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  • खरसिया के दर्रामुड़ा में ‘MLA कप 2025’ क्रिकेट महाकुंभ का धमाकेदार आगाज़!

    खरसिया के दर्रामुड़ा में ‘MLA कप 2025’ क्रिकेट महाकुंभ का धमाकेदार आगाज़!

    खरसिया। खरसिया अंचल के ग्राम दर्रामुड़ा में आज ग्रामीण स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता—जिसे लोकप्रिय रूप से ‘MLA कप 2025’ नाम दिया गया है—का विधिवत और भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने न केवल खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह भर दिया है, बल्कि यह ग्रामीण एकता और युवा प्रतिभा को मंच देने की एक शानदार पहल बनकर उभरा है। यह प्रतियोगिता पूरी तरह से खिलाड़ियों और ग्रामवासियों की पहल पर आयोजित की जा रही है, जो इसे और भी खास बनाती है।

    भव्य शुभारंभ और अतिथियों की उपस्थिति
    प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर गाँव और क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य भुवनदास वैष्णव महाराज द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इसके बाद, मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में फीता काटकर प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने वाले प्रमुख अतिथियों में ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेश कुमार राठिया, उप-सरपंच कुश कुमार पटेल, सचिव हेमरचण डनसेना, जनपद सदस्य राजू राठिया, और वरिष्ठजन जैसे डोलनारायण नायक, गोपालदास महंत, राधेश्याम पटेल, समारू राम पटेल, ज्ञान राठिया शामिल रहे। युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए युवा नेता मुकेश पटेल, गिरीश राठिया, लव पटेल, मुरलीधर राठिया, ठंडाराम पटेल, दिनेश पटेल, इंद्रजीत जायसवाल, हरीलाल पटेल, भूषण निषाद, त्रिलोचन पटेल, तेजप्रकाश पटेल, हितेश पटेल, महेश्वर पटेल, प्रदीप वैष्णव, देवानंद पटेल, सूरज निषाद, खुशराम निषाद, कौशल पटेल, कृष्णा पटेल, अशोक निषाद, सुन्दर पटेल, नेहरू निषाद, जानकी राव भी विशेष रूप से उपस्थित थे। सभी अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में पहला मैच टॉस कराकर प्रारंभ किया गया, जिसने दर्शकों को खेल के रोमांच से जोड़ दिया। इस ग्रामीण खेल महोत्सव को देखने के लिए सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड (SEML) कंपनी के अधिकारी रतन कुमार साहू, अजित वाजपेई, मोनू यादव, कुलदीप भी विशेष रूप से दर्रामुड़ा पहुँचे थे, जो इस आयोजन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। शुभारंभ के अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ीगण और समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।

    विशाल पुरस्कार राशि : प्रेरणा का स्रोत
    यह टूर्नामेंट सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर क्रिकेट को नई पहचान देने और युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता साबित करने का एक सुनहरा अवसर है। आयोजकों—विजय पटेल, अजय निषाद और पुलकित पटेल—ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण इसकी बड़ी पुरस्कार राशि है, जो इसे आस-पास के क्षेत्रों में एक बड़ा और प्रतिस्पर्धात्मक इवेंट बनाती है। आयोजकों द्वारा घोषित पुरस्कार राशि इस प्रकार है—प्रथम पुरस्कार ₹51,001 नकद राशि, द्वितीय पुरस्कार ₹25,000 नकद राशि, तृतीय स्थान के लिए ₹12,750 नकद राशि, चतुर्थ स्थान के लिए ₹6,375 नकद राशि, इन सामूहिक पुरस्कारों के अलावा, व्यक्तिगत प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए भी सांत्वना पुरस्कार रखे गए हैं, जिनमें मैन ऑफ द सीरीज, फाइनल में मैन ऑफ द मैच, बेस्ट बॉलर, और बेस्ट बैट्समैन शामिल हैं। ये व्यक्तिगत पुरस्कार निश्चित रूप से खिलाड़ियों में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता प्रदर्शित करने की प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ाएंगे।

    सामुदायिक सहयोग और सामाजिक ज़िम्मेदारी
    आयोजन को सफल बनाने में ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के समस्त खिलाड़ीगण एवं समस्त ग्रामवासी पूरी लगन और उत्साह से जुटे हुए हैं, जो ग्रामीण सहयोग की एक उत्कृष्ट मिसाल पेश करता है। इसके साथ ही, इस भव्य आयोजन को सारडा एनर्जी कंपनी (SEML) का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है। यह सहयोग खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रति कंपनी की गहरी सामाजिक जिम्मेदारी और क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को दर्शाता है। दर्रामुड़ा का यह ‘MLA कप 2025’ क्रिकेट टूर्नामेंट ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने और पूरे अंचल में एक सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • शासन की नई ट्रेड लाइसेंस नीति व्यापारी विरोधी, व्यापारियों के खिलाफ लाएं काले कानून को सरकार वापस लें – अशोक अग्रवाल

    शासन की नई ट्रेड लाइसेंस नीति व्यापारी विरोधी, व्यापारियों के खिलाफ लाएं काले कानून को सरकार वापस लें – अशोक अग्रवाल



    खरसिया। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल (पत्रकार) खरसिया ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा व्यापारियों के विरुद्ध लाई गई नई ट्रेड लाइसेंस नीति का पुरजोर विरोध किया है साथ ही इस नीति को व्यापारियों के साथ छलावा बताया है। क्योंकि व्यापारी पहले ही अपनी दुकानों का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) शासन की नीति के अनुसार चुकाते है अब उसी दुकान का पुनः स्क्वायर फीट के हिसाब से ट्रेड लाइसेंस लेने की दोबारा क्या आवश्यकता पड़ गई। शासन द्वारा व्यापारियों से दुबारा शुल्क वसूल करना किसी भी दृष्टि से न्याय संगत नहीं है। देखा जाएं तो वर्तमान में छोटे-बड़े सभी व्यापारी मंदी की मार झेल रहे है और ऑनलाइन व्यापार ने व्यापारियों का आधा व्यापार खत्म कर दिया है ऐसे कठिन समय में सरकार को व्यापारियों के आंसू पोछने चाहिएं न की उनपर टैक्स लगाकर अनावश्यक बोझ डालना चाहिए।

    प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने साफ शब्दों में कहा है कि हम सरकार के विरोधी नही है हम विकास के साथी है किंतु अपने स्वाभिमान की कीमत पर अन्याय नही सहेंगे। इन्होंने व्यापारी जगत से आवाहन करते हुए प्रदेश स्तर जिला स्तर एवं स्थानीय स्तर पर जितने भी व्यापारिक संगठन है सबसे आग्रह किया है की एक मंच पर आकर अपनी एकता दिखाएं और शासन के इस अव्यावहारिक निर्णय का विरोध करें। ताकि शासन व्यापारियों के विरुद्ध जारी इस काले कानून को वापस लें। अग्रवाल ने प्रदेश के सभी विधायक सांसद एवं छत्तीसगढ़ शासन के लोकप्रिय मंत्रियों से भी आग्रह किया है की व्यापारियों के विरुद्ध बनाएं गए इस कानून को रद्द करवाने में सहयोग प्रदान करें।

  • चौंकाने वाला फैसला! अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा PMO – आखिर क्या है इस नाम के पीछे सरकार का नया संदेश?

    चौंकाने वाला फैसला! अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा PMO – आखिर क्या है इस नाम के पीछे सरकार का नया संदेश?

    दिल्ली। देश की प्रशासनिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर अब ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। यह बदलाव न सिर्फ नाम का परिवर्तन है, बल्कि शासन के मूल सिद्धांतों में सेवा-भावना को सर्वोच्च स्थान देने की नई सोच का संकेत भी माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस नए नाम में वह भाव समाहित है, जिसके जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय को सिर्फ एक शक्ति केंद्र नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए समर्पित स्थान के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

    सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ‘सेवा तीर्थ’ नाम कार्य-संस्कृति में सकारात्मक ऊर्जा, जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना को और प्रबल करेगा। इसके माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शासन की प्राथमिकता सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा और कल्याण है। बदलते हुए प्रशासनिक ढांचे में यह नाम एक प्रतीक की तरह उभरता है, जो भारत की नई कार्यशैली और नीतिगत दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।

    गौरतलब है कि यह परिवर्तन किसी एक कदम तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण भवनों, कार्यालयों और मार्गों के नाम बदलकर उन्हें नई सोच के अनुरूप रूपांतरित किया है। राजभवनों को ‘लोक भवन’ नाम दिया जा चुका है, वहीं प्रधानमंत्री आवास अब ‘लोक कल्याण मार्ग’ के नाम से जाना जाता है। दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ भी अब ‘कर्तव्य पथ’ बन चुका है, जो देशसेवा और उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाता है।


    नए नाम ‘सेवा तीर्थ’ के साथ PMO एक बार फिर सुर्खियों में है और इसे शासन के उस परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासन का हर कदम जनता की अपेक्षाओं और सेवा-समर्पण को केंद्र में रखकर उठाया जा रहा है। देशभर में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है, और अब सबकी निगाहें इस नई पहचान के प्रभाव पर टिकी हुई हैं।

  • अब किराए पर रहना होगा सुरक्षित! सरकार ने लागू किए Rent Agreement Rules 2025, मकान मालिक की मनमानी पर लगेगी पूरी रोक…

    अब किराए पर रहना होगा सुरक्षित! सरकार ने लागू किए Rent Agreement Rules 2025, मकान मालिक की मनमानी पर लगेगी पूरी रोक…

    देश में लाखों लोग नौकरी, पढ़ाई और आजीविका के लिए किराए के घरों में रहते हैं, लेकिन अब तक उनकी सबसे बड़ी परेशानी रही है—मकान मालिक की मनमर्जी। कभी अचानक किराया बढ़ा देना, कभी जरूरत से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगना, तो कभी बिना वजह घर खाली करने का दबाव… ऐसी शिकायतें हर शहर में सुनाई देती थीं। खासकर दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में तो किराएदार सालों से असुरक्षित महसूस कर रहे थे। लेकिन अब सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार कर दिया है।


    सरकार ने Rent Agreement Rules 2025 लागू कर दिए हैं, जिनका मकसद है—किराएदारों को मजबूत सुरक्षा देना और मकान मालिक तथा किराएदार के बीच संतुलन कायम करना। नए नियम साफ बताते हैं कि अब कोई भी मकान मालिक किराया बढ़ाने के लिए तय प्रक्रिया का पालन किए बिना कदम नहीं उठा सकता। वह साल में सिर्फ एक बार, और वह भी 12 महीने पूरे होने के बाद ही किराया बढ़ा सकेगा। इसके लिए 90 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा, ताकि किराएदार को तैयारी का समय मिल सके।

    नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि घर में किसी भी तरह की खराबी या मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। यदि वह 30 दिनों तक सुधार नहीं करवाता, तो किराएदार खुद मरम्मत करा सकता है और खर्च को किराए में एडजस्ट कर सकता है। इससे घरों की खराब स्थिति को लेकर किराएदारों की होने वाली परेशानी दूर होगी।

    सरकार ने पहली बार ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट को अनिवार्य करके विवादों की जड़ पर प्रहार किया है। अब रेंट एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर डिजिटल स्टैंप और ऑनलाइन रजिस्टर्ड दस्तावेज उपलब्ध कराना जरूरी होगा। इससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या दबाव बनाने की गुंजाइश कम हो जाएगी।

    सबसे बड़ा बदलाव सिक्योरिटी डिपॉजिट में किया गया है। अब मकान मालिक दो महीने से अधिक का सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले पाएंगे, जबकि कमर्शियल संपत्तियों के लिए यह सीमा छह महीने तय की गई है। यदि कोई मकान मालिक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता, तो राज्यों के हिसाब से पांच हजार रुपये से शुरू होने वाला जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा मकान मालिक किराएदार के कमरे में तभी प्रवेश कर सकता है, जब वह कम से कम 24 घंटे पहले लिखित सूचना दे।

    लेकिन सबसे बड़ी राहत यह है कि अब किराएदार को घर से निकालना आसान नहीं होगा। किसी भी परिस्थिति में मकान मालिक अपने स्तर पर किराएदार को नहीं हटा सकता। यह अधिकार सिर्फ Renter Tribunal के पास होगा। अगर मकान मालिक जबरन निकालने, धमकाने, बिजली–पानी काटने या किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    Rent Agreement Rules 2025 ने किराए पर रहने वाले करोड़ों लोगों को नई सुरक्षा, नई राहत और नए भरोसे का एहसास दिलाया है। यह कदम न सिर्फ किराएदारों को सशक्त करेगा, बल्कि रेंट सिस्टम को भी ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बनाएगा। अब किराए पर रहना मजबूरी नहीं, बल्कि सुरक्षित और नियमों से संचालित व्यवस्था का हिस्सा होगा।

  • PMO का नया नाम हुआ ‘सेवातीर्थ’, यहां सबकुछ होगा हाईटेक, मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला…

    PMO का नया नाम हुआ ‘सेवातीर्थ’, यहां सबकुछ होगा हाईटेक, मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला…

    प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर अब सेवातीर्थ कर दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) जल्द ही साउथ ब्लॉक के अपने पुराने दफ्तर से निकलकर नए ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो जाएगा। यह बड़ा बदलाव दशकों बाद हो रहा है। नया PMO ‘सेवा तीर्थ-1’ से काम करेगा, जो एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में बनी तीन नई आधुनिक इमारतों में से एक है।

    इसी कॉम्प्लेक्स की ‘सेवा तीर्थ-2’ और ‘सेवा तीर्थ-3’ इमारतों में कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) का ऑफिस होगा। यह शिफ्टिंग शुरू हो चुकी है और 14 अक्टूबर को कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों के साथ ‘सेवा तीर्थ-2’ में एक अहम मीटिंग भी की थी। यह नया कॉम्प्लेक्स सरकारी कामकाज को और तेज बनाएगा और भारत सरकार के काम करने के तरीके में एक नया अध्याय लिखेगा।

    जानें ‘सेवा तीर्थ’ से जुड़ी बड़ी बातें
    यह नया ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स वायु भवन के पास एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में बनाया गया है। इसमें तीन शानदार इमारतें हैं। इनमें से पहली इमारत, ‘सेवा तीर्थ-1’, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नया घर बनेगी। यह साउथ ब्लॉक से दशकों बाद हो रहा एक बड़ा बदलाव है।
    बाकी दो इमारतें, ‘सेवा तीर्थ-2’ और ‘सेवा तीर्थ-3’, भी इसी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा हैं। ‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सेक्रेटेरिएट का दफ्तर होगा। यह वो जगह है जहां सरकार के बड़े फैसले लिए जाते हैं। ‘सेवा तीर्थ-3’ में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) का ऑफिस होगा। NSA देश की सुरक्षा से जुड़े अहम मामलों को देखते हैं।
    यह शिफ्टिंग का काम अब शुरू हो गया है। हाल ही में, 14 अक्टूबर को, कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने एक महत्वपूर्ण मीटिंग की थी। इस मीटिंग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे। यह मीटिंग ‘सेवा तीर्थ-2’ में हुई थी, जो दिखाता है कि काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
    यह नया ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स बहुत आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां सब कुछ हाई-टेक होगा। इससे सरकारी कामकाज में और भी तेजी आएगी। यानी, फाइलें जल्दी निपटेंगी और फैसले भी तेजी से होंगे।
    प्रधानमंत्री कार्यालय का साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ में जाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह सिर्फ एक जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार के काम करने के तरीके में एक नया अध्याय शुरू करेगा। यह दिखाता है कि सरकार आधुनिकता की ओर बढ़ रही है और कामकाज को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।

  • रायपुर में 60वें DGP/IGP सम्मेलन का दूसरा दिन 11 घंटे तक चला…

    रायपुर में 60वें DGP/IGP सम्मेलन का दूसरा दिन 11 घंटे तक चला…

    रायपुर। रायपुर में आयोजित 60वें अखिल भारतीय DGP/IGP सम्मेलन का दूसरा दिन बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण रहा। सुबह शुरू हुई बैठक लगातार 11 घंटे तक चली और देर शाम संपन्न हुई। इस दौरान देशभर के शीर्ष पुलिस अधिकारी, पैरामिलिट्री फोर्सेस के कमांडर और केंद्रीय नेतृत्व सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर एकजुट होकर चर्चा करते दिखे।

    सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उपस्थित रहकर अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक में BSF, CRPF, ITBP, CISF समेत अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने अपने हालिया अभियान और नई रणनीतियों पर प्रस्तुति दी।

    सीमा सुरक्षा और एंटी-नक्सल ऑपरेशंस पर विशेष चर्चा
    सम्मेलन में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने—

    एंटी-नक्सल ऑपरेशन,

    पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े सीमा राज्यों की सुरक्षा,

    सुरक्षा बलों की तैनाती,

    भविष्य की सुरक्षा योजनाएं

    जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी, आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों की मदद से सुरक्षा मजबूत की जा रही है।

    पुलिस सुधार, रणनीति और अपराध नियंत्रण पर मंथन
    बैठक में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, विभिन्न राज्यों में अपराध नियंत्रण, सामरिक योजना और पुलिस सुधारों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।
    इसका उद्देश्य—

    देश के सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करना,

    बलों की कार्यक्षमता बढ़ाना,

    और आने वाले समय में चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर रणनीति बनाना रहा।

    आतंकवाद, नक्सलवाद और साइबर अपराध मुख्य फोकस
    सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन में इस वर्ष—

    आतंकवाद,

    नक्सलवाद,

    सीमा सुरक्षा,

    साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए सफल अभियानों की जानकारी साझा की और प्रशिक्षण एवं क्षमता सुधार से जुड़े सुझाव भी प्रस्तुत किए।

    बैठक के बाद पीएम मोदी IIM से रवाना
    बैठक के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी IIM नवा रायपुर से निकलकर विधानसभा अध्यक्ष के नए आवास की ओर रवाना हुए। अधिकारियों के अनुसार सम्मेलन में हुई चर्चा आगामी समय में देश की सुरक्षा नीतियों और रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी।

    सम्मेलन का महत्व
    यह 60वां अखिल भारतीय DGP/IGP सम्मेलन देश के सुरक्षा ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
    यह मंच—

    पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय,

    पारदर्शिता,

    सामरिक दृष्टिकोण
    के साथ देश की सुरक्षा नीतियों को नई दिशा देता है।

    सम्मेलन के दूसरे दिन की चर्चा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की रणनीति तय करने का केंद्र बिंदु बनी, जो आने वाले अभियानों के लिए बेहद उपयोगी रहने वाली है।

  • डिजिटल अरेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI देशभर में करेगी डिजिटल अरेस्ट केस की जांच…

    डिजिटल अरेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI देशभर में करेगी डिजिटल अरेस्ट केस की जांच…

    डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच CBI करेगी, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है, इसलिए डिजिटल अरेस्ट स्कैम से संबंधित दर्ज मामलों की जांच CBI करेगी. कोर्ट ने जांच के लिए CBI को विशेष अधिकार दिया है. जहां भी साइबर अपराध में उपयोग किए गए बैंक खातों का पता चलता है, वहां संबंधित बैंकरों की जांच करने के लिए CBI को पूर्ण स्वतंत्रता होगी.

    बैंकरों की भूमिका की जांच का आदेश

    CJI सूर्यकांत ने CBI को अधिक अधिकार देते हुए CBI को (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) PCA के तहत उन बैंकों के बैंकरों की भूमिका की जांच करने की पूरी आजादी दी, जहां ऐसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मकसद से अकाउंट खोले गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर रिजर्व बैंक (RBI) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि रिजर्व बैंक कोर्ट की मदद करे, ताकि फ्रॉड करने वाले अकाउंट की पहचान हो सकते और अपराध की कमाई को फ्रीज किया जा सके.

    अथॉरिटीज को सहयोग करने के निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिजर्व बैंक बताए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या मशीन लर्निंग कब लागू की जाएगी? सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि IT इंटरमीडियरी रूल्स 2021 के तहत अथॉरिटीज CBI को पूरा सहयोग देंगी. जिन राज्यों ने CBI को मंज़ूरी नहीं दी है, वे अपने अधिकार क्षेत्र में IT एक्ट 2021 की जांच के लिए मंजूरी दें, ताकि CBI पूरे देश में बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सके. SC ने कहा कि CBI जरूरत पड़ने पर इंटरपोल अधिकारियों से भी मदद ले सकती है।

    टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को भी निर्देश

    SC ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स एक ही नाम पर SIM या कई SIM जारी करने के मामले में टेलीकॉम डिपार्टमेंट से एक प्रपोजल जमा करने को कहा, ताकि सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए आदेश जारी किया जा सके. राज्य सरकारें साइबर क्राइम सेंटर जल्दी स्थापित करें और अगर कोई रुकावट आए तो राज्य SC को बताएं. IT नियमों के तहत अधिकारियों को निर्देश जाए कि वे बरामद सभी फोन का डेटा स्टोर करें.

    SC ने सभी राज्यों और UT को निर्देश दिया है कि जहां भी IT एक्ट 2021 के तहत FIR दर्ज की जाती है, सभी CBI को सौंपे जाएं. 2 हफ्ते बाद मामले में अगली सुनवाई होगी।

  • आदिवासी गोंड़ समाज ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की 1675 वीं जयंती मनायी…

    रायपुर बंजारी। विगत दिनों रायपुर के बंजारी धाम में आदिवासी गोंड़ समाज ने विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी आदिवासी परंपरा के अनुसार आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की 1675 वीं जयंती मनायी। इस अवसर पर आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की प्रतिमा की पूजा अर्चना कर तथा प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. राम विजय शर्मा इतिहासकार एवं पुरातत्व वेता रायपुर भारत ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की जीवनी तथा उनकी रचनाओ के बारे में विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने नें बताया की आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्म 15 नवंबर 350 ईस्वी को मृगाडाँड़ में हुवा था। उनके पिता का नाम शिव दास पंडो तथा माता का नाम तारा देवी था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मृगाडाँड़ में प्राप्त की तथा बाद में वाराणसी में 6 वर्षों तक संस्कृत का अध्ययन किया उस समय वाराणसी संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। वाराणसी से लौटने के पश्चात मृगाडाँड़ के रामगढ़ पहाड़ी के एक गुफा में बैठकर ऋतुसंहार, मेघदूत तथा अभिज्ञानशाकुन्तलम कुल 3 ग्रंथों की रचना की। इन ग्रंथों की रचना के पश्चात उनकी ख्याति देश विदेश में फैल गयी और उनकी ख्याति सुन कर चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य नें अपने राजदरबार में पाटलीपुत्र बुलाया तथा अपने दरबार के नवरत्नों में प्रथम स्थान दे कर सम्मानित किया। उनकी रचनाओं में प्रकृति पर जोर, मौखिक कहानियों, पौराणिक कथाओं तथा प्रतीकवाद पर जोर दिया गया है जो सर्वत्र दिखता है और ये सभी तत्व आदिवासी संस्कृति के मूल तत्व है। गुप्त राजदरबार में रहकर अन्य ग्रंथों की रचना की जिनपर राजसी प्रभाव परिलक्षित होता है अपने ग्रंथों में राजदरबार के कुटिल माहौल तथा चाटुकारिता का भी वर्णन किया है। बाद में चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक राजा रुद्रसेन‌द्वितीय से विवाह किया तो कालिदास जी को साथ में उनके सलाह तथा मार्गदर्शन के लिए वाकाटको की राजधानी नागपूर भेज दिया गया । प्रभावती गुप्ता के दोनों पुत्रों दिवाकर सेन और दामोदर सेन की शिक्षा कालिदास द्वारा दी गयी। बाद में दामोदर सेन (प्रवर सेन ‌द्वितीय) जब वाकाटक राजा बने तो कालिदास उनके दरबार की शोभा बढ़ाए तथा उन्हे मार्गदर्शन तथा सलाह दिया। प्रवर सेन द्वितीय ने “सेतु बंध” नामक प्राकृत ग्रंथ लिखा तो कालिदास जी ने ही उसे लिखवाया तथा संशोधित किया। प्रवर सेन द्वितीय का शासनकाल 420 ई. से 455 ई. तक था। इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता बंजारी के उपसरपंच थनवार ध्रुव ने किया, उन्होंने बताया कि हम सभी आदिवासी समाज महाकवि कालिदास पंडो के बताए मार्गों पर चलेंगे। उन्होंने आगे बताया कि कालिदास काली की पूजा करते थे। हर आदिवासी के घर में काली कंकाली की पूजा होती है तथा उनका स्थान रहता है। हमारे पूर्वज बताते थे कि कालिदास हमारे आदिवासी समाज के हैं। इस अवसर पर देव कुमार ध्रुव, घनश्याम ध्रुव, देवेन्द्र ध्रुव, तरुण ध्रुव सहित ग्रामीण जनता उपस्थित थे ।

  • अब सिम के बिना नहीं चलेगा वॉट्सऐप और टेलीग्राम, सरकार की नई गाइडलाइन लागू, साइबर ठगी रोकने केंद्र सरकार का बड़ा फैसला…

    अब सिम के बिना नहीं चलेगा वॉट्सऐप और टेलीग्राम, सरकार की नई गाइडलाइन लागू, साइबर ठगी रोकने केंद्र सरकार का बड़ा फैसला…

    केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते साइबर अपराध और फर्जी खातों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब वॉट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को अनिवार्य सिम बाइंडिग लागू करनी होगी। साथ ही, वेब और डेस्कटॉप वर्जन का उपयोग करने वाले यूजर्स को हर 6 घंटे में स्वतः लॉग-आउट किया जाएगा।

    सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक यूजर का मैसेजिंग अकाउंट उसके भौतिक सिम कार्ड से स्थायी रूप से जुड़ा रहेगा। यानी यदि कोई व्यक्ति आपके रजिस्टर्ड सिम के बिना किसी दूसरे डिवाइस से वॉट्सऐप या टेलीग्राम अकाउंट को एक्सेस करने की कोशिश करेगा, तो यह प्रक्रिया असंभव हो जाएगी।

    अब तक वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे ऐप्स केवल एक ओटीपी वेरिफिकेशन के आधार पर चलते थे। इससे सिम कार्ड बदलने, क्लोनिंग या नंबर हैकिंग की स्थिति में अकाउंट के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती थी।नई व्यवस्था से यूजर की पहचान और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी, जिससे फर्जी अकाउंट, साइबर ठगी और अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकेगी।

    नई गाइडलाइन के अनुसार, अब कोई भी यूजर छह घंटे से अधिक समय तक लगातार वेब या डेस्कटॉप वर्जन पर लॉग-इन नहीं रह सकेगा। हर छह घंटे बाद यूजर को स्वचालित रूप से लॉग-आउट कर दिया जाएगा।दोबारा लॉग-इन करने के लिए यूजर को क्यूआर कोड स्कैन करना होगा या पासवर्ड डालना पड़ेगा।इस कदम का उद्देश्य किसी अनधिकृत कंप्यूटर या नेटवर्क पर लंबे समय तक अकाउंट के सक्रिय रहने को रोकना है, जिससे डेटा चोरी या हैकिंग की घटनाएं घटेंगी।वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम देश के डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए उठाया गया है। सिम बाइंडिंग जैसी तकनीक फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी के मामलों को कम करने में मदद करेगी।

    नया सिम या मोबाइल बदलने पर वेरिफिकेशन प्रक्रिया और सख्त होगी।एक ही अकाउंट को कई डिवाइस पर चलाना कठिन होगा,सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन यूजर्स को बार-बार लॉग-इन करना पड़ सकता है।सरकार का यह फैसला डिजिटल भारत को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब वॉट्सऐप या टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर खाता चलाने के लिए सक्रिय सिम लिंकिंग जरूरी होगी।

  • आर्थोपेडिक डॉक्टर को गिरफ्तारी से राहत, HC से अग्रिम जमानत मंजूर…

    आर्थोपेडिक डॉक्टर को गिरफ्तारी से राहत, HC से अग्रिम जमानत मंजूर…

    बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2018 में दुर्ग जिले के भिलाई नगर थाने में दर्ज दुष्कर्म मामले में पुणे के एक आर्थोपेडिक सर्जन को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने पाया कि पुलिस जांच सात वर्षों तक लंबी खिंची, और इस दौरान डॉक्टर को कोई नोटिस भी जारी नहीं किया गया।एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मार्च 2017 में भिलाई और 12 अप्रैल 2017 को पुणे के एक होटल में डॉक्टर ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए।

    इस शिकायत पर धारा 376 आईपीसी के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान डॉक्टर की ओर से पेश वकील ने कहा कि शिकायत झूठी है। उन्होंने अस्पताल के हेड ऑफ डिपार्टमेंट द्वारा प्रमाणित उपस्थिति रेकॉर्ड पेश किए, जिनसे साबित होता है कि डॉक्टर कथित घटनाओं के पूरे समय पुणे में ड्यूटी पर थे। वकील ने यह भी तर्क दिया कि जांच को एफआईआर तक पहुंचने में 19 माह की देरी हुई। इसमें कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है, जिससे आरोपों की विश्वसनीयता कमजोर हो जाती है।

    सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने पुलिस से मिली रिपोर्ट पर गंभीर टिप्पणी की। डीजीपी की ओर से जमा की गई रिपोर्ट में बताया गया कि मामले की जांच में देरी के लिए पुलिसकर्मियों के दिए गए स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए गए। तीन जांच अधिकारियों को ‘चरित्र दोष’ की सजा दी गई और आईजी दुर्ग रेंज को वरिष्ठ पर्यवेक्षक अधिकारी की भूमिका की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 27 नवंबर 2025 को जब शिकायतकर्ता को बुलाने का नोटिस भेजा गया, तो एसएचओ को उसका घर खाली मिला और केवल फोन पर संपर्क किया जा सका। कोर्ट ने कहा कि सात साल की देरी का दोष अभियुक्त पर नहीं डाला जा सकता।

    इसलिए डॉक्टर की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार की जाती है। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आवेदक को व्यक्तिगत बांड और समान राशि की एक जमानतदार पेश करने पर रिहा किया जाए।डॉक्टर ने अदालत को आश्वासन दिया है कि उसके पास मौजूद व्हाट्सऐप चैट और वॉयस रिकॉर्डिंग वह फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराएंगे।