मुंबई। सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से शहरवासियों को मुक्ति दिलाने के लिए अब सड़कों पर वाहन चेकिंग नहीं की जाएगी। ट्रैफिक पुलिस के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत ट्रैफिक पुलिसकर्मी अब सड़कों पर वाहनों को रोककर चालकों से दस्तावेज संबंधी पूछताछ नहीं कर सकते। हालांकि, पुलिस आयुक्त ने इस आदेश में कहा है कि ट्रैफिक पुलिस को विशेष परिस्थिति में या ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में दोषी वाहन चालकों के खिलाफ कानूनी जांच या नाकाबंदी कर वाहनों की जांच करने का अधिकार होगा।
Author: Sunil Agrawal
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हेडक्वॉर्टर में तैनात पुलिस का यह जवान ड्यूटी के बाद करता है डांस…
मुंबई पुलिस काम के प्रति अपनी ईमानदारी को लेकर काफी लोकप्रिय है, लेकिन इस बार यहां तैनात एक पुलिसकर्मी अपने डांस वीडियो के लिए वाहवाही लूट रहा है। दरअसल, मुंबई पुलिस के 38 वर्षीय पुलिस नायक का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है और खबर लिखे जाने तक इसे हजारों लाइक मिल चुके हैं। यह है पूरा मामला जानकारी के मुताबिक, मुंबई पुलिस में तैनात अमोल यशवंत कांबले नयगांव पुलिस हेडक्वॉर्टर में पोस्टेड हैं। वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद डांस करते हैं और छुट्टी के दिन भी अपना शौक पूरा करते हैं। वह इन वीडियो को सोशल मीडिया पर भी पोस्ट करते हैं, जिनमें से एक वीडियो इस वक्त वायरल हो चुका है। बता दें कि अमोल ने फिल्म अप्पू राजा के गाने ‘आया है राजा’ पर जोरदार डांस किया था, जिसका वीडियो अब धूम मचा रहा है।
लोगों को करते हैं जागरूक
कांबले ने बताया कि उनका डांस एक थीम पर आधारित था, जिसमें एक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी दोपहिया वाहन चालकों को मास्क लगाने के प्रति जागरूक करता है। साथ ही, अपने डांस मूव से उन्हें समझाता है। मुंबई के माहिम इलाके में रहने वाले कांबले 2004 में पुलिस फोर्स में शामिल हुए थे। डांस उनका पैशन है और वह बचपन से परफॉर्म कर रहे हैं।
कई डांस शो कर चुके हैं अमोल
उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई कोरियोग्राफर हैं। मैं पुलिस फोर्स में शामिल होने से पहले उनके साथ कई डांस शो भी कर चुका हूं। पुलिसकर्मी होने के नाते मेरी जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बरकरार रखना और लोगों की सुरक्षा करना सबसे पहले है। हालांकि, जब मेरी छुट्टी होती है तो मैं अपने और बहन के बच्चों के साथ जमकर मस्ती करता हूं।
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राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदला, अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार रखा गया नाम…
दिल्ली। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया गया है। अब खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
मुझे पूरे भारत के नागरिकों से खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।
उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा: प्रधानमंत्री -

इतिहास में पहली और आखिरी बार हुआ था परमाणु बमों से हमला, जानें 6 और 9 अगस्त 1945 को कैसी क़यामत आई?
आज 6 अगस्त है. आज ही के दिन 76 साल पहले 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला परमाणु बम हमला किया था. इसके तीन दिन बाद जापान के ही नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया. दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए. डेढ लाख से अधिक लोगों की पल भर में जान चली गई और जो बच गए वो अपंगता के शिकार हो गए. दूर-दूर तक के इलाकों में घंटों काली बारिश होती रही और रेडियोएक्टिव विकिरण ने जिंदादिली से भरे इन दोनों शहरों में कहर बरपा दिया. चारों तरफ मौत का मंजर पसरा था।
वक्त बीतता गया लेकिन तबाही थमी नहीं और आने वाले कई दशकों तक इसका असर दिखा. दुनिया के इतिहास में इससे भीषण जंग न पहले कभी हुई थी और ना ही उसके बाद कभी दुनिया ने देखी. परमाणु हथियारों की होड़ में लगी दुनिया में इसके इस्तेमाल की धमकियां तो कई देश लगातार देते रहे हैं लेकिन उसके इस्तेमाल के नतीजे सबको पता है. इसलिए कई एक्सपर्ट परमाणु हथियारों को युद्ध न होने की गारंटी भी बताते हैं।
1939 में शुरू हुआ दूसरा विश्व युद्ध निर्णायक स्थिति की ओर पहुंच रहा था लेकिन जापान के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे थे. ऐसे में अमेरिका ने वो कदम उठाया जिसका न तो दुनिया में किसी को इल्म था और ना ही भविष्य में कोई भी वो मंजर देखना चाहेगा. 6 अगस्त 1945 को सुबह के करीब आठ बजे हिरोशिमा पर परमाणु बम का जोरदार हमला हुआ. ये हमला इतना जबरदस्त था कि कुछ ही पल में 80 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. बम धमाकों में इतनी गर्मी थी कि लोग सीधे जल गए. एक मिनट के भीतर हिरोशिमा शहर का 80 फीसदी हिस्सा राख हो गया. तबाही यही नहीं थमी. इसके बाद हजारों लोग परमाणु विकिरण से जुड़ी बीमारियों के चलते मारे गए. एक अध्ययन से पता चला कि बम गिरने की जगह के 29 किलोमीटर क्षेत्र में काली बारिश हुई. जिससे मौतें बढ़ीं और इस काली बारिश ने अपने संपर्क में आने वाली सभी चीजों को भी दूषित कर दिया।
हिरोशिमा शहर में हुए परमाणु बम हमले से जापान उबरा भी नहीं था कि तीन दिन बाद ही 9 अगस्त को दूसरे शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम हमला हो गया. नागासाकी पर गिराया गया बम हिरोशिमा से भी ज्यादा शक्तिशाली था. नागासाकी में 9 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे परमाणु बम गिराया गया. इस हमले में 40 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई. विस्फोट के बाद परमाणु विकिरण के संपर्क में आने और विस्फोटों के बाद हुई ‘काली बारिश’ से भी दोनों शहरों में हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी।
हिरोशिमा पर अमेरिकी परमाणु हमले को 1941 के अमेरिका के नौसैनिक बेस पर्ल हार्बर पर किए गए जापानी सेना के हमले का बदला माना गया. अमेरिका को उम्मीद थी कि परमाणु हमले के बाद जापान सरेंडर कर देगा. नागासाकी पर हमले के 6 दिन बाद जापान ने बिना किसी शर्त समर्पण करने की घोषणा भी कर दी और इसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध भी आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया।
क्या अब भी हैं तबाही के निशां? परमाणु हमलों के बाद रेडियोएक्टि विकिरण के शिकार जापानी लोगों की अदालती लड़ाई 76 साल बाद अब भी जारी है. अभी पिछले महीने ही वहां के हाईकोर्ट ने काली बारिश के पीड़ित 84 लोगों की याचिका पर उन्हें मेडिकल सुविधाएं देने के पक्ष में फैसला दिया. जापानी अदालत के इस फैसले का असर सरकार की ओर से जारी उस रिव्यू प्रोसेस पर भी होगा जो इस बात का परीक्षण करने के लिए शुरू किया है कि क्या परमाणु बम हमले के शिकार लोगों और काली बारिश के प्रभाव के लिए चिन्हित एरिया से बाहर के प्रभावित लोगों को भी समान हेल्थ सुविधाएं दी जानी चाहिए. दशकों से पीड़ित लोग अदालतों में अपनी मांग के लिए लड़ रहे हैं. अदालत ने साफ कहा कि सरकार द्वारा चिन्हित इलाके के बाहर भी काली बारिश से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे और उन्हें हेल्थ सुविधाएं दी जानी चाहिए. अब उन्हें विकिरण से होने वाली 11 चिन्हित बीमारियों के इलाज की सुविधा मिल सकेगी. जापान की अदालत के इस फैसले से कोर्ट के बाहर मौजूद पीड़ितों में उत्साह की लहर दौड़ गई. स्थानीय मीडिया से बात करते हुए पीड़ितों के संघ के 83 साल के अध्यक्ष मसाकी तकानो ने कहा- ‘मैं कोर्ट का इस फैसले के लिए आभार जताता हूं. साथ ही राज्य प्रशासन और शहर के प्रशासन से अपील करता हूं कि पीड़ितों को ये सुविधाएं मिलने दें और ऊपरी अदालत में इस फैसले को चुनौती न दें’. अदालत के इस फैसले पर हिरोशिमा के मेयर कजूमी मतसुई ने कहा- ‘शहर के लोगों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए सिटी प्रशासन सरकार और तमाम पक्षों के साथ इस बारे में विचार करेगी कि क्या काली बारिश से प्रभावित इलाके का दायरा बढ़ाया जा सकता है?
‘ कोर्ट में दशकों से लंबित मामले के पीछे विवाद क्या?
परमाणु हमले के शिकार हिरोशिमा के लोगों की दशकों पुरानी ये लड़ाई सरकार के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें सरकार ने बम गिरने की जगह के 19 किलोमीटर लंबे और 11 किलोमीटर चौड़े दायरे के एक ओवल शेप्ड इलाके को काली बारिश से प्रभावित माना था. परमाणु बम हमले के बाद कई इलाकों में एक घंटे तक काली बारिश हुई थी और विकिरण के कारण बहुत सारे लोगों की मौत हो गई थी तो कई लोग विकलांग हो गए थे. इन इलाकों में कई दशकों तक जन्मने वाले लोगों में विकलांगता के लक्षण पाए गए. लेकिन इस दायरे के बाहर कई इलाके के लोगों ने भी दावा किया कि विकिरण का असर उनके इलाकों में हेल्थ पर भी हुआ है और सरकार की ओर से उन्हें भी मेडिकल सुविधाएं और अन्य राहत मिलनी चाहिए।
आज का हिरोशिमा कैसा है?
परमाणु हमले से तबाह हुआ हिरोशिमा शहर जापान के सबसे बड़े द्वीप होंशू में स्थित है. तबाही के बाद दोबारा इस शहर को बसाने में जापान ने काफी मेहनत की. आज यह एक अच्छा खासा विस्तारित शहर है. यहां की आबादी करीब 12 लाख है. यहां की आबादी काफी घनी बसी हुई है लेकिन सिस्टमेटिक डेवलपमेंट और जल स्रोतों के बेहतर मैनेजमेंट के कारण आज हिरोशिमा काफी सुंदर शहर के रूप में दिखता है. देश की राजधानी टोक्यो के साथ ही चीन, ताइवान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के लिए अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स भी यहां से सीधे उड़ान भरती हैं. शहर के अंदर देखें तो एस्ट्राम लाइन, सीनो लाइन और ट्रेन सेवा भी शहर को काफी व्यवस्थित बनाती हैं. हिरोशिमा की सड़कों के बीच में चलने वाली स्ट्रीटकार और लाइट रेल वेहिकल खासकर जापान भर में मशहूर हैं. कई आधुनिक शिक्षण संस्थान, यूनिवर्सिटी, कल्चरल सेंटर और रॉयल कैसल यहां की सांस्कृतिक विविधता और खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. लोहे के प्लेट पर बनने वाले स्वादिष्ट पैनकेक के लिए हिरोशिमा शहर खास तौर पर जाना जाता है. लाखों की तादाद में सैलानी दुनियाभर से हर साल यहां आते हैं. हिरोशिमा मेमोरियल और म्यूजियम लोगों को परमाणु हमले की तबाही के निशां याद दिलाते हैं।
आज के नागासाकी की तस्वीर कैसी है?
नागासाकी जापान के दक्षिण पश्चिम क्यूशू द्वीप में समुद्र के किनारे स्थित शहर है. यह शहर 405.9 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला हुआ है. यहां की आबादी 4 लाख 7 हजार के करीब है. हाशिमा द्वीप, पीस पार्क, एटॉमिक बम मेमोरियल यहां के प्रमुख टूरिस्ट केंद्र हैं. फरवरी-मार्च में होने वाला नागासाकी लैलटर्न फेस्टिवल यहां का मुख्य सांस्कृतिक आयोजन है. सख्त ट्रैफिक रूल और सड़क के बीच चलने वाले एसट्राम यहां की परिवहन व्यवस्था को सुविधाजनक बनाते हैं. आज नागासाकी एक पोर्ट सिटी के रूप में जाना जाता है. खासकर यहां की जहाज निर्माण इंडस्ट्री बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने का साधन साबित हुई है. समंदर के लंबे किनारों के कारण यह शहर एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित हुआ है. अगस्त का महीना यहां सबसे गर्म रहता है. हालांकि, सर्दी के मौसम में बर्फबारी भी आकर्षण का केंद्र रहती है. 2016 में यहां 17 सेंटीमीटर तक स्नोफॉल हुआ था।
दुनिया क्या सबक ले सकती है?
परमाणु बम हमले की मार झेल चुका जापान आज अपनी तकनीक और मेहनत की बदौलत दुनिया के सबसे विकसित देशों में है. लेकिन उसकी प्रतिज्ञा साफ है कि वह देश में परमाणु हथियारों का स्वामित्व, उत्पादन या अनुमति नहीं देगा. परमाणु तकनीक को वह केवल शांतिपूर्ण तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल का समर्थन करता है. हालांकि, दुनिया की आज की तस्वीर जापान जैसी नहीं है. दुनिया में परमाणु हथियारों की रेस तेज ही होती जा रही है. दुनिया के परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सिपरी के अनुसार वैश्विक रूप से परमाणु हथियारों की संख्या पिछले साल से और अधिक बढ़ गई है. साल 2020 में 3,720 परमाणु बम दुनियाभर में तैनात थे, वहीं साल 2021 में 3,825 परमाणु हथियार कभी भी हमला करने के लिए बिल्कुल तैयार हालत में रखे गए हैं. सिपरी के अनुसार नौ परमाणु सशस्त्र देश इस रेस को बढ़ा रहे हैं जिनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राइल और उत्तर कोरिया को शामिल किया गया है. रिपोट के मुताबिक साल 2021 में इन देशों के पास कुल 13,080 परमाणु बम हैं जबकि साल 2020 में यह आंकड़ा 13,400 था.
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समाज की ‘सेहत’ के लिए नुकसानदेह हैं कुंद्रा, गहना की भी ज़मानत अर्जी खारिज…
मुंबई। मुंबई की एक अदालत ने फिल्म अदाकारा शिल्पा शेट्टी के खाविंद और कारोबारी राज कुंद्रा और उनके सहयोगी रेयान थोर्प की जमानत की अर्जी खारिज कर दी. इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि दोनों को जिस मुबैयना गुनाह के लिए गिरफ्तार किया गया है, वह समाज की सेहत के लिए ‘‘नुकसानदेह’’ था, और ऐसे मामलों में समाज के हित की ‘‘अनदेखी’’ नहीं की जा सकती है. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एस बी भाजीपाले ने ऐप्स के जरिए अश्लील सामग्री के मुबैयना निर्माण और उसकी स्ट्रीमिंग से संबंधित मामले में 28 जुलाई को कुंद्रा और थोर्प की जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह टिप्पणी की थी. अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने इस मामले में सही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है. अदालत के आदेश की काॅपी मंगल को ही उपलब्ध हुई है. वहीँ दूसरी जानिब मंगल को एक सेशन कोर्ट ने अभिनेत्री गहना वशिष्ट की गिरफ़्तारी से बचने के लिए अग्रिम ज़मानत की अर्जी को खारिज कर दिया है. गहना राज कुंद्रा के अश्लील फिल्म केस में एक आरोपी हैं. उन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए कई बार बुलाया है और उनका बयान दर्ज किया है. गहना को इस बात का अंदेशा है कि उनकी भी इस केस में गिरफ़्तारी हो सकती है।
सामाजिक हित को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
कुंद्रा और थोर्प को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 19 जुलाई को गिरफ्तार किया था और अभी वह न्यायिक हिरासत में है. मजिस्ट्रेट ने कहा कि कथित अपराध ‘‘समाज के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक’’ है और ‘‘एक व्यापक सामाजिक आयाम वाले अपराध के अभियोजन में सामाजिक हित को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. आरोपियों ने बम्बई उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया है और यह कहते हुए अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है कि पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए के तहत जरूरी नोटिस जारी नहीं किया है. इस मामले में उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।यह कहना सही नहीं है कि आरोपी जमानत के लायक हैं
हालांकि, मजिस्ट्रेट ने पाया कि मामले के जांच अधिकारी (आईओ) ने जरूरत के हिसाब से गिरफ्तारी की वजह दर्ज की थी. उन्होंने कहा कि यह अदालत 20 जुलाई (रिमांड के लिए सुनवाई के दौरान) को इस नतीजे पर पहुंची थी कि यह गिरफ्तारी कानून के मुताबिक हुई है. मजिस्ट्रेट ने कहा कि आईओ ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के कारण दर्ज किए थे. ऐसे हालात में यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोपी जमानत के लायक हैं. अदालत ने कहा कि आईओ के जवाब के मुताबिक, मामले का एक दूसरा आरोपी और कुंद्रा का रिश्तेदार, प्रदीप बख्शी फरार है और साथ ही, पुलिस ने बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र किया जिसका विश्लेषण अब भी जारी है। -

उड़ने लगीं राज कुंद्रा की धज्जियाँ, पीड़िता बोली तीन लोगों ने एक साथ मेरे संग फिजिकल रिलेशन बनाए और फिर निकलवा दिए सारे कपड़े…
एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ और रोवा खान जमकर राज कुंद्रा का सपोर्ट कर रही हैं और राज के पक्ष में लगातार बयान दे रही हैं। हालांकि बता दें कि अब इन दोनों अभिनेत्रियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। दरअसल पुलिस ने इनके खिलाफ दो पीड़िताओं के बयान दर्ज किए हैं। जिसे पुलिस ने जारी किया है। मुंबई पुलिस की ओर से जारी किए गए इन बयानों के अनुसार गहना वशिष्ठ और रोवा खान जबरदस्ती लड़कियों से गलत काम करवाया करती थीं।
गहना वशिष्ठ और रोवा खान पर धमकाने का आरोप
मुंबई पुलिस ने उन दो पीड़िताओं के बयान जारी किए हैं। जो अश्लील फिल्म मामले का शिकार हो चुकी हैं। इन पीड़िताओं ने गहना वशिष्ठ और रोवा खान पर धमकाने का आरोप लगाया है। साथ में यह भी कहा है कि ये जबरन अश्लील वीडियो शूट करवाती थीं। दोनों लड़कियों ने बताया कि हमसे मड आइलैंड के एक बंगले में शूटिंग करवाई गई थी। पहली पीड़िता ने रोवा खान पर जबरन अश्लील फिल्मों की शूटिंग के आरोप लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार साल 2018 में मैं रौनक नाम के कास्टिंग डायरेक्टर से मिली। जिसने मुझे रोवा के साथ एक प्रोजेक्ट में काम दिलवाया। 2 फरवरी, 2021 को रौनक ने मुझे मलाड में मिलने बुलाया। रोवा और रौनक एक ही कार में आए थे। मुझे मड आइलैंड में स्थित एक बंगले पर लेकर गए। इसके बाद रोवा ने मुझे 25,000 रुपए का ऑफर देते हुए एक स्क्रिप्ट दी और बोल्ड ड्रेस पहनने को कहा। उस स्क्रिप्ट को पढ़कर मैंने मना कर दिया।इन बयानों के बाद गहना और रोवा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
बता दें कि एक अन्य पीड़िता ने गहना वशिष्ठ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे वेब सीरीज की शूटिंग के नाम पर मड आइलैंड बुलाया गया था।मुझे बताया गया कि ये वेब सीरीज राजा, रानी और तीन बौनों पर बेस्ड है। शूटिंग के दौरान मुझे एक कमरे में ले जाया गया और तीन लोगों ने मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाए। इसके बाद गहना ने मुझे नए कपड़े दिए और शूटिंग पर चलने के लिए कहा तो मैंने मना कर दिया। इस पर गहना ने मुझे धमकाते हुए कहा शूटिंग पर लाखों रुपए खर्च हुए हैं और अगर तुम ये छोड़कर जाओगी तो पूरा पैसा तुम्हें देना पड़ेगा। इसके बाद मैंने डरते हुए कहा कि मेरे पास इतनी बड़ी रकम नहीं है। फिर वहां आकाश नाम का एक लड़का आया और उसने जबरदस्ती से मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाए।
मुझे धमकाते हुए गहना ने कहा कि अगर मैंने शूट के बारे में किसी को कुछ बताया तो ठीक नहीं होगा। इन लोगों ने मुझे 10,000 रुपए का ऑफर देते हुए फंसाया था। पुलिस में दर्ज किए गए इन बयानों के बाद गहना और रोवा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें कि गहना अभी बेल पर जेल से बाहर हैं।इन बयानों के बाद गहना और रोवा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
बता दें कि एक अन्य पीड़िता ने गहना वशिष्ठ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे वेब सीरीज की शूटिंग के नाम पर मड आइलैंड बुलाया गया था।मुझे बताया गया कि ये वेब सीरीज राजा, रानी और तीन बौनों पर बेस्ड है। शूटिंग के दौरान मुझे एक कमरे में ले जाया गया और तीन लोगों ने मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाए। इसके बाद गहना ने मुझे नए कपड़े दिए और शूटिंग पर चलने के लिए कहा तो मैंने मना कर दिया। इस पर गहना ने मुझे धमकाते हुए कहा शूटिंग पर लाखों रुपए खर्च हुए हैं और अगर तुम ये छोड़कर जाओगी तो पूरा पैसा तुम्हें देना पड़ेगा। इसके बाद मैंने डरते हुए कहा कि मेरे पास इतनी बड़ी रकम नहीं है। फिर वहां आकाश नाम का एक लड़का आया और उसने जबरदस्ती से मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाए।
मुझे धमकाते हुए गहना ने कहा कि अगर मैंने शूट के बारे में किसी को कुछ बताया तो ठीक नहीं होगा। इन लोगों ने मुझे 10,000 रुपए का ऑफर देते हुए फंसाया था। पुलिस में दर्ज किए गए इन बयानों के बाद गहना और रोवा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें कि गहना अभी बेल पर जेल से बाहर हैं।
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निमिषा पांडे होंगी खरसिया SDOP, पीताम्बर पटेल बने बलोदाबाजार के ASP….
सुनील अग्रवाल खरसिया। छत्तीसगढ़ में एडिशनल एसपी के साथ-साथ बड़ी संख्या में DSP रैंक के पुलिस अफसरों के तबादले किये गये हैं। तबादला सूची में DSP, सीएसपी, सहायक कमांडेंट, एसडीओपी सहित कई अफसरों के नाम हैं। जिसमें रायगढ़ जिले से एएसपी राजकुमार मिंज, गरिमा उपाध्याय , एसडीओपी पीताम्बर पटेल और सुशील नायक का भी नाम शामिल है।

बिलासपुर में उप पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू) के रूप में पदस्थ श्रीमती निमिषा पांडे को खरसिया पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बनाया गया है वहीं खरसिया एसडीओपी पीताम्बर पटेल को बलोदा बाजार का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है।
देखें किसका कहाँ हुआ तबादला..👇







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छत्तीसगढ़ में CM बदले जाने के सवाल पर टीएस सिंह देव ने तोड़ी चुप्पी…जानें क्या कहा?
पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकतीं हैं. असल में ढाई-ढाई साल पर रोटेशन के तहत राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाएं तेज़ हैं और इस बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव (TS Singh Deo) दिल्ली दौरे पर हैं. टी एस सिंह देव ने एक मीडिया चैनल से खास बातचीत में पहली बार इस पूरे घमासान पर चुप्पी तोड़ी।
एक मीडिया चैनल से एक्सक्लूसिव बातचीत में टी एस सिंह देव ने कहा कि राजनीति में मुख्यमंत्री बदलने का कोई लिखित फार्मूला तो तय नहीं होता मगर मुझे उम्मीद है कि नेतृत्व उचित फैसला करेगा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक और उत्तराखंड में कोई फार्मूला था क्या जहां मुख्यमंत्री बदले गए? टी एस सिंह देव ने उत्तर प्रदेश का भी उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी तो योगी आदित्यनाथ को बदलने पर मंथन हुआ था।बता दें कि हाल हीं में दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओ को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री भपेश बघेल ने कहा था कि राज्य में तीन-चौथाई बहुमत की सरकार चल रही है लिहाज़ा रोटेशन जैसे किसी समझौते का सवाल हीं नहीं पैदा होता. हालांकि मुख्यमंत्री बघेल ने साथ ही ये भी कहा था कि नेतृत्व ने जब उन्हें शपथ लेने को कहा था तब उन्होंने शपथ लिया था, उसी तरह अगर नेतृत्व उन्हें इस्तीफा देने को कहेगा तो शो पद छोड़ देंगे.
एक मीडिया चैनल से तब की बातचीत में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदले जाने की ज़रूरत पर पूछे गए सवाल के जवाब में टी एस सिंह देव ने ये भी कहा कि नेतृत्व हमेशा ध्यान देता है और नेतृत्व उन्हें जो भी ज़िम्मेदारी देता है वो उसके लिए हमेशा तैयार हैं. असल में जब से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी है तब से टी एस सिंह देव के करीबियों का कहना है कि नेतृत्व के सामने भूपेश बघेल और टी एस सिंह देव के बीच ढाई-ढाई साल पर मुख्यमंत्री बनने की समझ बनी थी, जिसका अब पालन होना चाहिए।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी किया आदेश, रिटायर्ड जज को बनाया भू-संपदा अपीलीय अधिकरण का अध्यक्ष…
सरकार ने छत्तीसगढ़ हाई-कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश शरद कुमार को भू-संपदा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है । यह आदेश आवास एवं पर्यावरण विभाग ने आदेश जारी किया है ।

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अपने पति को रातों-रात बना दिया IPS, पीएमओ ने दिए जांच के आदेश….
बिहार की एक पुलिस अधिकारी के पति ने आईपीएस की वर्दी पहन कर पत्नी के साथ फोटो खिंचवाई जो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। सोशल मीडिया में फोटो वायरल होने के बाद किसी ने इसकी शिकायत पीएमओ से कर दी। शिकायत मिलने के बाद पीएमओ ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
बिहार की एक पुलिस अधिकारी के पति ने आईपीएस की वर्दी पहन कर पत्नी के साथ फोटो खिंचवाई जो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। सोशल मीडिया में फोटो वायरल होने के बाद किसी ने इसकी शिकायत पीएमओ से कर दी। शिकायत मिलने के बाद पीएमओ ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब आप सोंच रहे होंगे कि आखिर मामला क्या है? आईपीएस की वर्दी पहनने पर हड़कंप क्यों मच गया? तो अब हम आपको पूरा मामला बताते हैं। वाक्या भागलपुर जिले के कहलगांव का है जहां कि एसडीपीओ रेशू कृष्णा को अपने पति को आईपीएस की वर्दी पहना भारी पड़ गया है। दरअसल उनके पति पुलिस में नहीं हैं, बावजूद इसके उन्होंने अपने पति को आईपीएस की वर्दी पहना दी।
बता दें कि मामला इसलिए उलझ गया क्योंकि सैन्य और पुलिस पोशाकों को आम आदमी को पहनने पर पाबंदी है। इससे जुड़े तमाम नियम व कानून प्रावधान सशस्त्र बल अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) में भी हैं। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा छह में इस पर प्रतिबंध है।
रिपोर्ट के मुताबिक इसकी शिकायत किसी ने सीधे पीएमओ में कर दी। शिकायत में कहा गया कि एसडीपीओ रेशू कृष्णा के पति कुछ भी काम नहीं करते हैं तो उन्होंने आईपीएस की वर्दी कैसे पहनी है? पत्र में कहा गया कि रेशू कृष्णा कहती हैं कि उनके पति आइपीएस हैं और पीएमओ में तैनात हैं। पीएमओ ने मामले को बिहार पुलिस मुख्यालय को भेज दिया जिसके बाद हड़कंप मच गया।
सूत्रों के अनुसार भागलपुर के एसएसपी निताशा गुड़िया ने पूरे मामले की जांच कर पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भी भेज दी है। माना जा रहा है कि उस जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय कहलगांव एसडीपीओ पर कानून कार्रवाई कर सकता है। इस मामले के शुरू होने के बाद एसडीपीओ और उनके पति ने अपने-अपने सोशल मीडिया एकाउंट से आईपीएस वर्दी पहने फोटो को हटा दिया।
कहलगांव की एसडीपीओ रेशू कृष्णा पटना की निवासी हैं। रेशू ने बीपीएससी परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल की थी। भोजपुर जिले में अपनी तैनाती के दौरान कई कांडों का सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर सुर्खियों में आई थीं। इसके बाद महिला बटालियन में तैनात हुई। फिर कहलगांव में एसडीपीओ के रूप में तैनाती हुईं।
