीलदार नायब तहसीलदार सीईओ जनपद पंचायत, सीएमओ नगर पंचायत द्वारा सामूहिक रूप से थाने में शिकायत की गई थी जिसमे जितेंद्र ठाकुर एवम आशुतोष मिश्रा पर एफआईआर करने आवेदन दिया गया था आवेदन में आशुतोष मिश्रा पर 18.04.2021 को लेख कर दैनिक समाचार पत्र में प्रशासन के विरुद्ध टिप्पणी किया गया है इसमें प्रशासन की छवि धूमिल करने का जनबुच कर प्रयास किया गया है ये जिक्र करते हुए थाना प्रभारी को एफआईआर करने आवेदन दिया था साथ ही एक लेख जो व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा गया था जिसमे उन्होंने ,और जनप्रतिनिधियों का क्या? उन्हें क्या इन सब की जानकारी नहीं है फिर वो क्यों चुप्पी साधकर तमाशा देख रहे हैं मुख्यालय में जो तमाशा चल रहा है ना उससे सीधे सीधे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।, का जिक्र किया था जिस पर थाना प्रभारी द्वारा भा द स की धारा 353,186,188,506,34
    के तहत फिर दर्ज किया गया है।

    (जिला कलेक्टर और एसपी से की जाएगी निष्पक्ष जांच की मांग)

    समस्त पत्रकारों के द्वारा कान्फ्रेस कॉल के माध्यम से चर्चा कर इसका विरोध करने का निर्णय लिया गया जिसमे आशुतोष मिश्रा पर हुए एफआईआर को एक पक्षीय कार्यवाही मानते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया गया साथ ही इस कार्यवाही पर पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर महोदय से चर्चा कर निस्पक्ष जांच कराने की मांग का निर्णय लिया गया जिसकी प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल , आई जी बिलासपुर रेंज, कलेक्टर रायगढ़ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के साथ जिला प्रेस एसोसिएशन एवम् प्रेस क्लब रायगढ़ को भी भेजा जाएगा जिनके मार्गदर्शन में अग्रिम रणनीति तैयार की जाएगी । इस निर्णय में लैलूंगा के सभी वरिष्ठ पत्रकार शामिल रहे ।

  • वाहन संचालको के मनमानी रकम वसूलने पर लगेगी रोक,कोरोना मरीज और शव ले जाने वाले वाहनों का किराया तय ..

    वाहन संचालको के मनमानी रकम वसूलने पर लगेगी रोक,कोरोना मरीज और शव ले जाने वाले वाहनों का किराया तय ..

    रायपुर। राजधानी रायपुर में कोरोना का कहर जारी है. ऐसे में कोरोना मरीज और शवों को ले जाने के लिए निजी वाहन संचालक लोगों से मनमानी रकम वसूलते थे, जिसे लेकर प्रशासन एक्शन मोड में है. कोरोना मरीजों और उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए अब किराया तय कर दिया गया है. रायपुर में किलोमीटर के हिसाब से किराया तय किय़ा गया है. अब एंबुलेंस और निजी वाहन संचालक लोगों को परेशान नहीं कर सकेंगे।

    स्वास्थ्य कारणों से मरीजों के आवागमन और कोविड-19 पॉजिटिव/ संदिग्ध व्यक्तियों की मौत के बाद पार्थिव शरीर के परिवहन के लिए निजी एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ती है.एम्बुलेंस के रूप में प्रयुक्त वाहन का अधिकतम किराया निम्नानुसार शर्तों के अधीन निर्धारित किया गया है।

    पेट्रोल-डीजल वाहन मालिक देगा

    बता दें कि प्रशासन के मुताबिक पेट्रोल-डीजल वाहन मालिक द्वारा देय होगा.  वाहन चालक का समस्त व्यय (वेतन भत्ता आदि) संबंधित वाहन मालिक द्वारा देय होगा. कार्यालय राज्य शिष्टाचार अधिकारी, छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा निर्धारित शर्तो को मान्य करना होगा.

  • स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के तबादले..डॉ. वाई. के. शिंदे बनाये गए रायगढ़ के प्रभारी सिविल सर्जन..

    स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों के तबादले..डॉ. वाई. के. शिंदे बनाये गए रायगढ़ के प्रभारी सिविल सर्जन..

    रायपुर। सरकार ने पांच स्वास्थ्य अफसरों के प्रभार बदले हैं। इस कड़ी में प्रभारी संभागीय स्वास्थ्य संचालक डॉ. मधुलिका सिंह को मुंगेली सीएमएचओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।