Blog

  • सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने पर होगी कार्यवाही, जानिये किस-किस नियम के उल्लंघन के लिए क्या-क्या है दंड….

    सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने पर होगी कार्यवाही, जानिये किस-किस नियम के उल्लंघन के लिए क्या-क्या है दंड….

    रायपुर। कोरोना वायरस (CovID-19) के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम हेतु सोशल डिस्टेंसिंग/ फिजिकल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन के लिए राज्य सरकार द्वारा गाइड लाइन जारी किया जा चुका है. अब कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी भारती दासन ने  एपिडेमिक डिसीज एक्ट, 1897 के सेक्शन 02 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश दिया है कि इन नियमों का पालन नहीं करने पर अर्थदण्ड लगाया जाएगा. जो कि निम्नानुसार है…

    सार्वजनिक स्थानों पर मास्क या अन्य तरीकों से चेहरा नहीं ढका पाये जाने पर अर्थदण्ड अधिकतम 100/- रू.

    सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर अर्थदण्ड अधिकतम 100/- रू.

    सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक विचरण अथवा सोशल डिस्टेंसिंग/फिजिकल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का उल्लंघन पाये जाने पर अर्थदण्ड प्रति व्यक्ति 200/- रू.

    दो चक्का वाहनों पर एक से अधिक सवारी पाये जाने पर अर्थदण्ड अधिकतम 200/- रू.

    चार चक्का वाहनों में ड्राईवर के पिछली सीट पर एक अतिरिक्त सवारी हो सकती है, इसके अतिरिक्त सवारी होने पर अथवा सामने की सीट पर सवारी होने पर अर्थदण्ड अधिकतम 200/- रू.

    छूट प्राप्त दुकानों/संस्थानों के द्वारा मास्क का उपयोग नहीं करने पर एवं उनके द्वारा अनावश्यक विचरण अथवा सोशल डिस्टेंसिंग/फिजिकल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का उल्लंघन पाये जाने पर प्रथम बार अर्थदण्ड अधिकतम 500/- रू. दूसरी बार अर्थदण्ड अधिकतम 1000/- रू. इसके बाद भी पुनरावृत्ति होने पर दुकान संचालन की छूट समाप्त कर दी जायेगी.

    इसके साथ ही इन अर्थदण्ड के अतिरिक्त विभिन्न प्रभावी अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत अन्य वैधानिक कार्यवाही भी की जाएगी.

  • अमेरिका में इंसानों के साथ पालतू जानवरों में तेजी से फैल रहा कोरोना, प्रशासन हैरान

    अमेरिका में इंसानों के साथ पालतू जानवरों में तेजी से फैल रहा कोरोना, प्रशासन हैरान

    दिल्ली। क़ोरोना वायरस अभी तक इंसानों की जान का दुश्मन बना बैठा था लेकिन अब इसने जानवरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। अमेरिका में इसके तेजी से मामले सामने आ रहे हैं।

    दरअसल, पूरी दुनिया जहां कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है। वहीं हर रोज इस वायरस का नया तांडव सामने आ जाता है। कोरोना वायरस ने इटली और स्पेन के बाद सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में मचा रखी है। अमेरिका में लगातार हजारों की तादाद में नए मामले सामने आ रहे हैं। खास बात ये है कि यहां न केवल इंसान बल्कि कोरोना ने अब पालतू जानवरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरु कर दिया है। इससे प्रशासन सकते में आ गया है।
    दरअसल, अमेरिका के न्यूयॉर्क में दो पालतू बिल्लियां कोरोना वारयस से पॉजिटिव पाई गई हैं। इसके पहले न्यूयार्क के चिड़ियाघर में टाइगर कोरोना वायरस से पीड़ित पाया गया था। अमेरिका में पहला ऐसा केस है, जहां पालतू जानवरों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों पालतू बिल्लियां एक ही परिवार से नहीं है। हालांकि इस बात के सामने आने से लोगों में परेशानी का माहौल है। अब पालतू जानवरों में इसके फैलने से प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है।

  • जान की परवाह ना करते हुए जरूरी सेवा में लगे लोगों को मिलेगी ये सुविधा,यहां कर सकेंगे नि:शुल्क आयकर रिटर्न फाइल

    जान की परवाह ना करते हुए जरूरी सेवा में लगे लोगों को मिलेगी ये सुविधा,यहां कर सकेंगे नि:शुल्क आयकर रिटर्न फाइल

    रायपुर। लॉकडाउन के चलते संकट की इस घड़ी में लोगों के सहयोग के लिए कई हाथ सामने आ रहे हैं। मजदूर, गरीब परिवार एवं बाहर फंसे लोगों का सहयोग तो किया ही जा रहा है, वहीं अपनी जान की परवाह ना करते हुए जरूरी सेवा में लगे राज्य के सुरक्षाकर्मी, चिकित्साकर्मियों, मीडिया वाले ,छोटे व्यापारी  के साथ अन्य सेवा में लगे लोगों के लिए गुरूदेव टेक्स एण्ड एकाउंटिंग सर्विसेस की टीम ने मदद के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। टीम ने इनकी आयकर रिटर्न फ़ाइल नि:शुल्क करने का फैसला किया है।

    लॉकडाउन में जहां एक तरफ़ हम अपने घरों में सुरक्षित बैठें हैं वहीं दूसरी तरफ़ हमारे राज्य के सुरक्षाकर्मी,चिकित्साकर्मी और मीडिया वाले अपनी जान की परवाह ना करते हुए सेवा कार्य में लगे हुए हैं। रायपुर स्थित गुरूदेव टेक्स एण्ड एकाउंटिंग सर्विसेस की टीम ने इनकी मदद के लिए एक अनोखी पहल की है।

    गुरूदेव टेक्स एण्ड एकाउंटिंग सर्विसेस के संचालक मोहित जैन ने बताया कि वो इनके लिए अपनी सभी सेवाएं नि:शुल्क देना चाहते हैं। जो भी सुरक्षाकर्मी,चिकित्साकर्मी ,मीडिया वाले या अन्य सेवा में लगे लोग अपना आयकर रिटर्न फ़ाइल करवाना चाहते हैं उनका रिटर्न नि:शुल्क फ़ाइल किया जाएगा।

    उन्होंने आगे कहा कि गर्मी और कोरोना को ध्यान में रखते हुए लोगों की सुविधा के लिए वाट्सएप और ईमेल के माध्यम से भी सेवा दी जाएगी। जरूरत पढऩे पर हमारे टीम के एक्सपर्ट उनके ऑफि़स या कार्य क्षेत्र में जाकर भी सेवा देंगे। इसके साथ ही कोरोना के कारण आर्थिक संकट झेल रहे छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए भी सेवा शुल्क में राहत देना का निर्णय टीम ने लिया है।कोरोना योद्धा के रुप में काम कर रहे लोग मोबाइल नंबर 9009466660,9039466660 पर संपर्क कर या फिर  gurudevservices09@gmail.com

    पर मेल कर निशुल्क सुविधा का लाभ ले सकतें हैं.

  • सोनिया गांधी पर अभद्र टिप्पणी से घिरे अर्नब को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, FIR पर तीन हफ्तों तक नहीं होगी कार्रवाई

    सोनिया गांधी पर अभद्र टिप्पणी से घिरे अर्नब को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, FIR पर तीन हफ्तों तक नहीं होगी कार्रवाई

    दिल्ली। रिपब्लिक न्यूज चैनल के संपादक अर्नब गोस्वामी के सोनिया गांधी पर टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता अर्नब गोस्वामी और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वालों का पक्ष जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को तीन हफ्ते की अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाई, तीन हफ्तों के दौरान अर्नब अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगा सकते हैं.सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस डॉ डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने की. सुप्रीम कोर्ट ने तमाम पक्षों को सुनने के बाद अर्नब के खिलाफ नागपुर में दर्ज एफआईआर को छोड़कर तमाम राज्यों में दर्ज कराए गए एफआईआर पर रोक लगा दी. नागपुर में दर्ज एफआईआर मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया है. इसके अलावा पीठ ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को अर्नब गोस्वामी के साथ रिपब्लिक टीवी को सुरक्षा मुहैया कराने निर्देशित कियाइसके पहले याचिकाकर्ता अर्नब गोस्वामी की ओर से दलील पेश करने मुकुल रोहतगी पेश हुए, वहीं महाराष्ट्र की ओर से कपिल सिब्बल, छत्तीसगढ़ की ओर से विवेक तनखा, राजस्थान की ओर से मनीष सिंघवी समेत कुल 8 वकील जिरह के लिए मौजूद रहे. इस पर जज ने पूछा एक नए मामले के लिए इतने वकील क्यों आए हैं.
    मुकुल रोहतगी ने पालघर घटना के बारे में बताते हुए कहा कि पुलिसवालों की मौजूदगी में हत्या हुई. अर्नब ने इस पर 45 मिनट का शो किया. कुछ चुभते हुए सवाल किए. पूछा कि कांग्रेस अध्यक्ष अल्पसंख्यकों की हत्या पर बोलती हैं, लेकिन साधुओं की हत्या पर चुप हैं। जवाब में कई राज्यों में एफआईआर करवा दी।
    रोहतगी ने कांग्रेस नेताओं के ट्वीट के साथ-साथ अर्नब और उनकी पत्नी पर हुए हमले का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सभी जगह दर्ज एफआईआर की भाषा एक जैसी है. साफ है कि योजनाबद्ध तरीके से उन्हें परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा इसकी रक्षा की है. साधुओं की हत्या से साधुओं में और हिंदू समुदाय में गुस्सा है. पत्रकार के तौर पर इसे बताना कैसे गलत है? राजनीतिक दल की चुप्पी पर सवाल उठाना कैसे गलत है?
    कपिल सिब्बल ने जिरह शुरू करते हुए अर्नब का बयान पढ़ कर सुनाते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की बातें अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में नहीं आ सकतीं।
    रोहतगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ से नोटिस भी आ चुका है कि अर्नब वहां पेश हों. मेरे क्लाइंट को इन एफआईआर के मामले में राहत दी जाए. कोर्ट यह भी साफ करे कि मानहानि का मुकदमा सिर्फ सीधे प्रभावित कर सकता है।
    इस पर सिब्बल ने कहा कि एफआईआर दर्ज हुआ है. पुलिस को काम करने दिया जाए. देखेंगे कि मामला बनता है या नहीं. ऐसे एफआईआर रद्द नहीं हो सकता. कन्हैया कुमार केस में भी जांच हुई थी, तो इसमें क्यों नहीं? ज़्यादा से ज़्यादा सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि एक जगह जांच हो, लेकिन एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता. उन्होंने दलील दी कि यह ऐसा मामला नहीं जिसमें अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से दखल मांगा जाए।
    इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कई राज्यों में एफआईआर हुआ है. निश्चित रूप से अनुच्छेद 32 का मामला बनता है, जहां सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जा सकती है. इस पर सिब्बल ने दलील दी कि तब भी एफआईआर रद्द करने या जमानत देने जैसा आदेश नहीं दिया जाना चाहिए।
    राजस्थान के वकील मनीष सिंघवी ने कहा कि 153A और 153A गंभीर गैर-जमानती धाराएं हैं. पुलिस को जांच से नहीं रोका जा सकता. छत्तीसगढ़ के वकील विवेक तन्खा ने कहा कि ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सांप्रदायिक उन्माद फैलाया जा रहा है. इन्हें कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए।
    तन्खा ने कहा कि लाखों लोग इनके बयानों से प्रभावित हुए हैं. इस पर अर्नब के वकील रोहतगी ने कहा कि सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता इससे प्रभावित हुए हैं. साधुओं की हत्या पर जब देश गुस्से में था, तो एक पार्टी की चुप्पी पर सवाल क्यों न उठे? क्यों न इस चुप्पी को मिलीभगत माना जाए?
    इस पर कोर्ट ने कहा कि हम सभी FIR में किसी भी तरह की कार्रवाई पर फिलहाल दो हफ्ते की रोक लगा देते हैं. तब तक याचिकाकर्ता अपनी अर्जी में संशोधन करें. सभी एफआईआर को एक साथ जोड़े जाने की प्रार्थना करें. फिर आगे सुनवाई होगी. एक ही मामले की जांच कई जगह नहीं हो सकती।
    मुकुल रोहतगी ने इस पर तर्क दिया कि नागपुर में दर्ज एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर किया जाए. अर्नब पर हुए हमले की भी साथ में जांच की जाए. हमारे दफ्तर को भी सुरक्षा दी जाए।

  • लॉकडाउन में वाहन चालकों से वसूली में जुटी पुलिस, नाराज पार्षद थाने के बाहर धरने पर बैठे, टीआई के आश्वासन पर बनी बात…

    लॉकडाउन में वाहन चालकों से वसूली में जुटी पुलिस, नाराज पार्षद थाने के बाहर धरने पर बैठे, टीआई के आश्वासन पर बनी बात…

    रायपुर। लॉकडाउन के दौरान वाहन चालकों से पुलिस वसूली से नाराज वार्ड पार्षद थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए. पुलिस कर्मी को सस्पेंड करने की मांग पर अड़े पार्षद को मनाने के लिए महापौर और अन्य वार्डों के पार्षद भी पहुंचे, लेकिन थाना प्रभारी के कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही पार्षद ने धरना समाप्त किया।

    दरअसल, वाहन चालकों का पुलिस कर्मियों द्वारा जबरदस्ती चालान काटे जाने की शिकायत पर देवेंद्र नगर पार्षद बंटी होरा बात करने पहुंचे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी बात नहीं सुनी. इस पर पार्षद देवेंद्र नगर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
    पार्षद होरा ने आरोप लगाया कि हॉस्पिटल जाने वाले, राशन लेने जा रहे गरीबों पर पुलिस जबरदस्ती चलानी कार्रवाई कर रही है।

    पार्षद के धरने पर बैठने की बात सुनकर महापौर एजाज ढेबर और कुछ पार्षद उन्हें मनाने पहुंचे. लेकिन पार्षद पुलिसकर्मी को सस्पेंड नहीं किए जाने तक धरने पर बैठे रहने की जिद पर अड गए.
    महापौर एजाज ढेबर और पार्षद बंटी होरा ने एसएसपी आफिस पहुँचकर पुलिस कर्मी की शिकायत भी की है. एसएसपी आरिफ शेख ने पुलिस कर्मी पर जाँच के बाद उचित कार्रवाई करने का दिया आश्वाशन दिया है।

    आखिरकार देवेंद्रनगर थाना प्रभारी एनके बंछोर ने पार्षद को धरने से उठने के लिए निवेदन करते हुए पुलिस कर्मी को आज ही सस्पेंड कराने का आश्वाशन दिया।

  • शाम को बस के साथ रवाना होंगे कोटा से छात्रों को लाने दो नोडल अधिकारी…

    शाम को बस के साथ रवाना होंगे कोटा से छात्रों को लाने दो नोडल अधिकारी…

    रायपुर। राजस्थान के कोटा में फंसे बच्चों को वापस छत्तीसगढ़ के रायपुर लाने के लिए राज्य सरकार ने दो नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है. रायपुर डिप्टी कलेक्टर मुकेश कोठारी और नायाब तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू को नोडल अधिकारी बनाया गया है.छत्तीसगढ़ के करीब 3 हजार छात्र कोटा में फंसे हैं।

    जिन्हें लाने के लिए करीब 80 बसों को राजस्थान के कोटा के लिए रायपुर से शाम को रवाना किया जाएगा। इसके बाद मजदूरों को भी वापस अपने राज्य लाने की बात मुख्यमंत्री ने कही है।

    सुबह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा था कि लाॅकडाउन के कारण राजस्थान के कोटा में फंसे विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ लाने के लिए बस भेजी जा रही है. विद्यार्थियों को जल्द छत्तीसगढ़ लाया जाएगा. इसके साथ ही प्रदेश से बाहर फंसे हर नागरिक, चाहे वे पढ़ने गए बच्चे हों, पर्यटक हों या फिर श्रमिक सभी को वापस लाने की बात कही थी. केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार इन्हें वापस लाने का इंतज़ाम किया जाएगा।

  • देश का पहला राज्य जहां वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालतें करेंगी मुकदमों की सुनवाई….

    देश का पहला राज्य जहां वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालतें करेंगी मुकदमों की सुनवाई….

    दिल्ली। देश के सबसे बड़े सूबे यानि उत्तर प्रदेश में अब अदालतों में सभी मुकदमों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की जाएगी। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

    इस बारे में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह से सुरक्षित एवं निर्बाध है। यह तैयारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए की गई है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अलग से संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ी। उपलब्ध संसाधनों से ही सॉफ्टवेयर तैयार कर यह सुविधा सभी कोर्ट में शुरू कर दी गई है। इस सेवा को पूरे प्रदेश की सभी कोर्ट में लागू करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।

    दरअसल, उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है यहां रोजाना लाखों मुकदमों की सुनवाई की जाती है। अब लॉकडाउन के दौरान हाईकोर्ट और जिला अदालतों में मुकदमों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से करने का निर्णय लिया गया है। अभी तक राज्य में जो व्यवस्था लागू थी उसमें सीमित मुकदमों की सुनवाई ही हो सकती थी। नई व्यवस्था में इसका व्यापक उपयोग हो सकेगा और प्रदेश की ज्यादातर कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई अब वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की जा सकेगी।

  • कोरोना का कहरः भारत में कब और कैसे खत्म होगा लॉकडाउन, एक्सपर्ट की राय!

    कोरोना का कहरः भारत में कब और कैसे खत्म होगा लॉकडाउन, एक्सपर्ट की राय!

    जब कोरोना अपने पीक पर होगा तो लॉकडाउन का क्या होगा? ये वो सवाल हैं, जिनका जवाब हर देशवासी जानना चाहता है. मगर ये सवाल जितने आसान हैं, जवाब उतने ही पेचीदा. देश और दुनिया के तमाम एक्सपर्ट और वैज्ञानिकों की नज़र भी इसी सवाल पर है, पर जवाब अलग-अलग तरीक़े से सामने आ रहे हैं.

    तीन मई के बाद भारत में क्या होगा?

    क्या 3 मई के बाद लॉकडाउन ख़त्म हो जाएगा?

    दो चरणों में 40 दिनों के लिए भारत बंद है. भारत बंद की फिलहाल आखिरी तारीख 3 मई है. पर तीन मई के बाद क्या होगा? क्या 3 मई के बाद लॉकडाउन खत्म हो जाएगा और भारत खुल जाएगा? तो इस सवाल का जवाब आप जानें उससे पहले एक अहम जानकारी. देश और दुनिया के तमाम एक्सपर्टस ये कह रहे हैं कि भारत में कोरोना की असली तस्वीर अप्रैल के आखिर और मई के पहले दो-तीन हफ्ते में सामने आएगी. शायद इस दौरान कोरोना अपने पीक पर होगा. तो जब कोरोना अपने पीक पर होगा तो लॉकडाउन का क्या होगा? ये वो सवाल हैं, जिनका जवाब हर देशवासी जानना चाहता है. मगर ये सवाल जितने आसान हैं, जवाब उतने ही पेचीदा. देश और दुनिया के तमाम एक्सपर्ट और वैज्ञानिकों की नज़र भी इसी सवाल पर है. पर जवाब अलग-अलग तरीक़े से सामने आ रहे हैं।

    भारत में जुलाई के बाद हटेगा लॉकडाउन?
    अमेरिका की बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप यानी बीसीजी ने जॉन हॉप्किंस यूनिवर्सिटी से मिले डेटा के आधार पर दुनिया के 20 देशों का ये कोराना चार्ट तैयार किया है. इसके मुताबिक चीन को छोड़कर किसी भी देश में जुलाई से पहले लॉकडाउन हटने वाला नहीं है. और अगर हटता है तो हालात बिगड़ सकते हैं. रही बात चीन की तो जिस हुबेई प्रांत में कोरोना का सबसे ज़्यादा असर हुआ. और जिस प्रांत में कोरोना का एपिसेंटर वुहान है. वो इसी सूबे में पड़ता है. यहां 8 अप्रैल को लॉकडाउन खुलने का अनुमान लगाया गया था. और हुआ भी यही. चीन ने हुबेई में वुहान को छोड़कर 8 अप्रैल को लॉकडाउन हटा दिया. क्योंकि यहां उसके बाद कोरोना के मामले ही आने बंद हो गए थे. मगर दुनिया के प्रेशर और चीन में मौत के आंकड़ों पर उठ रहे सवाल के बाद यहां अचानक करीब 1300 मौत के आंकड़े दर्ज किए गए।


    बीसीजी ऐसा अनुमान लगा रही है कि भारत में ये लॉकडाउन जून के आखिरी हफ्ते से लेकर सितंबर के दूसरे हफ्ते तक चल सकता है. इसके बाद भी हालात की संवेदनशीलता को ही देखकर भारत सरकार को ये लॉकडाउन हटाना या उसमें रियायत देने का फैसला लेना होगा. मगर इससे पहले लॉकडाउन हटाना भारत के लिए मुश्किल भरा फैसला हो सकता है. क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो भारत में कोरोना पॉज़िटिव केसेज़ की बाढ़ सी आ जाएगी और देश के मौजूदा मेडिकल सिस्टम के हिसाब से इसे संभाल पाना मुश्किल होगा


    बीसीजी ने ये अनुमान भारत में कोरोना के संक्रमण के फैलने के अब तक के डेटा के आधार पर लगाया है. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर ये रिपोर्ट बता रही है कि देश में कोरोना की पीक पर कब पहुंचेगा. कब यहां आंशिक तौर पर लॉकडाउन हटाया जा सकता है और कब भारत पूरी तरह से लॉकडाउन हटाने की स्थिति में होगा।
    बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप यानी बीसीजी के चार्ट की मानें तो किस देश में कब लॉक डाउन किया गया. कब वहां कोरोना के मामले पीक पर पहुंचे. कब वहां आंशिक तौर पर लॉकडाउन को हटाना शुरु किया गया और कब कहां लॉकडाउन को पूरी तरह से हटाना सुरक्षित माना गया. इसमें इन सब का अनुमान लगाया गया है. इस चार्ट के मुताबिक जिस देश में मौजूदा वक्त में कोरोना के मामले पीक पर हैं उनमें अभी सिर्फ इटली है. जहां ये मामले 2 लाख के आंकड़े को छूने वाले हैं।
    हालांकि उसकी आबादी के लिहाज़ से काफी मामले हैं. वहीं यूएस, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी और यूके जहां कोरोना सबसे ज़्यादा तबाही मचा रहा है. वहां भी अभी कोरोना अपनी पीक पर नहीं पहुंचा है. यहां अप्रैल के आखिरी हफ्ते और मई के तीसरे हफ्ते तक ये मामले अपनी पीक पर पहुंच सकते हैं।
    बीसीजी के मुताबिक भारत ने कोरोना से निपटने के लिए जिस तरह वक्त रहते लॉकडाउन की घोषणा की उससे उसने इस बीमारी से निपटने के लिए कुछ वक्त ज़रूर खरीद लिया है. मगर बावजूद इसके भारत में कोरोना के मामले पीक पर ज़रूर पहुंचेंगे. और इस रिपोर्ट के मुताबिक जून के तीसरे हफ्ते तक भारत में कोरोना के मामले अपनी पीक पर होंगे. और जून के आखिरी हफ्ते तक ही भारत लॉकडाउन हटाने की स्थिति में होगा।
    मगर वो भी सिर्फ आंशिक तौर पर. जबकि हिंदुस्तान में पूरी तरह से लॉकडाउन हटाना सितंबर के दूसरे हफ्ते के बाद ही मुमकिन हो पाएगा. हालांकि भारत को कोरोना से पूरी तरह से आज़ादी पाने में ये पूरा साल भी गुज़र सकता है. हां मगर उससे पहले वैक्सीन आ गई तो ये बहुत बड़ी कामयाबी होगी।

  • विधायक अजीत जोगी की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महुआ का समर्थन मूल्य 17 से बढ़ाकर 30 रुपये किलो किया

    विधायक अजीत जोगी की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महुआ का समर्थन मूल्य 17 से बढ़ाकर 30 रुपये किलो किया

    छत्तीसगढ़ सरकार ने महुआ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 17 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलो कर दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने इसकी घोषणा की। उल्लेखनीय है कि महुआ के समर्थन मूल्य को बढ़ाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने शासन से मांग की थी।

    वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि महुआ का समर्थन मूल्य कम है जबकि खुले मार्केट में इसकी कीमत ज्यादा है। जिसके कारण महुआ बीनने वालों की परेशानियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने फौरन इसके समर्थन मूल्य को 13 रुपये और बढ़ाने की घोषणा की।

    बता दें कि छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री एवं मरवाही के विधायक अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर शासन द्वारा महुआ का समर्थन मूल्य मात्र 17 रुपये निर्धारित किए जाने व महुआ संग्राहकों के साथ अव्यवहारिक एवं गलत निर्णय है। महुआ का समर्थन मूल्य तत्काल 40 रुपये किया जाना चाहिए क्योंकि 17 रुपए की कीमत बाजार मूल्य से भी आधे से कम कीमत है। उन्होंने बकायदा पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश का उदाहरण भी दिया था जहां इस वर्ष महुए का समर्थन मूल्य 35 रुपये प्रति किलो पर दिया गया है। महुआ की कीमत में शुरु हुई राजनीति पर विराम लगाते हुए राज्य सरकार ने इसकी कीमत को तत्काल बढ़ाते हुए 30 रुपये किलो कर दिया है।

    आदिवासियों की आय का प्रमुख स्रोत

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के वनांचल क्षेत्र के अलावा गांव-गांव में आदिवासियों द्वारा बड़ी मात्रा में महुआ फूल एकत्रित किया जाता है जो कि इनके आय का प्रमुख स्रोत है। स्थानीय स्तर पर हर साल लगभग 30 से 40 करोड़ रूपये के महुए का संग्रहण होता है। इस साल मौसम की मार के कारण महुआ का उत्पादन कम होगा। जिससे बाजार में नया महुआ 40 रुपये किलो तक है तथा इसका भाव और तेज होने की संभावना है।

  • छत्तीसगढ़ में हुआ रिपब्लिक टीवी के संपादक और पत्रकार अर्णव गोस्वामी पर गैरजमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज…

    छत्तीसगढ़ में हुआ रिपब्लिक टीवी के संपादक और पत्रकार अर्णव गोस्वामी पर गैरजमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज…

    रायपुर। रिपब्लिक टीवी के संपादक और पत्रकार अर्णव गोस्वामी के ख़िलाफ़ राजधानी की सिविल लाइन पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। शिकायतकर्ता के रुप में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव और प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम आज सिविल लाईंस थाने पहुँचे। उनके आवेदन के आधार पर थाना प्रभारी सुशांत बैनर्जी ने यह FIR दर्ज की है।
    पत्रकार अर्णव गोस्वामी के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने धारा 153 (क),295 (क), और धारा 505 की धाराओं में अपराध क्रमांक 176/2020 दर्ज किया है।
    यह धाराएं धर्म के आधार पर विद्वेष बढ़ाने, धर्म जाति के आधार पर कटुता फैलाने के मामले में प्रभावी होती हैं। ये धाराएँ ग़ैर ज़मानती हैं।
    पत्रकार अर्णव गोस्वामी ने अपने टीव्ही शो में कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को लेकर टिप्पणी की थी। जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी नाराजगी व्यक्त की थी।