Author: Sunil Agrawal

  • रायपुर में SBI के रिटायर्ड अधिकारी को पेंशन भुगतान का लालच देकर लाखों की ठगी…

    रायपुर में SBI के रिटायर्ड अधिकारी को पेंशन भुगतान का लालच देकर लाखों की ठगी…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन ठगी के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है। रोजाना साइबर अपराधी कोई न कोई नई तरकीब निकालकर भोले-भाले लोगों को लाखों का चूना लगा रहे हैं। हालिया मामला राजधानी रायपुर में रिटायर्ड SBI के मुख्य प्रबंधक से पेंशन की राशि भुगतान करने के नाम पर लाखों रुपयों की धोखाधड़ी करने का सामने आया है। शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, गुढ़ियारी निवासी एसबीआइ (SBI) के रिटायर मुख्य प्रबंधक ज्ञान सिंह साहू को 28 दिसंबर से आठ जनवरी के बीच अज्ञात मोबाइल धारकों ने फोन कर उनकी पेंशन का भुगतान करने की बात कहते हुए जालसाजी कर दो लाख 58 हजार 398 रुपए ठग लिए। ज्ञान सिंह ने पुलिस को बताया कि आरोपितों ने स्वयं को भविष्य निधि कार्यालय नई दिल्ली के अधिकारी-कर्मचारी बताया था।

    13 लाख रुपए बतौर पेंशन भेजने की बात कही थी। पेंशन भुगतान की बात पर विश्वास कर लिया। इसके बाद फाइल ट्रांसफर, नोटशीट तैयार करने सहित विभिन्न तरीकों से ज्ञान सिंह से पैसे मांगे गए। लालच में आकर ज्ञान सिंह ने एनइएफटी के माध्यम से ढाई लाख रुपयों से अधिक राशि आरोपितों के बैंक खातों में ट्रासंफर कर दिया।

    इसके बाद से ठग ने मोबाइल बंद कर दिया। परेशान होकर ज्ञान सिंह ने गुढ़ियारी पुलिस थाना में ठगी की शिकायत की। मामले में पुलिस ने तीन अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। इस तरह की धोखाखड़ी से बचने के लिए आप भी सतर्क रहें। बैंक किसी से भी ओटीपी आदि की गोपनीय जानकारी नहीं पूछता है। इसलिए आप अपरिचित व्यक्ति के काल पर विश्वास न करें। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें।

  • अगले 4 साल में World Class बनेगा राजधानी का रेलवे स्टेशन, डिजाइन की तस्वीरें आई सामने…

    अगले 4 साल में World Class बनेगा राजधानी का रेलवे स्टेशन, डिजाइन की तस्वीरें आई सामने

    भारतीय रेलवे ने देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का कायापलट करने का फैसला लिया है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने के लिए इसे रेलवे के री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है. अगले चार सालों में दुनिया नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ऐसी तस्वीर देखेगी, जिसकी किसी ने कल्पना भी न की होगी. ये तस्वीरें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का भविष्य दिखा रही हैं, क्योंकि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन चार सालों के बाद ठीक ऐसा ही दिखेगा।

    नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की जिम्मेदारी भारतीय रेलवे उपक्रम RLDA यानी रेल लैंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी और IRSDC यानि इंडियन रेलवे स्टेशन डिवेलपमेंट कारपोरेशन पर है. इस बीच स्टेशन के री डिवेलपमेंट की ज़िम्मेदारी किसे सौपनी है, इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है. अथॉरिटी ने बिडिंग प्रक्रिया के जरिये प्राइवेट प्लेयर को चुनने का फैसला किया है।

    प्रोजेक्ट के लिए प्री-बिड मीटिंग सितंबर 2020 में आयोजित की गई थी जिसमें अडानी, जीएमआर, जेकेबी इन्फ्रा, अरबियन कंस्ट्रक्शन कंपनी और एंकोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर सरीखे फर्मों ने हिस्सा लिया था. स्टेशन रणनीतिक रूप से दिल्ली के केंद्र में स्थित है, और दिल्ली के प्रमुख कमर्शियल स्पॉट केंद्र कनॉट प्लेस के काफी निकट है. यह एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो के द्वारा आईजीआई हवाई अड्डे से और येलो लाइन मेट्रो के द्वारा दिल्ली-एनसीआर से जुड़ा हुआ है. स्टेशन के दोनों ओर से परिवहन के विभिन्न साधनों से जुड़ा हुआ है।

    नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को अत्याधुनिक बनाने वाले इस प्रोजेक्ट को 60 वर्षों के कन्सेशन पीरियड के लिए डिजाइन-बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट ट्रांसफर (डीबीएफ़ओटी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा. इसमें करीब 680 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत आएगी. इस प्रोजेक्ट को लगभग चार वर्षों में पूरा किया जाना है।

    नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नए मास्टर प्लान का एरिया लगभग 120 हेक्टेयर का है, जिसमें से 88 हेक्टेयर को पहले चरण में विकसित किया जाना है. इसे दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला स्टेशन का अंदरुनी हिस्सा और दूसरा स्टेशन एस्टेट के तहत होटल, कार्यालय, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग जैसी सुविधाएं होंगी।

  • शादियों के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला…

    शादियों के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला…

    लव जिहाद के मामलों के बीच शादियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने शादियों से पहले नोटिस प्रकाशित होने और उस पर आपत्तियां मंगाने को गलत माना है. अदालत ने इसे स्वतंत्रता और निजता के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है. अदालत ने विशेष विवाह अधिनियम की धारा 6 और 7 को भी गलत बताया है।

    अदालत ने कहा किसी के दखल के बिना पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है. यही नहीं, अदालत ने अहम फैसला देते हुये कहा कि अगर शादी कर रहे लोग नहीं चाहते तो उनका ब्यौरा सार्वजनिक न किया जाए।

    ऐसे लोगों के लिए सूचना प्रकाशित कर उस पर लोगों की आपत्तियां न ली जाएं. हालांकि विवाह अधिकारी के सामने यह विकल्प रहेगा कि वह दोनों पक्षों की पहचान -उम्र व अन्य तथ्यों को सत्यापित कर ले।

    अदालत की टिप्पणी

    इसके अलावा अदालत ने टिप्पणी करते हुये कहा कि, इस तरह का कदम सदियों पुराना है, जो युवा पीढ़ी पर क्रूरता और अन्याय करने जैसा है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जस्टिस विवेक चौधरी ने ये टिप्पणी की. आपको बता दें कि, साफ़िया सुलतान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने ये आदेश दिया है।

  • एक्टर का सेक्स चैट हुआ वायरल, एक्स वाइफ हुई हैरान खतरनाक बातें पढ़कर…

    एक्टर का सेक्स चैट हुआ वायरल, एक्स वाइफ हुई हैरान खतरनाक बातें पढ़कर…

    हॉलीवुड अभिनेता आर्मी हैमर के सेक्स और उनकी यौन कल्पनाओं के बारे में पूरी तरह से खुलासे हो चुके हैं. बीते दिनों उनकी एक सेक्स चैट जमकर वायरल हुई इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर आर्मी हैमर के बारे में जमकर निंदा की जा रही है. लेकिन अब उनकी पूर्व पत्नी एलिजाबेथ चेम्बर्स का भी रिएक्शन इस बारे में आ चुका है. यह मुद्दा तब गरमा गया, जब आर्मी हैमर की कथित चैट सामने आईं, जिसमें यह स्पष्ट रूप से बताया गया था कि अभिनेता अपने बेडरूम में इस बात की पुष्टि करने से लेकर पसंद करता है कि वह ‘दरिंदा’ है और अपनी प्रेमिका को ‘स्लेव’ कह रहा है और अपनी सभी यौन कल्पनाओं को पूरा कर रहा है. अब तक इस मामले पर अभिनेता या उनकी टीम ने आरोपों का जवाब नहीं दिया है. एक समय जब वह पूर्व पत्नी एलिजाबेथ चेम्बर्स से शादी कर रहे थे तब वह काफी अलग थे. उनकी शादी 10 साल साथ रहने के बाद टूट गई. एलिजाबेथ के करीबी सूत्रों ने पुष्टि की थी कि वह लिली जेम्स के साथ रिलेशनशिप में थे और इसी बेवफाई के कारण उनका तलाक हुआ. अब उनकी पूर्व पत्नी एलिजाबेथ ने चैट में सेक्स मामलों में लगे हालिया आरोपों पर, कहा कि यह उनके लिए एक शॉकिंग घटना के रूप में आया है और ये सब जानने के बाद अब ‘आर्मी एक राक्षस जैसा लग रहा है’. बता दें कि आर्मी हैमर 2017 में ‘इन कॉल मी बाय योर नेम’ में उनकी भूमिका के लिए सबसे अधिक जाना जाता है. वह अगली फिल्म ‘डेथ ऑन द नाइल में दिखाई देंगे.

  • तो कॉल नहीं कर पाएंगे…कॉल करने से पहले पढ़े ये खबर…

    तो कॉल नहीं कर पाएंगे…कॉल करने से पहले पढ़े ये खबर…

    दिल्ली। आज से देश में किसी भी लैंडलाइन फोन से मोबाइल नंबर पर फोन करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है. नए नियमों के मुताबिक, अब लैंडलाइन फोन से मोबाइल नंबर पर बात करने के लिए शून्य लगाना होगा. इससे टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को अधिक नंबर बनाने की सुविधा मिलेगी. इस बारे में टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने 20 नवंबर को एक सर्कुलर भी जारी कर दिया था. इस सर्कुलर में कहा गया था कि लैंडलाइन से मोबाइल पर नंबर डायल करने के तरीके में बदलाव की ट्राई (TRAI) की सिफारिशों को मान लिया गया है. यह सुविधा अभी अपने क्षेत्र से बाहर के कॉल करने के लिए उपलब्ध है. डायल करने के तरीके में इस बदलाव से दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर तैयार करने की सुविधा मिलेगी. यह भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी. इससे आगे चलकर नए नंबर भी कंपनियां जारी कर सकेंगी. 11 अंकों का हो सकता है मोबाइल नंबर भविष्य में टेलीकॉम कंपनियां 11 अंकों का मोबाइल नंबर भी जारी कर सकती हैं. फिलहाल देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते 10 अंकों का मोबाइल नंबर भी कम पड़ रहा है. ऐसे में केवल जीरो के प्रयोग से आगे के लिए राह काफी आसान हो जाएगी. इस बारे में दूरसंचार कंपनियों ने ग्राहकों को गुरुवार को याद दिलाया कि उन्हें शुक्रवार 15 जनवरी से लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल लगाते समय पहले शून्य डायल करना पड़ेगा. एयरटेल ने अपने फिक्स्ड लाइन उपयोक्ताओं को बताया, ”15 जनवरी 2021 से अमल में आ रहे दूरसंचार विभाग के एक निर्देश के तहत आपको अपने लैंडलाइन से किसी मोबाइल पर फोन मिलाते समय नंबर से पहले शून्य डायल करना होगा.” सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पीके पुरवर ने इस बारे में संपर्क किये जाने पर कहा कि ग्राहकों को इससे अवगत कराने की शुरुआत की जा चुकी है.

  • कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र ने राज्यों को भेजे निर्देश, बताया- किसे लगेगी वैक्सीन और किसे नहीं…

    कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र ने राज्यों को भेजे निर्देश, बताया- किसे लगेगी वैक्सीन और किसे नहीं…

    कोरोना वायरस से लड़ाई में अब वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू होने जा रहा है. इसके लिए सारी तैयारियां कर ली गई हैं. पूरे देश में 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू होने वाली है. इस टीकाकरण अभियान से पहले, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों को दोनों टीकों (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) के लिए एक व्यापक फैक्ट शीट भेजी हैं- जिसमें वैक्सीन रोलआउट, फिजिकल स्पेसिफिकेशन, खुराक, कोल्ड चेन स्टोरेज की आवश्यकताओं, मतभेद और हल्की AEFIs (टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटना) के बारे में जानकारी शामिल है.
    DOs और Don’ts वाले दस्तावेज को सभी प्रोग्राम मैनेजर, कोल्ड चेन हैंडलर और वैक्सीनेटर के बीच भी प्रसारित किया गया है. केंद्र सरकार ने कहा कि डूज़ और डोंट के दस्तावेज के अनुसार, टीकाकरण की अनुमति केवल 18 साल से अधिक आयु के लोगों को दी जाती है. जो महिलाएं गर्भवती हैं और जो अपनी गर्भावस्था को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं और स्तनपान कराने वाली माताओं को यह वैक्सीन नहीं लगाई जानी चाहिए।


    ये हैं केंद्र द्वारा भेजे गए निर्देश:
    1. कोविड-19 वैक्सीन केवल 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र वाले लोगों के लिए है. 2. वैक्सीन की जिम्मेदारी संभाल रहे लोगों को 14 दिनों के अंतराल से अलग किया जाना चाहिए. 3. दूसरी खुराक उसी वैक्सीन की होनी चाहिए जिसमें पहली डोज ली गई थी. वैक्सीन के इंटरचेंजिंग की अनुमति नहीं है।


    मनाही
    1. ऐसी हिस्ट्री वाले व्यक्ति: – कोविड-19 वैक्सीन की पिछली खुराक की वजह से ऑनफ्लेक्टिक या एलर्जी रिएक्शन  – वैक्सीन या इंजेक्टेबल थैरेपी, फार्मास्युटिकल उत्पाद, खाद्य-पदार्थ आदि से तुरंत या देरी से शुरू होने वाली एनाफिलेक्सिस या एलर्जी रिएक्शन 

    2. गर्भावस्था और स्तनपान: – प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाएं अब तक किसी भी कोविड-19 वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण का हिस्सा नहीं रही हैं. इसलिए, जो महिलाएं गर्भवती हैं या अपनी गर्भावस्था के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं; और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस समय कोविड-19 वैक्सीन नहीं देनी चाहिए.अस्थायी मनाही: इन स्थितियों में, रिकवरी के बाद 4-8 सप्ताह के लिए कोविड वैक्सीनेशन स्थगित किया जाना है

    1. SARS-CoV-2 संक्रमण के एक्टिव लक्षण वाले व्यक्ति.

    2. SARS-CoV-2 के मरीज जिन्हें SARS-CoV-2 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या प्लाज्मा दिया गया है.

     3. किसी भी बीमारी के कारण अस्वस्थ और अस्पताल में भर्ती (गहन देखभाल के साथ या बिना) मरीज.

    विशेष सावधानियां वैक्सीन को ब्लीडिंग या कोगुलेशन डिसऑर्डर (जैसे, क्लॉटिंग फैक्टर डिफिसिएंसी, कोगुलोपैथी या प्लेटलेट डिसॉर्डर) के इतिहास वाले व्यक्ति में सावधानी के साथ लगाया जाना चाहिए.

    इन स्थितियों में कोरोना वैक्सीन के लिए रोक नहीं है SARS-CoV-2 संक्रमण (सीरो-पॉजिटिवटी) या आरटी-पीसीआर पॉजिटिव बीमारी के पिछले हिस्ट्री के लोग – पुरानी बीमारियों और मॉर्बिडिटीज (कार्डिएक, न्यूरोलॉजिकल, पल्मोनरी, मेटाबॉलिक, गुर्दे, मालिगनेंसीज) – इम्यूनो-डिफिसिएंसी, एचआईवी, किसी भी स्थिति के कारण इम्यून-सप्रेशन के मरीज (इन व्यक्तियों में कोविड-19 वैक्सीन की प्रतिक्रिया कम हो सकती है)

    विचार योग्य अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे- वैक्सीन से संबंधित अन्य सावधानियां जैसे-जैसे नई जानकारियां उपलब्ध होती जाएंगी लागू हो सकती हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा फैक्टशीट दोनों वैक्सीन कोविशील्ड के साथ-साथ कोवैक्सीन के लिए भी बनाया गया है।

    कोविशील्ड- 10 डोज की शीशी – डोज: 0.5 मिली – शेड्यूल: 4 सप्ताह बाद – स्टोरेज: 2-8 डिग्री – वैक्सीन फ्रीज संवेदनशील है – जमे हुए या पिघले हुए पाए जाने पर इस्तेमाल में न लाएं – फिजिकल अपियरेंस: थोड़ा अपारदर्शी, हल्के भूरे रंग के साथ रंगहीन – सूचीबद्ध प्रतिकूल घटनाएं: इंजेक्शन साइट टेंडरनेस, इंजेक्शन साइट पेन, सिरदर्द, थकान, बुखार, म्याल्जिया, पयरेक्सिया, ठंड लगना, मतली, डिमाइलेटिंग डिसॉर्डर के बहुत कम उदाहरण बताए गए हैं.

    कोवैक्सीन- 20 डोज की शीशी – डोज: 0.5 मिली – शेड्यूल: 4 सप्ताह बाद – स्टोरेज: 2-8 डिग्री – वैक्सीन फ्रीज संवेदनशील है – जमे हुए या पिघले हुए पाए जाने पर इस्तेमाल न करें – फिजिकल अपियरेंस: सफेद पारदर्शी – सूचीबद्ध प्रतिकूल घटनाएं: इंजेक्शन साइट टेंडरनेस, इंजेक्शन साइट पेन, सिरदर्द, थकान, बुखार, शरीर में दर्द, पेट में दर्द, मतली, उल्टी, चक्कर आना, पसीना, ठंड, खांसी, इंजेक्शन साइट सूजन.

  • बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ में अलग से बजट, ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य होगा…

    बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ में अलग से बजट, ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य होगा…

    प्रदेश सरकार पहली बार चाइल्ड बजट लाने जा रही है। नई सरकार का यह तीसरा बजट है, जिसमें बच्चों के लिए अलग अलग काम कर रहे तकरीबन 4-5 विभाग के कामों के एक ही जगह लाने की योजना है। इसकी प्लानिंग के लिए सीएम भूपेश बघेल 15 जनवरी से अपने मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। चाइल्ड बजट का यह कांसेप्ट देश के कुछ राज्यों में लागू किया जा चुका है। दरअसल यह चाइल्ड बजट यूनीसेफ की उस योजना का हिस्सा है, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य और शैक्षिक विकास को सतत विकास लक्ष्य (संस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- एसडीजी) में शामिल किया हुआ है। इस योजना को छत्तीसगढ़ ने भी 2030 तक के लिए अपने सीजी एसडीजी विजन में समाहित किया है।

    प्रदेश में हर साल करीब 8 लाख बच्चे पैदा होते हैं और राज्य में इस समय नवजात से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की तादाद 80 लाख के करीब है। इनके विकास के लिए सरकार के आधा दर्जन विभाग कई योजनाएं चलाते हैं। इनमें महिला बाल विकास और स्वास्थ्य मुख्य विभाग है। अकेले महिला बाल विकास विभाग इस साल अपने 2200 करोड़ के बजट में से बच्चों पर 14 सौ करोड़ खर्च कर रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग 85 से 90 करोड़ खर्च करता है। यह राशि केवल टीकाकरण, बाल ह्रदय योजना, कांक्लियर इंप्लांट, मातृ-शिशु योजना पर खर्च की जाती है। स्कूल शिक्षा विभाग, प्रायमरी से हायरसेकंडरी स्कूलों में अध्ययनरत 56 हजार बच्चों पर 14 हजार करोड़ खर्च कर रहा है। इतना ही नहीं हर साल दोनों विभागों में इसमें 10 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ योजनाएं लागू की जाती है। इनके अलावा स्कूल शिक्षा, अजा-जजा कल्याण, श्रम और समाज कल्याण विभाग भी बड़ी राशि खर्च करते हैं। अब इन सबको को एक छत के नीचे लाकर पूरे समन्वय और तालमेल के साथ योजनाएं लागू की जाएंगी। इसकी रुपरेखा बनाने सीएम बघेल ने 15 जनवरी को इन विभागों के मंत्रियों की बैठक बुलाई है। वहीं राज्य योजना आयोग भी सचिवों के साथ प्लान बनाएगा।

    इससे पहले 4 राज्य ला चुके हैं
    सूत्रों के अनुसार इससे पहले देश के 4 राज्यों में चाइल्ड बजट लागू किया जा चुका है। इनमें केरल, असम, बिहार और कर्नाटक शामिल हैं। असम ने तो पिछले साल ही लागू किया है। जबकि शेष राज्य 2013-14 से लागू कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली भाजपा सरकार इसे नजरअंदाज किए हुए थी।

    चौथा कांसेप्चुअल बजट
    जानकारों के मुताबिक चाइल्ड बजट, 2013 के बाद से यह चौथा कांसेप्चुअल बजट होगा। इससे पहले बीजेपी सरकार आउटकम बजट, जेंडर बजट, यूथ बजट और कृषि बजट पेश कर चुकी है।

    “प्रस्ताव बना रहे हैं। इसमें महिला-बाल विकास के साथ पंचायत, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा के साथ बच्चों पर काम कर रहे विभागों की योजनाएं शामिल की जाएंगी।”
    -अनिला भेंडिया, महिला बाल विकास मंत्री

    “राज्य योजना आयोग और वित्त विभाग इस पर काम कर रहे हैं। इस पर जल्द ही सीएम के साथ बैठक कर प्रारूप तैयार कर लिया जाएगा।”
    -अजय सिंह, उपाध्यक्ष योजना आयोग छत्तीसगढ़

  • अब अपने आप ठीक होगा घाव, जानिए क्या लगा हाथ?

    अब अपने आप ठीक होगा घाव, जानिए क्या लगा हाथ?

    वैज्ञानिक बहुत जल्द ऐसे स्टेम सेल का उपयोग करेंगे जिसकी बदौलत कटे-पिटे अंग खुद से जुड़ सकते हैं या नए पैदा हो सकते हैं. चोट या घाव जल्दी भर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट इस टेक्नोलॉजी के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं. उन्होंने एक ऐसा स्टेम सेल खोजा है जिसमें रीजेनेरेटिव एबिलिटी है. यानी किसी भी चीज को फिर से जीवित करना या उसे वापस उसकी पुरानी अवस्था में लाकर ठीक कर देना. यह भविष्य का स्मार्ट स्टेम सेल होगा।

    साइंटिस्ट इसे अभी से स्मार्ट स्टेम सेल (Smart Stem Cell) कह रहे हैं. विज्ञान की भाषा में इसे मल्टीपोटेंट स्टेम सेल (Multipotent Stem Cell) कहा जा रहा है. या फिर iMS भी बुलाया जाता है. यह स्टेम सेल इंसानों के शरीर से आसानी से निकाला जा सकता है. यह इंसान के शरीर में मौजूद वसा यानी फैट को रीप्रोग्राम्ड वर्जन है. फैट का रीप्रोग्राम्ड वर्जन ही स्टेम सेल कहलाएगा. इस स्टेम सेल की चूहों पर स्टडी की गई है, वहां पर इसकी सफलता ने साइंटिस्ट्स को रीजेनेरेटिव एबिलिटी वाले स्टेम सेल को लेकर उम्मीद जगाई है. यह स्टडी ऑनलाइन साइंस जर्नल साइंस एडवांस में प्रकाशित हुई है. इंसानों में प्रयोग करने से पहले साइंटिस्ट इस स्टेम सेल के कई और टेस्ट और रिसर्च करना चाहते हैं।

    यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) में हीमैटोलॉजी के प्रोफेसर जॉन पिमांडा का कहना है कि आजतक किसी भी व्यक्ति ने ऐसे स्टेम सेल को विकसित नहीं किया है. यह अपने आसपास के वातावरण में मिल जाता है. साथ घायल या चोट खाए टिश्यू यानी ऊतकों को खुद जोड़ने में मदद करता है. ये ठीक वैसा ही है जैसे गिरगिट अपना रंग बदलता है और पूंछ कटने पर वापस नई पूंछ निकल आती है. जॉन पिमांडा ने बताया कि अभी तक स्टेम सेल विज्ञान में किसी ने इस तरह का एडॉप्टिव स्टेम सेल विकसित नहीं किया है. जॉन ने बताया कि उन्होंने लैब में जो iMS सेल बनाया है वो ह्यूमन फैट सेल को एक कंपाउड मिक्स सो जोड़ा गया है. ताकि वह अपनी असली पहचान खो सके. इसके लिए साइलेंसिंग मार्क्स को खत्म किया गया है. साइलेंसिंग मार्क्स किसी भी सेल को अपनी पहचान खोने से रोकते हैं।

    जॉन और उनकी टीम ने इंसानों के फैट सेल से बनाए गए iMS स्टेम सेल्स को चूहों में डाला. शुरुआत में ये चूहों पर कोई असर नहीं दिखा रहे थे. लेकिन जैसे ही चूहे को चोट लगी ये स्टेम सेल्स एक्टिव हो गए. अपने आसपास की कोशिकाओं और ऊतकों के हिसाब से ये विकसित होकर चोट वाली जगह को भरने लगे. भविष्य में ये स्टेम सेल्स मांसपेशियों, हड्डियों, कार्टिलेज या नसों में लगी चोट को ठीक करके वापस पुराने रूप में ले आएंगे. इस स्टडी को करने वाले प्रमुख रिसर्चर अवनी येओला ने बताया कि इन स्टेम सेल्स से गिरगिट की तरह काम किया. अवनी येओला ने यह प्रोजेक्ट अपने पोस्ट डॉक्टोरल थीसिस के तौर पर UNSW में पूरा किया है. अवनी ने बताया कि कोशिकाओं को स्टेम सेल्स में बदलने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है लेकिन उनमें कुछ सीमाएं हैं. जैसे- जिस तरह का ऊतक बदलना है, उसी जगह का स्टेम सेल खोजना होगा. तब नए ऊतक तैयार हो पाएंगे. लेकिन ये किसी भी ऊतक के हिसाब से बदल जाता है।

    वैज्ञानिक बहुत जल्द ऐसे स्टेम सेल का उपयोग करेंगे जिसकी बदौलत कटे-पिटे अंग खुद से जुड़ सकते हैं या नए पैदा हो सकते हैं. चोट या घाव जल्दी भर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट इस टेक्नोलॉजी के बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं. उन्होंने एक ऐसा स्टेम सेल खोजा है जिसमें रीजेनेरेटिव एबिलिटी है. यानी किसी भी चीज को फिर से जीवित करना या उसे वापस उसकी पुरानी अवस्था में लाकर ठीक कर देना. यह भविष्य का स्मार्ट स्टेम सेल होगा. साइंटिस्ट इसे अभी से स्मार्ट स्टेम सेल (Smart Stem Cell) कह रहे हैं. विज्ञान की भाषा में इसे मल्टीपोटेंट स्टेम सेल (Multipotent Stem Cell) कहा जा रहा है. या फिर iMS भी बुलाया जाता है. यह स्टेम सेल इंसानों के शरीर से आसानी से निकाला जा सकता है. यह इंसान के शरीर में मौजूद वसा यानी फैट को रीप्रोग्राम्ड वर्जन है. फैट का रीप्रोग्राम्ड वर्जन ही स्टेम सेल कहलाएगा. इस स्टेम सेल की चूहों पर स्टडी की गई है, वहां पर इसकी सफलता ने साइंटिस्ट्स को रीजेनेरेटिव एबिलिटी वाले स्टेम सेल को लेकर उम्मीद जगाई है. यह स्टडी ऑनलाइन साइंस जर्नल साइंस एडवांस में प्रकाशित हुई है. इंसानों में प्रयोग करने से पहले साइंटिस्ट इस स्टेम सेल के कई और टेस्ट और रिसर्च करना चाहते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) में हीमैटोलॉजी के प्रोफेसर जॉन पिमांडा का कहना है कि आजतक किसी भी व्यक्ति ने ऐसे स्टेम सेल को विकसित नहीं किया है. यह अपने आसपास के वातावरण में मिल जाता है. साथ घायल या चोट खाए टिश्यू यानी ऊतकों को खुद जोड़ने में मदद करता है. ये ठीक वैसा ही है जैसे गिरगिट अपना रंग बदलता है और पूंछ कटने पर वापस नई पूंछ निकल आती है. जॉन पिमांडा ने बताया कि अभी तक स्टेम सेल विज्ञान में किसी ने इस तरह का एडॉप्टिव स्टेम सेल विकसित नहीं किया है. जॉन ने बताया कि उन्होंने लैब में जो iMS सेल बनाया है वो ह्यूमन फैट सेल को एक कंपाउड मिक्स सो जोड़ा गया है. ताकि वह अपनी असली पहचान खो सके. इसके लिए साइलेंसिंग मार्क्स को खत्म किया गया है. साइलेंसिंग मार्क्स किसी भी सेल को अपनी पहचान खोने से रोकते हैं. जड़ी जॉन और उनकी टीम ने इंसानों के फैट सेल से बनाए गए iMS स्टेम सेल्स को चूहों में डाला. शुरुआत में ये चूहों पर कोई असर नहीं दिखा रहे थे. लेकिन जैसे ही चूहे को चोट लगी ये स्टेम सेल्स एक्टिव हो गए. अपने आसपास की कोशिकाओं और ऊतकों के हिसाब से ये विकसित होकर चोट वाली जगह को भरने लगे. भविष्य में ये स्टेम सेल्स मांसपेशियों, हड्डियों, कार्टिलेज या नसों में लगी चोट को ठीक करके वापस पुराने रूप में ले आएंगे. इस स्टडी को करने वाले प्रमुख रिसर्चर अवनी येओला ने बताया कि इन स्टेम सेल्स से गिरगिट की तरह काम किया. अवनी येओला ने यह प्रोजेक्ट अपने पोस्ट डॉक्टोरल थीसिस के तौर पर UNSW में पूरा किया है. अवनी ने बताया कि कोशिकाओं को स्टेम सेल्स में बदलने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है लेकिन उनमें कुछ सीमाएं हैं. जैसे- जिस तरह का ऊतक बदलना है, उसी जगह का स्टेम सेल खोजना होगा. तब नए ऊतक तैयार हो पाएंगे. लेकिन ये किसी भी ऊतक के हिसाब से बदल जाता है. अवनी ने बताया कि iMS स्टेम सेल्स ने किसी तरह का साइड इफेक्ट या अतिरिक्त टिश्यू ग्रोथ को नहीं दिखाया है. ये चूहों में मौजूद विभिन्न प्रकार के ऊतकों के हिसाब से खुद को परिवर्तित करने में सक्षम है. भविष्य में जिन इंसान को किसी चोट, घाव या अंग को विकसित करने की जरूरत होगी, हम उसके शरीर से फैट सेल निकाल iMS स्टेम सेल बनाएंगे फिर उसे इंसान के अंदर डाल देंगे. इससे उसका चोट भर जाएगा या नया अंग बन जाएगा. एकदम पुराने की तरह. हर इंसान के अंदर मौजूद कोशिकाएं यानी सेल्स चाहे वह दिल का हो या दिमाग का, सबका एक ही DNA होता है. अलग-अलग कोशिकाओं का काम शरीर के अलग-अलग हिस्सों के अनुसार होता है. इसके लिए DNA के अलग-अलग हिस्से काम करते हैं. अगर शरीर में कोई बदलाव प्राकृतिक तरीके से होता है तो DNA के अलग-अलग हिस्से उसका विरोध नहीं करते, बल्कि उसे आसानी से स्वीकार्य कर लेते हैं. प्रोफेसर जॉन पिमांडा ने बताया कि ये भविष्य की टेक्नोलॉजी है. हम इसे इंसानों के उपयोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित करना चाहते हैं. जैसे ही हम इसकी सुरक्षा को लेकर पुख्ता होंगे हम इंसानों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेंगे. UNSW के सीनियर प्रोफेसर और इस स्टडी में शामिल डॉ. चंद्रकांथन ने कहा कि ये बेहतरीन तकनीक है भविष्य में इंसानों के अंगों को सुधारने और उन्हें नया करने की लेकिन इसे पूरी तरह से विकसित और उपयोग लायक होने में करीब 15 साल और लगेंगे.

  • छत्तीसगढ़ में बर्ड-फ्लू की पुष्टि, राज्य में हाई अलर्ट जारी….

    छत्तीसगढ़ में बर्ड-फ्लू की पुष्टि, राज्य में हाई अलर्ट जारी….

    रायपुर। राज्य के बालोद जिले से जांच के लिए भेजे गए कुक्कुट (चिकन) सेम्पल की रिपोर्ट पाॅजिटिव आई है। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल से आज शाम प्राप्त रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान ने इसकी सूचना छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य सचिव सहित संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को दी है। राज्य में बर्ड-फ्लू का यह पहला मामला है जो बालोद जिले में मिला है।



    बालोद जिला स्थित जी.एस. पोल्ट्री फार्म गिधाली में कुक्कुट (चिकन) के 5 सेम्पल बीते 11 जनवरी को जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल भेजे गए थे। जांच में पांचों सेम्पल एच-5 एन-8 एविएन इनफ्लुएंजा वायरस से ग्रसित पाए गए। सेम्पल की ट्रेकियल स्वाब एवं क्लोकल स्वाब की रिपोर्ट भी पाॅजिटिव पायी गई है। इसको लेकर राज्य के सभी जिलों को हाई अलर्ट कर दिया गया है ।

  • प्रधानमंत्री के पसंदीदा IAS रहे ये अफसर BJP में हुए शामिल, बनाये जा सकते हैं डिप्टी CM…..

    प्रधानमंत्री के पसंदीदा IAS रहे ये अफसर BJP में हुए शामिल, बनाये जा सकते हैं डिप्टी CM…..

    गुजरात कैडर के IAS अफसर रहे अरविंद कुमार शर्मा गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे। ऐसी अटकलें हैं कि 12 MLC सीट (विधान परिषद) पर हो रहे चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। उन्हें यूपी सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है। शर्मा ने सोमवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लिया था। उनका 2 साल का कार्यकाल बाकी था।
    भाजपा की सदस्यता लेने के बाद शर्मा ने कहा कि कल रात में ही मुझे पार्टी ज्वॉइन करने के लिए कहा गया। खुशी है कि मुझे मौका मिला। मैं मऊ के एक पिछड़े गांव से निकला हूं, आईएएस बना और आज बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड के होने के बावजूद भाजपा में शामिल होना बड़ी बात है। पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे पूरा करूंगा।

    टाटा नैनो को गुजरात लाने में अहम भूमिका
    शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में 11 अप्रैल 1962 को हुआ। 1988 बैच के गुजरात कैडर के IAS शर्मा ने पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर्स किया। टाटा नैनो को गुजरात लाने, राज्य में निवेश और वाइब्रेंट गुजरात समिट के आयोजनों में इनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से मास्टर ऑफ पब्लिक पॉलिसी और अमेरिका से स्ट्रक्चरिंग टैरिफ की ट्रेनिंग भी ली है।
    18 साल से मोदी के भरोसेमंद
    ‘एके’ के नाम से जाने जाने वाले शर्मा के बारे में मशहूर है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त ब्यूरोक्रेट्स में एक हैं। बीते 18 साल से मोदी के भरोसेमंद हैं। जून 2014 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आने वाले शर्मा PMO में ज्वॉइट सेक्रेटरी बनाए गए थे। 2017 में उन्हें एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया।