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  • बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    बिना वकील के आप खुद भी लड़ सकते हैं अपना मुकदमा, यह है प्रक्रिया

    जब कोई व्यक्ति समस्याओं से घिर जाता है तो उसे न्यायालय से ही उम्मीद रहती है। वकीलों की बेतहाशा फीस के कारण आदमी अपने किसी भी मामले को न्यायालय में ले जाने से डरता है, लेकिन कानून में इतनी गुंजाइश है कि आप न्यायालय की अनुमति से अपना केस खुद लड़ सकते हैं। अधिवक्ता अधिनियम के अंतर्गत आप बगैर अधिवक्ता हुए विधि व्यवसाय नहीं कर सकते परंतु स्वयं का मुकदमा लड़ सकते हैं, यह आपका नैसर्गिक अधिकार है। न्यायालय आपको अपना मुकदमा लड़ने से कतई निषिद्ध नहीं कर सकता। आप न्यायालय में वक़ील स्वयं की इच्छा से नियुक्त करते हैं तथा मुकदमे के लिए वक़ील पत्र पर हस्ताक्षर करके वकील को अपने मुकदमे में प्रत्येक प्रकार के अधिकार सौंपते हैं।

    कभी कभी जीवन में ऐसी परिस्थितियों का जन्म होता है जब आप को किसी आपराधिक मामलों में आरोपी बना दिया जाएं और राज्य द्वारा न्यायालय में आप पर कोई अभियोजन चलाया जा रहा है या फिर आपके किसी अधिकार के अतिक्रमण होने पर आप कोई सिविल मामला लेकर न्यायालय की शरण में जाते हैं। इनमें हर परिस्थिति में आपको वक़ील नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है, न्यायालय आपको वक़ील नियुक्त करने हेतु विवश नहीं करता। वक़ील आपकी सुविधा के लिए आप खुद नियुक्त करते हैं। भारतीय न्याय व्यवस्था बेहद तकनीकी है, जहां आपको पग पग पर वैधानिक जानकारियों की आवश्यकता होती है। इस परेशानी से व्यथित न हों, इसलिए आप न्यायालय में पैरवी के लिए वक़ील नियुक्त करते हैं। आज हम चर्चा करेंगे उन बिंदुओं पर जिनकी सहायता से आप स्वयं भी खुद के मुकदमे में पैरवी कर सकते हैं। हालांकि यह बिंदु नितांत सटीक तो नहीं परन्तु फिर भी आपको स्वयं का मुकदमा लड़ने में ज़रूर सहायता करेंगे। आपको अपना मुकदमा लड़ने के लिए केवल थोड़ा बहुत सामाजिक जानकारियों और साधारण तर्क पर ज्ञान हो और साथ ही कम से कम हिंदी भाषा में आप निपुण हों, ताकि अपनी बात को भाषा की सहायता से प्रभावी बना सकें।

    आइए जनाते हैं, क्या हैं वे बिंदु?

    बेयर एक्ट ख़रीदें- किसी भी अधिनियम पर बाज़ार में अलग अलग प्रकाशन संस्थाएं बेयर एक्ट प्रकाशित करती हैं। इनकी कीमत नाममात्र की होती है। आप बाज़ार से इन बेयर एक्ट को खरीद सकते हैं। इनकी भाषा भी कोई गूढ़ गहन नहीं होती है, परंतु उस ही शब्द को उपयोग किया जाता है जिस शब्द को विधायिका ने प्रयोग किया है।

    आपराधिक मामले में- यदि आप पर किसी आपराधिक मामले का अभियोजन चल रहा है तो आप सर्वप्रथम तीन अधिनियम की बेयर एक्ट खरीदें- भारतीय दंड संहिता 1860 दंड प्रक्रिया सहिंता 1973 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 भारतीय दंड सहिंता भारत की सीमा में अपराधों का निर्धारण करती है और उनके लिए दंड बताती है। दंड प्रक्रिया सहिंता उन अपराधों में किस प्रकिया से व्यक्ति को दंड तक ले जाया जाएगा, इसका निर्धारण करती है। साक्ष्य अधिनियम यह तय करता है कि किन साक्ष्यों को प्रकिया में शामिल किया जाएगा तथा कौन से एविडेन्स पर आरोपी को सज़ा दी जा सकती है। यह तीनों अधिनियम किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। सारा मुकदमा इन तीनों के आधार पर ही पर ही संचालित किया जाता है।

    न्यायाधीश से आज्ञा लेना- आप न्यायाधीश से आज्ञा लेकर ही स्वयं के मुकदमे में स्वयं पैरवी कर सकते हैं, परन्तु न्यायाधीश आपको वकील नियुक्त करने का परामर्श दे सकते हैं। इस पर आप कह सकते हैं कि पुलिस कार्यवाही में मुझे खुद ही पैरवी करने की अनुमति दें तथा इतना समय दें कि मैं ड्राफ्टिंग इत्यादि कर सकूं। अगर आप निरुद्ध हैं तो- यदि आप किसी आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं और पुलिस ने आपको बंदी बनाया हुआ है। संविधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत पुलिस को आपको गिरफ्तार करने के चौबीस घंटों के भीतर किसी भी क्षेत्राधिकार के न्यायालय में पेश करना होगा। जब आपको न्यायालय में पेश किया जाए तो आप पुलिस से अपनी एफआईआर की एक प्रति मांग सकते हैं। एफआईआर लेकर सबसे पहले उस घटना का विवरण पढ़ें फिर किन धाराओं में आपको निरूद्ध किया गया है यह जानकारी देखें तथा अपराध की सूचना देने वाला कौन व्यक्ति है यह नाम देखें। पुलिस की गिरफ्तारी के बाद बंदी व्यक्ति स्वयं अपनी जमानत याचिका लगा सकता है। आरोपी को सबसे पहले एफआईआर से यह मालूम करना होगा कि किन धाराओं तथा अधिनियम के अंतर्गत मुझ पर प्रकरण दर्ज किया गया है तथा वह अपराध जमानतीय है या गैरजमानती है। जमानती अपराध में मजिस्ट्रेट और पुलिस द्वारा जमानत दे दी जाती है पर गैरजमानती अपराध की सूरत में जमानत देने या नहीं देना न्यायलय के विवेक पर निर्भर करता है। न्यायालय से यह निवेदन करें कि पुलिस मुझे जमानत याचिका दाखिल करने के लिए थोड़ा समय दे। बाजार में सभी अभिवचनों के फॉर्मेट उपलब्ध होते हैं आप उन अभिवचनों को खरीद कर न्यायालय में अपनी जमानत याचिका लगा दें। याचिका बनाकर कोर्ट बाबू को दी जा सकती है, फिर मजिस्ट्रेट उस पर संज्ञान लेंगे। यदि न्यायालय आपको जमानत पर छोड़ देता है तो किसी जमानतदार के सहयोग से आप पुलिस निरूद्ध से बाहर हो सकते हैं। पुलिस निरूद्ध से बाहर होकर आप उन धाराओं, उन अधिनियम को पढ़ें जिनके अन्तर्गत आपको आरोपी बनाया गया है।

    विचारण के दरमियान- जब आप पर आरोप तय हो जाएं और पुलिस द्वारा अपना अंतिम प्रतिवेदन (चालान) प्रस्तुत कर दिया जाए तो आप गवाहों का प्रतिपरीक्षण कीजिए। आपको न्यायलय के नकल विभाग में एक एप्लिकेशन लगाने पर बोर्ड पर रखी आपके मुकदमे को फाइल में लगे पुलिस के पेश किए चालान की नकल की सत्यप्रतिलिपि प्राप्त हो जाएगी। चालान को अच्छे से पढ़ना- चालान की नकल मिलने पर आप चालान को अच्छे से पढ़िए तथा किन किन गवाहों ने क्या क्या कथन किया है। इस पर मंथन कीजिए तथा ऐसे तर्क को जन्म दीजिए, जिससे आप गवाहों के दिये कथन को अपने विरुद्ध दिए कथन को अपने पक्ष में कर लें तथा अपने खिलाफ गए गवाहों को झूठा सिद्ध कर सकें।

    सिविल मामले में- सिविल मामले में अपना मुकदमा स्वयं लड़ना अपेक्षाकृत थोड़ा सरल होता है, क्योंकि यहां हमारे पास समय रहता है तथा हम पुलिस द्वारा निरूद्ध नहीं होते हैं। किसी भी सिविल मुकदमों में यदि आपको स्वयं मुकदमा लड़ना है तो सिविल प्रक्रिया सहिंता अच्छे से समझिए और यह देखिए कि आपके किस अधिकार का अतिक्रमण हो रहा है और वह अधिकार किस अधिनियम के अंतर्गत आ रहा है। जैसे अगर कोई संविदा विधि से संबंधित मामला है तो सबसे पहले भारतीय संविदा अधिनियम देखें। कोई मामला राजस्व से संबंधित है तो अपने प्रदेश का राजस्व अधिनियम या कोड देखिए और उस पर गहन शोध करें। मामले की समस्त कार्यवाही सी पी सी के अंतर्गत ही कि संचालित की जाती है।

  • बकाया बिल नहीं चुकाने के कारण लुधियाना में काटी गयी 14 पुलिस थानों की बिजली

    बकाया बिल नहीं चुकाने के कारण लुधियाना में काटी गयी 14 पुलिस थानों की बिजली

    लुधियाना। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने लुधियाना में बकाया बिजली बिल के भुगतान नहीं होने के कारण करीब 14 पुलिस थानों की बिजली काट दी है. गौलतलब है कि पंजाब में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था PSPCL की तरफ से की जाती है. पुलिस थानों की तरफ से बिजली का बिल पिछले काफी समय से जमा नहीं किया गया था. हाल के दिनों में कंपनी की तरफ से बिजली बिल को लेकर काफी कठोर कार्रवाई की गयी है. बता दें कि पंजाब में बिजली को लेकर लगातार समस्या देखने को मिलती रही है।

    बिजली चोरी और बिल नहीं चुकाने की कई वारदात सामने आती रही हैं. कुछ ही दिन पहले मोगा स्थित घोलिया खुर्द गांव में कुछ लोगों ने एक शख्स को इस वजह से बांधकर पीटा था क्योंकि उसने बिजली चोरी करने की शिकायत की थी. न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा मिली जानकारी के अनुसार करीब 5 लोगों ने मिलकर शख्स को पीटा था. पंजाब पुलिस के मुताबिक उन्हें संदेह था कि शख्स ने बिजली चोरी की शिकायत की थी.

  • निर्भया केस: आरोपियों को फांसी की याचिका पर सुनवाई टली…अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार…अगली सुनवाई 18 को…

    निर्भया केस: आरोपियों को फांसी की याचिका पर सुनवाई टली…अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार…अगली सुनवाई 18 को…

    दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों की पेशी शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई। फांसी की सजा पर पटियाला हाउस कोर्ट में इनके डेथ वारंट पर बहस हुई। निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी की मांग वाली निर्भया की मां की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक दोषी की रिव्यू पिटीशन लंबित है उस पर फैसले का इंतजार करिए उसके बाद ही फैसला दिया जा सकता है।सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को दोपहर दो बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी।

    निर्भया की मां ने कहा- 18 दिसंबर होगी फैसले की तारीखपटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के बाद निर्भया की मां ने कहा कि हम लोग सात साल से फांसी का इंतजार कर रहे हैं और न्याय लेकर रहेंगे। जहां भी जाना पड़ेगा जाएंगे, अब पीछे नहीं हटेंगे। निर्भया की मां व उनके पिता दोनों ने कहा कि 18 दिसंबर को निर्भया के दोषियों का डेथ वारंट जारी होगा।

    17 दिसंबर को होनी है दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई

    निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले के गुनहगारों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। अक्षय ने इसके खिलाफ याचिका लगाई है।

    बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की साइट पर जारी नोटिस के मुताबिक तीन सदस्यीय पीठ 17 दिसंबर दोपहर दो बजे सुनवाई करेगी। अक्षय ने अपने वकील के जरिये दाखिल याचिका में कहा है कि प्रदूषण के कारण वैसे ही लोगों की जिंदगी कम हो रही है फिर फांसी देने की क्या जरूरत है।

    कोर्ट मामले के तीन अन्य दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका बीते साल जुलाई में खारिज कर चुका है। गौरतलब है कि इन दरिंदों ने 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल छात्रा निर्भया से दुष्कर्म कर उसकी नृशंस हत्या कर दी थी।

  • राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य बनाए जा सकते हैं गिरधारी नायक, राज्य शासन ने राजभवन भेजा प्रस्ताव

    राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य बनाए जा सकते हैं गिरधारी नायक, राज्य शासन ने राजभवन भेजा प्रस्ताव

    रायपुर। जल्द ही रिटायर्ड आईपीएस गिरधारी नायक को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिल सकती है. खबर है कि उन्हें राज्य मानवाधिकार आयोग का सदस्य बनाया जा सकता है. सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार ने उन्हें सदस्य बनाए जाने के लिए इसका प्रस्ताव राजभवन को भेजा है. राज्यपाल की मंजूरी के बाद नियुक्ति आदेश जारी किया जा सकता है।

    1983 बैच के आईपीएस अधिकारी गिरधारी नायक हाल ही में रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट के पहले नायक जेल डीजी के साथ-साथ आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. नायक सूबे के सीनियर आईपीएस अधिकारी रहे हैं. तत्कालीन सरकार में डीजी रहे ए एन उपाध्याय भी वरिष्ठता क्रम में उनके जूनियर थे. हालांकि पुलिस महकमे के ज्यादातर अधिकारी मानते हैं कि मानवाधिकार आयोग में गिरधारी नायक को सदस्य बनाया जाना, कम आंकने जैसा हैं, क्योंकि नायक डीजी स्तर के अधिकारी रहे हैं, जबकि पूर्व में राज्य का इतिहास ऐसा भी रहा है कि आईजी स्तर के रिटायर्ड अधिकारी आयोग के चेयरमेन रहे हैं।

  • देशभर में लागू हुआ नागरिकता संशोधन कानून,राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से आज से हुआ लागू

    देशभर में लागू हुआ नागरिकता संशोधन कानून,राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से आज से हुआ लागू

    गुरुवार देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन बिल 2019 को स्वीकृति दे दी है. गुरुवार देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विधेयक पर अपने दस्तखत कर दिए, जिसके बाद नागरिकता संशोधन बिल ने कानून का रूप ले लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के उच्च सदन में दोपहर 12 बजे नागरिकता संशोधन बिल को पेश किया था, जिसके बाद इस बिल पर राज्यसभा में चर्चा हुई।

    इस दौरान विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया था. विपक्षी नेताओं के सवाल के जवाब का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया था. इसके बाद राज्यसभा में यह बिल पारित हो गया था. बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग भारतीय में नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं और उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।

    आपको बता दें कि इसमें मुस्लिम शरणार्थियों को शामिल नहीं किया गया है. इसी वजह से विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है. सोमवार को लोकसभा में इस बिल को स्वीकृति मिली थी. बीते सोमवार को लोकसभा में बिल के पक्ष में 311 मत और विरोध में 80 वोट पड़े थे. विपक्ष के कुछ संशोधनों पर मत विभाजन भी हुआ था।

  • अजीबो-गरीब प्रार्थना पत्र पढ़कर थाना प्रभारी भी हुवे परेशान, जब शिकायतकर्ता ने कहा उसे रोज़ रात को जिन्न करता है परेशान साहब मदद करो मेरी

    अजीबो-गरीब प्रार्थना पत्र पढ़कर थाना प्रभारी भी हुवे परेशान, जब शिकायतकर्ता ने कहा उसे रोज़ रात को जिन्न करता है परेशान साहब मदद करो मेरी

    कन्नौज। पुलिस से अजीबो गरीब आशा करने का वायरल वीडियो आप अक्सर देखते होंगे। देख कर उन लोगो के सोच पर आपको हंसी भी आती होगी जो पुलिस को फोन करके धान कटवाने की फरमाईश कर डालते है। एक ने तो शराब दिलवाने की फरमाईश कर डाला था कि दूकानदार उसे शराब नही देता है। आज ही एक सज्जन ने एक डीवी ग्रुप में बिजली नहीं आने पर थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र तक पोस्ट कर डाला। इन अजीबो गरीब हरकतों के बाद शायद ये सबसे अजीब शिकायत रही होगी जिसमे एक ग्रामीण को आशा हुई है कि थाना प्रभारी एक जिन्न को नियंत्रित करेगे।

    जी हां, कन्नौज में तिर्वा इंस्पेक्टर के सामने बड़ा पेचीदा मामला पहुंचा है। एसडीएम ने एक ग्रामीण के प्रार्थना पत्र को उचित कार्रवाई के लिए जब इंस्पेक्टर के पास भेजा तो वह प्रार्थना पत्र पढ़कर चौंक गए। पत्र में एक ग्रामीण ने शिकायत की है कि उसे एक जिन्न रोजाना रात में परेशान करता है और शादी के लिए कहता है।

    अब एसडीएम का आदेश है कि मामले की जांच कर समस्या का निस्तारण कराया जाए। ग्रामीण की इस समस्या का निस्तारण कैसे हो इसके लिए इंस्पेक्टर भी माथापच्ची करने में जुटे हैं। तिर्वा के बहसार खितारी मौजा में रहने वाला कन्हैयालाल पुत्र प्यारेलाल मंगलवार को तिर्वा एसडीएम जयकरन के पास पहुंचा और एक प्रार्थना पत्र दिया।

    इसमें लिखा था कि प्रार्थी के खेत में काली जी का मंदिर बना है। आरोप है कि गांव के तीन युवक उसे मारते पीटते हैं और कहते हैं कि अगर काली मंदिर के पास गया तो उसे जान से मार देंगे। इसके बाद लिखा था कि उसे एक जिन्न भी परेशान करता है। जिन्न रोज रात में आता है और कहता है उससे शादी कर लो। कन्हैयालाल ने मारपीट के दोषियों पर कार्रवाई और जिन्न से छुटकारा दिलाने की मांग एसडीएम से की। इस पर एसडीएम ने इंस्पेक्टर तिर्वा को प्रार्थना पत्र भेजकर जांच कर आख्या मांग ली।

    प्रार्थना पत्र जब इंस्पेक्टर के पास पहुंचा तो वह भी चौंक गए। मारपीट के दोषियों पर कार्रवाई के लिए तो पुलिस को भेज दिया लेकिन अब समस्या यह है कि कन्हैयालाल को जिन्न से कैसे छुटकारा दिलाया जाए। इंस्पेक्टर तिर्वा ने बताया कि कन्हैयालाल ने एक शिकायत में जिन्न द्वारा परेशान किए जाने की बात कही है। कन्हैयालाल को जिन्न परेशान करता है या कोई और इसकी जानकारी की जाएगी।

  • मंदिर में किया विवाह…दो साल तक साथ रखकर बनाया शारीरिक संबंध…अब घर से निकाल दिया…और धमकी में कहा…

    मंदिर में किया विवाह…दो साल तक साथ रखकर बनाया शारीरिक संबंध…अब घर से निकाल दिया…और धमकी में कहा…

    रायपुर। मंदिर में शादी कर लगातार दो साल तक युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद अब उसे घर से निकाल देने का एक मामला सामने आया है। युवक ने साथ ही युवती को इस घटना के बारे में किसी को बताने पर या रिपोर्ट दर्ज कराने पर जान से मारने की धमकी दिया है।एक युवती के साथ मंदिर में शादी कर युवक ने दो साल तक युवती को पत्नी की तरह अपने घर में रखकर शारीरिक संबंध बनाते रहा। बाद में युवती को घर से निकाल दिया। घटना की रिपोर्ट खमतराई थाने में दर्ज की गई है।

    डब्ल्यूआरएस कॉलोनी खमतराई रायपुर निवासी पीडि़ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि 1 जनवरी 2017 से 1 नवंबर 2019 के मध्य धनुषलाल साहू निवासी डब्ल्यूआरएस कॉलोनी ने प्रार्थियां से मंदिर में विवाह कर पत्नी की तरह अपने घर में दो साल तक रखा व शारीरिक संबंध बनाते रहा। बाद में प्रार्थियां को घर से निकाल दिया व घटना के बारे में किसी को बताने पर या रिपोर्ट दर्ज कराने पर जान से मारने की धमकी दिया। घटना की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया गया है।

  • 5 IFS बनाए गए एडिशनल पीसीसीएफ, राज्य सरकार ने दी जारी किया आदेश, देखिए सूची…

    5 IFS बनाए गए एडिशनल पीसीसीएफ, राज्य सरकार ने दी जारी किया आदेश, देखिए सूची…

    रायपुर। राज्य सरकार ने मुख्य वन संरक्षक के 5 आईएफएस को पदोन्नति देकर एडिशनल पीसीसीएफ बनाया है. आनंद बाबू (1992 बैच), कौशलेंद्र कुमार (1992 बैच), वी शेट्टेपनावर (1992 बैच), आलोक कटियार (1993 बैच) और अरुण कुमार पांडेय (1994 बैच) एडिशनल पीसीसीएफ बनाए गए है.
  • IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी…..केंद्र में इस पद पर पहुंचने वाली फिलहाल छत्तीसगढ़ से इकलौती ब्यूरोक्रेट्स ….आदेश हुआ जारी…

    IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी…..केंद्र में इस पद पर पहुंचने वाली फिलहाल छत्तीसगढ़ से इकलौती ब्यूरोक्रेट्स ….आदेश हुआ जारी…

    रायपुर। IFS उमा देवी केंद्र सरकार में एडिश्नल सिकरेट्री बनायी गयी है। छत्तीसगढ़ की वो फिलहाल इकलौती अफसर हैं, जिन्हे गर्वमेंट आफ इंडिया ने एडिश्नल सिकरेट्री का पोस्ट मिला है। हालांकि इससे पहले छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अमिताभ जैन और रेणु पिल्लई एडिश्नल सिकरेट्री इम्पैनल हुई थी, लेकिन उन्हें पोस्टिंग नहीं मिली थी।1987 बैच की IFS अफसर उमा देवी की पोस्टिंग ACC यानि अपाइंटमेंट  कमेटी आफ द कैबिनेट के अप्रूवल के बाद हुई है। उमा देवी को वन एवं पर्यावरण जलवायु परिवर्तन विभाग में एडिश्नल सिकरेट्री बनाया गया है।

    उमा देवी की ये पोस्टिंग खास इसलिए है कि वो सेंट्रल में  छत्तीसगढ़ कैडर की इकलौती एडिश्नल सिकरेट्री होगी, इससे पहले सूबे IAS अफसर भी जो सेंट्रल में पोस्टेड हैं, वो भी अभी तक ज्यादातर ज्वाइंट सिकरेट्री तक ही पहुंच पाये हैं।

    उमा देवी जम्मू कश्मीर के चीफ सिकरेट्री व्हीआर सुब्रह्मण्यम की पत्नी हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने कुल 16 अफसरों के प्रमोशन लिस्ट जारी की है। उस सूची में उमा देवी छत्तीसगढ़ की इकलौती अफसर हैं।

  • जूनियर छात्रा को धमकाकर अश्लील वीडियो बनवाया..! लव मेर्रिज कर ली कॉलेज की दूसरी लड़की से.. फिर पत्नी के साथ मिलकर करने लगा जूनियर छात्रा को ब्लैकमेल.. मंगेतर को वीडियो भेज तुड़वा दी शादी भी..! आरोपी पति-पत्नी दोनों गिरफ्तार..

    जूनियर छात्रा को धमकाकर अश्लील वीडियो बनवाया..! लव मेर्रिज कर ली कॉलेज की दूसरी लड़की से.. फिर पत्नी के साथ मिलकर करने लगा जूनियर छात्रा को ब्लैकमेल.. मंगेतर को वीडियो भेज तुड़वा दी शादी भी..! आरोपी पति-पत्नी दोनों गिरफ्तार..

    भाटापारा। भाटापारा में पति-पत्नी को युवती के अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पीड़ित और दंपती तीनो एक ही कॉलेज में थे। कॉलेज टाइम में युवक ने सीनियरिटी का दबाव बनाकर छात्रा से उसके अश्लील फोटो और वीडियो मंगवाए थे। इन फोटो और वीडियो के आधार पर दंपती छात्रा को ब्लैकमेल भी कर रहा था।

    शहर थाना टीआई महेश ध्रुव और एसडीओपी बीके द्विवेदी ने इस पूरे मामले का खुलासा किया। उनके मुताबिक राजीव शर्मा ने पहले कॉलेज की जूनियर छात्रा को धमकाकर उसका अश्लील वीडियो बनवाया, फिर अपने ही कॉलेज की दूसरी छात्रा से प्रेम विवाह कर लिया। शादी के बाद उसकी पत्नी के हाथ छात्रा के अंतरंग वीडियो लग गए। इसके बाद दोनों पति-पत्नी ने उस छात्रा को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। यहां तक कि उसकी शादी जिस लड़के से तय हुई थी, उसे वीडियो भेज दिया, जिससे उसकी शादी टूट गई।

    रिपोर्ट के बाद फरार हो गया था आरोपी

    बात 2014 से 2019 बैच की है। पुराने वीडियो और फोटो के आधार पर आरोपी राजीव शर्मा व उसकी पत्नी पूर्णिमा द्वारा पीड़ित को लगातार धमकी दी जा रही थी कि वे उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे तथा उसकी कहीं शादी नहीं होने देंगे। दोनों ने पीड़ित के परिवार वालों को भी धमकी दी, जिस पर पीड़ित परिवार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट लिखे जाने के बाद राजीव शर्मा फरार हो गया था, जिसे नासिक महाराष्ट्र से मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों (पति-पत्नी) को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।