Author: Sunil Agrawal

  • CG-IPS की नई पोस्टिंग, राज्य पुलिस सेवा के भी 5 पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर

    CG-IPS की नई पोस्टिंग, राज्य पुलिस सेवा के भी 5 पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर

    रायगढ़। राज्य सरकार ने 2018 बैच के पांच प्रोबेशनर आईपीएस अधिकारियों को पोस्टिंग दी है। वहीं, राज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारियों का ट्रांसफर किया है। पांचों को सीएसपी अपाइंट किया गया है। इनमें से योगेश पटेल को रायगढ़ सीएसपी,रत्ना सिंह को रायपुर के आजाद चौक का सीएसपी बनाया गया है।
    देखिए लिस्ट-

  • बच्चे के हाथ में मोबाइल जाते ही डाटा हो जाता है डिलीट, उमड़ी लोगों की भीड़; जानें पूरा मामला

    बच्चे के हाथ में मोबाइल जाते ही डाटा हो जाता है डिलीट, उमड़ी लोगों की भीड़; जानें पूरा मामला

    अलीगढ़। क्या किसी बच्चे में ऐसी पावर (Power) हो सकती हैं जिससे वो बिना कोई बटन दबाए आपके मोबाइल का सारा डाटा डिलीट कर दे. दूसरे शब्दों में कहें तो उसी बच्चे के हाथ लगते ही आपका स्मार्ट फोन पूरी तरह रिसेट (Reset Mobile) हो जाये. यानी फोन में मौजूद मैसेज, गैलरी और बाकी सब कुछ एक साथ डिलीट हो जाए. ये पढ़कर आपको आपको कुछ अटपटा जरूर लगा होगा. यहां आपको बता दें कि ये किसी फिल्म की स्किप्ट या कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है. जिसे जानकर अब आप भी हैरान रह जाएंगे।

    अलीगढ़ के रहने वाले गौरव अग्रवाल के पुत्र अस्तित्व के साथ घट रहे इस अजब-गजब घटनाक्रम ने उसे पूरे शहर की सुर्खियों में ला दिया है. उसके घर के बाहर अक्सर लोगों की भीड़ लग जाती है. ये लोग दरअसल अपना वीडियो बनवाकर ये देखना चाह रहे हैं कि क्या वाकई ऐसा हो रहा है. हालांकि परेशान पिता ने जब बच्चे के पिता ने परेशान होकर उसके शरीर की पूरी जांच कराई तो उसके शरीर में कुछ भी एबनॉर्मल नहीं मिला।

    12 मई से हुई शुरुआत?


    ईटीवी भारत में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे के माता-पिता के मुताबिक उन्हें पहली बार 12 मई को इस मामले का पता चला. दरअसल उस दिन अस्तित्व ने घर में जिस सदस्य का फोन लिया उस फोन का डाटा अचानक गायब होने लगा. पहले तो उन्होंने बच्चे को डांटा फिर डाटा गायब होने की शिकायत करने मोबाइल कंपनी के सर्विस सेंटर पर गए तो वहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. हालांकि मोबाइल से डाटा उड़ने की वजह नहीं पता चल सकी और यह परेशानी आगे भी आती रही



    रक्षा बंधन पर खुलासा


    गौरव ने बताया कि 22 अगस्त को अस्तित्व अपनी मां के साथ ननिहाल गया था. वहां पर भी ठीक ऐसा घटनाक्रम सामने आया तो परिवार वालों का माथा ठनका. दरअसल त्योहार के दिन उनकी पत्नी व ससुराल के बाकी लोगों के मोबाइल का डाटा उड़ गया. जिसके बाद उन्हें पता चला कि जो भी मोबाइल लेकर उनके बेटे के नजदीक पहुंचा उसमें इसी तरह की परेशानी आ रही है. पिता गौरव का कहना है कि अब अपने घर में मोबाइल फोन रखना दूभर हो गया है. गौरव ने कहा, ‘मोबाइल डाटा से ज्यादा चिंता उन्हें अब अपने बेटे की सता रही है।

    फॉरेंसिक जांच का सुझाव


    इस घटना की जानकारी जैसे जैसे लोगों को होने लगी, लोग अब बच्चे के पास जाने से भी कतरा रहे हैं. यहां तक की डॉक्टरों ने जब इलेक्ट्रॉनिक बीपी मशीन पर बीपी को नापने की कोशिश की तो वह भी एरर दिखाती है. तथा बीपी को नहीं बताती है. वहीं अस्तित्व का कहना है कि उसके अपने शरीर में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव महसूस नहीं होता है. बस अचानक ही मोबाइल के उसके संपर्क में आने पर उसका डाटा गायब हो जाता है. अब कुछ लोगों ने इस मामले की फॉरेंसिक जांच कराने की सलाह दी है।

    परिजनों का डर बरकरार

    शहर के फिजीशियन और न्यूरो सर्जन जिसने भी अस्तित्व की रिपोर्ट देखी और जिसके फोन का भी डाटा डिलीट हुआ सब हैरान है. ऐसा क्यों हो रहा है इसकी वजह कोई नहीं बता पा रहा है. हालांकि डॉक्टरों ने उसके किसी बीमारी से पीड़ित होने की पुष्टि नहीं की है फिर भी परिजनों को लगता है कि, अस्तित्व एक अजीब सी बीमारी से ग्रस्त है. इसलिए उनमें बच्चे के भविष्य को लेकर डर बना हुआ है।

  • बेटियां हमेशा बेटियां होती हैं, बेटे तब तक बेटे होते हैं जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती’: बॉम्बे हाईकोर्ट…

    बेटियां हमेशा बेटियां होती हैं, बेटे तब तक बेटे होते हैं जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती’: बॉम्बे हाईकोर्ट…

    बाॅम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई निवासी और उसकी पत्नी को बुजुर्ग माता-पिता का घर एक महीने के भीतर खाली करने का निर्देश देते हुए कहा है कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम यह कहता है कि बच्चे या रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाध्य हैं ताकि वे बिना किसी उत्पीड़न के ‘सामान्य जीवन जी सकें’। अदालत ने कहा कि यह व्यक्ति और उसका परिवार उसके माता-पिता की इच्छा के खिलाफ ‘जबरन संपत्ति हड़पने’ के लिए अपने 90 वर्षीय पिता की संपत्ति (जो कि उसने अपनी बेटी को उपहार में दी है) में रह रहे हैं,जो उत्पीड़न है और माता-पिता के सामान्य जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन भी है। तदनुसार, कोर्ट ने रखरखाव न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ बेटे की तरफ से दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसे परिसर खाली करने के लिए कहा गया था।

    धारा 4 स्पष्ट रूप से प्रदान करती है कि बच्चों या रिश्तेदारों का दायित्व वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना होगा ताकि वे ‘सामान्य जीवन जी सकें’ … इसमें निश्चित रूप से इसके दायरे में, किसी बेटे या रिश्तेदार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के स्वामित्व वाले परिसर में आकर रहने से मिलने वाले उत्पीड़न और यातना से सुरक्षा शामिल है…” कोर्ट ने पुरानी कहावत को दोहराया कि बेटियां हमेशा अपने माता-पिता के साथ खड़ी रहती हैं लेकिन बेटे तब तक साथ रहते हैं जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती।

    हाईकोर्ट ने कहा कि, ”यह देखने के बाद कि यह एक ऐसा मामला है जहां बूढ़े माता-पिता इकलौते बेटे और बहू के हाथों पीड़ित हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि निश्चित रूप से लोकप्रिय कहावत में सच्चाई का कुछ तत्व है कि ‘बेटियां हमेशा बेटियां ही होती हैं’ और बेटे तब तक बेटे होते हैं जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती,यद्यपि निश्चित रूप से अनुकरणीय अपवाद होंगे।” कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षकारों के बीच कई कानूनी कार्यवाही माता-पिता द्वारा सहन की जा रही यातना और उत्पीड़न का प्रमाण है। इसके अलावा, विचाराधीन संपत्ति पैतृक संपत्ति नहीं है जिस पर पुत्र किसी भी कानूनी अधिकार का दावा कर सकता है।

    पृष्ठभूमि माता-पिता (90 वर्ष की आयु के पिता और 89 वर्ष की आयु की मां) ने अपने बेटे द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ रखरखाव न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने बेटे और उसके परिवार को उस फ्लैट को खाली करने का आदेश दिया जिसमें उसके बुजुर्ग माता-पिता रह रहे हैं। ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देते हुए बेटे और उसके परिवार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। शुरुआत में ही, हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक ”दुखद मामला” है और ”माता-पिता के दुख” पर चिंता व्यक्त की।

    बेटे और उसके परिवार ने दो आधारों पर दलील दी। सबसे पहले, उन्होंने दावा किया कि चूंकि एक स्थानीय अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत 89 वर्षीय मां को घर से बेदखल नहीं करने के पक्ष में पहले ही एक आदेश पारित कर दिया है, इसलिए बुजुर्ग दंपति को वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरण के पास नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा, चूंकि बुजुर्ग माता-पिता ने बेटी को फ्लैट उपहार में दे दिया है, इसलिए अधिनियम की धारा 4 को लागू करने के लिए इसे अपनी संपत्ति नहीं कहा जा सकता है। माता-पिता के वकील ने तर्क दिया कि यह एक स्पष्ट मामला है जहां माता-पिता को उनके जीवन के इस चरण में याचिकाकर्ता नंबर 1 व 2 द्वारा प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है। उन्होंने फ्लैट हड़पने के लिए माता-पिता के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार के उदाहरणों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी तरह से ट्रिब्यूनल के पास जाने से नहीं रोका जा सकता है, क्योंकि अधिनियम की धारा 4 में भरण-पोषण के सभी पहलू शामिल हैं। इसके अलावा, पिता घरेलू हिंसा के तहत चली कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे। ”इस प्रकार वरिष्ठ नागरिकों के हित में ऐसे प्रावधान बनाने में विधायिका की मंशा स्पष्ट है,जो वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के उस व्यापक स्पेक्ट्रम को शामिल करते है, जो उनके जीवित रहने और/ या उनके बुढ़ापे में आजीविका के लिए मौलिक या जरूरी हैं। निश्चित रूप से उक्त अधिनियम के दायरे में आने वाली वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों के लिए वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में न्यायालय का दृष्टिकोण संकीर्ण और आडंबरी नहीं हो सकता है।” वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत ”सामान्य जीवन” का गहरा अर्थ है धारा 4 स्पष्ट रूप से प्रदान करती है कि बच्चों या रिश्तेदारों का दायित्व वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना होगा ताकि वे ‘एक सामान्य जीवन जी सकें’। इन प्रावधानों में प्रयुक्त शब्द ”सामान्य जीवन” की अवधारणा कहीं अधिक गहरी और व्यापक है, जिसका अर्थ है और इसका संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को गारंटीकृत आजीविका के मौलिक अधिकारों पर असर पड़ता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि धारा 2 (एफ) के तहत ”संपत्ति” शब्द का अर्थ किसी भी प्रकार की संपत्ति है, चाहे वह चल या अचल, पैतृक या स्वयं अर्जित, मूर्त/वास्तविक या अमूर्त हो और जिसमें ऐसी संपत्ति में अधिकार या हित भी शामिल हैं। यह तर्क कि माता-पिता फ्लैट में अधिकार का दावा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने इसे अपनी बेटी को उपहार में दे दिया है, अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनके पास इसमें अधिकार और हित हैं। अदालत ने कहा कि बेटा संपन्न है और उसकी अपनी संपत्ति हैं। इसके बावजूद, वह अपने बुजुर्ग माता-पिता को परेशान कर रहा है, जो सिर्फ एक शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि,”वर्तमान मामला हताश माता-पिता की एक दुखद कहानी है, जो जीवन में इस चरण में शांति से रहने का इरादा रखते हैं। क्या एक समृद्ध पुत्र द्वारा उनको इतनी छोटी सी अपेक्षा और आवश्यकता से भी वंचित किया जाना चाहिए, यह एक विचार है जिस पर याचिकाकर्ताओं को विचार करना चाहिए।” कोर्ट ने पाया कि बेटा अपने बूढ़े और जरूरतमंद माता-पिता की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करने में अंधा प्रतीत होता है और इसके विपरीत उन्हें मुकदमे में घसीट रहा है। कोर्ट ने दुख के साथ कहा कि, ”बेटे और माता-पिता के बीच जो भी संबंध हैं, परंतु यह कल्पना करना दर्दनाक है कि क्या भौतिक लाभ के लिए बेटे को अपने वृद्ध माता-पिता को त्याग देना चाहिए?”

  • Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google अपने Android सॉफ्टवेयर की बदौलत भारत के स्मार्टफोन बाजार में ‘दादागिरी’ करती है. ये हम नहीं बल्कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक जांच रिपोर्ट कहती है. इस जांच रिपोर्ट के हिसाब से भारत के 98% स्मार्टफोन मार्केट पर Google के Android ऑपरेटिंग सिस्टम का कब्ज़ा है. CCI ने Google के खिलाफ स्मार्टफोन बनाने वाली कई कंपनियों से मिली शिकायत के बाद अप्रैल 2019 में ये जांच शुरू की थी. लगभग दो साल चली जांच के बाद तैयार 750 पेज की एक रिपोर्ट में Google को ना सिर्फ अपनी हैसियत का गलत फायदा उठाने (दादागिरी करने) का दोषी पाया गया. बल्कि ये भी देखा गया कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और इससे जुड़े बाजार में वो गैर-प्रतिस्पर्धी, अनुचित और प्रतिबंधित व्यापार गतिविधियों को अपनाती है. इस जांच में CCI ने Apple, Microsoft, Amazon, Paytm, PhonePe, Mozila, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo और Karbonn जैसी कंपनियों से भी सवाल किए.

    CCI के जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Google, सर्च (Google Search), म्यूजिक (YouTube), ब्राउंजिंग (Chrome) और ऐप लाइब्रेरी (Play Store) के बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करती है. टीओआई की खबर के मुताबिक वह मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों से एकतरफा अनुबंध करती है और ऐप डेवलपरों पर अपनी शर्तें लगाती है ताकि उसकी खुद की ऐप का दबदबा कायम रहे.

    जांच रिपोर्ट में Google को प्रतिस्पर्धा कानून की धारा-4(2)(a)(i),धारा-4(2)(b),धारा-4(2)(c),धारा-4(2)(d) और धारा-4(2)(e) के तहत दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि Google अधिकतर मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को Android लाइसेंस के साथ अपनी कुछ विशेष शर्तें भी लगाती है और उन्हें Google Mobile Services (GMS) सुइट देती है, जिसमें गूगल प्ले स्टोर, क्रोम और यूट्यूब जैसी ऐप को बंडल बनाकर दिया जाता है.

    देश में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली अधिकतर कंपनियों की मांग रही है कि Google उन्हें ‘bare Android version’ उपलब्ध कराए और इसकी जरूरत Mobile Application Distribution Agreement को साइन करने के लिए पड़े. अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगर CCI गूगल को इन सबके लिए जिम्मेदार पाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं उसे इस तरह की गतिविधियों को रोकने का आदेश भी दिया जा सकता है. CCI बाजार में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने और एकाधिकार को रोकने के लिए काम करने वाली नियामक संस्था है।

  • Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google पर लगा गंभीर आरोप, लग सकता है भारी जुर्माना…

    Google अपने Android सॉफ्टवेयर की बदौलत भारत के स्मार्टफोन बाजार में ‘दादागिरी’ करती है. ये हम नहीं बल्कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक जांच रिपोर्ट कहती है. इस जांच रिपोर्ट के हिसाब से भारत के 98% स्मार्टफोन मार्केट पर Google के Android ऑपरेटिंग सिस्टम का कब्ज़ा है. CCI ने Google के खिलाफ स्मार्टफोन बनाने वाली कई कंपनियों से मिली शिकायत के बाद अप्रैल 2019 में ये जांच शुरू की थी. लगभग दो साल चली जांच के बाद तैयार 750 पेज की एक रिपोर्ट में Google को ना सिर्फ अपनी हैसियत का गलत फायदा उठाने (दादागिरी करने) का दोषी पाया गया. बल्कि ये भी देखा गया कि मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और इससे जुड़े बाजार में वो गैर-प्रतिस्पर्धी, अनुचित और प्रतिबंधित व्यापार गतिविधियों को अपनाती है. इस जांच में CCI ने Apple, Microsoft, Amazon, Paytm, PhonePe, Mozila, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo और Karbonn जैसी कंपनियों से भी सवाल किए.

    CCI के जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Google, सर्च (Google Search), म्यूजिक (YouTube), ब्राउंजिंग (Chrome) और ऐप लाइब्रेरी (Play Store) के बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करती है. टीओआई की खबर के मुताबिक वह मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों से एकतरफा अनुबंध करती है और ऐप डेवलपरों पर अपनी शर्तें लगाती है ताकि उसकी खुद की ऐप का दबदबा कायम रहे.

    जांच रिपोर्ट में Google को प्रतिस्पर्धा कानून की धारा-4(2)(a)(i),धारा-4(2)(b),धारा-4(2)(c),धारा-4(2)(d) और धारा-4(2)(e) के तहत दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि Google अधिकतर मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को Android लाइसेंस के साथ अपनी कुछ विशेष शर्तें भी लगाती है और उन्हें Google Mobile Services (GMS) सुइट देती है, जिसमें गूगल प्ले स्टोर, क्रोम और यूट्यूब जैसी ऐप को बंडल बनाकर दिया जाता है.

    देश में मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली अधिकतर कंपनियों की मांग रही है कि Google उन्हें ‘bare Android version’ उपलब्ध कराए और इसकी जरूरत Mobile Application Distribution Agreement को साइन करने के लिए पड़े. अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगर CCI गूगल को इन सबके लिए जिम्मेदार पाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं उसे इस तरह की गतिविधियों को रोकने का आदेश भी दिया जा सकता है. CCI बाजार में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने और एकाधिकार को रोकने के लिए काम करने वाली नियामक संस्था है।

  • विद्युत विभाग ने मनाई विश्वकर्मा जयंती….

    विद्युत विभाग ने मनाई विश्वकर्मा जयंती….

    खरसिया। देव शिल्पी बाबा विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर खरसिया विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कार्यालय में धूमधाम से देवशिल्पी विश्वकर्मा की जयंती मनाई गयी, तथा इस अवसर पर प्रसाद रूपी भण्ड़ारे का आयोजन भी किया गया था।


    विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में ही भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया तत्पश्चात प्रसाद रूपी भण्ड़ारे का आयोजन किया इस अवसर पर सहायक अभिंता बलराम साहू, कनिष्ठ अभियंता मदनलाल नायक, कनिष्ठ अभियंता पूजा टोपनो, विवेक विश्वकर्मा, लाईनमेन मनसा राम, संतोष साहू रतिराम पटेल, गणेश सिदरा, नीरज राठौर, तारेन्द्र सिदार, अनिल, मिश्रीलाल, भूजेन्द्र पटेल, नरेश, लेखू, दीनू, अजय, देवी प्रसाद, खरसिया के पूर्व सहायक अभियंता नरेन्द्र कुमार नायक तथा सेवानिवृत्त लाईन्मेन गंगा, अजय, सुनील, रामनारायण ज्योतिष, जितेश, विकास, मेहमद, अजय सोनी, कु आरती, डोल बाई, कुशी बाई, सुलोचना, हेमप्रसाद सहित विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • जज की चेतावनी के बावजूद दुर्व्यवहार, ऊंची आवाज़ में बहस करने के आरोप में वकील के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने आपराधिक कार्यवाही शुरू की…

    जज की चेतावनी के बावजूद दुर्व्यवहार, ऊंची आवाज़ में बहस करने के आरोप में वकील के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने आपराधिक कार्यवाही शुरू की…

    दिल्ली की एक अदालत ने एक वकील के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की है, जिस वकील पर कथित तौर पर न्यायाधीश की चेतावनी के बावजूद फिज़िकल सुनवाई के दौरान कोर्ट चैंबर में दुर्व्यवहार करने और अभियोजक के साथ ऊंची आवाज़ में बात करने का आरोप है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद एक व्यक्ति की ओर से अंतरिम जमानत की मांग करने वाले एक वकील की दलीलें सुन रहे थे, जिस दौरान उस वकील ने सरकारी वकील पर उनका मजाक बनाने का आरोप लगाया था। हालांकि, अदालत द्वारा बार-बार वकील को चेतावनी देने के बावजूद, वकील ने अपनी तेज़ आवाज जारी रखी।

    न्यायाधीश ने इस तरह के व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए वकील से लिखित स्पष्टीकरण मांगा कि वह यह बताएं कि बार-बार चेतावनी के बाद भी उन्होंने अपने दुर्व्यवहार से कार्यवाही बाधित क्यों की? सुनवाई की अगली तारीख पर वकील ने कहा था कि वह इस मामले में कोई लिखित स्पष्टीकरण दाखिल नहीं करना चाहते। इसे देखते हुए न्यायाधीश ने इस प्रकार आदेश दिया: “वकील को सलाह दी गई थी कि उनका ऐसा रुख अपराध की श्रेणी में आ सकता है, फिर भी उन्होंने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया। यहां तक कि उन्हें अपने इस तरह के कृत्य के लिए पछतावा भी नहीं है, इसलिए इस संबंध में आईपीसी की धारा 228 और आईपीसी और धारा 179 के तहत आगे की कार्यवाही के लिए मिसलेनियस केस दर्ज किया जाए।

    पिछले आदेश दिनांक 08/09/2021 की प्रति के साथ इस आदेश की प्रति को उक्त मिसलेनियस फाइल में रखा जाए। मामला 21/09/2021 को सुना जाएगा। इस आदेश की प्रति अभियोजन पक्ष को भिजवाई जाए।” वकील मेडिकल आधार पर अपने मुवक्किल के लिए अंतरिम जमानत की मांग कर रहा था कि 60 वर्षीय व्यक्ति होने के नाते वह कई बीमारियों और स्वास्थ्य जटिलताओं से पीड़ित है, जिसके मद्देनजर उसे अंतरिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तथ्य पर ध्यान देते हुए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया कि उनकी पिछली अंतरिम जमानत याचिका, इसी तरह के आधार पर अदालत द्वारा खारिज कर दी गई थी।

  • कलेक्टर श्री भीम सिंह ने जारी किया आदेश, वैवाहिक कार्यक्रम में अब 100 एवं अन्य कार्यक्रमों में 50 व्यक्तियों को शामिल होने की मिली अनुमति….

    कलेक्टर श्री भीम सिंह ने जारी किया आदेश, वैवाहिक कार्यक्रम में अब 100 एवं अन्य कार्यक्रमों में 50 व्यक्तियों को शामिल होने की मिली अनुमति….


    रायगढ़। कलेक्टर श्री भीम सिंह द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए वैवाहिक कार्यक्रम में अधिकतम 50 व्यक्तियों के सम्मिलित होने की अनुमति दी गई थी। वर्तमान में जिला रायगढ़ में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण तथा पॉजिटीव मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। अतएव उक्त आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए वैवाहिक कार्यक्रम में अब अधिकतम 100 एवं अन्य कार्यक्रमों में 50 व्यक्तियों को विभिन्न शर्तों के तहत सम्मिलित होने की अनुमति दी गई है। जिसके अंतर्गत मैरिज हॉल संचालक कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों का नाम पता एवं मोबाईल नम्बर की जानकारी रजिस्टर में संधारित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजन हेतु नियमानुसार संबंधित अनुविभाग के अनुविभागीय दण्डाधिकारी से लिखित में अनुमति लेना होगा। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्तियों को मास्क पहनना एवं समय-समय पर साबुन से हाथ धोना, सेनेटाईज करना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम के दौरान कोविड-19 के समस्त गाईड लाईन का पालन करना अनिवार्य होगा। गाईडलाईन का उल्लंघन करते पाये जाने पर भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51-60 के तहत संचालक एवं संबंधित आयोजक के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

  • श्री श्याम अखण्ड ज्योति पाठ 17 सितम्बर को, दुसरे दिन बटेगा खीर,चुरमा,चांवल सब्जी, खिचडी का भोग…

    श्री श्याम अखण्ड ज्योति पाठ 17 सितम्बर को, दुसरे दिन बटेगा खीर,चुरमा,चांवल सब्जी, खिचडी का भोग…

    खरसिया। नगर की धार्मिक संस्था श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा श्री श्याम अखण्ड ज्योति पाठ 17 सितम्बर 2021, शुक्रवार को आयोजित हैं। 18 सितम्बर को अखण्ड ज्योत जलाई जाएगी एवं खीर,चूरमा, चांवल सब्जी, खिचड़ी का प्रसाद श्याम बिहारी मंदिर में भोग के रूप में लगाया जाएगा। नगर की धार्मिक संस्था श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा भादो शुक्ल एकादशी 17 सितम्बर को दोप. 1 बजे से श्रीश्याम अखंड ज्योति पाठ एवं दुसरे दिन 18 सितम्बर को प्रातः 7ः30 बजे बाबा की ज्योत एवं उसके पश्चात दोपहर 12ः30 बजे चांवल सब्जी एवं रात्रि 7ः30 बजे बाबा के आरती के पश्चात खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा।
    श्याम कुटुम्ब के अध्यक्ष विजय अग्रवाल ने बताया कि श्याम कुटुम्ब द्वारा विगत 13 वर्षो से प्रत्येक शुक्ल पक्ष का एकादशी को श्रीश्याम अखंड ज्योति पाठ का वाचन श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा किया जाता रहा हैं। जिसके तहत 17 सितम्बर भादो शुक्ल पक्ष की ग्यारस कोे श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ श्री श्याम बिहारी मंदिर में दोप. 1 बजे से प्रारंभ किया जाएगा। जिसके मुख्य जजमान श्री राजु पटले, गोविन्द कॉलोनी होंगे। श्याम कुटुम्ब के संस्थापक मुकेश मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि बाबा श्याम के भक्तों के लिए शुक्लपक्ष की ग्यारस का दिन तो बडा ही फलदायी होता है। शुक्ल पक्ष की ग्यारस के दिन जो भी भक्त बाबा श्याम से अरदास करता है उसकी मनोकामना निश्चित रुप से पूरी होती है। श्याम पाठ के दौरान श्री श्याम पाठ में बैठने के लिए सैकडो भक्तों की व्यवस्था की गई है। रात्रि 7.30 बजे पाठ विश्राम कर आरती करने के पश्चात प्रसाद वितरण किया जावेगा । श्याम बिहारी मंदिर में गुब्बारों एवं रंग बिरंगी झालरों से मंदिर को सजाया जावेगा। श्याम पाठ में बाबा के जन्म के पश्चात सभी भक्तों को बधाईया बांटी जायेगी । दुसरेे दिन 18 सितम्बर को सुबह प्रातः 7ः30 बजे बाबा की ज्योत प्रज्वलित की जाएगी एवं आरती कर खीर,चुरमा का प्रसाद लगाया जाएगा। रात्रि 07ः30 बजे बाबा की आरती कर खीचड़ी का भोग लगाया जायेगा । श्री श्याम कुटुंब के संस्थापक मुकेश मित्तल अध्यक्ष विजय अग्रवाल, सत्यनारायण अग्रवाल, बजरंग अग्रवाल, कैलाश सपना, पूनम अग्रवाल, शंकर अग्रवाल, हरीष शर्मा, विनोद ए.आर., राजेश बंसल, मनोज बाऊ,लक्ष्मीनारायण फगुरम , कैलाश प्रेस, मनोज ऐरन, रमेश वकील,सचिन अग्रवाल, निकुंज टेंट, कन्हैया शर्मा, संदीप बरेलिया, संजय एस.आर.एम., मनोज कबुलपुरीया, रामभरोस अग्रवाल, कन्हैया शर्मा, आदि श्याम भक्त ने तन मन से लगे हुए थे।

    प्रातः 7ः30 बजे खीर चुरमा का प्रसाद
    शुक्ल पक्ष बारस के पावन अवसर पर 18 सितम्बर को श्री श्याम बिहारी मंदिर में प्रातः 07ः25 पर बाबा की ज्योति प्रज्जवलीत कर आरती करने के प्श्चात खीर चुरमा का प्रसाद श्री अंगनूराम महावीरप्रसाद एवं नरेश अग्रवाल ऐडू, विनय अग्रवाल, हमालपारा, खरसिया, श्रीमति निशा आशीष बेरीवाल, रायगढ़ के द्वारा बाबा को अर्पण कर भक्तों के बीच वितरण किया जावेगा ।

    दोपहर 12ः30 बजे से सब्जी चांवल का महाप्रसाद
    संस्था द्वारा शुक्ल पक्ष की प्रत्येक बारस को दोपहर 12ः30 बजे आरती के पश्चात चांवल सब्जी का वितरण प्रत्येक माह में किया जाना है जिसके तहत संस्था द्वारा शुक्ल बारस 18 सितम्बर को दोपहर 12ः00 बजे बाबा श्याम की भोग आरती के पश्चात श्री मंगल ट्रेडर्स द्वारा भक्तों को सब्जी चांवल का महा प्रसाद वितरण किया जावेगा ।

    रात्रि 07ः30 बजे बाबा श्याम को लगेगा खिचड़ी का भोग
    श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा संचालित श्री श्याम बिहारी मंदिर में शुक्ल पक्ष की प्रत्येक बारस को बाबा श्याम को खिचड़ी का प्रसाद लगाया जाता है उसी के तहत सुदी बारस को भी 18 सितम्बर को संध्या 07ः30 बजे बाबा श्याम की आरती के प्श्चात श्री महावीर प्रसाद सुनिलकुमार के.बी. द्वारा सभी भक्तों को खिचड़ी का प्रसाद बाटा जावेगा ।

  • 6 एएसपी हुए इधर से उधर, शासन ने किया आदेश जारी…

    6 एएसपी हुए इधर से उधर, शासन ने किया आदेश जारी…

    छत्तीसगढ़ शासन ने 6 एडिशनल एसपी का तबादला कर दिया है । जिसमें गरियाबंद मरवाही कोरिया बिलासपुर रायगढ़ रायपुर शामिल है ।

    जारी आदेश में अभिषेक वर्मा को रायगढ़ से कोरबा भेजा गया है , वहीं लखन पटले को रायपुर से रायगढ़ पदस्थ किया गया है ।