Author: Sunil Agrawal
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15 मई तक लॉक रहेगा प्रदेश लेकिन रायपुर और दुर्ग में आंशिक छूट….
1. कृषि क्षेत्र – बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रों की दुकानों और उनकी मरम्मत के लिए दुकानें / गोदाम खोलना। उर्वरक ट्रकों की आवाजाही।
B. रायपुर और दुर्ग के लिए, केवल 2 जिले
C. सभी 28 जिले – निम्नलिखित नहीं खोले जाएंगे:
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टीके पर आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई, कोर्ट ने कहा- टीकाकरण में इस तरह का भेदभाव जायज नहीं…
बिलासपुर। टीकाकरण में आरक्षण लगाने को लेकर प्रस्तुत हस्तक्षेप याचिकाओं पर मंगलवार को हाई कोर्ट की युगलपीठ में सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट ने टीकाकरण में आरक्षण लागू करने पर सख्त एतराज जताया है। कोर्ट ने शासन को स्पष्ट किया है कि टीकाकरण में इस तरह का भेदभाव जायज नहीं है। हाई कोर्ट ने टीकाकरण को लेकर शासन को दो दिन में नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने राज्य शासन द्वारा टीकाकरण में आरक्षण लागू करने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर इसे हस्तक्षेप याचिका मानकर सुनवाई करने का आग्रह किया है। इसी तरह टीकाकरण में आरक्षण को लेकर अलग-अलग पांच से अधिक हस्तक्षेप याचिकाएं दायर हुई है, जिस पर मंगलवार को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की बेंच में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए सुनवाई हुई।
इस दौरान हस्तक्षेप याचिकाककर्ता किशोर भादुड़ी सहित अन्य अधिवक्ताओं ने टीकाकरण को लेकर शासन द्वारा आरक्षण लागू किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी टीकाकरण को लेकर प्राथमिकताएं तय की है। लेकिन, उसमें आरक्षण जैसी स्थिति नहीं है। शासन ने प्रदेश की जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। सभी ने शासन के इस आदेश को तत्काल निरस्त करने व नई नीति बनाने की मांग की।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने शासन का पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने शासन को दो दिन के भीतर टीकाकरण को लेकर स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही टीकाकरण को लेकर लागू किए गए आरक्षक पर एतराज जताया है। करीब दो घंटे तक हाई कोर्ट में इस प्रकरण में आनलाइन बहस चली। इस मामले में हाई कोर्ट का अधिकारिक आदेश शाम तक जारी हो सकता है। याचिका में अमित जोगी सहित अन्य हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की तरफ से अनुमेश श्रीवास्तव, सुमित सिंह पतलाश तिवारी, हिमांशु चौबे ने पक्ष रखा।
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पत्रकारों को फ्रंटलाइन वारियर्स का मिला दर्जा, सीएम पटनायक ने पत्रकारों को दिया ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ का दर्जा….
कोरोना की इस लड़ाई में फ्रंटलाइन वर्कर्स ने एक सक्रिय भूमिका निभाई है. फिर चाहे वो दिन रात काम करने वाले डॉक्टर हों या फिर सड़कों पर पहरे देने वाली पुलिसकर्मी. इसके अलावा देश के पत्रकारों ने भी मुश्किल समय में लोगों तक लगातार जरूरी जानकारी पहुंचाई है. उनकी तरफ से भी जान जोखिम में डाल रिपोर्टिंग की गई है. अब पत्रकारों के इस अच्छे काम को समझा है ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जिन्होंने ऐलन कर दिया है कि उनके राज्य में तमाम पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स का दर्जा दिया जाएगा।
ओडिशा में पत्रकारों को मिला फ्रंटलाइन वर्कर्स का दर्जा
जारी किए गए बयान में कहा गया है कि ओडिशा के तमाम पत्रकार फ्रंटलाइन वॉरियर हैं. उन्होंने इस कोरोना काल में बेहतरीन काम किया है, लोगों तक जरूरी खबर पहुंचाई है, कोरोना को लेकर जागरूक किया है और इस महायुद्ध में एक सक्रिय भूमिका निभाई है. ये देश का पहला राज्य है जिसने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर का तमगा दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि ओडिशा में पत्रकारों को कई तरह की सुविधा दी गई हैं. राज्य के 6,994 पत्रकारों को 2 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है. वहीं जिन पत्रकारों का काम करते हुए कोरोना काल में निधन हुआ है, सरकार की तरफ से उन्हें भी 15 लाख रुपये की सहायता दी गई है. राज्य में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 11 पत्रकारों ने अपनी जान गंवाई है.केंद्र ने नहीं दिया जवाब, सीएम ने कर दिया ऐलान
वैसे सीएम की तरफ से ये ऐलान तब किया गया है, जब केंद्र ने उनकी अपील पर कोई जवाब नहीं दिया. इसी साल मार्च में नवीन पटनायक की तरफ से केंद्र को अपील की गई थी कि देश के तमाम पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स का दर्जा दिया जाए, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. ऐसे में सीएम ने अपने राज्य में ही पत्रकारों को ये सम्मान देने का फैसला ले लिया।
ओडिशा में लॉकडाउन
बता दें कि ओडिशा में कोरोना की स्थिति विस्फोटक बनी हुई है. राज्य में बढ़ते मामलों के बीच 14 दिन का लॉकडाउन लगा दिया गया है. लोगों पर तमाम तरह की पाबंदियां लग गई हैं और सिर्फ जरूरी सेवाओं को मंजूरी मिली है. पिछले 24 घंटे में राज्य में 8 हजार से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं, वहीं 14 लोगों ने जान भी गवा दी है।
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चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिवों को लिखा पत्र, जीत के बाद जश्न मनाने वालों के खिलाफ दर्ज हो एफआईआर…
दिल्ली। चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उत्साह और उमंग से भरे राजनीतिक दल के कार्यकर्ता कोरोना गाइड लाइन को एक तरह से भूल गए हैं. स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने पाचों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करते हुए संबंधित पुलिस थाने के एसएचओ को निलंबित कर कार्रवाई की जानकारी तत्काल देने के लिए निर्देशित किया है।
चुनाव में मिली जीत के बाद सबसे ज्यादा उत्साह में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता नजर आ रहे हैं, जहां पार्टी कार्यालय के बाहर जहां एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जुलूस की शक्ल में घूम रहे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश की. इलेक्ट्रानिक मीडिया के अलावा अन्य माध्यमों से मिली रही जानकारी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों के मुख्य सचिव तो पत्र लिखा है. आयोग ने प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी जुलूस निकाले जाने पर पार्टी कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने के साथ संबंधित पुलिस थाने के प्रभारी को निलंबित करने को कहा है।
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कलेक्टर कार्यालय और एसपी के नंबरों के साथ खबर हुई वायरल कि मिलेगी मदद, पर यह खबर है गलत, जिला प्रशासन ने किया खंडन
धमतरी। कलेक्टर कार्यालय और एसपी के नम्बर के साथ अन्य शासकीय अधिकारियों के नंबरों के साथ सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई है, जिसमें उनके नंबरों पर कॉल करने के बाद मदद की बात कही गई है। मगर यह खबर बिल्कुल भी गलत है। जिला प्रशासन ने जिसका खंडन करते हुये कहा है कि जिला प्रशासन ने इस खबर का खण्डन किया है, जिसमें कहा गया है कि लॉक डाउन के दौरान जिन परिवारों के घर पर राशन, पैसे खत्म हो गए और कहीं काम पर नहीं जा पा रहे, तो जिला कलेक्टर कार्यालय, पुलिस कंट्रोल रूम, एस.डी.एम. इत्यादि के नंबर पर कॉल कर परिवार के सदस्यों की संख्या बताकर राशन प्राप्त कर सकते हैं। वास्तविकता यह है कि खाद्य विभाग ने आगामी मई माह में बी.पी.एल. राशन कार्डधारी परिवारों के लिए व्यवस्था की है कि वे शासकीय उचित मूल्य की दुकान से मई और जून माह का चावल, माह मई में निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने कहा है कि महामारी के इस संक्रमण काल में सबको अफवाहों और गलत बातों का प्रचार करने से बचना चाहिए। इस तरह की खबर फैलाने वाले के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है, कि सभी भ्रामक खबरों की पुष्टि कर लें और सकारात्मक रहकर इस कोरोना बीमारी से सुरक्षा और बचाव में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग करें।
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नंदीग्राम सीट पर हार के बाद, अब ममता बनर्जी कैसे बनेंगी मुख्यमंत्री…
पश्चिम बंगाल का चुनावी संग्राम अब थम गया है। बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘खेला’ हो गया। भाजपा की सारी रणनीति धरी रह गई और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर बहुमत से सत्ता में वापसी कर ली। बंगाल की जीत को लेकर खीर में नमक आने से जैसी स्थिति उस वक्त बन गई, जब पता चला कि पार्टी जीत गई, लेकिन टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव हार गईं। ऐसे में सबके मन में यह सवाल है कि अब वे मुख्यमंत्री कैसे बनेंगी।
बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता बनर्जी के सामने उनके पूर्व सहयोगी और भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी मैदान में थे। सुवेंदु अधिकारी ने 1957 वोटों से ममता बनर्जी को हरा दिया। नंदीग्राम से ममता बनर्जी चुनाव हार गईं, लेकिन राज्य में उनकी पार्टी ने तीसरी बार बहुमत से सत्ता में वापसी की है। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल है कि अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमत्री कैसे बनेगी और कैसे वहां की सत्ता संभालेगी?
हार कर भी बन सकते हैं सीएम, ये है नियम
मुख्यमंत्री बनने के लिए यूं तो विधानसभा या विधान परिषद (जिन राज्यों में दो सदन हैं) का सदस्य होना जरूरी है। अगर विधानसभा या विधान परिषद सदस्य नहीं है, तो शपथ लेने के छह माह के भीतर सदस्य बनना जरूरी होता है। नियमों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद की शपथ बिना विधायक रहते ली जा सकती है। इसके बाद मुख्यमंत्री को छह महीने का वक्त मिलता है। इस तय समय सीमा के अंदर उनका विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।
ये हैं बिना विधायक रहते सीएम बनने वाले नेता
सीएम बनने वाले नेता राज्यउद्धव ठाकरे महाराष्ट्र
लालू प्रसाद यादव बिहार
योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश
नीतीश कुमार बिहार
राबड़ी देवी बिहार
कमलनाथ मध्यप्रदेश
तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड -

देश में जुलाई तक रहेगी वैक्सीन की किल्लत, हमें नहीं लगता था कि हमें एक साल में एक बिलियन खुराकें बनानी होंगी, अदार पूनावाला ने किया बड़ा खुलासा…
जुलाई तक रहेगी वैक्सीन की कमी- पूनावाला
इधर एक मई से देश में टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण शुरू हो गया है, लेकिन वैक्सीन की कमी ने अभियान की रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी है। इसी बीच ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जुलाई तक देश में वैक्सीन की कमी देखी जा सकती है।
एक अंग्रेजी मीडिया वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, अदार पूनावाला ने कहा कि एक दिन में 60-70 मिलियन खुराकों से 100 मिलियन खुराकों तक उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुलाई तक का समय लग जाएगा। वैक्सीन की कमी उस समय हो रही है, जब केंद्र ने 18 साल की उम्र से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी दे दी है।
‘जनवरी में दूसरी लहर आने की उम्मीद नहीं थी’
रिपोर्ट में पूनावाला के हवाले से बताया गया है कि अधिकारियों को जनवरी में दूसरी लहर का सामना करने की उम्मीद नहीं थी, जब नए कोविड-19 मामलों में गिरावट आई थी। हर किसी को लगने लगा था कि देश ने कोरोना की पहली लहर को हरा दिया है।
‘सीरम इंस्टीट्यूट को बदनाम करने की कोशिश की’
अपनी कंपनी का बचाव करते हुए पूनावाला ने कहा कि वैक्सीन की कमी को लेकर राजनेताओं और आलोचकों की ओर से सीरम इंस्टीट्यूट को बदनाम करने की कोशिश की गई। ज्यादा वैक्सीन बनाने को लेकर अदार पूनावाला ने कहा कि हमारे पास पहले से कोई आदेश नहीं था, हमें नहीं लगता था कि हमें एक साल में एक बिलियन खुराकें बनानी होंगी।
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इस मुसीबत की घड़ी में एक संदेश, सभी अवसर परस्त लोगों के लिए…
खरसिया। नगर के युवा व्यवसायी योगेश गर्ग का कहना है कि दोस्तों कुछ दिनों से एक अजीब सा माहौल बन गया हैं पूरे देश में हर तरफ बस निराशा , उदासी दिखाई दे रही हैं पता नहीं ऐसा क्यूँ लग रहा है कि जैसे जीवन मे बस एक ही बार कमाने का मौका मिला हैं इसके बाद तो हम कमा नही पायेंगे, कोरोना की पिछली लहर में लोगों ने मास्क औऱ सेनेटाइजर की काला बाजारी करी थी और इस बार तो हद ही कर दी हम लोगों ने प्राण वायु (ऑक्सीजन) तक को हमने अपनी कमाई का जरिया बना लिया।
कुछ दिन में करोड़ों कमा लोगे तो क्या वो पैसे ज़िन्दगी भर चल जायेंगे उसके बाद दुबारा कमाने की आवश्यकता नही पड़ेगी, पैसा जिंदगी से बढ़ कर हो गया हैं क्या पैसा कितना ही क्यों ना हो आपके पास लेकिन ऊपर वाले के खाते में आपकी जितनी ज़िन्दगी लिखी हैं आप उतनी ही जियोगे उसे एक पल भी ज्यादा आपको आपका पैसा नहीं बचा सकता इसका एक उदाहरण याद आता हैं मुझे वो आपको बताना चाहूँगा।
माईकल जैक्सन इनको दुनिया का बच्चा बच्चा जनता हैं, ये 150 साल जिंदा रहना चाहते थे औऱ इसके लिए इन्होंने तकरीबन 40-50 डॉक्टरों की टीम रखी हुई थी व्यक्तिगत तौर पे अपने लिए, जो हर रोज उनके शरीर को चेक करती थी औऱ उनके पास तो दुनिया के हर संसाधन मौजूद थे फिर भी हम सभी जानते हैं कि उनकी मृत्यु हो चुकी हैं तो आप सोचिये क्या काम आया उनका पैसा रुतबा ऊपर वाले के सामने।
इसलिए दोस्तों अभी भी वक़्त हैं इंसानियत को जगा लो अपनी नहीं तो अंत नजदीक है जरूरत मंद की मदद करिये, कालाबाजारी से बचिये शायद मजबूरों का साथ देने से उनकी दुवाओं से आपके खाते में कुछ पुण्य लिखे दे ऊपर वाला, दुसरो के चेहरे पे मुस्कान ला कर देखिये एक बार अकेले में भी मुस्कुराएँगे आप हर बार…
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आदेश हुआ जारी, 18+ टीका लगाने वालों का CoWIN पोर्टल में नहीं होगी एंट्री….
रायपुर। प्रदेश में 1 मई से 18 से 45 वर्ष के लोगों को कोरोना टीका लगाने का महाअभियान शुरू हो गया है. इस टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला ने एक संशोधित आदेश जारी किया है. जिसमें कोरोना वैक्सीन लगाने वाले 18 प्लस का एंट्री कोविन पोर्टल में नहीं होगी।
अपने आदेश में आलोक शुक्ला ने कहा कि 18-44 वर्ष के व्यक्तियों के कोविड-19 टीकाकरण किये जाने के लिए पूर्व में प्रेषित दिशा-निर्देश में निम्नानुसार संशोधनों का पालन किया जाना तत्काल सुनिश्चित करें. वर्तमान में CoWIN पोर्टल में 18-44 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों के लिए सेशन नहीं खोला जाए.
18-44 वर्ष के हितग्राहियों की डाटा एंट्री अभी CoWIN पोर्टल पर नहीं की जाए. यह जानकारी पूर्व में प्रेषित प्रपत्र अनुसार रजिस्टर में एकत्र की जाए और बाद में इस डाटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप में डाटा एंट्री कर सुरक्षित कर लिया जाए, ताकि केंद्र/राज्य सरकार द्वारा मांगे जाने पर उन्हें डाटा उपलब्ध कराया जा सके।
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जांजगीर-चांपा में टीआई ने छुट्टी नहीं दी तो आरक्षक ने कर दी पिटाई
जांजगीर-चांपा। जिले के आदर्श थाना माने जाने वाले मुलमुला थाने में शुक्रवार को हुई एक घटना ने पुलिस प्रशासन की फजीहत करा दी है. दरअसल छुट्टी नहीं मिलने से नाराज होकर आरक्षक ने टीआई की पिटाई कर दी. आरक्षक ने टीआई से 2 घंटे की छुट्टी मांगी थी. इसपर टीआई ने लॉकडाउन का हवाला देते हुए मना कर दिया. इससे नाराज होकर आरक्षक ने टीआई की पिटाई कर दी. एसपी ने आरक्षक को अनुशासनहीनता और अभद्र आचरण का दोषी पाते हुए लाइन अटैच किया है।
टीआई ने मामले की जानकारी एसपी को दी
दरअसल मुलमुला थाना प्रभारी उमेश साहू और थाने में पदस्थ आरक्षक रामचरण सिंह ठाकुर के बीच गुरुवार की देर शाम जोरदार हाथापाई हो गई. चश्मदीदों के मुताबिक आरक्षक ने छुट्टी नहीं मिलने से नाराज होकर थाना प्रभारी पर गुस्सा उतार दिया. बीच-बचाव कर वहां के स्टाफ ने दोनों को अलग किया. मामले की शिकायत थाना प्रभारी ने एसपी को की है.एएसपी को मिला जांच का जिम्मा
बिलासपुर बॉर्डर के चेक पोस्ट में आरक्षक राम चरण सिंह ठाकुर की ड्यूटी लगी हुई है. आरक्षक ने थाना प्रभारी से छुट्टी मांगी. प्रभारी उमेश साहू ने छुट्टी देने से इनकार कर दिया. इस बात को लेकर आरक्षक तैश में आ गया और थाना प्रभारी से भिड़ गया. इस बीच मारपीट की घटना भी हुई. घटना की शिकायत एसपी पारुल माथुर तक पहुंची. इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय महादेवा को जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. फिलहाल आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया गया है।