कोरबा। कोरबा शहर के पास स्थित एक फार्म हाउस में ट्रिपल मर्डर से पूरा जिला दहल उठा है। बीती रात कबाड़ कारोबारी अशरफ मेमन, एक स्थानीय युवक और बिलासपुर के एक युवक की गला घोटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। फार्म हाउस मृतक अशरफ मेमन का बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मौके से मिले सुरागों के आधार पर तीन संदिग्धों को देर रात ही हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ जा रही है। फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।
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कबाड़ व्यवसायी अशरफ मेमन सहित ट्रिपल मर्डर की सनसनीखेज वारदात से कोरबा में फ़ैली दहशत…पुलिस मौके पर, तीन संदिग्ध हिरासत में…
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₹9 करोड़ दें और अमेरिका की नागरिकता लेंः डोनाल्ड ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा आज से शुरू, प्लैटिनम कार्ड भी जल्द शुरू होगा
अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया ट्रंप गोल्ड कार्ड वीजा लॉन्च कर दिया है। इसके तहत ₹9 करोड़ देकर कोई भी अमेरिका की नागरिकता ले सकते है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार (अमेरिकी समयानुसार) को व्हाइट हाउस में व्यापारिक नेताओं की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित “ट्रंप गोल्ड कार्ड” वीजा कार्यक्रम का आधिकारिक रूप से शुभारंभ किया। कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.8 करोड़ रुपए) है। हालांकि कंपनियों को कार्ड के लिए 2 मिलियन डॉलर देना होगा।
ट्रम्प ने इसी साल फरवरी में ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया था। हालांकि उस वक्त उन्होंने इसकी कीमत 5 मिलियन डॉलर (42 करोड़ रुपए) रखी थी। सितंबर में इसे घटाकर 1 मिलियन डॉलर किया गया।
कार्ड के लॉन्च की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह “कुछ हद तक ग्रीन कार्ड जैसा है, लेकिन ग्रीन कार्ड की तुलना में इसके कई बड़े फायदे हैं। ट्रंप का कहना है कि यह अमेरिका फर्स्ट एजेंडे का हिस्सा है, जो टॉप टैलेंट (जैसे भारत-चीन से पढ़े स्टूडेंट्स) को रोकने और कंपनियों को अमेरिका लाने के लिए है। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा, “यह दुनिया के सफल उद्यमियों को आकर्षित करेगा।” वहीं ट्रम्प का प्लैटिनम कार्ड भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसकी फीस करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपए) है।
ट्रम्प बोले- सिर्फ टैलेंटेड लोगों को वीजा देंगे
गोल्ड कार्ड की अनलिमिटेड रेसीडेंसी में नागरिकों को सिर्फ पासपोर्ट और वोट देने का अधिकार नहीं मिलता, बाकी सारी सुविधाएं एक अमेरिकी नागरिक के जैसी मिलती हैं। यह प्रक्रिया उसी तरह होगी, जैसे ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी निवास मिलता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह वीजा प्रोग्राम खास तौर पर धनी विदेशियों के लिए है, ताकि वे 1 मिलियन डॉलर देकर अमेरिका में रहते हुए काम कर सकें। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका सिर्फ टैलेंटेड लोगों को ही वीजा देगा, न कि ऐसे लोगों को जो अमेरिकियों की नौकरियां छीन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस रकम का इस्तेमाल टैक्स को घटाने और सरकारी कर्ज चुकाने में किया जाएगा।सारा पैसा अमेरिकी सरकार के पास जाएगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहा कि मेरे और मेरे देश के लिए बेहद खुशी की बात है कि हमने अभी-अभी ट्रंप गोल्ड कार्ड लॉन्च किया है। वेबसाइट लगभग 30 मिनट में खुल जाएगी और सारा पैसा अमेरिकी सरकार के पास जाएगा… यह कुछ हद तक ग्रीन कार्ड जैसा है, लेकिन ग्रीन कार्ड से कहीं ज़्यादा फायदेमंद है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनियां किसी भी संस्थान में जाकर कार्ड खरीद सकेंगी और उस व्यक्ति को अमेरिका में रख सकेंगी… किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति को अपने देश में लाना एक तोहफा है, क्योंकि हमें लगता है कि कुछ ऐसे प्रतिभाशाली लोग होंगे जिन्हें अन्यथा यहां रहने की अनुमति नहीं मिलती। कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्हें भारत, चीन या फ्रांस वापस जाना पड़ता है… कंपनियां बहुत खुश होंगी। -

रेल हादसे पर बड़ी कार्रवाई : हटाए गए DRM बिलासपुर, इस अधिकारी को बनाया गया नया डीआरएम, अन्य अधिकारी पर भी जल्द गिर सकती है गाज…..
बिलासपुर। बीते दिनों बिलासपुर में हुए रेल हादसे पर बड़ा एक्शन हुआ है। DRM बिलासपुर राजमल खोईवाल हटा दिए गए हैं। अब उनकी जगह उमेश कुमार नए DRM होंगे। उमेश कुमार का तबादला वेस्टर्न रेलवे से SECR में हुआ है रेल हादसे के बाद बड़ा फेरबदल किया गया है। डायरेक्टर रेलवे बोर्ड ने यह आदेश जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक बड़े अधिकारी पर भी जल्द गाज गिर सकती है।
बता दें कि एक माह पहले चार नवंबर को कोरबा-बिलासपुर लोकल मेमू अप लाइन पर खड़ी कोयला लोड मालगाड़ी से टकराई थी। इस हादसे में 12 यात्रियों की मौत हुई थी और 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे। इस हादसे के कारण रेलवे को भी करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था।
मामले की जांच करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन दक्षिण पूर्व सर्किल – कोलकाता के रेल सुरक्षा आयुक्त बीके मिश्रा ने रेल हादसे की जांच की। उन्होंने घटना स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण करते हुए तीन दिन तक इलेट्रिकल ओपी, इलेक्ट्रकल, एसएंडटी, मैकेनिकल, सीएंडडब्लू सहित अन्य विभाग के अफसरों व कर्मचारियों से पूछताछ की थी। सीआरएस ने प्रारंभिक रिपोर्ट में रेल हादसे का बड़ा कारण अप्रशिक्षित चालक को बताया है।
रेल प्रशासन की गलती के कारण हुआ हादसा
हादसे के 20 दिन बाद सीआरएस मिश्रा ने मामले की मुख्य अभियुक्त मेमू की असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज से केन्द्रीय रेलवे हॉस्पिटल में जाकर घटना के संबंध में दो घंटे तक चर्चा की थी। सोमवार की रात रेल सुरक्षा आयुक्त मिश्रा ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट एसईसीआर जोन मुख्यालय और डिवीजन को भेज दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि लोकल ट्रेन के हादसे की पूरी गलती रेल प्रशासन की है। विभाग ने चालक को साइको टेस्ट में पास नहीं होने के बाद भी यात्री ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। अगर यात्री ट्रेन की कमान किसी को देना था तो उसे सायकोलोजिकल टेस्ट पास चालक को दिया जाना था। रेल प्रशासन की गलती के कारण यह हादसा हुआ है, जिसे सुधार करने की आवश्यकता है।
रेल सेफ्टी आयुक्त ने अफसरों को दिए सुझाव
हादेस के लिए रेल सेफ्टी आयुक्त ने रेल प्रशासन के अलावा चालक को जिम्मेदार ठहराया है। आगामी दिनों में इस तरह की कोई घटना न हो सके, इसके लिए विशेष सुझाव भी रेल प्रशासन के अफसरों को दिया है, जिसमें ट्रेन परिचालन सुगम बनाने तथा अन्य उपकरणों द्वारा दर्ज किए गए इवेंट्स से मिलान करने के लिए सभी मानिटरिंग और रिकार्डिंग उपकरणों की घड़ियों को जीपीएस समय से स्वतः समन्वित करने कहा गया है।
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कैंसर पर आख़िरी वार? शरीर को मिलेगी ‘सुपर पावर’, वैज्ञानिकों की नई वैक्सीन से जगी करोड़ों उम्मीदें…
कैंसर… एक ऐसा नाम जो सुनते ही मरीज और परिवार दोनों की सांसें थम जाती हैं। अब तक इस गंभीर बीमारी से लड़ाई का मतलब था कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी कठिन प्रक्रियाएं, जिनमें इलाज के साथ-साथ शरीर को भारी कीमत भी चुकानी पड़ती थी। लेकिन अब मेडिकल साइंस की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कैंसर मरीजों के चेहरे पर नई उम्मीद की मुस्कान ला दी है। वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो बाहर से हमला नहीं करेगी, बल्कि शरीर की अपनी ताकत को ही कैंसर के खिलाफ खड़ा कर देगी।
यह नई तकनीक mRNA कैंसर वैक्सीन पर आधारित है, जो उसी सिद्धांत पर काम करती है जिस पर कोविड-19 की वैक्सीन बनी थी। अमेरिका की बिंघैमटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर युआन वान और उनकी रिसर्च टीम पिछले कई वर्षों से इस दिशा में काम कर रही है। उनका मानना है कि अगर इम्यून सिस्टम को यह सिखा दिया जाए कि कैंसर कोशिकाएं कैसी दिखती हैं, तो शरीर खुद ही उन्हें दुश्मन समझकर खत्म कर सकता है।
कोविड वैक्सीन ने हमारे शरीर को वायरस के स्पाइक प्रोटीन से पहचान करवाई थी। ठीक उसी तरह यह mRNA कैंसर वैक्सीन कैंसर कोशिकाओं को मजबूर करती है कि वे अपनी सतह पर एक ऐसा खास प्रोटीन दिखाएं, जिसे इम्यून सिस्टम पहले से ही खतरे के रूप में पहचानता है। जैसे ही यह प्रोटीन कैंसर सेल पर आता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तुरंत सक्रिय हो जाती है और उन कोशिकाओं पर जोरदार हमला शुरू कर देती है।
कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि ट्यूमर समय के साथ अपना रूप बदलते रहते हैं। इसी वजह से कई बार इलाज बेअसर हो जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि यह नई तकनीक इस समस्या का भी समाधान कर सकती है। चाहे कैंसर कोशिका कितनी भी बदल जाए, उसे अपनी सतह पर वही खास प्रोटीन दिखाना पड़ेगा। इससे इम्यून सिस्टम हमेशा उसे पहचानती रहेगी और हमला जारी रहेगा।
इस पूरे प्रोसेस में बेहद सूक्ष्म नैनोपार्टिकल्स की अहम भूमिका है। ये कण सीधे ट्यूमर कोशिकाओं तक पहुंचते हैं, खासकर उन कैंसर में जहां HER2 नामक प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। ये नैनोपार्टिकल्स mRNA को सीधे कैंसर सेल के अंदर पहुंचाते हैं, जिससे वह खतरनाक प्रोटीन बनाने लगती है और खुद ही इम्यून सिस्टम के निशाने पर आ जाती है। कोविड महामारी के बाद अधिकतर लोगों के शरीर में स्पाइक प्रोटीन की इम्यून मेमोरी पहले से मौजूद है, जिससे इस वैक्सीन की प्रतिक्रिया और भी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल यह तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है। शुरुआती नतीजे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन आम मरीजों तक पहुंचने से पहले बड़े स्तर पर सुरक्षा परीक्षण और उत्पादन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ सही दिशा में आगे बढ़ा, तो आने वाले वर्षों में कैंसर के इलाज की परिभाषा ही बदल सकती है।
मेडिकल साइंस से जुड़े जानकार इसे सिर्फ एक नई दवा नहीं, बल्कि इलाज की सोच में क्रांति मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में यही mRNA तकनीक न सिर्फ कैंसर, बल्कि कई अन्य गंभीर और जानलेवा बीमारियों के इलाज में भी नई राह खोलेगी। कैंसर के अंधेरे में यह खबर एक उजली किरण की तरह है, जो बताती है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि जीत के रास्ते अब और साफ दिखने लगे हैं। -

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब कृषि भूमि पर घर बनाने के लिए अब नहीं कराना होगा डायवर्सन…
छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन डायवर्सन प्रक्रिया को लेकर बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब भूमि के उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए एसडीएम से अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद अब जमीन का उपयोग किसी भी प्रयोजन के लिए किया जा सकेगा।
नए नियमों के तहत कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए अलग से डायवर्सन की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान रूप से लागू होगी। सरकार का यह निर्णय छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नियम पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे लागू करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
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खरसिया के दर्रामुड़ा में ‘MLA कप 2025’ क्रिकेट महाकुंभ का धमाकेदार आगाज़!
खरसिया। खरसिया अंचल के ग्राम दर्रामुड़ा में आज ग्रामीण स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता—जिसे लोकप्रिय रूप से ‘MLA कप 2025’ नाम दिया गया है—का विधिवत और भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने न केवल खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह भर दिया है, बल्कि यह ग्रामीण एकता और युवा प्रतिभा को मंच देने की एक शानदार पहल बनकर उभरा है। यह प्रतियोगिता पूरी तरह से खिलाड़ियों और ग्रामवासियों की पहल पर आयोजित की जा रही है, जो इसे और भी खास बनाती है।
भव्य शुभारंभ और अतिथियों की उपस्थिति
प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर गाँव और क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य भुवनदास वैष्णव महाराज द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इसके बाद, मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में फीता काटकर प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने वाले प्रमुख अतिथियों में ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेश कुमार राठिया, उप-सरपंच कुश कुमार पटेल, सचिव हेमरचण डनसेना, जनपद सदस्य राजू राठिया, और वरिष्ठजन जैसे डोलनारायण नायक, गोपालदास महंत, राधेश्याम पटेल, समारू राम पटेल, ज्ञान राठिया शामिल रहे। युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए युवा नेता मुकेश पटेल, गिरीश राठिया, लव पटेल, मुरलीधर राठिया, ठंडाराम पटेल, दिनेश पटेल, इंद्रजीत जायसवाल, हरीलाल पटेल, भूषण निषाद, त्रिलोचन पटेल, तेजप्रकाश पटेल, हितेश पटेल, महेश्वर पटेल, प्रदीप वैष्णव, देवानंद पटेल, सूरज निषाद, खुशराम निषाद, कौशल पटेल, कृष्णा पटेल, अशोक निषाद, सुन्दर पटेल, नेहरू निषाद, जानकी राव भी विशेष रूप से उपस्थित थे। सभी अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में पहला मैच टॉस कराकर प्रारंभ किया गया, जिसने दर्शकों को खेल के रोमांच से जोड़ दिया। इस ग्रामीण खेल महोत्सव को देखने के लिए सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड (SEML) कंपनी के अधिकारी रतन कुमार साहू, अजित वाजपेई, मोनू यादव, कुलदीप भी विशेष रूप से दर्रामुड़ा पहुँचे थे, जो इस आयोजन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। शुभारंभ के अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ीगण और समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।
विशाल पुरस्कार राशि : प्रेरणा का स्रोत
यह टूर्नामेंट सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर क्रिकेट को नई पहचान देने और युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता साबित करने का एक सुनहरा अवसर है। आयोजकों—विजय पटेल, अजय निषाद और पुलकित पटेल—ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण इसकी बड़ी पुरस्कार राशि है, जो इसे आस-पास के क्षेत्रों में एक बड़ा और प्रतिस्पर्धात्मक इवेंट बनाती है। आयोजकों द्वारा घोषित पुरस्कार राशि इस प्रकार है—प्रथम पुरस्कार ₹51,001 नकद राशि, द्वितीय पुरस्कार ₹25,000 नकद राशि, तृतीय स्थान के लिए ₹12,750 नकद राशि, चतुर्थ स्थान के लिए ₹6,375 नकद राशि, इन सामूहिक पुरस्कारों के अलावा, व्यक्तिगत प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए भी सांत्वना पुरस्कार रखे गए हैं, जिनमें मैन ऑफ द सीरीज, फाइनल में मैन ऑफ द मैच, बेस्ट बॉलर, और बेस्ट बैट्समैन शामिल हैं। ये व्यक्तिगत पुरस्कार निश्चित रूप से खिलाड़ियों में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता प्रदर्शित करने की प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ाएंगे।
सामुदायिक सहयोग और सामाजिक ज़िम्मेदारी
आयोजन को सफल बनाने में ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के समस्त खिलाड़ीगण एवं समस्त ग्रामवासी पूरी लगन और उत्साह से जुटे हुए हैं, जो ग्रामीण सहयोग की एक उत्कृष्ट मिसाल पेश करता है। इसके साथ ही, इस भव्य आयोजन को सारडा एनर्जी कंपनी (SEML) का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है। यह सहयोग खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रति कंपनी की गहरी सामाजिक जिम्मेदारी और क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को दर्शाता है। दर्रामुड़ा का यह ‘MLA कप 2025’ क्रिकेट टूर्नामेंट ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने और पूरे अंचल में एक सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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शासन की नई ट्रेड लाइसेंस नीति व्यापारी विरोधी, व्यापारियों के खिलाफ लाएं काले कानून को सरकार वापस लें – अशोक अग्रवाल
खरसिया। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल (पत्रकार) खरसिया ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा व्यापारियों के विरुद्ध लाई गई नई ट्रेड लाइसेंस नीति का पुरजोर विरोध किया है साथ ही इस नीति को व्यापारियों के साथ छलावा बताया है। क्योंकि व्यापारी पहले ही अपनी दुकानों का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) शासन की नीति के अनुसार चुकाते है अब उसी दुकान का पुनः स्क्वायर फीट के हिसाब से ट्रेड लाइसेंस लेने की दोबारा क्या आवश्यकता पड़ गई। शासन द्वारा व्यापारियों से दुबारा शुल्क वसूल करना किसी भी दृष्टि से न्याय संगत नहीं है। देखा जाएं तो वर्तमान में छोटे-बड़े सभी व्यापारी मंदी की मार झेल रहे है और ऑनलाइन व्यापार ने व्यापारियों का आधा व्यापार खत्म कर दिया है ऐसे कठिन समय में सरकार को व्यापारियों के आंसू पोछने चाहिएं न की उनपर टैक्स लगाकर अनावश्यक बोझ डालना चाहिए।
प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने साफ शब्दों में कहा है कि हम सरकार के विरोधी नही है हम विकास के साथी है किंतु अपने स्वाभिमान की कीमत पर अन्याय नही सहेंगे। इन्होंने व्यापारी जगत से आवाहन करते हुए प्रदेश स्तर जिला स्तर एवं स्थानीय स्तर पर जितने भी व्यापारिक संगठन है सबसे आग्रह किया है की एक मंच पर आकर अपनी एकता दिखाएं और शासन के इस अव्यावहारिक निर्णय का विरोध करें। ताकि शासन व्यापारियों के विरुद्ध जारी इस काले कानून को वापस लें। अग्रवाल ने प्रदेश के सभी विधायक सांसद एवं छत्तीसगढ़ शासन के लोकप्रिय मंत्रियों से भी आग्रह किया है की व्यापारियों के विरुद्ध बनाएं गए इस कानून को रद्द करवाने में सहयोग प्रदान करें। -

चौंकाने वाला फैसला! अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा PMO – आखिर क्या है इस नाम के पीछे सरकार का नया संदेश?
दिल्ली। देश की प्रशासनिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर अब ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। यह बदलाव न सिर्फ नाम का परिवर्तन है, बल्कि शासन के मूल सिद्धांतों में सेवा-भावना को सर्वोच्च स्थान देने की नई सोच का संकेत भी माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस नए नाम में वह भाव समाहित है, जिसके जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय को सिर्फ एक शक्ति केंद्र नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए समर्पित स्थान के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ‘सेवा तीर्थ’ नाम कार्य-संस्कृति में सकारात्मक ऊर्जा, जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना को और प्रबल करेगा। इसके माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शासन की प्राथमिकता सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा और कल्याण है। बदलते हुए प्रशासनिक ढांचे में यह नाम एक प्रतीक की तरह उभरता है, जो भारत की नई कार्यशैली और नीतिगत दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
गौरतलब है कि यह परिवर्तन किसी एक कदम तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण भवनों, कार्यालयों और मार्गों के नाम बदलकर उन्हें नई सोच के अनुरूप रूपांतरित किया है। राजभवनों को ‘लोक भवन’ नाम दिया जा चुका है, वहीं प्रधानमंत्री आवास अब ‘लोक कल्याण मार्ग’ के नाम से जाना जाता है। दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ भी अब ‘कर्तव्य पथ’ बन चुका है, जो देशसेवा और उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाता है।
नए नाम ‘सेवा तीर्थ’ के साथ PMO एक बार फिर सुर्खियों में है और इसे शासन के उस परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासन का हर कदम जनता की अपेक्षाओं और सेवा-समर्पण को केंद्र में रखकर उठाया जा रहा है। देशभर में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है, और अब सबकी निगाहें इस नई पहचान के प्रभाव पर टिकी हुई हैं। -

अब किराए पर रहना होगा सुरक्षित! सरकार ने लागू किए Rent Agreement Rules 2025, मकान मालिक की मनमानी पर लगेगी पूरी रोक…
देश में लाखों लोग नौकरी, पढ़ाई और आजीविका के लिए किराए के घरों में रहते हैं, लेकिन अब तक उनकी सबसे बड़ी परेशानी रही है—मकान मालिक की मनमर्जी। कभी अचानक किराया बढ़ा देना, कभी जरूरत से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगना, तो कभी बिना वजह घर खाली करने का दबाव… ऐसी शिकायतें हर शहर में सुनाई देती थीं। खासकर दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में तो किराएदार सालों से असुरक्षित महसूस कर रहे थे। लेकिन अब सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार कर दिया है।
सरकार ने Rent Agreement Rules 2025 लागू कर दिए हैं, जिनका मकसद है—किराएदारों को मजबूत सुरक्षा देना और मकान मालिक तथा किराएदार के बीच संतुलन कायम करना। नए नियम साफ बताते हैं कि अब कोई भी मकान मालिक किराया बढ़ाने के लिए तय प्रक्रिया का पालन किए बिना कदम नहीं उठा सकता। वह साल में सिर्फ एक बार, और वह भी 12 महीने पूरे होने के बाद ही किराया बढ़ा सकेगा। इसके लिए 90 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा, ताकि किराएदार को तैयारी का समय मिल सके।नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि घर में किसी भी तरह की खराबी या मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। यदि वह 30 दिनों तक सुधार नहीं करवाता, तो किराएदार खुद मरम्मत करा सकता है और खर्च को किराए में एडजस्ट कर सकता है। इससे घरों की खराब स्थिति को लेकर किराएदारों की होने वाली परेशानी दूर होगी।
सरकार ने पहली बार ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट को अनिवार्य करके विवादों की जड़ पर प्रहार किया है। अब रेंट एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर डिजिटल स्टैंप और ऑनलाइन रजिस्टर्ड दस्तावेज उपलब्ध कराना जरूरी होगा। इससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या दबाव बनाने की गुंजाइश कम हो जाएगी।
सबसे बड़ा बदलाव सिक्योरिटी डिपॉजिट में किया गया है। अब मकान मालिक दो महीने से अधिक का सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले पाएंगे, जबकि कमर्शियल संपत्तियों के लिए यह सीमा छह महीने तय की गई है। यदि कोई मकान मालिक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता, तो राज्यों के हिसाब से पांच हजार रुपये से शुरू होने वाला जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा मकान मालिक किराएदार के कमरे में तभी प्रवेश कर सकता है, जब वह कम से कम 24 घंटे पहले लिखित सूचना दे।
लेकिन सबसे बड़ी राहत यह है कि अब किराएदार को घर से निकालना आसान नहीं होगा। किसी भी परिस्थिति में मकान मालिक अपने स्तर पर किराएदार को नहीं हटा सकता। यह अधिकार सिर्फ Renter Tribunal के पास होगा। अगर मकान मालिक जबरन निकालने, धमकाने, बिजली–पानी काटने या किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Rent Agreement Rules 2025 ने किराए पर रहने वाले करोड़ों लोगों को नई सुरक्षा, नई राहत और नए भरोसे का एहसास दिलाया है। यह कदम न सिर्फ किराएदारों को सशक्त करेगा, बल्कि रेंट सिस्टम को भी ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बनाएगा। अब किराए पर रहना मजबूरी नहीं, बल्कि सुरक्षित और नियमों से संचालित व्यवस्था का हिस्सा होगा। -

PMO का नया नाम हुआ ‘सेवातीर्थ’, यहां सबकुछ होगा हाईटेक, मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला…
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर अब सेवातीर्थ कर दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) जल्द ही साउथ ब्लॉक के अपने पुराने दफ्तर से निकलकर नए ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो जाएगा। यह बड़ा बदलाव दशकों बाद हो रहा है। नया PMO ‘सेवा तीर्थ-1’ से काम करेगा, जो एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में बनी तीन नई आधुनिक इमारतों में से एक है।
इसी कॉम्प्लेक्स की ‘सेवा तीर्थ-2’ और ‘सेवा तीर्थ-3’ इमारतों में कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) का ऑफिस होगा। यह शिफ्टिंग शुरू हो चुकी है और 14 अक्टूबर को कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों के साथ ‘सेवा तीर्थ-2’ में एक अहम मीटिंग भी की थी। यह नया कॉम्प्लेक्स सरकारी कामकाज को और तेज बनाएगा और भारत सरकार के काम करने के तरीके में एक नया अध्याय लिखेगा।
जानें ‘सेवा तीर्थ’ से जुड़ी बड़ी बातें
यह नया ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स वायु भवन के पास एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में बनाया गया है। इसमें तीन शानदार इमारतें हैं। इनमें से पहली इमारत, ‘सेवा तीर्थ-1’, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नया घर बनेगी। यह साउथ ब्लॉक से दशकों बाद हो रहा एक बड़ा बदलाव है।
बाकी दो इमारतें, ‘सेवा तीर्थ-2’ और ‘सेवा तीर्थ-3’, भी इसी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा हैं। ‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सेक्रेटेरिएट का दफ्तर होगा। यह वो जगह है जहां सरकार के बड़े फैसले लिए जाते हैं। ‘सेवा तीर्थ-3’ में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) का ऑफिस होगा। NSA देश की सुरक्षा से जुड़े अहम मामलों को देखते हैं।
यह शिफ्टिंग का काम अब शुरू हो गया है। हाल ही में, 14 अक्टूबर को, कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने एक महत्वपूर्ण मीटिंग की थी। इस मीटिंग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे। यह मीटिंग ‘सेवा तीर्थ-2’ में हुई थी, जो दिखाता है कि काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
यह नया ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स बहुत आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां सब कुछ हाई-टेक होगा। इससे सरकारी कामकाज में और भी तेजी आएगी। यानी, फाइलें जल्दी निपटेंगी और फैसले भी तेजी से होंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय का साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ में जाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह सिर्फ एक जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार के काम करने के तरीके में एक नया अध्याय शुरू करेगा। यह दिखाता है कि सरकार आधुनिकता की ओर बढ़ रही है और कामकाज को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।